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Tej Pratap Yadav

Tej Pratap Controversy: गर्लफ्रेंड की बेटी से मिलने पहुंचे तेजप्रताप? FIR के बाद बढ़ा विवाद

राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के वरिष्ठ नेता तेजप्रताप यादव (Tej Pratap Yadav) एक बार फिर विवादों के केंद्र में हैं। इस बार मामला उनकी निजी जिंदगी से जुड़ा है, जिसने बिहार की राजनीति में नई चर्चा छेड़ दी है। कथित गर्लफ्रेंड अनुष्का के भाई आकाश द्वारा दर्ज कराई गई FIR के बाद पूरे मामले ने तूल पकड़ लिया है। शिकायत में आरोप लगाया गया है कि तेजप्रताप यादव कथित तौर पर अनुष्का की बेटी से मिलने के लिए उनके घर पहुंचे और बिना अनुमति अंदर प्रवेश करने की कोशिश की। मामला सामने आने के बाद सोशल मीडिया से लेकर राजनीतिक गलियारों तक इसकी चर्चा हो रही है। FIR में क्या लगाए गए हैं आरोप? आकाश द्वारा दर्ज कराई गई शिकायत में कहा गया है कि तेजप्रताप यादव अचानक उनके घर पहुंचे। परिवार का आरोप है कि उन्होंने घर में जबरन प्रवेश किया, जिससे परिवार के सदस्यों को असहज स्थिति का सामना करना पड़ा। शिकायत के आधार पर पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। फिलहाल अधिकारियों द्वारा दोनों पक्षों की बात सुनी जा रही है और तथ्यों की पड़ताल की जा रही है। तेजप्रताप यादव ने आरोपों को बताया बेबुनियाद विवाद बढ़ने के बाद तेजप्रताप यादव ने अपनी सफाई दी है। उन्होंने कहा कि उनके खिलाफ लगाए गए आरोपों में कोई सच्चाई नहीं है और यह सब उनकी सार्वजनिक छवि को नुकसान पहुंचाने के लिए किया जा रहा है। तेजप्रताप का कहना है कि वे किसी भी जांच का सामना करने के लिए तैयार हैं और उन्हें कानून पर पूरा भरोसा है। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ लोग जानबूझकर उनके नाम को विवादों में घसीटने की कोशिश कर रहे हैं। राजनीतिक गलियारों में भी चर्चा तेज तेजप्रताप यादव बिहार के सबसे चर्चित राजनीतिक चेहरों में से एक हैं। ऐसे में उनसे जुड़ा कोई भी मामला तेजी से सुर्खियां बन जाता है। इस विवाद के सामने आने के बाद राजनीतिक हलकों में भी कई तरह की चर्चाएं शुरू हो गई हैं। हालांकि अभी तक मामले को लेकर किसी प्रमुख राजनीतिक दल की ओर से विस्तृत प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है, लेकिन घटनाक्रम पर सभी की नजर बनी हुई है। जांच के बाद सामने आएगी सच्चाई फिलहाल पूरा मामला पुलिस जांच के अधीन है। जांच एजेंसियां शिकायत, गवाहों के बयान और अन्य उपलब्ध तथ्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई कर रही हैं। मामले में एक पक्ष गंभीर आरोप लगा रहा है, जबकि दूसरा पक्ष इसे साजिश करार दे रहा है। ऐसे में अब सभी की नजर जांच रिपोर्ट पर टिकी हुई है, जिससे इस विवाद की वास्तविक तस्वीर साफ हो सकेगी। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Telegram

Telegram को बड़ा झटका! Delhi High Court ने बैन हटाने से किया साफ इनकार

मैसेजिंग ऐप Telegram को दिल्ली हाई कोर्ट से बड़ी राहत मिलने की उम्मीद थी, लेकिन अदालत ने केंद्र सरकार के फैसले को सही ठहराते हुए कंपनी की याचिका खारिज कर दी। कोर्ट ने साफ कहा कि राष्ट्रीय स्तर की महत्वपूर्ण परीक्षा की सुरक्षा सुनिश्चित करना सरकार की जिम्मेदारी है और जरूरत पड़ने पर वह ऐसे कदम उठा सकती है। इस फैसले के बाद Telegram पर लगा अस्थायी प्रतिबंध फिलहाल जारी रहेगा। मामला केवल एक ऐप तक सीमित नहीं है, बल्कि यह परीक्षा सुरक्षा, डिजिटल स्वतंत्रता और सरकारी अधिकारों के बीच संतुलन की बड़ी बहस का हिस्सा बन गया है। क्या है पूरा विवाद? केंद्र सरकार ने हाल ही में Telegram पर अस्थायी रोक लगाने का फैसला लिया था। सरकार का कहना है कि प्लेटफॉर्म के कुछ चैनलों और बॉट्स के जरिए NEET-UG री-एग्जाम से जुड़ी कथित लीक सामग्री, फर्जी प्रश्नपत्र और भ्रामक जानकारी फैलाए जाने की आशंका थी। सरकार का तर्क था कि ऐसी गतिविधियां लाखों छात्रों के भविष्य को प्रभावित कर सकती हैं और परीक्षा प्रक्रिया की निष्पक्षता पर सवाल खड़े कर सकती हैं। इसी कारण एहतियाती कदम के रूप में यह फैसला लिया गया। हाई कोर्ट ने क्या कहा? सुनवाई के दौरान दिल्ली हाई कोर्ट ने केंद्र सरकार के आदेश की वैधता पर विचार किया। अदालत ने माना कि यह फैसला सार्वजनिक हित और परीक्षा सुरक्षा को ध्यान में रखकर लिया गया है। कोर्ट ने कहा कि जब किसी राष्ट्रीय परीक्षा की विश्वसनीयता दांव पर हो, तब सरकार को आवश्यक कदम उठाने का अधिकार है। इसी आधार पर Telegram की याचिका खारिज कर दी गई। Telegram की दलील क्या थी? Telegram ने अदालत में कहा कि कुछ लोगों की गलत गतिविधियों के कारण करोड़ों सामान्य उपयोगकर्ताओं को परेशानी नहीं होनी चाहिए। कंपनी ने दावा किया कि उसने संदिग्ध चैनलों और लिंक के खिलाफ कार्रवाई की है और जांच एजेंसियों के साथ सहयोग भी किया है। कंपनी का यह भी कहना था कि प्लेटफॉर्म पर पूरी तरह रोक लगाने से अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और संचार के अधिकार पर असर पड़ता है। करोड़ों यूजर्स के अधिकारों पर भी हुई चर्चा सुनवाई के दौरान यह सवाल भी उठा कि क्या कुछ संदिग्ध गतिविधियों के कारण बड़ी संख्या में उपयोगकर्ताओं के अधिकार सीमित किए जा सकते हैं। इस पर सरकार ने जवाब दिया कि Telegram की तकनीकी संरचना और बॉट सिस्टम का दुरुपयोग तेजी से जानकारी फैलाने में किया जा सकता है, जिससे परीक्षा सुरक्षा को गंभीर खतरा पैदा हो सकता है। सरकार का मानना है कि ऐसी असाधारण परिस्थितियों में अस्थायी प्रतिबंध जरूरी हो जाता है। NEET परीक्षा बनी फैसले की बड़ी वजह इस पूरे मामले का केंद्र NEET-UG री-एग्जाम है। पिछले कुछ समय से परीक्षा से जुड़े विवाद और कथित पेपर लीक के आरोप चर्चा में रहे हैं। ऐसे माहौल में सरकार किसी भी संभावित जोखिम से बचना चाहती है। शिक्षा विशेषज्ञों का भी मानना है कि परीक्षा प्रक्रिया में पारदर्शिता और भरोसा बनाए रखना बेहद जरूरी है, क्योंकि इससे लाखों छात्रों का भविष्य जुड़ा होता है। डिजिटल Freedom बनाम National Interest Telegram मामले ने एक बार फिर यह बहस छेड़ दी है कि डिजिटल प्लेटफॉर्म्स की स्वतंत्रता और राष्ट्रीय हितों के बीच संतुलन कैसे बनाया जाए। एक तरफ सरकार परीक्षा सुरक्षा और कानून व्यवस्था की बात कर रही है, वहीं दूसरी तरफ डिजिटल अधिकारों के पक्षधर सवाल उठा रहे हैं कि क्या पूरे प्लेटफॉर्म पर रोक लगाना उचित कदम है। आगे क्या होगा? फिलहाल हाई कोर्ट के फैसले के बाद Telegram को तत्काल राहत नहीं मिली है। अब सभी की नजर केंद्र सरकार के अगले कदम और NEET री-एग्जाम के सफल आयोजन पर टिकी हुई है। यह मामला आने वाले समय में डिजिटल प्लेटफॉर्म्स की जवाबदेही, ऑनलाइन कंटेंट मॉडरेशन और सरकारी हस्तक्षेप से जुड़ी नीतियों पर भी असर डाल सकता है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Telegram

Telegram Controversy: सरकार बोली- आतंकी नेटवर्क के लिए आसान माध्यम बनता जा रहा ऐप

लोकप्रिय मैसेजिंग ऐप Telegram एक बार फिर कानूनी और सुरक्षा बहस के केंद्र में आ गया है। हाई कोर्ट में हुई सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार ने दावा किया कि इस प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल कई मामलों में आतंकी गतिविधियों, कट्टरपंथी प्रचार और अवैध नेटवर्किंग के लिए किया जा रहा है। सरकार ने अदालत से कहा कि Telegram धीरे-धीरे ऐसे तत्वों के लिए एक सुरक्षित डिजिटल माध्यम बनता जा रहा है, जो देश की सुरक्षा के लिए खतरा पैदा कर सकते हैं। केंद्र सरकार ने कोर्ट में क्या कहा? सुनवाई के दौरान केंद्र की ओर से पेश वकीलों ने बताया कि Telegram के कुछ फीचर्स, खासकर एन्क्रिप्टेड कम्युनिकेशन और बड़े पैमाने पर संचालित चैनल, सुरक्षा एजेंसियों के सामने नई चुनौतियां खड़ी कर रहे हैं। सरकार का कहना है कि कई बार जांच एजेंसियों को जरूरी जानकारी समय पर नहीं मिल पाती, जिससे संवेदनशील मामलों की जांच प्रभावित होती है। केंद्र ने यह भी कहा कि तकनीक का उद्देश्य लोगों को सुविधा देना है, लेकिन जब उसी तकनीक का उपयोग कानून-विरोधी गतिविधियों के लिए होने लगे तो सरकार का हस्तक्षेप जरूरी हो जाता है। सुरक्षा एजेंसियों की बढ़ी चिंता सरकारी पक्ष के अनुसार, हाल के वर्षों में ऐसे कई मामले सामने आए हैं जिनमें Telegram का उपयोग संदिग्ध गतिविधियों के लिए किया गया। जांच एजेंसियों का मानना है कि कुछ आतंकी और आपराधिक संगठन इस प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल अपने नेटवर्क को सक्रिय रखने और संदेशों के आदान-प्रदान के लिए कर रहे हैं। यही वजह है कि सुरक्षा एजेंसियां लंबे समय से ऐसे डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर अधिक जवाबदेही और सहयोग की मांग करती रही हैं। प्राइवेसी बनाम सुरक्षा की बहस Telegram को दुनियाभर में सुरक्षित और निजी संवाद के लिए जाना जाता है। लाखों लोग इसका इस्तेमाल रोजमर्रा की बातचीत, बिजनेस और सूचना साझा करने के लिए करते हैं। लेकिन जब किसी प्लेटफॉर्म के दुरुपयोग की खबरें सामने आती हैं, तो निजता और राष्ट्रीय सुरक्षा के बीच संतुलन को लेकर बहस तेज हो जाती है। विशेषज्ञों का मानना है कि यूजर्स की प्राइवेसी भी महत्वपूर्ण है और सुरक्षा भी। इसलिए दोनों के बीच संतुलित समाधान निकालना सबसे बड़ी चुनौती है। आगे क्या होगा? हाई कोर्ट में मामले की सुनवाई जारी है और आने वाले दिनों में इस पर और महत्वपूर्ण बहस हो सकती है। अदालत का फैसला सिर्फ Telegram तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि भविष्य में अन्य सोशल मीडिया और मैसेजिंग प्लेटफॉर्म्स के लिए भी एक महत्वपूर्ण मिसाल साबित हो सकता है। फिलहाल, इस मामले ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि डिजिटल युग में राष्ट्रीय सुरक्षा, तकनीकी स्वतंत्रता और यूजर प्राइवेसी के बीच संतुलन कैसे बनाया जाए। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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NEET

NEET की दर्दनाक सच्चाई: 2 दिन में 4 मौतें, छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य पर बड़ी बहस

देश में मेडिकल प्रवेश परीक्षा NEET को लेकर बढ़ता मानसिक दबाव एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े कर रहा है। पिछले 48 घंटों में अलग-अलग राज्यों से सामने आए दर्दनाक मामलों ने न सिर्फ परिवारों को तोड़ दिया, बल्कि पूरे शिक्षा तंत्र की कार्यप्रणाली पर भी बहस छेड़ दी है। गुजरात और तमिलनाडु से सामने आए दर्दनाक मामले गुजरात में एक छात्र की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत की खबर सामने आई है। वहीं तमिलनाडु की एक छात्रा ने अपने आखिरी संदेश में दोबारा परीक्षा देने के डर और लगातार बढ़ते मानसिक दबाव का जिक्र किया, जिसने सभी को भावुक कर दिया। इसी दौरान अन्य राज्यों से भी ऐसे ही दुखद मामले सामने आए हैं, जिससे कुल मिलाकर दो दिनों में कम से कम चार छात्रों की मौत की स्थिति बनी है। परिवारों ने बताया— लंबे समय से था तनाव परिजनों का कहना है कि बच्चे लंबे समय से NEET की तैयारी में दिन-रात मेहनत कर रहे थे, लेकिन लगातार बढ़ती प्रतिस्पर्धा, कोचिंग का दबाव और भविष्य की अनिश्चितता उन्हें अंदर ही अंदर तोड़ रही थी। कई माता-पिता ने बताया कि बच्चे तनाव में रहते थे, लेकिन खुलकर अपनी बात साझा नहीं कर पा रहे थे। विशेषज्ञों की चिंता: मानसिक स्वास्थ्य पर ध्यान जरूरी विशेषज्ञों का मानना है कि यह सिर्फ परीक्षा का दबाव नहीं, बल्कि मानसिक स्वास्थ्य को लेकर जागरूकता की कमी भी एक बड़ा कारण है। छात्रों के लिए समय रहते काउंसलिंग, भावनात्मक सपोर्ट और सुरक्षित माहौल बेहद जरूरी है, ताकि वे दबाव को संभाल सकें। शिक्षा व्यवस्था पर उठ रहे सवाल इन घटनाओं के बाद एक बार फिर यह सवाल उठ रहा है कि क्या हमारी शिक्षा व्यवस्था केवल रैंक और मार्क्स पर ही केंद्रित रह गई है? समाज के कई वर्ग अब मांग कर रहे हैं कि परीक्षा प्रणाली के साथ-साथ छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य को भी उतनी ही गंभीरता से लिया जाए। देश में गहराता संकट और बढ़ती चिंता फिलहाल इन मामलों ने पूरे देश को झकझोर दिया है और एक बार फिर यह सोचने पर मजबूर कर दिया है कि सफलता की दौड़ में कहीं हम अपने बच्चों को खो तो नहीं रहे हैं। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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अयोध्या

अयोध्या में हलचल: चढ़ावा केस के बीच CM योगी का दौरा, प्रशासन ने चंपत राय को रोका

अयोध्या एक बार फिर सुर्खियों में है। चढ़ावा चोरी से जुड़े कथित मामले की जांच के बीच उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री Yogi Adityanath (CM योगी) का कल Ayodhya दौरा प्रस्तावित है। इस दौरे को लेकर प्रशासन और ट्रस्ट स्तर पर लगातार बैठकों और सुरक्षा समीक्षा का दौर चल रहा है। सूत्रों के अनुसार, संवेदनशील हालात और जांच की गंभीरता को देखते हुए प्रशासन ने श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव Champat Rai से आग्रह किया है कि वे स्वयं कार्यक्रम में मौजूद न रहें और उनकी जगह किसी प्रतिनिधि को भेजा जाए। यह निर्णय पूरी तरह सुरक्षा व्यवस्था और भीड़ नियंत्रण को ध्यान में रखकर लिया गया है। सुरक्षा और जांच के बीच बढ़ी सतर्कता चढ़ावा चोरी मामले की जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है, वैसे-वैसे अयोध्या में सुरक्षा व्यवस्था और कड़ी कर दी गई है। प्रशासन का फोकस इस बात पर है कि VIP मूवमेंट और श्रद्धालुओं की भीड़ दोनों को बिना किसी बाधा के नियंत्रित किया जा सके। विकास कार्यों की समीक्षा भी संभव मुख्यमंत्री के इस दौरे को केवल औपचारिक कार्यक्रम नहीं माना जा रहा है। माना जा रहा है कि वे इस दौरान अयोध्या में चल रहे विकास कार्यों और धार्मिक परियोजनाओं की भी समीक्षा कर सकते हैं। हाल के वर्षों में अयोध्या में तेजी से हो रहे बदलावों के बीच यह दौरा काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। राजनीतिक और प्रशासनिक माहौल गर्म इस पूरे घटनाक्रम ने राजनीतिक गलियारों में भी हलचल बढ़ा दी है। जहां एक तरफ जांच एजेंसियां मामले की तह तक जाने में जुटी हैं, वहीं दूसरी तरफ प्रशासनिक स्तर पर हर गतिविधि को बेहद सावधानी से संभाला जा रहा है। कुल मिलाकर, चढ़ावा चोरी जांच और मुख्यमंत्री के दौरे ने अयोध्या के माहौल को संवेदनशील बना दिया है, जहां हर कदम अब पहले से ज्यादा अहम हो गया है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Bank

UP Bank Locker Scam: 96 Gold Packets गायब, करोड़ों की हेराफेरी का शक

उत्तर प्रदेश से एक चौंकाने वाला बैंकिंग मामला सामने आया है, जिसने आम लोगों से लेकर बैंकिंग सिस्टम तक में चिंता बढ़ा दी है। एक बैंक के लॉकर से 96 सोने के पैकेट गायब पाए गए हैं, जिसके बाद करोड़ों रुपये की हेराफेरी और गंभीर गड़बड़ी की आशंका जताई जा रही है। इस घटना के बाद बैंक में अफरा-तफरी का माहौल है और पूरे मामले की गहन जांच शुरू कर दी गई है। कैसे खुला पूरा मामला? यह मामला तब सामने आया जब बैंक में नियमित ऑडिट और लॉकर वेरिफिकेशन की प्रक्रिया चल रही थी। जांच के दौरान रिकॉर्ड और वास्तविक स्थिति में बड़ा अंतर पाया गया। दस्तावेजों में दर्ज 96 सोने के पैकेट लॉकर में मौजूद नहीं थे। इस गड़बड़ी ने बैंक प्रशासन को तुरंत अलर्ट कर दिया। तीन कर्मचारियों पर FIR, जांच तेज मामले में शुरुआती तौर पर बैंक के तीन कर्मचारियों के खिलाफ FIR दर्ज की गई है। आरोप है कि लॉकर सिस्टम में लापरवाही या संभावित मिलीभगत के जरिए यह बड़ी गड़बड़ी हुई हो सकती है। पुलिस ने केस दर्ज कर जांच शुरू कर दी है और कई अहम पहलुओं को खंगाला जा रहा है। जांच टीम अब बैंक के CCTV फुटेज, लॉकर एक्सेस लॉग, एंट्री रिकॉर्ड और आंतरिक दस्तावेजों की गहराई से जांच कर रही है ताकि यह पता लगाया जा सके कि यह गड़बड़ी कब और कैसे हुई। करोड़ों रुपये की हेराफेरी की आशंका प्रारंभिक अनुमान में इस पूरे मामले में करोड़ों रुपये के सोने की हेराफेरी की संभावना जताई जा रही है। हालांकि, असली नुकसान कितना है, यह पूरी जांच के बाद ही साफ हो पाएगा। फिलहाल बैंक और पुलिस दोनों ही किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचने से बच रहे हैं। बैंक प्रशासन का रिएक्शन बैंक अधिकारियों का कहना है कि इस मामले को बेहद गंभीरता से लिया गया है। उन्होंने भरोसा दिलाया है कि जांच पूरी तरह पारदर्शी होगी और अगर किसी कर्मचारी की भूमिका सामने आती है तो उस पर सख्त कार्रवाई की जाएगी। साथ ही ग्राहकों की सुरक्षा और संपत्ति को पूरी तरह सुरक्षित रखने का आश्वासन भी दिया गया है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Priyanka Gandhi

Priyanka Gandhi का सरकार पर हमला: NEET छात्रों से ₹1.32 लाख करोड़ वसूली, लोन माफी पर छिड़ा विवाद

देश में मेडिकल शिक्षा और NEET परीक्षा व्यवस्था को लेकर नया राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया है। कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने केंद्र सरकार पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा है कि NEET और मेडिकल एडमिशन के नाम पर छात्रों और उनके परिवारों से भारी रकम वसूली जा रही है। ₹1.32 लाख करोड़ वसूली का दावा प्रियंका गांधी ने दावा किया कि NEET सिस्टम के जरिए छात्रों से करीब ₹1.32 लाख करोड़ तक की राशि वसूली गई है। उन्होंने कहा कि यह आंकड़ा देश के शिक्षा बजट के लगभग बराबर है, जो चिंता का विषय है। लोन माफी पर भी सवाल उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि दूसरी तरफ बड़े उद्योगपतियों के लगभग ₹16 लाख करोड़ तक के लोन माफ किए गए हैं। इस तुलना को लेकर उन्होंने सरकार की आर्थिक प्राथमिकताओं पर सवाल उठाए हैं। राजनीतिक बहस तेज इस बयान के बाद राजनीतिक माहौल गरमा गया है और सोशल मीडिया से लेकर राजनीतिक गलियारों तक इस मुद्दे पर बहस तेज हो गई है। हालांकि, सरकार की ओर से इस पर अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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TMC

West Bengal Political Crisis TMC को झटका, ऋतब्रत बनर्जी की LoP कुर्सी बरकरार

पश्चिम बंगाल (West Bengal) की राजनीति में बड़ा उलटफेर देखने को मिल रहा है। विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष (Leader of Opposition) की नियुक्ति को लेकर चल रहे विवाद में मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और TMC को कलकत्ता हाईकोर्ट से फिलहाल कोई राहत नहीं मिली है। इस फैसले के बाद ऋतब्रत बनर्जी का LoP पद पर बने रहना तय माना जा रहा है, जिससे राज्य की सियासत और ज्यादा गरमा गई है। क्या है पूरा राजनीतिक विवाद? पूरा मामला तब शुरू हुआ जब विधानसभा में कुछ विधायकों के समर्थन के बाद ऋतब्रत बनर्जी को नेता प्रतिपक्ष घोषित किया गया। रिपोर्ट्स के अनुसार, उन्हें एक बड़े विधायक समूह का समर्थन मिला, जिससे सदन में शक्ति संतुलन बदल गया। इसके बाद विधानसभा स्पीकर ने उनके नाम पर मुहर लगाई, लेकिन टीएमसी के आधिकारिक गुट ने इस फैसले को असंवैधानिक बताते हुए विरोध दर्ज कराया। हाईकोर्ट का अहम फैसला टीएमसी की ओर से इस नियुक्ति को चुनौती दी गई और अदालत से अंतरिम रोक लगाने की मांग की गई। हालांकि, कलकत्ता हाईकोर्ट ने इस पर कोई स्टे देने से साफ इनकार कर दिया। इसका सीधा मतलब है कि मौजूदा स्थिति बनी रहेगी और ऋतब्रत बनर्जी फिलहाल विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष के पद पर कार्य करते रहेंगे। कोर्ट ने कहा कि मामले की विस्तृत सुनवाई आगे की तारीख में की जाएगी। टीएमसी में अंदरूनी तनाव बढ़ा इस फैसले के बाद टीएमसी के भीतर असंतोष और गहरा गया है। राजनीतिक हलकों में चर्चा है कि पार्टी में मतभेद अब खुलकर सामने आने लगे हैं। राजनीतिक असर क्या होगा? यह मामला सिर्फ एक पद का नहीं, बल्कि बंगाल की पूरी राजनीतिक दिशा को प्रभावित कर सकता है। ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली टीएमसी के लिए यह स्थिति एक बड़ी चुनौती मानी जा रही है, क्योंकि इससे पार्टी की एकता और विधानसभा में उसकी रणनीति दोनों पर असर पड़ सकता है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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अखिलेश यादव

UP Politics: अखिलेश यादव का ओपी राजभर पर हमला, कहा- ‘अफ़वाह मंत्री’ बने बैठे हैं

उत्तर प्रदेश की राजनीति एक बार फिर बयानबाज़ी और तकरार के केंद्र में आ गई है। समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव (Akhilesh Yadav) ने सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी (SBSP) प्रमुख Om Prakash Rajbhar के हालिया बयानों पर तीखा पलटवार करते हुए उन्हें “अफ़वाह मंत्री” कह दिया है। इस टिप्पणी के बाद यूपी की सियासत में नया विवाद खड़ा हो गया है। OP Rajbhar के बयान से शुरू हुआ विवाद दरअसल, ओपी राजभर लगातार समाजवादी पार्टी और विपक्षी नेताओं पर हमलावर रहे हैं। उनके कुछ बयानों को लेकर सियासी हलकों में बहस तेज हो गई थी। राजभर ने ऐसे दावे किए थे जिन पर सपा खेमे ने सवाल उठाए। इन्हीं बयानों के जवाब में अखिलेश यादव ने नाराज़गी जताते हुए कहा कि ओपी राजभर बार-बार बिना आधार की बातें करते हैं और जनता के बीच भ्रम पैदा करने की कोशिश करते हैं। Akhilesh Yadav का तीखा तंज अखिलेश यादव ने इस पूरे मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए ओपी राजभर को “अफ़वाह मंत्री” कहकर निशाना साधा। उनके इस बयान के बाद राजनीतिक गलियारों में हलचल और बढ़ गई है। सपा समर्थकों का कहना है कि अखिलेश यादव ने केवल जवाब दिया है, जबकि दूसरी तरफ राजभर समर्थक इसे राजनीतिक हमला बता रहे हैं। UP Politics में बढ़ी हलचल यूपी की राजनीति में पहले से ही गठबंधन और विपक्ष के बीच तनाव बना हुआ है। ऐसे में यह बयानबाज़ी आने वाले चुनावी माहौल को और प्रभावित कर सकती है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस तरह के तीखे बयान दोनों दलों के बीच दूरी को और बढ़ा सकते हैं। गठबंधन और विपक्ष की खींचतान ओपी राजभर वर्तमान में एनडीए गठबंधन का हिस्सा हैं, जबकि अखिलेश यादव विपक्ष की मजबूत आवाज बने हुए हैं। ऐसे में दोनों नेताओं के बीच यह टकराव सिर्फ बयानबाज़ी नहीं बल्कि राजनीतिक रणनीति का हिस्सा भी माना जा रहा है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Monsoon

Monsoon Delay in India: 8 जून से थमा मानसून, MP-UP-Rajasthan में अब 22 जून के बाद एंट्री

देशभर में मानसून (Monsoon)इस समय सुस्त पड़ गया है और करोड़ों लोग आसमान की ओर उम्मीद से देख रहे हैं। भीषण गर्मी और उमस के बीच मानसून की रफ्तार थमने से किसानों की चिंता भी बढ़ गई है। भारतीय मौसम विभाग (IMD) के ताज़ा अपडेट के अनुसार 8 जून के बाद मानसून की प्रगति लगभग रुक गई है और अब मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश और राजस्थान में बारिश की बड़ी एंट्री 22 जून के बाद होने की संभावना जताई जा रही है। देश में 37.8% कम बारिश, हालात सामान्य से नीचे मौसम विभाग के आंकड़े बताते हैं कि इस साल 1 जून से अब तक देश में सामान्य से करीब 37.8% कम बारिश दर्ज की गई है। यह गिरावट सिर्फ आंकड़ों तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका असर खेतों, फसलों और आम जीवन पर साफ दिखाई दे रहा है। गर्मी बढ़ रही है, नमी कम है और कई राज्यों में बारिश का लंबा इंतजार लोगों की परेशानी बढ़ा रहा है। क्यों रुका हुआ है मानसून? मौसम विशेषज्ञों के अनुसार इस बार मानसून की रफ्तार रुकने के पीछे कई कारण हैं: इन्हीं कारणों से दिल्ली, यूपी, एमपी, राजस्थान और बिहार जैसे राज्यों में बारिश काफी कम हो रही है। MP, UP और राजस्थान में कब होगी बारिश? IMD के मुताबिक सबसे बड़ी राहत 22 जून के बाद मिल सकती है। बंगाल की खाड़ी में नया सिस्टम बनने के संकेत हैं, जो मानसून को फिर से सक्रिय कर सकता है। यदि परिस्थितियां अनुकूल रहीं तो: किसानों की बढ़ती चिंता इस देरी का सबसे बड़ा असर किसानों पर पड़ रहा है। खरीफ सीजन की बुवाई लगभग तैयार है, लेकिन बारिश न होने से काम रुक रहा है। कई किसान अब हर दिन मौसम अपडेट पर नजर रख रहे हैं और खेतों में उम्मीद के साथ तैयारी कर रहे हैं। ग्रामीण इलाकों में यह इंतजार अब चिंता में बदलता जा रहा है। लगातार तीसरे साल जून में मानसून ब्रेक यह लगातार तीसरा साल है जब जून के मध्य में मानसून ने लंबा ब्रेक लिया है। हालांकि मौसम वैज्ञानिक इसे पूरी तरह असामान्य नहीं मानते, लेकिन यह ट्रेंड चिंता जरूर बढ़ा रहा है। क्या आगे सुधरेगा मौसम? विशेषज्ञों का कहना है कि आने वाले दिनों में मौसम में बदलाव संभव है। बंगाल की खाड़ी में बनने वाला सिस्टम मानसून को दोबारा गति दे सकता है। अगर यह अनुमान सही साबित हुआ तो जून के आखिरी सप्ताह में मध्य और उत्तर भारत में अच्छी बारिश का दौर शुरू हो सकता है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Sugar

Sugar Rate Hike: त्योहारों से पहले चीनी के दाम बढ़े, Blinkit-Swiggy पर खरीदना हुआ Limited

चीनी (Sugar), जो हर घर की रसोई की रोजमर्रा की जरूरत है, इन दिनों लोगों की जेब पर भारी पड़ रही है। पिछले कुछ हफ्तों में चीनी के दाम तेजी से बढ़े हैं। इसी बीच Blinkit, Swiggy Instamart, BigBasket और D-Mart जैसे रिटेल और क्विक-कॉमर्स प्लेटफॉर्म्स पर चीनी की खरीद को लेकर लिमिट लगाई गई है। कई जगहों पर ग्राहक एक बार में 3 से 5 किलो तक ही चीनी खरीद पा रहे हैं। यानी अगर घर में ज्यादा मात्रा में चीनी खरीदने की जरूरत है, तो एक साथ बड़ी खरीदारी करना अब आसान नहीं है। Sugar Price: एक महीने में तेजी से बढ़े दाम Sugar की कीमतों में हालिया तेजी ने आम परिवारों की चिंता बढ़ा दी है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, जुलाई में चीनी की औसत खुदरा कीमत करीब ₹48 प्रति किलो के आसपास थी, जो अगस्त में बढ़कर ₹55 से ऊपर पहुंच गई। इसके बाद कुछ बाजारों में कीमतें और ऊपर गई हैं। शहर और बाजार के हिसाब से कीमतों में अंतर जरूर है, लेकिन जिस रफ्तार से दाम बढ़े हैं, उसका असर घर के मासिक बजट पर साफ दिखाई दे रहा है। Online Grocery पर क्यों लगाई गई खरीद Limit? Blinkit और Swiggy Instamart जैसे क्विक-कॉमर्स प्लेटफॉर्म्स पर खरीदारी की लिमिट लगाए जाने के पीछे मुख्य वजह उपलब्ध स्टॉक को संतुलित रखना मानी जा रही है। त्योहारी सीजन में चीनी की मांग अचानक बढ़ जाती है। मिठाइयों से लेकर घर में बनने वाले पकवानों तक, इस दौरान चीनी की खपत सामान्य दिनों की तुलना में बढ़ जाती है। ऐसे में कंपनियां ज्यादा मात्रा में खरीदारी को रोककर स्टॉक को ज्यादा ग्राहकों तक पहुंचाने की कोशिश कर रही हैं। हालांकि, यह लिमिट हर जगह एक जैसी नहीं है। कुछ स्थानों पर 5 किलो तक की खरीद की अनुमति है, जबकि कुछ जगहों पर इससे कम मात्रा की सीमा दिखाई दे रही है। चीनी महंगी होने की क्या है वजह? चीनी के दाम बढ़ने के पीछे कई कारण सामने आ रहे हैं। घरेलू उत्पादन में कमी, मौसम से जुड़ी परेशानियां, बढ़ती मांग और बाजार में स्टॉक को लेकर गतिविधियां कीमतों पर दबाव बना रही हैं। त्योहारी सीजन भी इस समय एक बड़ा फैक्टर है। रक्षाबंधन के बाद अब आने वाले त्योहारों में मिठाइयों और अन्य खाद्य पदार्थों की मांग बढ़ने की उम्मीद है। इसका सीधा असर चीनी की खपत पर पड़ सकता है। सरकार ने Duty-Free Sugar Import को दी मंजूरी बढ़ती कीमतों पर लगाम लगाने और घरेलू बाजार में सप्लाई बढ़ाने के लिए केंद्र सरकार ने 10 लाख टन कच्ची चीनी के Duty-Free Import की अनुमति दी है। सरकार का लक्ष्य बाजार में पर्याप्त उपलब्धता बनाए रखना और कीमतों पर दबाव कम करना है। इसके अलावा बड़े थोक खरीदारों के लिए चीनी का स्टॉक रखने की सीमा में भी बदलाव किया गया है। इससे बाजार में जरूरत से ज्यादा चीनी जमा करने की गतिविधियों पर रोक लगाने की कोशिश की जा रही है। आम लोगों के लिए क्या मतलब? फिलहाल इसका सबसे सीधा असर उन परिवारों पर पड़ रहा है, जो महीने का राशन एक साथ खरीदते हैं। जहां दुकानों या ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर खरीद सीमा लागू है, वहां लोगों को जरूरत के हिसाब से छोटी मात्रा में चीनी खरीदनी पड़ सकती है। दूसरी तरफ, सरकार की ओर से सप्लाई बढ़ाने के कदमों के बाद बाजार में स्थिति सामान्य होने की उम्मीद है। अगर नई चीनी समय पर बाजार में पहुंचती है और त्योहारी मांग के मुताबिक स्टॉक उपलब्ध रहता है, तो कीमतों में आगे राहत मिल सकती है। Sugar Price पर आगे रहेगी नजर चीनी के बढ़ते दाम इस समय सिर्फ घरेलू बजट का मुद्दा नहीं हैं, बल्कि आने वाले त्योहारी सीजन के लिए भी अहम हैं। सरकार, मिलों और रिटेल कंपनियों के फैसलों पर अब बाजार की नजर रहेगी। फिलहाल ग्राहकों के लिए बेहतर यही है कि जरूरत के मुताबिक ही खरीदारी करें और अलग-अलग दुकानों या ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स पर कीमतों की तुलना कर लें। आने वाले दिनों में सप्लाई की स्थिति साफ होने के साथ चीनी के दाम में भी बदलाव देखने को मिल सकता है।
Gold-Silver

Gold-Silver Price: त्योहार से पहले मिली राहत, सोना-चांदी के दाम में बड़ी गिरावट

Gold-Silver Price Today: रक्षाबंधन की खरीदारी के बीच सोना और चांदी खरीदने वालों के लिए बाजार से राहत वाली खबर आई है। 27 अगस्त 2026 को सोने और चांदी दोनों के भाव में गिरावट दर्ज की गई। 24 कैरेट सोना करीब ₹2,860 प्रति 10 ग्राम सस्ता होकर ₹1,58,477 पर आ गया। वहीं, 1 किलो चांदी का भाव ₹2,791 घटकर करीब ₹2,40,168 रह गया। त्योहार से ठीक पहले कीमतों में आई इस कमी से उन लोगों को थोड़ी राहत मिल सकती है, जो राखी के मौके पर बहन या परिवार के लिए सोने-चांदी की ज्वेलरी खरीदने का मन बना रहे हैं। Gold Price Today: सोने के भाव में ₹2,860 की गिरावट 27 अगस्त को 24 कैरेट सोने की कीमत में अच्छी-खासी गिरावट देखने को मिली। IBJA आधारित आंकड़ों के अनुसार, सोना करीब ₹2,860 प्रति 10 ग्राम टूटकर ₹1,58,477 पर पहुंच गया। वहीं, 23 कैरेट सोना करीब ₹1,57,842, 22 कैरेट सोना लगभग ₹1,45,165 और 18 कैरेट सोना करीब ₹1,18,858 प्रति 10 ग्राम के स्तर पर रहा। हालांकि, यहां एक बात ध्यान रखना जरूरी है कि शहर और ज्वेलर के हिसाब से Gold Rate थोड़ा अलग हो सकता है। ज्वेलरी खरीदते समय मेकिंग चार्ज और दूसरे शुल्क भी जुड़ते हैं। Silver Price Today: चांदी भी हुई ₹2,791 सस्ती सोने के साथ चांदी की कीमत में भी गिरावट आई है। 1 किलो चांदी का भाव ₹2,791 कम होकर करीब ₹2,40,168 पर आ गया। चांदी में पिछले दिनों तेजी देखने को मिली थी, इसलिए मौजूदा गिरावट के बावजूद इसका भाव काफी ऊंचे स्तर पर बना हुआ है। त्योहारों और शादी-ब्याह के सीजन में चांदी की मांग बढ़ने से इसकी कीमत पर भी असर पड़ सकता है। Raksha Bandhan से पहले क्यों खास है Gold-Silver Price? रक्षाबंधन के मौके पर लोग सिर्फ राखी और मिठाई ही नहीं खरीदते, बल्कि कई परिवार इस दिन सोने या चांदी की छोटी ज्वेलरी खरीदना भी पसंद करते हैं। ऐसे में त्योहार से एक दिन पहले Gold और Silver के दाम में आई गिरावट खरीदारों के लिए अच्छी खबर मानी जा रही है। अगर आप भी खरीदारी की तैयारी कर रहे हैं तो बाजार में जाने से पहले अपने शहर का ताजा रेट जरूर देख लें। ऑनलाइन दिखने वाला IBJA या बुलियन रेट और ज्वेलरी शॉप का अंतिम बिल एक जैसा होना जरूरी नहीं है। सोना खरीदते समय इन बातों का रखें ध्यान सोने की ज्वेलरी खरीदते समय केवल Gold Rate देखना काफी नहीं है। बिल बनते समय मेकिंग चार्ज, GST और अन्य शुल्क जुड़ सकते हैं। इसलिए खरीदारी से पहले ज्वेलर से पूरी कीमत का ब्रेकअप मांगना बेहतर रहेगा। साथ ही, सोने की शुद्धता के लिए BIS Hallmark जरूर जांचें। इससे आपको खरीदे जा रहे सोने की शुद्धता के बारे में भरोसा मिलता है। आगे क्या हो सकता है Gold और Silver का भाव? सोने और चांदी की कीमतों में आगे भी उतार-चढ़ाव बना रह सकता है। अंतरराष्ट्रीय बाजार, डॉलर की चाल, ब्याज दरों की उम्मीद और निवेशकों की खरीदारी जैसे कई फैक्टर कीमती धातुओं के भाव को प्रभावित करते हैं। इसलिए आज आई गिरावट को देखकर यह तय नहीं किया जा सकता कि आने वाले दिनों में कीमतें लगातार नीचे जाएंगी। बाजार की चाल बदलने में ज्यादा समय नहीं लगता। Gold-Silver Price Today का सीधा अपडेट रक्षाबंधन से पहले 24 कैरेट Gold करीब ₹2,860 सस्ता होकर ₹1,58,477 प्रति 10 ग्राम और Silver करीब ₹2,791 गिरकर ₹2,40,168 प्रति किलो पर आ गई है। अगर आप आज सोना या चांदी खरीदने जा रहे हैं, तो अंतिम खरीदारी से पहले अपने स्थानीय बाजार का लेटेस्ट रेट जरूर जांचें।
Raksha Bandhan

Raksha Bandhan 2026: राखी बांधने से पहले जान लें Bhadra का समय, ये है शुभ Muhurat

Raksha Bandhan 2026: भाई-बहन के रिश्ते में प्यार, अपनापन और थोड़ी-सी नोकझोंक हमेशा बनी रहती है। इन्हीं खूबसूरत रिश्तों को सेलिब्रेट करने वाला रक्षाबंधन इस बार 28 अगस्त 2026, शुक्रवार को मनाया जाएगा। राखी को लेकर इस बार एक सवाल काफी लोगों के मन में है—27 अगस्त या 28 अगस्त, आखिर किस दिन भाई की कलाई पर राखी बांधना शुभ रहेगा? पंचांग के अनुसार सावन पूर्णिमा 27 अगस्त की सुबह शुरू होगी और 28 अगस्त की सुबह तक रहेगी। उदया तिथि के आधार पर रक्षाबंधन 28 अगस्त को मनाया जाएगा। Raksha Bandhan 2026 Date: 27 या 28 अगस्त? रक्षाबंधन सावन मास की पूर्णिमा तिथि पर मनाया जाता है। इस साल पूर्णिमा तिथि 27 अगस्त की सुबह करीब 9 बजे के बाद शुरू होकर 28 अगस्त की सुबह करीब 9:48 बजे तक रहेगी। चूंकि 28 अगस्त को सूर्योदय के समय पूर्णिमा तिथि मौजूद रहेगी, इसलिए इसी दिन रक्षाबंधन मनाने की परंपरा रहेगी। यानी बहनें 28 अगस्त को भाई की कलाई पर राखी बांध सकती हैं। Rakhi Shubh Muhurat 2026: इस समय बांधें राखी 28 अगस्त को राखी बांधने के लिए सुबह का समय शुभ माना जा रहा है। उपलब्ध पंचांग गणना के अनुसार सुबह करीब 5:57 बजे से 9:48 बजे तक राखी बांधने का समय बताया गया है। हालांकि, शुभ मुहूर्त में शहर के सूर्योदय और स्थानीय पंचांग के अनुसार थोड़ा अंतर हो सकता है। इसलिए अगर आप किसी खास शहर में हैं, तो वहां के पंचांग से समय जरूर मिला लें। Bhadra Kaal: इस बार नहीं होगी बड़ी परेशानी रक्षाबंधन पर भद्रा का विशेष ध्यान रखा जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार भद्रा के दौरान राखी बांधना शुभ नहीं माना जाता। यही वजह है कि हर साल राखी बांधने से पहले लोग भद्रा समाप्त होने का इंतजार करते हैं। इस बार राहत की बात यह है कि 28 अगस्त को राखी बांधने के प्रमुख समय में भद्रा का प्रभाव नहीं रहेगा। ऐसे में बहनों को राखी बांधने के लिए भद्रा खत्म होने का लंबा इंतजार नहीं करना पड़ेगा। Raksha Bandhan 2026: एक नजर में पूरी जानकारी जानकारी विवरण रक्षाबंधन 28 अगस्त 2026, शुक्रवार पर्व सावन पूर्णिमा पूर्णिमा शुरुआत 27 अगस्त की सुबह पूर्णिमा समाप्त 28 अगस्त की सुबह करीब 9:48 बजे राखी बांधने का शुभ समय सुबह करीब 5:57 से 9:48 बजे तक भद्रा 28 अगस्त के प्रमुख राखी मुहूर्त में नहीं Rakhi बांधने की पूजा विधि रक्षाबंधन के दिन सुबह स्नान करके भगवान का ध्यान करें और पूजा की तैयारी करें। राखी की थाली में रोली या कुमकुम, अक्षत, दीपक, फूल, मिठाई और राखी रखें। भाई को आसन पर बैठाकर पहले तिलक लगाएं। इसके बाद अक्षत लगाकर आरती करें और शुभ मुहूर्त में उसकी कलाई पर राखी बांधें। फिर मिठाई खिलाकर भाई के सुखी और खुशहाल जीवन की कामना करें। भाई भी बहन को प्यार और सम्मान के साथ उपहार देता है और हर परिस्थिति में उसके साथ खड़े रहने का संकल्प करता है। Raksha Bandhan का असली मतलब क्या है? राखी का धागा देखने में भले ही छोटा हो, लेकिन इसके पीछे छिपी भावना बहुत बड़ी है। बचपन में एक-दूसरे से लड़ने वाले भाई-बहन जब बड़े होते हैं तो यही रिश्ता सबसे मजबूत सहारा बन जाता है। रक्षाबंधन इसी भरोसे और अपनापन को फिर से महसूस करने का दिन है। इसलिए इस बार राखी बांधते समय सिर्फ मुहूर्त ही नहीं, बल्कि उस रिश्ते की मिठास को भी याद रखें, जो जिंदगी के हर पड़ाव पर साथ चलती है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
Kanpur

Kanpur Plane Crash: अचानक नीचे गिरा Training Plane, दो पायलटों की मौत

उत्तर प्रदेश के कानपुर (Kanpur) से गुरुवार को एक बेहद दुखद खबर सामने आई। गंगा बैराज के पास नत्थूपुरवा गांव के नजदीक एक Twin-Engine Training Aircraft खेत में दुर्घटनाग्रस्त हो गया। विमान में सवार इंस्ट्रक्टर पायलट और ट्रेनी पायलट की मौत हो गई। हादसे के बाद मौके पर पहुंची पुलिस और रेस्क्यू टीमों ने इलाके को घेरकर राहत एवं बचाव कार्य शुरू किया। Training Flight के दौरान हुआ हादसा मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक विमान ट्रेनिंग उड़ान पर था और इसी दौरान हादसे का शिकार हो गया। यह चार सीटों वाला ट्विन-इंजन विमान था। शुरुआती जानकारी में बताया गया कि विमान नीचे गिरने से पहले आसपास के लोगों ने तेज आवाज सुनी थी। हालांकि, उस आवाज की वजह क्या थी, इसे लेकर अभी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। बताया जा रहा है कि विमान गंगा बैराज के करीब नत्थूपुरवा गांव के पास खुले खेत में गिरा। हादसा आबादी वाले इलाके से कुछ दूरी पर हुआ, जिसके बाद स्थानीय लोगों की भीड़ मौके पर जमा हो गई। हादसे के बाद मची अफरा-तफरी विमान के खेत में गिरने की सूचना मिलते ही पुलिस और इमरजेंसी टीमें घटनास्थल पर पहुंचीं। दुर्घटनाग्रस्त विमान बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया था और उसका मलबा खेत में बिखरा मिला। पुलिस ने घटनास्थल को सुरक्षित किया और दोनों पायलटों को मलबे से बाहर निकालने की कोशिश की, लेकिन उनकी जान नहीं बचाई जा सकी। शुरुआती रिपोर्टों में एक पायलट की मौत और दूसरे के गंभीर रूप से घायल होने की जानकारी सामने आई थी। बाद में पुलिस अधिकारियों के हवाले से दोनों पायलटों की मौत की पुष्टि हुई। Crash की असली वजह अभी सामने नहीं आई कानपुर Plane Crash की वजह फिलहाल साफ नहीं है। शुरुआती स्तर पर विमान के अचानक नियंत्रण खोने और नीचे गिरने की बात सामने आई है, लेकिन तकनीकी खराबी, इंजन से जुड़ी समस्या या किसी अन्य कारण की आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है। अधिकारियों की ओर से दुर्घटना की परिस्थितियों की जांच की जा रही है। विमान के मलबे, उड़ान से जुड़ी जानकारी और घटनास्थल से मिले सबूतों की जांच के बाद ही Crash की वास्तविक वजह सामने आ सकेगी। Aviation Safety पर फिर उठे सवाल कानपुर में हुआ यह हादसा Flight Training के दौरान सुरक्षा इंतजामों को लेकर भी सवाल खड़े करता है। हालांकि, अभी किसी निष्कर्ष पर पहुंचना जल्दबाजी होगी। जांच पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि हादसा किस वजह से हुआ और क्या इसके पीछे कोई तकनीकी या संचालन संबंधी कारण था। फिलहाल प्रशासन की टीमें घटनास्थल पर मौजूद हैं और मामले की जांच आगे बढ़ाई जा रही है। कानपुर विमान हादसे से जुड़ी नई जानकारी जांच एजेंसियों की रिपोर्ट के बाद ही सामने आएगी। Kanpur Plane Crash Latest Update: गंगा बैराज के पास Training Aircraft के क्रैश होने से दो पायलटों की मौत ने इलाके में शोक का माहौल पैदा कर दिया है। हादसे की पूरी तस्वीर जांच के बाद ही साफ होगी।
Share Market

Share Market Today: Sensex 77,250 के करीब, Nifty भी टूटा; जानें बाजार में क्यों आई गिरावट

भारतीय शेयर बाजार (Indian Share Market) में गुरुवार, 27 अगस्त को कारोबार के दौरान उतार-चढ़ाव देखने को मिला। शुरुआती कारोबार में Sensex और Nifty बढ़त के साथ खुले, लेकिन कुछ ही देर बाद बाजार की चाल बदल गई। बिकवाली बढ़ने से दोनों प्रमुख इंडेक्स लाल निशान में पहुंच गए। सुबह 10:30 बजे Sensex 123.89 अंक की गिरावट के साथ 77,349.05 पर था, जबकि Nifty 24.60 अंक टूटकर 24,183.15 पर कारोबार कर रहा था। Sensex-Nifty पर बढ़ा दबाव गुरुवार की शुरुआत बाजार के लिए सकारात्मक रही। Nvidia के मजबूत नतीजों और कच्चे तेल की कीमतों में नरमी से निवेशकों को कुछ राहत मिली, लेकिन यह बढ़त ज्यादा देर टिक नहीं पाई। Nifty 24,200 के स्तर के नीचे चला गया, वहीं Sensex भी शुरुआती बढ़त गंवाकर कमजोर हो गया। इससे पहले सुबह 10:13 बजे Reuters के आंकड़ों में Sensex 77,379.50 और Nifty 24,191.85 पर था। यानी उस समय दोनों इंडेक्स में हल्की गिरावट दर्ज की जा रही थी। FMCG और Media Shares में बिकवाली सेक्टोरल कारोबार की बात करें तो FMCG शेयरों पर दबाव नजर आया। शुरुआती कारोबार में Nifty FMCG इंडेक्स भी लाल निशान में था। इसके साथ ही Media शेयरों में भी कमजोरी देखने को मिली। सुबह 10:30 बजे Nifty Media करीब 0.60 फीसदी नीचे 1,601.30 पर कारोबार कर रहा था। Media इंडेक्स इससे पहले लगातार दो कारोबारी सत्रों में बढ़त दर्ज कर चुका था। ऐसे में आज की गिरावट को कुछ हद तक मुनाफावसूली से भी जोड़कर देखा जा रहा है। HDFC Bank बना बाजार पर दबाव का बड़ा कारण आज बाजार में HDFC Bank का प्रदर्शन भी निवेशकों के रडार पर रहा। शेयर में करीब 1 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई। Reuters के मुताबिक, अमेरिका में बैंक और उसके दो वरिष्ठ अधिकारियों के खिलाफ दायर एक securities lawsuit की खबर के बाद शेयर पर दबाव बढ़ा। Upstox के अनुसार, HDFC Bank में बिकवाली के चलते Sensex दिन के ऊपरी स्तर से करीब 300 अंक नीचे आया, जबकि Nifty 24,200 के महत्वपूर्ण स्तर के नीचे फिसल गया। Global Market से मिले-जुले संकेत भारतीय बाजार को एक तरफ Nvidia के मजबूत नतीजों और कच्चे तेल की कीमतों में नरमी से सहारा मिला। Brent crude करीब 87.4 डॉलर प्रति बैरल तक आ गया था। ईरान और ओमान के बीच Strait of Hormuz को लेकर बातचीत आगे बढ़ने की खबरों से तेल आपूर्ति को लेकर चिंता कुछ कम हुई है। दूसरी ओर, अमेरिकी महंगाई के आंकड़ों को लेकर बनी चिंता ने निवेशकों को थोड़ा सतर्क रखा। यही वजह रही कि एशियाई बाजारों में मजबूती के बावजूद भारतीय बाजार में तेजी टिक नहीं सकी। निवेशकों की नजर अब बाजार की अगली चाल पर फिलहाल घरेलू बाजार में तस्वीर पूरी तरह साफ नहीं है। एक तरफ कच्चे तेल में नरमी और मजबूत ग्लोबल टेक्नोलॉजी संकेत सकारात्मक हैं, तो दूसरी तरफ HDFC Bank जैसे बड़े शेयरों में कमजोरी और सेक्टोरल बिकवाली बाजार पर दबाव बना रही है। ऐसे माहौल में Sensex और Nifty की आगे की दिशा, 24,200 के आसपास Nifty की चाल और प्रमुख सेक्टर्स में खरीदारी-बिकवाली पर निवेशकों की नजर रहेगी। बाजार में उतार-चढ़ाव को देखते हुए किसी भी निवेश निर्णय से पहले अपने वित्तीय सलाहकार की राय लेना बेहतर है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!

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