बांग्लादेश (Bangladesh) में हिंदू अल्पसंख्यकों की सुरक्षा एक बार फिर सवालों के घेरे में है। नरसिंदी ज़िले के चारसिंदूर बाज़ार में 40 वर्षीय हिंदू किराना दुकानदार सरत चक्रवर्ती मणि की नृशंस हत्या ने पूरे इलाके को हिला कर रख दिया है। यह घटना सिर्फ एक व्यक्ति की मौत नहीं, बल्कि उस डर की तस्वीर है जो आज बांग्लादेश के कई हिंदू परिवारों के मन में बैठ चुका है। दुकान पर हमला, अस्पताल में तोड़ा दम स्थानीय लोगों के मुताबिक, 5 जनवरी की रात सरत चक्रवर्ती अपनी रोज़ की तरह दुकान चला रहे थे। तभी अज्ञात हमलावर धारदार हथियारों के साथ आए और उन पर हमला कर दिया। गंभीर हालत में उन्हें अस्पताल ले जाया गया, लेकिन डॉक्टर उनकी जान नहीं बचा सके। सरत को इलाके में एक शांत, मेहनती और किसी से विवाद न रखने वाले व्यक्ति के रूप में जाना जाता था। यही बात उनकी हत्या को और भी चौंकाने वाली बनाती है। 18 दिनों में 6 हिंदुओं की हत्या, चिंता बढ़ी मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, यह कोई अकेली घटना नहीं है। पिछले 18 दिनों में बांग्लादेश में हिंदू समुदाय से जुड़े 6 लोगों की हत्या हो चुकी है। इनमें से दो हत्याएँ सिर्फ 24 घंटों के भीतर अलग-अलग ज़िलों में हुईं, जिनमें नरसिंदी और जशोर शामिल हैं। लगातार हो रही इन घटनाओं ने यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या बांग्लादेश में अल्पसंख्यक अब खुद को सुरक्षित महसूस कर पा रहे हैं? हिंदू समुदाय में खौफ, बदल रही रोज़मर्रा की ज़िंदगी इन हत्याओं के बाद स्थानीय हिंदू समुदाय में डर साफ़ दिखाई दे रहा है। कई दुकानदार अब जल्दी दुकान बंद कर रहे हैं, कुछ लोग अकेले बाहर निकलने से बच रहे हैं। परिवारों में यह चिंता बढ़ रही है कि अगला नंबर किसका होगा। एक स्थानीय निवासी ने कहा,“हम यहीं पैदा हुए, यहीं पले-बढ़े, लेकिन आज अपने ही देश में डर लग रहा है।” प्रशासन पर सवाल, जवाब की तलाश अब तक कई मामलों में हमलावरों की पहचान नहीं हो पाई है। इससे कानून-व्यवस्था को लेकर चिंता और गहरी हो गई है। लोगों का कहना है कि अगर दोषियों को सख़्त सज़ा नहीं मिली, तो ऐसे अपराध और बढ़ सकते हैं। मानवाधिकार संगठनों की अपील मानवाधिकार कार्यकर्ताओं ने इन घटनाओं को गंभीर बताते हुए बांग्लादेश सरकार से अल्पसंख्यकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग की है। उनका कहना है कि सिर्फ बयान नहीं, ज़मीन पर ठोस कार्रवाई ज़रूरी है। Sarat Chakraborty Mani की हत्या एक चेतावनी है। यह बताती है कि धार्मिक अल्पसंख्यकों के बीच असुरक्षा की भावना कितनी गहरी हो चुकी है। अगर समय रहते हालात नहीं संभाले गए, तो इसका असर पूरे समाज की शांति और भरोसे पर पड़ेगा। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
Read more