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Shivraj Patil

Shivraj Patil Passes Away पूर्व गृह मंत्री शिवराज पाटिल का निधन

भारत की राजनीति के संयमित और सादगी-भरे चेहरों में से एक, पूर्व केंद्रीय गृह मंत्री शिवराज पाटिल (Shivraj Patil) अब हमारे बीच नहीं रहे। 12 दिसंबर 2025 की सुबह, महाराष्ट्र के लातूर स्थित उनके आवास पर उनका 90 वर्ष की आयु में निधन हो गया। पिछले कुछ समय से वे अस्वस्थ थे और परिवार के साथ ही रह रहे थे। उनके निधन के साथ भारतीय राजनीति ने एक ऐसा नेता खो दिया, जिसकी पहचान शांति, मर्यादा और धैर्य थी। पाटिल अपने पीछे बेटे शैलेश पाटिल, बहू अर्चना और दो पोतियों को छोड़ गए। Shivraj Patil: एक विनम्र नेता की लंबी राजनीतिक यात्र Shivraj Patil का करियर लगभग चार दशकों में फैला रहा।उनका सफर एक नगरपालिका अध्यक्ष के रूप में शुरू हुआ, फिर वे महाराष्ट्र विधानसभा पहुंचे और उसके बाद राष्ट्रीय राजनीति के शीर्ष पर पहुंच गए। मुख्य पद जिनसे वे देश की राजनीति में पहचान बने: उनकी छवि एक ऐसे नेता की थी जो कानून, संविधान और संसदीय परंपराओं के प्रति बेहद संवेदनशील थे। संसद में उनकी भाषा और संयम आज भी उदाहरण के रूप में याद किया जाता है। 26/11 के बाद दिया था नैतिक जिम्मेदारी का उदाहरण गृह मंत्री के रूप में पाटिल का कार्यकाल चुनौतियों भरा रहा।26/11 मुंबई आतंकी हमले के बाद देशभर में सुरक्षा पर उठे सवालों के बीच उन्होंने नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए इस्तीफा दिया। उस समय उनका निर्णय कई लोगों के लिए राजनीतिक ईमानदारी का प्रतीक बना। देशभर से श्रद्धांजलि, PM–President ने जताया शोक उनके निधन पर राजनीतिक जगत में गहरा दुख व्यक्त किया गया। एक सादा और शांत व्यक्तित्व – जनता के लिए समर्पित जीवन Shivraj Patil को उनके समर्थक हमेशा याद रखेंगे—उनकी सादगी,उनकी शांत भाषा,और जनता के प्रति उनका कर्तव्यबोध। वे उन नेताओं में से थे जो कम बोलते थे, लेकिन जिस काम को हाथ में लेते थे, उसे पूरी गंभीरता से निभाते थे। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Goa

Goa Club Tragedy एक ही Delhi पते से चल रहीं 42 कंपनियाँ, जांच में बड़ा खुलासा

गोवा (Goa) के लोकप्रिय नाइटलाइफ़ सर्किट को हिला देने वाली Goa Nightclub Fire Tragedy के बाद अब जांच कई नए मोड़ ले चुकी है। 6 दिसंबर 2025 को “Birch by Romeo Lane” क्लब में लगी भीषण आग में दर्जनों लोगों की जान चली गई। हादसे की गूंज कम नहीं हुई थी कि जांच एजेंसियों ने क्लब के सह–मालिक सौरभ और गौरव लूथरा की कारोबारी दुनिया में एक चौंकाने वाला नेटवर्क खोज निकाला—42 कंपनियों का विशाल सेट-अप, वो भी एक ही दिल्ली पते पर रजिस्टर्ड। यह खुलासा न सिर्फ जांच को नई दिशा देता है, बल्कि लोगों में यह सवाल भी बढ़ा रहा है कि आखिर इतने बड़े पैमाने पर एक ही पते से कंपनियाँ क्यों चल रही थीं। एक ही Delhi Address पर 42 Companies—जांच में बड़ा Surprise जांच रिकॉर्ड दिखाते हैं कि लूथरा बंधुओं से जुड़ी सभी कंपनियाँ 2590, Ground Floor, Hudson Line, Delhi पर रजिस्टर हैं।इतनी बड़ी संख्या में कंपनियों का एक ही पते पर दर्ज होना बेहद असामान्य माना जाता है। उद्योग विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसी स्थिति आमतौर पर Shell Companies, paper-based entities या layered business structures की ओर इशारा करती है। इन कंपनियों में कई नाम हॉस्पिटैलिटी और फूड सेक्टर से प्रेरित लगते हैं—जैसे Being GS Hospitality, G3S Foodshala, Azizaa Food Studio LLP आदि।लेकिन कई फर्मों में ऑफिस, टीम या बिज़नेस एक्टिविटी के ठोस सबूत न मिलने से एजेंसियाँ इनके वास्तविक उद्देश्य को लेकर सतर्क हुई हैं। जांच एजेंसियों को Shell Company Pattern का शक कई रिपोर्टों के अनुसार शुरुआती जांच में निम्न बातें सामने आई हैं: हालाँकि यह सब अभी जांच का हिस्सा है। किसी भी वित्तीय गड़बड़ी या अवैध गतिविधि की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, इसलिए सभी निष्कर्ष फिलहाल प्रारंभिक संकेत माने जा रहे हैं। थाईलैंड में हिरासत से बढ़ा मामला, भारत कर रहा प्रत्यर्पण की तैयारी हादसे के बाद लूथरा बंधु भारत से बाहर चले गए थे। इंटरपोल और भारतीय एजेंसियों की कार्रवाई के बाद दोनों को Phuket, Thailand में हिरासत में लिया गया।अब भारत सरकार उनकी कानूनी वापसी (extradition) की प्रक्रिया आगे बढ़ा रही है ताकि जांच पूरी की जा सके। आग, अव्यवस्थाएँ और अब आर्थिक जांच—कहानी हुई और जटिल क्लब में हुई मौतों के बाद सुरक्षा मानकों, अवैध निर्माण और लाइसेंस संबंधित चूक की जांच पहले से ही जारी थी।लेकिन 42 कंपनियों के इस नेटवर्क के सामने आने से अब पूरा मामला business background checks, financial scrutiny और corporate compliance के कोण से भी देखा जा रहा है। जांच एजेंसियाँ यह स्पष्ट करना चाहती हैं कि: आगे की राह अधिकारियों ने सभी कंपनियों के documents, transactions, partners, GST records, audit reports और operation trail की जांच शुरू कर दी है।जैसे-जैसे जानकारी सामने आएगी, यह समझा जा सकेगा कि यह पूरी संरचना एक सामान्य कारोबारी नेटवर्क था या कुछ और जटिल। फिलहाल जनता, उद्योग जगत और गोवा टूरिज़्म सभी की नज़रें इस जांच पर टिकी हैं—क्योंकि यह मामला केवल एक हादसा नहीं, बल्कि भारत के nightlife sector में safety और transparency पर बड़ा सवाल भी खड़ा करता है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Modi

Modi-Putin Car Photo अमेरिका में कांग्रेस में क्यों बनी चर्चा?

वाशिंगटन: प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी (Modi) और रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की हालिया कार यात्रा की तस्वीर ने अमेरिकी कांग्रेस में हलचल मचा दी। डेमोक्रेट सांसद सिडनी कामलाजर-डोव ने इस फोटो को “हजार शब्दों के बराबर पोस्टर” बताते हुए चेतावनी दी कि अमेरिका की हालिया नीतियों से भारत रूस के और करीब जा सकता है। सांसद ने कहा कि ट्रंप प्रशासन द्वारा लगाए गए उच्च टैरिफ और व्यापार प्रतिबंध न केवल भारत-यूएस संबंधों को प्रभावित कर सकते हैं, बल्कि वैश्विक रणनीति में भी बदलाव ला सकते हैं। उन्होंने जोर देकर कहा कि अमेरिका को भारत के साथ मजबूत और भरोसेमंद रिश्ते बनाए रखने चाहिए। तस्वीर में क्या है खास? कार में Modi और Putin आराम से बैठे दिख रहे हैं, जो उनके गहरे और गर्म संबंधों का प्रतीक माना जा रहा है। अमेरिकी कांग्रेस में इस तस्वीर का इस्तेमाल एक चेतावनी के रूप में किया गया कि अगर अमेरिका भारत के साथ सहयोग में कठिनाइयाँ पैदा करता है, तो भारत रूस के करीब हो सकता है। व्यापार और रणनीतिक असर हाल ही में अमेरिका ने भारत पर कई निर्यात वस्तुओं पर 50% तक के टैरिफ लगाए हैं। इस कदम को कुछ विशेषज्ञ “अमेरिका द्वारा भारत को दबाव में लाने की कोशिश” कहते हैं। इसके चलते दोनों देशों के बीच ट्रेड तनाव बढ़ा है और रणनीतिक साझेदारी पर असर पड़ सकता है। भारत अपनी विदेश नीति में स्ट्रैटेजिक ऑटोमॉमी को महत्व देता है। रूस के साथ करीबी रिश्ते बनाए रखना उसकी वैश्विक रणनीति का हिस्सा है। लेकिन अमेरिका की कड़ी नीतियों से भारत रूस के और करीब जा सकता है, यह चिंता अमेरिकी नेताओं को है। अमेरिकी संसद की चेतावनी सांसद कामलाजर-डोव ने कहा कि ट्रंप प्रशासन की यह रणनीति “कान काटने जैसा” है — यानी अमेरिका खुद को नुकसान पहुंचा सकता है। उन्होंने सुझाव दिया कि अमेरिका को भारत के साथ सहयोग बढ़ाने की दिशा में काम करना चाहिए, क्योंकि मजबूत US-India रिलेशनशिप दोनों देशों के लिए फायदेमंद है। यह घटना दिखाती है कि वैश्विक राजनीति में संकेत और प्रतीकों का महत्व बहुत बड़ा है। कभी-कभी एक तस्वीर भी देशों के रिश्तों और रणनीति पर गहरा प्रभाव डाल सकती है। Modi-Putin कार फोटो ने सिर्फ मीडिया में चर्चा नहीं बनाई, बल्कि यह दुनिया को संकेत दे गया कि भारत अपनी विदेश नीति में संतुलन बनाये रखने में गंभीर है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Rajasthan

Rajasthan एथेनॉल प्रोजेक्ट के विरोध में हिंसा, Hanumangarh में आगजनी व बवाल

Rajasthan के हनुमानगढ़ में एथेनॉल फैक्ट्री को लेकर चल रहा तनाव सोमवार को अचानक बढ़ गया। कई दिनों से विरोध कर रहे किसानों ने टिब्बी इलाके में हुई महापंचायत के बाद फैक्ट्री साइट की ओर कूच किया। भीड़ बड़ी थी, गुस्सा भी उतना ही। पुलिस ने बैरिकेड लगाकर रास्ता रोकने की कोशिश की, लेकिन किसान आगे बढ़ते गए और देखते-देखते माहौल बिगड़ गया। कैसे भड़की हिंसा? प्रदर्शन के बीच कुछ लोगों ने फैक्ट्री की दीवार गिरा दी। उसके बाद भीड़ में मौजूद उग्र समूह ने निर्माणाधीन परिसर में खड़े दर्जनों वाहनों को आग लगा दी। रिपोर्टों के मुताबिक 10 से 16 वाहन— जिनमें पुलिस की जीपें, मशीनें और निजी गाड़ियाँ शामिल थीं — जलकर पूरी तरह नष्ट हो गए।स्थिति तेजी से बिगड़ती देखकर पुलिस को लाठीचार्ज, आंसू-गैस और रबर बुलेट तक का इस्तेमाल करना पड़ा। इस झड़प में कई किसान, पुलिसकर्मी और आसपास मौजूद लोग घायल हो गए। क्यों भड़का इतना विरोध? किसानों का कहना है कि एथेनॉल फैक्ट्री उनके खेतों, भूजल और हवा—तीनों को नुकसान पहुंचा सकती है। उनका डर साफ है: किसानों का तर्क है कि “विकास ज़रूरी है, लेकिन हमारी ज़िंदगी और खेत किस कीमत पर?” फैक्ट्री और प्रशासन का पक्ष फैक्ट्री प्रबंधन का कहना है कि यह प्रोजेक्ट Zero Liquid Discharge Technology पर आधारित है, जिसमें गंदा पानी रिसने का खतरा नहीं होगा। कंपनी दावा करती है कि स्थानीय लोगों को रोजगार मिलेगा और पूरे क्षेत्र की अर्थव्यवस्था मजबूत होगी।प्रशासन भी यही कहता है कि सभी पर्यावरणीय मानकों का पालन किया जाएगा। लेकिन ग्रामीणों का भरोसा टूट चुका है—उन्हें लगता है कि वादों की बजाय व्यवहार ज्यादा मायने रखता है। घटना के बाद क्या बदलाव हुए? हिंसा रोकने के लिए जिला प्रशासन ने तुरंत: माहौल अभी भी तनावपूर्ण है, लेकिन नियंत्रण में बताया जा रहा है। आगे क्या? स्थानीय लोगों का कहना है कि समस्या फैक्ट्री से ज्यादा बातचीत की कमी है। किसानों को लगता है कि उनकी चिंता को गंभीरता से नहीं लिया गया।यदि कंपनी और प्रशासन, किसानों को पारदर्शिता के साथ भरोसा दिलाए—पर्यावरण परीक्षण, पानी की खपत, कचरा प्रबंधन और स्थानीय रोजगार पर स्पष्ट लिखित गारंटी दे—तो माहौल शांत हो सकता है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Goa

Goa Fire हादसा Thailand में लूथरा ब्रदर्स हिरासत में, हथकड़ी में पहली तस्वीर सामने

गोवा (Goa) में 6 दिसंबर 2025 की रात शुरू हुई एक पार्टी कुछ ही मिनटों में दर्द और अफरा-तफरी का सबसे बड़ा हादसा बन गई। अर्पोरा स्थित Birch by Romeo Lane नाइटक्लब में लगी आग ने 25 लोगों की जान ले ली—कुछ पर्यटक, कुछ कर्मचारी, और कुछ वे लोग जो बस एक खुशगवार रात बिताने आए थे। इस घटना ने पूरे देश को झकझोर दिया है। लोगों के मन में सबसे बड़ा सवाल यही है—इतना बड़ा क्लब बिना सुरक्षा इंतज़ाम के कैसे चल रहा था? आग कैसे फैली — चंद सेकंड में मची तबाही प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार क्लब के अंदर चल रहे फायर-शो के दौरान एक चिंगारी ने सजावट में लगी ज्वलनशील सामग्री को पकड़ लिया।आग तेजी से फैली और धुआँ इतना घना था कि बाहर निकलने का रास्ता ढूँढना भी मुश्किल हो गया। क्लब में: ये सभी बातें बाद में पुलिस और प्रशासन की शुरुआती रिपोर्ट में सामने आईं। हादसे के बाद असली सवाल: मालिक कहाँ गायब हो गए? क्लब के मालिक सौरभ लुथरा और गौरव लुथरा पर गंभीर धाराओं में FIR दर्ज हुई।लेकिन जांच शुरू होते ही दोनों भाई भारत छोड़कर थाईलैंड पहुँच चुके थे।उनकी फ्लाइट रात में ही बुक कराई गई, जब गोवा में लोग अपनी जान बचाने के लिए संघर्ष कर रहे थे। इस भागदौड़ ने पूरे मामले को और संवेदनशील बना दिया। सोशल मीडिया से लेकर स्थानीय लोगों तक सभी में गुस्सा बढ़ गया। पासपोर्ट रद्द — सरकार का बड़ा एक्शन गोवा (Goa) पुलिस ने विदेश मंत्रालय (MEA) को दोनों भाइयों के पासपोर्ट रद्द करने की सिफारिश की।सरकार ने तुरंत कार्रवाई करते हुए पासपोर्ट सस्पेंड/इम्पाउंड कर दिए। इसका मतलब साफ है—वह देश से बाहर हैं तो भी वापस लाए जा सकते हैं, और भारत लौटे बिना बचना असंभव है। Interpol का Blue Corner Notice भी जारी किया गया है। प्रशासन की सख़्त कार्रवाई — अवैध निर्माण पर बुलडोज़र हादसे के बाद प्रशासन ने क्लब से जुड़े सभी निर्माणों की जांच शुरू की।कई हिस्सों को अवैध पाया गया, जिन पर कार्रवाई करते हुए बुलडोज़र चलाया गया। मुख्यमंत्री प्रमोद सावंत ने ऐलान किया कि: लोगों की प्रतिक्रिया — सिर्फ दुख नहीं, गुस्सा भी स्थानीय लोग, पर्यटक और क्लब इंडस्ट्री से जुड़े लोग एक ही बात कह रहे हैं:अगर सुरक्षा नियम लागू होते, तो 25 परिवार आज उजड़ते नहीं। कई लोग क्लब के पुराने वीडियो साझा कर रहे हैं, जिनमें भीड़ भरे माहौल में सुरक्षा इंतज़ामों की कमी साफ दिखती है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Surya Kant

CJI Surya Kant Remarks on Rohingya 44 Former Judges का जोरदार समर्थन और विवाद

दिसंबर 2025 में भारत की सुप्रीम कोर्ट में रोहिंग्या शरणार्थियों से जुड़े एक मामले ने सुर्खियां बटोरीं। इस मामले में Chief Justice of India (CJI) Surya Kant की टिप्पणी पर विवाद खड़ा हो गया। कोर्ट ने रोहिंग्या प्रवासियों के कानूनी दर्जे और भारत में उनकी स्थिति पर सवाल उठाए, जिससे कुछ पूर्व न्यायाधीश और कानूनी विशेषज्ञों ने आपत्ति जताई। क्या हुआ था: CJI की टिप्पणी सुनवाई के दौरान CJI सूर्यकांत की पीठ ने पूछा कि क्या ऐसे लोग, जो भारत में अनधिकृत रूप से आए हैं, उन्हें “रेड कार्पेट” बिछाकर स्वागत करना चाहिए। इस पर कई पूर्व जजों और वरिष्ठ वकीलों ने कहा कि इस तरह के सवाल शरणार्थियों की गरिमा और संवैधानिक अधिकारों के खिलाफ हैं। उनके अनुसार, कोर्ट को ऐसे मामलों में संवैधानिक और मानवाधिकार दृष्टिकोण अपनाना चाहिए। 44 Former Judges का समर्थन इस विवाद के जवाब में 44 पूर्व न्यायाधीशों ने एक संयुक्त बयान जारी कर CJI सूर्यकांत के खिलाफ “motivated campaign” को गलत बताया। उनके प्रमुख बिंदु थे: पूर्व जजों ने जोर देकर कहा कि अदालत का काम संवैधानिक दायित्व और मानव गरिमा दोनों को ध्यान में रखकर न्याय करना है। क्यों है यह विवाद महत्वपूर्ण यह मामला सिर्फ एक टिप्पणी का विवाद नहीं है। यह मानवाधिकार, राष्ट्रीय सुरक्षा और कानूनी प्रक्रिया के बीच संतुलन पर सवाल खड़ा करता है। भारत में शरणार्थियों के लिए कोई स्थायी कानून नहीं है, इसलिए अदालतें इस पर निर्णय लेते समय संवेदनशीलता और विवेक दोनों दिखाती हैं। साथ ही, यह विवाद यह भी दिखाता है कि: CJI सूर्यकांत के विवादित बयान और 44 पूर्व जजों के समर्थन ने एक बार फिर न्यायपालिका में संतुलन, स्वतंत्रता और संवैधानिक जिम्मेदारी पर बहस छेड़ दी है। यह मामला हमें याद दिलाता है कि शरणार्थियों और प्रवासियों के साथ न्याय करते समय मानवता, संवैधानिक अधिकार और कानूनी विवेक को एक साथ रखना कितना जरूरी है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Australia

Australia Social Media Rules बच्चों पर Facebook, Instagram, TikTok Ban

Australia में 10 दिसंबर 2025 से एक बड़ा बदलाव शुरू हुआ है। अब 16 साल से कम उम्र के बच्चे सोशल मीडिया अकाउंट नहीं बना सकते। यह नियम किसी छोटे शहर या राज्य में नहीं, बल्कि पूरे देश में लागू हुआ है। इसे दुनिया का पहला ऐसा कदम माना जा रहा है जहां एक सरकार ऑनलाइन प्लेटफ़ॉर्म्स पर इतनी सख्ती से नियंत्रण कर रही है। क्यों लिया गया यह फैसला? कई सालों से विशेषज्ञ और माता-पिता एक ही बात कह रहे थे— “सोशल मीडिया बच्चों के दिमाग और आत्मविश्वास पर असर डाल रहा है।” इसी चिंता के बीच सरकार ने कानून बनाया। उद्देश्य साफ है: सरकार का कहना है कि बड़े प्लेटफ़ॉर्म बच्चों से मुनाफा कमाते हैं, लेकिन जिम्मेदारी नहीं लेते। नया नियम यही संतुलन बदलने की कोशिश है। किन प्लेटफ़ॉर्म्स पर बैन? प्रतिबंध सबसे लोकप्रिय सोशल मीडिया ऐप्स पर लागू है: अगर कोई प्लेटफ़ॉर्म नियम तोड़ता है, तो उस पर भारी जुर्माना लगाया जा सकता है। लाखों अकाउंट बंद: बच्चों की मिलीजुली प्रतिक्रिया नियम लागू होते ही लाखों किशोरों के अकाउंट बंद या हटाए गए।बहुत से बच्चों ने आखिरी पोस्ट डाले: “मुझे दोस्तों की याद आएगी।”“ये अंत जैसा लग रहा है, लेकिन शायद अच्छा भी हो।” किसी ने राहत की सांस ली, तो किसी को गुस्सा आया।पर एक बात स्पष्ट थी — यह बदलाव छोटा नहीं है। माता-पिता क्या कह रहे हैं? कुछ माता-पिता ने राहत महसूस की: “कम फोन, ज्यादा पढ़ाई… शायद अब घर में शांति होगी।” दूसरी तरफ कुछ परिवार चिंतित भी हैं: “कई बच्चे ऑनलाइन मदद और दोस्ती पाते हैं। पूरी तरह बैन करना सही तो नहीं लगता।” यह द्वंद्व पूरे देश में देखा जा रहा है। क्या इससे बच्चे छुपकर इंटरनेट इस्तेमाल करेंगे? विशेषज्ञों को डर है: यानी, समस्या पूरी तरह खत्म नहीं होती — बस दिशा बदलती है। क्या यह दुनिया के लिए उदाहरण बनेगा? दुनिया भर की नजरें अब ऑस्ट्रेलिया पर हैं। किसी भी तरह, यह कदम डिजिटल दुनिया के इतिहास में एक टर्निंग पॉइंट है। आगे क्या? अगले महीनों में देखा जाएगा: सच यह है:सोशल मीडिया सिर्फ ऐप नहीं है—यह आज के बच्चों का सामाजिक जीवन भी है।उसके दरवाज़े बंद करना आसान है, लेकिन उसकी जगह क्या आएगा — यह बड़ा सवाल है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Goa

Goa Night Club Fire गोवा क्लब हादसा, 25 मौतें Luthra Brothers फरार, Ajay Gupta Arrest

गोवा (Goa) की सर्द रात, तेज़ संगीत, भरी भीड़ और अचानक उठती आग।6 दिसंबर 2025 की वह रात कभी नहीं भूली जाएगी।अर्पोरा के मशहूर नाइट क्लब ‘Birch by Romeo Lane’ में लगी भीषण आग ने देखते ही देखते 25 जिंदगियाँ छीन लीं।यह सिर्फ एक हादसा नहीं, बल्कि लापरवाही की दर्दनाक कहानी बन गया। आग कैसे लगी? जांच के शुरुआती निष्कर्षों में सामने आया कि: धुआँ इतनी तेजी से फैला कि कई लोग भाग ही नहीं पाए।आँखों के सामने जलती हुई ज़िंदगियाँ —जो बाहर निकले, उनकी आवाज़ आज भी कांपती है। क्लब का मालिक कौन? इस नाइट क्लब का संचालन Luthra Brothers – सौरभ और गौरव लूथरा करते थे।उनके साथ Ajay Gupta और Surinder Khosla भी पार्टनर बताए जाते हैं। हादसे के तुरंत बाद: Ajay Gupta Arrest – पहली प्रतिक्रिया दिल्ली में पुलिस ने Ajay Gupta को हिरासत में लिया।उनका कहना था: “मैं सिर्फ पार्टनर हूँ… मैं कुछ नहीं जानता।” लेकिन जांच टीम के पास ऐसे कागज़ हैं जिनसे पता चलता है कि मालिकाना हिस्सेदारी तीनों के पास थी और लाइसेंस के मामले में गंभीर सवाल हैं। उनके खिलाफ Look Out Circular पहले से जारी था। सरकार की सख्त कार्रवाई हादसे के बाद गोवा सरकार तुरंत हरकत में आई: यह कार्रवाई सिर्फ गोवा तक सीमित नहीं रही —उत्तराखंड जैसे राज्यों ने भी अपने यहाँ सुरक्षा जांच शुरू कर दी। मानवीय पहलू: अंदर कैसा था? बचे हुए लोग बताते हैं: कई परिवारों ने एक साथ अपने लोग खो दिए।हंसी और संगीत की जगह अब सन्नाटा और सवाल हैं। सबसे बड़ा सवाल: ज़िम्मेदार कौन? यह हादसा सिर्फ आग की वजह से नहीं हुआ।बड़ी वजहें थीं: लोग पूछ रहे हैं: आगे क्या? अब सबकी नज़रें हैं: हादसा बहुत कुछ बदल सकता है।ब्रेकिंग न्यूज़ के पीछे असली कहानी है — खोई हुई जिंदगियाँ। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Rahul Gandhi

Election Commission under Pressure? राहुल बोले BJP फायदा उठा रही है, संस्थाएँ Neutral नहीं रहीं

कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने एक बार फिर बड़ा बयान दिया है। उनका कहना है कि देश की अहम संस्थाएँ आज पहले जितनी स्वतंत्र नहीं रह गईं। राहुल गांधी का आरोप है कि RSS सभी प्रमुख संस्थाओं पर नियंत्रण चाहता है और इसी दिशा में लगातार कदम बढ़ रहे हैं। उन्होंने दावा किया कि Election Commission को भी “कब्जे में लेने की कोशिश” हो रही है, जिससे चुनाव की निष्पक्षता पर सवाल खड़े होते हैं। राहुल गांधी का मानना है कि अगर चुनाव आयोग पर दबाव बढ़ेगा, तो इसका सीधा असर लोकतंत्र पर पड़ेगा। “चुनाव आयोग तटस्थ नहीं दिख रहा” – राहुल गांधी राहुल गांधी के मुताबिक चुनाव लोकतंत्र की रीढ़ होते हैं। उन्होंने कहा कि: “अगर संस्थाएँ neutral नहीं रहेंगी, तो देश में free and fair elections कैसे होंगे? जब Election Commission पर दबाव होगा, तो विपक्ष के लिए मैदान बराबर नहीं रहेगा।” उन्होंने आरोप लगाया कि चुनावों में भाजपा को फायदा दिलाने के लिए संस्थाओं का इस्तेमाल किया जा रहा है। हालांकि, इन आरोपों पर सरकार या आयोग की तरफ से कोई सीधी प्रतिक्रिया नहीं आई है। लोकतंत्र की चिंता जताई राहुल गांधी ने कहा कि संस्थाओं का उद्देश्य संविधान की रक्षा करना है, न कि किसी संगठन या पार्टी की सुविधा देना। उनका कहना है: “संस्थाएँ strong और independent रहनी चाहिए। तभी लोकतंत्र सुरक्षित रहेगा।” उन्होंने मीडिया, एजेंसियों और चुनाव प्रक्रिया को लेकर भी सवाल उठाए और कहा कि विपक्ष की आवाज दबाने की कोशिश की जा रही है। विपक्ष की अपील – “देश को जागरूक रहना होगा” राहुल गांधी ने नागरिकों, सोशल संगठनों और राजनीतिक दलों से अपील की कि वे लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा के लिए एकजुट हों। उन्होंने कहा कि यह मुद्दा किसी एक पार्टी का नहीं, बल्कि पूरे देश का है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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NDA

PM Modi NDA Meeting Highlights बिहार की जीत पर नई Energy और Big Plans

बिहार चुनाव के शानदार नतीजों के बाद संसद भवन में हुई NDA Parliamentary Party Meeting पूरी तरह उत्साह और भरोसे के माहौल में हुई। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस बैठक में खुलकर कहा कि बिहार की जीत ने उन्हें “नई ऊर्जा और नया आत्मविश्वास” दिया है। उन्होंने सांसदों को याद दिलाया कि जनता ने उन्हें केवल वोट नहीं दिया, बल्कि उम्मीदें दी हैं, और इन उम्मीदों को पूरा करने के लिए अब तेज़ और साफ काम की ज़रूरत है। बिहार में NDA की जीत: भरोसे की कहानी बिहार में NDA की जीत: भरोसे की कहानी हाल ही में हुए चुनावों में NDA ने 243 में से 202 सीटें प्राप्त कीं। यह नतीजे दिखाते हैं कि लोगस्थिरता चाहते हैंविकास चाहते हैंऔर गठबंधन पर भरोसा करते हैं बैठक में बिहार के सभी सांसद मौजूद रहे। माहौल उत्साहपूर्ण था – किसी पार्टी के चेहरे पर थकान नहीं, बल्कि जीत की चमक थी। PM Modi का साफ संदेश: अनुशासन पहले अपने भाषण में प्रधानमंत्री ने एक बात बहुत स्पष्ट कही: “अनुशासन ही हमारी ताक़त है। नियम तोड़ने वालों पर कड़ी कार्रवाई होगी।” यह संदेश सिर्फ चेतावनी नहीं था, बल्कि दिशा भी था।उन्होंने कहा कि अब प्रदर्शन और परिणाम ही सबसे बड़ा पैमाना होंगे। Action और Accountability: सरकार का अगला फोकस बैठक में यह भी सामने आया कि इन पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। उदाहरण के तौर पर, ₹830 करोड़ से अधिक की राशि तुरंत जारी किए जाने का उल्लेख किया गया। यह बताता है कि केंद्र जनता से जुड़े फैसलों में देर नहीं करना चाहता। NDA Unity: BJP + JDU का तालमेल बिहार की राजनीति में एक समय अनिश्चितता थी, लेकिन अब तस्वीर साफ है। नीतीश कुमार सरकार को चलाते हैंबीजेपी अधिक सक्रिय और मज़बूत भूमिका में दिख रही है PM मोदी ने सहयोगी दलों को इशारे में याद दिलाया कि Parliament + Meeting: दो मोर्चों पर सक्रिय PM उसी दिन संसद में वंदे मातरम् की 150वीं वर्षगांठ पर भी विशेष चर्चा चल रही थी।PM Modi दोनों जगह मौजूद रहे। यह दिखाता है कि राजनीतिक ज़िम्मेदारी और संसदीय परंपरा – दोनों को वे बराबर महत्व देते हैं। आगे क्या? विकास की रफ्तार बढ़ेगी बैठक का सार एक ही था: काम, काम और सिर्फ काम। आने वाले महीनों में सब तेज़ होने की उम्मीद है। प्रधानमंत्री का संदेश सरल था: “जनता ने हमें प्रेम दिया है। अब हमारी बारी है कि हम परिणाम दें।” हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Bhopal

Bhopal Municipal Action: दुकानों पर Sealing से नाराज व्यापारी, बोले- बड़े Malls पर कार्रवाई क्यों नहीं?

Bhopal में नगर निगम की Sealing Action के बाद व्यापारियों में नाराजगी बढ़ गई है। सोमवार को रिहायशी इलाकों में चल रही व्यावसायिक गतिविधियों के खिलाफ निगम ने बड़े स्तर पर कार्रवाई की। करीब चार घंटे तक चले अभियान में शहर के अलग-अलग इलाकों में 15 से ज्यादा दुकानों और व्यावसायिक प्रतिष्ठानों को बंद या सील किया गया। कार्रवाई के दौरान सबसे ज्यादा हलचल अरेरा कॉलोनी में देखने को मिली। निगम की टीम जब E-3 इलाके में पहुंची तो दुकानदारों ने विरोध शुरू कर दिया। व्यापारियों का कहना था कि नियमों के नाम पर छोटे कारोबारियों को निशाना बनाया जा रहा है, जबकि बड़े शॉपिंग मॉल और दूसरे बड़े प्रतिष्ठानों पर ऐसी कार्रवाई क्यों नहीं हो रही। अरेरा कॉलोनी में आमने-सामने आए व्यापारी और निगम की टीम अरेरा कॉलोनी के E-3 इलाके में निगम की टीम ने कई दुकानों पर कार्रवाई की। इस दौरान करीब 8 दुकानों को सील किए जाने की जानकारी सामने आई है। निगम की कार्रवाई शुरू होते ही दुकानदार मौके पर जमा हो गए। व्यापारियों ने अधिकारियों से कार्रवाई को लेकर सवाल किए और अपनी परेशानी बताई। उनका कहना था कि कई परिवार इन छोटे कारोबारों पर निर्भर हैं और दुकान अचानक बंद होने से रोजमर्रा की कमाई पर सीधा असर पड़ेगा। व्यापारियों ने यह भी आरोप लगाया कि निगम की कार्रवाई में समानता नहीं दिखाई दे रही है। दुकानदारों का सवाल- बड़े Malls पर कार्रवाई कब? अरेरा कॉलोनी में विरोध की सबसे बड़ी वजह बड़े व्यावसायिक प्रतिष्ठानों को लेकर उठे सवाल रहे। दुकानदारों का कहना है कि यदि रिहायशी क्षेत्र में Commercial Activity नियमों के खिलाफ है, तो फिर छोटी दुकान हो या बड़ा Shopping Mall, नियम सभी के लिए एक जैसे होने चाहिए। व्यापारियों ने नगर निगम से यह स्पष्ट करने की मांग की कि कार्रवाई का आधार क्या है और किन प्रतिष्ठानों को नियमों के उल्लंघन की श्रेणी में रखा गया है। हालांकि, निगम का कहना है कि कार्रवाई नियमों के तहत की जा रही है और नोटिस दिए जाने के बाद आगे की प्रक्रिया अपनाई जा रही है। Kolar से लेकर Rachna Nagar तक Action नगर निगम का अभियान सिर्फ अरेरा कॉलोनी तक सीमित नहीं रहा। कोलार के सर्वधर्म क्षेत्र में भी निगम की टीमों ने कई प्रतिष्ठानों का निरीक्षण किया। यहां होटल, पब, मॉल और जिम समेत कई व्यावसायिक गतिविधियां कार्रवाई के दायरे में आईं। इसके अलावा रचना नगर और खानूगांव सहित दूसरे क्षेत्रों में भी निगम की टीमें पहुंचीं। कुछ स्थानों पर टीम के पहुंचने से पहले ही दुकानदारों ने अपने प्रतिष्ठान बंद कर दिए। 8 हजार से ज्यादा नोटिस जारी भोपाल में रिहायशी इलाकों में Commercial Use को लेकर नगर निगम पहले से ही कार्रवाई की तैयारी कर रहा था। उपलब्ध जानकारी के अनुसार 26 अगस्त तक करीब 8,264 नोटिस जारी किए जा चुके थे। अब नोटिस के बाद Sealing Action शुरू होने से कारोबारियों में चिंता बढ़ गई है। खासकर छोटे दुकानदारों को डर है कि दुकान बंद होने से उनकी आय पर सीधा असर पड़ेगा। Supreme Court के निर्देशों के बाद तेज हुई कार्रवाई रिहायशी इलाकों में व्यावसायिक गतिविधियों का मामला लंबे समय से चर्चा में है। सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के बाद नगर निगम की कार्रवाई में तेजी आई है। निगम का फोकस ऐसे प्रतिष्ठानों पर है, जहां निर्धारित नियमों के अनुरूप व्यावसायिक गतिविधियां संचालित नहीं हो रही हैं। दूसरी तरफ व्यापारियों की मांग है कि कार्रवाई के साथ उनकी रोजी-रोटी का भी ध्यान रखा जाए। उनका कहना है कि अगर कोई नियम लागू है तो उसकी जानकारी स्पष्ट तरीके से दी जाए और सभी प्रतिष्ठानों पर बिना भेदभाव के कार्रवाई हो। अब आगे क्या होगा? भोपाल में Sealing Drive अभी खत्म होती नजर नहीं आ रही है। नगर निगम की टीमें आने वाले दिनों में दूसरे इलाकों में भी ऐसे प्रतिष्ठानों की जांच कर सकती हैं। अरेरा कॉलोनी में हुए विरोध ने इस पूरे मामले को और चर्चा में ला दिया है। अब देखना होगा कि निगम की कार्रवाई आगे कितनी तेज होती है और व्यापारियों की शिकायतों पर प्रशासन की ओर से क्या जवाब सामने आता है। फिलहाल एक बात साफ है—भोपाल में residential areas में commercial activities को लेकर नगर निगम की सख्ती बढ़ गई है और आने वाले दिनों में इसका असर शहर के कई कारोबारियों पर देखने को मिल सकता है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
Silver

Gold Rate Today: सोना ₹1.55 लाख पर आया, Silver Price में ₹8,437 की बड़ी गिरावट

अगर आप सोना या चांदी खरीदने का मन बना रहे हैं तो आज के भाव आपके लिए खास हो सकते हैं। लंबे समय से ऊंचे स्तर पर चल रही कीमती धातुओं की कीमतों में सोमवार को बड़ी गिरावट देखने को मिली। चांदी (Silver) का भाव ₹8,437 प्रति किलोग्राम टूटकर करीब ₹2.35 लाख पर आ गया। वहीं सोने की कीमत में भी ₹4,453 की गिरावट दर्ज की गई और 10 ग्राम सोना करीब ₹1.55 लाख के स्तर पर पहुंच गया। सोने-चांदी के दाम में अचानक आई इस नरमी ने बाजार का रुख बदल दिया है। खासकर वे लोग जो लंबे समय से कीमतों में कमी का इंतजार कर रहे थे, उनके लिए आज की गिरावट ध्यान देने वाली है। Silver Price: चांदी में ₹8 हजार से ज्यादा की गिरावट आज चांदी की कीमत में एक ही दिन में बड़ी गिरावट देखने को मिली। Silver Price करीब ₹8,437 नीचे आकर ₹2.35 लाख प्रति किलो के आसपास पहुंच गया। Silver के भाव में पिछले कुछ समय से लगातार उतार-चढ़ाव बना हुआ है। सात महीने के आंकड़ों पर नजर डालें तो मौजूदा भाव की तुलना में चांदी करीब ₹1.51 लाख प्रति किलोग्राम तक नीचे आ चुकी है। यानी जिस धातु ने कुछ समय पहले निवेशकों का ध्यान खींचा था, उसमें अब काफी बड़ी गिरावट देखने को मिल रही है। Gold Price Today: सोना भी ₹4,453 सस्ता चांदी ही नहीं, Gold Price Today में भी बड़ी गिरावट आई है। सोने का भाव करीब ₹4,453 प्रति 10 ग्राम टूटकर ₹1.55 लाख के आसपास पहुंच गया। Gold की कीमतों में इतनी बड़ी गिरावट आम खरीदारों के लिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है। शादी या किसी खास मौके के लिए सोना खरीदने वाले परिवार अक्सर कीमतों में थोड़ी नरमी का इंतजार करते हैं। ऐसे में आज का भाव उनकी नजर में जरूर आया होगा। आखिर क्यों गिर रहे हैं सोने-चांदी के दाम? सोने और चांदी की कीमतें केवल स्थानीय बाजार की मांग से तय नहीं होतीं। अंतरराष्ट्रीय बाजार में इनके भाव, डॉलर की चाल, ब्याज दरों को लेकर उम्मीदें और निवेशकों की खरीद-बिक्री जैसे कई कारक कीमतों को प्रभावित करते हैं। खासकर चांदी में औद्योगिक मांग की भी अहम भूमिका होती है। इलेक्ट्रॉनिक्स और सोलर सेक्टर समेत कई उद्योगों में इसका इस्तेमाल होता है। इसलिए वैश्विक बाजार में मांग और आर्थिक गतिविधियों में बदलाव का असर चांदी के भाव पर जल्दी दिखाई दे सकता है। क्या अभी Gold-Silver खरीदना सही रहेगा? कीमतों में आज की गिरावट देखकर खरीदारों के मन में यह सवाल आना स्वाभाविक है कि क्या अभी सोना-चांदी खरीद लेना चाहिए? अगर खरीदारी आपकी जरूरत के लिए है तो मौजूदा भाव पर बाजार के अलग-अलग विक्रेताओं से रेट की तुलना की जा सकती है। लेकिन केवल एक दिन की गिरावट देखकर जल्दबाजी में निवेश का फैसला करना सही नहीं होगा। कीमती धातुओं के दाम आगे भी ऊपर-नीचे हो सकते हैं। ज्वेलरी खरीदते समय एक बात खास तौर पर ध्यान रखें। बाजार में दिखाई जाने वाली सोने की कीमत के अलावा GST, मेकिंग चार्ज और अन्य शुल्क भी बिल में जुड़ते हैं। इसलिए खरीदारी से पहले अंतिम कीमत जरूर पूछें। आज के Gold-Silver Rate की अहम बातें खरीदारों के लिए राहत या निवेशकों की चिंता? सोने और चांदी में आई आज की गिरावट को कोई खरीदार के लिए मौका मान सकता है, तो किसी निवेशक के लिए यह बाजार में बढ़े उतार-चढ़ाव का संकेत हो सकता है। फिलहाल सबसे जरूरी बात यह है कि खरीदारी करने से पहले अपने शहर का ताजा रेट, शुद्धता और सभी चार्ज की जानकारी जरूर जांच लें। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
PM Modi

SCO Summit में PM Modi और Pezeshkian की मुलाकात, Iran War के बाद पहली बातचीत

पश्चिम एशिया में जारी तनाव के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Modi) और ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान की बिश्केक में मुलाकात हुई। दोनों नेताओं की यह बैठक SCO Summit 2026 के दौरान हुई। हालिया ईरान-अमेरिका संघर्ष के बाद मोदी और पेजेश्कियान की यह पहली आमने-सामने की मुलाकात है, इसलिए इस बैठक पर दुनियाभर की नजरें टिकी हैं। मुलाकात ऐसे वक्त हुई है, जब पश्चिम एशिया की स्थिति लगातार संवेदनशील बनी हुई है। ईरान और अमेरिका के बीच तनाव का असर क्षेत्रीय सुरक्षा के साथ-साथ ऊर्जा और व्यापार पर भी पड़ रहा है। ऐसे माहौल में भारत और ईरान के शीर्ष नेताओं की आमने-सामने बातचीत को कूटनीतिक रूप से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। West Asia Crisis के बीच हुई बातचीत प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति पेजेश्कियान की बातचीत में पश्चिम एशिया की मौजूदा स्थिति प्रमुख मुद्दों में रही। इससे पहले भी दोनों नेताओं के बीच क्षेत्र में बढ़ते तनाव को लेकर संपर्क हुआ है। भारत लगातार क्षेत्र में तनाव कम करने, नागरिकों की सुरक्षा और बातचीत के जरिए समाधान की जरूरत पर जोर देता रहा है। भारत के लिए पश्चिम एशिया की स्थिति इसलिए भी अहम है क्योंकि इस क्षेत्र से बड़ी संख्या में भारतीयों का जुड़ाव है और ऊर्जा एवं व्यापार के लिहाज से भी यह क्षेत्र महत्वपूर्ण है। Iran के साथ रिश्तों पर भी नजर भारत और ईरान के रिश्ते केवल राजनीतिक संपर्क तक सीमित नहीं हैं। दोनों देशों के बीच व्यापार, कनेक्टिविटी और क्षेत्रीय सहयोग से जुड़े कई महत्वपूर्ण मुद्दे हैं। ऐसे समय में जब ईरान अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मुश्किल दौर से गुजर रहा है, भारत का उसके साथ संवाद बनाए रखना खास महत्व रखता है। बिश्केक में हुई मोदी-पेजेश्कियान बैठक इसी निरंतर कूटनीतिक संपर्क की एक अहम कड़ी मानी जा रही है। SCO Summit में एक मंच पर बड़े नेता बिश्केक में हो रहे Shanghai Cooperation Organisation (SCO) Summit में भारत, चीन, रूस, ईरान समेत कई देशों के शीर्ष नेता हिस्सा ले रहे हैं। प्रधानमंत्री मोदी की इस यात्रा में कई द्विपक्षीय बैठकों का कार्यक्रम भी है। रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग की मौजूदगी ने इस सम्मेलन को और महत्वपूर्ण बना दिया है। SCO के मंच पर क्षेत्रीय सुरक्षा, आर्थिक सहयोग और बदलते वैश्विक समीकरणों जैसे मुद्दों पर चर्चा हो रही है। मौजूदा अंतरराष्ट्रीय तनाव के बीच यह बैठक सदस्य देशों के लिए अपनी-अपनी कूटनीतिक प्राथमिकताएं रखने का अहम मंच भी बन गई है। भारत की Balanced Diplomacy पर टिकी नजर ईरान के साथ बातचीत के दौरान भारत के सामने एक तरफ अपने रणनीतिक और आर्थिक हित हैं, तो दूसरी ओर पश्चिम एशिया में शांति और स्थिरता की जरूरत। मोदी सरकार पहले भी अलग-अलग पक्षों के साथ संवाद बनाए रखने की नीति पर आगे बढ़ती रही है। ऐसे में बिश्केक में मोदी और पेजेश्कियान की मुलाकात को भारत की Balanced Foreign Policy के नजरिए से भी देखा जा रहा है। आने वाले दिनों में पश्चिम एशिया की स्थिति किस दिशा में जाती है और भारत इस संकट में अपनी कूटनीतिक भूमिका को किस तरह आगे बढ़ाता है, यह देखना दिलचस्प होगा। क्यों खास है यह मुलाकात? इस मुलाकात ने साफ कर दिया है कि पश्चिम एशिया के बदलते समीकरणों के बीच भारत ईरान समेत सभी प्रमुख पक्षों के साथ अपना संवाद बनाए रखना चाहता है। बिश्केक से हुई यह बैठक आने वाले समय में भारत की West Asia Policy के लिए भी महत्वपूर्ण संकेत दे सकती है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
CJP

5 सितंबर को Delhi March करेगा CJP, Supreme Court ने रोक लगाने से किया इनकार

राजधानी दिल्ली में 5 सितंबर को प्रस्तावित CJP March को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को बड़ा फैसला सुनाया। अदालत ने फिलहाल इस प्रदर्शन पर रोक लगाने से इनकार कर दिया। कोर्ट ने कहा कि ऐसी कोई ठोस परिस्थिति सामने नहीं है, जिसके आधार पर अभी से यह मान लिया जाए कि मार्च के दौरान कोई अप्रिय घटना होगी। साथ ही अदालत ने कानून-व्यवस्था बनाए रखने की जिम्मेदारी संबंधित प्रशासन और पुलिस पर छोड़ दी। CJP यानी Cockroach Janata Party ने 5 सितंबर को दिल्ली में शांतिपूर्ण मार्च निकालने का ऐलान किया है। संगठन के मुताबिक मार्च India Gate से Delhi Police Headquarters तक प्रस्तावित है। इस प्रदर्शन को लेकर पहले से ही सुरक्षा और कानून-व्यवस्था को लेकर सवाल उठ रहे थे। Supreme Court ने क्यों नहीं लगाई रोक? 5 सितंबर के मार्च पर पाबंदी लगाने की मांग को लेकर सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की गई थी। याचिका में दिल्ली में होने वाले प्रदर्शन को लेकर सुरक्षा संबंधी चिंताएं जताई गई थीं। सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने तत्काल हस्तक्षेप से इनकार करते हुए कहा कि फिलहाल ऐसी कोई “compelling circumstance” नहीं है, जिससे यह अनुमान लगाया जा सके कि प्रदर्शन के दौरान कुछ अप्रिय होगा। कोर्ट ने सभी पक्षों से कानून के दायरे में रहकर जिम्मेदारी से काम करने की उम्मीद जताई। अदालत ने याचिकाकर्ता को अपनी चिंताएं संबंधित पुलिस और प्रशासन के सामने रखने को भी कहा। यानी फिलहाल कोर्ट ने मार्च को रोकने के बजाय कानून-व्यवस्था से जुड़ा फैसला प्रशासन पर छोड़ दिया है। 5 सितंबर को क्यों निकलेगा CJP March? CJP ने यह मार्च सरकार पर पहले किए गए कथित वादों को पूरा नहीं करने के आरोपों के बीच घोषित किया है। संगठन का कहना है कि 25 जुलाई के आंदोलन के दौरान सरकार की ओर से कुछ आश्वासन दिए गए थे, लेकिन उन पर अपेक्षित कार्रवाई नहीं हुई। CJP ने खास तौर पर प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दर्ज FIR और युवाओं से जुड़े मुद्दों को उठाया है। संगठन का दावा है कि इन मामलों में कार्रवाई में देरी के कारण दोबारा आंदोलन का रास्ता अपनाना पड़ा। March में कौन शामिल हो सकता है? CJP के अनुसार प्रस्तावित मार्च में छात्र और युवा संगठनों के अलावा NEET से जुड़े मामलों में प्रभावित परिवारों तथा कथित पुलिस कार्रवाई से प्रभावित लोगों के शामिल होने की बात कही गई है। संगठन ने इसे शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन बताया है। वहीं, दिल्ली पुलिस ने पहले कहा था कि प्रस्तावित मार्च के लिए उसकी अनुमति मांगी गई थी या नहीं, इस संबंध में प्रक्रिया अलग से देखी जा रही है। पुलिस सुरक्षा और ट्रैफिक व्यवस्था को ध्यान में रखते हुए तैयारियों का आकलन कर रही है। अब प्रशासन के सामने बड़ी जिम्मेदारी सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले के बाद 5 सितंबर के मार्च को लेकर अब नजर दिल्ली पुलिस और प्रशासन की तैयारियों पर रहेगी। India Gate और Delhi Police Headquarters के बीच प्रस्तावित रूट पर भीड़, ट्रैफिक और सुरक्षा व्यवस्था को संभालना प्रशासन के लिए अहम चुनौती होगी। कोर्ट ने साफ संकेत दिया है कि लोकतांत्रिक तरीके से विरोध का अधिकार अपनी जगह है, लेकिन प्रदर्शन के दौरान कानून का पालन करना भी उतना ही जरूरी है। अगर स्थिति भविष्य में गंभीर होती है, तो संबंधित पक्ष कानूनी उपाय अपना सकते हैं। 10 सितंबर को फिर होगी सुनवाई सुप्रीम कोर्ट ने मामले को लंबित याचिकाओं के साथ 10 सितंबर को सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया है। फिलहाल 5 सितंबर के मार्च पर कोई तत्काल रोक नहीं है और अदालत ने सभी पक्षों से शांतिपूर्ण तथा जिम्मेदार व्यवहार की अपेक्षा की है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
Hanuman Ansh

₹2 करोड़ की Hanuman Ansh ने किया कमाल, शानदार Collection के बाद डायरेक्टर हुए भावुक

बॉक्स ऑफिस पर कई बार ऐसी फिल्में आ जाती हैं, जिनकी शुरुआत देखकर कोई अंदाजा नहीं लगा पाता कि आगे चलकर कहानी इतनी बदल जाएगी। ‘हनुमान अंश’ (Hanuman Ansh) भी कुछ ऐसी ही फिल्म साबित हो रही है। शुरुआत में धीमी रफ्तार से आगे बढ़ी इस फिल्म ने तीसरे हफ्ते के बाद ऐसी छलांग लगाई कि अब इसकी चर्चा हर तरफ हो रही है। नीम करौली बाबा के जीवन और आध्यात्मिक विचारों से प्रेरित ‘हनुमान अंश’ को विशाल चतुर्वेदी ने लिखा और डायरेक्ट किया है। करीब 2 करोड़ रुपये के बजट में बनी इस फिल्म की कमाई अब उसके शुरुआती प्रदर्शन से बिल्कुल अलग तस्वीर दिखा रही है। 10 लाख की Opening से शुरू हुआ सफर Hanuman Ansh ने सिनेमाघरों में पहले दिन करीब 10 लाख रुपये की कमाई की थी। पहले दो हफ्तों में भी फिल्म की रफ्तार काफी धीमी रही। यही वजह थी कि शुरुआत में कुछ लोगों ने फिल्म के बॉक्स ऑफिस भविष्य पर सवाल उठाने शुरू कर दिए थे। लेकिन फिल्म ने हार नहीं मानी। तीसरे हफ्ते में दर्शकों की संख्या बढ़ने लगी और Word of Mouth ने पूरा खेल बदल दिया। रिपोर्ट्स के मुताबिक, तीसरे हफ्ते में फिल्म ने करीब 10 करोड़ रुपये से ज्यादा का कारोबार किया, जो शुरुआती प्रदर्शन के मुकाबले जबरदस्त उछाल था। 24वें दिन Box Office पर बड़ा उछाल फिल्म की सबसे ज्यादा चर्चा उसके चौथे हफ्ते के प्रदर्शन को लेकर हो रही है। रिपोर्ट्स के अनुसार, 24वें दिन ‘हनुमान अंश’ ने करीब ₹12.75 करोड़ का India Net Collection किया और कुल कमाई ₹40 करोड़ के पार पहुंच गई। वहीं कुछ अन्य ट्रेड रिपोर्ट्स में आंकड़े अलग बताए गए हैं, इसलिए अंतिम कलेक्शन में अंतर संभव है। यह उछाल इसलिए भी खास है क्योंकि फिल्म की शुरुआत महज 10 लाख रुपये से हुई थी। यानी कुछ ही हफ्तों में फिल्म ने बॉक्स ऑफिस पर पूरी तरह अपना रंग बदल दिया। डायरेक्टर विशाल चतुर्वेदी हुए Emotional फिल्म की बढ़ती सफलता से डायरेक्टर विशाल चतुर्वेदी भी भावुक नजर आए। उन्होंने शुरुआती दौर को याद करते हुए बताया कि एक समय फिल्म के शो कम होने की स्थिति बन गई थी। लेकिन दर्शकों के रिस्पॉन्स ने हालात बदल दिए। फिल्म को मिल रहे प्यार का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि शो की संख्या लगातार बढ़ाई जा रही है। डायरेक्टर का कहना है कि अभी फिल्म के शोज और बढ़ सकते हैं। कम बजट, लेकिन बड़ा असर ‘हनुमान अंश’ की कहानी सिर्फ कमाई की वजह से चर्चा में नहीं है। फिल्म की खासियत यह है कि इसे बड़े स्टार्स और भारी-भरकम बजट वाली फिल्मों के बीच अपनी अलग जगह बनाने में सफलता मिली है। फिल्म के विषय और आध्यात्मिक कहानी से जुड़े दर्शकों ने इसे पसंद किया। सोशल मीडिया और दर्शकों की आपसी चर्चाओं ने भी फिल्म को धीरे-धीरे ज्यादा लोगों तक पहुंचाने में अहम भूमिका निभाई। यही Word of Mouth फिल्म की सबसे बड़ी ताकत बनकर सामने आया है। ‘हनुमान अंश’ ने बदल दी Box Office की कहानी जिस फिल्म की शुरुआत बेहद मामूली रही, वही अब चौथे हफ्ते में बड़ी फिल्मों को टक्कर देती नजर आ रही है। रिपोर्ट्स में इसे 2026 की चौंकाने वाली Sleeper Hit में गिना जा रहा है। ‘हनुमान अंश’ की कहानी बॉक्स ऑफिस पर एक बात जरूर साबित करती है—हर फिल्म को पहले दिन करोड़ों की Opening की जरूरत नहीं होती। अगर कहानी दर्शकों के दिल तक पहुंच जाए, तो उसका असर देर से सही, लेकिन काफी दूर तक जा सकता है। फिलहाल फिल्म के बढ़ते शोज और दर्शकों की दिलचस्पी ने मेकर्स की उम्मीदें बढ़ा दी हैं। डायरेक्टर के मुताबिक, सिनेमाघरों में फिल्म का सफर अभी जारी है और आने वाले दिनों में शोज की संख्या और बढ़ सकती है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!

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