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Nanded Gurudwara

Nanded Gurudwara Attack: सुखबीर बादल पर हमले से मचा हड़कंप, पुलिस ने संदिग्ध पकड़ा

महाराष्ट्र के नांदेड़ (Nanded Gurudwara) में गुरुवार को शिरोमणि अकाली दल (SAD) के अध्यक्ष और पंजाब के पूर्व डिप्टी सीएम सुखबीर सिंह बादल पर हमले की घटना सामने आई। बताया जा रहा है कि बादल गुरुद्वारा परिसर में मौजूद थे, तभी एक व्यक्ति ने उन पर हमला करने की कोशिश की। इस दौरान उनके हाथ में चोट आई, जबकि उन्हें बचाने की कोशिश में एक पुलिसकर्मी भी घायल हो गया। घटना के तुरंत बाद गुरुद्वारा परिसर में अफरा-तफरी का माहौल बन गया। सुरक्षा में तैनात पुलिसकर्मियों ने स्थिति को संभालते हुए संदिग्ध व्यक्ति को हिरासत में ले लिया। मामले की जांच शुरू कर दी गई है। गुरुद्वारा परिसर में अचानक हुआ हमला जानकारी के मुताबिक, सुखबीर सिंह बादल नांदेड़ स्थित तख्त श्री हजूर साहिब में धार्मिक सेवा के सिलसिले में मौजूद थे। इसी दौरान एक व्यक्ति उनके नजदीक पहुंचा और हमला कर दिया। सुरक्षा कर्मियों ने तत्काल हस्तक्षेप किया, जिससे स्थिति को और बिगड़ने से रोका जा सका। हमले में बादल के हाथ में चोट लगने की जानकारी सामने आई है। घटना के बाद उनकी मेडिकल जांच कराई गई। वहीं, सुरक्षा व्यवस्था संभालने के दौरान एक पुलिसकर्मी भी घायल हुआ। हमलावर को पुलिस ने हिरासत में लिया घटना के बाद पुलिस ने तेजी से कार्रवाई करते हुए एक संदिग्ध को हिरासत में लिया। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि हमला किस वजह से किया गया और इसके पीछे आरोपी की क्या मंशा थी। फिलहाल जांच एजेंसियां घटनास्थल से जुड़े तमाम पहलुओं की पड़ताल कर रही हैं। पुलिस की ओर से हमले के मकसद को लेकर विस्तृत जानकारी सामने आना बाकी है। सुरक्षा व्यवस्था पर उठे सवाल नांदेड़ के प्रमुख धार्मिक स्थल में सुखबीर बादल जैसे बड़े राजनीतिक नेता की मौजूदगी के दौरान हुई इस घटना ने सुरक्षा व्यवस्था को लेकर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। जांच में यह भी देखा जा रहा है कि संदिग्ध व्यक्ति सुरक्षा घेरे के इतने करीब कैसे पहुंचा। घटना के बाद गुरुद्वारा परिसर में सुरक्षा और कड़ी कर दी गई है। पुलिस अधिकारियों की निगरानी में आगे की कार्रवाई जारी है। सुखबीर बादल पर पहले भी हो चुका है हमला सुखबीर सिंह बादल इससे पहले दिसंबर 2024 में अमृतसर के स्वर्ण मंदिर परिसर में भी हमले की कोशिश का सामना कर चुके हैं। उस समय भी सुरक्षा कर्मियों की सतर्कता से बड़ा हादसा टल गया था। नांदेड़ की ताजा घटना ने एक बार फिर सुखबीर बादल की सुरक्षा और धार्मिक स्थलों पर VIP सुरक्षा व्यवस्था को लेकर चर्चा शुरू कर दी है। फिलहाल सुखबीर बादल की स्थिति को लेकर सामने आई जानकारी के अनुसार उन्हें चोट लगी है और घटना की जांच जारी है। पुलिस की जांच के बाद ही हमले की पूरी वजह और घटना से जुड़े अन्य तथ्य स्पष्ट हो पाएंगे। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Modi

Modi-Shah Meet: कनिमोझी ने बढ़ाई सियासी हलचल, Tea Party से Rahul Gandhi और Akhilesh रहे दूर

संसद के गलियारों में इन दिनों राजनीतिक हलचल कम होने का नाम नहीं ले रही है। इसी बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Modi) और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह (Amit Shah) से जुड़ी एक चाय पार्टी चर्चा में आ गई है। इस दौरान विपक्ष की ओर से डीएमके सांसद कनिमोझी की मौजूदगी ने सबका ध्यान खींचा, जबकि कांग्रेस नेता राहुल गांधी और समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव वहां नजर नहीं आए। कनिमोझी की मौजूदगी को इसलिए भी अहम माना जा रहा है क्योंकि संसद के भीतर केंद्र सरकार और विपक्ष के बीच कई मुद्दों पर लगातार तीखी बहस देखने को मिल रही है। ऐसे माहौल में किसी अनौपचारिक आयोजन में सत्ता पक्ष और विपक्ष के नेताओं का साथ दिखाई देना राजनीतिक चर्चा को हवा दे देता है। कनिमोझी की मौजूदगी ने खींचा ध्यान डीएमके सांसद कनिमोझी लंबे समय से संसद में पार्टी की प्रमुख आवाजों में शामिल रही हैं। केंद्र की नीतियों पर डीएमके का कई मुद्दों पर अलग रुख रहा है। इसके बावजूद चाय पार्टी में उनकी मौजूदगी ने राजनीतिक गलियारों में नई चर्चा शुरू कर दी। हालांकि, किसी अनौपचारिक कार्यक्रम में शामिल होना अपने आप में किसी राजनीतिक समझौते या गठबंधन में बदलाव का संकेत नहीं माना जा सकता। इसे सामान्य राजनीतिक संवाद के तौर पर भी देखा जा सकता है। Rahul Gandhi और Akhilesh Yadav क्यों नहीं आए? इस पूरे घटनाक्रम का दूसरा पहलू राहुल गांधी और अखिलेश यादव की गैरमौजूदगी है। दोनों नेताओं के शामिल नहीं होने को लेकर अलग-अलग राजनीतिक कयास लगाए जा रहे हैं। हालांकि, उनकी गैरमौजूदगी की कोई आधिकारिक वजह सामने नहीं आई है। इसलिए फिलहाल यह कहना ठीक नहीं होगा कि दोनों नेताओं ने किसी रणनीति के तहत कार्यक्रम से दूरी बनाई। संसद में विपक्षी दल कई मुद्दों पर सरकार के खिलाफ एकजुट होकर आवाज उठाते रहे हैं, लेकिन हर कार्यक्रम में सभी नेताओं की मौजूदगी जरूरी नहीं होती। संसद के बाहर भी जारी है Political Buzz संसद का मौजूदा सत्र सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच कई मुद्दों पर टकराव का गवाह रहा है। एक ओर सरकार अपने एजेंडे को आगे बढ़ाने में जुटी है, तो दूसरी तरफ विपक्ष लगातार विभिन्न मुद्दों पर सरकार से जवाब मांग रहा है। ऐसे में मोदी और शाह के साथ चाय पार्टी में कनिमोझी की मौजूदगी ने राजनीतिक चर्चा को एक नया विषय दे दिया है। सोशल मीडिया से लेकर संसद के गलियारों तक इसे लेकर तरह-तरह की बातें हो रही हैं। क्या यह विपक्षी रणनीति में बदलाव का संकेत है? फिलहाल इसका जवाब देना जल्दबाजी होगी। किसी एक बैठक या चाय पार्टी के आधार पर विपक्षी दलों के राजनीतिक समीकरण का आकलन करना सही नहीं होगा। असली तस्वीर संसद में इन दलों के रुख और आने वाले दिनों में उनकी रणनीति से साफ होगी। फिलहाल इतना जरूर है कि Modi-Shah Tea Party में Kanimozhi की मौजूदगी और Rahul Gandhi-Akhilesh Yadav की गैरमौजूदगी ने दिल्ली के राजनीतिक माहौल में चर्चा जरूर बढ़ा दी है। अब नजर इस बात पर रहेगी कि आने वाले दिनों में इस मुलाकात को लेकर कोई राजनीतिक बयान सामने आता है या नहीं। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Ranchi Protest

Ranchi Protest: विधानसभा मार्च के बाद 600 प्रदर्शनकारियों पर केस, छात्रों का आंदोलन जारी

झारखंड में सरकारी नौकरी की तैयारी कर रहे छात्रों का गुस्सा अब सड़क से लेकर सियासी गलियारों तक पहुंच गया है। भर्ती परीक्षाओं में कथित गड़बड़ियों और पेपर लीक के आरोपों को लेकर चल रहे Ranchi Student Protest ने नया मोड़ ले लिया है। विधानसभा मार्च के दौरान हुए विवाद के बाद पुलिस ने करीब 600 प्रदर्शनकारियों के खिलाफ FIR दर्ज की है। मामला सिर्फ FIR तक सीमित नहीं है। छात्र अपनी मांगों को लेकर लगातार प्रदर्शन कर रहे हैं, जबकि सरकार के साथ बातचीत के बावजूद कई मुद्दों पर सहमति नहीं बन पाई है। ऐसे में रांची में छात्र आंदोलन आने वाले दिनों में और बड़ा रूप ले सकता है। क्यों आंदोलन कर रहे हैं छात्र? छात्रों का आरोप है कि JPSC और JSSC की कुछ भर्ती परीक्षाओं में अनियमितताएं सामने आई हैं। अभ्यर्थी परीक्षा प्रक्रिया में पारदर्शिता, कथित पेपर लीक की जांच और प्रभावित परीक्षाओं को रद्द करने जैसी मांगें उठा रहे हैं। छात्र संगठनों का कहना है कि सरकारी नौकरी की परीक्षा युवाओं के भविष्य से जुड़ी होती है। ऐसे में अगर परीक्षा प्रक्रिया पर सवाल उठते हैं तो अभ्यर्थियों की मेहनत और भरोसे दोनों पर असर पड़ता है। इसी को लेकर बड़ी संख्या में छात्र कई दिनों से रांची में आंदोलन कर रहे हैं। विधानसभा मार्च के दौरान बढ़ा तनाव आंदोलन के दौरान छात्रों ने अपनी मांगें सरकार तक पहुंचाने के लिए विधानसभा की ओर मार्च किया। पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को रोकने के लिए बैरिकेडिंग की थी। मार्च के दौरान कुछ स्थानों पर स्थिति तनावपूर्ण हो गई। पुलिस के मुताबिक, कुछ प्रदर्शनकारियों ने बैरिकेड पार करने की कोशिश की, जिसके बाद भीड़ को नियंत्रित करने के लिए कार्रवाई करनी पड़ी। वहीं प्रदर्शनकारी पुलिस की कार्रवाई को लेकर सवाल उठा रहे हैं। यही घटनाक्रम अब FIR का कारण बना है। 600 प्रदर्शनकारियों पर FIR, CCTV से पहचान विधानसभा मार्च के बाद पुलिस ने करीब 600 लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया है। रिपोर्टों के अनुसार, FIR में कुछ लोगों को नामजद भी किया गया है। पुलिस अब प्रदर्शन के दौरान बनाए गए CCTV फुटेज और दूसरे वीडियो रिकॉर्डिंग की मदद से उपद्रव या कानून-व्यवस्था बिगाड़ने के आरोप वाले लोगों की पहचान कर रही है। इस कार्रवाई के बाद छात्रों के बीच भी नाराजगी बढ़ी है। छात्र संगठनों का कहना है कि शांतिपूर्ण तरीके से अपनी मांग उठाना उनका अधिकार है और सरकार को बातचीत के जरिए समाधान निकालना चाहिए। सरकार और छात्रों के बीच बातचीत का दौर आंदोलन को खत्म करने के लिए सरकार और छात्र प्रतिनिधियों के बीच कई दौर की बातचीत हो चुकी है। सरकार की तरफ से कुछ मांगों पर कार्रवाई का दावा किया गया है, लेकिन छात्र संगठन अभी पूरी तरह संतुष्ट नहीं हैं। छात्रों की प्रमुख मांगों में विवादित परीक्षाओं की जांच, जरूरत पड़ने पर परीक्षा रद्द करना और भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता सुनिश्चित करना शामिल है। सरकार की ओर से कुछ परीक्षाओं को रद्द करने और परीक्षा व्यवस्था से जुड़े कदम उठाने की बात सामने आई है। इसके बावजूद आंदोलन पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है। Hunger Strike से भी बढ़ा दबाव छात्र आंदोलन के दौरान Hunger Strike का रास्ता भी अपनाया गया। छात्र नेता देवेंद्र नाथ महतो समेत कुछ प्रदर्शनकारियों ने मांगों के समर्थन में अनशन किया। लंबे समय तक चले आंदोलन के बीच तबीयत बिगड़ने की खबरों ने सरकार पर दबाव और बढ़ा दिया। छात्रों का कहना है कि वे अपने भविष्य से जुड़े मुद्दे पर पीछे हटने के लिए तैयार नहीं हैं। पुलिस कार्रवाई पर राजनीति भी तेज छात्रों पर FIR और पुलिस कार्रवाई को लेकर राजनीतिक बयानबाजी भी तेज हो गई है। विपक्षी दलों ने सरकार पर छात्रों की आवाज दबाने का आरोप लगाया है। वहीं पुलिस और सरकार की ओर से कानून-व्यवस्था बनाए रखने की जरूरत पर जोर दिया जा रहा है। इस बीच छात्र संगठनों और राजनीतिक संगठनों की ओर से आंदोलन के समर्थन में अलग-अलग कार्यक्रम भी किए गए हैं। अब आगे क्या होगा? रांची का यह छात्र आंदोलन अब एक ऐसे मोड़ पर पहुंच गया है, जहां सरकार और छात्रों दोनों के लिए अगला कदम महत्वपूर्ण होगा। एक तरफ सरकार बातचीत और परीक्षा से जुड़े फैसलों के जरिए समाधान निकालने की कोशिश कर रही है, तो दूसरी तरफ छात्र संगठन अपनी मुख्य मांगों पर ठोस कार्रवाई चाहते हैं। 600 प्रदर्शनकारियों पर FIR के बाद पुलिस जांच आगे बढ़ेगी और CCTV फुटेज के आधार पर कार्रवाई की जा सकती है। दूसरी ओर, अगर छात्रों की मांगों पर जल्द कोई स्पष्ट समाधान नहीं निकलता है तो आंदोलन आगे भी जारी रहने की संभावना है। फिलहाल रांची में सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या सरकार और छात्रों के बीच बातचीत से यह विवाद सुलझेगा या Jharkhand Student Protest आने वाले दिनों में और बड़ा रूप लेगा? हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Monsoon

Monsoon Alert: Jaipur में भारी बारिश से Traffic Jam, Dehradun-Tihri में Landslide; 15 राज्यों में अलर्ट

देश के कई हिस्सों में मानसून (Monsoon) का असर लगातार तेज बना हुआ है। राजस्थान से लेकर उत्तराखंड तक बारिश ने जनजीवन को प्रभावित किया है। जयपुर में तेज बारिश के कारण पेड़ गिरने, बस पलटने और ट्रैफिक जाम जैसी घटनाएं सामने आईं, वहीं उत्तराखंड के देहरादून-मसूरी मार्ग पर लैंडस्लाइड से यातायात प्रभावित हुआ। भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के अनुसार आने वाले दिनों में भी कई राज्यों में बारिश का दौर जारी रहने की संभावना है। जयपुर में बारिश के बाद बिगड़े हालात राजस्थान की राजधानी जयपुर में बारिश के कारण कई इलाकों में सड़क यातायात प्रभावित हुआ। तेज बारिश के बीच पेड़ गिरने की घटनाओं से कुछ रास्तों पर आवाजाही बाधित हुई। कई जगह पानी जमा होने के कारण वाहनों की रफ्तार धीमी रही और ट्रैफिक जाम की स्थिति बनी। बारिश के दौरान बस पलटने की घटना ने भी परेशानी बढ़ा दी। लगातार बारिश के बीच सड़कों पर जलभराव और फिसलन के कारण वाहन चालकों को मुश्किलों का सामना करना पड़ा। देहरादून-मसूरी रोड पर Landslide, कई किलोमीटर लंबा जाम उत्तराखंड में बारिश का असर पहाड़ी इलाकों में ज्यादा दिखाई दे रहा है। देहरादून-मसूरी रोड पर पानी वाला बेंड के पास ताजा लैंडस्लाइड के बाद सड़क पर मलबा आ गया। इसके चलते दोनों तरफ कई किलोमीटर तक ट्रैफिक जाम की स्थिति बन गई। लैंडस्लाइड के कारण इस महत्वपूर्ण मार्ग पर आवाजाही प्रभावित हुई। पहाड़ी क्षेत्रों में लगातार बारिश के दौरान सड़क पर मलबा आने का खतरा बना रहता है, इसलिए यात्रियों को मौसम और सड़क की स्थिति की जानकारी लेकर ही यात्रा करने की सलाह दी जाती है। टिहरी समेत पहाड़ी इलाकों में भी बारिश का असर उत्तराखंड के कई हिस्सों में बारिश का दौर जारी है। IMD के ताजा पूर्वानुमान में उत्तराखंड में 13 से 19 अगस्त के बीच गरज-चमक और बिजली गिरने की संभावना बताई गई है। पहाड़ी क्षेत्रों में बारिश के दौरान भूस्खलन का खतरा भी बढ़ जाता है। ऐसे में देहरादून, टिहरी और आसपास के पहाड़ी इलाकों में रहने वाले लोगों तथा यात्रियों को स्थानीय प्रशासन की एडवाइजरी पर नजर रखने की जरूरत है। अगले चार दिनों तक कई राज्यों में बारिश मौसम विभाग के अनुसार देश के कई हिस्सों में अगले कुछ दिनों तक बारिश का दौर जारी रहने की संभावना है। IMD के 12 अगस्त के ऑल इंडिया वेदर बुलेटिन में जम्मू-कश्मीर-लद्दाख क्षेत्र में 12 से 18 अगस्त तक अलग-अलग स्थानों पर भारी बारिश की संभावना जताई गई है। हिमाचल प्रदेश में 13 अगस्त और पूर्वी राजस्थान में 13 अगस्त को भी भारी बारिश की संभावना बताई गई है। पूर्वी उत्तर प्रदेश में 14 से 19 अगस्त के बीच भारी बारिश का अनुमान है। उत्तर-पश्चिम भारत के कई हिस्सों में हल्की से मध्यम बारिश का सिलसिला भी जारी रह सकता है। उत्तराखंड में गरज-चमक और बिजली गिरने की संभावना को देखते हुए लोगों को सतर्क रहने की जरूरत है। पहाड़ों से मैदान तक Monsoon का असर जयपुर में जलभराव और ट्रैफिक जाम से लेकर उत्तराखंड में लैंडस्लाइड तक, मानसून का असर अलग-अलग रूपों में देखने को मिल रहा है। एक तरफ मैदानी इलाकों में भारी बारिश से सड़क यातायात प्रभावित है, तो दूसरी तरफ पहाड़ी क्षेत्रों में भूस्खलन लोगों के लिए बड़ी चुनौती बना हुआ है। मौसम विभाग के पूर्वानुमान को देखते हुए आने वाले दिनों में भी कई राज्यों में बारिश जारी रहने की संभावना है। ऐसे में लोगों के लिए जरूरी है कि वे मौसम की ताजा जानकारी लेते रहें और भारी बारिश या लैंडस्लाइड की आशंका वाले इलाकों में अनावश्यक यात्रा से बचें। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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AQIS

Red Fort Attack: लाल किले के पास हमले में AQIS का Link, UN Report में बड़ा खुलासा

दिल्ली के लाल किले के पास हुए धमाके की जांच को लेकर एक बड़ा अपडेट सामने आया है। United Nations Security Council (UNSC) की एक रिपोर्ट में नवंबर 2025 में हुई इस घटना को Al-Qaeda in the Indian Subcontinent (AQIS) से जोड़ा गया है। रिपोर्ट में दक्षिण एशिया में अल-कायदा के नेटवर्क को लेकर भी चिंता जताई गई है। Red Fort जैसे बेहद संवेदनशील और ऐतिहासिक स्थल के पास हुई इस घटना ने देशभर में सुरक्षा को लेकर सवाल खड़े कर दिए थे। अब संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट में सामने आए निष्कर्ष ने इस मामले की आतंकी कड़ी को लेकर चर्चा फिर तेज कर दी है। लाल किले के पास कब हुआ था हमला? नवंबर 2025 में दिल्ली के लाल किले के नजदीक एक कार में धमाका हुआ था। घटना के बाद सुरक्षा एजेंसियों ने इलाके को घेरकर जांच शुरू की थी। शुरुआती जांच से ही इस घटना को सामान्य विस्फोट के बजाय संभावित आतंकी साजिश के नजरिए से देखा गया। जांच आगे बढ़ने के साथ संदिग्धों और उनके कथित नेटवर्क को लेकर कई जानकारियां सामने आईं। अब UNSC की रिपोर्ट में इस हमले को AQIS से जोड़ना मामले में एक अहम अंतरराष्ट्रीय अपडेट माना जा रहा है। UN Report में AQIS को लेकर क्या कहा गया? संयुक्त राष्ट्र की मॉनिटरिंग टीम की रिपोर्ट में AQIS यानी अल-कायदा इन द इंडियन सबकॉन्टिनेंट की गतिविधियों पर चिंता जताई गई है। रिपोर्ट के मुताबिक संगठन दक्षिण एशिया में अपने नेटवर्क को मजबूत करने की कोशिश कर रहा है। रिपोर्ट में छोटे-छोटे सेल के जरिए नेटवर्क तैयार करने और क्षेत्र में अपनी गतिविधियों को बढ़ाने की कोशिशों का भी जिक्र किया गया है। खासतौर पर बांग्लादेश में नेटवर्क को लेकर संयुक्त राष्ट्र ने सुरक्षा संबंधी चिंताएं सामने रखी हैं। दिल्ली हमले से जुड़ी जांच में नया मोड़ लाल किले के पास हुए धमाके की जांच भारतीय एजेंसियों के लिए भी काफी महत्वपूर्ण रही है। मामले में संदिग्धों, उनके संपर्कों और कथित आतंकी नेटवर्क की पड़ताल की गई। अब संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट में AQIS का नाम सामने आने के बाद जांच से जुड़े पुराने तथ्यों को एक नए नजरिए से देखने की जरूरत महसूस हो सकती है। हालांकि, किसी भी आरोपी के खिलाफ आरोपों का अंतिम फैसला अदालत में उपलब्ध सबूतों और न्यायिक प्रक्रिया के आधार पर ही होगा। South Asia में आतंकी नेटवर्क को लेकर चिंता UN की रिपोर्ट का फोकस केवल दिल्ली तक सीमित नहीं है। इसमें दक्षिण एशिया में अल-कायदा से जुड़े नेटवर्क की गतिविधियों का भी आकलन किया गया है। विशेषज्ञों के लिए चिंता की बात यह है कि आतंकी संगठन बड़े ढांचे के बजाय छोटे और अलग-अलग सेल के जरिए अपनी मौजूदगी बनाए रखने की कोशिश कर सकते हैं। ऐसे नेटवर्क की पहचान करना सुरक्षा एजेंसियों के लिए चुनौतीपूर्ण हो सकता है। Red Fort Attack क्यों है इतना अहम? दिल्ली का लाल किला देश के सबसे महत्वपूर्ण ऐतिहासिक स्थलों में शामिल है। इसके आसपास हुई आतंकी घटना ने सुरक्षा व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल खड़े किए थे। अब UN Report में AQIS Link सामने आने से इस मामले का अंतरराष्ट्रीय पहलू भी चर्चा में आ गया है। आने वाले समय में जांच एजेंसियों की कार्रवाई और अदालत में सामने आने वाले सबूत इस पूरे मामले की तस्वीर को और साफ कर सकते हैं। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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योगी सरकार

UP Women Scheme: योगी सरकार का महिलाओं को बड़ा तोहफा! ₹50 हजार देने का प्रस्ताव, पहले मिलेंगे ₹20 हजार

उत्तर प्रदेश में अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव से पहले महिलाओं को लेकर योगी सरकार की एक नई योजना चर्चा में है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, सरकार महिलाओं को कुल ₹50,000 तक की आर्थिक मदद देने के प्रस्ताव पर विचार कर रही है। अगर इस प्रस्ताव को मंजूरी मिलती है तो चुनाव से पहले महिलाओं को ₹20 हजार की पहली किस्त मिल सकती है। हालांकि, यहां एक बात साफ समझना जरूरी है कि ₹50 हजार की यह योजना अभी प्रस्ताव के स्तर पर है। सरकार की ओर से लाभार्थियों और भुगतान को लेकर अंतिम घोषणा नहीं हुई है। चार किस्तों में मिल सकती है रकम चर्चा में आए प्रस्ताव के मुताबिक महिलाओं को पूरी रकम एक साथ देने के बजाय अलग-अलग किस्तों में भुगतान किया जा सकता है। इसमें पहली किस्त सबसे बड़ी होगी। संभावित भुगतान का फॉर्मूला इस तरह बताया जा रहा है: यानी चुनाव से पहले ₹20 हजार की मदद मिलने की संभावना है, जबकि बाकी रकम बाद की तीन किस्तों में दी जा सकती है। किन महिलाओं को मिलेगा फायदा? अभी यह तय नहीं है कि योजना का लाभ किन-किन महिलाओं को मिलेगा। रिपोर्ट्स में आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग की महिलाओं को प्राथमिकता दिए जाने की बात सामने आई है। SC, ST, BPL और आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों की महिलाओं को संभावित लाभार्थियों में शामिल किए जाने की चर्चा है। कुछ रिपोर्ट्स में सालाना ₹12 लाख तक की पारिवारिक आय की सीमा पर भी विचार की बात कही गई है। लेकिन जब तक सरकार आधिकारिक गाइडलाइन जारी नहीं करती, तब तक इन शर्तों को अंतिम नहीं माना जा सकता। सिर्फ पैसा देना नहीं, आत्मनिर्भर बनाना भी मकसद इस प्रस्ताव को केवल cash assistance के तौर पर नहीं देखा जा रहा है। सरकार का फोकस महिलाओं को आर्थिक रूप से मजबूत करने और उन्हें self-employment से जोड़ने पर भी बताया जा रहा है। उत्तर प्रदेश में बड़ी संख्या में महिलाएं स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी हैं। ऐसे में आर्थिक सहायता मिलने पर छोटी दुकान, कारोबार, घरेलू उद्योग या आजीविका से जुड़े काम शुरू करने में मदद मिल सकती है। यही वजह है कि अगर योजना लागू होती है तो इसका असर सिर्फ बैंक खाते में आने वाली रकम तक सीमित नहीं रहने की उम्मीद है। UP Election 2027 से पहले क्यों अहम है योजना? उत्तर प्रदेश में 2027 में विधानसभा चुनाव होने हैं। ऐसे समय में महिलाओं के लिए प्रस्तावित यह योजना राजनीतिक तौर पर भी काफी अहम मानी जा रही है। पिछले कुछ वर्षों में कई राज्यों में महिला मतदाताओं को ध्यान में रखकर direct benefit वाली योजनाएं सामने आई हैं। ऐसे में यूपी में भी महिलाओं के लिए आर्थिक सहायता का प्रस्ताव राजनीतिक चर्चा का विषय बन गया है। हालांकि, सरकार की ओर से योजना का उद्देश्य महिलाओं की आर्थिक स्थिति मजबूत करना और उन्हें आत्मनिर्भर बनाना बताया जा सकता है। इसे चुनावी रणनीति के तौर पर देखना राजनीतिक विश्लेषण का विषय है। क्या सभी महिलाओं को मिलेंगे ₹50 हजार? नहीं, अभी ऐसा कहना जल्दबाजी होगी। सबसे पहले योजना को मंजूरी मिलनी जरूरी है। इसके बाद पात्रता, आवेदन प्रक्रिया, लाभार्थियों की संख्या और किस्त जारी होने की तारीख जैसी जानकारी सामने आएगी। इसलिए फिलहाल यह कहना सही होगा कि योगी सरकार महिलाओं को ₹50 हजार तक की सहायता देने वाली योजना पर विचार कर रही है, न कि हर महिला को ₹50 हजार मिलना तय हो गया है। सरकार की मंजूरी का इंतजार अगर प्रस्ताव को मंजूरी मिलती है तो चुनाव से पहले ₹20 हजार की पहली किस्त महिलाओं के लिए बड़ी राहत बन सकती है। इसके बाद ₹10-10 हजार की तीन किस्तों के जरिए कुल सहायता ₹50 हजार तक पहुंच सकती है। फिलहाल महिलाओं की नजर सरकार के अगले फैसले पर है। योजना की आधिकारिक घोषणा और गाइडलाइन जारी होने के बाद ही यह साफ होगा कि कौन पात्र होगा और खाते में पैसा कब आएगा। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Monsoon Session

Monsoon Session 2026: Vande Mataram के बाद Lok Sabha स्थगित, PM मोदी से Rahul Gandhi तक सभी रहे मौजूद

संसद के मानसून सत्र (Monsoon Session) का आखिरी दिन भी हंगामे और सियासी खींचतान की भेंट चढ़ गया। लोकसभा में कार्यवाही शुरू होने के कुछ ही देर बाद Vande Mataram का गायन हुआ और फिर सदन को स्थगित कर दिया गया। खास बात यह रही कि इस दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह समेत पूरी केंद्रीय कैबिनेट के कई सदस्य और विपक्ष के नेता राहुल गांधी सदन में मौजूद थे। सत्र के अंतिम दिन जिस तरह लोकसभा की कार्यवाही महज करीब एक मिनट चली, उसने पूरे मानसून सत्र की तस्वीर को एक तरह से समेट दिया। कई मुद्दों पर सरकार और विपक्ष आमने-सामने रहे और सदन में चर्चा को लेकर लगातार गतिरोध देखने को मिला। Vande Mataram के बाद नहीं चला सदन लोकसभा की बैठक शुरू हुई तो सदन में राष्ट्रगीत वंदे मातरम् का गायन हुआ। इसके बाद लोकसभा अध्यक्ष ने कार्यवाही स्थगित कर दी। आमतौर पर सत्र के अंतिम दिन सदन में पूरे सत्र की उपलब्धियों और आगे की कार्यवाही को लेकर चर्चा होती है, लेकिन इस बार लोकसभा में कामकाज का समय बेहद कम रहा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, अमित शाह और सरकार के कई वरिष्ठ मंत्री सदन में मौजूद थे। विपक्ष की ओर से राहुल गांधी समेत कई सांसद भी पहुंचे थे। इसके बावजूद सदन की कार्यवाही आगे नहीं बढ़ सकी। पूरे Monsoon Session में दिखा सत्ता-विपक्ष का टकराव मानसून सत्र के दौरान कई मुद्दों पर सरकार और विपक्ष के बीच तीखी बहस देखने को मिली। विपक्ष लगातार अलग-अलग मुद्दों पर चर्चा की मांग करता रहा, जबकि सरकार ने भी कई विषयों पर चर्चा के लिए अपनी तैयारी जताई। कई बार विरोध और नारेबाजी के कारण सदन की कार्यवाही को बीच में रोकना पड़ा। यही वजह रही कि संसद का यह सत्र राजनीतिक बयानबाजी और हंगामे के लिए भी चर्चा में रहा। Rahul Gandhi और Amit Shah भी रहे आमने-सामने मानसून सत्र के दौरान राहुल गांधी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के बीच राजनीतिक बयानबाजी भी सुर्खियों में रही। विपक्ष ने सरकार पर कई मुद्दों को लेकर सवाल उठाए, वहीं सत्ता पक्ष ने विपक्ष पर सदन की कार्यवाही बाधित करने का आरोप लगाया। संसद के बाहर भी दोनों पक्षों के नेताओं की ओर से एक-दूसरे पर लगातार निशाना साधा गया। इससे साफ रहा कि इस पूरे सत्र में राजनीतिक तापमान काफी ऊंचा रहा। आखिरी दिन की तस्वीर ने खींचा ध्यान संसद के मानसून सत्र का आखिरी दिन जिस तरह खत्म हुआ, उसने हर किसी का ध्यान खींचा। प्रधानमंत्री मोदी से लेकर अमित शाह और राहुल गांधी तक कई बड़े चेहरे सदन में मौजूद थे, लेकिन लोकसभा में कामकाज के लिए ज्यादा समय नहीं मिल सका। Vande Mataram के बाद कार्यवाही का स्थगन इस सत्र के अंतिम दिन की सबसे अहम तस्वीर बन गया। लंबे समय तक चले राजनीतिक विवादों और गतिरोध के बाद संसद का यह सत्र बेहद संक्षिप्त लोकसभा कार्यवाही के साथ समाप्त हुआ। अब नजरें संसद के अगले सत्र पर हैं, जहां सरकार और विपक्ष के बीच कई अहम मुद्दों पर एक बार फिर बहस और सियासी मुकाबला देखने को मिल सकता है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Amit Shah

Amit Shah Letter to Speaker: चर्चा के लिए घंटे तय करने की मांग, Rahul Gandhi ने सरकार को घेरा

संसद के मानसून सत्र में सरकार और विपक्ष के बीच एक बार फिर चर्चा को लेकर तकरार सामने आई है। गृह मंत्री अमित शाह (Amit Shah) ने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को पत्र लिखकर सदन में चर्चा के लिए समय तय करने की मांग की है। शाह ने साफ कहा कि वह खुद सदन में मौजूद रहेंगे और सरकार की ओर से उठाए गए मुद्दों पर जवाब दिया जाएगा। वहीं, लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने सरकार के रुख पर सवाल उठाते हुए कहा कि विपक्ष केवल लेक्चर सुनने के लिए सदन में नहीं बैठा है। उनका कहना है कि संसद में वास्तविक मुद्दों पर खुलकर चर्चा और सवालों के जवाब जरूरी हैं। अमित शाह ने ओम बिरला को लिखा Letter अमित शाह ने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को पत्र भेजकर चर्चा के लिए निश्चित समय तय करने का आग्रह किया। शाह के मुताबिक, सरकार सदन में चर्चा से पीछे नहीं हट रही है और वह खुद चर्चा के दौरान मौजूद रहेंगे। गृह मंत्री का यह रुख ऐसे समय सामने आया है जब संसद में कई मुद्दों को लेकर सरकार और विपक्ष आमने-सामने हैं। सरकार चाहती है कि सदन की कार्यवाही व्यवस्थित तरीके से चले और जरूरी विषयों पर चर्चा हो। राहुल गांधी का सरकार पर निशाना राहुल गांधी ने इस मुद्दे पर सरकार को घेरते हुए कहा कि विपक्ष को सिर्फ भाषण सुनने में कोई दिलचस्पी नहीं है। विपक्ष चाहता है कि जिन सवालों को संसद में उठाया जा रहा है, उन पर सरकार स्पष्ट जवाब दे। Rahul Gandhi के बयान से साफ है कि विपक्ष चर्चा को लेकर पीछे हटने के मूड में नहीं है। उनका जोर इस बात पर है कि संसद में जनता से जुड़े मुद्दों पर सार्थक बहस हो और सरकार को जवाब देना पड़े। Shah vs Rahul: किस बात पर है विवाद? दरअसल, विवाद सिर्फ चर्चा होने या न होने का नहीं है, बल्कि चर्चा के तरीके और समय को लेकर भी है। अमित शाह ने स्पीकर से चर्चा के लिए घंटे तय करने की बात कही है, जबकि विपक्ष चाहता है कि उसे अपनी बात रखने का पर्याप्त अवसर मिले। यही वजह है कि संसद में सरकार और विपक्ष के बीच राजनीतिक खींचतान बढ़ती दिखाई दे रही है। दोनों पक्ष अपनी-अपनी बात मजबूती से रखने की कोशिश कर रहे हैं। Speaker Om Birla के फैसले पर नजर अब सबकी निगाहें लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला के अगले कदम पर हैं। अगर चर्चा के लिए समय तय होता है तो सदन में सरकार और विपक्ष के बीच सीधा संवाद देखने को मिल सकता है। संसद में जारी इस सियासी बहस के बीच एक बात साफ है कि दोनों पक्ष जनता से जुड़े मुद्दों को लेकर अपनी स्थिति मजबूती से रखने की तैयारी में हैं। आने वाले दिनों में सदन की कार्यवाही के दौरान यह टकराव और दिलचस्प हो सकता है।
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Justice Yashwant Varma

Justice Yashwant Varma Case: Cash Scandal में बड़ा खुलासा, तीनों आरोपों पर समिति की मुहर

जस्टिस यशवंत वर्मा (Justice Yashwant Varma) से जुड़े कथित Cash Case में जांच समिति की रिपोर्ट ने मामले को फिर सुर्खियों में ला दिया है। सरकारी आवास में आग लगने के बाद मिले जले और अधजले नोटों के मामले में उनके खिलाफ लगाए गए तीनों आरोपों को जांच समिति ने साबित माना है। यह मामला सामने आने के बाद न्यायपालिका की पारदर्शिता और जवाबदेही को लेकर भी कई सवाल उठे थे। सरकारी आवास में आग के बाद मिला था कैश यह पूरा विवाद मार्च 2025 में शुरू हुआ था। दिल्ली स्थित जस्टिस यशवंत वर्मा के सरकारी आवास परिसर में आग लगने की सूचना के बाद दमकलकर्मी मौके पर पहुंचे थे। आग बुझाने के दौरान एक स्टोर रूम में जले हुए सामान के साथ बड़ी मात्रा में जले और अधजले नोट मिलने की बात सामने आई। मामले ने तूल पकड़ा तो सुप्रीम कोर्ट ने शुरुआती जांच कराई। तत्कालीन दिल्ली हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश की रिपोर्ट, तस्वीरों और वीडियो समेत संबंधित दस्तावेजों को भी सार्वजनिक किया गया था। जांच समिति ने तीनों आरोप माने साबित मामले की विस्तृत जांच के लिए बाद में लोकसभा अध्यक्ष द्वारा गठित तीन सदस्यीय समिति ने जांच की। समिति ने उपलब्ध दस्तावेजों, बयानों और अन्य साक्ष्यों की समीक्षा के बाद जस्टिस वर्मा के खिलाफ लगाए गए तीनों Articles of Charge को साबित माना। रिपोर्ट में नकदी के स्रोत और उसके संबंध में दिए गए स्पष्टीकरण को लेकर गंभीर सवाल उठाए गए। साथ ही मामले से जुड़े साक्ष्यों के साथ कथित तौर पर छेड़छाड़ के पहलू पर भी समिति ने निष्कर्ष दर्ज किए। हालांकि, रिपोर्ट में यह भी महत्वपूर्ण बात सामने आई कि ऐसा कोई प्रत्यक्ष सबूत नहीं मिला, जिससे यह निश्चित रूप से कहा जा सके कि जस्टिस वर्मा ने खुद वह नकदी वहां रखी थी। जस्टिस वर्मा ने उठाए थे प्रक्रिया पर सवाल जस्टिस वर्मा ने जांच की प्रक्रिया और समिति के निष्कर्षों पर आपत्ति जताई थी। उन्होंने जांच प्रक्रिया की निष्पक्षता को लेकर सवाल उठाए और बाद में राष्ट्रपति को अपना इस्तीफा भी सौंपा। इस मामले में सुप्रीम कोर्ट में भी कानूनी चुनौती दी गई थी, लेकिन अदालत से उन्हें तत्काल राहत नहीं मिली। इसके बाद जांच की प्रक्रिया आगे बढ़ती रही। अब आगे क्या होगा? जांच समिति ने अपनी रिपोर्ट लोकसभा अध्यक्ष को सौंप दी है। अब इसके बाद संवैधानिक और संसदीय प्रक्रिया के तहत आगे की कार्रवाई का रास्ता तय होगा। जस्टिस यशवंत वर्मा से जुड़ा यह मामला इसलिए भी अहम है क्योंकि इसमें सिर्फ एक न्यायाधीश पर लगे आरोपों की बात नहीं है, बल्कि यह सवाल भी जुड़ा है कि न्यायपालिका में accountability और transparency सुनिश्चित करने के लिए व्यवस्था किस तरह काम करती है। फिलहाल जांच समिति की रिपोर्ट के बाद मामला एक नए चरण में पहुंच गया है। आगे संसद और संबंधित संवैधानिक संस्थाओं की कार्रवाई पर सभी की नजर रहेगी। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Amrit Bharat Express

Dhanbad-Coimbatore Train: 2200 KM से ज्यादा का सफर, Amrit Bharat Express से जुड़ेंगे कई शहर

धनबाद (Dhanbad) से दक्षिण भारत जाने वाले यात्रियों के लिए रेलवे की ओर से बड़ी खुशखबरी है। Dhanbad-Podanur Amrit Bharat Express ने झारखंड और तमिलनाडु के बीच रेल कनेक्टिविटी को एक नई रफ्तार दी है। इस ट्रेन से न सिर्फ लंबी दूरी का सफर करने वाले यात्रियों को नया विकल्प मिला है, बल्कि पूर्वी भारत और दक्षिण भारत के बीच आने-जाने में भी आसानी होगी। धनबाद से पोदनूर तक सीधा रेल कनेक्शन यह अमृत भारत एक्सप्रेस धनबाद से पोदनूर के बीच चलती है। पोदनूर, कोयंबटूर के पास स्थित एक प्रमुख रेलवे स्टेशन है। ट्रेन के रूट में कई महत्वपूर्ण शहर और रेलवे जंक्शन शामिल हैं, जिससे रास्ते में रहने वाले यात्रियों को भी इसका फायदा मिल सकता है। धनबाद से दक्षिण भारत जाने वाले लोगों के लिए लंबे समय से बेहतर रेल विकल्प की जरूरत महसूस की जाती रही है। ऐसे में इस ट्रेन का संचालन यात्रियों के लिए राहत लेकर आया है। 6 राज्यों को मिलेगा फायदा इस ट्रेन की सबसे बड़ी खासियत इसका लंबा रूट है। ट्रेन झारखंड से निकलकर कई राज्यों को जोड़ते हुए तमिलनाडु तक पहुंचती है। इसके जरिए झारखंड, ओडिशा, आंध्र प्रदेश, तमिलनाडु समेत रूट से जुड़े अन्य राज्यों के यात्रियों को बेहतर कनेक्टिविटी मिलती है। पूर्वी भारत से दक्षिण भारत की यात्रा करने वाले छात्रों, नौकरीपेशा लोगों, कारोबारियों और आम यात्रियों के लिए यह ट्रेन खास उपयोगी हो सकती है। 2,200 KM से ज्यादा की दूरी तय करेगी ट्रेन Dhanbad-Podanur Amrit Bharat Express करीब 2,200 किलोमीटर से ज्यादा का सफर तय करती है। रास्ते में रांची, हटिया, राउरकेला, झारसुगुड़ा, संबलपुर, विजयनगरम, विजयवाड़ा, नेल्लोर, रेनिगुंटा, कटपड़ी, सेलम, इरोड और तिरुप्पुर जैसे प्रमुख स्टेशन आते हैं। इतनी लंबी दूरी को देखते हुए यह ट्रेन उन यात्रियों के लिए खास मायने रखती है, जो पूर्वी भारत से सीधे तमिलनाडु जाना चाहते हैं। यात्रियों को क्या होगा फायदा? नई Amrit Bharat Express शुरू होने से धनबाद और आसपास के यात्रियों के पास दक्षिण भारत जाने के लिए एक और विकल्प उपलब्ध हुआ है। खासकर उन लोगों को राहत मिल सकती है जिन्हें काम, पढ़ाई, कारोबार या परिवार से जुड़े कारणों से तमिलनाडु और आसपास के इलाकों की यात्रा करनी पड़ती है। अमृत भारत ट्रेनों को सामान्य और स्लीपर श्रेणी के यात्रियों को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है। ऐसे में लंबी दूरी की यात्रा के लिए यह सेवा आम यात्रियों के लिए भी महत्वपूर्ण हो सकती है। कारोबार और रोजगार के लिहाज से भी अहम धनबाद देश के प्रमुख कोयला क्षेत्रों में शामिल है, जबकि कोयंबटूर तमिलनाडु का बड़ा औद्योगिक और कारोबारी शहर है। दोनों क्षेत्रों के बीच बेहतर रेल कनेक्टिविटी से यात्रियों के साथ-साथ व्यापार और रोजगार से जुड़े लोगों की आवाजाही भी आसान हो सकती है। रेल संपर्क मजबूत होने से छोटे कारोबारियों, कर्मचारियों और छात्रों के लिए भी यात्रा के विकल्प बढ़ते हैं। यही वजह है कि इस ट्रेन को केवल एक नई यात्री सेवा के तौर पर नहीं, बल्कि East India और South India के बीच बेहतर connectivity की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है। Dhanbad-Coimbatore Train: क्यों खास है यह Amrit Bharat Express? धनबाद-पोदनूर अमृत भारत एक्सप्रेस का सबसे बड़ा फायदा यही है कि यह लंबी दूरी के कई महत्वपूर्ण शहरों को एक ही रेल रूट से जोड़ती है। झारखंड से तमिलनाडु तक जाने वाले यात्रियों को अब यात्रा की planning में एक और विकल्प मिल गया है। Dhanbad-Coimbatore Amrit Bharat Express आने वाले समय में इस रूट पर यात्रियों की बढ़ती जरूरत को पूरा करने में कितनी सफल रहती है, यह इसके संचालन और यात्री प्रतिक्रिया से साफ होगा। फिलहाल, झारखंड से South India जाने वाले लोगों के लिए यह ट्रेन निश्चित तौर पर एक उपयोगी कनेक्शन बनकर सामने आई है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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मेरठ हत्याकांड: मुस्कान और साहिल को फांसी की सजा, पति सौरभ की हत्या के मामले में कोर्ट का फैसला

मेरठ। उत्तर प्रदेश के मेरठ में सौरभ राजपूत हत्याकांड में अदालत ने उनकी पत्नी मुस्कान रस्तोगी और उसके प्रेमी साहिल को फांसी की सजा सुनाई है। दोनों पर सौरभ की हत्या करने का आरोप साबित होने के बाद यह फैसला सुनाया गया। सजा सुनाते हुए जज ने वारदात को नृशंस हत्याकांड बताया और कहा कि इसमें माफी स्वीकार नहीं होगी। वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से कोर्ट में पेश हुए मुस्कान और साहिल सजा सुनाए जाने से पहले जेल में बंद मुस्कान और साहिल को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए अदालत से जोड़ा गया। इस दौरान दोनों रोने लगे। जज ने मुस्कान से पूछा कि पति सौरभ राजपूत की हत्या के मामले में दोषी ठहराए जाने के बाद वह क्या सजा चाहती है। इस पर मुस्कान ने कहा, “मेरी बच्चियों का ख्याल रखा जाए।” इसके बाद वह खामोश हो गई। वहीं, साहिल से भी यही सवाल पूछा गया, लेकिन उसने कोई जवाब नहीं दिया। सजा के ऐलान के बाद रो पड़ीं सौरभ की मां अदालत के फैसले के बाद सौरभ राजपूत की मां भावुक हो गईं और रो पड़ीं। उन्होंने कहा कि उन्हें शांति से न्याय मिल गया। इस मामले में सजा का ऐलान सौरभ के परिवार के लिए लंबे इंतजार के बाद आया है। 3 मार्च 2025 को हुई थी सौरभ की हत्या सौरभ राजपूत की हत्या 3 मार्च 2025 को हुई थी। मामले में सामने आए विवरण के अनुसार, हत्या के बाद शव के पांच टुकड़े किए गए और उन्हें नीले ड्रम में भर दिया गया था। इस वारदात ने पूरे देश में व्यापक चर्चा बटोरी थी। अदालत ने मामले में मुस्कान रस्तोगी और साहिल को दोषी ठहराते हुए मृत्युदंड की सजा सुनाई है।

इंदौर में प्लॉट बेचने के नाम पर 7.80 लाख की ठगी का आरोप, ब्रोकर समेत दो पर FIR

शहर के एरोड्रम थाना क्षेत्र में प्लॉट बेचने के नाम पर धोखाधड़ी का मामला सामने आया है। आरोप है कि प्लॉट का सौदा करने के बाद ब्रोकर और प्लॉट मालिक ने फरियादी से 7 लाख 80 हजार रुपये ले लिए, लेकिन न तो प्लॉट की रजिस्ट्री कराई और न ही कब्जा दिया। शिकायत की जांच के बाद एरोड्रम थाना पुलिस ने नंदकिशोर मनावत और धर्मेंद्र ठाकुर के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर ली है। 9.30 लाख में तय हुआ था प्लॉट का सौदा पुलिस के मुताबिक, नंदबाग कॉलोनी निवासी विजय चौहान ने शिकायत में बताया कि उन्होंने नंदबाग में एक प्लॉट का सौदा 9 लाख 30 हजार रुपये में तय किया था। इस संबंध में एग्रीमेंट भी किया गया था। फरियादी ने आरोप लगाया कि उन्होंने नकद और ऑनलाइन माध्यम से कुल 7 लाख 80 हजार रुपये का भुगतान कर दिया, लेकिन इसके बावजूद उन्हें प्लॉट का कब्जा नहीं मिला और रजिस्ट्री भी नहीं कराई गई। ब्रोकर ने परिचित बताकर कराया था सौदा विजय चौहान के अनुसार, धर्मेंद्र ठाकुर ने उन्हें बताया था कि नंदकिशोर मनावत उसका परिचित है और वह अपना प्लॉट बेचना चाहता है। इसके बाद धर्मेंद्र ने सौदे में ब्रोकर की भूमिका निभाई और इसके बदले 10 हजार रुपये लिए। शिकायतकर्ता का आरोप है कि भुगतान के बाद जब उन्होंने रजिस्ट्री कराने और प्लॉट का कब्जा देने की मांग की, तो उन्हें लगातार टालमटोल का सामना करना पड़ा। 25 से ज्यादा केस होने की धमकी देने का आरोप फरियादी ने आरोप लगाया कि रजिस्ट्री और कब्जे के लिए दबाव बनाने पर धर्मेंद्र ठाकुर ने धमकी दी। शिकायत के मुताबिक, उसने कहा कि उसके खिलाफ 25 से ज्यादा मामले चल रहे हैं। साथ ही, उसके या नंदकिशोर मनावत के पास दोबारा आने पर अंजाम भुगतने की चेतावनी भी दी। 2.80 लाख रुपये लौटाए, 5 लाख बाकी होने का दावा विजय चौहान के मुताबिक, पुलिस में शिकायत करने की बात कहने के बाद नंदकिशोर मनावत ने 2 लाख 50 हजार रुपये नकद और 30 हजार रुपये ऑनलाइन वापस किए। हालांकि, फरियादी का आरोप है कि बाकी 5 लाख रुपये लौटाने से इनकार कर दिया गया। इसके बाद विजय चौहान ने पुलिस अधिकारियों से शिकायत की। जांच के बाद एरोड्रम थाना पुलिस ने नंदकिशोर मनावत और धर्मेंद्र ठाकुर के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर आगे की कार्रवाई शुरू कर दी है। मामले में लगाए गए आरोपों की पुष्टि न्यायिक प्रक्रिया के तहत होनी बाकी है।

SIR के खिलाफ प्रदर्शन करने वाले छात्रों से मिले राहुल गांधी, दिल्ली पुलिस पर मारपीट के आरोप

नई दिल्ली। SIR के खिलाफ दिल्ली में प्रदर्शन करने वाले छात्रों ने बुधवार को कांग्रेस नेता राहुल गांधी से मुलाकात की। इसके बाद राहुल गांधी और छात्रों ने संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस की, जिसमें प्रदर्शनकारियों ने दिल्ली पुलिस पर मारपीट और हिरासत के दौरान दुर्व्यवहार करने के आरोप लगाए। प्रेस कॉन्फ्रेंस में NSUI के छात्रों, कार्यकर्ताओं और कंटेंट क्रिएटर्स ने अपने साथ हुई कथित घटनाओं की जानकारी दी। प्रदर्शनकारियों ने पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए मामले में जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की। छात्रा ने कान पर चोट लगने का लगाया आरोप प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान एक छात्रा ने आरोप लगाया कि हिरासत के दौरान पुलिसकर्मी ने उसके प्राइवेट पार्ट पर लात मारी। वहीं, दिल्ली विश्वविद्यालय की छात्रा अदिरा ने दावा किया कि पुलिस की पिटाई के कारण उसके एक कान की सुनने की क्षमता चली गई। प्रदर्शनकारियों ने हिरासत के दौरान कथित ज्यादती और मारपीट से जुड़े अपने अनुभव साझा किए। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि की जानकारी सामने नहीं आई है। RSS और भाजपा से जुड़े लोगों के कहने पर हिरासत का आरोप एक अन्य प्रदर्शनकारी ने आरोप लगाया कि पुलिस RSS और भाजपा से जुड़े लोगों के कहने पर प्रदर्शनकारियों को हिरासत में ले रही थी। यह आरोप भी प्रदर्शनकारियों की ओर से लगाया गया है। राहुल गांधी ने सबूत सुरक्षित रखने को कहा राहुल गांधी ने छात्रों से घटनाओं से जुड़े वीडियो और अन्य सबूत सुरक्षित रखने को कहा। उन्होंने कहा कि इन सबूतों के आधार पर पुलिसकर्मियों से लेकर मुख्य चुनाव आयुक्त तक, जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की जाएगी। प्रदर्शनकारियों के आरोपों और पुलिस की कार्रवाई को लेकर आगे क्या कदम उठाए जाते हैं, इस पर नजर रहेगी।

बांग्लादेश टेस्ट सीरीज से बाहर हुए शाई होप और अल्जारी जोसेफ, केविन विकहम को पहली बार मिला मौका

क्रिकेट न्यूज। वेस्टइंडीज को बांग्लादेश के खिलाफ आगामी दो टेस्ट मैचों की सीरीज से पहले बड़ा झटका लगा है। टीम के बल्लेबाज शाई होप और तेज गेंदबाज अल्जारी जोसेफ सीरीज से बाहर हो गए हैं। क्रिकेट वेस्टइंडीज (CWI) ने 23 वर्षीय टॉप ऑर्डर बल्लेबाज केविन विकहम को पहली बार टेस्ट टीम में शामिल किया है। ऑलराउंडर कीमो पॉल को भी टीम में जगह मिली है। CWI के मुताबिक, मेडिकल जांच और विशेषज्ञों की सलाह के बाद अल्जारी जोसेफ को सीरीज से हटाने का फैसला लिया गया। बोर्ड उनके कार्यभार को नियंत्रित कर चोट के जोखिम को कम करना चाहता है। वहीं, तीनों फॉर्मेट में लगातार खेलने के बाद शाई होप को आराम दिया गया है। चोट के खतरे को देखते हुए जोसेफ को आराम क्रिकेट वेस्टइंडीज ने बताया कि अल्जारी जोसेफ को टीम से बाहर रखने का फैसला उनकी सहमति से लिया गया है। बोर्ड के अनुसार, टेस्ट क्रिकेट में तेज गेंदबाजों को लंबे स्पेल में लगातार गेंदबाजी करनी पड़ती है। इससे छोटे फॉर्मेट की तुलना में कार्यभार और चोट का जोखिम बढ़ सकता है। इसी को ध्यान में रखते हुए जोसेफ के वर्कलोड को कम करने का फैसला किया गया है, ताकि उनके स्वास्थ्य और फिटनेस का ध्यान रखा जा सके। शाई होप को भी दिया गया आराम CWI ने कहा कि शाई होप तीनों फॉर्मेट में लगातार खेल रहे थे। ऐसे में उनके कार्यभार और स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए उन्हें टेस्ट सीरीज से आराम दिया गया है। बोर्ड का यह फैसला फरवरी 2027 में होने वाले वनडे वर्ल्ड कप क्वालिफायर्स को ध्यान में रखकर भी लिया गया है। टीम प्रबंधन चाहता है कि खिलाड़ी आगामी महत्वपूर्ण मुकाबलों के लिए फिट रहें। केविन विकहम को पहली बार टेस्ट टीम में मौका शाई होप की गैरमौजूदगी में 23 वर्षीय टॉप ऑर्डर बल्लेबाज केविन विकहम को पहली बार टेस्ट टीम में शामिल किया गया है। इसके अलावा ऑलराउंडर कीमो पॉल को भी टीम में जगह मिली है। अब देखना होगा कि बांग्लादेश की घरेलू परिस्थितियों में वेस्टइंडीज की टीम नए संयोजन के साथ कैसा प्रदर्शन करती है। कोच डैरेन सैमी ने सीरीज जीत को बताया अहम वेस्टइंडीज के मुख्य कोच डैरेन सैमी ने कहा कि वर्ल्ड टेस्ट चैंपियनशिप के मौजूदा चक्र की शुरुआत में टीम ने कुछ लक्ष्य तय किए थे। इनमें टेस्ट रैंकिंग के ऊपरी आधे हिस्से में जगह बनाना भी शामिल है। उन्होंने कहा कि बांग्लादेश के खिलाफ सीरीज जीतने से टीम अपने लक्ष्य के करीब पहुंच सकती है। सैमी के मुताबिक, बांग्लादेश को उसकी घरेलू परिस्थितियों में हराना चुनौतीपूर्ण होगा, लेकिन टीम इसके लिए तैयार है। 28 अक्टूबर से शुरू होगा पहला टेस्ट बांग्लादेश और वेस्टइंडीज के बीच दो टेस्ट मैचों की सीरीज खेली जाएगी। पहला टेस्ट 28 अक्टूबर से ढाका में शुरू होगा, जबकि दूसरा टेस्ट 5 नवंबर से सिलहट में खेला जाएगा।

IMF ने बढ़ाया भारत की GDP ग्रोथ का अनुमान, 2026 और 2027 में 7% विकास दर रहने की उम्मीद

नई दिल्ली। अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) ने साल 2026 के लिए भारत की आर्थिक विकास दर का अनुमान 6.4% से बढ़ाकर 7% कर दिया है। वैश्विक तनाव, आर्थिक सुस्ती और कच्चे तेल की ऊंची कीमतों के बावजूद भारतीय अर्थव्यवस्था की मजबूती ने अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं का ध्यान खींचा है। मजबूत घरेलू मांग और सर्विसेज सेक्टर के बेहतर प्रदर्शन को भारत की तेज विकास दर की प्रमुख वजह माना गया है। IMF ने अक्टूबर 2026 की अपनी वर्ल्ड इकोनॉमिक आउटलुक रिपोर्ट में भारत की विकास संभावनाओं को सकारात्मक बताया है। रिपोर्ट के अनुसार, ऊर्जा आयात पर निर्भर कई उभरती अर्थव्यवस्थाएं जहां दबाव का सामना कर रही हैं, वहीं भारत की आर्थिक गतिविधियों में मजबूती बनी हुई है। 2027 में भी 7% ग्रोथ का अनुमान IMF ने 2026 के लिए भारत की विकास दर के अनुमान में जुलाई के मुकाबले 0.6 प्रतिशत अंक और अप्रैल के मुकाबले 0.5 प्रतिशत अंक की बढ़ोतरी की है। वहीं, 2027 के लिए भी विकास दर का अनुमान बढ़ाकर 7% कर दिया गया है। दिए गए आंकड़ों के मुताबिक, 2027 का अनुमान जुलाई के मुकाबले 0.3 प्रतिशत अंक और अप्रैल के मुकाबले 0.5 प्रतिशत अंक अधिक है। इससे संकेत मिलता है कि वैश्विक आर्थिक चुनौतियों के बीच भी भारत में विकास की संभावनाओं को लेकर उम्मीद बनी हुई है। IMF से पहले विश्व बैंक और आर्थिक सहयोग एवं विकास संगठन (OECD) जैसी अंतरराष्ट्रीय संस्थाएं भी भारत की विकास दर के अनुमान में बढ़ोतरी कर चुकी हैं। चीन की सुस्ती के बीच भारत पर नजर रिपोर्ट के मुताबिक, एशिया की अर्थव्यवस्थाओं में मजबूती देखने को मिल रही है। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) से जुड़ी गतिविधियों में तेजी ने भी वैश्विक आर्थिक परिदृश्य को प्रभावित किया है। भारत और चीन एशिया की आर्थिक गतिविधियों में अहम भूमिका निभा रहे हैं, हालांकि दोनों देशों की विकास संभावनाओं में अंतर दिखाई दे रहा है। IMF के अनुमान के अनुसार, चीन की विकास दर 2026 में 4.5% और 2027 में 4% रह सकती है। वैश्विक तनाव और ऊर्जा की ऊंची कीमतों को चीन की आर्थिक वृद्धि के सामने चुनौतियों में शामिल किया गया है। दुनिया की आर्थिक विकास दर पर दबाव IMF के मुताबिक, 2028 से 2031 के बीच वैश्विक अर्थव्यवस्था औसतन 3.2% की दर से बढ़ सकती है। यह 2000 से 2019 के बीच महामारी से पहले दर्ज औसत 3.7% की विकास दर से कम है। रिपोर्ट में वैश्विक तनाव, ऊर्जा बाजार में अनिश्चितता और ऊर्जा आयात पर निर्भर उभरती अर्थव्यवस्थाओं पर पड़ने वाले दबाव को आर्थिक विकास के लिए चुनौती बताया गया है। ऐसे माहौल में भारत की अनुमानित विकास दर अपेक्षाकृत मजबूत दिखाई देती है। मजबूत घरेलू मांग और जनसांख्यिकी से मिल रहा सहारा भारत की आर्थिक मजबूती के पीछे बढ़ता घरेलू बाजार, मजबूत मांग, अनुकूल जनसांख्यिकी और सुधारों को अहम कारक माना गया है। सर्विसेज सेक्टर का बेहतर प्रदर्शन भी विकास दर को सहारा दे रहा है। हालांकि, बेहतर अनुमान के बावजूद चुनौतियां खत्म नहीं हुई हैं। कच्चे तेल की ऊंची कीमतें भारत के आयात बिल और महंगाई पर दबाव डाल सकती हैं। इसके अलावा, अंतरराष्ट्रीय तनाव और वैश्विक मांग में कमजोरी का असर भारतीय अर्थव्यवस्था पर भी पड़ सकता है।

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