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Masoud Pezeshkian

Masoud Pezeshkian India Visit: BRICS Summit में शामिल होंगे ईरानी राष्ट्रपति, India-Iran Relations पर फोकस

नई दिल्ली में सितंबर में होने वाला BRICS Summit 2026 इस बार सिर्फ आर्थिक सहयोग की बैठकों तक सीमित नहीं रहने वाला है। ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान (Masoud Pezeshkian) भी भारत पहुंचेंगे और शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेंगे। भारत इस साल BRICS की अध्यक्षता कर रहा है, ऐसे में पेजेशकियान की मौजूदगी को India-Iran Relations के लिहाज से काफी अहम माना जा रहा है। पेजेशकियान का यह दौरा ऐसे समय में हो रहा है, जब पश्चिम एशिया की स्थिति लगातार अंतरराष्ट्रीय चर्चा के केंद्र में है। यही वजह है कि नई दिल्ली में होने वाली BRICS बैठक के दौरान आर्थिक मुद्दों के साथ-साथ क्षेत्रीय हालात और वैश्विक कूटनीति पर भी नजर रहेगी। BRICS Summit में शामिल होंगे ईरानी राष्ट्रपति ईरान 2024 में BRICS का पूर्ण सदस्य बना था। संगठन में शामिल होने के बाद यह पहली बार है जब राष्ट्रपति पेजेशकियान भारत में BRICS के शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेंगे। उनकी मौजूदगी से संगठन में ईरान की भूमिका और भारत के साथ उसके संबंधों पर चर्चा को और मजबूती मिलने की उम्मीद है। भारत की अध्यक्षता में इस साल BRICS का फोकस Resilience, Innovation, Cooperation और Sustainability जैसे मुद्दों पर है। सम्मेलन में आर्थिक सहयोग, व्यापार, निवेश, विकास और बदलती वैश्विक व्यवस्था से जुड़े विषयों पर बातचीत हो सकती है। PM Modi से मुलाकात पर भी रहेंगी निगाहें पेजेशकियान के भारत दौरे में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ उनकी संभावित मुलाकात भी अहम मानी जा रही है। दोनों देशों के बीच लंबे समय से व्यापार, कनेक्टिविटी और क्षेत्रीय सहयोग जैसे मुद्दे बातचीत का हिस्सा रहे हैं। ऐसे में BRICS Summit के दौरान दोनों नेताओं की बैठक होती है तो India-Iran Relations को लेकर कुछ महत्वपूर्ण संकेत सामने आ सकते हैं। खासकर ऐसे वक्त में जब पश्चिम एशिया की राजनीति तेजी से बदल रही है। Chabahar Port और Connectivity भी अहम मुद्दे भारत और ईरान के रिश्तों में Chabahar Port की भूमिका काफी महत्वपूर्ण है। यह बंदरगाह भारत के लिए मध्य एशिया और अफगानिस्तान तक संपर्क बढ़ाने का एक अहम रास्ता माना जाता है। पेजेशकियान की यात्रा के दौरान कनेक्टिविटी, व्यापार और आर्थिक सहयोग से जुड़े मुद्दों पर भी बातचीत की उम्मीद है। दोनों देशों के लिए यह दौरा पुराने संबंधों को नई दिशा देने का अवसर बन सकता है। West Asia Crisis के बीच क्यों खास है दौरा? पेजेशकियान ऐसे समय भारत आ रहे हैं जब West Asia में तनाव का असर वैश्विक राजनीति और अर्थव्यवस्था पर भी दिखाई दे रहा है। भारत लगातार बातचीत और कूटनीतिक समाधान के जरिए क्षेत्र में स्थिरता की जरूरत पर जोर देता रहा है। BRICS में बढ़ रहा ईरान का प्रभाव BRICS में ईरान की एंट्री के बाद संगठन का दायरा और व्यापक हुआ है। ईरान अब आर्थिक सहयोग के साथ-साथ वैश्विक दक्षिण से जुड़े मुद्दों पर भी अपनी भूमिका मजबूत करने की कोशिश कर रहा है। नई दिल्ली में होने वाला सम्मेलन भारत और ईरान दोनों के लिए महत्वपूर्ण है। भारत जहां BRICS के जरिए वैश्विक मंच पर अपनी प्राथमिकताओं को सामने रखेगा, वहीं ईरान के लिए यह अपने आर्थिक और कूटनीतिक संपर्क बढ़ाने का अवसर होगा। भारत के लिए क्यों महत्वपूर्ण है पेजेशकियान का दौरा? हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Monsoon

Monsoon Flood UP के 16 जिलों में बाढ़, नावों से आवाजाही; Bihar से Himachal तक बारिश का कहर

मानसून (Monsoon) की तेज बारिश ने उत्तर भारत के कई हिस्सों में लोगों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। उत्तर प्रदेश के 16 जिलों में बाढ़ और जलभराव से हालात परेशान करने वाले हैं। कई कॉलोनियों में सड़कें पानी में डूब गईं, जिसके बाद लोगों को आने-जाने के लिए नाव का सहारा लेना पड़ा। बिहार के छपरा में भी बारिश और जलभराव ने कारोबारियों की चिंता बढ़ा दी है। वहीं हिमाचल प्रदेश में बारिश के बीच हुए Landslide ने रेल ट्रैक और यातायात व्यवस्था को प्रभावित किया है। UP के 16 जिलों में Flood का असर उत्तर प्रदेश में लगातार बारिश के बाद कई नदियों का जलस्तर बढ़ा है। इसका असर आसपास के गांवों और शहरों में साफ दिखाई दे रहा है। 16 जिलों में बाढ़ और जलभराव की स्थिति ने लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी को प्रभावित किया है। कई इलाकों में सड़कें पानी में डूब गई हैं। कॉलोनियों में घरों के आसपास पानी जमा होने से लोगों को जरूरी काम के लिए भी बाहर निकलना मुश्किल हो रहा है। कुछ स्थानों पर राहत और बचाव के लिए नावों का इस्तेमाल किया जा रहा है। कॉलोनियों में नाव बनी सहारा शहरों में जलभराव की स्थिति सबसे ज्यादा परेशान करने वाली है। जिन सड़कों पर आम दिनों में वाहन दौड़ते थे, वहां अब पानी जमा है। स्थानीय लोगों के लिए यह स्थिति किसी बड़ी परेशानी से कम नहीं है। प्रशासन और राहत टीमें प्रभावित क्षेत्रों में पहुंचकर स्थिति का जायजा ले रही हैं। जरूरत वाले इलाकों में लोगों को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाने और जरूरी सामान उपलब्ध कराने पर जोर दिया जा रहा है। Chhapra में 100 दुकानों में घुसा पानी बिहार के छपरा में भी भारी बारिश के बाद बाजार प्रभावित हुआ है। रिपोर्ट के मुताबिक करीब 100 दुकानों में पानी घुस गया। व्यापारियों के सामने अब दुकानों में रखे सामान को बचाने की चुनौती है। दुकानदारों का कहना है कि जलभराव से कारोबार पर सीधा असर पड़ा है। बाजार में पानी जमा होने के कारण ग्राहक भी आसानी से नहीं पहुंच पा रहे हैं। अगर जलनिकासी में देरी होती है तो व्यापारियों की परेशानी और बढ़ सकती है। Himachal में Landslide से Rail Track पर संकट हिमाचल प्रदेश में बारिश के साथ पहाड़ी इलाकों में Landslide का खतरा बढ़ गया है। कई जगह पहाड़ों से मलबा गिरने के कारण सड़क और रेल यातायात प्रभावित हुआ है। रेल ट्रैक पर मलबा आने की स्थिति में ट्रेनों की आवाजाही रोकनी या सीमित करनी पड़ सकती है। रेलवे और प्रशासन की टीमें प्रभावित हिस्सों की जांच कर रही हैं और रास्ता साफ करने का काम किया जा रहा है। लोगों के लिए बढ़ी मुश्किल UP से Bihar और Himachal तक सामने आ रही तस्वीरें बताती हैं कि मानसून इस समय कई इलाकों में चुनौती बन गया है। मैदानी क्षेत्रों में बाढ़ और Waterlogging ने लोगों की परेशानी बढ़ाई है, जबकि पहाड़ी इलाकों में Landslide और अचानक बाढ़ का खतरा बना हुआ है। बारिश के बीच प्रशासन की ओर से संवेदनशील इलाकों पर नजर रखी जा रही है। लोगों से भी अपील की जा रही है कि वे पानी से भरी सड़कों, नदी-नालों और भूस्खलन संभावित क्षेत्रों से दूरी बनाए रखें। आगे भी सतर्क रहने की जरूरत मानसून के दौरान मौसम तेजी से बदल सकता है। ऐसे में प्रभावित जिलों में राहत और बचाव व्यवस्था को मजबूत रखना जरूरी है। प्रशासन के लिए सबसे बड़ी चुनौती प्रभावित लोगों तक समय पर मदद पहुंचाना और जलभराव वाले इलाकों में सामान्य स्थिति बहाल करना है। फिलहाल UP, Bihar और Himachal में बारिश से पैदा हुए हालात पर नजर बनी हुई है। आने वाले दिनों में मौसम कैसा रहता है, इसी पर कई प्रभावित इलाकों की स्थिति निर्भर करेगी। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Delhi

Delhi Bomb Threat High Court समेत 6 जगहों को धमकी, जांच में जुटीं Agencies

स्वतंत्रता दिवस से ठीक एक दिन पहले दिल्ली (Delhi) में उस वक्त अफरा-तफरी का माहौल बन गया, जब राजधानी की करीब छह जगहों को बम से उड़ाने की धमकी वाले ईमेल मिले। खबर सामने आते ही सुरक्षा एजेंसियां सक्रिय हो गईं और संबंधित स्थानों पर जांच शुरू कर दी गई। धमकी ऐसे समय मिली है, जब 15 अगस्त को लेकर दिल्ली में पहले से ही सुरक्षा व्यवस्था काफी कड़ी है। प्रमुख सरकारी इमारतों और संवेदनशील स्थानों पर पुलिस की निगरानी बढ़ाई गई है। Delhi High Court को भी मिला धमकी भरा Email मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, धमकी पाने वाली जगहों में Delhi High Court और इंदिरा गांधी इंटरनेशनल एयरपोर्ट (IGI Airport) भी शामिल हैं। ईमेल मिलने के बाद संबंधित अधिकारियों को इसकी जानकारी दी गई और सुरक्षा टीमों ने परिसर की जांच की। Delhi हाई कोर्ट में धमकी की सूचना मिलने के बाद पुलिस और सुरक्षा अधिकारियों ने स्थिति का जायजा लिया। हालांकि, शुरुआती जांच में किसी संदिग्ध विस्फोटक की पुष्टि नहीं हुई है। Independence Day से पहले क्यों बढ़ी चिंता? 15 अगस्त को दिल्ली में बड़े स्तर पर Independence Day समारोह आयोजित होते हैं। इस दौरान राजधानी में बड़ी संख्या में लोग भी अलग-अलग स्थानों पर मौजूद रहते हैं। ऐसे में धमकी भरा ईमेल मिलने के बाद सुरक्षा एजेंसियां किसी भी संभावना को नजरअंदाज नहीं करना चाहतीं। पुलिस की टीमें ईमेल के स्रोत का पता लगाने में जुटी हैं। साथ ही यह भी जांच की जा रही है कि संदेश किसने भेजा और इसके पीछे वास्तविक मंशा क्या थी। सुरक्षा व्यवस्था हुई और सख्त धमकी की खबर के बाद संवेदनशील इलाकों में सुरक्षा जांच बढ़ा दी गई है। एयरपोर्ट, कोर्ट और अन्य महत्वपूर्ण स्थानों पर आने-जाने वालों की निगरानी की जा रही है। संदिग्ध गतिविधियों पर नजर रखने के लिए सुरक्षा टीमों को अलर्ट किया गया है। दिल्ली में Independence Day को देखते हुए पहले से ही कई स्तरों पर सुरक्षा इंतजाम किए गए हैं। ऐसे में ताजा धमकी ने सुरक्षा एजेंसियों की चिंता जरूर बढ़ा दी है। जांच जारी, लोगों से अफवाहों से बचने की अपील फिलहाल पुलिस और सुरक्षा एजेंसियां मामले की जांच कर रही हैं। धमकी वाले ईमेल की सत्यता और उसके पीछे मौजूद व्यक्ति या समूह के बारे में जांच पूरी होने के बाद ही तस्वीर साफ होगी। सुरक्षा एजेंसियों के लिए फिलहाल सबसे बड़ी प्राथमिकता राजधानी में Independence Day समारोह को सुरक्षित तरीके से संपन्न कराना है। आम लोगों से भी अपील है कि वे किसी भी अपुष्ट खबर या अफवाह को सोशल मीडिया पर आगे न बढ़ाएं और केवल आधिकारिक जानकारी पर भरोसा करें। निष्कर्ष: स्वतंत्रता दिवस से ठीक पहले मिली इस धमकी ने दिल्ली की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर सतर्कता और बढ़ा दी है। जांच एजेंसियां ईमेल के स्रोत और उसकी गंभीरता का पता लगाने में जुटी हैं। फिलहाल किसी वास्तविक विस्फोटक की पुष्टि नहीं हुई है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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CJI Surya Kant

CJI Surya Kant Controversy: NALSAR छात्रों के विरोध से मचा बवाल, BCI ने पलटा Enrolment Order

NALSAR University का विवाद अब सिर्फ एक Convocation तक सीमित नहीं रहा है। CJI Surya Kant को समारोह में Chief Guest बनाए जाने पर कुछ छात्रों की आपत्ति के बाद शुरू हुआ मामला पहले Bar Council of India (BCI) तक पहुंचा और फिर Supreme Court में भी चर्चा का विषय बन गया। सबसे ज्यादा चर्चा BCI के उस फैसले की हुई, जिसमें NALSAR के 2026 बैच के Law Graduates के Enrolment पर रोक लगाने की बात कही गई थी। हालांकि घटनाक्रम ज्यादा देर तक एक जैसा नहीं रहा। BCI ने बाद में अपना फैसला बदलते हुए छात्रों को Enrolment की अनुमति दे दी। इसके बाद सुप्रीम कोर्ट में CJI सूर्यकांत ने भी इस पूरे मामले में BCI की भूमिका पर सवाल उठाए। CJI सूर्यकांत को Chief Guest बनाने पर क्यों हुआ विवाद? NALSAR के Convocation समारोह में CJI सूर्यकांत को Chief Guest के तौर पर आमंत्रित किया गया था। इसी को लेकर छात्रों के एक वर्ग ने आपत्ति जताई। छात्रों ने विश्वविद्यालय प्रशासन के सामने अपनी चिंताएं रखीं और CJI को बुलाने के फैसले पर सवाल उठाए। मामला तब ज्यादा चर्चा में आया, जब छात्रों की आपत्ति को लेकर BCI ने भी संज्ञान लिया। इसके बाद विश्वविद्यालय से पूरे घटनाक्रम की जानकारी और तथ्यात्मक रिपोर्ट मांगी गई। BCI ने 2026 बैच के Enrolment पर लगाई रोक विवाद के बीच BCI की ओर से पहले ऐसा निर्देश जारी किया गया कि NALSAR के 2026 बैच के Law Graduates का Advocate के रूप में Enrolment अगले आदेश तक रोका जाए। इस फैसले से छात्रों के बीच चिंता बढ़ गई। वजह साफ थी—किसी विवाद में पूरे बैच के भविष्य पर असर पड़ने की आशंका पैदा हो गई थी। सवाल यह भी उठा कि अगर विरोध में केवल कुछ छात्र शामिल थे, तो उसका असर पूरे बैच पर क्यों पड़े? फिर BCI ने बदला अपना फैसला विवाद बढ़ने के बाद BCI ने अपने शुरुआती आदेश में बदलाव किया। परिषद ने साफ किया कि NALSAR के 2026 बैच के छात्रों को उनकी पसंद के State Bar Council में Enrolment कराने की अनुमति दी जाएगी। बाद में BCI ने 2026 बैच के खिलाफ कार्यवाही बंद करने की बात भी कही। परिषद का कहना था कि बड़ी संख्या में छात्र इस पूरे घटनाक्रम में शामिल नहीं थे और किसी छात्र को ऐसी कार्रवाई का सामना नहीं करना चाहिए, जिसमें उसकी कोई भूमिका न हो। इस फैसले से उन छात्रों को राहत मिली, जिनकी पढ़ाई पूरी होने के बाद अब Professional Career शुरू होने वाला था। Supreme Court में CJI ने BCI से पूछा- दखल क्यों? मामले की सुनवाई के दौरान CJI सूर्यकांत ने BCI की कार्रवाई पर सवाल उठाए। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि छात्रों और उनके बीच का मामला किस तरह BCI के हस्तक्षेप का विषय बन गया। CJI की टिप्पणी ने मामले का रुख ही बदल दिया। अब चर्चा सिर्फ इस बात पर नहीं थी कि Convocation में किसे Chief Guest बनाया जाए, बल्कि यह सवाल भी सामने आया कि छात्रों को असहमति जताने और अपनी बात रखने की कितनी स्वतंत्रता है। छात्रों के Career पर असर का मुद्दा भी अहम इस विवाद का सबसे संवेदनशील पहलू छात्रों का भविष्य रहा। Law की पढ़ाई पूरी करने के बाद Advocate के रूप में Enrolment किसी भी Law Graduate के Career का अहम पड़ाव होता है। ऐसे में पूरे बैच के Enrolment पर रोक की खबर ने कई छात्रों और उनके परिवारों की चिंता बढ़ा दी थी। बाद में BCI के फैसले में बदलाव के बाद स्थिति सामान्य हुई। विवाद अभी पूरी तरह खत्म नहीं BCI ने 2026 बैच के खिलाफ अपनी कार्रवाई वापस ले ली है, लेकिन पूरे विवाद ने कई बड़े सवाल जरूर खड़े कर दिए हैं। एक तरफ छात्रों के विरोध और अभिव्यक्ति के अधिकार की बात है, तो दूसरी तरफ Professional Regulatory Body के अधिकार और उसकी भूमिका को लेकर बहस जारी है। NALSAR विवाद ने यह भी दिखाया कि विश्वविद्यालय परिसर में किसी मुद्दे पर छात्रों की असहमति कितनी जल्दी बड़े संस्थागत विवाद का रूप ले सकती है। NALSAR विवाद से क्या निकला? फिलहाल सबसे बड़ी राहत 2026 बैच के Law Graduates को मिली है। Enrolment पर लगी रोक हट चुकी है और उनके Advocate बनने का रास्ता साफ है। वहीं, Supreme Court में CJI सूर्यकांत की टिप्पणियों के बाद यह मामला छात्रों के अधिकार, विश्वविद्यालय की स्वतंत्रता और BCI के अधिकार क्षेत्र से जुड़े व्यापक सवालों के कारण सुर्खियों में बना हुआ है। यानी NALSAR का यह विवाद सिर्फ एक Convocation का मामला नहीं रह गया है। इसने छात्रों की आवाज, संस्थागत अधिकार और Professional Regulation के बीच संतुलन को लेकर एक महत्वपूर्ण बहस जरूर शुरू कर दी है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Census 2027

India Census 2027: इस बार पूछे जाएंगे 40 Questions, Caste से लेकर Education तक होगी जानकारी

देश में अगली जनगणना यानी Census 2027 को लेकर केंद्र सरकार ने तैयारियां तेज कर दी हैं। गृह मंत्रालय की ओर से Population Enumeration Phase के लिए सवालों की सूची अधिसूचित कर दी गई है। इस बार जनगणना में लोगों से कुल 40 सवाल पूछे जाएंगे। इनमें परिवार, शिक्षा, रोजगार, धर्म, जाति, भाषा और पहचान से जुड़ी जानकारियां शामिल हैं। आम लोगों के लिए यह प्रक्रिया इसलिए भी अहम है क्योंकि जनगणना का असर सिर्फ आंकड़ों तक सीमित नहीं रहता। सरकार इन्हीं आंकड़ों के आधार पर कई योजनाओं, नीतियों और विकास कार्यक्रमों की दिशा तय करती है। Census 2027 में क्या-क्या पूछा जाएगा? जनगणना अधिकारी परिवार के सदस्यों से उनकी व्यक्तिगत और सामाजिक स्थिति से जुड़े सवाल पूछेंगे। इसमें व्यक्ति का नाम, परिवार के मुखिया से संबंध, लिंग, जन्मतिथि और उम्र जैसी सामान्य जानकारियां शामिल होंगी। इसके अलावा वैवाहिक स्थिति, विवाह की उम्र, पति या पत्नी का नाम और माता-पिता से संबंधित जानकारी भी दर्ज की जाएगी। Religion और Caste की भी होगी जानकारी इस बार Census 2027 में धर्म और जाति से जुड़े सवाल खास चर्चा में हैं। अनुसूचित जाति (SC) और अनुसूचित जनजाति (ST) से संबंधित जानकारी के साथ जाति का विवरण भी दर्ज किया जाएगा। इसके साथ ही व्यक्ति की मातृभाषा और दूसरी भाषाओं के बारे में भी जानकारी ली जाएगी। इससे देश की सामाजिक और भाषाई तस्वीर को समझने में मदद मिलेगी। Education और Job की स्थिति भी पूछी जाएगी जनगणना में लोगों की शिक्षा और रोजगार की स्थिति को भी दर्ज किया जाएगा। व्यक्ति ने कितनी पढ़ाई की है, वह पिछले वर्ष किसी आर्थिक गतिविधि में शामिल था या नहीं और उसका काम किस तरह का है—इनसे जुड़े सवाल पूछे जाएंगे। जो लोग नौकरी या व्यवसाय में नहीं हैं, उनकी स्थिति से जुड़ी जानकारी भी प्रश्नावली का हिस्सा होगी। महिलाओं से बच्चों को लेकर सवाल महिलाओं से उनके जीवन में जन्मे बच्चों और वर्तमान में जीवित बच्चों से संबंधित जानकारी भी ली जाएगी। पिछले एक साल में बच्चे के जन्म से जुड़ा सवाल भी पूछा जाएगा। इन आंकड़ों से देश में Birth Rate और Population Growth के बदलते रुझानों को समझने में मदद मिल सकती है। Aadhaar और अन्य ID की जानकारी भी शामिल Census 2027 की प्रश्नावली में पहचान से जुड़े दस्तावेजों के बारे में भी जानकारी मांगी जाएगी। इसमें Aadhaar, Voter ID, Passport और Driving Licence से संबंधित सवाल शामिल हैं। इसके अलावा मोबाइल नंबर और बैंक खातों से जुड़ी जानकारी भी प्रश्नावली में रखी गई है। COVID-19 vaccination से संबंधित सवाल भी शामिल किए गए हैं। दो चरणों में पूरी होगी जनगणना Census 2027 की पूरी प्रक्रिया को मुख्य रूप से दो चरणों में बांटा गया है। पहले चरण में Houselisting and Housing Census के जरिए घरों और आवास से जुड़ी जानकारी जुटाई जाती है। दूसरे चरण में Population Enumeration होगा, जिसमें प्रत्येक व्यक्ति से संबंधित विस्तृत जानकारी दर्ज की जाएगी। सामान्य क्षेत्रों में Population Enumeration फरवरी 2027 में प्रस्तावित है। Digital होगी Census 2027 इस बार की जनगणना की एक बड़ी खासियत इसका Digital Format है। सरकार ने डिजिटल माध्यम से जानकारी जुटाने और Self-Enumeration की सुविधा पर भी जोर दिया है। यानी आने वाली जनगणना में तकनीक की भूमिका पहले के मुकाबले काफी ज्यादा रहने वाली है। क्यों महत्वपूर्ण है Census 2027? जनगणना से मिलने वाले आंकड़े देश की मौजूदा स्थिति की एक बड़ी तस्वीर सामने रखते हैं। कितने लोग पढ़े-लिखे हैं, कितने लोग रोजगार से जुड़े हैं, आबादी किस तरह के क्षेत्रों में रहती है और समाज में किस तरह के बदलाव हो रहे हैं—इन सवालों के जवाब जनगणना के आंकड़ों से मिलते हैं। इसलिए Census 2027 आम नागरिक के लिए सिर्फ सरकारी प्रक्रिया नहीं है। घर पर जब जनगणना अधिकारी पहुंचे, तो सही और सटीक जानकारी देना बेहद जरूरी होगा। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Sonam Wangchuk

Sonam Wangchuk का बड़ा बयान: 2047 तक विकसित देश बनने के लिए चाहिए सही Leadership

भारत के 2047 तक विकसित राष्ट्र बनने के लक्ष्य पर सामाजिक कार्यकर्ता और शिक्षा सुधारक सोनम वांगचुक (Sonam Wangchuk) ने एक बार फिर बहस छेड़ दी है। स्वतंत्रता दिवस से पहले जारी अपने वीडियो संदेश में उन्होंने देश के भविष्य, राजनीतिक नेतृत्व और मौजूदा व्यवस्था को लेकर कई सवाल उठाए। वांगचुक का कहना है कि भारत के पास आगे बढ़ने की पूरी क्षमता है, लेकिन केवल आर्थिक आंकड़ों से देश को विकसित राष्ट्र नहीं बनाया जा सकता। इसके लिए बेहतर नेतृत्व, मजबूत संस्थाएं और नागरिकों की सक्रिय भागीदारी भी जरूरी है। 2047 के लक्ष्य पर वांगचुक ने जताई चिंता सोनम वांगचुक ने सवाल उठाया कि क्या मौजूदा परिस्थितियों में भारत 2047 तक एक विकसित और सम्मानित राष्ट्र बन पाएगा। उन्होंने भारत की तुलना कुछ एशियाई देशों से करते हुए कहा कि कई छोटे देश भी अपने नागरिकों की आर्थिक स्थिति और जीवन स्तर सुधारने में तेजी से आगे बढ़े हैं। उन्होंने श्रीलंका और बांग्लादेश जैसे देशों का उदाहरण देते हुए भारत को अपनी विकास यात्रा का ईमानदारी से आकलन करने की जरूरत बताई। वांगचुक का संदेश साफ था—भारत के पास संसाधन और प्रतिभा की कमी नहीं है, जरूरत उस दिशा और नेतृत्व की है जो इन क्षमताओं का सही इस्तेमाल कर सके। ‘Peaceful Revolution’ की जरूरत क्यों बता रहे हैं? वांगचुक ने देश में बदलाव के लिए ‘Peaceful Revolution’ यानी शांतिपूर्ण क्रांति की बात कही। हालांकि, उनके मुताबिक इसका मतलब हिंसा या टकराव नहीं है। वह लोकतांत्रिक और शांतिपूर्ण तरीके से व्यवस्था में सुधार की बात कर रहे हैं। उन्होंने लोगों से अपील की कि वे ऐसे नेताओं और जनप्रतिनिधियों को आगे लाने पर विचार करें जो ईमानदार, निडर, जिम्मेदार और देशहित को प्राथमिकता देने वाले हों। उनका मानना है कि केवल सरकार बदलने से व्यवस्था नहीं बदलती। बदलाव तब आता है जब नागरिक भी अपने अधिकारों और जिम्मेदारियों को लेकर जागरूक होते हैं। Political Leadership पर उठाए सवाल वांगचुक ने राजनीतिक व्यवस्था में नेतृत्व के चयन को लेकर भी सवाल उठाए। उनका कहना है कि देश को ऐसे लोगों की जरूरत है जो व्यक्तिगत फायदे से ऊपर उठकर लंबे समय के लिए राष्ट्रहित में फैसले ले सकें। उन्होंने लोगों से ऐसे संभावित नेताओं के नाम सुझाने को कहा, जिन पर उन्हें भरोसा है। इसके जरिए वह देश के अलग-अलग हिस्सों से अच्छे नेतृत्व की तलाश और उस पर चर्चा शुरू करना चाहते हैं। ‘Second Independence Movement’ का दिया नाम वांगचुक ने अपनी पहल को ‘India’s Second Independence Movement’ का नाम दिया है। उनका उद्देश्य इसे किसी एक पार्टी या व्यक्ति के खिलाफ अभियान बनाने के बजाय व्यवस्था और नेतृत्व में सुधार की व्यापक पहल के रूप में पेश करना है। उन्होंने लोगों से अपने विचारों को ज्यादा से ज्यादा लोगों तक पहुंचाने और अलग-अलग भारतीय भाषाओं में चर्चा बढ़ाने की अपील की। सिर्फ Economy नहीं, लोगों की जिंदगी भी मायने रखती है विकसित देश बनने की चर्चा अक्सर GDP, निवेश और Infrastructure जैसे आंकड़ों के आसपास घूमती है। लेकिन वांगचुक के सवाल का दूसरा पहलू आम लोगों की जिंदगी से जुड़ा है। बेहतर शिक्षा, रोजगार, स्वास्थ्य सुविधाएं, पर्यावरण, पारदर्शी प्रशासन और मजबूत लोकतांत्रिक संस्थाएं भी किसी देश के विकास की अहम पहचान होती हैं। यही वजह है कि उनका बयान सिर्फ 2047 के लक्ष्य पर सवाल नहीं है, बल्कि यह पूछता है कि उस लक्ष्य तक पहुंचने का रास्ता कैसा होना चाहिए। अब बहस सिर्फ 2047 की नहीं, रास्ते की भी है भारत के लिए 2047 एक बड़ा लक्ष्य है। लेकिन सोनम वांगचुक के बयान ने इस लक्ष्य के साथ एक अहम सवाल जोड़ दिया है—क्या केवल लक्ष्य तय करना काफी है या उसे हासिल करने के लिए व्यवस्था में भी बदलाव जरूरी है? उनकी ‘Peaceful Revolution’ की अपील पर राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर अलग-अलग राय हो सकती है, लेकिन स्वतंत्रता दिवस से पहले उनका संदेश देश में नेतृत्व, विकास और नागरिक भागीदारी को लेकर एक नई चर्चा जरूर खड़ी करता है। आखिर 2047 का भारत कैसा होगा, यह सिर्फ सरकारों के फैसलों से तय नहीं होगा। इसमें देश के करोड़ों नागरिकों की सोच, भागीदारी और जिम्मेदारी की भी बड़ी भूमिका होगी। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Chamoli

Chamoli Tunnel हादसा: 22 मजदूर थे अंदर, 7 की मौत के बाद 3 को बचाने में जुटीं Rescue Teams

उत्तराखंड के चमोली जिले के पीपलकोटी में गुरुवार शाम हुए Chamoli Tunnel Accident ने एक बार फिर पहाड़ों में चल रहे बड़े निर्माण कार्यों की सुरक्षा पर सवाल खड़े कर दिए हैं। निर्माणाधीन विष्णुगढ़-पीपलकोटी हाइड्रो पावर प्रोजेक्ट की सुरंग में अचानक पानी और मलबा घुसने से बड़ा हादसा हो गया। हादसे में 7 मजदूरों की मौत हो गई, जबकि 3 मजदूर अभी भी लापता बताए जा रहे हैं। अचानक सुरंग में घुसा पानी और मलबा घटना गुरुवार शाम करीब 7 बजे की बताई जा रही है। सुरंग के अंदर काम चल रहा था, तभी अचानक पानी और मलबा तेजी से अंदर आ गया। कुछ ही देर में सुरंग का रास्ता प्रभावित हो गया और कई मजदूर अंदर फंस गए। हादसे की सूचना मिलते ही प्रशासन ने रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू किया। NDRF, SDRF, ITBP और फायर सर्विस की टीमें मौके पर पहुंचीं। सुरंग के अंदर पानी का स्तर बढ़ने और मलबे के कारण बचाव दल को काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है। 22 मजदूर थे सुरंग के अंदर अधिकारियों के मुताबिक हादसे के समय सुरंग में कुल 22 मजदूर काम कर रहे थे। इनमें से 12 मजदूरों को सुरक्षित बाहर निकाला गया, जबकि 7 लोगों की मौत की पुष्टि हुई है और 3 अन्य अभी लापता हैं। कुछ घायलों को इलाज के लिए अस्पताल भी पहुंचाया गया है। रेस्क्यू टीमों की कोशिश है कि सुरंग के अंदर फंसे मजदूरों तक जल्द से जल्द पहुंचा जाए। पानी और मलबा लगातार चुनौती बना हुआ है, इसलिए बचाव अभियान सावधानी के साथ आगे बढ़ाया जा रहा है। CM पुष्कर सिंह धामी पहुंचे घटनास्थल हादसे की गंभीरता को देखते हुए मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने मौके का जायजा लिया। उन्होंने अधिकारियों और रेस्क्यू टीमों से बातचीत कर अभियान की जानकारी ली और सभी उपलब्ध संसाधनों के साथ तेजी से बचाव कार्य चलाने के निर्देश दिए। मुख्यमंत्री ने साफ कहा कि सरकार की पहली प्राथमिकता सुरंग में फंसे मजदूरों को सुरक्षित बाहर निकालना है। हादसे में जान गंवाने वाले मजदूरों के परिवारों को 4-4 लाख रुपये की आर्थिक सहायता देने की घोषणा भी की गई है। Rescue Operation में जुटी कई एजेंसियां सुरंग के भीतर हालात चुनौतीपूर्ण होने के बावजूद बचाव अभियान लगातार जारी है। NDRF और SDRF के साथ ITBP तथा अन्य एजेंसियां मौके पर काम कर रही हैं। पानी निकालने और मलबा हटाने के लिए उपलब्ध उपकरणों का इस्तेमाल किया जा रहा है। अधिकारियों के अनुसार सुरंग में पानी का स्तर बढ़ने से रेस्क्यू टीमों के लिए अंदर तक पहुंचना मुश्किल हो रहा है। इसके बावजूद फंसे मजदूरों को जल्द सुरक्षित निकालने की कोशिश जारी है। हिमालयी क्षेत्र में Tunnel Safety फिर सवालों में चमोली का यह हादसा केवल एक दुर्घटना नहीं, बल्कि हिमालयी इलाकों में बड़े निर्माण प्रोजेक्ट्स की सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंता भी पैदा करता है। इस क्षेत्र की पहाड़ी संरचना, भौगोलिक अस्थिरता और अचानक बदलती परिस्थितियां सुरंग निर्माण को बेहद चुनौतीपूर्ण बनाती हैं। फिलहाल पूरा ध्यान रेस्क्यू ऑपरेशन पर है। सात मजदूरों की मौत से उनके परिवारों में मातम है, जबकि सुरंग में लापता तीन मजदूरों के परिवारों को अब भी उनके सुरक्षित लौटने की उम्मीद है। प्रशासन और बचाव एजेंसियां लगातार ऑपरेशन पर नजर बनाए हुए हैं। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Pakistan

India-Pakistan Tension: पानी और कश्मीर पर शहबाज शरीफ का बड़ा बयान, बोले- रुख नहीं बदलेगा

पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने भारत को पानी के मुद्दे पर एक बार फिर सख्त चेतावनी दी है। पाकिस्तान के स्वतंत्रता दिवस से पहले दिए अपने संबोधन में शरीफ ने कहा कि उनके देश के पानी की हर बूंद बेहद अहम है और इसे लेकर किसी भी तरह का खतरा स्वीकार नहीं किया जाएगा। उन्होंने यह भी कहा कि पाकिस्तान शांति चाहता है, लेकिन इसे उसकी कमजोरी समझना भारी पड़ सकता है। शहबाज शरीफ का यह बयान ऐसे वक्त आया है, जब India-Pakistan Relations पहले से ही पानी, कश्मीर और सुरक्षा जैसे मुद्दों को लेकर तनावपूर्ण हैं। पानी के मुद्दे पर भारत को सीधा संदेश इस्लामाबाद में एक कार्यक्रम के दौरान पाकिस्तानी प्रधानमंत्री ने कहा कि पानी पाकिस्तान के लिए एक Red Line है। उनका कहना था कि अगर पाकिस्तान के जल अधिकारों को नुकसान पहुंचाने की कोशिश हुई तो देश अपनी सुरक्षा और हितों की रक्षा के लिए जवाब देगा। शरीफ ने साथ ही कहा कि पाकिस्तान युद्ध नहीं चाहता। उनका कहना था कि उनका देश क्षेत्र में शांति और स्थिरता चाहता है, लेकिन शांति की इस इच्छा को कमजोरी नहीं माना जाना चाहिए। Kashmir पर रुख बदलने को तैयार नहीं पाकिस्तान अपने संबोधन में शहबाज शरीफ ने Kashmir Issue का भी जिक्र किया। उन्होंने साफ किया कि कश्मीर को लेकर पाकिस्तान के रुख में कोई बदलाव नहीं आया है। भारत और पाकिस्तान के बीच कश्मीर लंबे समय से सबसे संवेदनशील राजनीतिक मुद्दों में रहा है। दोनों देशों के इस मामले में अलग-अलग दावे और नीतियां हैं। ऐसे में पाकिस्तानी प्रधानमंत्री का ताजा बयान एक बार फिर इस विवाद को सुर्खियों में ले आया है। Asim Munir की Leadership की तारीफ शहबाज शरीफ ने पाकिस्तानी सेना के प्रमुख फील्ड मार्शल असीम मुनीर की नेतृत्व क्षमता की भी तारीफ की। उन्होंने मई 2025 के भारत-पाकिस्तान सैन्य टकराव का जिक्र करते हुए इसे पाकिस्तान की सैन्य क्षमता से जोड़कर पेश किया। शरीफ ने कहा कि अगर भविष्य में पाकिस्तान की संप्रभुता या सुरक्षा को चुनौती दी गई, तो देश उसका मजबूती से सामना करेगा। उनके इस बयान को पाकिस्तान की मौजूदा सरकार और सैन्य नेतृत्व के बीच तालमेल के संदेश के तौर पर भी देखा जा रहा है। Yaadgar-e-Fatah का उद्घाटन शहबाज शरीफ का यह बयान यादगार-ए-फतह के उद्घाटन कार्यक्रम में आया। इस कार्यक्रम में पाकिस्तान के राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी, प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और फील्ड मार्शल असीम मुनीर समेत कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे। पाकिस्तान ने इस स्मारक को अपने सैनिकों और संघर्ष के दौरान जान गंवाने वालों की याद से जोड़ा है। कार्यक्रम में देश की सुरक्षा और सैन्य क्षमता को लेकर भी संदेश दिए गए। India-Pakistan Tension पर फिर बढ़ी नजर पानी और कश्मीर जैसे मुद्दों पर पाकिस्तान की ओर से आए ताजा बयानों ने India-Pakistan Tension को फिर चर्चा में ला दिया है। खासकर सिंधु जल संधि को लेकर दोनों देशों के बीच मतभेद काफी गंभीर रहे हैं। शहबाज शरीफ के बयान से यह संकेत जरूर मिलता है कि पाकिस्तान पानी और कश्मीर जैसे मुद्दों पर अपने पुराने रुख से पीछे हटने के मूड में नहीं है। हालांकि, दोनों देशों के बीच भविष्य में बातचीत और कूटनीतिक रास्ते से तनाव कम करने की संभावना बनी रहती है।
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Air India

Air India Flight: Phuket-Delhi विमान ने खोया Control, 4 सेकेंड में 300 फीट नीचे गिरा

Phuket से दिल्ली आ रही Air India की फ्लाइट AI2379 में 4 अगस्त को अचानक ऐसा पल आया, जिसने विमान में बैठे यात्रियों और Crew की सांसें थाम दीं। उड़ान के दौरान विमान करीब 300 फीट नीचे आ गया और शुरुआती जांच में सामने आया है कि लगभग 4 सेकेंड तक विमान के कुछ अहम Flight Controls ने काम नहीं किया। Airbus की Preliminary Analysis ने इस घटना को सामान्य Turbulence से कहीं ज्यादा गंभीर Technical Incident बताया है। 4 सेकेंड तक नहीं मिला Control Input का जवाब Airbus के शुरुआती विश्लेषण के मुताबिक, घटना के दौरान विमान के तीनों Hydraulic Systems में दबाव से जुड़ी समस्या सामने आई। इसका असर Elevator और Aileron जैसे महत्वपूर्ण Flight Controls पर पड़ा। रिपोर्ट के अनुसार, First Officer ने विमान को नियंत्रित करने के लिए Nose-Down Input दिया, लेकिन उस समय Flight Control Surfaces ने तुरंत अपेक्षित प्रतिक्रिया नहीं दी। करीब चार सेकेंड बाद सिस्टम ने दोबारा काम करना शुरू किया और पायलट विमान को संभालने में सफल रहे। इसी दौरान Autopilot भी Disconnect हुआ था। अचानक 300 फीट नीचे आया विमान AI2379 में 137 यात्री और 8 Crew Members सवार थे। उड़ान के दौरान विमान की ऊंचाई अचानक करीब 300 फीट कम हो गई। घटना में यात्रियों और Crew को चोटें आईं और विमान को सुरक्षित रूप से दिल्ली में उतार लिया गया। अलग-अलग रिपोर्टों में घायलों की संख्या में अंतर सामने आया है, जबकि हालिया Airbus Analysis में कुल 24 लोगों के घायल होने की बात कही गई है। एक मिनट में कई Warning Alerts घटना के बाद सामने आए Maintenance Data ने भी कई सवाल खड़े किए हैं। रिपोर्टों के मुताबिक, विमान के सिस्टम में कम समय के भीतर Hydraulic System, Autopilot और Flight Controls से जुड़े कई Warning Alerts दर्ज हुए थे। इससे जांचकर्ताओं के सामने यह सवाल है कि क्या वास्तव में तीनों Hydraulic Systems में एक साथ खराबी आई थी या किसी Sensor, Pressure Switch अथवा दूसरे Technical Component की वजह से गलत संकेत मिले। फिलहाल Final Cause तय नहीं हुआ है। शुरुआत में Turbulence माना गया, जांच में बदली तस्वीर घटना के शुरुआती विवरण में इसे Turbulence से जोड़कर देखा गया था। लेकिन जैसे-जैसे Flight Data और Maintenance Records की जानकारी सामने आई, Technical Failure का पहलू ज्यादा महत्वपूर्ण हो गया। Airbus ने आगे की जांच के लिए Air India से Aircraft Maintenance Records और अन्य तकनीकी जानकारी मांगी है। AAIB इस मामले की जांच कर रहा है और Airbus तथा फ्रांस की BEA भी तकनीकी जांच में सहयोग कर रहे हैं। Pilot Drug Test ने भी बढ़ाई चिंता इस पूरे मामले में Pilot से जुड़ा एक अलग घटनाक्रम भी सामने आया। रिपोर्टों के अनुसार, फ्लाइट के Captain का Confirmatory Drug Test Positive आया। इसके बाद Air India ने Air India और Air India Express के सभी Pilots की Mandatory Substance Screening शुरू करने का फैसला किया है। महत्वपूर्ण बात यह है कि अब तक Pilot के Test Result और विमान में आई Technical Failure के बीच कोई सीधा संबंध स्थापित नहीं हुआ है। दोनों पहलुओं की जांच अलग-अलग की जा रही है। Air India ने सभी Pilots की Screening शुरू की Air India का यह फैसला मौजूदा Regulatory Requirements से आगे बढ़कर लिया गया है। कंपनी ने अपने Group Pilots की Screening शुरू करने की जानकारी दी है। इसका उद्देश्य Flight Safety को मजबूत करना और यात्रियों का भरोसा बनाए रखना बताया गया है। अब Final Investigation Report का इंतजार Phuket-Delhi Flight AI2379 की घटना ने Aviation Safety को लेकर कई अहम सवाल खड़े कर दिए हैं। सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या तीनों Hydraulic Systems में वास्तव में एक साथ समस्या आई थी, या किसी Component/Sensor की खराबी ने ऐसी स्थिति पैदा की? फिलहाल Airbus की Preliminary Analysis से यह जरूर सामने आया है कि विमान ने कुछ सेकेंड के लिए अहम Flight Controls की क्षमता खो दी थी। लेकिन घटना की पूरी वजह और जिम्मेदारी तय करने के लिए AAIB की Final Investigation Report का इंतजार करना होगा। एक सामान्य उड़ान में महज कुछ सेकेंड भी कितने अहम हो सकते हैं, AI2379 की यह घटना उसकी गंभीर याद दिलाती है। विमान आखिरकार सुरक्षित दिल्ली पहुंच गया, लेकिन 300 फीट की अचानक गिरावट और करीब 4 सेकेंड तक Control Response न मिलना अब Aviation Investigators के लिए सबसे बड़ा सवाल बन चुका है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Gold

Gold Rate: सोने-चांदी की कीमतों में गिरावट, 10 ग्राम Gold और 1 किलो Silver का नया भाव

सोना-चांदी खरीदने वालों के लिए गुरुवार का दिन थोड़ी राहत लेकर आया। लगातार तेजी के बाद घरेलू बाजार में Gold और Silver Price में गिरावट दर्ज की गई। सोना करीब ₹972 प्रति 10 ग्राम सस्ता होकर लगभग ₹1.52 लाख पर आ गया। वहीं चांदी की कीमत में ₹3,414 प्रति किलो की कमी आई और यह करीब ₹2.34 लाख प्रति किलो रह गई। बाजार में आई इस नरमी का असर उन लोगों पर भी पड़ सकता है, जो आने वाले दिनों में शादी, त्योहार या निवेश के लिए सोना-चांदी खरीदने की तैयारी कर रहे हैं। हालांकि, कीमतों में आगे भी उतार-चढ़ाव बना रह सकता है। Gold Price Today: सोने के भाव में आई नरमी हालिया तेजी के बाद सोने की कीमतों में मुनाफावसूली का असर दिखाई दिया। अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी Gold Rate में कमजोरी देखी गई। अमेरिकी महंगाई के आंकड़ों और ब्याज दरों को लेकर बाजार की उम्मीदें फिलहाल कीमती धातुओं की दिशा तय करने वाले प्रमुख कारकों में शामिल हैं। भारत में सोने की कीमत केवल अंतरराष्ट्रीय बाजार से तय नहीं होती। डॉलर के मुकाबले रुपये की स्थिति, आयात लागत, स्थानीय मांग और अंतरराष्ट्रीय Gold Rate भी घरेलू भाव पर असर डालते हैं। 24 कैरेट Gold Rate कितना है? गुरुवार को 24 कैरेट सोने का भाव करीब ₹1.52 लाख प्रति 10 ग्राम के आसपास रहा। हालांकि, अलग-अलग शहरों और ज्वेलर्स के यहां कीमत कुछ ऊपर-नीचे हो सकती है। आभूषण खरीदते समय यह भी ध्यान रखें कि बाजार में दिखाई जाने वाली सोने की कीमत और दुकान पर मिलने वाली अंतिम कीमत एक जैसी नहीं होती। GST, Making Charges और अन्य शुल्क जुड़ने के बाद बिल की राशि बढ़ सकती है। 22 कैरेट और 18 कैरेट Gold का क्या भाव? सोने की कीमत उसकी शुद्धता के हिसाब से बदलती है। इसलिए सोना खरीदते समय सिर्फ प्रति 10 ग्राम कीमत देखना काफी नहीं है। कैरेट और हॉलमार्क जरूर जांचें। Silver Price Today: चांदी भी ₹3,414 सस्ती सोने के साथ चांदी के बाजार में भी दबाव रहा। गुरुवार को चांदी करीब ₹3,414 प्रति किलो टूटकर ₹2.34 लाख प्रति किलो के आसपास पहुंच गई। अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी Silver Price में कमजोरी देखने को मिली। चांदी की कीमत पर औद्योगिक मांग, डॉलर की चाल और वैश्विक आर्थिक परिस्थितियों का असर पड़ता है। चांदी की कीमत में आई यह गिरावट उन खरीदारों के लिए अहम है, जो निवेश के साथ-साथ सिक्के, बर्तन या अन्य चांदी के सामान खरीदने की योजना बना रहे हैं। क्यों बदलते रहते हैं Gold-Silver Rates? सोने और चांदी की कीमतें किसी एक वजह से तय नहीं होतीं। अंतरराष्ट्रीय बाजार, डॉलर, ब्याज दरों की उम्मीद, भू-राजनीतिक परिस्थितियां और घरेलू मांग जैसे कई फैक्टर मिलकर भाव को प्रभावित करते हैं। यही वजह है कि सुबह और शाम के बीच भी Gold-Silver Rate में बदलाव देखने को मिल सकता है। खरीदारी करने वालों के लिए जरूरी बात अगर आप आज सोना या चांदी खरीदने की सोच रहे हैं तो केवल बाजार में चल रहे रेट पर भरोसा न करें। खरीदारी से पहले BIS Hallmark, कैरेट, प्रति ग्राम कीमत, Making Charges और GST की जानकारी जरूर लें। एक दिन की गिरावट देखकर यह मान लेना भी ठीक नहीं होगा कि कीमतें अब लगातार नीचे ही जाएंगी। कीमती धातुओं का बाजार तेजी से बदलता है, इसलिए खरीदारी का फैसला अपनी जरूरत और बजट के हिसाब से करना बेहतर है। Gold-Silver Price पर नजर क्यों जरूरी? सोना और चांदी भारतीय परिवारों के लिए सिर्फ निवेश नहीं, बल्कि भावनाओं और परंपराओं से भी जुड़े हैं। ऐसे में कुछ रुपये की गिरावट भी बड़ी खरीदारी करने वालों के लिए मायने रखती है। फिलहाल बाजार में आई नरमी ने खरीदारों को जरूर थोड़ी राहत दी है, लेकिन आगे के भाव पर नजर बनाए रखना जरूरी होगा। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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मेरठ हत्याकांड: मुस्कान और साहिल को फांसी की सजा, पति सौरभ की हत्या के मामले में कोर्ट का फैसला

मेरठ। उत्तर प्रदेश के मेरठ में सौरभ राजपूत हत्याकांड में अदालत ने उनकी पत्नी मुस्कान रस्तोगी और उसके प्रेमी साहिल को फांसी की सजा सुनाई है। दोनों पर सौरभ की हत्या करने का आरोप साबित होने के बाद यह फैसला सुनाया गया। सजा सुनाते हुए जज ने वारदात को नृशंस हत्याकांड बताया और कहा कि इसमें माफी स्वीकार नहीं होगी। वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से कोर्ट में पेश हुए मुस्कान और साहिल सजा सुनाए जाने से पहले जेल में बंद मुस्कान और साहिल को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए अदालत से जोड़ा गया। इस दौरान दोनों रोने लगे। जज ने मुस्कान से पूछा कि पति सौरभ राजपूत की हत्या के मामले में दोषी ठहराए जाने के बाद वह क्या सजा चाहती है। इस पर मुस्कान ने कहा, “मेरी बच्चियों का ख्याल रखा जाए।” इसके बाद वह खामोश हो गई। वहीं, साहिल से भी यही सवाल पूछा गया, लेकिन उसने कोई जवाब नहीं दिया। सजा के ऐलान के बाद रो पड़ीं सौरभ की मां अदालत के फैसले के बाद सौरभ राजपूत की मां भावुक हो गईं और रो पड़ीं। उन्होंने कहा कि उन्हें शांति से न्याय मिल गया। इस मामले में सजा का ऐलान सौरभ के परिवार के लिए लंबे इंतजार के बाद आया है। 3 मार्च 2025 को हुई थी सौरभ की हत्या सौरभ राजपूत की हत्या 3 मार्च 2025 को हुई थी। मामले में सामने आए विवरण के अनुसार, हत्या के बाद शव के पांच टुकड़े किए गए और उन्हें नीले ड्रम में भर दिया गया था। इस वारदात ने पूरे देश में व्यापक चर्चा बटोरी थी। अदालत ने मामले में मुस्कान रस्तोगी और साहिल को दोषी ठहराते हुए मृत्युदंड की सजा सुनाई है।

इंदौर में प्लॉट बेचने के नाम पर 7.80 लाख की ठगी का आरोप, ब्रोकर समेत दो पर FIR

शहर के एरोड्रम थाना क्षेत्र में प्लॉट बेचने के नाम पर धोखाधड़ी का मामला सामने आया है। आरोप है कि प्लॉट का सौदा करने के बाद ब्रोकर और प्लॉट मालिक ने फरियादी से 7 लाख 80 हजार रुपये ले लिए, लेकिन न तो प्लॉट की रजिस्ट्री कराई और न ही कब्जा दिया। शिकायत की जांच के बाद एरोड्रम थाना पुलिस ने नंदकिशोर मनावत और धर्मेंद्र ठाकुर के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर ली है। 9.30 लाख में तय हुआ था प्लॉट का सौदा पुलिस के मुताबिक, नंदबाग कॉलोनी निवासी विजय चौहान ने शिकायत में बताया कि उन्होंने नंदबाग में एक प्लॉट का सौदा 9 लाख 30 हजार रुपये में तय किया था। इस संबंध में एग्रीमेंट भी किया गया था। फरियादी ने आरोप लगाया कि उन्होंने नकद और ऑनलाइन माध्यम से कुल 7 लाख 80 हजार रुपये का भुगतान कर दिया, लेकिन इसके बावजूद उन्हें प्लॉट का कब्जा नहीं मिला और रजिस्ट्री भी नहीं कराई गई। ब्रोकर ने परिचित बताकर कराया था सौदा विजय चौहान के अनुसार, धर्मेंद्र ठाकुर ने उन्हें बताया था कि नंदकिशोर मनावत उसका परिचित है और वह अपना प्लॉट बेचना चाहता है। इसके बाद धर्मेंद्र ने सौदे में ब्रोकर की भूमिका निभाई और इसके बदले 10 हजार रुपये लिए। शिकायतकर्ता का आरोप है कि भुगतान के बाद जब उन्होंने रजिस्ट्री कराने और प्लॉट का कब्जा देने की मांग की, तो उन्हें लगातार टालमटोल का सामना करना पड़ा। 25 से ज्यादा केस होने की धमकी देने का आरोप फरियादी ने आरोप लगाया कि रजिस्ट्री और कब्जे के लिए दबाव बनाने पर धर्मेंद्र ठाकुर ने धमकी दी। शिकायत के मुताबिक, उसने कहा कि उसके खिलाफ 25 से ज्यादा मामले चल रहे हैं। साथ ही, उसके या नंदकिशोर मनावत के पास दोबारा आने पर अंजाम भुगतने की चेतावनी भी दी। 2.80 लाख रुपये लौटाए, 5 लाख बाकी होने का दावा विजय चौहान के मुताबिक, पुलिस में शिकायत करने की बात कहने के बाद नंदकिशोर मनावत ने 2 लाख 50 हजार रुपये नकद और 30 हजार रुपये ऑनलाइन वापस किए। हालांकि, फरियादी का आरोप है कि बाकी 5 लाख रुपये लौटाने से इनकार कर दिया गया। इसके बाद विजय चौहान ने पुलिस अधिकारियों से शिकायत की। जांच के बाद एरोड्रम थाना पुलिस ने नंदकिशोर मनावत और धर्मेंद्र ठाकुर के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर आगे की कार्रवाई शुरू कर दी है। मामले में लगाए गए आरोपों की पुष्टि न्यायिक प्रक्रिया के तहत होनी बाकी है।

SIR के खिलाफ प्रदर्शन करने वाले छात्रों से मिले राहुल गांधी, दिल्ली पुलिस पर मारपीट के आरोप

नई दिल्ली। SIR के खिलाफ दिल्ली में प्रदर्शन करने वाले छात्रों ने बुधवार को कांग्रेस नेता राहुल गांधी से मुलाकात की। इसके बाद राहुल गांधी और छात्रों ने संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस की, जिसमें प्रदर्शनकारियों ने दिल्ली पुलिस पर मारपीट और हिरासत के दौरान दुर्व्यवहार करने के आरोप लगाए। प्रेस कॉन्फ्रेंस में NSUI के छात्रों, कार्यकर्ताओं और कंटेंट क्रिएटर्स ने अपने साथ हुई कथित घटनाओं की जानकारी दी। प्रदर्शनकारियों ने पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए मामले में जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की। छात्रा ने कान पर चोट लगने का लगाया आरोप प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान एक छात्रा ने आरोप लगाया कि हिरासत के दौरान पुलिसकर्मी ने उसके प्राइवेट पार्ट पर लात मारी। वहीं, दिल्ली विश्वविद्यालय की छात्रा अदिरा ने दावा किया कि पुलिस की पिटाई के कारण उसके एक कान की सुनने की क्षमता चली गई। प्रदर्शनकारियों ने हिरासत के दौरान कथित ज्यादती और मारपीट से जुड़े अपने अनुभव साझा किए। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि की जानकारी सामने नहीं आई है। RSS और भाजपा से जुड़े लोगों के कहने पर हिरासत का आरोप एक अन्य प्रदर्शनकारी ने आरोप लगाया कि पुलिस RSS और भाजपा से जुड़े लोगों के कहने पर प्रदर्शनकारियों को हिरासत में ले रही थी। यह आरोप भी प्रदर्शनकारियों की ओर से लगाया गया है। राहुल गांधी ने सबूत सुरक्षित रखने को कहा राहुल गांधी ने छात्रों से घटनाओं से जुड़े वीडियो और अन्य सबूत सुरक्षित रखने को कहा। उन्होंने कहा कि इन सबूतों के आधार पर पुलिसकर्मियों से लेकर मुख्य चुनाव आयुक्त तक, जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की जाएगी। प्रदर्शनकारियों के आरोपों और पुलिस की कार्रवाई को लेकर आगे क्या कदम उठाए जाते हैं, इस पर नजर रहेगी।

बांग्लादेश टेस्ट सीरीज से बाहर हुए शाई होप और अल्जारी जोसेफ, केविन विकहम को पहली बार मिला मौका

क्रिकेट न्यूज। वेस्टइंडीज को बांग्लादेश के खिलाफ आगामी दो टेस्ट मैचों की सीरीज से पहले बड़ा झटका लगा है। टीम के बल्लेबाज शाई होप और तेज गेंदबाज अल्जारी जोसेफ सीरीज से बाहर हो गए हैं। क्रिकेट वेस्टइंडीज (CWI) ने 23 वर्षीय टॉप ऑर्डर बल्लेबाज केविन विकहम को पहली बार टेस्ट टीम में शामिल किया है। ऑलराउंडर कीमो पॉल को भी टीम में जगह मिली है। CWI के मुताबिक, मेडिकल जांच और विशेषज्ञों की सलाह के बाद अल्जारी जोसेफ को सीरीज से हटाने का फैसला लिया गया। बोर्ड उनके कार्यभार को नियंत्रित कर चोट के जोखिम को कम करना चाहता है। वहीं, तीनों फॉर्मेट में लगातार खेलने के बाद शाई होप को आराम दिया गया है। चोट के खतरे को देखते हुए जोसेफ को आराम क्रिकेट वेस्टइंडीज ने बताया कि अल्जारी जोसेफ को टीम से बाहर रखने का फैसला उनकी सहमति से लिया गया है। बोर्ड के अनुसार, टेस्ट क्रिकेट में तेज गेंदबाजों को लंबे स्पेल में लगातार गेंदबाजी करनी पड़ती है। इससे छोटे फॉर्मेट की तुलना में कार्यभार और चोट का जोखिम बढ़ सकता है। इसी को ध्यान में रखते हुए जोसेफ के वर्कलोड को कम करने का फैसला किया गया है, ताकि उनके स्वास्थ्य और फिटनेस का ध्यान रखा जा सके। शाई होप को भी दिया गया आराम CWI ने कहा कि शाई होप तीनों फॉर्मेट में लगातार खेल रहे थे। ऐसे में उनके कार्यभार और स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए उन्हें टेस्ट सीरीज से आराम दिया गया है। बोर्ड का यह फैसला फरवरी 2027 में होने वाले वनडे वर्ल्ड कप क्वालिफायर्स को ध्यान में रखकर भी लिया गया है। टीम प्रबंधन चाहता है कि खिलाड़ी आगामी महत्वपूर्ण मुकाबलों के लिए फिट रहें। केविन विकहम को पहली बार टेस्ट टीम में मौका शाई होप की गैरमौजूदगी में 23 वर्षीय टॉप ऑर्डर बल्लेबाज केविन विकहम को पहली बार टेस्ट टीम में शामिल किया गया है। इसके अलावा ऑलराउंडर कीमो पॉल को भी टीम में जगह मिली है। अब देखना होगा कि बांग्लादेश की घरेलू परिस्थितियों में वेस्टइंडीज की टीम नए संयोजन के साथ कैसा प्रदर्शन करती है। कोच डैरेन सैमी ने सीरीज जीत को बताया अहम वेस्टइंडीज के मुख्य कोच डैरेन सैमी ने कहा कि वर्ल्ड टेस्ट चैंपियनशिप के मौजूदा चक्र की शुरुआत में टीम ने कुछ लक्ष्य तय किए थे। इनमें टेस्ट रैंकिंग के ऊपरी आधे हिस्से में जगह बनाना भी शामिल है। उन्होंने कहा कि बांग्लादेश के खिलाफ सीरीज जीतने से टीम अपने लक्ष्य के करीब पहुंच सकती है। सैमी के मुताबिक, बांग्लादेश को उसकी घरेलू परिस्थितियों में हराना चुनौतीपूर्ण होगा, लेकिन टीम इसके लिए तैयार है। 28 अक्टूबर से शुरू होगा पहला टेस्ट बांग्लादेश और वेस्टइंडीज के बीच दो टेस्ट मैचों की सीरीज खेली जाएगी। पहला टेस्ट 28 अक्टूबर से ढाका में शुरू होगा, जबकि दूसरा टेस्ट 5 नवंबर से सिलहट में खेला जाएगा।

IMF ने बढ़ाया भारत की GDP ग्रोथ का अनुमान, 2026 और 2027 में 7% विकास दर रहने की उम्मीद

नई दिल्ली। अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) ने साल 2026 के लिए भारत की आर्थिक विकास दर का अनुमान 6.4% से बढ़ाकर 7% कर दिया है। वैश्विक तनाव, आर्थिक सुस्ती और कच्चे तेल की ऊंची कीमतों के बावजूद भारतीय अर्थव्यवस्था की मजबूती ने अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं का ध्यान खींचा है। मजबूत घरेलू मांग और सर्विसेज सेक्टर के बेहतर प्रदर्शन को भारत की तेज विकास दर की प्रमुख वजह माना गया है। IMF ने अक्टूबर 2026 की अपनी वर्ल्ड इकोनॉमिक आउटलुक रिपोर्ट में भारत की विकास संभावनाओं को सकारात्मक बताया है। रिपोर्ट के अनुसार, ऊर्जा आयात पर निर्भर कई उभरती अर्थव्यवस्थाएं जहां दबाव का सामना कर रही हैं, वहीं भारत की आर्थिक गतिविधियों में मजबूती बनी हुई है। 2027 में भी 7% ग्रोथ का अनुमान IMF ने 2026 के लिए भारत की विकास दर के अनुमान में जुलाई के मुकाबले 0.6 प्रतिशत अंक और अप्रैल के मुकाबले 0.5 प्रतिशत अंक की बढ़ोतरी की है। वहीं, 2027 के लिए भी विकास दर का अनुमान बढ़ाकर 7% कर दिया गया है। दिए गए आंकड़ों के मुताबिक, 2027 का अनुमान जुलाई के मुकाबले 0.3 प्रतिशत अंक और अप्रैल के मुकाबले 0.5 प्रतिशत अंक अधिक है। इससे संकेत मिलता है कि वैश्विक आर्थिक चुनौतियों के बीच भी भारत में विकास की संभावनाओं को लेकर उम्मीद बनी हुई है। IMF से पहले विश्व बैंक और आर्थिक सहयोग एवं विकास संगठन (OECD) जैसी अंतरराष्ट्रीय संस्थाएं भी भारत की विकास दर के अनुमान में बढ़ोतरी कर चुकी हैं। चीन की सुस्ती के बीच भारत पर नजर रिपोर्ट के मुताबिक, एशिया की अर्थव्यवस्थाओं में मजबूती देखने को मिल रही है। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) से जुड़ी गतिविधियों में तेजी ने भी वैश्विक आर्थिक परिदृश्य को प्रभावित किया है। भारत और चीन एशिया की आर्थिक गतिविधियों में अहम भूमिका निभा रहे हैं, हालांकि दोनों देशों की विकास संभावनाओं में अंतर दिखाई दे रहा है। IMF के अनुमान के अनुसार, चीन की विकास दर 2026 में 4.5% और 2027 में 4% रह सकती है। वैश्विक तनाव और ऊर्जा की ऊंची कीमतों को चीन की आर्थिक वृद्धि के सामने चुनौतियों में शामिल किया गया है। दुनिया की आर्थिक विकास दर पर दबाव IMF के मुताबिक, 2028 से 2031 के बीच वैश्विक अर्थव्यवस्था औसतन 3.2% की दर से बढ़ सकती है। यह 2000 से 2019 के बीच महामारी से पहले दर्ज औसत 3.7% की विकास दर से कम है। रिपोर्ट में वैश्विक तनाव, ऊर्जा बाजार में अनिश्चितता और ऊर्जा आयात पर निर्भर उभरती अर्थव्यवस्थाओं पर पड़ने वाले दबाव को आर्थिक विकास के लिए चुनौती बताया गया है। ऐसे माहौल में भारत की अनुमानित विकास दर अपेक्षाकृत मजबूत दिखाई देती है। मजबूत घरेलू मांग और जनसांख्यिकी से मिल रहा सहारा भारत की आर्थिक मजबूती के पीछे बढ़ता घरेलू बाजार, मजबूत मांग, अनुकूल जनसांख्यिकी और सुधारों को अहम कारक माना गया है। सर्विसेज सेक्टर का बेहतर प्रदर्शन भी विकास दर को सहारा दे रहा है। हालांकि, बेहतर अनुमान के बावजूद चुनौतियां खत्म नहीं हुई हैं। कच्चे तेल की ऊंची कीमतें भारत के आयात बिल और महंगाई पर दबाव डाल सकती हैं। इसके अलावा, अंतरराष्ट्रीय तनाव और वैश्विक मांग में कमजोरी का असर भारतीय अर्थव्यवस्था पर भी पड़ सकता है।

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