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America-Israel का Iran पर हमला, कई शहरों में जोरदार धमाके

America-Israel का Iran पर हमला, कई शहरों में जोरदार धमाके

America-Israel ने ईरान के कई शहरों पर हवाई हमले किए हैं। देर रात हुए इन हमलों के बाद कई इलाकों में जोरदार धमाकों की आवाज़ सुनी गई। स्थानीय लोगों के अनुसार, अचानक हुए धमाकों से अफरा-तफरी मच गई और लोग घरों से बाहर निकल आए। सूत्रों के मुताबिक, हमलों के बाद ईरान के सुप्रीम लीडर Ali Khamenei को एहतियातन सुरक्षित स्थान पर भेज दिया गया है। हालांकि ईरानी सरकार की ओर से अभी तक विस्तृत आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। बातचीत के बीच हमला यह हमला ऐसे समय में हुआ है जब United States और Iran के बीच परमाणु कार्यक्रम और प्रतिबंधों को लेकर बातचीत जारी थी। विशेषज्ञों का मानना है कि इस हमले से वार्ता प्रक्रिया पर गंभीर असर पड़ सकता है। दूसरी ओर, Israel पहले भी ईरान पर परमाणु हथियार विकसित करने के आरोप लगाता रहा है। इजराइल का कहना है कि वह अपनी सुरक्षा से समझौता नहीं करेगा। आम लोगों में डर और चिंता हमलों के बाद प्रभावित शहरों में रहने वाले आम नागरिकों के बीच डर का माहौल है। सोशल मीडिया पर साझा किए गए वीडियो में आसमान में धुआं और तेज धमाकों की आवाजें सुनी जा सकती हैं। लोग अपने परिवारों की सुरक्षा को लेकर चिंतित हैं। मध्य-पूर्व में पहले से ही कई मोर्चों पर तनाव चल रहा है। ऐसे में इस नए हमले ने वैश्विक स्तर पर चिंता बढ़ा दी है। अंतरराष्ट्रीय समुदाय ने सभी पक्षों से संयम बरतने और शांति की दिशा में कदम उठाने की अपील की है। क्या आगे बढ़ेगा युद्ध? विशेषज्ञों का मानना है कि अगर स्थिति जल्द नियंत्रित नहीं हुई तो यह संघर्ष बड़े क्षेत्रीय युद्ध में बदल सकता है। फिलहाल पूरी दुनिया की नजरें मध्य-पूर्व पर टिकी हैं। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Kolkata

Kolkata Earthquake दोपहर 1:22 बजे महसूस हुए 5.0 के झटके, प्रशासन अलर्ट

गुरुवार दोपहर अचानक आए भूकंप के झटकों ने कोलकाता (Kolkata) शहर को हिला दिया। रिक्टर स्केल पर इसकी तीव्रता करीब 5.0 मापी गई। झटके इतने तेज थे कि लोग घबराकर अपने घरों, ऑफिस और दुकानों से बाहर निकल आए। कुछ मिनटों के लिए सड़कों पर अफरा-तफरी जैसा माहौल बन गया। दोपहर 1:22 बजे महसूस हुए झटके जानकारी के मुताबिक, दोपहर करीब 1:22 बजे शहर के अलग-अलग इलाकों में कंपन महसूस किया गया। ऊंची इमारतों में रहने और काम करने वाले लोगों ने बताया कि पंखे और लाइटें हिलने लगीं, खिड़कियां खड़खड़ाईं और फर्श में हल्का कंपन साफ महसूस हुआ। सॉल्ट लेक, पार्क स्ट्रीट, हावड़ा और न्यू टाउन जैसे इलाकों में लोग तुरंत सीढ़ियों से नीचे उतरते दिखाई दिए। कई दफ्तरों में कर्मचारियों को एहतियातन बाहर निकाला गया। स्कूलों और व्यावसायिक इमारतों में भी कुछ समय के लिए काम रोक दिया गया। आसपास के इलाकों में भी असर भूकंप का असर सिर्फ कोलकाता तक सीमित नहीं रहा। पश्चिम बंगाल के अन्य हिस्सों में भी हल्के झटके महसूस किए गए। हालांकि अब तक किसी बड़े नुकसान या हताहत की खबर नहीं है। प्रशासन ने स्थिति पर नजर बनाए रखी है और लोगों से शांति बनाए रखने की अपील की है। क्या कहता है भूकंप विज्ञान विभाग? राष्ट्रीय भूकंप विज्ञान केंद्र के शुरुआती आंकड़ों के अनुसार, यह मध्यम तीव्रता का भूकंप था। विशेषज्ञों का कहना है कि पूर्वी भारत के कुछ हिस्से भूकंपीय दृष्टि से संवेदनशील हैं, इसलिए इस तरह के झटके समय-समय पर महसूस किए जा सकते हैं। लोगों के चेहरे पर दिखी घबराहट भूकंप के दौरान सबसे ज्यादा असर लोगों की भावनाओं पर दिखा। एक आईटी कंपनी में काम करने वाले कर्मचारी ने बताया, “पहले लगा चक्कर आ रहा है, फिर महसूस हुआ कि पूरी बिल्डिंग हिल रही है।” वहीं, एक गृहिणी ने कहा कि उन्होंने तुरंत बच्चों को लेकर घर के बाहर सुरक्षित जगह पर शरण ली। हालांकि झटके कुछ ही सेकंड तक रहे, लेकिन उन्होंने शहरवासियों को एक बार फिर प्रकृति की ताकत का एहसास करा दिया। फिलहाल स्थिति सामान्य है, लेकिन प्रशासन और आपदा प्रबंधन टीमें अलर्ट पर हैं। कोलकाता के लोगों के लिए यह दोपहर कुछ मिनटों की दहशत जरूर लेकर आई, मगर राहत की बात है कि किसी बड़े नुकसान की खबर सामने नहीं आई है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Droupadi Murmu

राष्ट्रपति Droupadi Murmu ने Fighter Helicopter HAL Prachand में भरी ऐतिहासिक उड़ान बोलीं जय हिंद

भारत के लिए गर्व का एक ऐतिहासिक क्षण तब बना, जब राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू (Droupadi Murmu) ने स्वदेश में विकसित फाइटर हेलिकॉप्टर HAL प्रचंड में उड़ान भरी। वह इस अत्याधुनिक लड़ाकू हेलिकॉप्टर में उड़ान भरने वाली देश की पहली राष्ट्रपति बन गईं। यह केवल एक औपचारिक उड़ान नहीं थी, बल्कि भारतीय सशस्त्र बलों के प्रति सम्मान और देश की बढ़ती रक्षा ताकत का प्रतीक भी थी। उड़ान के दौरान राष्ट्रपति मुर्मू पूरी आत्मविश्वास के साथ कॉकपिट में नजर आईं। लैंडिंग के बाद उन्होंने देशवासियों और जवानों को संबोधित करते हुए कहा कि भारत के वीर सैनिक कठिन से कठिन परिस्थितियों में भी देश की रक्षा के लिए हमेशा तैयार रहते हैं। उन्होंने गर्व से कहा, “मुझे हमारे सैनिकों पर पूरा विश्वास है। जय हिंद, जय भारत।” उनके इन शब्दों ने पूरे देश में उत्साह और भावनात्मक जुड़ाव पैदा किया। क्या है HAL Prachand Fighter Helicopter की खासियत? HAL प्रचंड (Light Combat Helicopter) पूरी तरह स्वदेशी तकनीक से तैयार किया गया है। इसे खास तौर पर ऊंचाई वाले क्षेत्रों, जैसे लद्दाख और सीमावर्ती इलाकों में संचालन के लिए डिजाइन किया गया है। Droupadi Murmu की यह उड़ान ‘आत्मनिर्भर भारत’ की दिशा में भारत की मजबूत होती रक्षा क्षमताओं का सशक्त संदेश भी है। इससे यह स्पष्ट होता है कि देश न केवल तकनीकी रूप से आगे बढ़ रहा है, बल्कि नेतृत्व भी सशस्त्र बलों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़ा है। यह पल केवल एक खबर नहीं, बल्कि हर भारतीय के लिए गर्व और आत्मविश्वास का प्रतीक बन गया है। राष्ट्रपति का यह कदम आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा और देशभक्ति की भावना को और मजबूत करता है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Delhi

Delhi Liquor Policy Verdict दिल्ली शराब नीति केस में Kejriwal और Sisodia बरी

दिल्ली (Delhi) की बहुचर्चित 2021-22 आबकारी नीति (Delhi Liquor Policy) से जुड़े CBI केस में बड़ा कानूनी फैसला सामने आया है। राउज़ एवेन्यू कोर्ट ने पूर्व मुख्यमंत्री Arvind Kejriwal और पूर्व उपमुख्यमंत्री Manish Sisodia को आरोपों से बरी कर दिया। अदालत ने साफ कहा कि जांच एजेंसी की ओर से दाखिल चार्जशीट में पर्याप्त और ठोस सबूत नहीं हैं, इसलिए आरोप तय नहीं किए जा सकते। यह फैसला न सिर्फ कानूनी, बल्कि राजनीतिक रूप से भी बेहद अहम माना जा रहा है। कोर्ट ने क्या कहा? अदालत ने अपने आदेश में टिप्पणी की कि किसी भी व्यक्ति के खिलाफ आपराधिक मुकदमा चलाने के लिए ठोस और विश्वसनीय साक्ष्य जरूरी होते हैं। केवल आरोप या आशंका के आधार पर आरोप तय नहीं किए जा सकते। मामले की जांच Central Bureau of Investigation (CBI) ने की थी। कोर्ट के अनुसार, चार्जशीट में प्रस्तुत दस्तावेज और गवाहियां आरोप सिद्ध करने के लिए पर्याप्त नहीं थीं। इसी आधार पर दोनों नेताओं को राहत दी गई। क्या था Delhi Liquor Policy Case? दिल्ली सरकार की 2021-22 की नई शराब नीति को लागू करने के बाद आरोप लगे थे कि लाइसेंस वितरण और कमीशन संरचना में कथित अनियमितताएं हुईं। विपक्ष ने दावा किया था कि इससे सरकारी खजाने को नुकसान पहुंचा और कुछ निजी कंपनियों को अनुचित लाभ मिला। इस मामले में Aam Aadmi Party (AAP) के कई नेताओं के नाम सामने आए थे। राज्यसभा सांसद Sanjay Singh और पार्टी से जुड़े Vijay Nair भी जांच के दायरे में आए थे। समय-समय पर गिरफ्तारी, पूछताछ और जमानत की खबरों ने इस केस को लगातार सुर्खियों में बनाए रखा। फैसले के बाद भावुक दिखे केजरीवाल फैसला आने के बाद अरविंद केजरीवाल मीडिया के सामने आए। उनकी आवाज में भावनाएं साफ झलक रही थीं। उन्होंने कहा कि उन्होंने “ज़िंदगीभर ईमानदारी की कमाई की है” और सच की लड़ाई लड़ी है। उनका यह बयान समर्थकों के बीच तेजी से वायरल हुआ। कई कार्यकर्ताओं ने इसे “सत्य की जीत” बताया, तो विरोधी दलों ने फैसले पर अलग राय रखी। आगे क्या होगा? | What Next? कानूनी जानकारों का मानना है कि यदि जांच एजेंसी चाहे तो उच्च अदालत में अपील कर सकती है। हालांकि फिलहाल यह फैसला केजरीवाल और सिसोदिया के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है। राजनीतिक रूप से भी इसका असर दिखना तय है, खासकर ऐसे समय में जब राष्ट्रीय राजनीति में आरोप-प्रत्यारोप का दौर तेज है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Shankaracharya Case : मेडिकल रिपोर्ट में नाबालिगों से यौन शोषण की पुष्टि का दावा

Shankaracharya Case : मेडिकल रिपोर्ट में नाबालिगों से यौन शोषण की पुष्टि का दावा

ज्योतिर्मठ के Shankaracharya स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती पर नाबालिगों के साथ यौन शोषण के आरोप लगे हैं। ताजा घटनाक्रम में दावा किया जा रहा है कि मेडिकल रिपोर्ट में शोषण की पुष्टि हुई है। पीड़ित बताए जा रहे एक बटुक (वेद अध्ययन करने वाला छात्र) ने आरोप लगाया है कि उसके साथ गलत व्यवहार किया गया। उसने कहा कि यह घटना उसके लिए मानसिक रूप से बेहद पीड़ादायक रही। मामले के सामने आने के बाद धार्मिक और सामाजिक हलकों में हलचल मच गई है। क्या है पूरा मामला? जानकारी के मुताबिक, कुछ समय पहले नाबालिग छात्रों ने आरोप लगाए थे कि उनके साथ अनुचित व्यवहार किया गया। अब आई मेडिकल रिपोर्ट के आधार पर दावा किया जा रहा है कि शोषण की पुष्टि हुई है। हालांकि, मामले की जांच अभी जारी है और अंतिम सच्चाई अदालत और जांच एजेंसियों की रिपोर्ट के बाद ही स्पष्ट होगी। पीड़ित का बयान एक पीड़ित बटुक ने मीडिया से बातचीत में कहा कि वह लंबे समय तक डर और दबाव में रहा। उसने आरोप लगाया कि उसे चुप रहने के लिए मानसिक रूप से प्रताड़ित किया गया। परिवार का कहना है कि उन्हें न्याय पर भरोसा है और वे चाहते हैं कि सच्चाई सामने आए। जांच एजेंसियां सक्रिय मामले की गंभीरता को देखते हुए संबंधित जांच एजेंसियां सक्रिय हो गई हैं। पुलिस ने बयान दर्ज किए हैं और मेडिकल रिपोर्ट को केस डायरी में शामिल किया गया है। यदि आरोप साबित होते हैं तो यह धार्मिक जगत के लिए एक बड़ा झटका होगा। समाज में बढ़ी चिंता यह मामला इसलिए भी संवेदनशील है क्योंकि इसमें धार्मिक संस्था और नाबालिग छात्र शामिल हैं। समाज के कई वर्गों ने निष्पक्ष जांच और सख्त कार्रवाई की मांग की है। फिलहाल, सभी की नजर जांच प्रक्रिया पर टिकी हुई है। सच्चाई सामने आने के बाद ही आगे की कार्रवाई तय होगी। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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PM Modi

Israel Tour PM Modi ने Yad Vashem में दी श्रद्धांजलि, Defence Deal पर बड़ी चर्चा

होलोकॉस्ट स्मारक Yad Vashem में श्रद्धांजलि इज़राइल दौरे पर पहुंचे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Modi) ने Jerusalem स्थित ऐतिहासिक होलोकॉस्ट स्मारक Yad Vashem में नाजी शासन के दौरान मारे गए लगभग 60 लाख यहूदियों को भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की। यह स्थल द्वितीय विश्व युद्ध के उस दर्दनाक इतिहास की याद दिलाता है, जब मानवता ने अपने सबसे कठिन दौर का सामना किया था। होलोकॉस्ट के दौरान Adolf Hitler के नेतृत्व में नाजी शासन ने लाखों निर्दोष लोगों का सुनियोजित नरसंहार किया था। प्रधानमंत्री ने स्मारक पर पुष्पांजलि अर्पित कर मौन रखा और शांति व सह-अस्तित्व का संदेश दिया। President Isaac Herzog से अहम मुलाकात अपनी यात्रा के दौरान PM Modi ने इज़राइल के राष्ट्रपति Isaac Herzog से मुलाकात की। दोनों नेताओं के बीच द्विपक्षीय संबंधों को और मजबूत बनाने पर विस्तार से चर्चा हुई। बैठक में रक्षा सहयोग, कृषि तकनीक, जल प्रबंधन, साइबर सुरक्षा और इनोवेशन जैसे क्षेत्रों में साझेदारी बढ़ाने पर जोर दिया गया। Defence Deal और Strategic Partnership पर फोकस सूत्रों के अनुसार, भारत और Israel के बीच संभावित Defence Deal को लेकर भी सकारात्मक बातचीत हुई है। पिछले कुछ वर्षों में दोनों देशों के बीच रक्षा और रणनीतिक सहयोग लगातार मजबूत हुआ है। भारत के लिए इज़राइल आधुनिक रक्षा तकनीक का अहम साझेदार रहा है, जबकि इज़राइल भारत को एक विश्वसनीय और दीर्घकालिक सहयोगी के रूप में देखता है। भावनात्मक और कूटनीतिक रूप से अहम दौरा PM Modi की यह यात्रा केवल एक औपचारिक राजनयिक कार्यक्रम नहीं रही, बल्कि ऐतिहासिक संवेदनाओं से जुड़ा एक भावनात्मक क्षण भी साबित हुई। होलोकॉस्ट स्मारक पर उनकी उपस्थिति ने यह संदेश दिया कि इतिहास की त्रासदियों को याद रखना और उनसे सीख लेकर भविष्य को बेहतर बनाना ही सच्ची श्रद्धांजलि है। इस दौरे से भारत-इज़राइल संबंधों को नई ऊर्जा मिली है और आने वाले समय में दोनों देशों के बीच सहयोग और गहरा होने की उम्मीद जताई जा रही है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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BJP

India AI Summit विवाद BJP का दावा Congress ने पैसे देकर कराई Online बदनामी

भारत में आयोजित India AI Impact Summit 2026 को लेकर सियासत तेज हो गई है। एक तरफ सरकार इस ग्लोबल टेक इवेंट को भारत की डिजिटल ताकत का प्रतीक बता रही है, तो वहीं दूसरी ओर यह आयोजन अब राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप का केंद्र बन चुका है। सत्तारूढ़ दल भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने कांग्रेस पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा है कि पार्टी ने कुछ सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर्स को पैसे का ऑफर देकर AI समिट के खिलाफ नकारात्मक माहौल बनाने की कोशिश की। भाजपा नेताओं का दावा है कि इस संबंध में कुछ वीडियो और चैट स्क्रीनशॉट सामने आए हैं, जिनमें कथित तौर पर पैसों के बदले समिट की आलोचना करने की बात कही गई है। BJP का आरोप क्या है? भाजपा प्रवक्ताओं के अनुसार, कुछ इन्फ्लुएंसर्स को मैसेज भेजकर कहा गया कि वे AI Summit से जुड़ी कमियों को बढ़ा-चढ़ाकर पेश करें। आरोप है कि इसके बदले उन्हें तय रकम देने का प्रस्ताव रखा गया। पार्टी का कहना है कि यह केवल सरकार की आलोचना नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारत की छवि को नुकसान पहुँचाने की कोशिश है। हालांकि इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि अब तक नहीं हुई है। मामले को लेकर आधिकारिक जांच या किसी एजेंसी की पुष्टि सामने नहीं आई है। Youth Congress Protest से बढ़ा विवाद विवाद तब और गहरा गया जब AI समिट के दौरान Indian Youth Congress के कुछ कार्यकर्ताओं ने प्रदर्शन किया। बताया गया कि प्रदर्शन के दौरान कुछ कार्यकर्ताओं ने शर्ट उतारकर नारेबाजी की। पुलिस ने इसे सुरक्षा नियमों का उल्लंघन बताया और कई लोगों को हिरासत में लिया। भाजपा ने इस प्रदर्शन को “सुनियोजित” करार देते हुए कहा कि यह आयोजन की गरिमा को ठेस पहुँचाने के लिए किया गया कदम था। वहीं कांग्रेस का कहना है कि यह लोकतांत्रिक विरोध का हिस्सा था और सरकार को आलोचना स्वीकार करनी चाहिए। Congress का पक्ष कांग्रेस नेताओं ने भाजपा के आरोपों को निराधार बताया है। उनका कहना है कि पार्टी का किसी भी इन्फ्लुएंसर को पैसे देने से कोई लेना-देना नहीं है। कांग्रेस का तर्क है कि जब भी सरकार की नीतियों पर सवाल उठते हैं, तो सत्ता पक्ष उसे देश विरोधी करार दे देता है। पार्टी नेताओं ने यह भी कहा कि AI Summit जैसे बड़े आयोजन पर सवाल उठाना या प्रदर्शन करना लोकतंत्र का हिस्सा है और इसे देश की छवि से जोड़कर देखना सही नहीं है। Political Narrative और Public Perception AI Summit, जिसे भारत की तकनीकी प्रगति और स्टार्टअप इकोसिस्टम के लिए अहम माना जा रहा था, अब राजनीतिक बहस का विषय बन गया है। आम नागरिकों के बीच भी इस मुद्दे को लेकर अलग-अलग राय देखने को मिल रही है। कुछ लोगों का मानना है कि अंतरराष्ट्रीय मंच पर ऐसे विवाद देश की छवि पर असर डाल सकते हैं। वहीं कई लोग इसे लोकतांत्रिक व्यवस्था का स्वाभाविक हिस्सा बताते हैं, जहां सरकार और विपक्ष के बीच मतभेद खुलकर सामने आते हैं। आगे क्या? फिलहाल यह मामला राजनीतिक बयानबाजी तक सीमित है। यदि आरोपों से जुड़े वीडियो और सबूतों की जांच होती है, तो स्थिति और स्पष्ट हो सकती है। तब तक यह मुद्दा सियासी गर्मी बढ़ाता रहेगा। AI Summit Controversy अब केवल एक टेक इवेंट की खबर नहीं रह गई है, बल्कि यह इस बात का उदाहरण बन गई है कि डिजिटल युग में राजनीति, सोशल मीडिया और पब्लिक ओपिनियन किस तरह एक-दूसरे से जुड़ चुके हैं। आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या इस मामले में कोई आधिकारिक जांच होती है या यह विवाद भी भारतीय राजनीति की कई बहसों की तरह समय के साथ ठंडा पड़ जाएगा। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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NCERT

Education vs Judiciary Row NCERT बदलाव पर Supreme Court बोला– सिर्फ माफी काफी नहीं

देश में शिक्षा व्यवस्था को लेकर एक बार फिर बहस तेज हो गई है। इस बार मामला स्कूल की किताबों और उनमें किए गए बदलावों से जुड़ा है। हाल ही में National Council of Educational Research and Training (NCERT) द्वारा कुछ पाठ्यपुस्तकों में संशोधन किए जाने के बाद विवाद खड़ा हो गया। मामला अदालत तक पहुंचा और सुनवाई के दौरान Supreme Court of India ने कड़ी टिप्पणी करते हुए कहा कि अगर न्यायपालिका की छवि को नुकसान पहुंचाने की कोशिश हुई है तो “सिर्फ माफी काफी नहीं” मानी जाएगी। क्या है पूरा मामला? NCERT ने हाल के समय में पाठ्यक्रम को “रैशनलाइज” करने और छात्रों पर पढ़ाई का बोझ कम करने के उद्देश्य से कुछ अध्यायों और अंशों में बदलाव किए। इन बदलावों में इतिहास, लोकतांत्रिक संस्थाओं और न्यायपालिका से जुड़े कुछ हिस्सों को हटाया या संक्षिप्त किया गया। यहीं से विवाद शुरू हुआ। कई शिक्षाविदों और सामाजिक संगठनों ने सवाल उठाया कि क्या इन संशोधनों से छात्रों को देश की संवैधानिक संस्थाओं की भूमिका की पूरी और संतुलित जानकारी मिल पाएगी? सुप्रीम कोर्ट की सख्त प्रतिक्रिया सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि शिक्षा सामग्री बेहद संवेदनशील विषय है। कोर्ट की टिप्पणी का सार यह था कि अगर किसी संस्था—खासकर न्यायपालिका—को बदनाम करने की मंशा से बदलाव किए गए हैं, तो केवल माफी मांग लेना पर्याप्त नहीं होगा। अदालत ने यह भी संकेत दिया कि शिक्षा प्रणाली में पारदर्शिता और जवाबदेही बेहद जरूरी है, क्योंकि स्कूल की किताबें ही छात्रों की सोच और समझ की नींव रखती हैं। NCERT का पक्ष क्या है? NCERT का कहना है कि यह पूरी प्रक्रिया शैक्षणिक समीक्षा का हिस्सा थी। संस्था के अनुसार: हालांकि, आलोचकों का मानना है कि पाठ्यपुस्तकों में किए गए बदलावों का प्रभाव लंबे समय तक छात्रों की समझ पर पड़ सकता है। क्यों महत्वपूर्ण है यह विवाद? यह मुद्दा केवल एक अध्याय या किताब तक सीमित नहीं है। यह बहस तीन बड़े सवालों को सामने लाती है: जब न्यायपालिका जैसी संस्था इस पर टिप्पणी करती है, तो मामला और गंभीर हो जाता है। शिक्षा और समाज पर संभावित असर स्कूल की किताबें सिर्फ परीक्षा पास करने का माध्यम नहीं होतीं। वे समाज, संविधान और लोकतंत्र की समझ विकसित करती हैं। ऐसे में अगर किसी भी बदलाव को लेकर संदेह पैदा होता है, तो उसका असर भरोसे पर पड़ता है—चाहे वह छात्रों का हो, अभिभावकों का या शिक्षकों का। इस पूरे विवाद ने यह साफ कर दिया है कि शिक्षा नीति में किया गया हर छोटा बदलाव भी व्यापक सामाजिक और संवैधानिक चर्चा का विषय बन सकता है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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मोदी

PM मोदी की Israel यात्रा Defense, Technology और Trade में नई दिशा

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी 25-26 फरवरी 2026 को इज़राइल के लिए दो दिवसीय राजकीय दौरे पर गए। इस यात्रा को इज़रायली मीडिया ने “Strategic Reset” और “Landmark Moment” बताया है, यानी इसे भारत-इज़राइल संबंधों में एक महत्वपूर्ण और ऐतिहासिक मोड़ के रूप में देखा जा रहा है। यह मोदी का इज़राइल में दूसरा दौरा है, पिछला दौरा 2017 में हुआ था। इज़राइल में मोदी का गर्मजोशी से स्वागत इज़राइल में पीएम मोदी का स्वागत बेहद भव्य और रंगीन रहा। सड़कों पर “Namaste” के नारे लगे और भारतीय तिरंगे की रोशनी से जगह-जगह इमारतें जगमगा उठीं। संसद भवन कनेसट को भी भारतीय तिरंगे के रंगों में रोशन किया गया। मीडिया ने इस स्वागत को भारत और इज़राइल के बीच मित्रता और साझा सम्मान का प्रतीक बताया। Strategic Reset: क्या है खास? “Strategic Reset” का मतलब है कि भारत और इज़राइल अब अपने रिश्तों को सिर्फ औपचारिक दोस्ती तक सीमित नहीं रखेंगे। इस यात्रा के जरिए दोनों देशों के बीच रक्षा, सुरक्षा, तकनीकी नवाचार, निवेश और व्यापार सहयोग को नई ऊँचाइयों तक ले जाने की योजना है। यानी यह दौरा केवल औपचारिकता नहीं है, बल्कि दोनों देशों के बीच विशेष रणनीतिक साझेदारी (Special Strategic Partnership) का मार्ग प्रशस्त करने वाला कदम है। मोदी का कार्यक्रम और ऐतिहासिक बातें पीएम मोदी इज़राइली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू और राष्ट्रपति इसहाक हर्जोग से मुलाकात करेंगे। वे कनेसट (इज़राइली संसद) को संबोधित करेंगे, और इस तरह मोदी पहले भारतीय प्रधानमंत्री होंगे, जिन्होंने यह अवसर प्राप्त किया। इसके अलावा मोदी याद वशेम (Holocaust Memorial) का दौरा भी करेंगे, जो दोनों देशों के साझा इतिहास और सम्मान को दर्शाता है। रक्षा और तकनीक के क्षेत्र में कई महत्वपूर्ण समझौतों की संभावनाएँ भी हैं। क्यों कहा जा रहा है ‘New Phase’? इज़रायली मीडिया और विशेषज्ञ मानते हैं कि यह दौरा भारत-इज़राइल रिश्तों में नए अध्याय (New Phase) की शुरुआत है। पिछली यात्राओं के मुकाबले अब सहयोग पहले से कहीं अधिक गहरा और व्यापक है। रक्षा, तकनीक, व्यापार और वैश्विक सहयोग के क्षेत्रों में यह एक ऐतिहासिक मोड़ साबित हो सकता है। राजनीतिक और वैश्विक प्रभाव इस दौरे से क्षेत्रीय राजनीति और सुरक्षा पर भी असर पड़ सकता है। इज़राइल के प्रधानमंत्री ने इसे स्थिरता और साझेदारी के प्रतीक के रूप में बताया। वहीं कुछ आलोचक, विशेषकर भारत में विपक्ष, यह कहते हैं कि भारत को फिलीस्तीन संकट जैसे मानवीय मुद्दों पर भी ध्यान देना चाहिए। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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NCERT

Education vs Judiciary Debate NCERT के ‘Judicial Corruption’ चैप्टर पर CJI का सख्त स्टैंड

देश की स्कूली शिक्षा और न्यायपालिका—दोनों ही लोकतंत्र के मजबूत स्तंभ माने जाते हैं। ऐसे में जब National Council of Educational Research and Training (NCERT) की एक किताब में शामिल ‘Judicial Corruption’ (ज्यूडिशियल करप्शन) चैप्टर को लेकर विवाद खड़ा हुआ, तो मामला सीधे देश की सर्वोच्च अदालत तक पहुंच गया। इस मुद्दे पर सुनवाई के दौरान भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि न्यायपालिका को बदनाम करने की इजाजत नहीं दी जा सकती। उन्होंने यह भी कहा कि मामला पहली नजर में सोचा-समझा कदम लगता है और वे स्वयं इस केस को देखेंगे। क्या है NCERT Judicial Corruption Controversy? विवाद उस अध्याय को लेकर है जिसमें न्यायिक भ्रष्टाचार से जुड़े संदर्भ और उदाहरण शामिल किए गए हैं। याचिकाकर्ताओं का आरोप है कि इस तरह की सामग्री छात्रों के मन में न्यायपालिका की छवि को लेकर नकारात्मक प्रभाव डाल सकती है। उनका कहना है कि स्कूल स्तर पर पढ़ाई जाने वाली किताबों में संवैधानिक संस्थाओं के बारे में संतुलित और जिम्मेदार भाषा होनी चाहिए। दूसरी तरफ कुछ शिक्षा विशेषज्ञों का मत है कि लोकतंत्र में पारदर्शिता और संस्थाओं की आलोचनात्मक समझ भी जरूरी है। उनके अनुसार, यदि विषय तथ्यों और ऐतिहासिक संदर्भों के साथ रखा गया है, तो इसे शिक्षा के दायरे में ही देखा जाना चाहिए, न कि संस्थान के खिलाफ अभियान के रूप में। CJI का सख्त रुख सुनवाई के दौरान CJI ने कहा कि न्यायपालिका की साख और विश्वसनीयता पर आंच नहीं आने दी जा सकती। उन्होंने संकेत दिया कि अगर सामग्री भ्रामक या एकतरफा पाई गई तो अदालत जरूरी निर्देश दे सकती है। CJI का खुद इस मामले को देखने का फैसला बताता है कि सुप्रीम कोर्ट इस विवाद को बेहद गंभीरता से ले रहा है। Education vs Institution Reputation: बड़ा सवाल यह मामला केवल एक अध्याय तक सीमित नहीं है। यह उस बड़े सवाल को सामने लाता है—क्या पाठ्यपुस्तकों में संवैधानिक संस्थाओं की आलोचनात्मक चर्चा होनी चाहिए? अगर हां, तो उसकी सीमा क्या हो? एक ओर अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता है, दूसरी ओर संस्थाओं की गरिमा। संतुलन कहां बनेगा, यह अब अदालत के फैसले से तय होगा। आगे क्या हो सकता है? आगामी सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट यह तय कर सकता है कि: देशभर के अभिभावक, शिक्षक और छात्र अब इस फैसले का इंतजार कर रहे हैं। क्योंकि यह मामला केवल एक चैप्टर का नहीं, बल्कि शिक्षा व्यवस्था और न्यायपालिका के बीच भरोसे के रिश्ते का भी है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Sugar

Sugar Rate Hike: त्योहारों से पहले चीनी के दाम बढ़े, Blinkit-Swiggy पर खरीदना हुआ Limited

चीनी (Sugar), जो हर घर की रसोई की रोजमर्रा की जरूरत है, इन दिनों लोगों की जेब पर भारी पड़ रही है। पिछले कुछ हफ्तों में चीनी के दाम तेजी से बढ़े हैं। इसी बीच Blinkit, Swiggy Instamart, BigBasket और D-Mart जैसे रिटेल और क्विक-कॉमर्स प्लेटफॉर्म्स पर चीनी की खरीद को लेकर लिमिट लगाई गई है। कई जगहों पर ग्राहक एक बार में 3 से 5 किलो तक ही चीनी खरीद पा रहे हैं। यानी अगर घर में ज्यादा मात्रा में चीनी खरीदने की जरूरत है, तो एक साथ बड़ी खरीदारी करना अब आसान नहीं है। Sugar Price: एक महीने में तेजी से बढ़े दाम Sugar की कीमतों में हालिया तेजी ने आम परिवारों की चिंता बढ़ा दी है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, जुलाई में चीनी की औसत खुदरा कीमत करीब ₹48 प्रति किलो के आसपास थी, जो अगस्त में बढ़कर ₹55 से ऊपर पहुंच गई। इसके बाद कुछ बाजारों में कीमतें और ऊपर गई हैं। शहर और बाजार के हिसाब से कीमतों में अंतर जरूर है, लेकिन जिस रफ्तार से दाम बढ़े हैं, उसका असर घर के मासिक बजट पर साफ दिखाई दे रहा है। Online Grocery पर क्यों लगाई गई खरीद Limit? Blinkit और Swiggy Instamart जैसे क्विक-कॉमर्स प्लेटफॉर्म्स पर खरीदारी की लिमिट लगाए जाने के पीछे मुख्य वजह उपलब्ध स्टॉक को संतुलित रखना मानी जा रही है। त्योहारी सीजन में चीनी की मांग अचानक बढ़ जाती है। मिठाइयों से लेकर घर में बनने वाले पकवानों तक, इस दौरान चीनी की खपत सामान्य दिनों की तुलना में बढ़ जाती है। ऐसे में कंपनियां ज्यादा मात्रा में खरीदारी को रोककर स्टॉक को ज्यादा ग्राहकों तक पहुंचाने की कोशिश कर रही हैं। हालांकि, यह लिमिट हर जगह एक जैसी नहीं है। कुछ स्थानों पर 5 किलो तक की खरीद की अनुमति है, जबकि कुछ जगहों पर इससे कम मात्रा की सीमा दिखाई दे रही है। चीनी महंगी होने की क्या है वजह? चीनी के दाम बढ़ने के पीछे कई कारण सामने आ रहे हैं। घरेलू उत्पादन में कमी, मौसम से जुड़ी परेशानियां, बढ़ती मांग और बाजार में स्टॉक को लेकर गतिविधियां कीमतों पर दबाव बना रही हैं। त्योहारी सीजन भी इस समय एक बड़ा फैक्टर है। रक्षाबंधन के बाद अब आने वाले त्योहारों में मिठाइयों और अन्य खाद्य पदार्थों की मांग बढ़ने की उम्मीद है। इसका सीधा असर चीनी की खपत पर पड़ सकता है। सरकार ने Duty-Free Sugar Import को दी मंजूरी बढ़ती कीमतों पर लगाम लगाने और घरेलू बाजार में सप्लाई बढ़ाने के लिए केंद्र सरकार ने 10 लाख टन कच्ची चीनी के Duty-Free Import की अनुमति दी है। सरकार का लक्ष्य बाजार में पर्याप्त उपलब्धता बनाए रखना और कीमतों पर दबाव कम करना है। इसके अलावा बड़े थोक खरीदारों के लिए चीनी का स्टॉक रखने की सीमा में भी बदलाव किया गया है। इससे बाजार में जरूरत से ज्यादा चीनी जमा करने की गतिविधियों पर रोक लगाने की कोशिश की जा रही है। आम लोगों के लिए क्या मतलब? फिलहाल इसका सबसे सीधा असर उन परिवारों पर पड़ रहा है, जो महीने का राशन एक साथ खरीदते हैं। जहां दुकानों या ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर खरीद सीमा लागू है, वहां लोगों को जरूरत के हिसाब से छोटी मात्रा में चीनी खरीदनी पड़ सकती है। दूसरी तरफ, सरकार की ओर से सप्लाई बढ़ाने के कदमों के बाद बाजार में स्थिति सामान्य होने की उम्मीद है। अगर नई चीनी समय पर बाजार में पहुंचती है और त्योहारी मांग के मुताबिक स्टॉक उपलब्ध रहता है, तो कीमतों में आगे राहत मिल सकती है। Sugar Price पर आगे रहेगी नजर चीनी के बढ़ते दाम इस समय सिर्फ घरेलू बजट का मुद्दा नहीं हैं, बल्कि आने वाले त्योहारी सीजन के लिए भी अहम हैं। सरकार, मिलों और रिटेल कंपनियों के फैसलों पर अब बाजार की नजर रहेगी। फिलहाल ग्राहकों के लिए बेहतर यही है कि जरूरत के मुताबिक ही खरीदारी करें और अलग-अलग दुकानों या ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स पर कीमतों की तुलना कर लें। आने वाले दिनों में सप्लाई की स्थिति साफ होने के साथ चीनी के दाम में भी बदलाव देखने को मिल सकता है।
Gold-Silver

Gold-Silver Price: त्योहार से पहले मिली राहत, सोना-चांदी के दाम में बड़ी गिरावट

Gold-Silver Price Today: रक्षाबंधन की खरीदारी के बीच सोना और चांदी खरीदने वालों के लिए बाजार से राहत वाली खबर आई है। 27 अगस्त 2026 को सोने और चांदी दोनों के भाव में गिरावट दर्ज की गई। 24 कैरेट सोना करीब ₹2,860 प्रति 10 ग्राम सस्ता होकर ₹1,58,477 पर आ गया। वहीं, 1 किलो चांदी का भाव ₹2,791 घटकर करीब ₹2,40,168 रह गया। त्योहार से ठीक पहले कीमतों में आई इस कमी से उन लोगों को थोड़ी राहत मिल सकती है, जो राखी के मौके पर बहन या परिवार के लिए सोने-चांदी की ज्वेलरी खरीदने का मन बना रहे हैं। Gold Price Today: सोने के भाव में ₹2,860 की गिरावट 27 अगस्त को 24 कैरेट सोने की कीमत में अच्छी-खासी गिरावट देखने को मिली। IBJA आधारित आंकड़ों के अनुसार, सोना करीब ₹2,860 प्रति 10 ग्राम टूटकर ₹1,58,477 पर पहुंच गया। वहीं, 23 कैरेट सोना करीब ₹1,57,842, 22 कैरेट सोना लगभग ₹1,45,165 और 18 कैरेट सोना करीब ₹1,18,858 प्रति 10 ग्राम के स्तर पर रहा। हालांकि, यहां एक बात ध्यान रखना जरूरी है कि शहर और ज्वेलर के हिसाब से Gold Rate थोड़ा अलग हो सकता है। ज्वेलरी खरीदते समय मेकिंग चार्ज और दूसरे शुल्क भी जुड़ते हैं। Silver Price Today: चांदी भी हुई ₹2,791 सस्ती सोने के साथ चांदी की कीमत में भी गिरावट आई है। 1 किलो चांदी का भाव ₹2,791 कम होकर करीब ₹2,40,168 पर आ गया। चांदी में पिछले दिनों तेजी देखने को मिली थी, इसलिए मौजूदा गिरावट के बावजूद इसका भाव काफी ऊंचे स्तर पर बना हुआ है। त्योहारों और शादी-ब्याह के सीजन में चांदी की मांग बढ़ने से इसकी कीमत पर भी असर पड़ सकता है। Raksha Bandhan से पहले क्यों खास है Gold-Silver Price? रक्षाबंधन के मौके पर लोग सिर्फ राखी और मिठाई ही नहीं खरीदते, बल्कि कई परिवार इस दिन सोने या चांदी की छोटी ज्वेलरी खरीदना भी पसंद करते हैं। ऐसे में त्योहार से एक दिन पहले Gold और Silver के दाम में आई गिरावट खरीदारों के लिए अच्छी खबर मानी जा रही है। अगर आप भी खरीदारी की तैयारी कर रहे हैं तो बाजार में जाने से पहले अपने शहर का ताजा रेट जरूर देख लें। ऑनलाइन दिखने वाला IBJA या बुलियन रेट और ज्वेलरी शॉप का अंतिम बिल एक जैसा होना जरूरी नहीं है। सोना खरीदते समय इन बातों का रखें ध्यान सोने की ज्वेलरी खरीदते समय केवल Gold Rate देखना काफी नहीं है। बिल बनते समय मेकिंग चार्ज, GST और अन्य शुल्क जुड़ सकते हैं। इसलिए खरीदारी से पहले ज्वेलर से पूरी कीमत का ब्रेकअप मांगना बेहतर रहेगा। साथ ही, सोने की शुद्धता के लिए BIS Hallmark जरूर जांचें। इससे आपको खरीदे जा रहे सोने की शुद्धता के बारे में भरोसा मिलता है। आगे क्या हो सकता है Gold और Silver का भाव? सोने और चांदी की कीमतों में आगे भी उतार-चढ़ाव बना रह सकता है। अंतरराष्ट्रीय बाजार, डॉलर की चाल, ब्याज दरों की उम्मीद और निवेशकों की खरीदारी जैसे कई फैक्टर कीमती धातुओं के भाव को प्रभावित करते हैं। इसलिए आज आई गिरावट को देखकर यह तय नहीं किया जा सकता कि आने वाले दिनों में कीमतें लगातार नीचे जाएंगी। बाजार की चाल बदलने में ज्यादा समय नहीं लगता। Gold-Silver Price Today का सीधा अपडेट रक्षाबंधन से पहले 24 कैरेट Gold करीब ₹2,860 सस्ता होकर ₹1,58,477 प्रति 10 ग्राम और Silver करीब ₹2,791 गिरकर ₹2,40,168 प्रति किलो पर आ गई है। अगर आप आज सोना या चांदी खरीदने जा रहे हैं, तो अंतिम खरीदारी से पहले अपने स्थानीय बाजार का लेटेस्ट रेट जरूर जांचें।
Raksha Bandhan

Raksha Bandhan 2026: राखी बांधने से पहले जान लें Bhadra का समय, ये है शुभ Muhurat

Raksha Bandhan 2026: भाई-बहन के रिश्ते में प्यार, अपनापन और थोड़ी-सी नोकझोंक हमेशा बनी रहती है। इन्हीं खूबसूरत रिश्तों को सेलिब्रेट करने वाला रक्षाबंधन इस बार 28 अगस्त 2026, शुक्रवार को मनाया जाएगा। राखी को लेकर इस बार एक सवाल काफी लोगों के मन में है—27 अगस्त या 28 अगस्त, आखिर किस दिन भाई की कलाई पर राखी बांधना शुभ रहेगा? पंचांग के अनुसार सावन पूर्णिमा 27 अगस्त की सुबह शुरू होगी और 28 अगस्त की सुबह तक रहेगी। उदया तिथि के आधार पर रक्षाबंधन 28 अगस्त को मनाया जाएगा। Raksha Bandhan 2026 Date: 27 या 28 अगस्त? रक्षाबंधन सावन मास की पूर्णिमा तिथि पर मनाया जाता है। इस साल पूर्णिमा तिथि 27 अगस्त की सुबह करीब 9 बजे के बाद शुरू होकर 28 अगस्त की सुबह करीब 9:48 बजे तक रहेगी। चूंकि 28 अगस्त को सूर्योदय के समय पूर्णिमा तिथि मौजूद रहेगी, इसलिए इसी दिन रक्षाबंधन मनाने की परंपरा रहेगी। यानी बहनें 28 अगस्त को भाई की कलाई पर राखी बांध सकती हैं। Rakhi Shubh Muhurat 2026: इस समय बांधें राखी 28 अगस्त को राखी बांधने के लिए सुबह का समय शुभ माना जा रहा है। उपलब्ध पंचांग गणना के अनुसार सुबह करीब 5:57 बजे से 9:48 बजे तक राखी बांधने का समय बताया गया है। हालांकि, शुभ मुहूर्त में शहर के सूर्योदय और स्थानीय पंचांग के अनुसार थोड़ा अंतर हो सकता है। इसलिए अगर आप किसी खास शहर में हैं, तो वहां के पंचांग से समय जरूर मिला लें। Bhadra Kaal: इस बार नहीं होगी बड़ी परेशानी रक्षाबंधन पर भद्रा का विशेष ध्यान रखा जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार भद्रा के दौरान राखी बांधना शुभ नहीं माना जाता। यही वजह है कि हर साल राखी बांधने से पहले लोग भद्रा समाप्त होने का इंतजार करते हैं। इस बार राहत की बात यह है कि 28 अगस्त को राखी बांधने के प्रमुख समय में भद्रा का प्रभाव नहीं रहेगा। ऐसे में बहनों को राखी बांधने के लिए भद्रा खत्म होने का लंबा इंतजार नहीं करना पड़ेगा। Raksha Bandhan 2026: एक नजर में पूरी जानकारी जानकारी विवरण रक्षाबंधन 28 अगस्त 2026, शुक्रवार पर्व सावन पूर्णिमा पूर्णिमा शुरुआत 27 अगस्त की सुबह पूर्णिमा समाप्त 28 अगस्त की सुबह करीब 9:48 बजे राखी बांधने का शुभ समय सुबह करीब 5:57 से 9:48 बजे तक भद्रा 28 अगस्त के प्रमुख राखी मुहूर्त में नहीं Rakhi बांधने की पूजा विधि रक्षाबंधन के दिन सुबह स्नान करके भगवान का ध्यान करें और पूजा की तैयारी करें। राखी की थाली में रोली या कुमकुम, अक्षत, दीपक, फूल, मिठाई और राखी रखें। भाई को आसन पर बैठाकर पहले तिलक लगाएं। इसके बाद अक्षत लगाकर आरती करें और शुभ मुहूर्त में उसकी कलाई पर राखी बांधें। फिर मिठाई खिलाकर भाई के सुखी और खुशहाल जीवन की कामना करें। भाई भी बहन को प्यार और सम्मान के साथ उपहार देता है और हर परिस्थिति में उसके साथ खड़े रहने का संकल्प करता है। Raksha Bandhan का असली मतलब क्या है? राखी का धागा देखने में भले ही छोटा हो, लेकिन इसके पीछे छिपी भावना बहुत बड़ी है। बचपन में एक-दूसरे से लड़ने वाले भाई-बहन जब बड़े होते हैं तो यही रिश्ता सबसे मजबूत सहारा बन जाता है। रक्षाबंधन इसी भरोसे और अपनापन को फिर से महसूस करने का दिन है। इसलिए इस बार राखी बांधते समय सिर्फ मुहूर्त ही नहीं, बल्कि उस रिश्ते की मिठास को भी याद रखें, जो जिंदगी के हर पड़ाव पर साथ चलती है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
Kanpur

Kanpur Plane Crash: अचानक नीचे गिरा Training Plane, दो पायलटों की मौत

उत्तर प्रदेश के कानपुर (Kanpur) से गुरुवार को एक बेहद दुखद खबर सामने आई। गंगा बैराज के पास नत्थूपुरवा गांव के नजदीक एक Twin-Engine Training Aircraft खेत में दुर्घटनाग्रस्त हो गया। विमान में सवार इंस्ट्रक्टर पायलट और ट्रेनी पायलट की मौत हो गई। हादसे के बाद मौके पर पहुंची पुलिस और रेस्क्यू टीमों ने इलाके को घेरकर राहत एवं बचाव कार्य शुरू किया। Training Flight के दौरान हुआ हादसा मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक विमान ट्रेनिंग उड़ान पर था और इसी दौरान हादसे का शिकार हो गया। यह चार सीटों वाला ट्विन-इंजन विमान था। शुरुआती जानकारी में बताया गया कि विमान नीचे गिरने से पहले आसपास के लोगों ने तेज आवाज सुनी थी। हालांकि, उस आवाज की वजह क्या थी, इसे लेकर अभी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। बताया जा रहा है कि विमान गंगा बैराज के करीब नत्थूपुरवा गांव के पास खुले खेत में गिरा। हादसा आबादी वाले इलाके से कुछ दूरी पर हुआ, जिसके बाद स्थानीय लोगों की भीड़ मौके पर जमा हो गई। हादसे के बाद मची अफरा-तफरी विमान के खेत में गिरने की सूचना मिलते ही पुलिस और इमरजेंसी टीमें घटनास्थल पर पहुंचीं। दुर्घटनाग्रस्त विमान बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया था और उसका मलबा खेत में बिखरा मिला। पुलिस ने घटनास्थल को सुरक्षित किया और दोनों पायलटों को मलबे से बाहर निकालने की कोशिश की, लेकिन उनकी जान नहीं बचाई जा सकी। शुरुआती रिपोर्टों में एक पायलट की मौत और दूसरे के गंभीर रूप से घायल होने की जानकारी सामने आई थी। बाद में पुलिस अधिकारियों के हवाले से दोनों पायलटों की मौत की पुष्टि हुई। Crash की असली वजह अभी सामने नहीं आई कानपुर Plane Crash की वजह फिलहाल साफ नहीं है। शुरुआती स्तर पर विमान के अचानक नियंत्रण खोने और नीचे गिरने की बात सामने आई है, लेकिन तकनीकी खराबी, इंजन से जुड़ी समस्या या किसी अन्य कारण की आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है। अधिकारियों की ओर से दुर्घटना की परिस्थितियों की जांच की जा रही है। विमान के मलबे, उड़ान से जुड़ी जानकारी और घटनास्थल से मिले सबूतों की जांच के बाद ही Crash की वास्तविक वजह सामने आ सकेगी। Aviation Safety पर फिर उठे सवाल कानपुर में हुआ यह हादसा Flight Training के दौरान सुरक्षा इंतजामों को लेकर भी सवाल खड़े करता है। हालांकि, अभी किसी निष्कर्ष पर पहुंचना जल्दबाजी होगी। जांच पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि हादसा किस वजह से हुआ और क्या इसके पीछे कोई तकनीकी या संचालन संबंधी कारण था। फिलहाल प्रशासन की टीमें घटनास्थल पर मौजूद हैं और मामले की जांच आगे बढ़ाई जा रही है। कानपुर विमान हादसे से जुड़ी नई जानकारी जांच एजेंसियों की रिपोर्ट के बाद ही सामने आएगी। Kanpur Plane Crash Latest Update: गंगा बैराज के पास Training Aircraft के क्रैश होने से दो पायलटों की मौत ने इलाके में शोक का माहौल पैदा कर दिया है। हादसे की पूरी तस्वीर जांच के बाद ही साफ होगी।
Share Market

Share Market Today: Sensex 77,250 के करीब, Nifty भी टूटा; जानें बाजार में क्यों आई गिरावट

भारतीय शेयर बाजार (Indian Share Market) में गुरुवार, 27 अगस्त को कारोबार के दौरान उतार-चढ़ाव देखने को मिला। शुरुआती कारोबार में Sensex और Nifty बढ़त के साथ खुले, लेकिन कुछ ही देर बाद बाजार की चाल बदल गई। बिकवाली बढ़ने से दोनों प्रमुख इंडेक्स लाल निशान में पहुंच गए। सुबह 10:30 बजे Sensex 123.89 अंक की गिरावट के साथ 77,349.05 पर था, जबकि Nifty 24.60 अंक टूटकर 24,183.15 पर कारोबार कर रहा था। Sensex-Nifty पर बढ़ा दबाव गुरुवार की शुरुआत बाजार के लिए सकारात्मक रही। Nvidia के मजबूत नतीजों और कच्चे तेल की कीमतों में नरमी से निवेशकों को कुछ राहत मिली, लेकिन यह बढ़त ज्यादा देर टिक नहीं पाई। Nifty 24,200 के स्तर के नीचे चला गया, वहीं Sensex भी शुरुआती बढ़त गंवाकर कमजोर हो गया। इससे पहले सुबह 10:13 बजे Reuters के आंकड़ों में Sensex 77,379.50 और Nifty 24,191.85 पर था। यानी उस समय दोनों इंडेक्स में हल्की गिरावट दर्ज की जा रही थी। FMCG और Media Shares में बिकवाली सेक्टोरल कारोबार की बात करें तो FMCG शेयरों पर दबाव नजर आया। शुरुआती कारोबार में Nifty FMCG इंडेक्स भी लाल निशान में था। इसके साथ ही Media शेयरों में भी कमजोरी देखने को मिली। सुबह 10:30 बजे Nifty Media करीब 0.60 फीसदी नीचे 1,601.30 पर कारोबार कर रहा था। Media इंडेक्स इससे पहले लगातार दो कारोबारी सत्रों में बढ़त दर्ज कर चुका था। ऐसे में आज की गिरावट को कुछ हद तक मुनाफावसूली से भी जोड़कर देखा जा रहा है। HDFC Bank बना बाजार पर दबाव का बड़ा कारण आज बाजार में HDFC Bank का प्रदर्शन भी निवेशकों के रडार पर रहा। शेयर में करीब 1 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई। Reuters के मुताबिक, अमेरिका में बैंक और उसके दो वरिष्ठ अधिकारियों के खिलाफ दायर एक securities lawsuit की खबर के बाद शेयर पर दबाव बढ़ा। Upstox के अनुसार, HDFC Bank में बिकवाली के चलते Sensex दिन के ऊपरी स्तर से करीब 300 अंक नीचे आया, जबकि Nifty 24,200 के महत्वपूर्ण स्तर के नीचे फिसल गया। Global Market से मिले-जुले संकेत भारतीय बाजार को एक तरफ Nvidia के मजबूत नतीजों और कच्चे तेल की कीमतों में नरमी से सहारा मिला। Brent crude करीब 87.4 डॉलर प्रति बैरल तक आ गया था। ईरान और ओमान के बीच Strait of Hormuz को लेकर बातचीत आगे बढ़ने की खबरों से तेल आपूर्ति को लेकर चिंता कुछ कम हुई है। दूसरी ओर, अमेरिकी महंगाई के आंकड़ों को लेकर बनी चिंता ने निवेशकों को थोड़ा सतर्क रखा। यही वजह रही कि एशियाई बाजारों में मजबूती के बावजूद भारतीय बाजार में तेजी टिक नहीं सकी। निवेशकों की नजर अब बाजार की अगली चाल पर फिलहाल घरेलू बाजार में तस्वीर पूरी तरह साफ नहीं है। एक तरफ कच्चे तेल में नरमी और मजबूत ग्लोबल टेक्नोलॉजी संकेत सकारात्मक हैं, तो दूसरी तरफ HDFC Bank जैसे बड़े शेयरों में कमजोरी और सेक्टोरल बिकवाली बाजार पर दबाव बना रही है। ऐसे माहौल में Sensex और Nifty की आगे की दिशा, 24,200 के आसपास Nifty की चाल और प्रमुख सेक्टर्स में खरीदारी-बिकवाली पर निवेशकों की नजर रहेगी। बाजार में उतार-चढ़ाव को देखते हुए किसी भी निवेश निर्णय से पहले अपने वित्तीय सलाहकार की राय लेना बेहतर है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!

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