भारत में आयोजित India AI Impact Summit 2026 को लेकर सियासत तेज हो गई है। एक तरफ सरकार इस ग्लोबल टेक इवेंट को भारत की डिजिटल ताकत का प्रतीक बता रही है, तो वहीं दूसरी ओर यह आयोजन अब राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप का केंद्र बन चुका है।
सत्तारूढ़ दल भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने कांग्रेस पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा है कि पार्टी ने कुछ सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर्स को पैसे का ऑफर देकर AI समिट के खिलाफ नकारात्मक माहौल बनाने की कोशिश की। भाजपा नेताओं का दावा है कि इस संबंध में कुछ वीडियो और चैट स्क्रीनशॉट सामने आए हैं, जिनमें कथित तौर पर पैसों के बदले समिट की आलोचना करने की बात कही गई है।
BJP का आरोप क्या है?
भाजपा प्रवक्ताओं के अनुसार, कुछ इन्फ्लुएंसर्स को मैसेज भेजकर कहा गया कि वे AI Summit से जुड़ी कमियों को बढ़ा-चढ़ाकर पेश करें। आरोप है कि इसके बदले उन्हें तय रकम देने का प्रस्ताव रखा गया। पार्टी का कहना है कि यह केवल सरकार की आलोचना नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारत की छवि को नुकसान पहुँचाने की कोशिश है।
हालांकि इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि अब तक नहीं हुई है। मामले को लेकर आधिकारिक जांच या किसी एजेंसी की पुष्टि सामने नहीं आई है।
Youth Congress Protest से बढ़ा विवाद
विवाद तब और गहरा गया जब AI समिट के दौरान Indian Youth Congress के कुछ कार्यकर्ताओं ने प्रदर्शन किया। बताया गया कि प्रदर्शन के दौरान कुछ कार्यकर्ताओं ने शर्ट उतारकर नारेबाजी की। पुलिस ने इसे सुरक्षा नियमों का उल्लंघन बताया और कई लोगों को हिरासत में लिया।
भाजपा ने इस प्रदर्शन को “सुनियोजित” करार देते हुए कहा कि यह आयोजन की गरिमा को ठेस पहुँचाने के लिए किया गया कदम था। वहीं कांग्रेस का कहना है कि यह लोकतांत्रिक विरोध का हिस्सा था और सरकार को आलोचना स्वीकार करनी चाहिए।
Congress का पक्ष
कांग्रेस नेताओं ने भाजपा के आरोपों को निराधार बताया है। उनका कहना है कि पार्टी का किसी भी इन्फ्लुएंसर को पैसे देने से कोई लेना-देना नहीं है। कांग्रेस का तर्क है कि जब भी सरकार की नीतियों पर सवाल उठते हैं, तो सत्ता पक्ष उसे देश विरोधी करार दे देता है।
पार्टी नेताओं ने यह भी कहा कि AI Summit जैसे बड़े आयोजन पर सवाल उठाना या प्रदर्शन करना लोकतंत्र का हिस्सा है और इसे देश की छवि से जोड़कर देखना सही नहीं है।
Political Narrative और Public Perception
AI Summit, जिसे भारत की तकनीकी प्रगति और स्टार्टअप इकोसिस्टम के लिए अहम माना जा रहा था, अब राजनीतिक बहस का विषय बन गया है। आम नागरिकों के बीच भी इस मुद्दे को लेकर अलग-अलग राय देखने को मिल रही है।
कुछ लोगों का मानना है कि अंतरराष्ट्रीय मंच पर ऐसे विवाद देश की छवि पर असर डाल सकते हैं। वहीं कई लोग इसे लोकतांत्रिक व्यवस्था का स्वाभाविक हिस्सा बताते हैं, जहां सरकार और विपक्ष के बीच मतभेद खुलकर सामने आते हैं।
आगे क्या?
फिलहाल यह मामला राजनीतिक बयानबाजी तक सीमित है। यदि आरोपों से जुड़े वीडियो और सबूतों की जांच होती है, तो स्थिति और स्पष्ट हो सकती है। तब तक यह मुद्दा सियासी गर्मी बढ़ाता रहेगा।
AI Summit Controversy अब केवल एक टेक इवेंट की खबर नहीं रह गई है, बल्कि यह इस बात का उदाहरण बन गई है कि डिजिटल युग में राजनीति, सोशल मीडिया और पब्लिक ओपिनियन किस तरह एक-दूसरे से जुड़ चुके हैं।
आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या इस मामले में कोई आधिकारिक जांच होती है या यह विवाद भी भारतीय राजनीति की कई बहसों की तरह समय के साथ ठंडा पड़ जाएगा।
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