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Rajasthan एथेनॉल प्रोजेक्ट के विरोध में हिंसा, Hanumangarh में आगजनी व बवाल

Rajasthan के हनुमानगढ़ में एथेनॉल फैक्ट्री को लेकर चल रहा तनाव सोमवार को अचानक बढ़ गया। कई दिनों से विरोध कर रहे किसानों ने टिब्बी इलाके में हुई महापंचायत के बाद फैक्ट्री साइट की ओर कूच किया। भीड़ बड़ी थी, गुस्सा भी उतना ही। पुलिस ने बैरिकेड लगाकर रास्ता रोकने की कोशिश की, लेकिन किसान आगे बढ़ते गए और देखते-देखते माहौल बिगड़ गया। कैसे भड़की हिंसा? प्रदर्शन के बीच कुछ लोगों ने फैक्ट्री की दीवार गिरा दी। उसके बाद भीड़ में मौजूद उग्र समूह ने निर्माणाधीन परिसर में खड़े दर्जनों वाहनों को आग लगा दी। रिपोर्टों के मुताबिक 10 से 16 वाहन— जिनमें पुलिस की जीपें, मशीनें और निजी गाड़ियाँ शामिल थीं — जलकर पूरी तरह नष्ट हो गए।स्थिति तेजी से बिगड़ती देखकर पुलिस को लाठीचार्ज, आंसू-गैस और रबर बुलेट तक का इस्तेमाल करना पड़ा। इस झड़प में कई किसान, पुलिसकर्मी और आसपास मौजूद लोग घायल हो गए। क्यों भड़का इतना विरोध? किसानों का कहना है कि एथेनॉल फैक्ट्री उनके खेतों, भूजल और हवा—तीनों को नुकसान पहुंचा सकती है। उनका डर साफ है: किसानों का तर्क है कि “विकास ज़रूरी है, लेकिन हमारी ज़िंदगी और खेत किस कीमत पर?” फैक्ट्री और प्रशासन का पक्ष फैक्ट्री प्रबंधन का कहना है कि यह प्रोजेक्ट Zero Liquid Discharge Technology पर आधारित है, जिसमें गंदा पानी रिसने का खतरा नहीं होगा। कंपनी दावा करती है कि स्थानीय लोगों को रोजगार मिलेगा और पूरे क्षेत्र की अर्थव्यवस्था मजबूत होगी।प्रशासन भी यही कहता है कि सभी पर्यावरणीय मानकों का पालन किया जाएगा। लेकिन ग्रामीणों का भरोसा टूट चुका है—उन्हें लगता है कि वादों की बजाय व्यवहार ज्यादा मायने रखता है। घटना के बाद क्या बदलाव हुए? हिंसा रोकने के लिए जिला प्रशासन ने तुरंत: माहौल अभी भी तनावपूर्ण है, लेकिन नियंत्रण में बताया जा रहा है। आगे क्या? स्थानीय लोगों का कहना है कि समस्या फैक्ट्री से ज्यादा बातचीत की कमी है। किसानों को लगता है कि उनकी चिंता को गंभीरता से नहीं लिया गया।यदि कंपनी और प्रशासन, किसानों को पारदर्शिता के साथ भरोसा दिलाए—पर्यावरण परीक्षण, पानी की खपत, कचरा प्रबंधन और स्थानीय रोजगार पर स्पष्ट लिखित गारंटी दे—तो माहौल शांत हो सकता है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Goa

Goa Fire हादसा Thailand में लूथरा ब्रदर्स हिरासत में, हथकड़ी में पहली तस्वीर सामने

गोवा (Goa) में 6 दिसंबर 2025 की रात शुरू हुई एक पार्टी कुछ ही मिनटों में दर्द और अफरा-तफरी का सबसे बड़ा हादसा बन गई। अर्पोरा स्थित Birch by Romeo Lane नाइटक्लब में लगी आग ने 25 लोगों की जान ले ली—कुछ पर्यटक, कुछ कर्मचारी, और कुछ वे लोग जो बस एक खुशगवार रात बिताने आए थे। इस घटना ने पूरे देश को झकझोर दिया है। लोगों के मन में सबसे बड़ा सवाल यही है—इतना बड़ा क्लब बिना सुरक्षा इंतज़ाम के कैसे चल रहा था? आग कैसे फैली — चंद सेकंड में मची तबाही प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार क्लब के अंदर चल रहे फायर-शो के दौरान एक चिंगारी ने सजावट में लगी ज्वलनशील सामग्री को पकड़ लिया।आग तेजी से फैली और धुआँ इतना घना था कि बाहर निकलने का रास्ता ढूँढना भी मुश्किल हो गया। क्लब में: ये सभी बातें बाद में पुलिस और प्रशासन की शुरुआती रिपोर्ट में सामने आईं। हादसे के बाद असली सवाल: मालिक कहाँ गायब हो गए? क्लब के मालिक सौरभ लुथरा और गौरव लुथरा पर गंभीर धाराओं में FIR दर्ज हुई।लेकिन जांच शुरू होते ही दोनों भाई भारत छोड़कर थाईलैंड पहुँच चुके थे।उनकी फ्लाइट रात में ही बुक कराई गई, जब गोवा में लोग अपनी जान बचाने के लिए संघर्ष कर रहे थे। इस भागदौड़ ने पूरे मामले को और संवेदनशील बना दिया। सोशल मीडिया से लेकर स्थानीय लोगों तक सभी में गुस्सा बढ़ गया। पासपोर्ट रद्द — सरकार का बड़ा एक्शन गोवा (Goa) पुलिस ने विदेश मंत्रालय (MEA) को दोनों भाइयों के पासपोर्ट रद्द करने की सिफारिश की।सरकार ने तुरंत कार्रवाई करते हुए पासपोर्ट सस्पेंड/इम्पाउंड कर दिए। इसका मतलब साफ है—वह देश से बाहर हैं तो भी वापस लाए जा सकते हैं, और भारत लौटे बिना बचना असंभव है। Interpol का Blue Corner Notice भी जारी किया गया है। प्रशासन की सख़्त कार्रवाई — अवैध निर्माण पर बुलडोज़र हादसे के बाद प्रशासन ने क्लब से जुड़े सभी निर्माणों की जांच शुरू की।कई हिस्सों को अवैध पाया गया, जिन पर कार्रवाई करते हुए बुलडोज़र चलाया गया। मुख्यमंत्री प्रमोद सावंत ने ऐलान किया कि: लोगों की प्रतिक्रिया — सिर्फ दुख नहीं, गुस्सा भी स्थानीय लोग, पर्यटक और क्लब इंडस्ट्री से जुड़े लोग एक ही बात कह रहे हैं:अगर सुरक्षा नियम लागू होते, तो 25 परिवार आज उजड़ते नहीं। कई लोग क्लब के पुराने वीडियो साझा कर रहे हैं, जिनमें भीड़ भरे माहौल में सुरक्षा इंतज़ामों की कमी साफ दिखती है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Surya Kant

CJI Surya Kant Remarks on Rohingya 44 Former Judges का जोरदार समर्थन और विवाद

दिसंबर 2025 में भारत की सुप्रीम कोर्ट में रोहिंग्या शरणार्थियों से जुड़े एक मामले ने सुर्खियां बटोरीं। इस मामले में Chief Justice of India (CJI) Surya Kant की टिप्पणी पर विवाद खड़ा हो गया। कोर्ट ने रोहिंग्या प्रवासियों के कानूनी दर्जे और भारत में उनकी स्थिति पर सवाल उठाए, जिससे कुछ पूर्व न्यायाधीश और कानूनी विशेषज्ञों ने आपत्ति जताई। क्या हुआ था: CJI की टिप्पणी सुनवाई के दौरान CJI सूर्यकांत की पीठ ने पूछा कि क्या ऐसे लोग, जो भारत में अनधिकृत रूप से आए हैं, उन्हें “रेड कार्पेट” बिछाकर स्वागत करना चाहिए। इस पर कई पूर्व जजों और वरिष्ठ वकीलों ने कहा कि इस तरह के सवाल शरणार्थियों की गरिमा और संवैधानिक अधिकारों के खिलाफ हैं। उनके अनुसार, कोर्ट को ऐसे मामलों में संवैधानिक और मानवाधिकार दृष्टिकोण अपनाना चाहिए। 44 Former Judges का समर्थन इस विवाद के जवाब में 44 पूर्व न्यायाधीशों ने एक संयुक्त बयान जारी कर CJI सूर्यकांत के खिलाफ “motivated campaign” को गलत बताया। उनके प्रमुख बिंदु थे: पूर्व जजों ने जोर देकर कहा कि अदालत का काम संवैधानिक दायित्व और मानव गरिमा दोनों को ध्यान में रखकर न्याय करना है। क्यों है यह विवाद महत्वपूर्ण यह मामला सिर्फ एक टिप्पणी का विवाद नहीं है। यह मानवाधिकार, राष्ट्रीय सुरक्षा और कानूनी प्रक्रिया के बीच संतुलन पर सवाल खड़ा करता है। भारत में शरणार्थियों के लिए कोई स्थायी कानून नहीं है, इसलिए अदालतें इस पर निर्णय लेते समय संवेदनशीलता और विवेक दोनों दिखाती हैं। साथ ही, यह विवाद यह भी दिखाता है कि: CJI सूर्यकांत के विवादित बयान और 44 पूर्व जजों के समर्थन ने एक बार फिर न्यायपालिका में संतुलन, स्वतंत्रता और संवैधानिक जिम्मेदारी पर बहस छेड़ दी है। यह मामला हमें याद दिलाता है कि शरणार्थियों और प्रवासियों के साथ न्याय करते समय मानवता, संवैधानिक अधिकार और कानूनी विवेक को एक साथ रखना कितना जरूरी है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Australia

Australia Social Media Rules बच्चों पर Facebook, Instagram, TikTok Ban

Australia में 10 दिसंबर 2025 से एक बड़ा बदलाव शुरू हुआ है। अब 16 साल से कम उम्र के बच्चे सोशल मीडिया अकाउंट नहीं बना सकते। यह नियम किसी छोटे शहर या राज्य में नहीं, बल्कि पूरे देश में लागू हुआ है। इसे दुनिया का पहला ऐसा कदम माना जा रहा है जहां एक सरकार ऑनलाइन प्लेटफ़ॉर्म्स पर इतनी सख्ती से नियंत्रण कर रही है। क्यों लिया गया यह फैसला? कई सालों से विशेषज्ञ और माता-पिता एक ही बात कह रहे थे— “सोशल मीडिया बच्चों के दिमाग और आत्मविश्वास पर असर डाल रहा है।” इसी चिंता के बीच सरकार ने कानून बनाया। उद्देश्य साफ है: सरकार का कहना है कि बड़े प्लेटफ़ॉर्म बच्चों से मुनाफा कमाते हैं, लेकिन जिम्मेदारी नहीं लेते। नया नियम यही संतुलन बदलने की कोशिश है। किन प्लेटफ़ॉर्म्स पर बैन? प्रतिबंध सबसे लोकप्रिय सोशल मीडिया ऐप्स पर लागू है: अगर कोई प्लेटफ़ॉर्म नियम तोड़ता है, तो उस पर भारी जुर्माना लगाया जा सकता है। लाखों अकाउंट बंद: बच्चों की मिलीजुली प्रतिक्रिया नियम लागू होते ही लाखों किशोरों के अकाउंट बंद या हटाए गए।बहुत से बच्चों ने आखिरी पोस्ट डाले: “मुझे दोस्तों की याद आएगी।”“ये अंत जैसा लग रहा है, लेकिन शायद अच्छा भी हो।” किसी ने राहत की सांस ली, तो किसी को गुस्सा आया।पर एक बात स्पष्ट थी — यह बदलाव छोटा नहीं है। माता-पिता क्या कह रहे हैं? कुछ माता-पिता ने राहत महसूस की: “कम फोन, ज्यादा पढ़ाई… शायद अब घर में शांति होगी।” दूसरी तरफ कुछ परिवार चिंतित भी हैं: “कई बच्चे ऑनलाइन मदद और दोस्ती पाते हैं। पूरी तरह बैन करना सही तो नहीं लगता।” यह द्वंद्व पूरे देश में देखा जा रहा है। क्या इससे बच्चे छुपकर इंटरनेट इस्तेमाल करेंगे? विशेषज्ञों को डर है: यानी, समस्या पूरी तरह खत्म नहीं होती — बस दिशा बदलती है। क्या यह दुनिया के लिए उदाहरण बनेगा? दुनिया भर की नजरें अब ऑस्ट्रेलिया पर हैं। किसी भी तरह, यह कदम डिजिटल दुनिया के इतिहास में एक टर्निंग पॉइंट है। आगे क्या? अगले महीनों में देखा जाएगा: सच यह है:सोशल मीडिया सिर्फ ऐप नहीं है—यह आज के बच्चों का सामाजिक जीवन भी है।उसके दरवाज़े बंद करना आसान है, लेकिन उसकी जगह क्या आएगा — यह बड़ा सवाल है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Goa

Goa Night Club Fire गोवा क्लब हादसा, 25 मौतें Luthra Brothers फरार, Ajay Gupta Arrest

गोवा (Goa) की सर्द रात, तेज़ संगीत, भरी भीड़ और अचानक उठती आग।6 दिसंबर 2025 की वह रात कभी नहीं भूली जाएगी।अर्पोरा के मशहूर नाइट क्लब ‘Birch by Romeo Lane’ में लगी भीषण आग ने देखते ही देखते 25 जिंदगियाँ छीन लीं।यह सिर्फ एक हादसा नहीं, बल्कि लापरवाही की दर्दनाक कहानी बन गया। आग कैसे लगी? जांच के शुरुआती निष्कर्षों में सामने आया कि: धुआँ इतनी तेजी से फैला कि कई लोग भाग ही नहीं पाए।आँखों के सामने जलती हुई ज़िंदगियाँ —जो बाहर निकले, उनकी आवाज़ आज भी कांपती है। क्लब का मालिक कौन? इस नाइट क्लब का संचालन Luthra Brothers – सौरभ और गौरव लूथरा करते थे।उनके साथ Ajay Gupta और Surinder Khosla भी पार्टनर बताए जाते हैं। हादसे के तुरंत बाद: Ajay Gupta Arrest – पहली प्रतिक्रिया दिल्ली में पुलिस ने Ajay Gupta को हिरासत में लिया।उनका कहना था: “मैं सिर्फ पार्टनर हूँ… मैं कुछ नहीं जानता।” लेकिन जांच टीम के पास ऐसे कागज़ हैं जिनसे पता चलता है कि मालिकाना हिस्सेदारी तीनों के पास थी और लाइसेंस के मामले में गंभीर सवाल हैं। उनके खिलाफ Look Out Circular पहले से जारी था। सरकार की सख्त कार्रवाई हादसे के बाद गोवा सरकार तुरंत हरकत में आई: यह कार्रवाई सिर्फ गोवा तक सीमित नहीं रही —उत्तराखंड जैसे राज्यों ने भी अपने यहाँ सुरक्षा जांच शुरू कर दी। मानवीय पहलू: अंदर कैसा था? बचे हुए लोग बताते हैं: कई परिवारों ने एक साथ अपने लोग खो दिए।हंसी और संगीत की जगह अब सन्नाटा और सवाल हैं। सबसे बड़ा सवाल: ज़िम्मेदार कौन? यह हादसा सिर्फ आग की वजह से नहीं हुआ।बड़ी वजहें थीं: लोग पूछ रहे हैं: आगे क्या? अब सबकी नज़रें हैं: हादसा बहुत कुछ बदल सकता है।ब्रेकिंग न्यूज़ के पीछे असली कहानी है — खोई हुई जिंदगियाँ। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Rahul Gandhi

Election Commission under Pressure? राहुल बोले BJP फायदा उठा रही है, संस्थाएँ Neutral नहीं रहीं

कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने एक बार फिर बड़ा बयान दिया है। उनका कहना है कि देश की अहम संस्थाएँ आज पहले जितनी स्वतंत्र नहीं रह गईं। राहुल गांधी का आरोप है कि RSS सभी प्रमुख संस्थाओं पर नियंत्रण चाहता है और इसी दिशा में लगातार कदम बढ़ रहे हैं। उन्होंने दावा किया कि Election Commission को भी “कब्जे में लेने की कोशिश” हो रही है, जिससे चुनाव की निष्पक्षता पर सवाल खड़े होते हैं। राहुल गांधी का मानना है कि अगर चुनाव आयोग पर दबाव बढ़ेगा, तो इसका सीधा असर लोकतंत्र पर पड़ेगा। “चुनाव आयोग तटस्थ नहीं दिख रहा” – राहुल गांधी राहुल गांधी के मुताबिक चुनाव लोकतंत्र की रीढ़ होते हैं। उन्होंने कहा कि: “अगर संस्थाएँ neutral नहीं रहेंगी, तो देश में free and fair elections कैसे होंगे? जब Election Commission पर दबाव होगा, तो विपक्ष के लिए मैदान बराबर नहीं रहेगा।” उन्होंने आरोप लगाया कि चुनावों में भाजपा को फायदा दिलाने के लिए संस्थाओं का इस्तेमाल किया जा रहा है। हालांकि, इन आरोपों पर सरकार या आयोग की तरफ से कोई सीधी प्रतिक्रिया नहीं आई है। लोकतंत्र की चिंता जताई राहुल गांधी ने कहा कि संस्थाओं का उद्देश्य संविधान की रक्षा करना है, न कि किसी संगठन या पार्टी की सुविधा देना। उनका कहना है: “संस्थाएँ strong और independent रहनी चाहिए। तभी लोकतंत्र सुरक्षित रहेगा।” उन्होंने मीडिया, एजेंसियों और चुनाव प्रक्रिया को लेकर भी सवाल उठाए और कहा कि विपक्ष की आवाज दबाने की कोशिश की जा रही है। विपक्ष की अपील – “देश को जागरूक रहना होगा” राहुल गांधी ने नागरिकों, सोशल संगठनों और राजनीतिक दलों से अपील की कि वे लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा के लिए एकजुट हों। उन्होंने कहा कि यह मुद्दा किसी एक पार्टी का नहीं, बल्कि पूरे देश का है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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NDA

PM Modi NDA Meeting Highlights बिहार की जीत पर नई Energy और Big Plans

बिहार चुनाव के शानदार नतीजों के बाद संसद भवन में हुई NDA Parliamentary Party Meeting पूरी तरह उत्साह और भरोसे के माहौल में हुई। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस बैठक में खुलकर कहा कि बिहार की जीत ने उन्हें “नई ऊर्जा और नया आत्मविश्वास” दिया है। उन्होंने सांसदों को याद दिलाया कि जनता ने उन्हें केवल वोट नहीं दिया, बल्कि उम्मीदें दी हैं, और इन उम्मीदों को पूरा करने के लिए अब तेज़ और साफ काम की ज़रूरत है। बिहार में NDA की जीत: भरोसे की कहानी बिहार में NDA की जीत: भरोसे की कहानी हाल ही में हुए चुनावों में NDA ने 243 में से 202 सीटें प्राप्त कीं। यह नतीजे दिखाते हैं कि लोगस्थिरता चाहते हैंविकास चाहते हैंऔर गठबंधन पर भरोसा करते हैं बैठक में बिहार के सभी सांसद मौजूद रहे। माहौल उत्साहपूर्ण था – किसी पार्टी के चेहरे पर थकान नहीं, बल्कि जीत की चमक थी। PM Modi का साफ संदेश: अनुशासन पहले अपने भाषण में प्रधानमंत्री ने एक बात बहुत स्पष्ट कही: “अनुशासन ही हमारी ताक़त है। नियम तोड़ने वालों पर कड़ी कार्रवाई होगी।” यह संदेश सिर्फ चेतावनी नहीं था, बल्कि दिशा भी था।उन्होंने कहा कि अब प्रदर्शन और परिणाम ही सबसे बड़ा पैमाना होंगे। Action और Accountability: सरकार का अगला फोकस बैठक में यह भी सामने आया कि इन पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। उदाहरण के तौर पर, ₹830 करोड़ से अधिक की राशि तुरंत जारी किए जाने का उल्लेख किया गया। यह बताता है कि केंद्र जनता से जुड़े फैसलों में देर नहीं करना चाहता। NDA Unity: BJP + JDU का तालमेल बिहार की राजनीति में एक समय अनिश्चितता थी, लेकिन अब तस्वीर साफ है। नीतीश कुमार सरकार को चलाते हैंबीजेपी अधिक सक्रिय और मज़बूत भूमिका में दिख रही है PM मोदी ने सहयोगी दलों को इशारे में याद दिलाया कि Parliament + Meeting: दो मोर्चों पर सक्रिय PM उसी दिन संसद में वंदे मातरम् की 150वीं वर्षगांठ पर भी विशेष चर्चा चल रही थी।PM Modi दोनों जगह मौजूद रहे। यह दिखाता है कि राजनीतिक ज़िम्मेदारी और संसदीय परंपरा – दोनों को वे बराबर महत्व देते हैं। आगे क्या? विकास की रफ्तार बढ़ेगी बैठक का सार एक ही था: काम, काम और सिर्फ काम। आने वाले महीनों में सब तेज़ होने की उम्मीद है। प्रधानमंत्री का संदेश सरल था: “जनता ने हमें प्रेम दिया है। अब हमारी बारी है कि हम परिणाम दें।” हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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असीम मुनीर

Indo-Pak Border Alert असीम मुनीर बोले – हमला हुआ तो जवाब और तेज़ होगा

पाकिस्तान के चीफ़ ऑफ़ डिफ़ेन्स फ़ोर्सेज़ (CDF) और सेना प्रमुख असीम मुनीर ने हाल ही में एक बयान दिया जिसने Indo-Pak संबंधों में फिर से हलचल पैदा कर दी। उन्होंने कहा कि अगर भारत कोई भी “आक्रामक कदम” उठाता है, तो पाकिस्तान की प्रतिक्रिया “तेज़, सख़्त और प्रभावी” होगी। यह बयान सिर्फ़ सैन्य चेतावनी नहीं, बल्कि एक राजनैतिक संकेत भी माना जा रहा है, क्योंकि पाकिस्तान की सेना एक नए ढांचे में काम करना शुरू कर चुकी है। New Defence System: तीनों सेनाओं की संयुक्त कमान हाल में हुए सैन्य सुधारों के बाद: अब एक ही unified command के तहत काम करेंगी। इसका leadership असीम मुनीर के पास है। इसे पाकिस्तान में historic change कहा जा रहा है।विशेषज्ञ मानते हैं कि इससे: निर्णय लेने की स्पीड बढ़ेगीऑपरेशन में तालमेल बेहतर होगासीमा सुरक्षा मजबूत होगी यानी अगर कोई तनाव बढ़ा, तो प्रतिक्रिया ज़्यादा संगठित और तेज़ हो सकती है। असीम मुनीर ने क्या कहा? अपने Address में मुनीर ने मुख्य बातें कही: उनका स्वर confident था, और संदेश साफ – आवाज़ उठाओगे तो जवाब तैयार है। India की प्रतिक्रिया कैसी रही? भारत की तरफ़ से इस बयान को ज़्यादातर नेताओं ने political rhetoric बताया।रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि इस तरह के बयान पाकिस्तान की कमज़ोर स्थिति दिखाते हैं। अन्य analysts ने सुझाव दिया कि भारत को: military strengthborder securitydiplomatic strategy पर ध्यान रखना चाहिए, और बिना वजह तनाव नहीं बढ़ाना चाहिए। Why This Matters: यह सिर्फ़ बयान नहीं, संकेत भी है दक्षिण एशिया में स्थिति संवेदनशील है। दोनों देश: ऐसे में किसी भी उकसावे से हालत बिगड़ सकती है। लेकिन एक मानवीय पहलू भी है – सीमा के दोनों तरफ़ लोग शांति चाहते हैं।लोगों की पहली इच्छा होती है: यही कारण है कि हर बड़े बयान के पीछे चिंता भी छिपी रहती है। Future Perspective: आगे क्या होगा? कुछ चीजें देखने लायक होंगी: क्या Pakistan border पर deployment या drill बढ़ाता है?भारत की कूटनीति क्या रुख लेती है?क्या global powers mediation में आएंगी? अगर दोनों देश संवाद करें, तो tension कम हो सकता है।लेकिन अगर बयानबाज़ी बढ़ी, तो हालात खतरनाक भी हो सकते हैं। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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7वें दिन भी 250+ flight रद्द, IndiGo पर लोगों की परेशानी

7वें दिन भी 250+ flight रद्द, IndiGo पर लोगों की परेशानी

IndiGo का संकट सातवें दिन भी थमा नहीं — आज देशभर में 250 से भी ज़्यादा उड़ानें रद्द कर दी गईं। लाखों यात्री अपने गंतव्य के लिए फंसे हुए हैं, सामान और रिफंड की स्थिति अभी तक अनिश्चित। Supreme Court of India ने सुनवाई से किया इनकार यात्रियों ने रद्द उड़ानों और देरी से हुए नुकसान के लिए चाही थी तुरंत न्याय — लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने कहा, “हम एयरलाइन नहीं चलाते, इसलिए सुनवाई नहीं करेंगे।” यह कहकर अदालत ने मामले को अस्वीकृत कर दिया, जिससे यात्रियों की उम्मीदें टूट गईं। यात्री परेशान — लंबा इंतजार, रिफंड का इंतज़ार, और भविष्य अनिश्चित इस संकट ने न सिर्फ यात्रियों को प्रभावित किया है, बल्कि उन परिवारों को भी परेशानी में डाला है, जो अचानक मिले या लौटने वाले थे। समस्या की जड़ — सिर्फ रद्द उड़ान नहीं, प्रणाली में खामियां विशेषज्ञों का कहना है कि यह समस्या केवल एक-दो दिन की नहीं है। इंडिगो में पायलट और क्रू की कमी, नई ड्यूटी नियमों का जल्दबाजी में लागू होना, और शेड्यूलिंग में घबराहट — इन सब कारणों ने मिलकर आज का संकट खड़ा किया है। कई यात्रियों ने बताया कि देरी-रद्दीकरण और खराब व्यवस्था ने उनकी ज़िंदगियाँ प्रभावित कर दी हैं — ऐसा लग रहा है कि कोई भविष्य का भरोसा नहीं है। अब आगे क्या? — जवाबदेही, सुधार और यात्रियों की आवाज़ हमें उम्मीद है कि इंडिगो-संकट जितनी भी बड़ी हो — लेकिन न्याय, पारदर्शिता और सुधार की ज़रूरत पहले से कहीं ज़्यादा है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Vande Mataram

Vande Mataram Special Session वंदे मातरम् के 150 साल संसद में आवाजें और भावनाएँ

देश की संसद में सोमवार का दिन इतिहास की यादों से भरा रहा। वंदे मातरम् के 150 साल पूरे होने पर लोकसभा में स्पेशल डिस्कशन (Special Discussion) रखा गया, जिसकी शुरुआत प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने की। हर वक्ता के लिए यह सिर्फ एक गीत नहीं, बल्कि आजादी की भावना और भारतीय पहचान का प्रतीक था। 150 Years of Vande Mataram: भावनाएँ, इतिहास और बहस जब पीएम मोदी ने बोलना शुरू किया, सदन शांत था। उन्होंने कहा कि इस गीत ने आज़ादी की लड़ाई में नवीन ऊर्जा दी और भारतीयों के दिलों में स्वाभिमान जगाया।बहस के दौरान कई बार इस बात का जिक्र आया कि वंदे मातरम् के नारे से अंग्रेजों की कफन कस जाती थी, और इसके सुर स्वतंत्रता सेनानियों को हिम्मत देते थे। विपक्ष की तरफ से राहुल गांधी और अन्य सांसदों ने भी विचार रखे।उनका कहना था कि गीत की महत्ता पर कोई सवाल नहीं, लेकिन किसी भी नागरिक को इसे गाने के लिए मजबूर करना, संविधान की भावना से मेल नहीं खाता। विवाद क्यों? इसे लेकर देश में हमेशा दो दृष्टिकोण रहे हैं: समर्थन में चिंता में कई नेताओं ने कहा कि प्यार और सम्मान मजबूरी से नहीं आते।यह ऐसा गीत है जिसे दिल से गाया जाए तो ही उसकी सुंदरता सामने आती है। 10 घंटे की चर्चा, पर सवाल वही पूरे दिन चली चर्चा के बाद भी सवाल वही रहा —क्या वंदे मातरम् को Compulsory बनाना चाहिए? अधिकांश वक्ताओं ने स्वीकार किया कि: संसद में यह बार-बार कहा गया कि भारत की ताकत उसकी विविधता (Diversity) है।यही वह देश है जहां कई धर्म, भाषाएँ और विचार एक साथ चलते हैं। Human Touch: भावनाओं में भी नीति छुपी है बहुत से सांसदों के चेहरे पर भावनाएँ साफ थीं।जब उन्होंने अपने बचपन की स्मृतियाँ, स्कूल की परेड या स्वतंत्रता दिवस के कार्यक्रम याद किए, तो लगा कि यह सिर्फ राजनीतिक मुद्दा नहीं, बल्कि व्यक्तिगत जुड़ाव भी है। एक वरिष्ठ सांसद ने कहा: “जब पहली बार मैंने इसे स्कूल में गाया, मुझे लगा कि मैं सच में भारत मां के लिए कुछ कर रहा हूँ। आज भी वही अहसास जीवित है।” इस तरह की छोटी बातें बहस को मानवीय स्पर्श देती हैं। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Gold Mining: ऑस्ट्रेलिया में सोने की नई खोज से बदलेगी तस्वीर, भारत को मिल सकता है नया सप्लायर

भारत में सोना सिर्फ गहना नहीं, बल्कि लोगों की बचत और निवेश का भी अहम हिस्सा है। शादी का सीजन हो या दिवाली-धनतेरस, सोने की खरीदारी को लेकर बाजार में हमेशा हलचल रहती है। ऐसे में ऑस्ट्रेलिया से आई सोने की खोज और बढ़ते निवेश की खबर भारत के लिए भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है। ऑस्ट्रेलिया में सोने की नई खोज के लिए कंपनियां बड़े स्तर पर खर्च कर रही हैं। इससे आने वाले समय में सोने की वैश्विक सप्लाई बढ़ने की संभावना है। भारत जैसे देश के लिए यह एक अहम घटनाक्रम है, क्योंकि अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा पूरा करने के लिए भारत को दूसरे देशों से सोना आयात करना पड़ता है। Australia में Gold Exploration पर कितना खर्च हुआ? ऑस्ट्रेलिया में सोने की खोज से जुड़ा निवेश जून 2026 की तिमाही में बढ़कर लगभग 565.6 मिलियन ऑस्ट्रेलियाई डॉलर पहुंच गया। ऑस्ट्रेलियाई सांख्यिकी ब्यूरो (ABS) के आंकड़ों के अनुसार, पिछली तिमाही के मुकाबले इसमें 23.6% की बढ़ोतरी दर्ज की गई। यह खर्च जमीन के नीचे मौजूद सोने के संभावित भंडार का पता लगाने, ड्रिलिंग और खनन की संभावनाओं का आकलन करने जैसे कामों पर किया जाता है। हालांकि, खोज पर खर्च बढ़ने का मतलब यह नहीं है कि हर जगह सोने का नया भंडार मिल गया है। किसी जगह सोना मिलने के बाद भी यह देखना पड़ता है कि वहां से उसे निकालना आर्थिक रूप से कितना व्यावहारिक होगा। ऑस्ट्रेलिया में कितना Gold Reserve मौजूद है? ऑस्ट्रेलिया दुनिया के प्रमुख सोना उत्पादक देशों में शामिल है। सरकारी संस्था Geoscience Australia के आंकड़ों के अनुसार, दिसंबर 2024 तक देश के अनुमानित Ore Reserves करीब 4,785 टन थे। वहीं, पहचाने गए कुल Gold Resources का आंकड़ा इससे काफी ज्यादा था। यहां एक बात समझना जरूरी है। Gold Resources में सोने के संभावित और पहचाने गए संसाधन शामिल होते हैं, जबकि Ore Reserves उस सोने को दर्शाते हैं जिसे मौजूदा तकनीकी और आर्थिक परिस्थितियों में निकालना व्यावहारिक माना जाता है। इसीलिए ऑस्ट्रेलिया में सोने के बड़े भंडार होने और किसी नई खोज को दुनिया का सबसे बड़ा भंडार बताने में अंतर है। किसी खास नई खोज के बारे में ऐसा दावा करने से पहले उसके आधिकारिक आंकड़ों की पुष्टि जरूरी है। भारत को कैसे मिल सकता है फायदा? भारत में सोने की मांग काफी बड़ी है और घरेलू जरूरतों को पूरा करने के लिए आयात महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। अगर ऑस्ट्रेलिया में आने वाले वर्षों में सोने का उत्पादन बढ़ता है, तो भारतीय आयातकों के लिए सप्लाई का एक अतिरिक्त विकल्प तैयार हो सकता है। इसके तीन संभावित फायदे हो सकते हैं: हालांकि, ऑस्ट्रेलिया में निकाला गया सोना अपने आप भारत नहीं पहुंचेगा। यह इस बात पर निर्भर करेगा कि उत्पादन कितना बढ़ता है, कंपनियां किस देश को निर्यात करती हैं और भारतीय आयातकों के साथ किस तरह के व्यापारिक समझौते होते हैं। क्या भारत में सस्ता हो जाएगा सोना? सोने की नई खोज की खबर सुनकर खरीदारों के मन में सबसे पहले यही सवाल आता है कि क्या अब Gold Price कम होगा? फिलहाल ऐसा कोई निश्चित निष्कर्ष निकालना जल्दबाजी होगी। अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने की कीमत केवल उत्पादन पर निर्भर नहीं करती। निवेशकों की मांग, केंद्रीय बैंकों की खरीद, डॉलर की चाल और वैश्विक आर्थिक परिस्थितियां भी भाव को प्रभावित करती हैं। भारत में इसके अलावा रुपये और डॉलर की विनिमय दर, आयात शुल्क, टैक्स और घरेलू मांग का भी असर पड़ता है। इसलिए ऑस्ट्रेलिया में सोने की खोज बढ़ने के बावजूद भारतीय बाजार में कीमतें तुरंत कम होंगी, इसकी गारंटी नहीं है। ₹13,000 करोड़ के निवेश की खबर कितनी सही है? ऑस्ट्रेलिया में सोने की खोज पर खर्च बढ़ने के आंकड़े सामने आए हैं। लेकिन ₹13,000 करोड़ के निवेश को किसी खास नई खोज या दुनिया के सबसे बड़े सोना भंडार से जोड़ने के लिए संबंधित कंपनी और परियोजना के आधिकारिक दस्तावेजों की जरूरत है। इसलिए इस रकम को किसी एक नए गोल्ड रिजर्व की खोज पर खर्च हुई राशि बताने से पहले इसकी पुष्टि करना जरूरी है। खोज पर किया गया खर्च, जमीन में मौजूद कुल सोने का मूल्य और खनन परियोजना में कुल निवेश तीन अलग-अलग बातें हैं। आगे क्या होगा? ऑस्ट्रेलिया में सोने की खोज पर बढ़ता खर्च वैश्विक गोल्ड इंडस्ट्री के लिए अहम है। अगर आने वाले वर्षों में नए भंडार की पहचान होती है और उनसे व्यावसायिक उत्पादन शुरू हो पाता है, तो इससे अंतरराष्ट्रीय सप्लाई के विकल्प बढ़ सकते हैं। भारत के लिए भी यह एक संभावित अवसर है। लेकिन नए सप्लायर की भूमिका, आयात पर असर और सोने की कीमतों में बदलाव का पता तभी चलेगा, जब वास्तविक उत्पादन और निर्यात के आंकड़े सामने आएंगे। फिलहाल, ऑस्ट्रेलिया की गोल्ड इंडस्ट्री पर नजर रखना जरूरी है, लेकिन नई खोज के नाम पर सोना सस्ता होने की उम्मीद करना अभी जल्दबाजी होगी। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!

इंदौर में 175 डॉक्टरों और स्वास्थ्यकर्मियों के अटैचमेंट खत्म, मूल पदस्थापना पर जॉइनिंग के बाद ही मिलेगा अक्टूबर का वेतन

स्वास्थ्य विभाग में मूल पदस्थापना के बजाय दूसरी जगह काम कर रहे 175 डॉक्टरों, नर्सों और अन्य कर्मचारियों के अटैचमेंट समाप्त कर दिए गए हैं। मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (CMHO) डॉ. माधव प्रसाद हसानी ने 16 अक्टूबर को आदेश जारी कर सभी अटैचमेंट तत्काल प्रभाव से निरस्त कर दिए। आदेश के बाद संबंधित कर्मचारियों को अपने मूल पदस्थापना स्थल पर वापस जाकर जॉइनिंग देनी होगी। ऐसा करने के बाद ही उन्हें अक्टूबर महीने का वेतन मिल सकेगा। स्वास्थ्य विभाग ने सभी संबंधित अधिकारियों को आदेश का तत्काल पालन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं। तत्काल कार्यमुक्त कर मूल पदस्थापना पर भेजने के निर्देश CMHO के आदेश के मुताबिक, संबंधित अधिकारियों को अटैचमेंट पर काम कर रहे कर्मचारियों को उसी दिन कार्यमुक्त कर उनके मूल पदस्थापना स्थल पर भेजना होगा। इसकी जानकारी CMHO कार्यालय को भी उपलब्ध करानी होगी। वेतन आहरण केंद्रों को निर्देश दिए गए हैं कि कर्मचारियों की मूल पदस्थापना पर उपस्थिति सुनिश्चित होने के बाद ही अक्टूबर का वेतन जारी किया जाए। इससे कर्मचारियों को अपने निर्धारित कार्यस्थल पर लौटना अनिवार्य होगा। अटैचमेंट जारी मिला तो जिम्मेदार अधिकारी पर होगी कार्रवाई स्वास्थ्य विभाग ने आदेश के पालन को लेकर सख्त रुख अपनाया है। CMHO ने स्पष्ट किया है कि आदेश जारी होने के बाद भी कोई कर्मचारी या अधिकारी अटैचमेंट पर काम करता पाया गया, तो इसके लिए जिम्मेदार अधिकारी के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी। इसकी जिम्मेदारी संबंधित संस्था के प्रभारी की होगी। विभाग ने अधिकारियों को निर्देशों का पालन कराने और इसकी रिपोर्ट प्रस्तुत करने को कहा है। अस्पतालों और स्वास्थ्य संस्थाओं को भेजा गया आदेश यह आदेश सिविल सर्जन सह मुख्य अस्पताल अधीक्षक, देपालपुर, मानपुर, सांवेर और हातोद के खंड चिकित्सा अधिकारियों, महू सहित विभिन्न अस्पतालों के प्रभारी चिकित्सा अधिकारियों, शहरी स्वास्थ्य संस्थाओं और मुख्यमंत्री संजीवनी क्लीनिक के प्रभारियों को भेजा गया है। आदेश में भोपाल में हुई बैठकों और 16 अक्टूबर को मुख्यालय स्तर से मिले निर्देशों का भी हवाला दिया गया है। सभी संबंधित अधिकारियों को तत्काल प्रभाव से आदेश लागू कराने के निर्देश दिए गए हैं।

नवरात्रि पर रायपुर सेंट्रल जेल में सेवा की मिसाल, काली माता सेवा समिति ने 1300 बंदियों को बांटे फल

नवरात्रि के अवसर पर काली माता सेवा समिति ने रायपुर सेंट्रल जेल में करीब 1300 बंदियों को फल वितरित किए। समिति ने यह पहल उन बंदियों के लिए की, जो नवरात्रि में उपवास रखकर माता रानी की आराधना कर रहे हैं। इस आयोजन के जरिए समिति ने सेवा, करुणा और मानवीय संवेदना का संदेश दिया। समिति के अध्यक्ष दीपक भारद्वाज (पोल्ले) ने बताया कि कार्यक्रम का उद्देश्य बंदियों के प्रति संवेदनशीलता और सेवा भाव को बढ़ावा देना है। उन्होंने कहा कि किसी व्यक्ति की गलती या अपराध से उसके सुधरने और बेहतर जीवन जीने की संभावनाएं समाप्त नहीं हो जातीं। बंदियों के सुधार और पुनर्वास पर दिया जोर दीपक भारद्वाज ने कहा कि समाज को न्याय के प्रति सम्मान बनाए रखने के साथ-साथ सुधार और पुनर्वास की भावना को भी महत्व देना चाहिए। बंदियों के प्रति संवेदनशील व्यवहार अपनाने से समाज में मानवीय मूल्यों को मजबूती मिलती है। समिति का मानना है कि जेल में बंद लोगों के साथ भी सम्मानजनक और मानवीय व्यवहार होना चाहिए, ताकि उनमें सकारात्मक बदलाव की भावना विकसित हो सके। पहले भी जेल में कर चुके हैं फल वितरण काली माता सेवा समिति के अनुसार, वह पहले भी कई बार जेल में बंदियों को फल वितरित कर चुकी है। समिति का कहना है कि नवरात्रि केवल पूजा-पाठ और उपवास तक सीमित पर्व नहीं है, बल्कि यह सेवा, करुणा और सद्भावना को जीवन में अपनाने का अवसर भी है। इसी भावना के साथ समिति के सदस्यों ने उपवास रखने वाले बंदियों तक फल पहुंचाए। आगे भी जारी रहेंगे सेवा कार्य समिति ने समाज में सेवा, सद्भावना और मानवीय मूल्यों को बढ़ावा देने के लिए ऐसे आयोजन आगे भी जारी रखने का संकल्प लिया। कार्यक्रम में अशोक त्रिपाठी, गुड्डू, सुनील प्रमुख, राजू भाई तारवानी और रामकृष्ण धीवर सहित अन्य लोग मौजूद रहे।
वैभव सूर्यवंशी

IND vs WI T20: वैभव सूर्यवंशी का भरोसा कायम, 4 दिन में दूसरी पोस्ट; अब भी मौके का इंतजार

भारत और वेस्टइंडीज (IND vs WI) के बीच T-20 सीरीज के निर्णायक मुकाबले से पहले युवा बल्लेबाज वैभव सूर्यवंशी एक बार फिर चर्चा में हैं। सीरीज में अब तक खेलने का मौका नहीं मिलने के बावजूद वैभव ने उम्मीद नहीं छोड़ी है। चार दिन के भीतर उनकी दूसरी सोशल मीडिया पोस्ट सामने आई है, जिसमें भरोसे का संदेश देखने को मिला। वैभव को इस सीरीज में अब तक मैदान पर उतरने का मौका नहीं मिला है। ऐसे में क्रिकेट फैंस के मन में एक ही सवाल है—क्या पांचवें टी-20 में उन्हें अपनी प्रतिभा दिखाने का अवसर मिलेगा? Vaibhav Sooryavanshi की दूसरी पोस्ट ने खींचा ध्यान वैभव सूर्यवंशी की सोशल मीडिया पोस्ट को लेकर फैंस के बीच चर्चा हो रही है। चार दिन में दूसरी पोस्ट आने के बाद उनके संदेश पर लोगों की नजरें टिकी हैं। हालांकि, पोस्ट को टीम में चयन या किसी खास फैसले से जोड़कर देखना सही नहीं होगा, क्योंकि प्लेइंग-11 में किसे मौका मिलेगा, इसका फैसला टीम मैनेजमेंट करता है। कम उम्र में अपनी बल्लेबाजी से पहचान बनाने वाले वैभव के लिए टीम के साथ रहना और मौके का इंतजार करना भी अनुभव का हिस्सा है। अब देखना होगा कि उन्हें इस सीरीज में खेलने का मौका मिलता है या नहीं। IND vs WI 5th T20: निर्णायक मुकाबले पर नजर भारत और वेस्टइंडीज की टी-20 सीरीज का पांचवां मुकाबला दोनों टीमों के लिए अहम है। सीरीज के आखिरी मैच में जीत हासिल करने वाली टीम खिताब अपने नाम करेगी। ऐसे में भारतीय टीम की प्लेइंग-11 को लेकर उत्सुकता बनी हुई है। फैंस यह जानना चाहते हैं कि क्या टीम मैनेजमेंट इस मुकाबले में युवा खिलाड़ियों को मौका देगा। वैभव सूर्यवंशी का नाम भी इसी चर्चा में शामिल है। हालांकि, उनके खेलने को लेकर आधिकारिक पुष्टि के बिना किसी नतीजे पर पहुंचना जल्दबाजी होगी। क्या वैभव सूर्यवंशी को मिलेगा डेब्यू का मौका? वैभव को लेकर उत्सुकता की एक बड़ी वजह उनकी कम उम्र और क्रिकेट में तेजी से बनी पहचान है। फैंस उन्हें भारतीय टीम की जर्सी में खेलते देखना चाहते हैं, लेकिन अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मौका मिलना टीम की जरूरत और चयन रणनीति पर निर्भर करता है। फिलहाल वैभव के लिए इंतजार जारी है। पांचवें टी-20 में उनका नाम प्लेइंग-11 में शामिल होता है या नहीं, इसका पता टीम की आधिकारिक घोषणा के बाद ही चलेगा। क्रिकेट में हर खिलाड़ी को अपनी बारी का इंतजार करना पड़ता है। वैभव के समर्थकों को उम्मीद है कि उन्हें जल्द ही मैदान पर अपनी काबिलियत दिखाने का अवसर मिलेगा। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
लालकृष्ण आडवाणी

LK Advani Hospitalised ICU में भर्ती लालकृष्ण आडवाणी की सेहत कैसी? जानें ताजा अपडेट

बीजेपी के वरिष्ठ नेता और पूर्व उपप्रधानमंत्री लालकृष्ण आडवाणी की सेहत को लेकर 17 अक्टूबर को ताजा जानकारी सामने आई है। 98 वर्षीय आडवाणी को सीने में संक्रमण (Chest Infection) की शिकायत के बाद दिल्ली के इंद्रप्रस्थ अपोलो अस्पताल में भर्ती कराया गया है। फिलहाल उनकी हालत स्थिर बताई जा रही है और डॉक्टरों की टीम उनकी निगरानी कर रही है। परिवार और समर्थकों के लिए यह खबर चिंता बढ़ाने वाली जरूर है, लेकिन फिलहाल राहत की बात यह है कि अस्पताल से मिली जानकारी के मुताबिक उनकी स्थिति स्थिर है। डॉक्टर उनकी सेहत से जुड़ी जरूरी जांच कर रहे हैं और इलाज जारी है। LK Advani Health Update: अस्पताल में क्या चल रहा है इलाज? लालकृष्ण आडवाणी को शुक्रवार, 16 अक्टूबर 2026 की शाम करीब 7:30 बजे अस्पताल लाया गया था। उन्हें सीने में संक्रमण की शिकायत के बाद पल्मोनरी विभाग में भर्ती किया गया। यहां डॉक्टरों की एक टीम उनकी सेहत पर नजर रख रही है और जरूरी मेडिकल जांच की जा रही है। 17 अक्टूबर तक उपलब्ध जानकारी के अनुसार, उनकी हालत स्थिर है। हालांकि, उनकी सेहत में आगे कितना सुधार हुआ है और अस्पताल से छुट्टी कब मिलेगी, इस बारे में अभी कोई स्पष्ट आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है। पहले भी अस्पताल में भर्ती हो चुके हैं लालकृष्ण आडवाणी लालकृष्ण आडवाणी को इससे पहले मई 2026 में भी उम्र से जुड़ी स्वास्थ्य समस्याओं के कारण अपोलो अस्पताल में भर्ती कराया गया था। इलाज के बाद उन्हें छुट्टी दे दी गई थी। दिसंबर 2024 में भी उन्हें अपोलो अस्पताल की ICU में रखा गया था। उस समय डॉक्टरों ने उनकी मेडिकल जांच और इलाज किया था। जून और जुलाई 2024 में भी उन्हें स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के चलते अस्पताल में भर्ती कराया गया था। बढ़ती उम्र को देखते हुए उनकी सेहत पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। मौजूदा समय में डॉक्टरों की निगरानी में उनका उपचार जारी है। PM Modi ने हाल ही में की थी लालकृष्ण आडवाणी से मुलाकात लालकृष्ण आडवाणी के अस्पताल में भर्ती होने से कुछ दिन पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 7 अक्टूबर 2026 को उनके दिल्ली स्थित आवास पर मुलाकात की थी। इस दौरान प्रधानमंत्री ने उनसे आशीर्वाद लिया और सार्वजनिक जीवन में उनके योगदान की सराहना की थी। आडवाणी लंबे समय तक बीजेपी के प्रमुख चेहरों में शामिल रहे हैं। पार्टी को राष्ट्रीय राजनीति में स्थापित करने में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका रही है। यही वजह है कि उनकी सेहत से जुड़ी खबर पर राजनीतिक जगत और उनके समर्थकों की नजर बनी हुई है। राम रथ यात्रा से उपप्रधानमंत्री तक का सफर लालकृष्ण आडवाणी का राजनीतिक सफर कई दशकों तक फैला रहा है। वह भारतीय जनता पार्टी के तीन बार राष्ट्रीय अध्यक्ष रहे और पार्टी के विस्तार में अहम भूमिका निभाई। साल 1990 में निकाली गई उनकी राम रथ यात्रा ने राष्ट्रीय राजनीति में व्यापक चर्चा पैदा की थी। अटल बिहारी वाजपेयी के नेतृत्व वाली एनडीए सरकार में उन्होंने केंद्रीय गृह मंत्री की जिम्मेदारी संभाली। इसके बाद 2002 से 2004 तक वह भारत के उपप्रधानमंत्री रहे। देश की राजनीति में उनके लंबे योगदान को देखते हुए वर्ष 2024 में उन्हें भारत रत्न से सम्मानित किया गया था। LK Advani अब अगले हेल्थ अपडेट का इंतजार लालकृष्ण आडवाणी फिलहाल दिल्ली के अपोलो अस्पताल में डॉक्टरों की निगरानी में हैं। 17 अक्टूबर तक सामने आई जानकारी के मुताबिक, उनकी हालत स्थिर है और सीने में संक्रमण के लिए इलाज चल रहा है। अब सभी की नजर अस्पताल की ओर से जारी होने वाले अगले हेल्थ अपडेट पर है। उनकी सेहत में सुधार, इलाज की स्थिति और डिस्चार्ज को लेकर नई जानकारी मिलने के बाद ही आगे की स्थिति स्पष्ट हो सकेगी। फिलहाल सबसे अहम बात यही है कि लालकृष्ण आडवाणी की हालत स्थिर बताई गई है और उनका इलाज जारी है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!

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