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पुरी जगन्नाथ रथयात्रा में भगदड़: एक श्रद्धालु की मौत, बारिश के बीच 10 लाख से अधिक लोग पहुंचे

ओडिशा के पुरी में गुरुवार को आयोजित विश्वप्रसिद्ध भगवान जगन्नाथ रथयात्रा के दौरान भगदड़ मच गई। हादसे में एक श्रद्धालु की मौत हो गई, जबकि कई लोगों की तबीयत बिगड़ने के बाद उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया। घटना शाम करीब 5 बजे उस समय हुई, जब पारंपरिक पहांडी रस्म के दौरान भगवान जगन्नाथ के दर्शन के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु रथों की ओर बढ़ने लगे। भीड़ बढ़ने से मची अफरा-तफरी प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, यात्रा मार्ग पर तैनात स्वयंसेवक (वॉलेंटियर) भीड़ को नियंत्रित करने और लोगों को पीछे हटाने का प्रयास कर रहे थे। इसी दौरान अचानक धक्का-मुक्की शुरू हो गई, जिससे भगदड़ जैसी स्थिति बन गई। अफरा-तफरी में कई लोग एक-दूसरे पर गिर पड़े और कुछ श्रद्धालुओं को सांस लेने में तकलीफ होने लगी। उन्हें तत्काल अस्पताल पहुंचाया गया। तेज बारिश के बीच उमड़ी भारी भीड़ हादसे के समय पुरी में तेज बारिश हो रही थी। इसके बावजूद रथयात्रा मार्ग पर 10 लाख से अधिक श्रद्धालुओं की मौजूदगी रही। भारी भीड़ और खराब मौसम के कारण व्यवस्था बनाए रखने में प्रशासन को काफी मशक्कत करनी पड़ी। शाम को आगे बढ़ा भगवान जगन्नाथ का रथ भगदड़ की घटना के बाद कुछ समय के लिए रथयात्रा प्रभावित रही। शाम करीब 7:30 बजे भगवान जगन्नाथ का रथ आगे बढ़ाया गया, लेकिन कुछ ही दूरी तय करने के बाद पहले दिन की यात्रा रोक दी गई। अब यात्रा शुक्रवार सुबह दोबारा शुरू होगी और लगभग 3 किलोमीटर दूर स्थित गुंडीचा मंदिर तक पहुंचेगी। पहले भी हो चुके हैं ऐसे हादसे पुरी की जगन्नाथ रथयात्रा के दौरान इससे पहले भी भगदड़ की घटनाएं सामने आ चुकी हैं। 18 जुलाई 2015 नवकलेवर वर्ष होने के कारण लाखों श्रद्धालु पुरी पहुंचे थे। भगवान बलभद्र के रथ के पास अचानक भीड़ बढ़ने से भगदड़ मच गई थी। हादसे में दो महिलाओं की मौत हुई थी, जबकि छह लोग घायल हुए थे। 29 जून 2025 गुंडिचा मंदिर के बाहर सरधाबली क्षेत्र में दर्शन के लिए जुटी भारी भीड़ के बीच भगदड़ मच गई थी। इस हादसे में तीन श्रद्धालुओं की मौत हुई थी और 50 से अधिक लोग घायल हुए थे। घटना के बाद राज्य सरकार ने न्यायिक जांच के आदेश दिए थे तथा लापरवाही के आरोप में कई अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई भी की गई थी। देश-दुनिया, धर्म और ताजा खबरों के लिए विजिट करें:deshharpal.com
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ISRO में वैज्ञानिकों के इस्तीफों पर सख्ती: गगनयान समेत अहम मिशनों को देखते हुए DoS ने बदले नियम

नई दिल्ली। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) के वैज्ञानिकों और तकनीकी कर्मचारियों के इस्तीफों तथा स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति (VRS) को लेकर सरकार ने नई व्यवस्था लागू की है। अंतरिक्ष विभाग (Department of Space – DoS) ने 14 जुलाई को जारी निर्देश में कहा है कि अब ग्रुप-ए वैज्ञानिक एवं तकनीकी कर्मचारियों के इस्तीफे या VRS आवेदन पहले की तरह सामान्य प्रक्रिया के तहत मंजूर नहीं किए जाएंगे। सरकार का मानना है कि हाल के महीनों में वैज्ञानिकों के बढ़ते इस्तीफों का असर गगनयान सहित कई राष्ट्रीय महत्व की अंतरिक्ष परियोजनाओं पर पड़ सकता है। अब अंतिम फैसला करेगा अंतरिक्ष विभाग नए आदेश के अनुसार, ISRO के विभिन्न केंद्रों से आने वाले वैज्ञानिकों और तकनीकी अधिकारियों के इस्तीफे या VRS आवेदन अब संबंधित केंद्र निदेशक की स्पष्ट सिफारिश के साथ सीधे अंतरिक्ष विभाग को भेजे जाएंगे। इन मामलों में अंतिम मंजूरी अब विभाग स्तर पर ही दी जाएगी। इससे पहले वर्ष 2020 में ISRO के केंद्र निदेशकों को ऐसे मामलों में निर्णय लेने का अधिकार दिया गया था। किन केंद्रों पर लागू होंगे नए नियम यह निर्देश ISRO के कई प्रमुख संस्थानों को भेजा गया है, जिनमें शामिल हैं— 10 महीनों में 100 से ज्यादा वैज्ञानिकों ने छोड़ी नौकरी मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, पिछले लगभग 10 महीनों में 100 से अधिक वैज्ञानिक और तकनीकी कर्मचारी ISRO छोड़ चुके हैं। सबसे अधिक इस्तीफे बेंगलुरु स्थित यूआर राव सैटेलाइट सेंटर (URSC) और तिरुवनंतपुरम के विक्रम साराभाई स्पेस सेंटर (VSSC) से सामने आए हैं। इस्तीफा देने वालों में वरिष्ठ वैज्ञानिक विक्टर जोसेफ टी भी शामिल हैं। वे VSSC में GSLV Mk-III (LVM3) परियोजना के प्रोजेक्ट डायरेक्टर रह चुके हैं। यही लॉन्च व्हीकल भविष्य के गगनयान मिशन में इस्तेमाल किया जाएगा। निजी स्पेस स्टार्टअप्स की ओर बढ़ रहा रुझान रिपोर्ट्स के मुताबिक, ISRO छोड़ने वाले कई वैज्ञानिक अब निजी अंतरिक्ष कंपनियों से जुड़ रहे हैं। वर्ष 2020 में अंतरिक्ष क्षेत्र को निजी कंपनियों के लिए खोलने और भारतीय अंतरिक्ष नीति 2023 लागू होने के बाद देश में स्पेस स्टार्टअप्स की संख्या तेजी से बढ़ी है। वर्तमान में भारत में 400 से अधिक पंजीकृत स्पेस स्टार्टअप्स कार्यरत हैं, जिनमें अब तक करीब 500 मिलियन डॉलर का निवेश हो चुका है। केवल वर्ष 2025 में ही इस क्षेत्र में लगभग 150 मिलियन डॉलर का निवेश दर्ज किया गया। प्रमुख भारतीय स्पेस स्टार्टअप्स में शामिल हैं— पूर्व ISRO प्रमुख भी स्टार्टअप से जुड़े ISRO के पूर्व चेयरमैन एस. सोमनाथ भी अब चेन्नई स्थित स्पेस स्टार्टअप अग्निकुल कॉसमॉस के बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स में ऑब्जर्वर के रूप में शामिल हो चुके हैं। उन्होंने जनवरी 2025 तक ISRO का नेतृत्व किया और उनके कार्यकाल में चंद्रयान-3 की ऐतिहासिक सफलता तथा आदित्य-L1 मिशन का प्रक्षेपण हुआ। लगातार दो PSLV मिशन रहे असफल हाल के समय में ISRO को कुछ तकनीकी चुनौतियों का भी सामना करना पड़ा है। इन घटनाओं ने ISRO की भविष्य की परियोजनाओं को लेकर चुनौतियां बढ़ा दी हैं। कई बड़े मिशनों पर जारी है काम चुनौतियों के बावजूद ISRO अपने महत्वाकांक्षी मिशनों पर तेजी से काम कर रहा है। इनमें शामिल हैं— इनमें सबसे महत्वपूर्ण गगनयान मिशन है, जिसके सफल होने पर भारत अपने दम पर इंसानों को अंतरिक्ष भेजने वाला दुनिया का चौथा देश बन जाएगा। विज्ञान, अंतरिक्ष और तकनीक से जुड़ी ताजा खबरों के लिए विजिट करें:deshharpal.com
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विप्रो का Q1 मुनाफा 3,352 करोड़ रुपये, ₹2 प्रति शेयर डिविडेंड का ऐलान; रेवेन्यू अनुमान से रहा कम

नई दिल्ली। आईटी सेक्टर की दिग्गज कंपनी विप्रो लिमिटेड ने वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही (अप्रैल-जून) के वित्तीय नतीजे जारी कर दिए हैं। कंपनी का कॉन्सोलिडेटेड नेट प्रॉफिट सालाना आधार पर 0.6% बढ़कर 3,352 करोड़ रुपये रहा। पिछले वित्त वर्ष की समान तिमाही में कंपनी ने 3,330 करोड़ रुपये का शुद्ध लाभ दर्ज किया था। तिमाही नतीजों के साथ कंपनी के बोर्ड ने ₹2 प्रति इक्विटी शेयर के अंतरिम डिविडेंड को भी मंजूरी दी है। रेवेन्यू में 10.6% की बढ़ोतरी, लेकिन अनुमान से कम पहली तिमाही में विप्रो का कॉन्सोलिडेटेड रेवेन्यू बढ़कर 24,479 करोड़ रुपये रहा, जो पिछले साल की समान अवधि की तुलना में 10.6% अधिक है। हालांकि, यह आंकड़ा बाजार विश्लेषकों के अनुमान से थोड़ा कम रहा। रॉयटर्स-LSEG के अनुसार, विश्लेषकों ने कंपनी का रेवेन्यू लगभग 24,776 करोड़ रुपये रहने का अनुमान लगाया था। तिमाही आधार (QoQ) पर कंपनी के कुल राजस्व में करीब 1% की बढ़ोतरी दर्ज की गई। आईटी सर्विसेज कारोबार में मिली-जुली तस्वीर विप्रो के प्रमुख आईटी सर्विसेज बिजनेस का राजस्व 2.61 बिलियन डॉलर रहा। वहीं, कॉन्सटेंट करेंसी के आधार पर आईटी सर्विसेज रेवेन्यू में: बड़ी डील्स में 12.9% की शानदार बढ़ोतरी तिमाही के दौरान कंपनी की कुल बुकिंग 3.37 बिलियन डॉलर रही, जो पिछली तिमाही की तुलना में 2.4% कम है। हालांकि, बड़ी डील्स (Large Deals) की बुकिंग में 12.9% की वृद्धि दर्ज की गई और यह बढ़कर 1.63 बिलियन डॉलर तक पहुंच गई। इसे कंपनी के लिए सकारात्मक संकेत माना जा रहा है। ऑपरेटिंग मार्जिन और एट्रिशन विप्रो का आईटी सर्विसेज ऑपरेटिंग मार्जिन इस तिमाही में 16% रहा। इस दौरान कंपनी का ऑपरेटिंग कैश फ्लो 3,288 करोड़ रुपये रहा, जो शुद्ध आय (Net Income) का 98% है। वहीं, पिछले 12 महीनों का वॉलंटरी एट्रिशन रेट (स्वेच्छा से नौकरी छोड़ने वाले कर्मचारियों की दर) 13.9% दर्ज किया गया। दूसरी तिमाही के लिए कंपनी का अनुमान जुलाई-सितंबर 2026 तिमाही के लिए विप्रो ने अपने आईटी सर्विसेज कारोबार का राजस्व 2.57 बिलियन डॉलर से 2.63 बिलियन डॉलर के बीच रहने का अनुमान जताया है। कंपनी के अनुसार, कॉन्सटेंट करेंसी ग्रोथ अगली तिमाही में -1.5% से 0.5% के बीच रह सकती है। क्या है कॉन्सोलिडेटेड रिजल्ट? कंपनियां आमतौर पर दो तरह के वित्तीय परिणाम जारी करती हैं— इसी वजह से निवेशक किसी कंपनी की वास्तविक वित्तीय स्थिति समझने के लिए कॉन्सोलिडेटेड परिणामों को अधिक महत्व देते हैं। कॉन्सटेंट करेंसी क्या होती है? आईटी कंपनियों को अपने विदेशी ग्राहकों से डॉलर, यूरो और अन्य विदेशी मुद्राओं में भुगतान मिलता है। विनिमय दरों (Exchange Rate) में उतार-चढ़ाव से वास्तविक प्रदर्शन प्रभावित हो सकता है। ऐसे में कॉन्सटेंट करेंसी के आधार पर आंकड़े जारी किए जाते हैं, जिसमें मुद्रा विनिमय दर को स्थिर मानकर कंपनी की वास्तविक कारोबारी वृद्धि का आकलन किया जाता है। विप्रो के बारे में विप्रो लिमिटेड भारत की प्रमुख टेक्नोलॉजी सर्विसेज और कंसल्टिंग कंपनियों में शामिल है और दुनिया के 65 देशों में अपनी सेवाएं प्रदान करती है। अजीम प्रेमजी ने वर्ष 1966 में 21 वर्ष की आयु में कंपनी की जिम्मेदारी संभाली थी। उनके नेतृत्व में विप्रो ने वनस्पति तेल के कारोबार से आगे बढ़ते हुए आईटी सेवाओं, सॉफ्टवेयर सॉल्यूशंस और वैश्विक कंसल्टिंग के क्षेत्र में अपनी मजबूत पहचान बनाई। बिजनेस, शेयर बाजार और अर्थव्यवस्था से जुड़ी ताजा खबरों के लिए विजिट करें:deshharpal.com
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Koel Mallick

West Bengal Politics Update: Koel Mallick Resigns, TMC के सामने खड़ी हुई नई चुनौती

पश्चिम बंगाल की राजनीति में एक बार फिर बड़ा सियासी घटनाक्रम सामने आया है। तृणमूल कांग्रेस (TMC) की राज्यसभा सांसद कोयल मल्लिक (Koel Mallick) ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। उनके इस फैसले के बाद मुख्यमंत्री ममता बनर्जी (Mamata Banerjee) और उनकी पार्टी के सामने नई चुनौती खड़ी हो गई है। कोयल मल्लिक के इस्तीफे को टीएमसी के लिए बड़ा राजनीतिक झटका माना जा रहा है। कोयल मल्लिक का इस्तीफा ऐसे समय आया है, जब टीएमसी के अंदर संगठन और नेतृत्व को लेकर कई मुद्दे चर्चा में हैं। पार्टी पहले ही कुछ नेताओं के रुख बदलने और अंदरूनी मतभेदों जैसी चुनौतियों का सामना कर रही है। ऐसे में एक राज्यसभा सांसद का पद छोड़ना पार्टी के लिए चिंता बढ़ाने वाला कदम माना जा रहा है। Koel Mallick Resignation: TMC के लिए क्यों अहम है यह झटका? कोयल मल्लिक बंगाली फिल्म इंडस्ट्री का जाना-पहचाना नाम रही हैं। राजनीति में आने के बाद उन्होंने टीएमसी के साथ अपनी नई पारी शुरू की और पार्टी ने उन्हें राज्यसभा भेजा था। उनकी पहचान सिर्फ एक सांसद के तौर पर ही नहीं, बल्कि बंगाल के सांस्कृतिक क्षेत्र से जुड़े चेहरे के रूप में भी रही है। उनके इस्तीफे से टीएमसी को संसद के उच्च सदन में एक सीट का नुकसान हुआ है। साथ ही पार्टी के भीतर चल रही राजनीतिक गतिविधियों को लेकर भी सवाल उठने लगे हैं। Mamata Banerjee की बढ़ी मुश्किलें ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली टीएमसी के लिए पिछले कुछ समय से पार्टी को एकजुट रखना बड़ी चुनौती बनी हुई है। बंगाल की राजनीति में लगातार बदलते समीकरणों के बीच नेताओं के फैसले पार्टी की रणनीति को प्रभावित कर सकते हैं। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि कोयल मल्लिक का इस्तीफा केवल एक सांसद का पद छोड़ना नहीं है, बल्कि यह टीएमसी के अंदर चल रहे बदलावों की ओर भी इशारा कर सकता है। हालांकि, कोयल मल्लिक के अगले राजनीतिक कदम को लेकर अभी तस्वीर साफ नहीं है। West Bengal Politics में बढ़ी हलचल कोयल मल्लिक के इस्तीफे के बाद बंगाल की राजनीति में चर्चाएं तेज हो गई हैं। टीएमसी अब इस नुकसान को कैसे संभालती है और पार्टी की आगे की रणनीति क्या होगी, इस पर सभी की नजरें टिकी हैं। आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि कोयल मल्लिक अपने राजनीतिक भविष्य को लेकर क्या फैसला लेती हैं और क्या उनका यह कदम बंगाल के सियासी समीकरणों में कोई बड़ा बदलाव लाता है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Delimitation Bill

Congress Strategy on Delimitation Bill: परिसीमन बिल को लेकर पार्टी की हाईलेवल मीटिंग

परिसीमन बिल (Delimitation Bill) को लेकर कांग्रेस ने अपनी रणनीति को धार देने के लिए बुधवार को बड़ी बैठक की। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी समेत पार्टी के कई वरिष्ठ नेता इस बैठक में शामिल हुए। बैठक में परिसीमन प्रक्रिया से जुड़े राजनीतिक, संवैधानिक और चुनावी पहलुओं पर विस्तार से चर्चा की गई। कांग्रेस इस मुद्दे को लेकर काफी गंभीर नजर आ रही है, क्योंकि भविष्य में होने वाले लोकसभा सीटों के पुनर्गठन (Lok Sabha Seat Reorganisation) का असर देश की राजनीति पर बड़ा प्रभाव डाल सकता है। Delimitation Bill को लेकर कांग्रेस की क्या चिंता है? कांग्रेस नेताओं का मानना है कि अगर परिसीमन जनसंख्या के आधार पर किया जाता है तो उन राज्यों के प्रतिनिधित्व पर असर पड़ सकता है, जिन्होंने पिछले वर्षों में जनसंख्या नियंत्रण की दिशा में बेहतर काम किया है। पार्टी खासतौर पर दक्षिण भारतीय राज्यों की चिंताओं को सामने रख रही है। कांग्रेस का कहना है कि किसी भी परिसीमन प्रक्रिया में सभी राज्यों के बीच राजनीतिक संतुलन बनाए रखना जरूरी है, ताकि किसी क्षेत्र का प्रतिनिधित्व कम न हो। Rahul Gandhi और Kharge ने नेताओं के साथ बनाई रणनीति बैठक में राहुल गांधी और मल्लिकार्जुन खड़गे ने पार्टी नेताओं से इस मुद्दे पर राय ली। कांग्रेस की कोशिश है कि संसद के अंदर और बाहर परिसीमन बिल को लेकर अपनी स्थिति मजबूती से रखी जाए। पार्टी इस मुद्दे पर अन्य विपक्षी दलों के साथ भी बातचीत कर सकती है, ताकि एक साझा रणनीति तैयार की जा सके। Women Reservation और सीटों के समीकरण पर भी चर्चा परिसीमन के साथ महिला आरक्षण कानून (Women Reservation Law) और नई लोकसभा सीटों के संभावित बदलाव को लेकर भी चर्चा हुई। कांग्रेस नेताओं का कहना है कि महिलाओं को आरक्षण देने के साथ-साथ राज्यों के प्रतिनिधित्व और लोकतांत्रिक संतुलन का भी ध्यान रखा जाना चाहिए। Election Strategy के लिए अहम मुद्दा कांग्रेस के लिए परिसीमन का मुद्दा आने वाले चुनावों के लिहाज से भी काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। पार्टी इसे संविधान, राज्यों के अधिकार और लोकतांत्रिक प्रतिनिधित्व से जोड़कर जनता के बीच ले जाने की तैयारी में है। बैठक के बाद कांग्रेस जल्द ही Delimitation Bill को लेकर अपनी आगे की रणनीति और राजनीतिक रुख स्पष्ट कर सकती है। वहीं, इस पूरे मामले पर अब सरकार और विपक्ष के बीच बहस तेज होने की संभावना है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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IMD

IMD Weather UP-Bihar के 18 जिलों में Heavy Rain Alert, Assam-Arunachal में बाढ़ का संकट

देश में मानसून इस समय दो बिल्कुल अलग तस्वीरें दिखा रहा है। एक ओर उत्तर प्रदेश, बिहार और पूर्वोत्तर के कई राज्यों में लगातार बारिश से बाढ़ जैसे हालात बन गए हैं, वहीं मध्य प्रदेश के कई जिले अब भी अच्छी बारिश का इंतजार कर रहे हैं। भारतीय मौसम विभाग (IMD) ने उत्तर प्रदेश और बिहार के 18 जिलों में भारी बारिश की चेतावनी जारी की है। दूसरी तरफ असम और अरुणाचल प्रदेश में बाढ़ ने हजारों परिवारों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। वहीं मध्य प्रदेश के 35 जिलों में सामान्य से कम बारिश होने के कारण किसानों की चिंता बढ़ती जा रही है। UP-Bihar में Heavy Rain का Alert मौसम विभाग के अनुसार उत्तर प्रदेश और बिहार के 18 जिलों में अगले 24 से 48 घंटे के दौरान भारी से बहुत भारी बारिश हो सकती है। कई इलाकों में तेज हवाएं चलने और आकाशीय बिजली गिरने की भी संभावना जताई गई है। प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि खराब मौसम के दौरान नदी-नालों और जलभराव वाले क्षेत्रों से दूरी बनाए रखें। जिला प्रशासन और आपदा प्रबंधन की टीमें भी अलर्ट मोड पर हैं ताकि किसी भी आपात स्थिति में तुरंत राहत पहुंचाई जा सके। Assam Flood: 99 गांव पानी में डूबे असम में लगातार हो रही बारिश ने बाढ़ की स्थिति को और गंभीर बना दिया है। राज्य के 99 गांव जलमग्न हो चुके हैं और हजारों लोगों का जनजीवन प्रभावित हुआ है। कई घरों में पानी घुस गया है, जबकि खेतों में खड़ी फसलें भी डूब गई हैं। राहत और बचाव कार्य लगातार जारी हैं। प्रभावित परिवारों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया जा रहा है और राहत शिविरों में भोजन, पीने का पानी तथा स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं। Arunachal Pradesh में 1 लाख लोग बाढ़ से प्रभावित अरुणाचल प्रदेश में भी लगातार बारिश और भूस्खलन ने हालात मुश्किल बना दिए हैं। कई नदियां उफान पर हैं और कई सड़कें बंद होने से गांवों का संपर्क टूट गया है। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक करीब एक लाख लोग इस प्राकृतिक आपदा से प्रभावित हुए हैं। प्रशासन राहत सामग्री पहुंचाने और प्रभावित लोगों को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाने के लिए लगातार अभियान चला रहा है। MP के 35 जिलों में बारिश की कमी, किसानों की बढ़ी चिंता जहां देश के कई हिस्से बाढ़ से जूझ रहे हैं, वहीं मध्य प्रदेश के 35 जिलों में अब भी पर्याप्त बारिश नहीं हुई है। कम वर्षा के कारण खरीफ फसलों की बुवाई प्रभावित हो रही है और जलाशयों का जलस्तर भी सामान्य से नीचे बना हुआ है। किसानों का कहना है कि यदि जल्द अच्छी बारिश नहीं हुई तो फसल उत्पादन पर सीधा असर पड़ सकता है। मौसम विभाग ने आने वाले दिनों में कुछ जिलों में बारिश की संभावना जताई है, लेकिन फिलहाल सूखे जैसी स्थिति बनी हुई है। मौसम विभाग ने जारी की एडवाइजरी IMD ने भारी बारिश वाले राज्यों में लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी है। मौसम खराब होने पर अनावश्यक यात्रा से बचने, बिजली गिरने के दौरान खुले स्थानों में न जाने और स्थानीय प्रशासन द्वारा जारी दिशा-निर्देशों का पालन करने की अपील की गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि मानसून की सक्रियता अगले कुछ दिनों तक बनी रह सकती है। ऐसे में जिन राज्यों में भारी बारिश का अलर्ट है, वहां लोगों को अतिरिक्त सावधानी बरतने की जरूरत होगी। एक ही मानसून, लेकिन अलग-अलग तस्वीर इस बार मानसून ने देश के अलग-अलग हिस्सों में अलग असर दिखाया है। पूर्वोत्तर, उत्तर प्रदेश और बिहार में लोग बाढ़ और भारी बारिश से जूझ रहे हैं, जबकि मध्य प्रदेश के कई किसान आसमान की ओर उम्मीद भरी नजरों से देख रहे हैं। मौसम का यह असंतुलन सिर्फ आम जनजीवन ही नहीं, बल्कि खेती और स्थानीय अर्थव्यवस्था पर भी असर डाल रहा है। आने वाले दिनों में मानसून की चाल कैसी रहती है, इस पर लाखों लोगों की उम्मीदें टिकी हैं। फिलहाल प्रशासन, राहत एजेंसियां और मौसम विभाग लगातार हालात पर नजर बनाए हुए हैं, ताकि किसी भी आपदा से समय रहते निपटा जा सके। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Rohingya

Bay of Bengal Boat Accident: Rohingya शरणार्थियों से भरी दो नावें डूबीं, UN ने जताई गहरी चिंता

Rohingya Boat Tragedy ने एक बार फिर दुनिया को झकझोर दिया है। सुरक्षित जीवन की तलाश में समुद्र का रास्ता चुनने वाले सैकड़ों रोहिंग्या शरणार्थियों के लिए यह सफर मौत का सफर बन गया। संयुक्त राष्ट्र (UN) की शुरुआती जानकारी के मुताबिक, बंगाल की खाड़ी में दो अलग-अलग नाव हादसों में 500 से अधिक लोगों के डूबने या लापता होने की आशंका है। अगर यह आंकड़ा आधिकारिक रूप से पुष्टि होता है, तो यह हाल के वर्षों की सबसे बड़ी समुद्री मानवीय त्रासदियों में गिना जाएगा। समुद्र में गायब हुईं दो नावें संयुक्त राष्ट्र शरणार्थी उच्चायुक्त (UNHCR) और अंतरराष्ट्रीय प्रवासन संगठन (IOM) के अनुसार, दोनों नावें जून के आखिर में म्यांमार के रखाइन राज्य और बांग्लादेश के कॉक्स बाजार शरणार्थी शिविरों से रवाना हुई थीं। इनमें महिलाएं, बच्चे और बुजुर्ग समेत बड़ी संख्या में रोहिंग्या शरणार्थी सवार थे, जो बेहतर भविष्य की उम्मीद में मलेशिया और अन्य दक्षिण-पूर्व एशियाई देशों की ओर जा रहे थे। रिपोर्ट के अनुसार, एक नाव समुद्र में निकलने के कुछ समय बाद ही लापता हो गई, जबकि दूसरी नाव 8 जुलाई के आसपास खराब मौसम के बीच पलट गई। शुरुआती आकलन में दोनों हादसों में 500 से ज्यादा लोगों के डूबने की आशंका जताई गई है। राहत एजेंसियां अभी भी लापता लोगों के बारे में जानकारी जुटा रही हैं। आखिर क्यों समुद्र का खतरनाक रास्ता चुन रहे हैं रोहिंग्या? रोहिंग्या समुदाय कई वर्षों से म्यांमार में हिंसा, भेदभाव और नागरिकता से जुड़े संकट का सामना कर रहा है। 2017 में बड़े पैमाने पर हुई सैन्य कार्रवाई के बाद लाखों लोग जान बचाकर बांग्लादेश पहुंचे, जहां वे आज भी शरणार्थी शिविरों में सीमित संसाधनों के बीच जीवन गुजार रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि लगातार खराब होती आर्थिक स्थिति, रोजगार की कमी, घटती अंतरराष्ट्रीय सहायता और सुरक्षित भविष्य की उम्मीद लोगों को मानव तस्करों के भरोसे समुद्री रास्ता अपनाने के लिए मजबूर कर रही है। यह सफर जितना लंबा होता है, उतना ही जानलेवा भी साबित होता है। मानसून बना सबसे बड़ा खतरा बंगाल की खाड़ी में इस समय मानसून का मौसम चल रहा है। तेज हवाएं, ऊंची लहरें और लगातार खराब मौसम छोटी नावों के लिए बेहद खतरनाक साबित होते हैं। इसके बावजूद तस्कर ओवरलोडेड नावों में लोगों को समुद्र के रास्ते भेजते हैं, जिससे ऐसे हादसों का खतरा कई गुना बढ़ जाता है। UN ने जताई गंभीर चिंता संयुक्त राष्ट्र की एजेंसियों ने इस घटना को बेहद दुखद बताते हुए क्षेत्र के देशों से अपील की है कि समुद्र में फंसे लोगों की तलाश और बचाव अभियान तेज किए जाएं। साथ ही मानव तस्करी के नेटवर्क पर सख्त कार्रवाई और रोहिंग्या शरणार्थियों के लिए सुरक्षित एवं कानूनी रास्ते उपलब्ध कराने की जरूरत पर भी जोर दिया गया है। UN का कहना है कि यदि समय रहते प्रभावी कदम नहीं उठाए गए, तो आने वाले महीनों में ऐसे हादसों की संख्या और बढ़ सकती है। Rohingya Crisis पर फिर उठे बड़े सवाल यह हादसा केवल दो नावों के डूबने की घटना नहीं है, बल्कि उस मानवीय संकट की तस्वीर है जो वर्षों से दुनिया के सामने मौजूद है। जब तक म्यांमार में रोहिंग्या समुदाय के लिए सुरक्षित माहौल, नागरिक अधिकार और सम्मानजनक जीवन सुनिश्चित नहीं किया जाता, तब तक हजारों लोग अपनी जान जोखिम में डालकर समुद्र के रास्ते पलायन करने को मजबूर रहेंगे। फिलहाल राहत एजेंसियां मृतकों और लापता लोगों की वास्तविक संख्या की पुष्टि करने में जुटी हैं। वहीं इस त्रासदी ने एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय समुदाय को यह सोचने पर मजबूर कर दिया है कि रोहिंग्या संकट का स्थायी समाधान आखिर कब निकलेगा। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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E20 Car

E20 Car Complaint: सर्विस के बाद भी नहीं ठीक हुई कार, कोर्ट बोला- नई Car दो या पूरा पैसा वापस करो

नई कार खरीदते समय हर ग्राहक की उम्मीद होती है कि उसे लंबे समय तक बिना किसी परेशानी के बेहतर ड्राइविंग अनुभव मिलेगा। लेकिन एक E20 Car मालिक के लिए यह सपना जल्द ही परेशानी में बदल गया। नई गाड़ी खरीदने के कुछ ही दिनों बाद कार बार-बार चलते-चलते बंद होने लगी। कई बार सर्विस सेंटर के चक्कर लगाने और शिकायत दर्ज कराने के बावजूद समस्या खत्म नहीं हुई। आखिरकार मामला उपभोक्ता आयोग (Consumer Court) पहुंचा, जहां ग्राहक के पक्ष में ऐसा फैसला आया, जो भविष्य में दूसरे वाहन खरीदारों के लिए भी मिसाल बन सकता है। क्या था पूरा मामला? जानकारी के मुताबिक, ग्राहक ने कंपनी की नई E20 Compatible Car खरीदी थी। शुरुआत में सब कुछ सामान्य रहा, लेकिन कुछ समय बाद कार में तकनीकी दिक्कतें आने लगीं। वाहन अचानक बंद हो जाता था और ड्राइविंग के दौरान कई बार इंजन से जुड़ी समस्याएं सामने आईं। ग्राहक ने अधिकृत सर्विस सेंटर पर कई बार कार दिखाई। हर बार मरम्मत की गई, लेकिन कुछ दिनों बाद वही खराबी दोबारा सामने आ जाती थी। लगातार हो रही इस परेशानी से ग्राहक का भरोसा टूट गया और आखिरकार उसने न्याय के लिए Consumer Court का दरवाजा खटखटाया। सुनवाई के दौरान कोर्ट ने क्या माना? मामले की सुनवाई के दौरान आयोग ने रिकॉर्ड, सर्विस हिस्ट्री और दोनों पक्षों की दलीलों का अध्ययन किया। आयोग ने माना कि यदि नई कार में एक ही तरह की खराबी बार-बार आती रहे और कंपनी कई प्रयासों के बाद भी उसे स्थायी रूप से ठीक न कर पाए, तो इसे सेवा में कमी (Deficiency in Service) माना जाएगा। कोर्ट ने साफ कहा कि ग्राहक को केवल बार-बार सर्विस सेंटर भेजना समाधान नहीं है। नई गाड़ी खरीदने वाला व्यक्ति भरोसेमंद उत्पाद पाने का अधिकार रखता है। कोर्ट ने दिया बड़ा आदेश उपभोक्ता आयोग ने कंपनी को निर्देश दिया कि वह ग्राहक को नई E20 कार उपलब्ध कराए या फिर वाहन की पूरी कीमत वापस करे। इसके अलावा, आयोग ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि कंपनी गुणवत्ता के अनुरूप उत्पाद उपलब्ध नहीं करा सकती, तो ग्राहक को आर्थिक नुकसान उठाने के लिए मजबूर नहीं किया जा सकता। वाहन खरीदारों के लिए क्यों अहम है यह फैसला? यह फैसला सिर्फ एक ग्राहक की जीत नहीं माना जा रहा, बल्कि उन लाखों लोगों के लिए भी राहत की खबर है जो नई गाड़ी खरीदने के बाद लगातार तकनीकी समस्याओं से जूझते हैं। कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि यदि किसी वाहन में बार-बार एक जैसी खराबी आती है और कंपनी उसे ठीक करने में नाकाम रहती है, तो उपभोक्ता कानून के तहत ग्राहक नई गाड़ी, रिफंड या अन्य उचित मुआवजे की मांग कर सकता है। E20 Car क्या होती है? E20 Car ऐसे इंजन के साथ तैयार की जाती है जो 20 प्रतिशत एथेनॉल और 80 प्रतिशत पेट्रोल के मिश्रण वाले ईंधन पर चल सकती है। सरकार पर्यावरण संरक्षण और आयातित ईंधन पर निर्भरता कम करने के उद्देश्य से E20 Fuel को बढ़ावा दे रही है। हालांकि, इस मामले का संबंध E20 तकनीक से नहीं, बल्कि वाहन में लगातार आई तकनीकी खराबी और कंपनी की सेवा से जुड़ा है। अगर आपकी नई कार में भी ऐसी दिक्कत आए तो क्या करें? यदि नई कार बार-बार खराब हो रही है, तो हर सर्विस का जॉब कार्ड, बिल, शिकायत नंबर और कंपनी के साथ हुई बातचीत का रिकॉर्ड सुरक्षित रखें। जरूरत पड़ने पर यही दस्तावेज Consumer Court में आपके सबसे मजबूत सबूत साबित हो सकते हैं। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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NEET Exam Leak

NEET Exam Leak: CBI Investigation में बड़ा खुलासा, लातूर Coaching से जुड़ा पूरा Paper Leak Network

देश की सबसे बड़ी मेडिकल प्रवेश परीक्षा NEET-UG 2026 Exam Leak मामले में केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने ऐसा खुलासा किया है, जिसने पूरे शिक्षा तंत्र पर सवाल खड़े कर दिए हैं। जांच एजेंसी के मुताबिक, महाराष्ट्र के लातूर में एक कोचिंग सेंटर संचालक के पास से बरामद 136 हस्तलिखित प्रश्नों में से 111 प्रश्न हूबहू NEET-UG 2026 की परीक्षा में पूछे गए। इस खुलासे के बाद साफ हो गया है कि यह मामला केवल संदेह तक सीमित नहीं था, बल्कि परीक्षा से पहले ही प्रश्नों की पहुंच कुछ लोगों तक हो चुकी थी। CBI की जांच में क्या सामने आया? CBI ने इस मामले में लातूर के रेणुकाई केमिस्ट्री क्लासेस के संचालक शिवराज रघुनाथ मोटेगांवकर को गिरफ्तार किया है। एजेंसी का दावा है कि आरोपी के मोबाइल फोन से केमिस्ट्री विषय के हस्तलिखित प्रश्नों की कई तस्वीरें मिलीं। जब इन सवालों का मिलान राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) के मास्टर प्रश्नपत्र से किया गया, तो 136 में से 111 प्रश्न पूरी तरह मेल खाते पाए गए। जांच अधिकारियों के अनुसार, यह अब तक का सबसे मजबूत डिजिटल और दस्तावेजी सबूत माना जा रहा है। परीक्षा से पहले ही पहुंच गया था प्रश्नपत्र CBI की जांच में सामने आया कि आरोपी के मोबाइल में मौजूद इन तस्वीरों की तारीख 23 अप्रैल 2026 की है, जबकि NEET-UG परीक्षा 3 मई 2026 को आयोजित हुई थी। यानी परीक्षा से करीब 10 दिन पहले ही ये प्रश्न आरोपी के पास मौजूद थे। जांच एजेंसी का कहना है कि इससे यह संकेत मिलता है कि प्रश्नपत्र आधिकारिक परीक्षा से पहले ही लीक हो चुका था। कैसे चला पूरा खेल? जांच के मुताबिक, प्रश्नपत्र कथित तौर पर NTA से जुड़े एक पैनल सदस्य और अनुवादक के माध्यम से बाहर पहुंचा। इसके बाद इसे चुनिंदा लोगों तक पहुंचाया गया और हस्तलिखित नोट्स तैयार कर छात्रों को याद करवाया गया। CBI को यह भी जानकारी मिली है कि कुछ अभ्यर्थियों को कथित तौर पर लीक प्रश्नपत्र और उत्तर परीक्षा से पहले उपलब्ध कराए गए थे। पूरे मामले में कई राज्यों में फैले नेटवर्क की भूमिका की जांच जारी है। Telegram के जरिए लाखों रुपये में हुई डील जांच में यह भी सामने आया है कि लीक प्रश्नपत्र की PDF फाइलें कथित तौर पर Telegram के माध्यम से बेची गईं। इसके अलावा करीब 150 पन्नों का एक गेस पेपर भी कुछ छात्रों तक पहुंचाया गया, जिसमें सैकड़ों प्रश्न शामिल थे। जांच के दौरान इनमें से बड़ी संख्या में सवाल वास्तविक परीक्षा में पूछे गए पाए गए। CBI अब यह पता लगाने में जुटी है कि इस पूरे नेटवर्क में और कौन-कौन लोग शामिल थे तथा कितने छात्रों को इसका फायदा पहुंचाया गया। अब तक कई गिरफ्तारियां पेपर लीक मामले में अब तक 13 आरोपियों की गिरफ्तारी हो चुकी है। इनमें कोचिंग संस्थानों से जुड़े लोग, छात्र और परीक्षा प्रक्रिया से जुड़े कुछ अन्य आरोपी शामिल हैं। जांच एजेंसी लगातार डिजिटल रिकॉर्ड, मोबाइल डेटा और अन्य इलेक्ट्रॉनिक सबूतों की फोरेंसिक जांच कर रही है। CBI का मानना है कि आने वाले दिनों में इस मामले में और भी बड़े खुलासे हो सकते हैं। छात्रों की मेहनत पर उठे सवाल NEET परीक्षा हर साल लाखों छात्रों के मेडिकल कॉलेज में प्रवेश का सपना तय करती है। ऐसे में पेपर लीक जैसे मामलों ने छात्रों और अभिभावकों की चिंता बढ़ा दी है। जो विद्यार्थी महीनों तक ईमानदारी से तैयारी करते हैं, उनके लिए ऐसी घटनाएं पूरी परीक्षा प्रणाली की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े करती हैं। फिलहाल मामले की सुनवाई अदालत में जारी है और CBI पूरे नेटवर्क की कड़ियां जोड़ने में जुटी हुई है। जांच पूरी होने के बाद ही यह साफ हो सकेगा कि इस पेपर लीक में कितने लोग शामिल थे और इसके पीछे कितना बड़ा संगठित गिरोह काम कर रहा था। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Ketan Agarwal

Pune Murder Case: Ketan Agarwal Case में नया अपडेट, Siya Goyal के परिवार की दुकान पर FDA Action

Ketan Agarwal Murder Case में हर दिन नए खुलासे सामने आ रहे हैं। इस बीच अब मुख्य आरोपी Siya Goyal के परिवार की मुश्किलें भी बढ़ गई हैं। महाराष्ट्र खाद्य एवं औषधि प्रशासन (FDA) ने पुणे के मार्केट यार्ड स्थित उनके परिवार की मसाले और ड्राई फ्रूट्स की दुकान के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए कारोबार बंद करने का नोटिस जारी किया है। हालांकि प्रशासन ने साफ किया है कि यह कार्रवाई हत्या मामले की जांच का हिस्सा नहीं है, बल्कि खाद्य सुरक्षा नियमों के कथित उल्लंघन के आधार पर की गई है। Pune में FDA की बड़ी कार्रवाई महाराष्ट्र FDA की टीम ने हाल ही में पुणे के मार्केट यार्ड स्थित एम/एस बीजी गोयल एंड कंपनी का निरीक्षण किया। जांच के दौरान अधिकारियों ने हल्दी पाउडर, तिल और सोया उत्पाद समेत कई खाद्य पदार्थों के नमूने जांच के लिए भेजे। निरीक्षण के दौरान करीब 4,172 किलोग्राम खाद्य सामग्री, जिसकी अनुमानित कीमत 8.14 लाख रुपये बताई गई है, जब्त कर ली गई। विभाग का कहना है कि जांच रिपोर्ट आने के बाद आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी। क्यों मिला कारोबार बंद करने का नोटिस? FDA के मुताबिक निरीक्षण के दौरान कई अनियमितताएं सामने आईं। विभाग ने दावा किया कि दुकान के लाइसेंस से जुड़ी जरूरी जानकारी समय पर अपडेट नहीं की गई थी। इसके अलावा कुछ उत्पादों की लेबलिंग में कमियां मिलीं और खाद्य सुरक्षा मानकों के उल्लंघन की आशंका भी जताई गई। इन्हीं कारणों के आधार पर खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम (FSS Act) के तहत प्रतिष्ठान को अगले आदेश तक कारोबार बंद रखने का नोटिस जारी किया गया है। क्या Murder Case से जुड़ी है यह कार्रवाई? इस कार्रवाई के बाद सोशल मीडिया पर कई तरह की चर्चाएं शुरू हो गईं। हालांकि FDA अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि दुकान के खिलाफ उठाया गया कदम केतन अग्रवाल हत्याकांड से जुड़ा नहीं है। यह केवल खाद्य सुरक्षा नियमों और लाइसेंस संबंधी प्रक्रियाओं के पालन को लेकर की गई प्रशासनिक कार्रवाई है। उधर, केतन अग्रवाल हत्याकांड की जांच पुणे पुलिस अपनी अलग प्रक्रिया के तहत कर रही है। आखिर क्या है Ketan Agarwal Murder Case? पुणे के युवा रियल एस्टेट कारोबारी केतन अग्रवाल की जून 2026 में लोहागढ़ किले पर ट्रेकिंग के दौरान मौत हो गई थी। शुरुआत में इसे एक हादसा माना गया, लेकिन पुलिस जांच में मामला हत्या का निकला। पुलिस का आरोप है कि केतन की मंगेतर Siya Goyal और उसके कथित प्रेमी चेतन चौधरी ने मिलकर पहले पूरी साजिश रची और फिर ट्रेकिंग के दौरान उन्हें खाई में धक्का देकर हत्या कर दी। दोनों आरोपी फिलहाल न्यायिक हिरासत में हैं और मामले की जांच जारी है। गुपचुप शादी के दावे भी चर्चा में इस हाई-प्रोफाइल केस के बीच ऐसी खबरें भी सामने आईं कि सिया गोयल और चेतन चौधरी ने राजस्थान के खाटू श्याम मंदिर में गुपचुप शादी की थी। इन दावों की पुष्टि के लिए पुणे पुलिस ने मंदिर पहुंचकर सीसीटीवी फुटेज और अन्य रिकॉर्ड की जांच की। हालांकि अब तक पुलिस को ऐसा कोई ठोस सबूत नहीं मिला है, जिससे इन दावों की पुष्टि हो सके। अधिकारियों का कहना है कि जांच पूरी होने के बाद ही स्थिति स्पष्ट होगी। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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मेरठ हत्याकांड: मुस्कान और साहिल को फांसी की सजा, पति सौरभ की हत्या के मामले में कोर्ट का फैसला

मेरठ। उत्तर प्रदेश के मेरठ में सौरभ राजपूत हत्याकांड में अदालत ने उनकी पत्नी मुस्कान रस्तोगी और उसके प्रेमी साहिल को फांसी की सजा सुनाई है। दोनों पर सौरभ की हत्या करने का आरोप साबित होने के बाद यह फैसला सुनाया गया। सजा सुनाते हुए जज ने वारदात को नृशंस हत्याकांड बताया और कहा कि इसमें माफी स्वीकार नहीं होगी। वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से कोर्ट में पेश हुए मुस्कान और साहिल सजा सुनाए जाने से पहले जेल में बंद मुस्कान और साहिल को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए अदालत से जोड़ा गया। इस दौरान दोनों रोने लगे। जज ने मुस्कान से पूछा कि पति सौरभ राजपूत की हत्या के मामले में दोषी ठहराए जाने के बाद वह क्या सजा चाहती है। इस पर मुस्कान ने कहा, “मेरी बच्चियों का ख्याल रखा जाए।” इसके बाद वह खामोश हो गई। वहीं, साहिल से भी यही सवाल पूछा गया, लेकिन उसने कोई जवाब नहीं दिया। सजा के ऐलान के बाद रो पड़ीं सौरभ की मां अदालत के फैसले के बाद सौरभ राजपूत की मां भावुक हो गईं और रो पड़ीं। उन्होंने कहा कि उन्हें शांति से न्याय मिल गया। इस मामले में सजा का ऐलान सौरभ के परिवार के लिए लंबे इंतजार के बाद आया है। 3 मार्च 2025 को हुई थी सौरभ की हत्या सौरभ राजपूत की हत्या 3 मार्च 2025 को हुई थी। मामले में सामने आए विवरण के अनुसार, हत्या के बाद शव के पांच टुकड़े किए गए और उन्हें नीले ड्रम में भर दिया गया था। इस वारदात ने पूरे देश में व्यापक चर्चा बटोरी थी। अदालत ने मामले में मुस्कान रस्तोगी और साहिल को दोषी ठहराते हुए मृत्युदंड की सजा सुनाई है।

इंदौर में प्लॉट बेचने के नाम पर 7.80 लाख की ठगी का आरोप, ब्रोकर समेत दो पर FIR

शहर के एरोड्रम थाना क्षेत्र में प्लॉट बेचने के नाम पर धोखाधड़ी का मामला सामने आया है। आरोप है कि प्लॉट का सौदा करने के बाद ब्रोकर और प्लॉट मालिक ने फरियादी से 7 लाख 80 हजार रुपये ले लिए, लेकिन न तो प्लॉट की रजिस्ट्री कराई और न ही कब्जा दिया। शिकायत की जांच के बाद एरोड्रम थाना पुलिस ने नंदकिशोर मनावत और धर्मेंद्र ठाकुर के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर ली है। 9.30 लाख में तय हुआ था प्लॉट का सौदा पुलिस के मुताबिक, नंदबाग कॉलोनी निवासी विजय चौहान ने शिकायत में बताया कि उन्होंने नंदबाग में एक प्लॉट का सौदा 9 लाख 30 हजार रुपये में तय किया था। इस संबंध में एग्रीमेंट भी किया गया था। फरियादी ने आरोप लगाया कि उन्होंने नकद और ऑनलाइन माध्यम से कुल 7 लाख 80 हजार रुपये का भुगतान कर दिया, लेकिन इसके बावजूद उन्हें प्लॉट का कब्जा नहीं मिला और रजिस्ट्री भी नहीं कराई गई। ब्रोकर ने परिचित बताकर कराया था सौदा विजय चौहान के अनुसार, धर्मेंद्र ठाकुर ने उन्हें बताया था कि नंदकिशोर मनावत उसका परिचित है और वह अपना प्लॉट बेचना चाहता है। इसके बाद धर्मेंद्र ने सौदे में ब्रोकर की भूमिका निभाई और इसके बदले 10 हजार रुपये लिए। शिकायतकर्ता का आरोप है कि भुगतान के बाद जब उन्होंने रजिस्ट्री कराने और प्लॉट का कब्जा देने की मांग की, तो उन्हें लगातार टालमटोल का सामना करना पड़ा। 25 से ज्यादा केस होने की धमकी देने का आरोप फरियादी ने आरोप लगाया कि रजिस्ट्री और कब्जे के लिए दबाव बनाने पर धर्मेंद्र ठाकुर ने धमकी दी। शिकायत के मुताबिक, उसने कहा कि उसके खिलाफ 25 से ज्यादा मामले चल रहे हैं। साथ ही, उसके या नंदकिशोर मनावत के पास दोबारा आने पर अंजाम भुगतने की चेतावनी भी दी। 2.80 लाख रुपये लौटाए, 5 लाख बाकी होने का दावा विजय चौहान के मुताबिक, पुलिस में शिकायत करने की बात कहने के बाद नंदकिशोर मनावत ने 2 लाख 50 हजार रुपये नकद और 30 हजार रुपये ऑनलाइन वापस किए। हालांकि, फरियादी का आरोप है कि बाकी 5 लाख रुपये लौटाने से इनकार कर दिया गया। इसके बाद विजय चौहान ने पुलिस अधिकारियों से शिकायत की। जांच के बाद एरोड्रम थाना पुलिस ने नंदकिशोर मनावत और धर्मेंद्र ठाकुर के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर आगे की कार्रवाई शुरू कर दी है। मामले में लगाए गए आरोपों की पुष्टि न्यायिक प्रक्रिया के तहत होनी बाकी है।

SIR के खिलाफ प्रदर्शन करने वाले छात्रों से मिले राहुल गांधी, दिल्ली पुलिस पर मारपीट के आरोप

नई दिल्ली। SIR के खिलाफ दिल्ली में प्रदर्शन करने वाले छात्रों ने बुधवार को कांग्रेस नेता राहुल गांधी से मुलाकात की। इसके बाद राहुल गांधी और छात्रों ने संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस की, जिसमें प्रदर्शनकारियों ने दिल्ली पुलिस पर मारपीट और हिरासत के दौरान दुर्व्यवहार करने के आरोप लगाए। प्रेस कॉन्फ्रेंस में NSUI के छात्रों, कार्यकर्ताओं और कंटेंट क्रिएटर्स ने अपने साथ हुई कथित घटनाओं की जानकारी दी। प्रदर्शनकारियों ने पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए मामले में जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की। छात्रा ने कान पर चोट लगने का लगाया आरोप प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान एक छात्रा ने आरोप लगाया कि हिरासत के दौरान पुलिसकर्मी ने उसके प्राइवेट पार्ट पर लात मारी। वहीं, दिल्ली विश्वविद्यालय की छात्रा अदिरा ने दावा किया कि पुलिस की पिटाई के कारण उसके एक कान की सुनने की क्षमता चली गई। प्रदर्शनकारियों ने हिरासत के दौरान कथित ज्यादती और मारपीट से जुड़े अपने अनुभव साझा किए। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि की जानकारी सामने नहीं आई है। RSS और भाजपा से जुड़े लोगों के कहने पर हिरासत का आरोप एक अन्य प्रदर्शनकारी ने आरोप लगाया कि पुलिस RSS और भाजपा से जुड़े लोगों के कहने पर प्रदर्शनकारियों को हिरासत में ले रही थी। यह आरोप भी प्रदर्शनकारियों की ओर से लगाया गया है। राहुल गांधी ने सबूत सुरक्षित रखने को कहा राहुल गांधी ने छात्रों से घटनाओं से जुड़े वीडियो और अन्य सबूत सुरक्षित रखने को कहा। उन्होंने कहा कि इन सबूतों के आधार पर पुलिसकर्मियों से लेकर मुख्य चुनाव आयुक्त तक, जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की जाएगी। प्रदर्शनकारियों के आरोपों और पुलिस की कार्रवाई को लेकर आगे क्या कदम उठाए जाते हैं, इस पर नजर रहेगी।

बांग्लादेश टेस्ट सीरीज से बाहर हुए शाई होप और अल्जारी जोसेफ, केविन विकहम को पहली बार मिला मौका

क्रिकेट न्यूज। वेस्टइंडीज को बांग्लादेश के खिलाफ आगामी दो टेस्ट मैचों की सीरीज से पहले बड़ा झटका लगा है। टीम के बल्लेबाज शाई होप और तेज गेंदबाज अल्जारी जोसेफ सीरीज से बाहर हो गए हैं। क्रिकेट वेस्टइंडीज (CWI) ने 23 वर्षीय टॉप ऑर्डर बल्लेबाज केविन विकहम को पहली बार टेस्ट टीम में शामिल किया है। ऑलराउंडर कीमो पॉल को भी टीम में जगह मिली है। CWI के मुताबिक, मेडिकल जांच और विशेषज्ञों की सलाह के बाद अल्जारी जोसेफ को सीरीज से हटाने का फैसला लिया गया। बोर्ड उनके कार्यभार को नियंत्रित कर चोट के जोखिम को कम करना चाहता है। वहीं, तीनों फॉर्मेट में लगातार खेलने के बाद शाई होप को आराम दिया गया है। चोट के खतरे को देखते हुए जोसेफ को आराम क्रिकेट वेस्टइंडीज ने बताया कि अल्जारी जोसेफ को टीम से बाहर रखने का फैसला उनकी सहमति से लिया गया है। बोर्ड के अनुसार, टेस्ट क्रिकेट में तेज गेंदबाजों को लंबे स्पेल में लगातार गेंदबाजी करनी पड़ती है। इससे छोटे फॉर्मेट की तुलना में कार्यभार और चोट का जोखिम बढ़ सकता है। इसी को ध्यान में रखते हुए जोसेफ के वर्कलोड को कम करने का फैसला किया गया है, ताकि उनके स्वास्थ्य और फिटनेस का ध्यान रखा जा सके। शाई होप को भी दिया गया आराम CWI ने कहा कि शाई होप तीनों फॉर्मेट में लगातार खेल रहे थे। ऐसे में उनके कार्यभार और स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए उन्हें टेस्ट सीरीज से आराम दिया गया है। बोर्ड का यह फैसला फरवरी 2027 में होने वाले वनडे वर्ल्ड कप क्वालिफायर्स को ध्यान में रखकर भी लिया गया है। टीम प्रबंधन चाहता है कि खिलाड़ी आगामी महत्वपूर्ण मुकाबलों के लिए फिट रहें। केविन विकहम को पहली बार टेस्ट टीम में मौका शाई होप की गैरमौजूदगी में 23 वर्षीय टॉप ऑर्डर बल्लेबाज केविन विकहम को पहली बार टेस्ट टीम में शामिल किया गया है। इसके अलावा ऑलराउंडर कीमो पॉल को भी टीम में जगह मिली है। अब देखना होगा कि बांग्लादेश की घरेलू परिस्थितियों में वेस्टइंडीज की टीम नए संयोजन के साथ कैसा प्रदर्शन करती है। कोच डैरेन सैमी ने सीरीज जीत को बताया अहम वेस्टइंडीज के मुख्य कोच डैरेन सैमी ने कहा कि वर्ल्ड टेस्ट चैंपियनशिप के मौजूदा चक्र की शुरुआत में टीम ने कुछ लक्ष्य तय किए थे। इनमें टेस्ट रैंकिंग के ऊपरी आधे हिस्से में जगह बनाना भी शामिल है। उन्होंने कहा कि बांग्लादेश के खिलाफ सीरीज जीतने से टीम अपने लक्ष्य के करीब पहुंच सकती है। सैमी के मुताबिक, बांग्लादेश को उसकी घरेलू परिस्थितियों में हराना चुनौतीपूर्ण होगा, लेकिन टीम इसके लिए तैयार है। 28 अक्टूबर से शुरू होगा पहला टेस्ट बांग्लादेश और वेस्टइंडीज के बीच दो टेस्ट मैचों की सीरीज खेली जाएगी। पहला टेस्ट 28 अक्टूबर से ढाका में शुरू होगा, जबकि दूसरा टेस्ट 5 नवंबर से सिलहट में खेला जाएगा।

IMF ने बढ़ाया भारत की GDP ग्रोथ का अनुमान, 2026 और 2027 में 7% विकास दर रहने की उम्मीद

नई दिल्ली। अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) ने साल 2026 के लिए भारत की आर्थिक विकास दर का अनुमान 6.4% से बढ़ाकर 7% कर दिया है। वैश्विक तनाव, आर्थिक सुस्ती और कच्चे तेल की ऊंची कीमतों के बावजूद भारतीय अर्थव्यवस्था की मजबूती ने अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं का ध्यान खींचा है। मजबूत घरेलू मांग और सर्विसेज सेक्टर के बेहतर प्रदर्शन को भारत की तेज विकास दर की प्रमुख वजह माना गया है। IMF ने अक्टूबर 2026 की अपनी वर्ल्ड इकोनॉमिक आउटलुक रिपोर्ट में भारत की विकास संभावनाओं को सकारात्मक बताया है। रिपोर्ट के अनुसार, ऊर्जा आयात पर निर्भर कई उभरती अर्थव्यवस्थाएं जहां दबाव का सामना कर रही हैं, वहीं भारत की आर्थिक गतिविधियों में मजबूती बनी हुई है। 2027 में भी 7% ग्रोथ का अनुमान IMF ने 2026 के लिए भारत की विकास दर के अनुमान में जुलाई के मुकाबले 0.6 प्रतिशत अंक और अप्रैल के मुकाबले 0.5 प्रतिशत अंक की बढ़ोतरी की है। वहीं, 2027 के लिए भी विकास दर का अनुमान बढ़ाकर 7% कर दिया गया है। दिए गए आंकड़ों के मुताबिक, 2027 का अनुमान जुलाई के मुकाबले 0.3 प्रतिशत अंक और अप्रैल के मुकाबले 0.5 प्रतिशत अंक अधिक है। इससे संकेत मिलता है कि वैश्विक आर्थिक चुनौतियों के बीच भी भारत में विकास की संभावनाओं को लेकर उम्मीद बनी हुई है। IMF से पहले विश्व बैंक और आर्थिक सहयोग एवं विकास संगठन (OECD) जैसी अंतरराष्ट्रीय संस्थाएं भी भारत की विकास दर के अनुमान में बढ़ोतरी कर चुकी हैं। चीन की सुस्ती के बीच भारत पर नजर रिपोर्ट के मुताबिक, एशिया की अर्थव्यवस्थाओं में मजबूती देखने को मिल रही है। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) से जुड़ी गतिविधियों में तेजी ने भी वैश्विक आर्थिक परिदृश्य को प्रभावित किया है। भारत और चीन एशिया की आर्थिक गतिविधियों में अहम भूमिका निभा रहे हैं, हालांकि दोनों देशों की विकास संभावनाओं में अंतर दिखाई दे रहा है। IMF के अनुमान के अनुसार, चीन की विकास दर 2026 में 4.5% और 2027 में 4% रह सकती है। वैश्विक तनाव और ऊर्जा की ऊंची कीमतों को चीन की आर्थिक वृद्धि के सामने चुनौतियों में शामिल किया गया है। दुनिया की आर्थिक विकास दर पर दबाव IMF के मुताबिक, 2028 से 2031 के बीच वैश्विक अर्थव्यवस्था औसतन 3.2% की दर से बढ़ सकती है। यह 2000 से 2019 के बीच महामारी से पहले दर्ज औसत 3.7% की विकास दर से कम है। रिपोर्ट में वैश्विक तनाव, ऊर्जा बाजार में अनिश्चितता और ऊर्जा आयात पर निर्भर उभरती अर्थव्यवस्थाओं पर पड़ने वाले दबाव को आर्थिक विकास के लिए चुनौती बताया गया है। ऐसे माहौल में भारत की अनुमानित विकास दर अपेक्षाकृत मजबूत दिखाई देती है। मजबूत घरेलू मांग और जनसांख्यिकी से मिल रहा सहारा भारत की आर्थिक मजबूती के पीछे बढ़ता घरेलू बाजार, मजबूत मांग, अनुकूल जनसांख्यिकी और सुधारों को अहम कारक माना गया है। सर्विसेज सेक्टर का बेहतर प्रदर्शन भी विकास दर को सहारा दे रहा है। हालांकि, बेहतर अनुमान के बावजूद चुनौतियां खत्म नहीं हुई हैं। कच्चे तेल की ऊंची कीमतें भारत के आयात बिल और महंगाई पर दबाव डाल सकती हैं। इसके अलावा, अंतरराष्ट्रीय तनाव और वैश्विक मांग में कमजोरी का असर भारतीय अर्थव्यवस्था पर भी पड़ सकता है।

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