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Supreme Court - कुत्तों में वायरस, बीमारी लाइलाज; बच्चों पर हमले का जिम्मेदार कौन?

Supreme Court – कुत्तों में वायरस, बीमारी लाइलाज; बच्चों पर हमले का जिम्मेदार कौन?

देश में बढ़ते आवारा कुत्तों के हमलों को लेकर Supreme Court ने गंभीर चिंता जताई है। अदालत ने साफ कहा कि कई कुत्तों में खतरनाक वायरस पाए जा रहे हैं, जिनसे फैलने वाली बीमारियां इलाज से बाहर हो सकती हैं। खासतौर पर बच्चों पर हो रहे हमलों को लेकर कोर्ट ने सख्त सवाल पूछे हैं। सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि अगर कोई व्यक्ति सड़क पर रहने वाले कुत्तों को खाना खिला रहा है, तो उसे उनकी जिम्मेदारी भी लेनी चाहिए। कोर्ट ने टिप्पणी की कि ऐसे लोग कुत्तों को अपने घर ले जाएं या फिर उनकी सुरक्षा और निगरानी की पूरी व्यवस्था करें। अदालत ने पूछा,“जब कोई बच्चा आवारा कुत्तों के हमले में घायल होता है या जान गंवाता है, तो इसकी जिम्मेदारी कौन लेगा?” कोर्ट ने यह भी कहा कि पशु प्रेम अपनी जगह सही है, लेकिन जन सुरक्षा उससे भी ज्यादा जरूरी है। सड़कें सिर्फ कुत्तों की नहीं, बल्कि आम लोगों—खासतौर पर बच्चों, बुजुर्गों और महिलाओं—की भी हैं। सुप्रीम कोर्ट ने संकेत दिए कि अगर हालात नहीं सुधरे, तो इस मामले में सख्त दिशा-निर्देश जारी किए जा सकते हैं। साथ ही राज्य सरकारों और नगर निगमों से भी आवारा कुत्तों की संख्या नियंत्रित करने को लेकर जवाब मांगा गया है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Bangladesh

Bangladesh Hindu Murder बांग्लादेश में हिंदुओं पर बढ़ती हिंसा डर के साये में जी रहा अल्पसंख्यक समाज

बांग्लादेश (Bangladesh) में अल्पसंख्यक हिंदू समुदाय के लिए बीते कुछ हफ्ते बेहद डरावने रहे हैं। अलग-अलग इलाकों से सामने आ रही हत्या और हमलों की खबरें सिर्फ आंकड़े नहीं हैं—ये उन परिवारों की टूटती ज़िंदगियों की कहानी हैं, जिनके घरों से अचानक किसी अपने की आवाज़ हमेशा के लिए खामोश हो गई। एक और जान गई, एक और घर उजड़ गया हाल में एक युवा हिंदू ऑटो-रिक्शा चालक की हत्या ने पूरे इलाके को हिला दिया। रोज़ की तरह काम करके घर लौट रहा यह युवक अपने परिवार के लिए रोज़ी-रोटी जुटा रहा था। रास्ते में उस पर हमला हुआ, उसे चाकू मारा गया और उसकी जान ले ली गई। उसका वाहन भी लूट लिया गया। यह सिर्फ एक अपराध नहीं, बल्कि उस असुरक्षा का प्रतीक है जिसमें आज कई अल्पसंख्यक परिवार जी रहे हैं। उसके बूढ़े माता-पिता, पत्नी और बच्चों के लिए अब हर सुबह एक सवाल लेकर आती है—“क्या हम सुरक्षित हैं?” यह कोई एक घटना नहीं यह दुखद मामला अकेला नहीं है। हाल के दिनों में बांग्लादेश के अलग-अलग हिस्सों से हिंदू नागरिकों पर हमले, मारपीट और हत्याओं की खबरें सामने आई हैं। कभी किसी दुकानदार पर धारदार हथियार से हमला होता है, कभी किसी युवक को भीड़ घेर लेती है, तो कहीं किसी को सिर्फ उसकी पहचान के कारण निशाना बनाया जाता है। इन घटनाओं की वजहें अलग-अलग बताई जाती हैं—कभी लूट, कभी निजी रंजिश, कभी अफ़वाहें। लेकिन पीड़ित परिवारों के लिए सच्चाई एक ही है: उनके अपने अब लौटकर नहीं आएंगे। डर के साये में जीता एक समुदाय हिंदू मोहल्लों में आज डर साफ महसूस किया जा सकता है। लोग रात में बाहर निकलने से कतराते हैं, दुकानें जल्दी बंद हो जाती हैं और बच्चे भी सहमे रहते हैं। त्योहारों और धार्मिक आयोजनों, जो कभी खुशियों से भरे होते थे, अब सुरक्षा की चिंता के बीच मनाए जाते हैं। स्थानीय समुदायों का कहना है कि उन्हें सिर्फ न्याय ही नहीं, बल्कि भरोसा भी चाहिए—कि कानून सभी के लिए बराबर है और किसी को उसकी आस्था के कारण निशाना नहीं बनाया जाएगा। प्रशासन और प्रतिक्रियाएँ इन घटनाओं पर पुलिस जांच की बात कह रही है और कुछ मामलों में कार्रवाई का दावा भी किया गया है। साथ ही, मानवाधिकार समूहों और अल्पसंख्यक संगठनों ने सरकार से सख़्त कदम उठाने की मांग की है ताकि दोषियों को सज़ा मिले और आगे ऐसी घटनाएं न हों। भारत और दूसरे देशों में भी इन खबरों को लेकर चिंता जताई गई है और बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों की सुरक्षा पर सवाल उठे हैं। क्यों ज़रूरी है यह बात उठाना यह मुद्दा सिर्फ एक देश या एक समुदाय तक सीमित नहीं है। जब कहीं भी किसी इंसान को उसकी पहचान के कारण हिंसा का शिकार होना पड़ता है, तो वह पूरी इंसानियत के लिए एक चेतावनी होती है। बांग्लादेश (Bangladesh) की विविधता उसकी ताकत रही है—हिंदू, मुस्लिम, बौद्ध, ईसाई सभी ने मिलकर इस देश को बनाया है। इस साझी विरासत को बचाने के लिए ज़रूरी है कि नफ़रत और डर की जगह कानून, इंसाफ़ और इंसानियत को आगे रखा जाए। आज Bangladesh के कई हिंदू परिवार अपने घरों में यह दुआ कर रहे हैं कि अगली सुबह शांति के साथ आए। उनकी मांग बहुत साधारण है—जीने का हक़, बिना डर के, बिना भेदभाव के। यह सिर्फ एक समुदाय की नहीं, बल्कि पूरे समाज की परीक्षा है कि वह हिंसा के सामने खड़ा होता है या चुप रहता है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Donald Trump

Donald Trump का India Visit अगले 1-2 साल में संभव भारत बनेगा Pax Silica का सदस्य

अमेरिका के नए राजदूत सर्जियो गोर ने आशा जताई है कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) अगले एक-दो साल में भारत (India) का दौरा करेंगे। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और ट्रंप के बीच दोस्ताना संबंध द्विपक्षीय सहयोग को मजबूत करते हैं और यह दौरा भारत-अमेरिका संबंधों को और गहरा कर सकता है। भारत को मिलेगा Pax Silica Group का हिस्सा राजदूत गोर ने यह भी बताया कि भारत को अमेरिकी नेतृत्व वाले Pax Silica समूह में शामिल होने का निमंत्रण मिलेगा। यह समूह सिलिकॉन और सेमीकंडक्टर सप्लाई चेन, महत्वपूर्ण खनिज, एआई और तकनीकी सहयोग के क्षेत्र में रणनीतिक साझेदारी को बढ़ावा देता है।भारत के शामिल होने के बाद यह समूह जापान, दक्षिण कोरिया, यूके और इज़राइल जैसे देशों के साथ मिलकर काम करेगा। औपचारिक घोषणा अगले महीने होने की उम्मीद है। व्यापार वार्ता में नई उम्मीदें गोर ने कहा कि भारत-अमेरिका व्यापार वार्ता (India-US Trade Talks) जल्द ही फिर से शुरू होगी, और 13 जनवरी को नई बातचीत आयोजित होगी। उन्होंने विश्वास जताया कि दोनों देशों के बीच आर्थिक मतभेदों का समाधान निकाला जाएगा।उनके इस बयान से भारतीय शेयर बाजारों में तेजी आई और सेंसेक्स (Sensex) और निफ्टी (Nifty) में सकारात्मक उछाल देखा गया। अमेरिका-भारत रिश्ते: सिर्फ व्यापार तक सीमित नहीं सर्जियो गोर ने यह भी कहा कि भारत-अमेरिका सहयोग केवल व्यापार तक नहीं, बल्कि सुरक्षा, ऊर्जा, तकनीक, आतंकवाद विरोधी प्रयास, शिक्षा और स्वास्थ्य तक फैला है। उन्होंने इसे इस सदी की सबसे महत्वपूर्ण अंतरराष्ट्रीय साझेदारी बताया। ट्रंप का भारत दौरा अगले 1-2 साल में संभव है। भारत Pax Silica समूह का हिस्सा बनेगा। व्यापार वार्ता में सुधार और बाजारों में सकारात्मक प्रभाव। द्विपक्षीय सहयोग केवल आर्थिक नहीं, बल्कि तकनीक और सुरक्षा जैसे कई क्षेत्रों में भी है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Mamata Banerjee

ED vs Mamata Banerjee Supreme Court में I-PAC Raid विवाद पर नया मोड़

पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी (Mamata Banerjee) और राज्य पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों के खिलाफ Enforcement Directorate (ED) ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका (Writ Petition) दायर की है। ED का आरोप है कि मुख्यमंत्री और पुलिस अधिकारियों ने I-PAC जांच के दौरान ED अधिकारियों को धमकाया और उनकी जांच में बाधा डाली। याचिका में ED के अधिकारियों निशांत कुमार, विक्रम अहलावत और प्रशांत चंडिला ने कहा है कि जब वे कोलकाता में छानबीन (Search & Seizure) कर रहे थे, तब मुख्यमंत्री और वरिष्ठ पुलिस अधिकारी अचानक मौके पर पहुंचे। ED का दावा है कि इस दौरान उनके दस्तावेज, लैपटॉप और मोबाइल फोन जबरन ले लिए गए, जिससे मामले की जांच प्रभावित हुई। ED ने सुप्रीम कोर्ट से अधिकारियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने और स्वतंत्र जांच कराने के निर्देश देने की मांग की है। साथ ही, ममता बनर्जी और अन्य अधिकारियों के खिलाफ FIR दर्ज करने की अपील भी की गई है। मामले की पृष्ठभूमि (Background) यह विवाद I-PAC और कोयला हेराफेरी से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले से संबंधित है। पहले ED ने इसे कोलकाता हाई कोर्ट में उठाया था, लेकिन सुनवाई स्थगित (Adjourned) कर दी गई। इसके बाद पश्चिम बंगाल सरकार ने Supreme Court में Caveat दाखिल किया ताकि कोर्ट किसी भी आदेश से पहले उनकी दलील सुने। राजनीतिक प्रतिक्रियाएँ (Political Reactions) यह मामला अब Supreme Court में विचाराधीन है और आने वाले दिनों में सुनवाई होने की उम्मीद है। I-PAC raid और ED vs Mamata Banerjee की यह लड़ाई न केवल राजनीतिक दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण है, बल्कि कानूनी और संवैधानिक (Legal & Constitutional) दृष्टि से भी ध्यान आकर्षित कर रही है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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PM Modi

PM Modi in Gujarat सोमनाथ की आस्था और Rajkot का विकास एक साथ

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Modi) का तीन दिन का गुजरात दौरा सिर्फ एक राजनीतिक यात्रा नहीं था, बल्कि यह भारत की आत्मा, उसकी विरासत और भविष्य की दिशा को एक साथ दिखाने वाला सफर बन गया।सोमनाथ के पवित्र तट से लेकर राजकोट के निवेश मंच तक, हर पड़ाव पर भारत के गौरव और विकास की झलक साफ दिखाई दी। Somnath Swabhiman Parv: इतिहास जो आज भी जीवित है गिर सोमनाथ में आयोजित ‘सोमनाथ स्वाभिमान पर्व’ इस यात्रा का सबसे भावनात्मक और ऐतिहासिक हिस्सा रहा।प्रधानमंत्री मोदी ने यहां शौर्य यात्रा का नेतृत्व किया, जिसमें घोड़ों का जुलूस, सांस्कृतिक प्रस्तुतियां और भव्य ड्रोन शो शामिल था। सोमनाथ मंदिर केवल एक तीर्थ नहीं, बल्कि भारत की जिजीविषा का प्रतीक है। अपने संबोधन में पीएम मोदी ने कहा कि— सोमनाथ की कहानी हार की नहीं, बल्कि हर बार फिर उठ खड़े होने की कहानी है। उन्होंने याद दिलाया कि कैसे महमूद गजनवी और औरंगजेब जैसे आक्रांताओं के हमलों के बावजूद यह मंदिर बार-बार पुनर्निर्मित हुआ और आज भी उतनी ही मजबूती से खड़ा है।यह संदेश सिर्फ अतीत के लिए नहीं, बल्कि आज के भारत के आत्मविश्वास को भी दर्शाता है। Rajkot में Vibrant Gujarat Regional Conference सोमनाथ से सीधे राजकोट पहुंचकर प्रधानमंत्री मोदी ने Vibrant Gujarat Regional Conference (Kutch–Saurashtra) का उद्घाटन किया।यह मंच गुजरात की निवेश क्षमता, उद्योग और भविष्य की अर्थव्यवस्था को दुनिया के सामने रखने के लिए था। पीएम मोदी (PM Modi) ने बताया कि कच्छ और सौराष्ट्र अब भारत के ग्रीन एनर्जी हब बन रहे हैं।कच्छ में बन रहा 30 GW का हाइब्रिड रिन्यूएबल एनर्जी पार्क दुनिया के सबसे बड़े प्रोजेक्ट्स में से एक होगा। उन्होंने कहा कि गुजरात अब सिर्फ उद्योगों का राज्य नहीं, बल्किग्रीन एनर्जी, मैन्युफैक्चरिंग, MSME और स्टार्टअप्स का नया सेंटर बन चुका है। Investment, Jobs और Youth की नई दिशा राजकोट सम्मेलन में निवेशकों और उद्योगपतियों को संबोधित करते हुए पीएम मोदी ने कहा किगुजरात में अब इंटरनेशनल एजुकेशन हब, स्किल यूनिवर्सिटी और डिफेंस लॉजिस्टिक्स ट्रेनिंग पर खास फोकस किया जा रहा है। इसका सीधा फायदा युवाओं को मिलेगा —नौकरियां, स्टार्टअप्स और ग्लोबल लेवल पर काम करने के मौके। India Growth Story में Gujarat की बड़ी भूमिका PM Modi ने कहा कि भारत आज दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती बड़ी अर्थव्यवस्था है और गुजरात इस विकास की रीढ़ बना हुआ है।पोर्ट, इंडस्ट्री, ग्रीन एनर्जी और इंफ्रास्ट्रक्चर के दम पर गुजरात भारत को Viksit Bharat 2047 की ओर ले जा रहा है। सोमनाथ से राजकोट तक: एक भारत की दो तस्वीरें इस पूरे दौरे में दो भारत एक साथ दिखाई दिए— यही PM Modi की गुजरात यात्रा की असली पहचान रही —जहां विरासत भी है और विज़न भी। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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PSLV-C62

ISRO PSLV-C62 Anvesha Mission तीसरे Stage की गड़बड़ी

आज सुबह श्रीहरिकोटा से जब ISRO का PSLV-C62 आसमान में उठा, तो देश की धड़कनें उसके साथ तेज़ हो गईं। यह भारत का 2026 का पहला स्पेस मिशन था और इसके केंद्र में था DRDO का ‘अन्वेषा (EOS-N1)’ सैटेलाइट—एक ऐसा उपग्रह, जिससे देश की अर्थ-अवलोकन और रणनीतिक क्षमताएँ नई ऊँचाई पर पहुँचने वाली थीं। शुरुआत बिलकुल सटीक रही, लेकिन कहानी ने तीसरे चरण में अचानक मोड़ ले लिया। लॉन्च से लेकर उम्मीदों तक PSLV-C62 ने तय समय पर उड़ान भरी और पहले दो चरणों ने योजना के मुताबिक काम किया। मिशन में अन्वेषा के साथ कई सह-यात्री उपग्रह भी थे—भारत और विदेशों के छोटे-बड़े पेलोड, जो विज्ञान, संचार और पृथ्वी अवलोकन से जुड़े अहम काम करने वाले थे। तीसरे स्टेज (PS3) में क्या हुआ? जैसे ही रॉकेट का तीसरा चरण सक्रिय हुआ, फ्लाइट-पाथ में विचलन (deviation) दर्ज किया गया। ISRO ने इसे एक तकनीकी अनोमली बताया और साफ कहा कि उस पल से मिशन का ऑर्बिट-इन्सर्शन प्रभावित हो गया। शुरुआती संकेत यही हैं कि उपग्रहों को उनकी निर्धारित कक्षा में स्थापित नहीं किया जा सका और टेलीमेट्री डेटा का विश्लेषण जारी है। मिशन निदेशक की भाषा में कहें तो “तीसरे चरण के अंत में वाहन के व्यवहार में असामान्यता दिखी”—यही वह पल था जिसने उम्मीदों की उड़ान को थाम लिया। अन्वेषा’ क्यों था इतना खास? अन्वेषा (EOS-N1) को भारत की उन्नत Earth Observation और निगरानी क्षमताओं के लिए बनाया गया है। बेहतर स्पेक्ट्रल इमेजिंग से लेकर तेज़ डेटा-डिलीवरी तक, यह उपग्रह सुरक्षा, आपदा प्रबंधन और संसाधन निगरानी जैसे क्षेत्रों में बड़ा योगदान दे सकता था। इसलिए इस मिशन का भावनात्मक और रणनीतिक महत्व दोनों ही बहुत बड़ा था। झटका, लेकिन हौसला बरकरार PSLV भारत का सबसे भरोसेमंद रॉकेट रहा है। हर असफलता—या आंशिक असफलता—से ISRO ने सीखा है और और भी मज़बूत होकर लौटा है। इस बार भी डेटा-ड्रिवन जांच चल रही है, ताकि तीसरे स्टेज की जड़ तक पहुँचा जा सके और अगला मिशन और सुरक्षित बने। ISRO जल्द ही विस्तृत तकनीकी रिपोर्ट साझा करेगा—क्या प्रेशर में गिरावट आई, थ्रस्ट में असंगति थी या किसी सेंसर ने गलत संकेत दिया? जवाब आएँगे। और उनके साथ आएगा अगला लॉन्च—ज़्यादा सावधानी, ज़्यादा आत्मविश्वास के साथ। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Iran Protest News Hindi

Breaking News: ईरान में महंगाई के खिलाफ रात भर से बेकाबू प्रदर्शन, 100 से ज्यादा शहरों में हिंसा,

ईरान में महंगाई और टैक्स बढ़ोतरी के खिलाफ 13 दिनों से प्रदर्शन जारी है। 100 से ज्यादा शहरों में हिंसा, 45 मौतें, इंटरनेट बंद और ट्रम्प की धमकी से हालात गंभीर। ईरान इस वक्त अपने सबसे बड़े आंतरिक संकट से गुजर रहा है। महंगाई, बेरोजगारी और टैक्स बढ़ोतरी से नाराज़ जनता बीते 13 दिनों से सड़कों पर उतर आई है। हालात इतने बिगड़ चुके हैं कि प्रदर्शन अब देश के 100 से ज्यादा शहरों तक फैल चुके हैं। कई जगहों पर आगजनी, सड़क जाम और सरकारी संपत्तियों को नुकसान पहुंचाने की खबरें सामने आई हैं। CNN की रिपोर्ट के मुताबिक, गुरुवार रात हालात और ज्यादा तनावपूर्ण हो गए। प्रदर्शनकारियों ने खुले तौर पर सत्ता के खिलाफ नारे लगाए —“खामेनेई को मौत”,“इस्लामिक रिपब्लिक का अंत हुआ” जैसे नारे सड़कों पर गूंजते रहे। कुछ शहरों में लोग ईरान के निर्वासित युवराज क्राउन प्रिंस रेजा पहलवी के समर्थन में भी दिखाई दिए। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि अब बदलाव का समय आ चुका है। हिंसा में 45 मौतें, 8 बच्चे शामिल अमेरिकी मानवाधिकार एजेंसी के अनुसार अब तक हुई हिंसा में 45 लोगों की मौत हो चुकी है, जिनमें 8 मासूम बच्चे भी शामिल हैं। एक पुलिस अधिकारी की चाकू मारकर हत्या किए जाने की भी पुष्टि हुई है। वहीं, 2,270 से अधिक लोगों को हिरासत में लिया गया है। स्थिति को नियंत्रित करने के लिए सरकार ने पूरे देश में इंटरनेट और फोन सेवाएं बंद कर दी हैं। तेहरान एयरपोर्ट को भी अस्थायी रूप से बंद किया गया है और सेना को हाई अलर्ट पर रखा गया है। नेटवर्क मॉनिटरिंग संस्था NetBlocks ने इसे बड़े पैमाने पर दमन की तैयारी बताया है। हालांकि कुछ लोग अब भी स्टारलिंक जैसे वैकल्पिक नेटवर्क के जरिए वीडियो और जानकारी बाहर पहुंचा रहे हैं। बाजार बंद, यूनिवर्सिटी कैंपस पर छात्रों का कब्जा तेहरान समेत कई बड़े शहरों में बाजार पूरी तरह बंद रहे। कई यूनिवर्सिटी कैंपस पर छात्रों ने कब्जा कर लिया है और सरकार विरोधी प्रदर्शन तेज कर दिए हैं। युवा वर्ग खासतौर पर इस आंदोलन की अगुवाई कर रहा है। रेजा पहलवी की अपील से भड़की चिंगारी गुरुवार को निर्वासित प्रिंस रेजा पहलवी ने जनता से खुलकर सड़कों पर उतरने की अपील की। वे ईरान के आखिरी शाह मोहम्मद रजा पहलवी के बेटे हैं, जिन्हें 1979 की इस्लामिक क्रांति में सत्ता से हटाया गया था। फिलहाल वे अमेरिका में रहते हैं। रेजा पहलवी ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प की सराहना करते हुए कहा कि अब दुनिया को ईरानी जनता के समर्थन में खुलकर खड़ा होना चाहिए। ट्रम्प की चेतावनी: “लोगों को मारा गया तो हमला करेंगे” इस बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने ईरान को कड़ी चेतावनी दी है। ट्रम्प ने कहा कि अगर प्रदर्शनकारियों पर हिंसा जारी रही तो अमेरिका ईरान पर जवाबी कार्रवाई कर सकता है। उनके बयान ने पश्चिम एशिया की राजनीति में नई हलचल पैदा कर दी है। आर्थिक बदहाली बनी असली वजह ईरान में गुस्से की असली जड़ है आर्थिक संकट।दिसंबर 2025 में ईरानी मुद्रा रियाल गिरकर लगभग 1.45 मिलियन प्रति डॉलर पहुंच गई थी — जो अब तक का सबसे निचला स्तर है। सबसे ज्यादा नाराज़गी GenZ और युवा वर्ग में देखने को मिल रही है, जिनके लिए रोजगार और महंगाई दोनों बड़ी चुनौती बन चुके हैं। आगे क्या होगा? ईरान की मौजूदा स्थिति सिर्फ आंतरिक संकट नहीं बल्कि वैश्विक राजनीति पर भी असर डाल सकती है। इंटरनेट बंदी, सेना की तैनाती और अमेरिका की धमकी हालात को और संवेदनशील बना रही है। आने वाले दिन ईरान और पूरी दुनिया के लिए बेहद अहम साबित हो सकते हैं।
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Kolkata

Kolkata ED Raid IPAC Chief Prateek Jain के घर और ऑफिस पर कार्रवाई, ममता बनर्जी ने जताया गुस्सा

Kolkata में आज IPAC (Indian Political Action Committee) के प्रमुख प्रतीक जैन के घर और उनके सॉल्ट लेक स्थित ऑफिस पर Enforcement Directorate (ED) ने छापेमारी की। यह कार्रवाई कथित money laundering और financial irregularities की जांच के तहत की जा रही है। सुबह से ED की टीम दस्तावेजों और रिकॉर्ड की जांच में जुटी हुई है। इस कार्रवाई के दौरान पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी भी现场 पहुंचीं। उन्होंने ED के अधिकारियों से बातचीत की और मीडिया के सामने इसे राजनीतिक targeting करार दिया। ममता ने कहा कि ED केवल IPAC से TMC के अंदरूनी दस्तावेज और sensitive जानकारी हासिल करने की कोशिश कर रही है। उन्होंने इसे लोकतंत्र के लिए खतरा बताते हुए कहा कि केंद्र की एजेंसियां राज्य की राजनीतिक गतिविधियों में सीधे हस्तक्षेप कर रही हैं। ममता बनर्जी की यह कदम भावनात्मक और साहसिक दोनों नजर आ रहा है। उन्होंने कहा कि TMC और उसके सहयोगियों को दबाव में लाने की यह कोशिश चुनावों से पहले की गई है। दूसरी ओर, BJP नेताओं ने इस मामले को TMC पर आरोप लगाने का मौका बताया। उनका कहना है कि ममता और उनकी पार्टी अनियमितताओं को छिपा रही हैं। बीजेपी ने इसे accountability और governance से जुड़े मुद्दे के रूप में पेश किया। विशेषज्ञों का मानना है कि IPAC जैसी राजनीतिक consultancy कंपनियों की कार्रवाई अक्सर राजनीतिक बहस का विषय बन जाती है। IPAC चुनावी रणनीति और प्रचार अभियान में अहम भूमिका निभाती है, इसलिए उनके financial records पर जांच राजनीति में महत्वपूर्ण असर डाल सकती है। इस ED छापेमारी ने राज्य और केंद्र के बीच बढ़ते राजनीतिक तनाव को और गहरा कर दिया है। आने वाले दिनों में इस मामले से जुड़े कानूनी और राजनीतिक developments पर सभी की नजर बनी रहेगी। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Delhi Police

Security Alert के बीच Delhi Police की बड़ी कार्रवाई 20 Bangladeshi नागरिक पकड़े गए

राजधानी दिल्ली में अवैध रूप से रह रहे विदेशी नागरिकों के खिलाफ Delhi Police ने बड़ी कार्रवाई की है। दक्षिण-पूर्वी दिल्ली इलाके में चलाए गए विशेष अभियान के दौरान 20 बांग्लादेशी नागरिकों को पकड़ा गया, जो बिना किसी वैध दस्तावेज के भारत में रह रहे थे। खुफिया सूचना के आधार पर हुई कार्रवाई Delhi Police अधिकारियों के अनुसार, यह कार्रवाई खुफिया इनपुट और सत्यापन अभियान के आधार पर की गई। लंबे समय से कुछ इलाकों में अवैध रूप से रह रहे विदेशी नागरिकों की सूचना मिल रही थी, जिसके बाद दिल्ली पुलिस ने योजनाबद्ध तरीके से यह ऑपरेशन चलाया। जांच के दौरान पकड़े गए सभी 20 लोग पासपोर्ट, वीज़ा या वैध रहने से जुड़े कोई दस्तावेज प्रस्तुत नहीं कर सके। SIR से पहले बढ़ी सख्ती बताया जा रहा है कि यह अभियान Special Intelligence Review (SIR) से पहले चलाए जा रहे व्यापक सत्यापन ड्राइव का हिस्सा है। इस दौरान दिल्ली के कई संवेदनशील इलाकों में पुलिस और अन्य एजेंसियां सतर्कता के साथ जांच कर रही हैं। FRRO को सौंपे जाएंगे आरोपी Delhi Police ने सभी हिरासत में लिए गए बांग्लादेशी नागरिकों को आगे की कानूनी प्रक्रिया के लिए Foreigners Regional Registration Office (FRRO) को सौंपने की तैयारी शुरू कर दी है। दस्तावेजों की पुष्टि के बाद Foreigners Act और Immigration Laws के तहत कार्रवाई की जाएगी, जिसमें डिपोर्टेशन की प्रक्रिया भी शामिल है। अवैध घुसपैठ पर जीरो टॉलरेंस पुलिस अधिकारियों का कहना है कि राष्ट्रीय सुरक्षा और कानून-व्यवस्था को ध्यान में रखते हुए अवैध रूप से रह रहे विदेशी नागरिकों के खिलाफ Zero Tolerance Policy अपनाई गई है। आने वाले दिनों में दिल्ली और एनसीआर के अन्य इलाकों में भी ऐसे अभियान जारी रहेंगे। आम लोगों से सहयोग की अपील दिल्ली पुलिस ने नागरिकों से अपील की है कि यदि उनके आसपास कोई व्यक्ति संदिग्ध तरीके से या बिना पहचान के रह रहा हो, तो इसकी सूचना तुरंत पुलिस को दें। पुलिस का कहना है कि आम जनता का सहयोग ऐसे अभियानों को सफल बनाने में अहम भूमिका निभाता है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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आवारा कुत्तों पर Supreme Court में सुनवाई, अदालत की तीखी टिप्पणी

आवारा कुत्तों पर Supreme Court में सुनवाई, अदालत की तीखी टिप्पणी

देश में बढ़ती आवारा कुत्तों की समस्या को लेकर Supreme Court में अहम सुनवाई हुई। इस दौरान अदालत में दी गई एक दलील पर जजों ने तीखी और व्यंग्यात्मक टिप्पणी की, जो अब चर्चा का विषय बन गई है। सुनवाई के दौरान एक पक्ष ने तर्क दिया कि अगर सड़कों से आवारा कुत्तों को हटाया गया तो चूहों की संख्या बढ़ सकती है। इस पर सुप्रीम कोर्ट ने कहा, “तो फिर क्या चूहे रोकने के लिए बिल्लियां ले आएं?” अदालत ने साफ शब्दों में कहा कि ऐसी दलीलों से मूल समस्या का समाधान नहीं निकलता। कोर्ट ने यह भी जताया कि आम लोगों, खासकर बच्चों और बुजुर्गों की सुरक्षा सर्वोपरि है। कई शहरों में कुत्तों के हमलों की बढ़ती घटनाएं गंभीर चिंता का विषय हैं। सुप्रीम कोर्ट ने स्थानीय प्रशासन और नगर निगमों से जिम्मेदारी के साथ समाधान निकालने को कहा। कोर्ट ने यह भी संकेत दिया कि केवल बहाने बनाने से काम नहीं चलेगा, बल्कि ठोस और व्यावहारिक कदम उठाने होंगे। इस मामले में अगली सुनवाई में केंद्र और राज्यों से विस्तृत जवाब मांगा गया है। देशभर में आवारा कुत्तों को लेकर चल रही बहस के बीच सुप्रीम कोर्ट की यह टिप्पणी काफी अहम मानी जा रही है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Gold Mining: ऑस्ट्रेलिया में सोने की नई खोज से बदलेगी तस्वीर, भारत को मिल सकता है नया सप्लायर

भारत में सोना सिर्फ गहना नहीं, बल्कि लोगों की बचत और निवेश का भी अहम हिस्सा है। शादी का सीजन हो या दिवाली-धनतेरस, सोने की खरीदारी को लेकर बाजार में हमेशा हलचल रहती है। ऐसे में ऑस्ट्रेलिया से आई सोने की खोज और बढ़ते निवेश की खबर भारत के लिए भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है। ऑस्ट्रेलिया में सोने की नई खोज के लिए कंपनियां बड़े स्तर पर खर्च कर रही हैं। इससे आने वाले समय में सोने की वैश्विक सप्लाई बढ़ने की संभावना है। भारत जैसे देश के लिए यह एक अहम घटनाक्रम है, क्योंकि अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा पूरा करने के लिए भारत को दूसरे देशों से सोना आयात करना पड़ता है। Australia में Gold Exploration पर कितना खर्च हुआ? ऑस्ट्रेलिया में सोने की खोज से जुड़ा निवेश जून 2026 की तिमाही में बढ़कर लगभग 565.6 मिलियन ऑस्ट्रेलियाई डॉलर पहुंच गया। ऑस्ट्रेलियाई सांख्यिकी ब्यूरो (ABS) के आंकड़ों के अनुसार, पिछली तिमाही के मुकाबले इसमें 23.6% की बढ़ोतरी दर्ज की गई। यह खर्च जमीन के नीचे मौजूद सोने के संभावित भंडार का पता लगाने, ड्रिलिंग और खनन की संभावनाओं का आकलन करने जैसे कामों पर किया जाता है। हालांकि, खोज पर खर्च बढ़ने का मतलब यह नहीं है कि हर जगह सोने का नया भंडार मिल गया है। किसी जगह सोना मिलने के बाद भी यह देखना पड़ता है कि वहां से उसे निकालना आर्थिक रूप से कितना व्यावहारिक होगा। ऑस्ट्रेलिया में कितना Gold Reserve मौजूद है? ऑस्ट्रेलिया दुनिया के प्रमुख सोना उत्पादक देशों में शामिल है। सरकारी संस्था Geoscience Australia के आंकड़ों के अनुसार, दिसंबर 2024 तक देश के अनुमानित Ore Reserves करीब 4,785 टन थे। वहीं, पहचाने गए कुल Gold Resources का आंकड़ा इससे काफी ज्यादा था। यहां एक बात समझना जरूरी है। Gold Resources में सोने के संभावित और पहचाने गए संसाधन शामिल होते हैं, जबकि Ore Reserves उस सोने को दर्शाते हैं जिसे मौजूदा तकनीकी और आर्थिक परिस्थितियों में निकालना व्यावहारिक माना जाता है। इसीलिए ऑस्ट्रेलिया में सोने के बड़े भंडार होने और किसी नई खोज को दुनिया का सबसे बड़ा भंडार बताने में अंतर है। किसी खास नई खोज के बारे में ऐसा दावा करने से पहले उसके आधिकारिक आंकड़ों की पुष्टि जरूरी है। भारत को कैसे मिल सकता है फायदा? भारत में सोने की मांग काफी बड़ी है और घरेलू जरूरतों को पूरा करने के लिए आयात महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। अगर ऑस्ट्रेलिया में आने वाले वर्षों में सोने का उत्पादन बढ़ता है, तो भारतीय आयातकों के लिए सप्लाई का एक अतिरिक्त विकल्प तैयार हो सकता है। इसके तीन संभावित फायदे हो सकते हैं: हालांकि, ऑस्ट्रेलिया में निकाला गया सोना अपने आप भारत नहीं पहुंचेगा। यह इस बात पर निर्भर करेगा कि उत्पादन कितना बढ़ता है, कंपनियां किस देश को निर्यात करती हैं और भारतीय आयातकों के साथ किस तरह के व्यापारिक समझौते होते हैं। क्या भारत में सस्ता हो जाएगा सोना? सोने की नई खोज की खबर सुनकर खरीदारों के मन में सबसे पहले यही सवाल आता है कि क्या अब Gold Price कम होगा? फिलहाल ऐसा कोई निश्चित निष्कर्ष निकालना जल्दबाजी होगी। अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने की कीमत केवल उत्पादन पर निर्भर नहीं करती। निवेशकों की मांग, केंद्रीय बैंकों की खरीद, डॉलर की चाल और वैश्विक आर्थिक परिस्थितियां भी भाव को प्रभावित करती हैं। भारत में इसके अलावा रुपये और डॉलर की विनिमय दर, आयात शुल्क, टैक्स और घरेलू मांग का भी असर पड़ता है। इसलिए ऑस्ट्रेलिया में सोने की खोज बढ़ने के बावजूद भारतीय बाजार में कीमतें तुरंत कम होंगी, इसकी गारंटी नहीं है। ₹13,000 करोड़ के निवेश की खबर कितनी सही है? ऑस्ट्रेलिया में सोने की खोज पर खर्च बढ़ने के आंकड़े सामने आए हैं। लेकिन ₹13,000 करोड़ के निवेश को किसी खास नई खोज या दुनिया के सबसे बड़े सोना भंडार से जोड़ने के लिए संबंधित कंपनी और परियोजना के आधिकारिक दस्तावेजों की जरूरत है। इसलिए इस रकम को किसी एक नए गोल्ड रिजर्व की खोज पर खर्च हुई राशि बताने से पहले इसकी पुष्टि करना जरूरी है। खोज पर किया गया खर्च, जमीन में मौजूद कुल सोने का मूल्य और खनन परियोजना में कुल निवेश तीन अलग-अलग बातें हैं। आगे क्या होगा? ऑस्ट्रेलिया में सोने की खोज पर बढ़ता खर्च वैश्विक गोल्ड इंडस्ट्री के लिए अहम है। अगर आने वाले वर्षों में नए भंडार की पहचान होती है और उनसे व्यावसायिक उत्पादन शुरू हो पाता है, तो इससे अंतरराष्ट्रीय सप्लाई के विकल्प बढ़ सकते हैं। भारत के लिए भी यह एक संभावित अवसर है। लेकिन नए सप्लायर की भूमिका, आयात पर असर और सोने की कीमतों में बदलाव का पता तभी चलेगा, जब वास्तविक उत्पादन और निर्यात के आंकड़े सामने आएंगे। फिलहाल, ऑस्ट्रेलिया की गोल्ड इंडस्ट्री पर नजर रखना जरूरी है, लेकिन नई खोज के नाम पर सोना सस्ता होने की उम्मीद करना अभी जल्दबाजी होगी। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!

इंदौर में 175 डॉक्टरों और स्वास्थ्यकर्मियों के अटैचमेंट खत्म, मूल पदस्थापना पर जॉइनिंग के बाद ही मिलेगा अक्टूबर का वेतन

स्वास्थ्य विभाग में मूल पदस्थापना के बजाय दूसरी जगह काम कर रहे 175 डॉक्टरों, नर्सों और अन्य कर्मचारियों के अटैचमेंट समाप्त कर दिए गए हैं। मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (CMHO) डॉ. माधव प्रसाद हसानी ने 16 अक्टूबर को आदेश जारी कर सभी अटैचमेंट तत्काल प्रभाव से निरस्त कर दिए। आदेश के बाद संबंधित कर्मचारियों को अपने मूल पदस्थापना स्थल पर वापस जाकर जॉइनिंग देनी होगी। ऐसा करने के बाद ही उन्हें अक्टूबर महीने का वेतन मिल सकेगा। स्वास्थ्य विभाग ने सभी संबंधित अधिकारियों को आदेश का तत्काल पालन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं। तत्काल कार्यमुक्त कर मूल पदस्थापना पर भेजने के निर्देश CMHO के आदेश के मुताबिक, संबंधित अधिकारियों को अटैचमेंट पर काम कर रहे कर्मचारियों को उसी दिन कार्यमुक्त कर उनके मूल पदस्थापना स्थल पर भेजना होगा। इसकी जानकारी CMHO कार्यालय को भी उपलब्ध करानी होगी। वेतन आहरण केंद्रों को निर्देश दिए गए हैं कि कर्मचारियों की मूल पदस्थापना पर उपस्थिति सुनिश्चित होने के बाद ही अक्टूबर का वेतन जारी किया जाए। इससे कर्मचारियों को अपने निर्धारित कार्यस्थल पर लौटना अनिवार्य होगा। अटैचमेंट जारी मिला तो जिम्मेदार अधिकारी पर होगी कार्रवाई स्वास्थ्य विभाग ने आदेश के पालन को लेकर सख्त रुख अपनाया है। CMHO ने स्पष्ट किया है कि आदेश जारी होने के बाद भी कोई कर्मचारी या अधिकारी अटैचमेंट पर काम करता पाया गया, तो इसके लिए जिम्मेदार अधिकारी के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी। इसकी जिम्मेदारी संबंधित संस्था के प्रभारी की होगी। विभाग ने अधिकारियों को निर्देशों का पालन कराने और इसकी रिपोर्ट प्रस्तुत करने को कहा है। अस्पतालों और स्वास्थ्य संस्थाओं को भेजा गया आदेश यह आदेश सिविल सर्जन सह मुख्य अस्पताल अधीक्षक, देपालपुर, मानपुर, सांवेर और हातोद के खंड चिकित्सा अधिकारियों, महू सहित विभिन्न अस्पतालों के प्रभारी चिकित्सा अधिकारियों, शहरी स्वास्थ्य संस्थाओं और मुख्यमंत्री संजीवनी क्लीनिक के प्रभारियों को भेजा गया है। आदेश में भोपाल में हुई बैठकों और 16 अक्टूबर को मुख्यालय स्तर से मिले निर्देशों का भी हवाला दिया गया है। सभी संबंधित अधिकारियों को तत्काल प्रभाव से आदेश लागू कराने के निर्देश दिए गए हैं।

नवरात्रि पर रायपुर सेंट्रल जेल में सेवा की मिसाल, काली माता सेवा समिति ने 1300 बंदियों को बांटे फल

नवरात्रि के अवसर पर काली माता सेवा समिति ने रायपुर सेंट्रल जेल में करीब 1300 बंदियों को फल वितरित किए। समिति ने यह पहल उन बंदियों के लिए की, जो नवरात्रि में उपवास रखकर माता रानी की आराधना कर रहे हैं। इस आयोजन के जरिए समिति ने सेवा, करुणा और मानवीय संवेदना का संदेश दिया। समिति के अध्यक्ष दीपक भारद्वाज (पोल्ले) ने बताया कि कार्यक्रम का उद्देश्य बंदियों के प्रति संवेदनशीलता और सेवा भाव को बढ़ावा देना है। उन्होंने कहा कि किसी व्यक्ति की गलती या अपराध से उसके सुधरने और बेहतर जीवन जीने की संभावनाएं समाप्त नहीं हो जातीं। बंदियों के सुधार और पुनर्वास पर दिया जोर दीपक भारद्वाज ने कहा कि समाज को न्याय के प्रति सम्मान बनाए रखने के साथ-साथ सुधार और पुनर्वास की भावना को भी महत्व देना चाहिए। बंदियों के प्रति संवेदनशील व्यवहार अपनाने से समाज में मानवीय मूल्यों को मजबूती मिलती है। समिति का मानना है कि जेल में बंद लोगों के साथ भी सम्मानजनक और मानवीय व्यवहार होना चाहिए, ताकि उनमें सकारात्मक बदलाव की भावना विकसित हो सके। पहले भी जेल में कर चुके हैं फल वितरण काली माता सेवा समिति के अनुसार, वह पहले भी कई बार जेल में बंदियों को फल वितरित कर चुकी है। समिति का कहना है कि नवरात्रि केवल पूजा-पाठ और उपवास तक सीमित पर्व नहीं है, बल्कि यह सेवा, करुणा और सद्भावना को जीवन में अपनाने का अवसर भी है। इसी भावना के साथ समिति के सदस्यों ने उपवास रखने वाले बंदियों तक फल पहुंचाए। आगे भी जारी रहेंगे सेवा कार्य समिति ने समाज में सेवा, सद्भावना और मानवीय मूल्यों को बढ़ावा देने के लिए ऐसे आयोजन आगे भी जारी रखने का संकल्प लिया। कार्यक्रम में अशोक त्रिपाठी, गुड्डू, सुनील प्रमुख, राजू भाई तारवानी और रामकृष्ण धीवर सहित अन्य लोग मौजूद रहे।
वैभव सूर्यवंशी

IND vs WI T20: वैभव सूर्यवंशी का भरोसा कायम, 4 दिन में दूसरी पोस्ट; अब भी मौके का इंतजार

भारत और वेस्टइंडीज (IND vs WI) के बीच T-20 सीरीज के निर्णायक मुकाबले से पहले युवा बल्लेबाज वैभव सूर्यवंशी एक बार फिर चर्चा में हैं। सीरीज में अब तक खेलने का मौका नहीं मिलने के बावजूद वैभव ने उम्मीद नहीं छोड़ी है। चार दिन के भीतर उनकी दूसरी सोशल मीडिया पोस्ट सामने आई है, जिसमें भरोसे का संदेश देखने को मिला। वैभव को इस सीरीज में अब तक मैदान पर उतरने का मौका नहीं मिला है। ऐसे में क्रिकेट फैंस के मन में एक ही सवाल है—क्या पांचवें टी-20 में उन्हें अपनी प्रतिभा दिखाने का अवसर मिलेगा? Vaibhav Sooryavanshi की दूसरी पोस्ट ने खींचा ध्यान वैभव सूर्यवंशी की सोशल मीडिया पोस्ट को लेकर फैंस के बीच चर्चा हो रही है। चार दिन में दूसरी पोस्ट आने के बाद उनके संदेश पर लोगों की नजरें टिकी हैं। हालांकि, पोस्ट को टीम में चयन या किसी खास फैसले से जोड़कर देखना सही नहीं होगा, क्योंकि प्लेइंग-11 में किसे मौका मिलेगा, इसका फैसला टीम मैनेजमेंट करता है। कम उम्र में अपनी बल्लेबाजी से पहचान बनाने वाले वैभव के लिए टीम के साथ रहना और मौके का इंतजार करना भी अनुभव का हिस्सा है। अब देखना होगा कि उन्हें इस सीरीज में खेलने का मौका मिलता है या नहीं। IND vs WI 5th T20: निर्णायक मुकाबले पर नजर भारत और वेस्टइंडीज की टी-20 सीरीज का पांचवां मुकाबला दोनों टीमों के लिए अहम है। सीरीज के आखिरी मैच में जीत हासिल करने वाली टीम खिताब अपने नाम करेगी। ऐसे में भारतीय टीम की प्लेइंग-11 को लेकर उत्सुकता बनी हुई है। फैंस यह जानना चाहते हैं कि क्या टीम मैनेजमेंट इस मुकाबले में युवा खिलाड़ियों को मौका देगा। वैभव सूर्यवंशी का नाम भी इसी चर्चा में शामिल है। हालांकि, उनके खेलने को लेकर आधिकारिक पुष्टि के बिना किसी नतीजे पर पहुंचना जल्दबाजी होगी। क्या वैभव सूर्यवंशी को मिलेगा डेब्यू का मौका? वैभव को लेकर उत्सुकता की एक बड़ी वजह उनकी कम उम्र और क्रिकेट में तेजी से बनी पहचान है। फैंस उन्हें भारतीय टीम की जर्सी में खेलते देखना चाहते हैं, लेकिन अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मौका मिलना टीम की जरूरत और चयन रणनीति पर निर्भर करता है। फिलहाल वैभव के लिए इंतजार जारी है। पांचवें टी-20 में उनका नाम प्लेइंग-11 में शामिल होता है या नहीं, इसका पता टीम की आधिकारिक घोषणा के बाद ही चलेगा। क्रिकेट में हर खिलाड़ी को अपनी बारी का इंतजार करना पड़ता है। वैभव के समर्थकों को उम्मीद है कि उन्हें जल्द ही मैदान पर अपनी काबिलियत दिखाने का अवसर मिलेगा। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
लालकृष्ण आडवाणी

LK Advani Hospitalised ICU में भर्ती लालकृष्ण आडवाणी की सेहत कैसी? जानें ताजा अपडेट

बीजेपी के वरिष्ठ नेता और पूर्व उपप्रधानमंत्री लालकृष्ण आडवाणी की सेहत को लेकर 17 अक्टूबर को ताजा जानकारी सामने आई है। 98 वर्षीय आडवाणी को सीने में संक्रमण (Chest Infection) की शिकायत के बाद दिल्ली के इंद्रप्रस्थ अपोलो अस्पताल में भर्ती कराया गया है। फिलहाल उनकी हालत स्थिर बताई जा रही है और डॉक्टरों की टीम उनकी निगरानी कर रही है। परिवार और समर्थकों के लिए यह खबर चिंता बढ़ाने वाली जरूर है, लेकिन फिलहाल राहत की बात यह है कि अस्पताल से मिली जानकारी के मुताबिक उनकी स्थिति स्थिर है। डॉक्टर उनकी सेहत से जुड़ी जरूरी जांच कर रहे हैं और इलाज जारी है। LK Advani Health Update: अस्पताल में क्या चल रहा है इलाज? लालकृष्ण आडवाणी को शुक्रवार, 16 अक्टूबर 2026 की शाम करीब 7:30 बजे अस्पताल लाया गया था। उन्हें सीने में संक्रमण की शिकायत के बाद पल्मोनरी विभाग में भर्ती किया गया। यहां डॉक्टरों की एक टीम उनकी सेहत पर नजर रख रही है और जरूरी मेडिकल जांच की जा रही है। 17 अक्टूबर तक उपलब्ध जानकारी के अनुसार, उनकी हालत स्थिर है। हालांकि, उनकी सेहत में आगे कितना सुधार हुआ है और अस्पताल से छुट्टी कब मिलेगी, इस बारे में अभी कोई स्पष्ट आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है। पहले भी अस्पताल में भर्ती हो चुके हैं लालकृष्ण आडवाणी लालकृष्ण आडवाणी को इससे पहले मई 2026 में भी उम्र से जुड़ी स्वास्थ्य समस्याओं के कारण अपोलो अस्पताल में भर्ती कराया गया था। इलाज के बाद उन्हें छुट्टी दे दी गई थी। दिसंबर 2024 में भी उन्हें अपोलो अस्पताल की ICU में रखा गया था। उस समय डॉक्टरों ने उनकी मेडिकल जांच और इलाज किया था। जून और जुलाई 2024 में भी उन्हें स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के चलते अस्पताल में भर्ती कराया गया था। बढ़ती उम्र को देखते हुए उनकी सेहत पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। मौजूदा समय में डॉक्टरों की निगरानी में उनका उपचार जारी है। PM Modi ने हाल ही में की थी लालकृष्ण आडवाणी से मुलाकात लालकृष्ण आडवाणी के अस्पताल में भर्ती होने से कुछ दिन पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 7 अक्टूबर 2026 को उनके दिल्ली स्थित आवास पर मुलाकात की थी। इस दौरान प्रधानमंत्री ने उनसे आशीर्वाद लिया और सार्वजनिक जीवन में उनके योगदान की सराहना की थी। आडवाणी लंबे समय तक बीजेपी के प्रमुख चेहरों में शामिल रहे हैं। पार्टी को राष्ट्रीय राजनीति में स्थापित करने में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका रही है। यही वजह है कि उनकी सेहत से जुड़ी खबर पर राजनीतिक जगत और उनके समर्थकों की नजर बनी हुई है। राम रथ यात्रा से उपप्रधानमंत्री तक का सफर लालकृष्ण आडवाणी का राजनीतिक सफर कई दशकों तक फैला रहा है। वह भारतीय जनता पार्टी के तीन बार राष्ट्रीय अध्यक्ष रहे और पार्टी के विस्तार में अहम भूमिका निभाई। साल 1990 में निकाली गई उनकी राम रथ यात्रा ने राष्ट्रीय राजनीति में व्यापक चर्चा पैदा की थी। अटल बिहारी वाजपेयी के नेतृत्व वाली एनडीए सरकार में उन्होंने केंद्रीय गृह मंत्री की जिम्मेदारी संभाली। इसके बाद 2002 से 2004 तक वह भारत के उपप्रधानमंत्री रहे। देश की राजनीति में उनके लंबे योगदान को देखते हुए वर्ष 2024 में उन्हें भारत रत्न से सम्मानित किया गया था। LK Advani अब अगले हेल्थ अपडेट का इंतजार लालकृष्ण आडवाणी फिलहाल दिल्ली के अपोलो अस्पताल में डॉक्टरों की निगरानी में हैं। 17 अक्टूबर तक सामने आई जानकारी के मुताबिक, उनकी हालत स्थिर है और सीने में संक्रमण के लिए इलाज चल रहा है। अब सभी की नजर अस्पताल की ओर से जारी होने वाले अगले हेल्थ अपडेट पर है। उनकी सेहत में सुधार, इलाज की स्थिति और डिस्चार्ज को लेकर नई जानकारी मिलने के बाद ही आगे की स्थिति स्पष्ट हो सकेगी। फिलहाल सबसे अहम बात यही है कि लालकृष्ण आडवाणी की हालत स्थिर बताई गई है और उनका इलाज जारी है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!

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