आपका चैनल --
ताज़ा खबर
BREAKINGदेश-हरपलमेरठ हत्याकांड: मुस्कान और साहिल को फांसी की सजा, पति सौरभ की हत्या के मामले में कोर्ट का फैसला◆BREAKINGमध्य प्रदेशइंदौर में प्लॉट बेचने के नाम पर 7.80 लाख की ठगी का आरोप, ब्रोकर समेत दो पर FIR◆BREAKINGदेश-हरपलSIR के खिलाफ प्रदर्शन करने वाले छात्रों से मिले राहुल गांधी, दिल्ली पुलिस पर मारपीट के आरोप◆BREAKINGस्पोर्ट्सबांग्लादेश टेस्ट सीरीज से बाहर हुए शाई होप और अल्जारी जोसेफ, केविन विकहम को पहली बार मिला मौका◆BREAKINGबिज़नेसIMF ने बढ़ाया भारत की GDP ग्रोथ का अनुमान, 2026 और 2027 में 7% विकास दर रहने की उम्मीद◆BREAKINGदेश-हरपलभीलवाड़ा में सरकारी शिक्षक ने फंदा लगाकर दी जान, किराए के कमरे में मिला शव◆BREAKINGछत्तीसगढ़कैंसर की दवाओं की कीमतों में बड़ा अंतर: ₹538 का इंजेक्शन बाजार में ₹1,500 तक, एक ही दवा की MRP में 16 गुना तक फर्क◆BREAKINGछत्तीसगढ़बिलासपुर एयरपोर्ट को 4C श्रेणी में अपग्रेड करने पर हाईकोर्ट सख्त, सरकार से 3 सप्ताह में मांगा जवाब◆BREAKINGदेश-हरपलमेरठ हत्याकांड: मुस्कान और साहिल को फांसी की सजा, पति सौरभ की हत्या के मामले में कोर्ट का फैसला◆BREAKINGमध्य प्रदेशइंदौर में प्लॉट बेचने के नाम पर 7.80 लाख की ठगी का आरोप, ब्रोकर समेत दो पर FIR◆BREAKINGदेश-हरपलSIR के खिलाफ प्रदर्शन करने वाले छात्रों से मिले राहुल गांधी, दिल्ली पुलिस पर मारपीट के आरोप◆BREAKINGस्पोर्ट्सबांग्लादेश टेस्ट सीरीज से बाहर हुए शाई होप और अल्जारी जोसेफ, केविन विकहम को पहली बार मिला मौका◆BREAKINGबिज़नेसIMF ने बढ़ाया भारत की GDP ग्रोथ का अनुमान, 2026 और 2027 में 7% विकास दर रहने की उम्मीद◆BREAKINGदेश-हरपलभीलवाड़ा में सरकारी शिक्षक ने फंदा लगाकर दी जान, किराए के कमरे में मिला शव◆BREAKINGछत्तीसगढ़कैंसर की दवाओं की कीमतों में बड़ा अंतर: ₹538 का इंजेक्शन बाजार में ₹1,500 तक, एक ही दवा की MRP में 16 गुना तक फर्क◆BREAKINGछत्तीसगढ़बिलासपुर एयरपोर्ट को 4C श्रेणी में अपग्रेड करने पर हाईकोर्ट सख्त, सरकार से 3 सप्ताह में मांगा जवाब◆

NE

News Elementor

What's Hot

Banner

Latest Posts

Patna

Patna Accident: युवक की मौत पर भड़की भीड़, 10 वाहन जलाए; 5 थानों की Police पहुंची

राजधानी पटना (Patna) में सड़क हादसे (Road Accident) में एक युवक की मौत के बाद हालात अचानक तनावपूर्ण हो गए। हादसे से नाराज लोगों ने जमकर हंगामा किया और सड़क पर खड़ी कई गाड़ियों को आग के हवाले कर दिया। इस दौरान एक ट्रैफिक पोस्ट और स्लीपर बस में भी आग लगा दी गई। घटना के बाद इलाके में अफरा-तफरी मच गई और NH-30 पर लंबा जाम लग गया। मामले की सूचना मिलते ही पांच थानों की पुलिस मौके पर पहुंची और स्थिति को नियंत्रित करने की कोशिश शुरू की। पुलिस अधिकारियों ने लोगों को समझाकर सड़क खाली कराने का प्रयास किया। तनाव को देखते हुए इलाके में अतिरिक्त पुलिस बल भी तैनात किया गया। युवक की मौत के बाद भड़का आक्रोश बताया जा रहा है कि सड़क हादसे में एक युवक की मौत हो गई थी। घटना की जानकारी फैलते ही स्थानीय लोग और मृतक के परिचित मौके पर जुटने लगे। लोगों में हादसे को लेकर काफी नाराजगी थी। देखते ही देखते विरोध प्रदर्शन ने उग्र रूप ले लिया। आक्रोशित भीड़ ने सड़क पर खड़ी कई गाड़ियों को निशाना बनाया। रिपोर्ट के मुताबिक करीब 10 वाहनों को आग के हवाले कर दिया गया। इसके अलावा एक ट्रैफिक पोस्ट और स्लीपर बस में भी आग लगा दी गई। NH-30 पर लगा लंबा जाम आगजनी और प्रदर्शन के कारण NH-30 पर यातायात बुरी तरह प्रभावित हुआ। सड़क पर वाहनों की लंबी कतार लग गई और आने-जाने वाले लोगों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ा। पुलिस ने मौके पर पहुंचकर स्थिति संभालने और यातायात बहाल कराने की कोशिश शुरू की। घटना के बाद आसपास के इलाकों में भी तनाव का माहौल बन गया। पुलिस की कई टीमें मौके पर मौजूद रहीं और भीड़ को नियंत्रित करने का प्रयास किया गया। पांच थानों की पुलिस मौके पर स्थिति की गंभीरता को देखते हुए पांच थानों की पुलिस को मौके पर बुलाया गया। पुलिस अधिकारियों ने घटनास्थल का जायजा लिया और आगजनी में शामिल लोगों की पहचान करने की प्रक्रिया शुरू की। पुलिस की प्राथमिकता इलाके में शांति व्यवस्था कायम करने और NH-30 पर यातायात को सामान्य कराने की रही। घटनास्थल के आसपास सुरक्षा बढ़ा दी गई है। हादसे के बाद कानून-व्यवस्था पर सवाल एक सड़क हादसे के बाद शुरू हुआ विरोध इतना बढ़ गया कि कई वाहनों और सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाया गया। घटना ने इलाके में कानून-व्यवस्था को लेकर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। फिलहाल पुलिस पूरे मामले की जांच कर रही है। आगजनी और तोड़फोड़ में शामिल लोगों के खिलाफ कार्रवाई की तैयारी की जा रही है। हादसे में युवक की मौत के कारणों और घटना के पूरे घटनाक्रम की भी जांच की जा रही है।
Read more
Delimitation Bill

Delimitation Bill पर DMK का बड़ा दांव, Modi Government को समर्थन के लिए रखीं 3 शर्तें

संसद में Delimitation Bill 2026 को लेकर सियासी हलचल एक बार फिर तेज हो गई है। अब तक इस बिल का खुलकर विरोध कर रही DMK के रुख में नरमी के संकेत मिल रहे हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक, तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन की पार्टी केंद्र की मोदी सरकार को इस बिल पर समर्थन देने के लिए तैयार हो सकती है, लेकिन इसके लिए उसने तीन अहम शर्तें रखी हैं। DMK का कहना है कि परिसीमन केवल सीटों की संख्या बढ़ाने का मामला नहीं है, बल्कि इसका सीधा संबंध राज्यों के राजनीतिक प्रतिनिधित्व और संघीय ढांचे से है। यही वजह है कि पार्टी चाहती है कि सरकार उसकी मांगों को कानूनी रूप से स्पष्ट करे। DMK की पहली शर्त क्या है? पहली मांग 1971 की जनगणना के आधार पर लोकसभा सीटों के बंटवारे पर लगी रोक से जुड़ी है। पार्टी चाहती है कि यह व्यवस्था, जिसकी मौजूदा अवधि 2027 में समाप्त होनी है, संविधान संशोधन के जरिए आगे 25 साल तक जारी रखी जाए। दक्षिणी राज्यों की चिंता लंबे समय से यही रही है कि जनसंख्या को परिसीमन का प्रमुख आधार बनाने पर जिन राज्यों ने जनसंख्या नियंत्रण में बेहतर प्रदर्शन किया है, उनकी राजनीतिक हिस्सेदारी अपेक्षाकृत कम हो सकती है। दूसरी शर्त—सभी राज्यों में 50% सीटों का इजाफा DMK की दूसरी बड़ी मांग है कि लोकसभा सीटों में सभी राज्यों के लिए समान रूप से 50 प्रतिशत बढ़ोतरी की जाए। पार्टी चाहती है कि इस संबंध में केवल राजनीतिक या मौखिक आश्वासन न हो, बल्कि कानून में स्पष्ट प्रावधान किया जाए। केंद्र सरकार की ओर से पहले यह तर्क दिया गया है कि प्रस्तावित व्यवस्था में दक्षिणी राज्यों को नुकसान नहीं होगा। गृह मंत्री अमित शाह ने संसद में कहा था कि 543 लोकसभा सीटों को बढ़ाकर 816 करने के प्रस्ताव में दक्षिण भारत की सीटें भी बढ़ेंगी। उनके मुताबिक दक्षिणी राज्यों की मौजूदा 129 सीटें बढ़कर 195 हो सकती हैं और कुल सदन में उनका हिस्सा करीब 24 प्रतिशत के आसपास बना रहेगा। तीसरी शर्त—नई सीटों की पूरी लिस्ट जारी हो DMK की तीसरी मांग भी काफी महत्वपूर्ण है। पार्टी चाहती है कि नए कानून के साथ-साथ सभी राज्यों में बदले जाने वाले लोकसभा निर्वाचन क्षेत्रों की पूरी सूची भी सार्वजनिक की जाए। यानी पार्टी केवल सीटों की कुल संख्या जानने तक सीमित नहीं रहना चाहती, बल्कि यह भी स्पष्ट देखना चाहती है कि परिसीमन के बाद किन क्षेत्रों की सीमाएं कैसे बदलेंगी। DMK के समर्थन से क्या बदलेगा? परिसीमन बिल को लेकर केंद्र सरकार के सामने सबसे बड़ी चुनौती संविधान संशोधन से जुड़ी आवश्यक संख्या जुटाना है। रिपोर्ट के अनुसार, लोकसभा में NDA की मौजूदा ताकत 319 बताई गई है, जबकि DMK के 22 सांसद हैं। यदि DMK समर्थन देती है तो NDA की संख्या 341 तक पहुंच सकती है। हालांकि, केवल DMK के समर्थन से ही जरूरी आंकड़ा पूरा नहीं होता। ऐसे में सरकार को दूसरे दलों और सांसदों का समर्थन भी जुटाना होगा। अप्रैल में बिल पेश किए जाने के दौरान इसे 298 वोट मिले थे। प्रस्तावित व्यवस्था के तहत लोकसभा में सीटों की संख्या 543 से बढ़कर 816 किए जाने की बात सामने आई है। दक्षिण बनाम उत्तर की बहस क्यों? परिसीमन को लेकर दक्षिणी राज्यों की चिंता मुख्य रूप से जनसंख्या और राजनीतिक प्रतिनिधित्व से जुड़ी है। तमिलनाडु, केरल, कर्नाटक और अन्य दक्षिणी राज्यों का तर्क रहा है कि उन्होंने जनसंख्या नियंत्रण के प्रयास किए हैं, इसलिए केवल आबादी के आधार पर सीटों का पुनर्वितरण उनके लिए राजनीतिक नुकसान का कारण बन सकता है। वहीं केंद्र सरकार का कहना है कि प्रस्तावित मॉडल में दक्षिणी राज्यों की सीटें घटने के बजाय बढ़ेंगी। सरकार के मुताबिक तमिलनाडु की सीटें 39 से बढ़कर 59, कर्नाटक की 28 से 42 और केरल की 20 से 30 हो सकती हैं। अभी अंतिम फैसला बाकी फिलहाल DMK का समर्थन पूरी तरह तय नहीं माना जा सकता। पार्टी सूत्रों के मुताबिक अंतिम निर्णय बिल के अंतिम ड्राफ्ट और उसके प्रावधानों की समीक्षा के बाद ही लिया जाएगा। ऐसे में आने वाले दिनों में सरकार और DMK के बीच बातचीत पर सबकी नजर रहेगी। परिसीमन बिल अब सिर्फ संसद में सीटों के पुनर्वितरण का मुद्दा नहीं रह गया है। इसके साथ दक्षिणी राज्यों की राजनीतिक हिस्सेदारी, जनसंख्या नियंत्रण और केंद्र-राज्य संबंधों का सवाल भी जुड़ गया है। ऐसे में DMK की तीन शर्तें मानना सरकार के लिए आसान होगा या नहीं, यही इस पूरे राजनीतिक घटनाक्रम का सबसे बड़ा सवाल बना हुआ है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
Read more
NEET Paper Leak Case

NEET Paper Leak Case में बड़ा खुलासा, NTA Experts पर सवाल; WhatsApp-Telegram से फैला पेपर

NEET Paper Leak Case को लेकर CBI की जांच में एक के बाद एक गंभीर बातें सामने आने का दावा किया गया है। जांच एजेंसी के मुताबिक, कथित पेपर लीक की साजिश परीक्षा से काफी पहले शुरू हो गई थी। आरोप है कि परीक्षा से जुड़े कुछ लोगों ने प्रश्नपत्र तैयार होने के दौरान ही सवालों को याद किया और बाद में इन्हें छात्रों तक पहुंचाने की व्यवस्था की गई। CBI की जांच में यह भी सामने आने का दावा किया गया है कि पेपर से जुड़े सवालों को छात्रों तक पहुंचाने के लिए WhatsApp और Telegram जैसे डिजिटल प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल किया गया। इस पूरे मामले ने देश की सबसे बड़ी मेडिकल प्रवेश परीक्षा की गोपनीयता और व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। पेपर तैयार होने के दौरान सवाल याद करने का आरोप जांच से जुड़े दावों के अनुसार, कथित तौर पर परीक्षा प्रश्नपत्र तैयार करने की प्रक्रिया से जुड़े कुछ NTA एक्सपर्ट्स ने सवालों को याद कर लिया था। इसके बाद इन सवालों को आगे पहुंचाने की कोशिश की गई। CBI का मानना है कि यह कोई अचानक हुई घटना नहीं थी, बल्कि इसके पीछे पहले से बनाई गई योजना हो सकती है। एजेंसी इसी कड़ी को जोड़ते हुए यह पता लगाने में जुटी है कि प्रश्नपत्र से संबंधित जानकारी किस स्तर पर बाहर निकली और किन लोगों के बीच इसका आदान-प्रदान हुआ। WhatsApp और Telegram बने कथित जरिया जांच में डिजिटल माध्यमों की भूमिका भी महत्वपूर्ण बताई जा रही है। आरोप है कि प्रश्नपत्र से संबंधित सवालों या उनकी जानकारी को WhatsApp और Telegram के जरिए छात्रों तक पहुंचाया गया। सोशल मीडिया और मैसेजिंग प्लेटफॉर्म के इस्तेमाल से ऐसी जानकारी को कम समय में कई लोगों तक पहुंचाना आसान हो जाता है। यही वजह है कि जांच एजेंसियां डिजिटल चैट, मोबाइल फोन और अन्य इलेक्ट्रॉनिक सबूतों की भी जांच कर रही हैं। छात्रों और अभिभावकों के बीच बढ़ी चिंता NEET जैसी परीक्षा लाखों छात्रों के भविष्य से जुड़ी होती है। मेडिकल कॉलेज में दाखिले की उम्मीद लेकर विद्यार्थी महीनों और कई बार वर्षों तक तैयारी करते हैं। ऐसे में पेपर लीक या परीक्षा में गड़बड़ी की कोई भी खबर छात्रों और अभिभावकों की चिंता बढ़ा देती है। इस मामले में सबसे बड़ा सवाल यही है कि अगर प्रश्नपत्र की गोपनीय जानकारी वास्तव में परीक्षा से पहले बाहर गई थी, तो वह सुरक्षा व्यवस्था को पार करके बाहर कैसे पहुंची और इसमें कौन-कौन लोग शामिल थे। CBI जांच में आगे क्या? CBI इस मामले में कथित पेपर लीक की पूरी कड़ी को समझने की कोशिश कर रही है। जांच का फोकस यह पता लगाने पर है कि प्रश्नपत्र से जुड़ी जानकारी किसने हासिल की, उसे किस तरह सुरक्षित रखा गया और फिर छात्रों तक कैसे पहुंचाया गया। जांच एजेंसी डिजिटल सबूतों के साथ-साथ आरोपियों और अन्य संबंधित लोगों से पूछताछ के जरिए पूरे नेटवर्क की भूमिका सामने लाने की कोशिश कर रही है। फिलहाल जांच से सामने आए दावों को अंतिम निष्कर्ष नहीं माना जा सकता। मामले में अदालत की कार्यवाही और CBI की आगे की जांच से ही यह स्पष्ट होगा कि कथित पेपर लीक की पूरी साजिश किस तरह काम कर रही थी और इसमें कौन-कौन लोग वास्तव में शामिल थे। NEET Paper Leak Case ने एक बार फिर यह सवाल जरूर खड़ा कर दिया है कि देश की महत्वपूर्ण प्रतियोगी परीक्षाओं में प्रश्नपत्र की गोपनीयता और सुरक्षा को और मजबूत करने की जरूरत है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
Read more
Uttarakhand

Monsoon Update: Uttarakhand में 6 नदियां खतरे के निशान पर, UP में बाढ़ और Delhi में हादसा

उत्तर भारत में लगातार हो रही बारिश ने एक बार फिर मुश्किलें बढ़ा दी हैं। उत्तराखंड (Uttarakhand) से लेकर उत्तर प्रदेश और दिल्ली तक बारिश और जलभराव का असर दिखाई दे रहा है। Uttarakhand में भारी बारिश के बाद कई नदियां उफान पर हैं, जबकि भूस्खलन के कारण बद्रीनाथ, गंगोत्री और यमुनोत्री जाने वाले मार्ग प्रभावित हुए हैं। दूसरी ओर उत्तर प्रदेश के कई गांव बाढ़ की चपेट में हैं और दिल्ली में भी जलभराव के बीच एक युवक के नाले में बहने की घटना सामने आई है। Uttarakhand में बारिश ने बढ़ाई मुश्किलें उत्तराखंड के पहाड़ी इलाकों में लगातार बारिश के चलते नदी-नालों का जलस्तर तेजी से बढ़ा है। रिपोर्ट के मुताबिक, राज्य की छह नदियां उफान पर हैं। कई जगहों पर सड़कें पानी और मलबे से प्रभावित हुई हैं, जिससे लोगों की आवाजाही मुश्किल हो गई है। चारधाम यात्रा पर भी मौसम का असर पड़ा है। Badrinath, Gangotri और Yamunotri Highway पर भूस्खलन और मलबा आने के कारण कई हिस्सों में यातायात बाधित हुआ है। प्रशासन और संबंधित विभाग रास्तों को खोलने के लिए काम कर रहे हैं, लेकिन खराब मौसम के कारण राहत एवं सड़क बहाली के काम में भी चुनौतियां बनी हुई हैं। चारधाम यात्रियों को सतर्क रहने की सलाह बारिश और भूस्खलन को देखते हुए पहाड़ी मार्गों पर सफर करने वाले यात्रियों को विशेष सावधानी बरतने की जरूरत है। अचानक पहाड़ से मलबा आने और सड़क पर पानी भरने के कारण जोखिम बढ़ जाता है। प्रशासन की ओर से यात्रियों से मौसम और सड़क की स्थिति की जानकारी लेने के बाद ही यात्रा आगे बढ़ाने की अपील की जा रही है। चारधाम मार्गों पर फंसे यात्रियों के लिए स्थानीय स्तर पर जरूरी व्यवस्थाएं भी की जा रही हैं। UP में करीब 30 गांव बाढ़ की चपेट में उत्तराखंड के साथ उत्तर प्रदेश में भी बारिश और नदियों के बढ़ते जलस्तर ने लोगों की परेशानी बढ़ा दी है। कई इलाकों में नदियों का पानी गांवों की ओर पहुंच गया है। करीब 30 गांवों में बाढ़ जैसे हालात बताए जा रहे हैं। बाढ़ का असर खेतों और ग्रामीण रास्तों पर भी पड़ा है। कई जगहों पर लोगों को आने-जाने में दिक्कत हो रही है। प्रशासन की टीमें प्रभावित क्षेत्रों पर नजर बनाए हुए हैं और जरूरत पड़ने पर लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने की तैयारी की जा रही है। ग्रामीण इलाकों में सबसे बड़ी चिंता लगातार बढ़ते पानी को लेकर है। यदि बारिश का दौर आगे भी जारी रहता है, तो प्रभावित क्षेत्रों में स्थिति और चुनौतीपूर्ण हो सकती है। Delhi में नाले में बहा युवक बारिश का असर राजधानी दिल्ली में भी देखने को मिला। जलभराव के बीच एक युवक के नाले में बह जाने की घटना ने लोगों को झकझोर दिया। घटना के बाद राहत और बचाव टीमों ने तलाश अभियान चलाया। दिल्ली में बारिश के बाद कई इलाकों में पानी जमा होने से यातायात प्रभावित हुआ। निचले इलाकों में जलभराव ने लोगों की परेशानी बढ़ाई। इस घटना ने एक बार फिर भारी बारिश के दौरान खुले नालों और जलभराव वाले स्थानों पर सुरक्षा को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं। एक साथ कई राज्यों में Weather Alert जैसा माहौल उत्तराखंड में पहाड़ों पर भारी बारिश, उत्तर प्रदेश में बाढ़ और दिल्ली में जलभराव—इन तीनों घटनाओं ने उत्तर भारत में मानसून की गंभीर स्थिति को सामने ला दिया है। पहाड़ी इलाकों में बारिश का असर मैदानी क्षेत्रों में भी दिखाई दे रहा है। फिलहाल प्रशासन की नजर नदियों के जलस्तर, संवेदनशील इलाकों और प्रमुख सड़कों पर बनी हुई है। लोगों से अपील की जा रही है कि वे नदी, नाले और जलभराव वाले क्षेत्रों से दूरी बनाए रखें और बिना जरूरी काम के जोखिम वाले रास्तों पर जाने से बचें। लोगों के लिए जरूरी सावधानी बारिश और बाढ़ की स्थिति में लोगों को प्रशासन की advisory का पालन करना चाहिए। पहाड़ी क्षेत्रों में यात्रा करने वाले लोग निकलने से पहले सड़क की स्थिति जरूर जांच लें। वहीं बाढ़ प्रभावित गांवों में रहने वाले लोगों को पानी बढ़ने की स्थिति में सुरक्षित स्थान पर जाने में देरी नहीं करनी चाहिए। उत्तर भारत में बिगड़े मौसम ने साफ कर दिया है कि मानसून के दौरान थोड़ी सी लापरवाही भी भारी पड़ सकती है। ऐसे में सावधानी ही सबसे बड़ा बचाव है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
Read more
Bofors

Bofors Scam: 40 साल बाद खत्म हुआ विवाद, Supreme Court के फैसले से कानूनी अध्याय बंद

करीब 40 साल से देश की राजनीति और अदालतों में चर्चा का विषय बना रहा Bofors Case अब अपने अंतिम पड़ाव पर पहुंच गया है। सुप्रीम कोर्ट ने मामले से जुड़ी आखिरी याचिका खारिज कर दी है। इसके साथ ही बोफोर्स विवाद की लंबी कानूनी कहानी पर विराम लग गया है। बोफोर्स सिर्फ एक रक्षा सौदे का विवाद नहीं था। इस मामले ने एक दौर में दिल्ली की सत्ता की तस्वीर तक बदल दी थी। तत्कालीन प्रधानमंत्री राजीव गांधी की सरकार पर भ्रष्टाचार के आरोप लगे और 1989 के लोकसभा चुनाव में विपक्ष ने इसे बड़ा चुनावी मुद्दा बनाया। कैसे शुरू हुआ था Bofors विवाद? कहानी 1980 के दशक के उस रक्षा सौदे से शुरू हुई, जब भारत ने अपनी सेना के लिए स्वीडन की कंपनी Bofors से 155mm हॉवित्जर तोपें खरीदने का समझौता किया था। सौदा होने के कुछ समय बाद आरोप सामने आए कि तोपों की खरीद में कथित तौर पर कमीशन और बिचौलियों की भूमिका रही। मामला सामने आते ही देश की राजनीति में हलचल मच गई। तत्कालीन सरकार पर सवाल उठे कि रक्षा सौदे में आखिर किसे और कितना फायदा पहुंचाया गया। विपक्ष ने इस मुद्दे को हाथों-हाथ लिया और सरकार पर लगातार दबाव बनाया। राजीव गांधी सरकार पर क्या आरोप लगे थे? बोफोर्स विवाद का सबसे बड़ा राजनीतिक असर राजीव गांधी सरकार पर पड़ा। सरकार पर रक्षा सौदे में कथित अनियमितताओं को लेकर सवाल उठाए गए। राजीव गांधी ने खुद पर लगे भ्रष्टाचार के आरोपों से इनकार किया था। इसके बावजूद बोफोर्स का नाम उनकी सरकार की राजनीतिक छवि से लंबे समय तक जुड़ा रहा। मामला इतना बड़ा बन गया कि संसद से लेकर चुनावी सभाओं तक इसकी चर्चा होने लगी। विपक्ष के लिए यह सरकार को घेरने का सबसे प्रभावी मुद्दा बन गया। 1989 Election में Bofors बना बड़ा मुद्दा 1984 में भारी बहुमत के साथ सत्ता में आई कांग्रेस को 1989 के लोकसभा चुनाव में बड़ा झटका लगा। चुनाव प्रचार के दौरान बोफोर्स विवाद लगातार चर्चा में रहा। विपक्ष ने इसे भ्रष्टाचार और सरकार की जवाबदेही से जोड़कर जनता के बीच उठाया। चुनाव के बाद कांग्रेस सत्ता से बाहर हो गई और राजीव गांधी प्रधानमंत्री नहीं रहे। यही वजह है कि भारतीय राजनीति में बोफोर्स केस को सिर्फ एक कानूनी मामला नहीं, बल्कि एक ऐसा विवाद माना जाता है जिसने चुनावी राजनीति पर भी गहरा असर डाला। 40 साल तक क्यों चर्चा में रहा Bofors Case? बोफोर्स मामले की जांच और इससे जुड़ी कानूनी प्रक्रिया कई वर्षों तक अलग-अलग स्तरों पर चलती रही। जांच एजेंसियों और अदालतों के सामने अलग-अलग पहलुओं की जांच हुई। मामले से जुड़े लोगों और कथित बिचौलियों को लेकर भी लंबे समय तक कानूनी और राजनीतिक बहस जारी रही। अलग-अलग समय पर सामने आने वाली जांच और अदालत की कार्यवाही के कारण यह मामला बार-बार सुर्खियों में लौटता रहा। चार दशक गुजरने के बावजूद बोफोर्स भारतीय राजनीति के सबसे चर्चित रक्षा सौदों में शामिल रहा। Supreme Court के फैसले से क्या हुआ? अब सुप्रीम कोर्ट द्वारा आखिरी याचिका खारिज किए जाने के बाद इस मामले की लंबी न्यायिक प्रक्रिया पर विराम लग गया है। इस फैसले ने उस विवाद के कानूनी अध्याय को बंद कर दिया, जिसकी शुरुआत करीब चार दशक पहले हुई थी। हालांकि बोफोर्स का राजनीतिक इतिहास आज भी भारतीय राजनीति में चर्चा का विषय है। Bofors विवाद की विरासत बोफोर्स मामले ने भारत में रक्षा सौदों की पारदर्शिता और सरकारी जवाबदेही को लेकर बड़ी बहस छेड़ी थी। इसके बाद रक्षा खरीद प्रक्रिया और उसमें बिचौलियों की भूमिका जैसे मुद्दे भी राजनीतिक चर्चा का हिस्सा बने। इस पूरे प्रकरण की सबसे बड़ी खासियत यही रही कि एक रक्षा सौदे से शुरू हुआ विवाद देश की राजनीति के केंद्र तक पहुंच गया। इसका असर एक चुनाव पर पड़ा और मामला दशकों तक अदालतों में चलता रहा। अब Supreme Court के ताजा फैसले के बाद 40 साल पुरानी इस कानूनी कहानी का अंत हो गया है। लेकिन भारतीय राजनीति के इतिहास में Bofors Case का नाम लंबे समय तक दर्ज रहेगा। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
Read more
देवेंद्र नाथ महतो

JPSC-JSSC Protest: देवेंद्र नाथ महतो की बिगड़ी तबीयत, Hunger Strike के बीच जताया जान का खतरा

झारखंड में सरकारी नौकरी की तैयारी कर रहे छात्रों का गुस्सा अब सड़क से लेकर विधानसभा तक दिखाई दे रहा है। JPSC-JSSC Exam और भर्ती प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं के खिलाफ चल रहा छात्र आंदोलन लगातार चर्चा में है। इसी बीच आंदोलन की अगुवाई कर रहे छात्र नेता देवेंद्र नाथ महतो की तबीयत बिगड़ने से मामला और गंभीर हो गया है। महतो पिछले कई दिनों से अपनी मांगों को लेकर भूख हड़ताल पर बैठे हैं। तबीयत खराब होने के बावजूद उन्होंने आंदोलन से पीछे हटने से इनकार किया है। इसी दौरान उन्होंने अपनी सुरक्षा को लेकर चिंता जताते हुए कहा कि ‘मेरी जान को खतरा है।’ कई दिनों से जारी है Student Protest रांची के जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में छात्रों का प्रदर्शन लगातार जारी है। आंदोलनकारी मुख्य रूप से 14वीं JPSC Civil Services परीक्षा को लेकर सवाल उठा रहे हैं। उनका आरोप है कि परीक्षा और भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता नहीं बरती गई। छात्रों की मांग है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए और अगर अनियमितताएं साबित होती हैं तो जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई की जाए। प्रदर्शनकारी भर्ती परीक्षाओं की प्रक्रिया में सुधार की मांग भी कर रहे हैं। भूख हड़ताल के दौरान बिगड़ी तबीयत लंबे समय से खाना नहीं लेने के कारण देवेंद्र नाथ महतो की तबीयत बिगड़ने की खबर सामने आई है। उनकी स्थिति को लेकर आंदोलनकारी छात्रों में भी चिंता बढ़ी है। इस बीच सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने महतो से बातचीत कर उनसे स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए पानी लेने की अपील की। इसके बाद महतो ने पानी लिया, लेकिन उन्होंने साफ किया कि इससे उनका आंदोलन खत्म नहीं हुआ है। यानी फिलहाल भूख हड़ताल और छात्र आंदोलन दोनों जारी हैं और प्रदर्शनकारी अपनी प्रमुख मांगों पर सरकार से ठोस जवाब चाहते हैं। क्या है छात्रों की Demand? छात्र संगठनों की मांगों में सबसे प्रमुख मुद्दा 14वीं JPSC परीक्षा से जुड़ा है। प्रदर्शनकारी परीक्षा को रद्द करने और कथित अनियमितताओं की स्वतंत्र जांच की मांग कर रहे हैं। इसके अलावा आंदोलनकारी चाहते हैं कि JPSC और JSSC की भर्ती प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी बनाया जाए, ताकि परीक्षा देने वाले युवाओं को किसी तरह की परेशानी न हो। कुछ प्रदर्शनकारियों ने मामले की जांच CBI या सेवानिवृत्त हाईकोर्ट जजों की समिति से कराने की मांग भी रखी है। सरकार से बातचीत की तैयारी लगातार बढ़ते आंदोलन के बीच सरकार और छात्रों के बीच बातचीत की संभावना भी बनी है। प्रदर्शनकारियों ने सरकार से बातचीत के लिए 11 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल तैयार किया है। इस टीम में छात्र प्रतिनिधियों के साथ विशेषज्ञ और एक वकील को भी शामिल किया गया है। सरकार की ओर से भी बातचीत के लिए प्रतिनिधिमंडल बनाए जाने की जानकारी सामने आई है। छात्रों को उम्मीद है कि बातचीत के जरिए उनकी मांगों पर कोई ठोस रास्ता निकल सकता है। विधानसभा में भी उठा JPSC-JSSC का मुद्दा छात्रों का यह आंदोलन अब झारखंड विधानसभा तक पहुंच चुका है। विपक्षी विधायकों ने भी भर्ती परीक्षाओं में कथित गड़बड़ियों का मुद्दा उठाते हुए सरकार से जवाब मांगा है। विपक्ष की ओर से मामले की CBI जांच की मांग भी की गई है। इस तरह JPSC-JSSC का मुद्दा अब केवल छात्रों के प्रदर्शन तक सीमित नहीं रहा, बल्कि राज्य की राजनीति में भी चर्चा का बड़ा विषय बन गया है। अब सरकार के फैसले पर टिकी नजर झारखंड में जारी छात्र आंदोलन के बीच सबसे बड़ी चिंता देवेंद्र नाथ महतो की बिगड़ती सेहत को लेकर है। एक तरफ छात्र अपनी मांगों से पीछे हटने को तैयार नहीं हैं, वहीं लंबे समय से चल रही भूख हड़ताल स्वास्थ्य के लिए चिंता का विषय बन गई है। अब सबकी नजर सरकार और छात्र प्रतिनिधियों के बीच होने वाली बातचीत पर है। अगर दोनों पक्ष किसी समाधान पर पहुंचते हैं तो आंदोलन को खत्म करने का रास्ता खुल सकता है। फिलहाल छात्र भर्ती परीक्षाओं में पारदर्शिता, निष्पक्ष जांच और अपनी मांगों पर ठोस कार्रवाई की मांग पर कायम हैं। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
Read more

भरतपुर में जमीन विवाद को लेकर युवक पर लाठी-डंडों से हमला, CCTV में कैद हुई वारदात

भरतपुर। राजस्थान के भरतपुर जिले में जमीन विवाद को लेकर एक युवक पर कथित तौर पर लाठी-डंडों और धारदार हथियारों से हमला किए जाने का मामला सामने आया है। हमलावरों ने बीच सड़क पर करीब पांच मिनट तक युवक की पिटाई की। गंभीर रूप से घायल युवक को परिजनों ने अस्पताल में भर्ती कराया, जहां उसके हाथ-पैर में कई फ्रैक्चर होने की पुष्टि हुई है। घटना का सीसीटीवी वीडियो भी सामने आया है। यह घटना 4 अगस्त की शाम करीब 6 बजे खेड़ली मोड़ थाना क्षेत्र में हुई। चारा लेकर लौट रहे युवक को रास्ते में रोका पीड़ित के पिता नेमी सिंह, निवासी छोंकरवाड़ा कलां, द्वारा दर्ज कराई गई एफआईआर के अनुसार उनका बेटा अरुण सिंह अपनी भतीजी के साथ बाइक से पशुओं का चारा लेकर घर लौट रहा था। आरोप है कि रास्ते में ट्यूबवेल के पास उनके रिश्तेदार हितेश और बाल बिहारी ने उसे रोक लिया। शिकायत के मुताबिक, पहले गाली-गलौज की गई और इसके बाद दोनों आरोपियों ने कथित रूप से लाठी-डंडों और धारदार हथियारों से हमला कर दिया। मारपीट में अरुण सिंह के हाथ-पैर सहित शरीर के कई हिस्सों में गंभीर चोटें आईं। आसपास मौजूद लोगों के हस्तक्षेप के बाद हमलावर मौके से भाग गए। अस्पताल में भर्ती, कई जगह फ्रैक्चर परिजनों ने घायल युवक को तुरंत अस्पताल पहुंचाया। परिवार का दावा है कि हमले में उसके हाथ-पैर की कई हड्डियां टूट गईं और शरीर पर गंभीर चोटें आई हैं। डॉक्टरों की निगरानी में उसका उपचार जारी है। जान से मारने की धमकी देने का आरोप एफआईआर में आरोप लगाया गया है कि वारदात के बाद आरोपी परिवार को जान से मारने की धमकी देते हुए मौके से फरार हो गए। पुलिस ने शिकायत के आधार पर मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। जमीन के पुराने विवाद को बताया वजह पीड़ित परिवार का कहना है कि दोनों पक्षों के बीच वर्षों पुराना जमीन का विवाद चल रहा है। नेमी सिंह के अनुसार, उनके पिता और आरोपियों के दादा के बीच वर्षों पहले पांच बिस्सा जमीन की अदला-बदली हुई थी। उनके परिवार ने उस जमीन पर मकान बना लिया, जबकि दूसरी ओर आरोपी पक्ष उनकी जमीन का उपयोग कर रहा है। परिवार का आरोप है कि करीब दो वर्ष पहले परिसीमन के बाद खसरा नंबर बदलने के कारण विवाद और बढ़ गया। इसके बाद से आरोपी पक्ष कथित तौर पर जमीन वापस लेने का दबाव बना रहा था। इसी रंजिश में हमला किए जाने का आरोप लगाया गया है। पुलिस मामले की जांच कर रही है और सीसीटीवी फुटेज सहित अन्य साक्ष्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। राजस्थान और देश की ताजा खबरों के लिए विजिट करें –deshharpal.com
Read more

सितंबर से देशभर में ‘क्या बोलती पब्लिक’ अभियान चलाएगी CJP, अभिजीत दीपके बोले- बेरोजगारी और महंगी शिक्षा होंगे मुख्य मुद्दे

छत्रपति संभाजीनगर। कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के संस्थापक अभिजीत दीपके ने घोषणा की है कि उनकी संस्था सितंबर से देशभर में ‘क्या बोलती पब्लिक’ अभियान शुरू करेगी। उन्होंने कहा कि इस अभियान के तहत गांवों और शहरों में जाकर युवाओं से संवाद किया जाएगा तथा बेरोजगारी, महंगी शिक्षा और शिक्षा सुधार जैसे मुद्दों को प्रमुखता से उठाया जाएगा। गुरुवार को संभाजीनगर में आयोजित बैठक के दौरान दीपके ने कहा कि देश में बेरोजगारी सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक है और इसे राष्ट्रीय स्तर पर प्रमुख मुद्दा बनाया जाएगा। उन्होंने आरोप लगाया कि शिक्षा व्यवस्था मुनाफे का माध्यम बन गई है, जिसे बदलने की जरूरत है। CJP चुनाव नहीं लड़ेगी, प्रेशर ग्रुप के तौर पर करेगी काम अभिजीत दीपके ने स्पष्ट किया कि कॉकरोच जनता पार्टी चुनावी राजनीतिक दल नहीं बनेगी। उनके अनुसार, संगठन लोकतांत्रिक संस्थाओं और शासन व्यवस्था में जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए एक पब्लिक प्रेशर ग्रुप के रूप में काम करेगा। उन्होंने कहा कि संगठन का उद्देश्य जनता की आवाज को प्रभावी तरीके से सामने लाना और जनहित से जुड़े मुद्दों पर दबाव बनाना है। अभियान के प्रमुख मुद्दे दीपके के अनुसार, ‘क्या बोलती पब्लिक’ अभियान के दौरान इन विषयों पर विशेष फोकस रहेगा— नेशनल वर्किंग कमेटी का गठन बैठक के दौरान CJP ने अपनी नेशनल वर्किंग कमेटी के सदस्यों की भी घोषणा की। संगठन ने बताया कि अगले छह महीनों में विभिन्न राज्यों में समन्वय समितियों के साथ लोकसभा और शहर स्तर पर भी संगठनात्मक इकाइयों का गठन किया जाएगा। जंतर-मंतर आंदोलन की हुई समीक्षा दीपके ने बताया कि बैठक में जंतर-मंतर पर हुए आंदोलन की समीक्षा के साथ-साथ ई-20 पेट्रोल, शिक्षा व्यवस्था, संगठन विस्तार और भविष्य के आंदोलनों की रणनीति पर भी चर्चा की गई। गौरतलब है कि NEET पेपर लीक मामले को लेकर CJP ने 20 जून से 25 जुलाई तक दिल्ली के जंतर-मंतर पर 36 दिनों तक धरना दिया था। बाद में तत्कालीन केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद संगठन ने आंदोलन समाप्त करने की घोषणा की थी। सोशल मीडिया अभियान से शुरू हुई थी CJP अभिजीत दीपके ने पहले भी कहा था कि देश को नए राजनीतिक दल की नहीं, बल्कि एक मजबूत प्रेशर ग्रुप की जरूरत है। CJP की शुरुआत सोशल मीडिया पर एक व्यंग्यात्मक अभियान के रूप में हुई थी। बाद में यह छात्र और युवा मुद्दों पर सक्रिय एक संगठित अभियान के रूप में सामने आया, जिसने शिक्षा और रोजगार जैसे विषयों पर अपनी गतिविधियां तेज कीं। देश और राजनीति से जुड़ी ताजा खबरों के लिए विजिट करें –deshharpal.com
Read more

मोहन भागवत बोले- Gen-Z और Gen Alpha सबसे ज्यादा देशभक्त, संवाद की कमी से हुए आंदोलन

मुंबई। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के सरसंघचालक मोहन भागवत ने गुरुवार को मुंबई में आयोजित एक कार्यक्रम में Gen-Z और Gen Alpha के युवाओं से संवाद किया। करीब एक घंटे तक चले इस संवाद में उन्होंने कहा कि नई पीढ़ी पुरानी पीढ़ी की तुलना में अधिक देशभक्त और ईमानदार है। उन्होंने जोर देकर कहा कि युवाओं की बात सुनना जरूरी है और संवाद की कमी ही कई बार आंदोलनों की वजह बनती है। भागवत ने यह संबोधन इंडिया इंटरनेशनल मूवमेंट टू यूनाइट नेशंस (IIMUN) की 15वीं वर्षगांठ के अवसर पर दिया। कार्यक्रम में 11 से 19 वर्ष आयु वर्ग के लगभग 2,000 छात्र-छात्राएं शामिल हुए। संवाद की कमी से आंदोलन की नौबत आई मोहन भागवत ने कहा कि जब बातचीत सफल नहीं होती, तब आंदोलन का रास्ता अपनाया जाता है। उनके अनुसार यदि समय रहते संवाद हो जाए, तो कई विवाद टाले जा सकते हैं। उन्होंने कहा कि आंदोलन भी संवाद का एक माध्यम है और उसे इसी नजरिए से देखा जाना चाहिए। Gen-Z सवाल पूछती है, जवाब भी चाहती है भागवत ने कहा कि पहले की पीढ़ी बड़े-बुजुर्गों की बात बिना सवाल किए मान लेती थी, लेकिन आज की युवा पीढ़ी हर विषय पर सवाल पूछती है और तर्कसंगत जवाब चाहती है। उन्होंने कहा कि युवाओं को केवल उत्तर ही नहीं, बल्कि विश्वास और अपनापन भी चाहिए। आंदोलन को देशविरोध से न जोड़ें RSS प्रमुख ने कहा कि यदि युवा किसी मुद्दे पर आंदोलन कर रहे हैं, तो उन्हें देशविरोधी नहीं कहा जाना चाहिए। उनके अनुसार वे देश की अगली पीढ़ी हैं और उनकी चिंताओं को गंभीरता से समझने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि आंदोलन व्यवस्था में सुधार के उद्देश्य से होना चाहिए, न कि किसी व्यक्ति या संस्था के खिलाफ। जंतर-मंतर की घटना पर कही यह बात जंतर-मंतर पर हुए आंदोलन और पुलिस कार्रवाई के सवाल पर भागवत ने कहा कि किसी भी घटना पर निष्कर्ष निकालने से पहले उसके कारणों को समझना जरूरी है। उन्होंने कहा कि मीडिया रिपोर्टों में कुछ उपद्रवियों के शामिल होने की बात सामने आई है, लेकिन यदि उन्हें किसी पर भरोसा करना हो तो वह देश के युवाओं पर करेंगे। शिक्षा व्यवस्था में सुधार पर जोर भागवत ने कहा कि शिक्षा को व्यवसाय नहीं बनाया जाना चाहिए। उनका मानना है कि गुणवत्तापूर्ण शिक्षा सभी के लिए सुलभ होनी चाहिए और इसके लिए सरकार के साथ समाज की भी जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि शिक्षा व्यवस्था मजबूत होने के बाद ही पाठ्यक्रम जैसे विषयों पर चर्चा होनी चाहिए। विदेश नीति और सामाजिक मुद्दों पर भी रखी राय उन्होंने कहा कि युद्ध की स्थिति में देश को सरकार के साथ खड़ा होना चाहिए, लेकिन संघर्ष समाप्त होने के बाद बातचीत का रास्ता तलाशना भी जरूरी है। समलैंगिक विवाह के मुद्दे पर उन्होंने कहा कि किसी भी सामाजिक व्यवस्था में बदलाव से पहले समाज को उसके लिए तैयार करना आवश्यक है। वहीं महिलाओं की भागीदारी पर उन्होंने कहा कि उन्हें हर क्षेत्र में समान अवसर और बराबरी का अधिकार मिलना चाहिए। ‘फिंगर क्लैप’ भी बना चर्चा का विषय कार्यक्रम के दौरान मोहन भागवत ने युवाओं के बीच लोकप्रिय ‘फिंगर क्लैप’ शैली में भी अपनी प्रतिक्रिया दी। यह ताली बजाने का एक तरीका है, जिसमें हथेलियों की बजाय उंगलियों से हल्की चुटकी जैसी आवाज निकालकर सराहना व्यक्त की जाती है। हाल के वर्षों में यह शैली सोशल मीडिया के माध्यम से युवाओं के बीच काफी लोकप्रिय हुई है। देश, राजनीति और राष्ट्रीय घटनाक्रम की ताजा खबरों के लिए विजिट करें –deshharpal.com
Read more
CCMP

Doctors vs Government in Maharashtra: CCMP Issue पर बढ़ा विवाद

महाराष्ट्र में Doctors Strike अब बड़ा मुद्दा बन गई है। CCMP (Certificate Course in Modern Pharmacology) को लेकर राज्यभर के डॉक्टरों ने विरोध तेज कर दिया है। डॉक्टर हाथों में ‘No CCMP’ लिखी तख्तियां लेकर सड़कों पर उतरे और सरकार के फैसले के खिलाफ आवाज बुलंद की। इस बीच कोर्ट ने भी मामले पर स्वत: संज्ञान (Suo Motu Cognizance) लेते हुए हस्तक्षेप किया है। क्या है Maharashtra CCMP Controversy? महाराष्ट्र सरकार के उस फैसले को लेकर विवाद खड़ा हुआ है, जिसमें CCMP कोर्स पूरा करने वाले कुछ होम्योपैथी डॉक्टरों को आधुनिक चिकित्सा (Modern Medicine/Allopathy) से जुड़ी दवाओं के इस्तेमाल और पंजीकरण की अनुमति देने का रास्ता खुलता है। विरोध कर रहे MBBS डॉक्टरों और मेडिकल संगठनों का कहना है कि एलोपैथिक इलाज के लिए लंबी और गहन मेडिकल ट्रेनिंग जरूरी होती है। उनका तर्क है कि सीमित अवधि के कोर्स के आधार पर आधुनिक चिकित्सा की अनुमति देने से मरीजों की सुरक्षा पर सवाल खड़े हो सकते हैं। Doctors ने क्यों शुरू की Indefinite Strike? CCMP के खिलाफ डॉक्टर संगठनों ने राज्यव्यापी आंदोलन शुरू किया है। कई अस्पतालों और मेडिकल संस्थानों में डॉक्टरों ने प्रदर्शन करते हुए “No CCMP” के नारे लगाए। डॉक्टरों का कहना है कि यह केवल एक कोर्स या पंजीकरण का मामला नहीं है, बल्कि यह patient safety और healthcare quality से जुड़ा मुद्दा है। उनके अनुसार चिकित्सा क्षेत्र में अलग-अलग प्रणालियों के बीच स्पष्ट नियम और जिम्मेदारियां तय होना जरूरी है। डॉक्टरों की मांग क्या है? प्रदर्शन कर रहे डॉक्टरों की मुख्य मांग है कि CCMP के आधार पर होम्योपैथी चिकित्सकों को एलोपैथिक प्रैक्टिस की अनुमति नहीं दी जाए। डॉक्टर संगठनों का कहना है कि आधुनिक चिकित्सा पद्धति में इलाज करने के लिए MBBS और उसके बाद की विशेषज्ञ ट्रेनिंग जरूरी है। उन्होंने सरकार से इस फैसले को वापस लेने या दोबारा समीक्षा करने की मांग की है। सरकार का पक्ष क्या है? दूसरी ओर, CCMP व्यवस्था के समर्थकों का कहना है कि महाराष्ट्र के ग्रामीण और दूरदराज इलाकों में डॉक्टरों की कमी को देखते हुए यह कदम स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच बढ़ाने में मदद कर सकता है। सरकार का उद्देश्य उन क्षेत्रों में मेडिकल सुविधा उपलब्ध कराना बताया जा रहा है, जहां विशेषज्ञ डॉक्टरों की संख्या कम है। Court ने लिया Suo Motu Cognizance इस विवाद के बीच अदालत की भूमिका भी महत्वपूर्ण हो गई है। कोर्ट ने मामले को गंभीरता से लेते हुए स्वत: संज्ञान लिया है। न्यायपालिका के हस्तक्षेप के बाद अब नजर इस बात पर है कि अदालत इस पूरे विवाद में क्या दिशा-निर्देश देती है और सरकार की ओर से आगे क्या कदम उठाए जाते हैं। Maharashtra Healthcare System पर असर लंबी चलने वाली डॉक्टरों की हड़ताल से राज्य की स्वास्थ्य सेवाओं पर असर पड़ने की आशंका है। हालांकि इमरजेंसी सेवाओं को जारी रखने की बात कही जा रही है, लेकिन अगर विवाद जल्द नहीं सुलझा तो मरीजों को परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। क्यों महत्वपूर्ण है यह विवाद? महाराष्ट्र का CCMP विवाद केवल डॉक्टरों और सरकार के बीच का मतभेद नहीं है। यह देश में medical education, healthcare regulation और patient safety से जुड़े बड़े सवालों को सामने ला रहा है। अब सभी की नजर सरकार, डॉक्टर संगठनों और कोर्ट के अगले फैसले पर टिकी है। आने वाले दिनों में यह तय होगा कि महाराष्ट्र में CCMP व्यवस्था को लेकर क्या समाधान निकलता है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
Read more
1 … 33 34 35 36 37 … 237

Trending News

Editor's Picks

मेरठ हत्याकांड: मुस्कान और साहिल को फांसी की सजा, पति सौरभ की हत्या के मामले में कोर्ट का फैसला

मेरठ। उत्तर प्रदेश के मेरठ में सौरभ राजपूत हत्याकांड में अदालत ने उनकी पत्नी मुस्कान रस्तोगी और उसके प्रेमी साहिल को फांसी की सजा सुनाई है। दोनों पर सौरभ की हत्या करने का आरोप साबित होने के बाद यह फैसला सुनाया गया। सजा सुनाते हुए जज ने वारदात को नृशंस हत्याकांड बताया और कहा कि इसमें माफी स्वीकार नहीं होगी। वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से कोर्ट में पेश हुए मुस्कान और साहिल सजा सुनाए जाने से पहले जेल में बंद मुस्कान और साहिल को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए अदालत से जोड़ा गया। इस दौरान दोनों रोने लगे। जज ने मुस्कान से पूछा कि पति सौरभ राजपूत की हत्या के मामले में दोषी ठहराए जाने के बाद वह क्या सजा चाहती है। इस पर मुस्कान ने कहा, “मेरी बच्चियों का ख्याल रखा जाए।” इसके बाद वह खामोश हो गई। वहीं, साहिल से भी यही सवाल पूछा गया, लेकिन उसने कोई जवाब नहीं दिया। सजा के ऐलान के बाद रो पड़ीं सौरभ की मां अदालत के फैसले के बाद सौरभ राजपूत की मां भावुक हो गईं और रो पड़ीं। उन्होंने कहा कि उन्हें शांति से न्याय मिल गया। इस मामले में सजा का ऐलान सौरभ के परिवार के लिए लंबे इंतजार के बाद आया है। 3 मार्च 2025 को हुई थी सौरभ की हत्या सौरभ राजपूत की हत्या 3 मार्च 2025 को हुई थी। मामले में सामने आए विवरण के अनुसार, हत्या के बाद शव के पांच टुकड़े किए गए और उन्हें नीले ड्रम में भर दिया गया था। इस वारदात ने पूरे देश में व्यापक चर्चा बटोरी थी। अदालत ने मामले में मुस्कान रस्तोगी और साहिल को दोषी ठहराते हुए मृत्युदंड की सजा सुनाई है।

इंदौर में प्लॉट बेचने के नाम पर 7.80 लाख की ठगी का आरोप, ब्रोकर समेत दो पर FIR

शहर के एरोड्रम थाना क्षेत्र में प्लॉट बेचने के नाम पर धोखाधड़ी का मामला सामने आया है। आरोप है कि प्लॉट का सौदा करने के बाद ब्रोकर और प्लॉट मालिक ने फरियादी से 7 लाख 80 हजार रुपये ले लिए, लेकिन न तो प्लॉट की रजिस्ट्री कराई और न ही कब्जा दिया। शिकायत की जांच के बाद एरोड्रम थाना पुलिस ने नंदकिशोर मनावत और धर्मेंद्र ठाकुर के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर ली है। 9.30 लाख में तय हुआ था प्लॉट का सौदा पुलिस के मुताबिक, नंदबाग कॉलोनी निवासी विजय चौहान ने शिकायत में बताया कि उन्होंने नंदबाग में एक प्लॉट का सौदा 9 लाख 30 हजार रुपये में तय किया था। इस संबंध में एग्रीमेंट भी किया गया था। फरियादी ने आरोप लगाया कि उन्होंने नकद और ऑनलाइन माध्यम से कुल 7 लाख 80 हजार रुपये का भुगतान कर दिया, लेकिन इसके बावजूद उन्हें प्लॉट का कब्जा नहीं मिला और रजिस्ट्री भी नहीं कराई गई। ब्रोकर ने परिचित बताकर कराया था सौदा विजय चौहान के अनुसार, धर्मेंद्र ठाकुर ने उन्हें बताया था कि नंदकिशोर मनावत उसका परिचित है और वह अपना प्लॉट बेचना चाहता है। इसके बाद धर्मेंद्र ने सौदे में ब्रोकर की भूमिका निभाई और इसके बदले 10 हजार रुपये लिए। शिकायतकर्ता का आरोप है कि भुगतान के बाद जब उन्होंने रजिस्ट्री कराने और प्लॉट का कब्जा देने की मांग की, तो उन्हें लगातार टालमटोल का सामना करना पड़ा। 25 से ज्यादा केस होने की धमकी देने का आरोप फरियादी ने आरोप लगाया कि रजिस्ट्री और कब्जे के लिए दबाव बनाने पर धर्मेंद्र ठाकुर ने धमकी दी। शिकायत के मुताबिक, उसने कहा कि उसके खिलाफ 25 से ज्यादा मामले चल रहे हैं। साथ ही, उसके या नंदकिशोर मनावत के पास दोबारा आने पर अंजाम भुगतने की चेतावनी भी दी। 2.80 लाख रुपये लौटाए, 5 लाख बाकी होने का दावा विजय चौहान के मुताबिक, पुलिस में शिकायत करने की बात कहने के बाद नंदकिशोर मनावत ने 2 लाख 50 हजार रुपये नकद और 30 हजार रुपये ऑनलाइन वापस किए। हालांकि, फरियादी का आरोप है कि बाकी 5 लाख रुपये लौटाने से इनकार कर दिया गया। इसके बाद विजय चौहान ने पुलिस अधिकारियों से शिकायत की। जांच के बाद एरोड्रम थाना पुलिस ने नंदकिशोर मनावत और धर्मेंद्र ठाकुर के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर आगे की कार्रवाई शुरू कर दी है। मामले में लगाए गए आरोपों की पुष्टि न्यायिक प्रक्रिया के तहत होनी बाकी है।

SIR के खिलाफ प्रदर्शन करने वाले छात्रों से मिले राहुल गांधी, दिल्ली पुलिस पर मारपीट के आरोप

नई दिल्ली। SIR के खिलाफ दिल्ली में प्रदर्शन करने वाले छात्रों ने बुधवार को कांग्रेस नेता राहुल गांधी से मुलाकात की। इसके बाद राहुल गांधी और छात्रों ने संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस की, जिसमें प्रदर्शनकारियों ने दिल्ली पुलिस पर मारपीट और हिरासत के दौरान दुर्व्यवहार करने के आरोप लगाए। प्रेस कॉन्फ्रेंस में NSUI के छात्रों, कार्यकर्ताओं और कंटेंट क्रिएटर्स ने अपने साथ हुई कथित घटनाओं की जानकारी दी। प्रदर्शनकारियों ने पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए मामले में जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की। छात्रा ने कान पर चोट लगने का लगाया आरोप प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान एक छात्रा ने आरोप लगाया कि हिरासत के दौरान पुलिसकर्मी ने उसके प्राइवेट पार्ट पर लात मारी। वहीं, दिल्ली विश्वविद्यालय की छात्रा अदिरा ने दावा किया कि पुलिस की पिटाई के कारण उसके एक कान की सुनने की क्षमता चली गई। प्रदर्शनकारियों ने हिरासत के दौरान कथित ज्यादती और मारपीट से जुड़े अपने अनुभव साझा किए। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि की जानकारी सामने नहीं आई है। RSS और भाजपा से जुड़े लोगों के कहने पर हिरासत का आरोप एक अन्य प्रदर्शनकारी ने आरोप लगाया कि पुलिस RSS और भाजपा से जुड़े लोगों के कहने पर प्रदर्शनकारियों को हिरासत में ले रही थी। यह आरोप भी प्रदर्शनकारियों की ओर से लगाया गया है। राहुल गांधी ने सबूत सुरक्षित रखने को कहा राहुल गांधी ने छात्रों से घटनाओं से जुड़े वीडियो और अन्य सबूत सुरक्षित रखने को कहा। उन्होंने कहा कि इन सबूतों के आधार पर पुलिसकर्मियों से लेकर मुख्य चुनाव आयुक्त तक, जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की जाएगी। प्रदर्शनकारियों के आरोपों और पुलिस की कार्रवाई को लेकर आगे क्या कदम उठाए जाते हैं, इस पर नजर रहेगी।

बांग्लादेश टेस्ट सीरीज से बाहर हुए शाई होप और अल्जारी जोसेफ, केविन विकहम को पहली बार मिला मौका

क्रिकेट न्यूज। वेस्टइंडीज को बांग्लादेश के खिलाफ आगामी दो टेस्ट मैचों की सीरीज से पहले बड़ा झटका लगा है। टीम के बल्लेबाज शाई होप और तेज गेंदबाज अल्जारी जोसेफ सीरीज से बाहर हो गए हैं। क्रिकेट वेस्टइंडीज (CWI) ने 23 वर्षीय टॉप ऑर्डर बल्लेबाज केविन विकहम को पहली बार टेस्ट टीम में शामिल किया है। ऑलराउंडर कीमो पॉल को भी टीम में जगह मिली है। CWI के मुताबिक, मेडिकल जांच और विशेषज्ञों की सलाह के बाद अल्जारी जोसेफ को सीरीज से हटाने का फैसला लिया गया। बोर्ड उनके कार्यभार को नियंत्रित कर चोट के जोखिम को कम करना चाहता है। वहीं, तीनों फॉर्मेट में लगातार खेलने के बाद शाई होप को आराम दिया गया है। चोट के खतरे को देखते हुए जोसेफ को आराम क्रिकेट वेस्टइंडीज ने बताया कि अल्जारी जोसेफ को टीम से बाहर रखने का फैसला उनकी सहमति से लिया गया है। बोर्ड के अनुसार, टेस्ट क्रिकेट में तेज गेंदबाजों को लंबे स्पेल में लगातार गेंदबाजी करनी पड़ती है। इससे छोटे फॉर्मेट की तुलना में कार्यभार और चोट का जोखिम बढ़ सकता है। इसी को ध्यान में रखते हुए जोसेफ के वर्कलोड को कम करने का फैसला किया गया है, ताकि उनके स्वास्थ्य और फिटनेस का ध्यान रखा जा सके। शाई होप को भी दिया गया आराम CWI ने कहा कि शाई होप तीनों फॉर्मेट में लगातार खेल रहे थे। ऐसे में उनके कार्यभार और स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए उन्हें टेस्ट सीरीज से आराम दिया गया है। बोर्ड का यह फैसला फरवरी 2027 में होने वाले वनडे वर्ल्ड कप क्वालिफायर्स को ध्यान में रखकर भी लिया गया है। टीम प्रबंधन चाहता है कि खिलाड़ी आगामी महत्वपूर्ण मुकाबलों के लिए फिट रहें। केविन विकहम को पहली बार टेस्ट टीम में मौका शाई होप की गैरमौजूदगी में 23 वर्षीय टॉप ऑर्डर बल्लेबाज केविन विकहम को पहली बार टेस्ट टीम में शामिल किया गया है। इसके अलावा ऑलराउंडर कीमो पॉल को भी टीम में जगह मिली है। अब देखना होगा कि बांग्लादेश की घरेलू परिस्थितियों में वेस्टइंडीज की टीम नए संयोजन के साथ कैसा प्रदर्शन करती है। कोच डैरेन सैमी ने सीरीज जीत को बताया अहम वेस्टइंडीज के मुख्य कोच डैरेन सैमी ने कहा कि वर्ल्ड टेस्ट चैंपियनशिप के मौजूदा चक्र की शुरुआत में टीम ने कुछ लक्ष्य तय किए थे। इनमें टेस्ट रैंकिंग के ऊपरी आधे हिस्से में जगह बनाना भी शामिल है। उन्होंने कहा कि बांग्लादेश के खिलाफ सीरीज जीतने से टीम अपने लक्ष्य के करीब पहुंच सकती है। सैमी के मुताबिक, बांग्लादेश को उसकी घरेलू परिस्थितियों में हराना चुनौतीपूर्ण होगा, लेकिन टीम इसके लिए तैयार है। 28 अक्टूबर से शुरू होगा पहला टेस्ट बांग्लादेश और वेस्टइंडीज के बीच दो टेस्ट मैचों की सीरीज खेली जाएगी। पहला टेस्ट 28 अक्टूबर से ढाका में शुरू होगा, जबकि दूसरा टेस्ट 5 नवंबर से सिलहट में खेला जाएगा।

IMF ने बढ़ाया भारत की GDP ग्रोथ का अनुमान, 2026 और 2027 में 7% विकास दर रहने की उम्मीद

नई दिल्ली। अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) ने साल 2026 के लिए भारत की आर्थिक विकास दर का अनुमान 6.4% से बढ़ाकर 7% कर दिया है। वैश्विक तनाव, आर्थिक सुस्ती और कच्चे तेल की ऊंची कीमतों के बावजूद भारतीय अर्थव्यवस्था की मजबूती ने अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं का ध्यान खींचा है। मजबूत घरेलू मांग और सर्विसेज सेक्टर के बेहतर प्रदर्शन को भारत की तेज विकास दर की प्रमुख वजह माना गया है। IMF ने अक्टूबर 2026 की अपनी वर्ल्ड इकोनॉमिक आउटलुक रिपोर्ट में भारत की विकास संभावनाओं को सकारात्मक बताया है। रिपोर्ट के अनुसार, ऊर्जा आयात पर निर्भर कई उभरती अर्थव्यवस्थाएं जहां दबाव का सामना कर रही हैं, वहीं भारत की आर्थिक गतिविधियों में मजबूती बनी हुई है। 2027 में भी 7% ग्रोथ का अनुमान IMF ने 2026 के लिए भारत की विकास दर के अनुमान में जुलाई के मुकाबले 0.6 प्रतिशत अंक और अप्रैल के मुकाबले 0.5 प्रतिशत अंक की बढ़ोतरी की है। वहीं, 2027 के लिए भी विकास दर का अनुमान बढ़ाकर 7% कर दिया गया है। दिए गए आंकड़ों के मुताबिक, 2027 का अनुमान जुलाई के मुकाबले 0.3 प्रतिशत अंक और अप्रैल के मुकाबले 0.5 प्रतिशत अंक अधिक है। इससे संकेत मिलता है कि वैश्विक आर्थिक चुनौतियों के बीच भी भारत में विकास की संभावनाओं को लेकर उम्मीद बनी हुई है। IMF से पहले विश्व बैंक और आर्थिक सहयोग एवं विकास संगठन (OECD) जैसी अंतरराष्ट्रीय संस्थाएं भी भारत की विकास दर के अनुमान में बढ़ोतरी कर चुकी हैं। चीन की सुस्ती के बीच भारत पर नजर रिपोर्ट के मुताबिक, एशिया की अर्थव्यवस्थाओं में मजबूती देखने को मिल रही है। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) से जुड़ी गतिविधियों में तेजी ने भी वैश्विक आर्थिक परिदृश्य को प्रभावित किया है। भारत और चीन एशिया की आर्थिक गतिविधियों में अहम भूमिका निभा रहे हैं, हालांकि दोनों देशों की विकास संभावनाओं में अंतर दिखाई दे रहा है। IMF के अनुमान के अनुसार, चीन की विकास दर 2026 में 4.5% और 2027 में 4% रह सकती है। वैश्विक तनाव और ऊर्जा की ऊंची कीमतों को चीन की आर्थिक वृद्धि के सामने चुनौतियों में शामिल किया गया है। दुनिया की आर्थिक विकास दर पर दबाव IMF के मुताबिक, 2028 से 2031 के बीच वैश्विक अर्थव्यवस्था औसतन 3.2% की दर से बढ़ सकती है। यह 2000 से 2019 के बीच महामारी से पहले दर्ज औसत 3.7% की विकास दर से कम है। रिपोर्ट में वैश्विक तनाव, ऊर्जा बाजार में अनिश्चितता और ऊर्जा आयात पर निर्भर उभरती अर्थव्यवस्थाओं पर पड़ने वाले दबाव को आर्थिक विकास के लिए चुनौती बताया गया है। ऐसे माहौल में भारत की अनुमानित विकास दर अपेक्षाकृत मजबूत दिखाई देती है। मजबूत घरेलू मांग और जनसांख्यिकी से मिल रहा सहारा भारत की आर्थिक मजबूती के पीछे बढ़ता घरेलू बाजार, मजबूत मांग, अनुकूल जनसांख्यिकी और सुधारों को अहम कारक माना गया है। सर्विसेज सेक्टर का बेहतर प्रदर्शन भी विकास दर को सहारा दे रहा है। हालांकि, बेहतर अनुमान के बावजूद चुनौतियां खत्म नहीं हुई हैं। कच्चे तेल की ऊंची कीमतें भारत के आयात बिल और महंगाई पर दबाव डाल सकती हैं। इसके अलावा, अंतरराष्ट्रीय तनाव और वैश्विक मांग में कमजोरी का असर भारतीय अर्थव्यवस्था पर भी पड़ सकता है।

About Me

देशहरपल सिर्फ खबरों का मंच नहीं, बल्कि आपकी आवाज़ को सामने लाने का एक सशक्त माध्यम भी है। यहां आपको ताज़ातरीन खबरों के साथ-साथ नौकरी, शिक्षा, और नए भारत की बदलती आर्थिक तस्वीर पर उपयोगी और भरोसेमंद जानकारी मिलेगी।

Phone: +91 9406783569, +91 755 484 8829
Email: support@deshharpal.com
Address : A-23 Sakshi Bunglow Trilanga Near Aura Mall Bhopal M.P

Recent Posts

  • All Post
  • Breaking News
  • Education
  • More News
  • Web Story
  • एंटरटेनमेंट
  • देश-हरपल
  • धर्म-कर्म
  • प्रदेश
  • बिज़नेस
  • वर्ल्ड न्यूज़
  • वीडियो
  • स्पोर्ट्स
    •   Back
    • एक्सक्लूसिव
    • Editorial
    •   Back
    • IPL 2026
    • T20 वर्ल्ड कप
    • FIFA 2026
    •   Back
    • सोच-विचार
    • हेल्थ
    • ट्रैवल
    • कल्चर
    • एनवायरनमेंट
    • Impact Feature
    •   Back
    • राशिफल
    • पंचांग
    • पर्व-त्यौहार
    • पूजा-पाठ
    • चैत्र नवरात्रि 2025
    •   Back
    • मध्य प्रदेश
    • छत्तीसगढ़
    •   Back
    • टीवी
    • वेब-सीरीज
    • फिल्म रिव्यू
    • बॉलीवुड
    •   Back
    • लाइफस्टाइल
    •   Back
    • स्टॉक-मार्केट

© 2023 Deshharpal. All Rights Reserved.