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Donald Trump की Venezuela की अंतरिम राष्ट्रपति को खुली धमकी, बोले- बात नहीं मानी तो हालात और बिगड़ेंगे

Donald Trump की Venezuela की अंतरिम राष्ट्रपति को खुली धमकी, बोले- बात नहीं मानी तो हालात और बिगड़ेंगे

अमेरिका के राष्ट्रपति Donald Trump ने एक बार फिर वेनेजुएला को लेकर कड़ा रुख अपनाया है। ट्रम्प ने वेनेजुएला की अंतरिम राष्ट्रपति को सीधे शब्दों में चेतावनी दी है कि अगर अमेरिका की शर्तें नहीं मानी गईं तो हालात और ज्यादा खराब किए जा सकते हैं। ट्रम्प के इस बयान के बाद अंतरराष्ट्रीय राजनीति में हलचल तेज हो गई है। वेनेजुएला पहले से ही आर्थिक संकट, राजनीतिक अस्थिरता और जनता की परेशानियों से जूझ रहा है। ऐसे में इस तरह की धमकी ने आम लोगों की चिंता और बढ़ा दी है। UNSC में आज इमरजेंसी मीटिंग ट्रम्प के बयान के बाद संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) ने आज आपात बैठक बुलाई है। इस बैठक में वेनेजुएला की मौजूदा स्थिति, अमेरिका के रुख और इससे वैश्विक शांति पर पड़ने वाले असर पर चर्चा होगी। कई देशों ने अमेरिका के इस कड़े रवैये पर सवाल उठाए हैं, जबकि कुछ देश वेनेजुएला में लोकतंत्र बहाली की बात कर रहे हैं। आम जनता सबसे ज्यादा परेशान राजनीतिक टकराव का सीधा असर वेनेजुएला की जनता पर पड़ रहा है। खाने-पीने की कमी, महंगाई और बेरोजगारी से जूझ रहे लोग अब अंतरराष्ट्रीय तनाव से और डरे हुए हैं। लोगों को उम्मीद है कि UNSC की बैठक से कोई सकारात्मक समाधान निकलेगा। दुनिया भर की नजरें अब इस बैठक और आने वाले फैसलों पर टिकी हैं। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Delhi

Delhi दंगा मामले में सुप्रीम कोर्ट का फैसला Umar Khalid और Sharjeel Imam को झटका

साल 2020 के Delhi Riots Case से जुड़े बहुचर्चित larger conspiracy matter में सुप्रीम कोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाते हुए उमर खालिद (Umar Khalid) और शरजील इमाम (Sharjeel Imam) की जमानत याचिकाएं खारिज कर दी हैं। अदालत ने साफ कहा कि दोनों आरोपियों के खिलाफ लगे आरोप गंभीर हैं और उनकी भूमिका अन्य आरोपियों से अलग मानी जाती है। यह फैसला ऐसे समय में आया है जब यह मामला न सिर्फ कानूनी बल्कि सामाजिक और राजनीतिक बहस का विषय बना हुआ है। सुप्रीम कोर्ट ने क्यों ठुकराई जमानत? सुप्रीम कोर्ट की पीठ ने कहा कि उमर खालिद और शरजील इमाम पर UAPA (Unlawful Activities Prevention Act) के तहत आरोप हैं, जिसमें जमानत के नियम बेहद सख्त हैं। अदालत के अनुसार, इस स्तर पर उपलब्ध रिकॉर्ड और आरोपों को देखते हुए यह नहीं कहा जा सकता कि मामला कमजोर है या आरोप प्रथम दृष्टया गलत हैं। कोर्ट ने यह भी टिप्पणी की कि दोनों की कथित भूमिका “qualitatively different” यानी अन्य सह-आरोपियों की तुलना में ज्यादा गंभीर मानी गई है। क्या है Delhi Riots 2020 का मामला? फरवरी 2020 में उत्तर-पूर्वी दिल्ली में हुए सांप्रदायिक दंगों में 50 से ज्यादा लोगों की जान गई थी और सैकड़ों लोग घायल हुए थे। दिल्ली पुलिस ने जांच के बाद दावा किया कि यह हिंसा अचानक नहीं, बल्कि पूर्व नियोजित साजिश के तहत हुई थी। इसी कथित साजिश के तहत उमर खालिद, शरजील इमाम और अन्य लोगों पर दंगे भड़काने, भाषणों और बैठकों के जरिए माहौल तनावपूर्ण बनाने जैसे आरोप लगाए गए। अन्य आरोपियों को मिली राहत जहां एक ओर उमर खालिद और शरजील इमाम को राहत नहीं मिली, वहीं सुप्रीम कोर्ट ने इसी केस में पांच अन्य आरोपियों —गुलफिशा फातिमा, मीरान हैदर, शिफा-उर-रहमान, मोहम्मद सलीम खान और शादाब अहमद — को सशर्त जमानत दे दी। कोर्ट ने कहा कि इन आरोपियों के खिलाफ आरोप और सबूत, मुख्य आरोपियों की तुलना में उतने गंभीर नहीं हैं। पहले भी खारिज हो चुकी हैं याचिकाएं इससे पहले दिल्ली हाईकोर्ट भी उमर खालिद और शरजील इमाम की जमानत याचिकाएं खारिज कर चुका है। दोनों पिछले कई वर्षों से जेल में बंद हैं और ट्रायल अभी भी जारी है, जिसे लेकर देरी के सवाल उठते रहे हैं। फैसले के मायने सुप्रीम कोर्ट का यह निर्णय एक बार फिर यह दिखाता है कि UAPA जैसे कठोर कानूनों में जमानत पाना आसान नहीं है। साथ ही, यह फैसला उन बहसों को भी हवा देता है जो लंबे समय तक बिना दोष सिद्ध हुए हिरासत, नागरिक अधिकारों और राष्ट्रीय सुरक्षा के संतुलन पर होती रही हैं। फिलहाल, उमर खालिद और शरजील इमाम को जेल में ही रहना होगा और आगे की कानूनी लड़ाई निचली अदालत में जारी रहेगी। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Bangladesh

Bangladesh Unrest हिंदू व्यापारी को पीटकर जिंदा जलाया

New Year Eve पर हुआ हमला, तीन दिन तक जिंदगी से जूझते रहे, 3 जनवरी को निधन बांग्लादेश (Bangladesh) में अल्पसंख्यक हिंदू समुदाय के खिलाफ बढ़ती हिंसा के बीच एक और हृदय विदारक घटना सामने आई है। शरीयतपुर जिले के डामुड्या उपजिला में रहने वाले हिंदू व्यापारी खोकन चंद्र दास की बेरहमी से हत्या कर दी गई। नए साल की पूर्व संध्या पर हुए इस हमले के बाद वह तीन दिन तक जिंदगी और मौत के बीच संघर्ष करते रहे, लेकिन 3 जनवरी 2026 को अस्पताल में उन्होंने दम तोड़ दिया। New Year Eve की रात क्या हुआ परिजनों के अनुसार, 50 वर्षीय खोकन दास अपनी मेडिकल दुकान और मोबाइल बैंकिंग कारोबार बंद कर रोज़ की तरह घर लौट रहे थे। रास्ते में उनकी ऑटो-रिक्शा को कुछ लोगों ने जबरन रुकवाया। इसके बाद उन पर अचानक हमला कर दिया गया। हमलावरों ने पहले उन्हें बुरी तरह पीटा, फिर तेज़ हथियारों से वार किया और अंत में पेट्रोल डालकर आग लगा दी। जलती आग से बचने की कोशिश में खोकन दास पास के एक तालाब में कूद गए, जिससे आग कुछ हद तक बुझी। स्थानीय लोगों ने किसी तरह उन्हें बाहर निकाला और अस्पताल पहुंचाया। गंभीर हालत और मौत हमले में खोकन दास के शरीर का लगभग 30 प्रतिशत हिस्सा झुलस गया था। इसके अलावा उन्हें कई जगह चाकू के घाव और अंदरूनी चोटें आई थीं। पहले उन्हें शरीयतपुर के अस्पताल में भर्ती कराया गया, बाद में हालत गंभीर होने पर ढाका रेफर किया गया। डॉक्टरों ने उन्हें बचाने की पूरी कोशिश की, लेकिन आखिरकार 3 जनवरी की सुबह उनकी मौत हो गई। उनके निधन की खबर से पूरे इलाके में शोक की लहर दौड़ गई। परिवार का दर्द और सवाल मृतक की पत्नी सीमा दास का कहना है कि उनके पति का किसी से कोई झगड़ा या दुश्मनी नहीं थी। वह एक साधारण, मेहनती व्यापारी थे और इलाके में सभी से अच्छे संबंध रखते थे। परिवार का आरोप है कि खोकन दास को सिर्फ हिंदू होने के कारण निशाना बनाया गया। परिजन अब भी यह समझ नहीं पा रहे हैं कि इतनी बेरहमी की वजह क्या थी। अल्पसंख्यकों पर बढ़ती हिंसा यह घटना बांग्लादेश (Bangladesh) में हाल के दिनों में हिंदू समुदाय पर हुए कई हमलों की कड़ी में एक और नाम जोड़ती है। इन घटनाओं ने न सिर्फ देश के भीतर, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी चिंता बढ़ा दी है। मानवाधिकार संगठनों का कहना है कि अल्पसंख्यकों की सुरक्षा को लेकर हालात गंभीर होते जा रहे हैं। प्रशासन की कार्रवाई स्थानीय प्रशासन ने मामले की जांच शुरू करने और दोषियों को सख्त सज़ा देने का आश्वासन दिया है। हालांकि, पीड़ित परिवार का कहना है कि जब तक सभी आरोपी गिरफ्तार नहीं होते, उन्हें न्याय की उम्मीद नहीं है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Five State Assembly Elections : 3 राज्यों में BJP अब तक नहीं जीत पाई

Five State Assembly Elections : 3 राज्यों में BJP अब तक नहीं जीत पाई

इस साल भारत के Five State Assembly Elections होने हैं, जिनमें से 3 राज्यों में भारतीय जनता पार्टी (BJP) अब तक सत्ता में नहीं आ सकी है। इन चुनावों के जरिए देश की करीब 17 प्रतिशत आबादी अपनी नई सरकार चुनेगी। किन राज्यों में होंगे चुनाव? इन राज्यों के चुनाव न सिर्फ क्षेत्रीय राजनीति बल्कि राष्ट्रीय राजनीति की दिशा भी तय करेंगे। खास बात यह है कि कुछ राज्यों में BJP लगातार कोशिशों के बावजूद अब तक जीत दर्ज नहीं कर पाई है, ऐसे में इस बार मुकाबला और भी दिलचस्प माना जा रहा है। जनता के सामने बड़े सवाल महंगाई, रोजगार, कानून-व्यवस्था, शिक्षा और स्वास्थ्य जैसे मुद्दे आम लोगों के लिए सबसे अहम हैं। हर राज्य में जनता यह तय करेगी कि वो बदलाव चाहती है या मौजूदा सरकार को एक और मौका। सिर्फ भारत ही नहीं, दुनिया में भी चुनावी साल साल 2026 सिर्फ भारत के लिए ही नहीं, बल्कि पूरी दुनिया के लिए चुनावी साल है। दुनिया के 36 देशों में इस साल चुनाव होने हैं, जहां करोड़ों लोग अपने लोकतांत्रिक अधिकार का इस्तेमाल करेंगे। इससे वैश्विक राजनीति और अर्थव्यवस्था पर भी असर पड़ना तय है। क्यों अहम हैं ये चुनाव? इन 5 राज्यों के नतीजे आने वाले लोकसभा चुनावों से पहले राजनीतिक माहौल का संकेत देंगे। पार्टियों के लिए यह जनता का मूड समझने का बड़ा मौका है, वहीं आम लोगों के लिए अपने भविष्य की दिशा तय करने का। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Deva ने 20 नक्सलियों के साथ किया सरेंडर, सुकमा–Bijapur में 14 माओवादी ढेर

Deva ने 20 नक्सलियों के साथ किया सरेंडर, सुकमा–Bijapur में 14 माओवादी ढेर

कुख्यात नक्सली Deva ने अपने 20 साथियों के साथ आत्मसमर्पण (सरेंडर) कर दिया है। वहीं, अलग-अलग मुठभेड़ों में कुल 14 नक्सली मारे गए हैं। सुकमा में 12 नक्सली ढेर सुकमा जिले में सुरक्षाबलों और नक्सलियों के बीच हुई मुठभेड़ में 12 माओवादी मारे गए। मुठभेड़ के बाद इलाके से नक्सलियों के शव और हथियार बरामद किए गए हैं। बीजापुर में 2 नक्सली मारे गए इसी तरह बीजापुर जिले में हुई कार्रवाई में 2 नक्सली ढेर किए गए। सुरक्षाबलों ने दोनों के शवों के साथ हथियार भी जब्त किए हैं। लगातार चल रहा सर्च ऑपरेशन सुरक्षा एजेंसियों ने पूरे इलाके में सर्चिंग ऑपरेशन तेज कर दिया है। अधिकारियों का कहना है कि क्षेत्र को पूरी तरह सुरक्षित करने तक अभियान जारी रहेगा। शांति की ओर एक बड़ा कदम देवा समेत 20 नक्सलियों का सरेंडर इस बात का संकेत है कि सरकार की नक्सल उन्मूलन नीति असर दिखा रही है। यह कदम न सिर्फ सुरक्षा के लिहाज से अहम है, बल्कि इलाके में शांति और विकास की उम्मीद भी बढ़ाता है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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SPICE-1000

SPICE-1000 Weapon System दुश्मन पर दूर से सटीक वार करने वाली Indian Air Force की नई ताकत

भारत लगातार अपनी वायु शक्ति को आधुनिक बनाने में जुटा है और इसी कड़ी में SPICE-1000 Precision Guided Bomb एक अहम भूमिका निभाने जा रहा है। हाल ही में सरकार ने इस अत्याधुनिक हथियार प्रणाली की खरीद को मंज़ूरी दी है, जिससे भारतीय वायुसेना की long-range strike capability और भी मज़बूत होगी। SPICE-1000 आखिर है क्या? SPICE-1000 कोई साधारण बम नहीं है। यह इज़राइल की मशहूर डिफेंस कंपनी Rafael Advanced Defense Systems द्वारा विकसित एक Precision Guidance Kit है, जिसे पारंपरिक 1,000 पाउंड के बम पर लगाया जाता है। इस किट के लगते ही सामान्य बम एक high-accuracy smart bomb में बदल जाता है। सीधे शब्दों में कहें तो SPICE-1000 पुराने बमों को नई तकनीक के साथ बेहद खतरनाक और सटीक हथियार बना देता है। कैसे करता है यह Smart Bomb काम? मिशन से पहले लक्ष्य की तस्वीरें और लोकेशन सिस्टम में पहले से फीड की जाती हैं। जब लड़ाकू विमान—जैसे Rafale, Su-30 MKI या Mirage-2000—सुरक्षित दूरी से बम छोड़ता है, तो: खास बात यह है कि SPICE-1000 GPS जैमिंग की स्थिति में भी असरदार रहता है, क्योंकि इसमें INS और इमेज-मैचिंग टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल होता है। SPICE-1000 की प्रमुख खूबियाँ भारत के लिए क्यों है इतना अहम? भारत पहले ही SPICE सीरीज़ के हथियारों का इस्तेमाल कर चुका है। 2019 की बालाकोट एयर स्ट्राइक में इन हथियारों ने अपनी क्षमता साबित की थी। अब SPICE-1000 की बड़ी संख्या में खरीद से: रणनीतिक रूप से क्या बदलता है? आज के युद्ध सिर्फ़ ताक़त के नहीं, बल्कि precision और technology के होते हैं। SPICE-1000 भारत को वही बढ़त देता है। यह हथियार दुश्मन को साफ़ संदेश देता है कि भारत बिना सीमा पार किए भी सटीक और प्रभावी जवाब देने में सक्षम है। SPICE-1000 केवल एक गाइडेड बम नहीं, बल्कि भारतीय वायुसेना के लिए एक game-changer weapon system है। यह भारत की रक्षा रणनीति, deterrence capability और आधुनिक युद्ध तैयारियों को नई ऊँचाई देता है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Pune

Pune Election नगर निगम चुनाव में टूटे पुराने गठबंधन, उभरी नई सियासत

पुणे (Pune) महानगरपालिका चुनाव 2025 इस बार सिर्फ एक स्थानीय चुनाव नहीं रह गया है, बल्कि यह महाराष्ट्र की राजनीति की दिशा तय करने वाला बड़ा संकेत बनता जा रहा है। शहर की गलियों से लेकर राजनीतिक गलियारों तक एक ही सवाल गूंज रहा है — इस बार किसका साथ, किसके खिलाफ? पुराने गठबंधन टूटे, नई रणनीति बनी अब तक महाराष्ट्र की राजनीति दो खेमों में बंटी दिखती थी —महा युति और महा विकास आघाड़ी (MVA)। लेकिन पुणे के नगर निगम चुनाव में यह तस्वीर बदलती नजर आ रही है। यहां पार्टियां अपने पुराने फॉर्मूले छोड़कर स्थानीय समीकरणों के हिसाब से नए गठबंधन बना रही हैं। BJP–Shiv Sena (Shinde) Alliance: साथ लेकिन पूरी तरह सहज नहीं Pune में बीजेपी और एकनाथ शिंदे गुट की शिवसेना मिलकर चुनाव लड़ने की तैयारी में हैं। हालांकि, अंदरखाने सीटों को लेकर मतभेद की खबरें भी सामने आ रही हैं। जमीन पर कार्यकर्ताओं के बीच तालमेल बना पाना इस गठबंधन की सबसे बड़ी चुनौती मानी जा रही है। Pawar Family Politics: सियासत में फिर करीब इस चुनाव की सबसे बड़ी और चौंकाने वाली खबर पवार परिवार से जुड़ी है। अजित पवार और शरद पवार गुट के बीच पुणे और पिंपरी-चिंचवड़ में स्थानीय स्तर पर साथ आने के संकेत मिल रहे हैं। अगर यह प्रयोग सफल होता है, तो यह महाराष्ट्र की राजनीति में एक नया अध्याय लिख सकता है। Congress–Thackeray Group: पुणे में अलग रास्ता कांग्रेस ने भी Pune में पारंपरिक लाइन से हटकर फैसला लिया है। यहां पार्टी ठाकरे गुट के साथ मिलकर चुनावी मैदान में उतरने की तैयारी कर रही है। यह गठबंधन राज्य के अन्य शहरों से अलग है और साफ बताता है कि कांग्रेस इस बार ग्राउंड रिपोर्ट को प्राथमिकता दे रही है। Pune Politics में Three-Corner Fight इन बदले हुए समीकरणों के चलते पुणे महानगरपालिका चुनाव अब दो नहीं बल्कि तीन प्रमुख राजनीतिक मोर्चों के बीच मुकाबला बनता जा रहा है: इस तीन-तरफा मुकाबले ने चुनाव को और ज्यादा दिलचस्प बना दिया है। क्यों अहम है Pune Municipal Election? Pune को इस बार राजनीतिक विश्लेषक महाराष्ट्र की ‘Political Testing Lab’ कह रहे हैं। यहां जो भी समीकरण कामयाब होंगे, उनकी झलक आने वाले नगर निगम, लोकसभा और विधानसभा चुनावों में भी देखने को मिल सकती है। आम मतदाता के लिए यह चुनाव सिर्फ पार्टी का नहीं, बल्कि शहर के भविष्य, विकास और स्थिर नेतृत्व का सवाल भी है। Pune महानगरपालिका चुनाव 2025 यह साबित कर रहा है कि अब राजनीति सिर्फ बड़े गठबंधनों तक सीमित नहीं रही। स्थानीय मुद्दे, चेहरे और भरोसा ही जीत का असली मंत्र बनते जा रहे हैं। अब देखना यह है कि पुणे की जनता किस नए राजनीतिक प्रयोग पर अपनी मुहर लगाती है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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New Year 2026

New Year 2026 Celebration विश्वभर में खुशियों और उत्सवों के साथ शुरुआत

नया साल 2026 (New Year 2026) दुनिया भर में बड़े उत्साह और खुशियों के साथ शुरू हुआ। सबसे पहला नया साल किरिबाती (Kiritimati Island, Kiribati) में मनाया गया, जहां सूर्योदय और रंग-बिरंगी आतिशबाज़ियों के बीच लोग नए साल का स्वागत कर रहे थे। यह जश्न पूरी दुनिया के लिए नई उम्मीद और ऊर्जा का प्रतीक बन गया। एशिया में New Year 2026 Celebration टोक्यो, जापान: लोग हत्सुमोदे (Hatsumode) के लिए मंदिर गए और घंटियाँ बजाकर बीते साल की बुराइयों को दूर किया।बैंकाक, थाईलैंड: रात के समय आकाश में उड़ते लालटेन और नदी में तैरते दीपकों ने नया साल 2026 खास बना दिया। अमेरिका में New Year Parties और Family Celebration न्यूयॉर्क सिटी: टाइम्स स्क्वायर बॉल ड्रॉप ने लाखों लोगों का ध्यान आकर्षित किया।रियो डी जनेरियो, ब्राजील: सफेद कपड़ों में सजे लोग सांबा, आतिशबाज़ी और समुद्र के किनारे नए साल 2026 का जश्न मना रहे थे।मेक्सिको: पारंपरिक व्यंजन और प्रार्थनाओं के साथ परिवार नए साल का स्वागत कर रहे थे। अफ्रीका में Cultural New Year Celebration केप टाउन, दक्षिण अफ्रीका: रंग-बिरंगे परेड और संगीत ने शहर को जीवंत बना दिया।लागोस, नाइजीरिया: संगीत और सामुदायिक पार्टियों ने नए साल को यादगार बनाया। नया साल 2026 की खास बातें हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Swiggy

Swiggy-Zomato Delivery Partners हड़ताल New Year Eve 2026 में डिलीवरी प्रभावित

नए साल की पूर्व संध्या पर यानी New Year Eve 2026 पर देशभर में गिग वर्कर्स (Delivery Partners) हड़ताल करने वाले हैं। इस हड़ताल का असर Swiggy, Zomato, Blinkit, Zepto और अन्य Quick Commerce Apps पर महसूस होगा। दिल्ली-एनसीआर सहित बड़े शहरों में डिलीवरी सेवाओं में डिले और रुकावटें देखने को मिल सकती हैं। हड़ताल के पीछे वजह वर्कर्स ने अपनी सुरक्षा और न्यायसंगत कमाई के लिए कई मुद्दों पर हड़ताल का निर्णय लिया है: अन्य प्रमुख मांगें Gig and Platform Services Workers Union (GIPSWU) ने वर्कर्स के लिए और भी कई मांगें रखी हैं: हड़ताल का असर वर्कर्स की दुविधा कुछ वर्कर्स के लिए हड़ताल करना आसान नहीं है, क्योंकि इससे उनकी पहले से कमाई प्रभावित होती है। गिग वर्कर्स की यह हड़ताल New Year Eve 2026 पर Quick Commerce और Food Delivery Services को प्रभावित कर सकती है। ग्राहकों को देर या ऑर्डर कैंसलेशन की संभावना के लिए तैयार रहना चाहिए। व्यवसायिक स्तर पर भी रेस्टोरेंट्स और delivery platforms तैयारी में हैं। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Delhi

Delhi Fog & Pollution Crisis साल के आखिरी दिन कोहरे ने रोकी रफ्तार, उड़ानें रद्द

साल के आखिरी दिन राजधानी दिल्ली (Delhi) ने एक बार फिर घने कोहरे (Dense Fog) और खतरनाक वायु प्रदूषण (Air Pollution) का सामना किया। सुबह होते ही दिल्ली-एनसीआर के कई इलाकों में दृश्यता बेहद कम हो गई, जिससे आम लोगों की दिनचर्या प्रभावित हुई। ठंड, नमी और शांत हवाओं ने हालात को और गंभीर बना दिया। Delhi Fog का असर: सड़क से लेकर आसमान तक परेशानी सुबह के समय Delhi, नोएडा, गाजियाबाद और गुरुग्राम के कई हिस्सों में कोहरा इतना घना रहा कि सड़क पर गाड़ियाँ रेंगती नजर आईं। कई जगहों पर दृश्यता 50 मीटर से भी कम दर्ज की गई। भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने पहले ही कोहरे को लेकर Yellow और Orange Alert जारी किया था। ऑफिस जाने वाले लोग देर से निकले, स्कूल बसें धीमी रफ्तार में चलीं और हाईवे पर वाहनों को अतिरिक्त सावधानी बरतनी पड़ी। Flights Cancelled: IGI Airport पर सबसे ज्यादा असर घने कोहरे का सबसे बड़ा असर Indira Gandhi International Airport पर दिखा। कम दृश्यता के कारण लगभग 150 उड़ानें रद्द करनी पड़ीं, जबकि कई फ्लाइट्स घंटों देरी से चलीं।IndiGo, SpiceJet और अन्य एयरलाइंस ने यात्रियों को सलाह दी कि वे घर से निकलने से पहले Flight Status जरूर चेक करें। नए साल से पहले यात्रा करने वाले यात्रियों के लिए यह स्थिति काफी परेशानी भरी रही। Delhi AQI: हवा बनी सेहत के लिए खतरा कोहरे के साथ-साथ Delhi की हवा भी बेहद खराब रही। राजधानी का AQI ज्यादातर इलाकों में “Very Poor” (300–400) दर्ज किया गया, जबकि कुछ जगहों पर यह “Severe” (400+) स्तर तक पहुंच गया। विशेषज्ञों का कहना है कि ठंड के मौसम में हवा की रफ्तार कम होने और नमी बढ़ने से प्रदूषण जमीन के पास ही जमा हो जाता है, जिससे सांस लेना तक मुश्किल हो जाता है। Health Advisory: बच्चों और बुजुर्गों को ज्यादा खतरा डॉक्टरों ने खासतौर पर बच्चों, बुजुर्गों और सांस के मरीजों को सुबह-शाम बाहर न निकलने की सलाह दी है। लोगों से कहा गया है कि: New Year Weather Outlook: क्या मिलेगी राहत? मौसम विभाग के अनुसार नए साल के शुरुआती दिनों में भी कोहरा और खराब हवा बनी रह सकती है। हालांकि हल्की बारिश या तेज हवा चलने की स्थिति में AQI में कुछ सुधार संभव है। साल 2025 का अंत दिल्ली (Delhi) के लिए एक बार फिर Fog और Pollution Crisis के साथ हुआ। यह हालात याद दिलाते हैं कि बदलता मौसम और बढ़ता प्रदूषण आम लोगों की जिंदगी को कैसे प्रभावित कर रहा है। फिलहाल सावधानी ही सबसे बड़ा बचाव है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Nitish Kumar

बिहार छोड़ने की खबरों पर Nitish Kumar का जवाब, सरकार पर रखेंगे नजर

बिहार की सियासत में एक बार फिर गर्मी बिहार की राजनीति में एक बार फिर से हलचल तेज हो गई है। नीतीश कुमार (Nitish Kumar) के ताजा बयान ने राजनीतिक माहौल को गरमा दिया है। उन्होंने साफ तौर पर कहा है कि वे बिहार छोड़कर कहीं नहीं जाएंगे और राज्य सरकार की हर गतिविधि पर लगातार नजर बनाए रखेंगे। विकास और प्रशासन पर रहेगा पूरा फोकस Nitish Kumar ने अपने बयान में यह स्पष्ट किया कि उनका मुख्य फोकस बिहार के विकास, प्रशासनिक सुधार और सरकारी योजनाओं के सही क्रियान्वयन पर है। उन्होंने कहा कि जनता तक योजनाओं का लाभ समय पर पहुंचे, यह उनकी प्राथमिक जिम्मेदारी है और इसमें किसी तरह की लापरवाही नहीं होगी। बयान के बाद सियासी चर्चाओं का दौर तेज इस बयान के बाद राजनीतिक गलियारों में तरह-तरह की चर्चाएं शुरू हो गई हैं। कुछ लोग इसे नीतीश कुमार की प्रशासनिक पकड़ मजबूत करने की रणनीति मान रहे हैं, तो कुछ इसे आगामी राजनीतिक समीकरणों से जोड़कर देख रहे हैं। विपक्ष ने उठाए सवाल विपक्षी दलों ने इस बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा है कि केवल निगरानी की बात करने से जनता को सीधे लाभ नहीं मिलेगा। उनका कहना है कि सरकार को जमीनी स्तर पर काम करके दिखाना होगा, तभी जनता का भरोसा कायम रहेगा। समर्थकों का समर्थन वहीं, समर्थकों का कहना है कि नीतीश कुमार का यह रुख दर्शाता है कि वे बिहार के विकास को लेकर गंभीर हैं और किसी भी तरह की ढिलाई स्वीकार नहीं करेंगे। उनके अनुसार, यह बयान प्रशासन को और अधिक सक्रिय और जिम्मेदार बनाएगा। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
मोहन यादव

Breaking MP BJP Nari Aakrosh Rally भोपाल में महिला शक्ति का प्रदर्शन, कांग्रेस पर CM Mohan Yadav का तीखा हमला

नगर सवंदाता l भोपाल मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल में सोमवार को बीजेपी ने “जन आक्रोश महिला रैली” का बड़ा आयोजन किया, जो अब राजनीतिक रूप से काफी चर्चा में है। यह रैली महिला आरक्षण बिल पास न होने के विरोध में आयोजित की गई, जिसमें हजारों की संख्या में महिलाओं ने भाग लेकर शक्ति प्रदर्शन किया। यह विशाल रैली एमवीएम कॉलेज ग्राउंड से शुरू होकर रोशनपुरा चौराहे तक निकाली गई। पूरे मार्ग में बीजेपी महिला कार्यकर्ताओं और नेताओं का जोश देखने लायक रहा। हाथों में तख्तियां, नारेबाजी और संगठित मार्च के जरिए महिलाओं ने अपनी नाराजगी जताई। रैली के समापन पर मुख्यमंत्री मोहन यादव (Mohan Yadav) ने मंच से कांग्रेस और प्रियंका गांधी पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि: “महिलाओं के हक की बात करने वाली कांग्रेस ने ही संसद में महिला आरक्षण बिल का विरोध किया, जिससे उनका असली चेहरा सामने आ गया है।” समापन के दौरान सीएम ने काले गुब्बारे छोड़कर विरोध दर्ज कराया, जो इस रैली का प्रतीकात्मक हाईलाइट बना। महिला आरक्षण बिल पर अपडेट हाल ही में संसद में पेश 131वां संविधान संशोधन बिल पास नहीं हो सका। इस बिल में: वोटिंग का आंकड़ा: यही वजह रही कि बीजेपी ने इसे लेकर देशभर में विरोध प्रदर्शन शुरू किया, जिसकी कड़ी भोपाल की यह रैली बनी। कौन-कौन रहा मौजूद? इस रैली में बीजेपी के कई बड़े चेहरे शामिल हुए, जिनमें: यह रैली सिर्फ एक विरोध नहीं, बल्कि आगामी चुनावों से पहले महिला वोट बैंक को साधने की रणनीति के रूप में भी देखी जा रही है। बीजेपी इस मुद्दे को बड़े स्तर पर उठाकर कांग्रेस को घेरने की कोशिश कर रही है।
Modi

India–South Korea Summit PM Modi और President Lee की अहम बैठक, Trade Target पर चर्चा

नई दिल्ली में सोमवार का दिन भारत और दक्षिण कोरिया के रिश्तों के लिए खास रहा। प्रधानमंत्री Narendra Modi और दक्षिण कोरिया के राष्ट्रपति Lee Jae-myung के बीच हुई अहम द्विपक्षीय बैठक ने साफ संकेत दिया कि दोनों देश अब अपने संबंधों को अगले स्तर पर ले जाने के लिए तैयार हैं। बैठक Hyderabad House में हुई, जहां दोनों नेताओं ने सिर्फ औपचारिक बातचीत ही नहीं की, बल्कि भविष्य की रणनीति पर भी खुलकर चर्चा की। स्वागत से शुरू हुआ भरोसे का संदेश राष्ट्रपति ली के भारत पहुंचने पर उनका भव्य स्वागत Rashtrapati Bhavan में किया गया। इसके बाद उन्होंने Raj Ghat जाकर महात्मा गांधी को श्रद्धांजलि दी।यह सिर्फ एक परंपरा नहीं, बल्कि दोनों देशों के साझा मूल्यों और सम्मान का प्रतीक भी रहा। Meeting में किन मुद्दों पर बनी बात? इस मुलाकात में कई अहम क्षेत्रों पर गहराई से चर्चा हुई: क्यों खास है यह Bilateral Meeting? यह दौरा कई वजहों से महत्वपूर्ण माना जा रहा है: इस बैठक के बाद यह साफ हो गया है कि भारत और दक्षिण कोरिया अब सिर्फ साझेदार नहीं, बल्कि लंबे समय के रणनीतिक सहयोगी बनने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं।आने वाले समय में टेक्नोलॉजी, व्यापार और रक्षा जैसे क्षेत्रों में बड़े फैसले देखने को मिल सकते हैं। भारत-दक्षिण कोरिया की यह बढ़ती नजदीकी न सिर्फ दोनों देशों के लिए, बल्कि पूरे इंडो-पैसिफिक क्षेत्र के लिए अहम साबित हो सकती है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
Silver ₹1,214 बढ़कर ₹2.51 लाख, Gold ₹347 चढ़कर ₹1.52 लाख प्रति 10 ग्राम

Silver ₹1,214 बढ़कर ₹2.51 लाख, Gold ₹347 चढ़कर ₹1.52 लाख प्रति 10 ग्राम

आज Gold और Silver के दामों में एक बार फिर तेजी देखने को मिली है। बाजार में बढ़ती मांग और वैश्विक हालात के कारण कीमती धातुओं की कीमतें लगातार ऊपर जा रही हैं। चांदी की कीमत आज ₹1,214 बढ़कर ₹2.51 लाख प्रति किलो तक पहुंच गई। वहीं, सोने की बात करें तो 10 ग्राम सोने का भाव ₹347 बढ़कर ₹1.52 लाख हो गया है। अगर पूरे साल की बात करें, तो सोना अब तक करीब ₹19,000 तक महंगा हो चुका है। यह बढ़ोतरी आम लोगों के लिए चिंता का कारण बन रही है, खासकर उन परिवारों के लिए जो शादी या निवेश के लिए सोना खरीदने की योजना बना रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में अनिश्चितता, डॉलर की चाल और निवेशकों का झुकाव सुरक्षित निवेश की ओर बढ़ने के कारण सोने-चांदी के दाम लगातार बढ़ रहे हैं। ऐसे में अगर आप सोना या चांदी खरीदने की सोच रहे हैं, तो थोड़ा सोच-समझकर फैसला लेना जरूरी है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
America ने ईरानी जहाज को रोका, चीन से लौटते वक्त होर्मुज में बढ़ा तनाव

America ने ईरानी जहाज को रोका, चीन से लौटते वक्त होर्मुज में बढ़ा तनाव

दुनिया के सबसे अहम समुद्री रास्तों में से एक होर्मुज जलडमरूमध्य में एक बार फिर तनाव बढ़ गया है। America ने चीन से आ रहे ईरान के एक जहाज को अपने कब्जे में ले लिया है। बताया जा रहा है कि यह जहाज होर्मुज पार करने की कोशिश कर रहा था, तभी अमेरिकी बलों ने कार्रवाई की। इस घटना के बाद ईरान ने कड़ी नाराजगी जताई है। ईरान के अधिकारियों ने साफ कहा है कि इस कदम का जवाब जल्द दिया जाएगा। उनका कहना है कि यह अंतरराष्ट्रीय नियमों के खिलाफ है और इसे बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के लिए बेहद महत्वपूर्ण है, क्योंकि यहां से बड़ी मात्रा में तेल की सप्लाई होती है। ऐसे में इस तरह की घटनाएं न सिर्फ क्षेत्रीय बल्कि वैश्विक स्तर पर भी चिंता बढ़ा देती हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर यह तनाव और बढ़ता है, तो इसका असर तेल की कीमतों और अंतरराष्ट्रीय व्यापार पर भी पड़ सकता है। फिलहाल पूरी दुनिया की नजर इस मामले पर बनी हुई है कि आगे अमेरिका और ईरान के बीच हालात किस दिशा में जाते हैं। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!

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