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Sonam Wangchuk

Sonam Wangchuk Protest: भूख हड़ताल के बीच Delhi High Court का बड़ा बयान, सरकार को जारी किया नोटिस

लद्दाख के सामाजिक कार्यकर्ता और शिक्षा सुधारक सोनम वांगचुक (Sonam Wangchuk) की भूख हड़ताल अब कानूनी और राजनीतिक दोनों स्तरों पर चर्चा का विषय बन गई है। लगातार बिगड़ती सेहत के बीच मामला दिल्ली हाईकोर्ट पहुंचा, जहां अदालत ने सुनवाई के दौरान कहा कि “जिंदगी अनमोल है और उसकी हर हाल में रक्षा की जानी चाहिए।” कोर्ट ने केंद्र सरकार और दिल्ली सरकार से पूछा है कि वांगचुक की स्वास्थ्य सुरक्षा के लिए अब तक क्या कदम उठाए गए हैं। बिगड़ती तबीयत पर कोर्ट ने जताई गंभीर चिंता सोनम वांगचुक की ओर से दायर जनहित याचिका (PIL) में कहा गया कि लंबे समय से जारी भूख हड़ताल का उनकी सेहत पर गंभीर असर पड़ रहा है। याचिका में मांग की गई कि उन्हें तुरंत बेहतर चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराई जाए और जरूरत पड़ने पर अस्पताल में भर्ती कर इलाज कराया जाए। सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने कहा कि किसी भी नागरिक का जीवन सर्वोच्च महत्व रखता है। अदालत ने केंद्र और दिल्ली सरकार को नोटिस जारी करते हुए विस्तृत जवाब मांगा है कि वांगचुक की स्वास्थ्य निगरानी और इलाज के लिए क्या व्यवस्था की गई है। डॉक्टरों ने दी स्वास्थ्य को लेकर चेतावनी मेडिकल टीम के मुताबिक, लगातार अनशन के कारण सोनम वांगचुक का वजन काफी कम हो चुका है। डॉक्टरों का कहना है कि यदि लंबे समय तक भोजन नहीं लिया गया तो शरीर के महत्वपूर्ण अंगों पर इसका गंभीर प्रभाव पड़ सकता है। फिलहाल डॉक्टर नियमित रूप से उनके स्वास्थ्य की निगरानी कर रहे हैं। अनशन जारी रखने पर अड़े सोनम वांगचुक स्वास्थ्य को लेकर बढ़ती चिंता के बावजूद सोनम वांगचुक ने फिलहाल भूख हड़ताल खत्म करने से इनकार कर दिया है। उनका कहना है कि जब तक उनकी प्रमुख मांगों पर सरकार की ओर से ठोस पहल नहीं होती, तब तक उनका आंदोलन जारी रहेगा। उन्होंने अपने समर्थकों से भी शांतिपूर्ण तरीके से आंदोलन में शामिल रहने और आगामी कार्यक्रमों में भाग लेने की अपील की है। वांगचुक का कहना है कि उनका संघर्ष किसी व्यक्तिगत लाभ के लिए नहीं, बल्कि जनहित के मुद्दों को उठाने के लिए है। क्या है पूरा मामला? सोनम वांगचुक पिछले कई दिनों से नई दिल्ली के जंतर-मंतर पर अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर बैठे हैं। उनका आंदोलन शिक्षा व्यवस्था और अन्य सार्वजनिक मुद्दों से जुड़ी मांगों को लेकर चल रहा है। इस बीच देशभर के कई सामाजिक संगठनों, छात्रों और विभिन्न क्षेत्रों की हस्तियों ने भी उनके आंदोलन का समर्थन किया है। अगली सुनवाई पर टिकी हैं निगाहें दिल्ली हाईकोर्ट के हस्तक्षेप के बाद अब इस मामले पर सभी की नजर अगली सुनवाई पर है। एक तरफ अदालत ने स्पष्ट कर दिया है कि किसी भी व्यक्ति के जीवन की रक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है, वहीं दूसरी ओर सोनम वांगचुक अपनी मांगों पर कायम हैं। ऐसे में आने वाले दिनों में सरकार के जवाब और अदालत के अगले आदेश इस पूरे मामले की दिशा तय कर सकते हैं। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Rath Yatra 2026

Rath Yatra 2026: अहमदाबाद में बदले सुरक्षा इंतजाम, हाथियों के पैर बांधकर निकाली यात्रा; Puri में निभेगी सदियों पुरानी रस्म

Rath Yatra 2026: भगवान जगन्नाथ की रथयात्रा देशभर में आस्था और उत्साह के साथ मनाई जा रही है। गुजरात के अहमदाबाद और ओडिशा के पुरी में इस बार भी लाखों श्रद्धालु भगवान जगन्नाथ, भगवान बलभद्र और देवी सुभद्रा के दर्शन के लिए उमड़े। हालांकि अहमदाबाद की रथयात्रा इस बार एक खास वजह से rerचर्चा में रही। पिछले साल हाथियों के बेकाबू होने की घटना के बाद प्रशासन ने सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए यात्रा में शामिल हाथियों के पैरों को हल्के बंधन में रखा। दूसरी ओर पुरी में सदियों पुरानी परंपरा के अनुसार गजपति महाराज सोने की झाड़ू से भगवान के रथों की सफाई करेंगे। पिछले साल की घटना के बाद बदली तैयारी अहमदाबाद की जगन्नाथ रथयात्रा देश की सबसे बड़ी और ऐतिहासिक रथयात्राओं में से एक मानी जाती है। लेकिन वर्ष 2025 की यात्रा के दौरान तीन हाथी अचानक बेकाबू हो गए थे। भीड़ में अफरा-तफरी मच गई थी और कई श्रद्धालु घायल हुए थे। घटना के बाद सुरक्षा व्यवस्था पर कई सवाल उठे थे। इसी अनुभव से सीख लेते हुए इस बार प्रशासन, वन विभाग और पशु चिकित्सकों ने मिलकर विस्तृत सुरक्षा योजना तैयार की। हाथियों के आगे और पीछे के पैरों को हल्की रस्सियों से नियंत्रित रखा गया ताकि वे भीड़ में अचानक तेज़ी से न दौड़ सकें। अधिकारियों का कहना है कि यह कदम केवल एहतियात के तौर पर उठाया गया है और इसमें पशुओं की सुरक्षा का भी पूरा ध्यान रखा गया। सुरक्षा व्यवस्था रही हाई अलर्ट पर रथयात्रा के पूरे मार्ग पर हजारों पुलिसकर्मी तैनात किए गए। ड्रोन कैमरों, सीसीटीवी, कंट्रोल रूम और क्विक रिस्पॉन्स टीम के जरिए हर गतिविधि पर नजर रखी गई। हाथियों के साथ अनुभवी महावत, वन विभाग की टीम और पशु चिकित्सक भी लगातार मौजूद रहे। श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए जगह-जगह मेडिकल कैंप, एम्बुलेंस, पेयजल केंद्र और हेल्प डेस्क बनाए गए। ट्रैफिक को भी पहले से तय डायवर्जन प्लान के अनुसार संचालित किया गया ताकि यात्रा बिना किसी बाधा के संपन्न हो सके। Puri में निभेगी ‘छेरा पहंरा’ की अनोखी परंपरा ओडिशा के पुरी में भगवान जगन्नाथ की रथयात्रा केवल धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि सदियों पुरानी संस्कृति और परंपरा का प्रतीक है। यहां रथयात्रा के दौरान गजपति महाराज ‘छेरा पहंरा’ नामक विशेष अनुष्ठान करते हैं। इस रस्म में वे सोने की झाड़ू से भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्रा के रथों की सफाई करते हैं और चंदन मिश्रित पवित्र जल का छिड़काव करते हैं। यह परंपरा इस बात का संदेश देती है कि भगवान के सामने हर व्यक्ति समान है। चाहे वह राजा हो या आम भक्त, सभी भगवान के सेवक हैं। लाखों श्रद्धालुओं ने लगाए जयकारे अहमदाबाद और पुरी दोनों शहरों में सुबह से ही श्रद्धालुओं की भारी भीड़ देखने को मिली। भगवान जगन्नाथ के जयघोष के बीच भक्तों ने रथों को खींचकर अपनी आस्था व्यक्त की। पूरे वातावरण में भक्ति, उत्साह और पारंपरिक संस्कृति की झलक साफ दिखाई दी। आस्था के साथ सुरक्षा का भी संदेश इस बार की रथयात्रा ने दो महत्वपूर्ण संदेश दिए। पहला, धार्मिक परंपराओं का सम्मान और दूसरा, श्रद्धालुओं की सुरक्षा से किसी तरह का समझौता नहीं। अहमदाबाद में पिछले साल की घटना से सीख लेकर किए गए इंतजाम और पुरी में सदियों से चली आ रही परंपराओं का निर्वहन, दोनों ने इस आयोजन को और भी खास बना दिया। यही वजह है कि जगन्नाथ रथयात्रा केवल एक धार्मिक उत्सव नहीं, बल्कि भारत की सांस्कृतिक विरासत और सामाजिक एकता का भी प्रतीक मानी जाती है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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कुडनकुलम न्यूक्लियर पावर प्लांट से जुड़े हजारों दस्तावेज लीक होने का दावा, संवेदनशील डेटा डार्क वेब पर होने की आशंका

नई दिल्ली। भारत के सबसे बड़े कुडनकुलम न्यूक्लियर पावर प्लांट से जुड़े हजारों दस्तावेज लीक होने का दावा सामने आया है। समाचार एजेंसी रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार, ‘वर्ल्ड लीक्स’ (World Leaks) नामक हैकर समूह ने डार्क वेब पर इस परियोजना से जुड़े बड़ी संख्या में दस्तावेज अपलोड करने का दावा किया है। दावा किए गए दस्तावेजों में प्लांट के कुछ हिस्सों के ब्लूप्रिंट, सप्लायरों की सूची, कंट्रोल रूम से संबंधित जानकारी, निरीक्षण रिकॉर्ड और अन्य तकनीकी दस्तावेज शामिल हैं। बताया जा रहा है कि संबंधित सर्वर मई 2026 में हैक हुआ था और जून में डेटा लीक होने का दावा किया गया। यह मामला अब सार्वजनिक रूप से सामने आया है। रिलायंस इंफ्रास्ट्रक्चर ने स्वीकार किया है कि उसके ठेके से जुड़े कुछ डेटा जिस थर्ड-पार्टी डेटा सेंटर कंपनी योट्टा (Yotta) के सर्वर पर संग्रहीत थे, उसमें साइबर सुरक्षा से जुड़ी घटना हुई है। कंपनी ने इसकी जानकारी संबंधित सरकारी एजेंसियों को दे दी है। कैसे हुआ कथित डेटा लीक? उपलब्ध जानकारी के अनुसार घटनाक्रम इस प्रकार है— फिलहाल न्यूक्लियर पावर कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड (NPCIL), रिलायंस इंफ्रास्ट्रक्चर और भारतीय कंप्यूटर इमरजेंसी रिस्पॉन्स टीम (CERT-In) इस पूरे मामले की जांच और समीक्षा कर रहे हैं। कितना गंभीर हो सकता है यह मामला? परमाणु सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि यदि डार्क वेब पर साझा किए गए दस्तावेज वास्तविक और प्रमाणिक हैं, तो इनके जरिए कोई भी हमलावर प्लांट के सपोर्ट सिस्टम, सप्लाई चेन और सुरक्षा व्यवस्था की विस्तृत जानकारी हासिल कर सकता है। इससे भविष्य में साइबर हमलों या अन्य सुरक्षा जोखिमों की संभावना बढ़ सकती है। हालांकि, अभी तक संबंधित एजेंसियों ने सार्वजनिक रूप से यह पुष्टि नहीं की है कि लीक हुए सभी दस्तावेज वास्तविक हैं या नहीं। 2019 में भी हुआ था साइबर हमला यह पहली बार नहीं है जब कुडनकुलम न्यूक्लियर पावर प्लांट साइबर हमले की खबरों में आया हो। वर्ष 2019 में भी प्लांट के प्रशासनिक नेटवर्क में उत्तर कोरिया से जुड़े एक हैकर समूह का मैलवेयर मिलने की पुष्टि हुई थी। उस समय NPCIL ने स्पष्ट किया था कि संयंत्र की संचालन प्रणाली (Operational System) प्रभावित नहीं हुई थी। जानिए इस मामले से जुड़े अहम सवाल और जवाब डार्क वेब क्या है? डार्क वेब इंटरनेट का वह हिस्सा है, जिसे सामान्य ब्राउज़र जैसे Chrome, Edge या Safari से एक्सेस नहीं किया जा सकता। इसे देखने के लिए विशेष ब्राउज़र, जैसे Tor Browser, की आवश्यकता होती है। सप्लाई चेन अटैक क्या होता है? जब साइबर अपराधी किसी संस्था पर सीधे हमला करने के बजाय उसके ठेकेदार, सॉफ्टवेयर प्रदाता या डेटा सेंटर को निशाना बनाते हैं, तो इसे सप्लाई चेन अटैक कहा जाता है। इसके जरिए मुख्य संस्था तक पहुंचना अपेक्षाकृत आसान हो जाता है। हैकर्स डेटा डार्क वेब पर क्यों डालते हैं? विशेषज्ञों के अनुसार, इसके पीछे फिरौती मांगना, डेटा बेचना, जासूसी करना, अपनी हैकिंग क्षमता का प्रदर्शन करना या भविष्य के साइबर हमलों के लिए जानकारी साझा करना जैसे उद्देश्य हो सकते हैं। कंट्रोल रूम का लेआउट लीक होने से क्या खतरा है? यदि किसी संवेदनशील संस्थान के कंट्रोल रूम या तकनीकी ढांचे की जानकारी सार्वजनिक हो जाए, तो संभावित हमलावर सुरक्षा व्यवस्था और महत्वपूर्ण प्रणालियों की बेहतर समझ हासिल कर सकते हैं। इससे भविष्य में साइबर हमलों या घुसपैठ की योजना बनाने में मदद मिल सकती है। भारत में न्यूक्लियर प्लांट की साइबर सुरक्षा कौन देखता है? भारत में परमाणु संयंत्रों की साइबर सुरक्षा की जिम्मेदारी NPCIL, CERT-In, NCIIPC और AERB जैसी संस्थाओं के पास होती है, जो समय-समय पर सुरक्षा ऑडिट और निगरानी करती हैं। नोट: फिलहाल दस्तावेजों के लीक होने और उनकी प्रामाणिकता को लेकर जांच जारी है। संबंधित एजेंसियों ने मामले की समीक्षा शुरू कर दी है और अंतिम निष्कर्ष जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होंगे। देश-दुनिया, तकनीक और सुरक्षा से जुड़ी ताजा खबरों के लिए विजिट करें: deshharpal.com
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Donald Trump

रूस से तेल खरीदने वाले देशों पर अमेरिका की बड़ी तैयारी, भारत-चीन समेत 5 देशों पर 100% टैरिफ का प्रस्ताव

डेस्क | देशहरपल अमेरिका ने रूस से तेल खरीदने वाले देशों पर आर्थिक दबाव बढ़ाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। अमेरिकी सीनेट में एक नया बिल पेश किया गया है, जिसमें भारत, चीन, हंगरी, स्लोवाकिया और अजरबैजान से आने वाले सामान पर 100% तक टैरिफ लगाने का प्रस्ताव रखा गया है। इस बिल का उद्देश्य रूस की तेल आय को कम करना और यूक्रेन युद्ध के लिए उसकी आर्थिक क्षमता को कमजोर करना बताया गया है। बिल के तहत केवल टैरिफ ही नहीं, बल्कि रूस के ऊर्जा, वित्तीय और रक्षा क्षेत्र पर भी नए प्रतिबंध लगाने का प्रस्ताव है। शुरुआती मसौदे में 500% टैरिफ का सुझाव था, जिसे बाद में घटाकर 100% कर दिया गया। रूस से तेल खरीदने वाले देशों पर बढ़ेगा दबाव यदि यह बिल कानून बन जाता है, तो अमेरिका पहली बार किसी देश पर सिर्फ इसलिए अतिरिक्त टैरिफ लगाएगा क्योंकि वह रूस से तेल खरीद रहा है। अमेरिकी सांसदों का मानना है कि इससे रूस की कमाई घटेगी और उस पर युद्ध रोकने का दबाव बढ़ेगा। यूरोपीय देशों को मिलेगी राहत बिल में 15 यूरोपीय देशों को प्रस्तावित 100% टैरिफ से छूट देने का प्रावधान है। अमेरिका का कहना है कि ये देश रूस से 15% से कम प्राकृतिक गैस खरीदते हैं और लगातार अपनी निर्भरता भी कम कर रहे हैं। डेमोक्रेट सीनेटर रिचर्ड ब्लूमेंथल ने कहा कि यह बिल यूरोपीय सहयोगियों के खिलाफ नहीं, बल्कि उन देशों के लिए है जो अभी भी रूस के ऊर्जा कारोबार को आर्थिक सहारा दे रहे हैं। दोनों दलों का समर्थन इस प्रस्ताव को रिपब्लिकन और डेमोक्रेट दोनों दलों का समर्थन मिला है। अमेरिकी राजनीति में ऐसे विधेयक को बाइपार्टिसन बिल कहा जाता है। हालांकि, इसे कानून बनने के लिए अभी सीनेट और प्रतिनिधि सभा (हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स) से मंजूरी और फिर राष्ट्रपति के हस्ताक्षर जरूरी होंगे। ग्राहम की पहल, ट्रम्प का समर्थन यह बिल सबसे पहले रिपब्लिकन सीनेटर लिंडसे ग्राहम और डेमोक्रेट सीनेटर रिचर्ड ब्लूमेंथल ने अप्रैल 2025 में पेश किया था। 11 जुलाई को ग्राहम के निधन से पहले उन्होंने कहा था कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प इस बिल को आगे बढ़ाने के पक्ष में हैं। व्हाइट हाउस में ट्रम्प ने भी कहा कि यह ग्राहम के सम्मान से जुड़ा महत्वपूर्ण मुद्दा है और इसके कानून बनने की अच्छी संभावना है। अमेरिका रूस पर इतना सख्त क्यों? अधिक राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय खबरों के लिए विजिट करें:www.deshharpal.com
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CBSE की थ्री-लैंग्वेज पॉलिसी पर रोक से सुप्रीम कोर्ट का इनकार, सरकार और बोर्ड से 10 दिन में मांगा जवाब

नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) की नई थ्री-लैंग्वेज पॉलिसी पर अंतरिम रोक लगाने से इनकार कर दिया। अदालत ने सुनवाई के दौरान कहा कि “कोई भी भाषा सीखना कभी बेकार नहीं जाता।” हालांकि, नीति को लागू करने में सामने आ रही व्यावहारिक चुनौतियों को देखते हुए कोर्ट ने केंद्र सरकार, CBSE और संबंधित पक्षों से 10 दिन के भीतर जवाब दाखिल करने को कहा है। मामले की अगली सुनवाई 29 जुलाई को होगी। यह नीति शैक्षणिक सत्र 2026-27 से लागू की गई है। इसके तहत छात्रों को दो भारतीय भाषाएं और एक विदेशी भाषा पढ़नी होगी। इससे कई छात्रों को पहले से पढ़ी जा रही भाषाओं में बदलाव करना पड़ सकता है। क्या है विवाद? याचिकाकर्ताओं का कहना है कि CBSE ने पर्याप्त तैयारी के बिना नई भाषा नीति लागू कर दी है। उनके मुताबिक कई स्कूलों में संबंधित भाषाओं के शिक्षक, पाठ्यपुस्तकें और आवश्यक शैक्षणिक संसाधन उपलब्ध नहीं हैं, जिससे छात्रों और शिक्षकों दोनों को कठिनाइयों का सामना करना पड़ सकता है। थ्री-लैंग्वेज पॉलिसी से जुड़े अहम सवाल और जवाब 1. मामला क्या है? सुप्रीम कोर्ट में CBSE के उस नियम को चुनौती दी गई है, जिसके तहत 1 जुलाई 2026 से कक्षा 9 के विद्यार्थियों के लिए तीन भाषाएं पढ़ना अनिवार्य किया गया है। इनमें कम-से-कम दो भारतीय भाषाएं होना जरूरी है। हालांकि, CBSE ने 6 जून को संशोधित दिशा-निर्देश जारी करते हुए स्पष्ट किया था कि इस वर्ष कक्षा 10 के छात्रों को तीसरी भाषा (R3) की बोर्ड परीक्षा नहीं देनी होगी। 2. नए नियम में क्या बदलाव हुआ है? पहले कई छात्र अंग्रेजी के साथ एक भारतीय और एक विदेशी भाषा (जैसे फ्रेंच या जर्मन) पढ़ते थे। नए नियम के अनुसार अब तीन भाषाओं में से कम-से-कम दो भारतीय भाषाएं होना अनिवार्य है। विदेशी भाषा तीसरी या अतिरिक्त चौथी भाषा के रूप में ही चुनी जा सकेगी। 3. याचिका किसने दायर की? यह याचिका छात्र यशिका भंडारी, अमनदीप कौर और अर्पण रॉय चौधरी की ओर से दायर की गई है। उनकी ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता आनंद ग्रोवर, मुकुल रोहतगी और गोपाल शंकरनारायणन ने पैरवी की। मामले की सुनवाई मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस वी. मोहना की पीठ ने की। 4. याचिकाकर्ताओं की मुख्य आपत्ति क्या है? याचिकाकर्ताओं का कहना है कि नई व्यवस्था अचानक लागू कर दी गई। कई भारतीय भाषाओं की किताबें उपलब्ध नहीं हैं और अधिकांश स्कूलों में प्रशिक्षित शिक्षक भी नहीं हैं। ऐसे में छात्रों और स्कूलों पर अतिरिक्त बोझ पड़ेगा। 5. किताबों को लेकर क्या दलील दी गई? सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ताओं के वकीलों ने कहा कि 22 भारतीय भाषाओं में से फिलहाल केवल तीन भाषाओं की पाठ्यपुस्तकें उपलब्ध हैं। ऐसे में बाकी भाषाओं की पढ़ाई शुरू करना व्यवहारिक रूप से कठिन होगा। 6. शिक्षकों की कमी पर क्या कहा गया? याचिकाकर्ताओं ने दलील दी कि नई भारतीय भाषाएं पढ़ाने के लिए प्रशिक्षित शिक्षकों की आवश्यकता होगी, लेकिन इतने कम समय में पर्याप्त शिक्षकों की नियुक्ति और प्रशिक्षण संभव नहीं है। 7. क्या विदेशी भाषाएं बंद हो जाएंगी? नहीं। छात्र फ्रेंच, जर्मन, जापानी जैसी विदेशी भाषाएं पढ़ सकते हैं, लेकिन इसके साथ उन्हें दो भारतीय भाषाएं भी पढ़नी होंगी। विदेशी भाषा तीसरी या अतिरिक्त चौथी भाषा के रूप में होगी। 8. क्या तीसरी भाषा की बोर्ड परीक्षा होगी? नहीं। CBSE ने स्पष्ट किया है कि कक्षा 10 की बोर्ड परीक्षा में तीसरी भाषा (R3) का अलग बोर्ड एग्जाम नहीं होगा, ताकि छात्रों पर अतिरिक्त परीक्षा का दबाव न बढ़े। 9. अब आगे क्या होगा? सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के अनुसार केंद्र सरकार, CBSE और NCERT अपना जवाब दाखिल करेंगे। इसके बाद 29 जुलाई को अदालत इस मामले में आगे की सुनवाई करेगी। नई शिक्षा नीति 2020 क्या है? भारत सरकार ने 29 जुलाई 2020 को नई शिक्षा नीति (NEP 2020) को मंजूरी दी थी। यह 34 वर्षों बाद देश की शिक्षा व्यवस्था में किया गया सबसे बड़ा बदलाव माना जाता है। इससे पहले शिक्षा नीति 1986 में लागू हुई थी, जिसे 1992 में संशोधित किया गया था। नई शिक्षा नीति का उद्देश्य शिक्षा प्रणाली को 21वीं सदी की आवश्यकताओं के अनुरूप बनाना, छात्रों में व्यावहारिक ज्ञान और कौशल विकसित करना है। केंद्र सरकार ने इसे चरणबद्ध तरीके से 2030 तक लागू करने का लक्ष्य रखा है। चूंकि शिक्षा संविधान की समवर्ती सूची का विषय है, इसलिए इसे लागू करने में केंद्र और राज्य सरकारों दोनों की भूमिका होती है। देश, शिक्षा और करियर से जुड़ी ताजा खबरों के लिए विजिट करें:deshharpal.com
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Crime

Maharashtra Crime: रिश्ते का खौफनाक अंत, पत्नी की हत्या के बाद पति ने खुद Police के सामने कबूला गुनाह

महाराष्ट्र से सामने आई एक दर्दनाक Crime News ने लोगों को झकझोर कर रख दिया है। यहां एक पति पर अपनी पत्नी की हत्या करने का आरोप लगा है। हैरानी की बात यह है कि वारदात के बाद आरोपी पति पत्नी के शव को कार में लेकर कई घंटों तक घूमता रहा और फिर खुद पुलिस स्टेशन पहुंचकर सरेंडर कर दिया। घटना के बाद इलाके में सनसनी फैल गई। पुलिस ने आरोपी को हिरासत में लेकर मामले की जांच शुरू कर दी है। विवाद के बाद खौफनाक वारदात पुलिस की शुरुआती जांच के मुताबिक, पति-पत्नी के बीच किसी बात को लेकर विवाद हुआ था। इसी दौरान मामला इतना गंभीर हो गया कि पति ने कथित तौर पर पत्नी की हत्या कर दी। वारदात के बाद आरोपी ने शव को कार में रखा और काफी समय तक इधर-उधर घूमता रहा। इसके बाद उसने पुलिस के सामने पहुंचकर घटना की जानकारी दी और आत्मसमर्पण कर दिया। पुलिस जांच में जुटी, सामने आएंगे कई सवाल घटना की सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और शव को कब्जे में लेकर पोस्टमॉर्टम के लिए भेजा गया। पुलिस अब हत्या के कारणों की जांच कर रही है। जांच में यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि पति-पत्नी के बीच विवाद की असली वजह क्या थी और घटना किस परिस्थिति में हुई। पुलिस आरोपी से पूछताछ कर रही है ताकि पूरे मामले की सच्चाई सामने आ सके। परिवार और इलाके में छाया मातम इस घटना ने मृतका के परिवार और आसपास के लोगों को सदमे में डाल दिया है। एक घरेलू विवाद का इतना गंभीर रूप लेना लोगों के लिए चिंता का विषय बन गया है। स्थानीय लोगों का कहना है कि इस घटना ने पूरे इलाके को हिला दिया है। पुलिस अब मामले से जुड़े हर पहलू की गहराई से जांच कर रही है। आरोपी के खिलाफ कानूनी कार्रवाई शुरू पुलिस ने आरोपी पति के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया है। आगे की कार्रवाई जांच और उपलब्ध सबूतों के आधार पर की जाएगी। महाराष्ट्र की इस घटना ने एक बार फिर घरेलू विवादों और रिश्तों में बढ़ते तनाव को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Dhar Bhojshala

Dhar Bhojshala Controversy: Supreme Court का बड़ा फैसला, परिसर में पूजा-नमाज व्यवस्था पर नया आदेश

भोजशाला-कमाल मौला मस्जिद विवाद (Dhar Bhojshala Dispute) मामले में सुप्रीम कोर्ट ने अहम अंतरिम आदेश दिया है। अदालत ने विवादित परिसर के अंदर शुक्रवार की नमाज की अनुमति देने से इनकार कर दिया है। हालांकि, मुस्लिम पक्ष को राहत देते हुए कोर्ट ने नमाज के लिए विवादित स्थल के बाहर अलग खुली जगह उपलब्ध कराने का निर्देश दिया है। सुप्रीम कोर्ट के इस आदेश के बाद भोजशाला परिसर में धार्मिक गतिविधियों को लेकर चल रही बहस एक बार फिर तेज हो गई है। अदालत ने साफ किया है कि यह व्यवस्था फिलहाल अंतरिम है और मामले के अंतिम फैसले का असर इस पर निर्भर करेगा। Supreme Court Order: विवादित परिसर में नहीं होगी नमाज सुप्रीम कोर्ट ने मुस्लिम पक्ष की उस याचिका पर सुनवाई की, जिसमें भोजशाला परिसर में शुक्रवार की नमाज की अनुमति बहाल करने की मांग की गई थी। कोर्ट ने फिलहाल इस मांग को स्वीकार नहीं किया और कहा कि विवादित स्थल के अंदर नमाज की अनुमति नहीं दी जाएगी। हालांकि, अदालत ने मुस्लिम समुदाय के लोगों के लिए शुक्रवार की नमाज अदा करने हेतु अलग खुली जगह उपलब्ध कराने का निर्देश दिया है। यह व्यवस्था दोपहर 1 बजे से 3 बजे तक नमाज के लिए लागू रहेगी। क्या है Bhojshala विवाद? धार की भोजशाला देश के प्रमुख ऐतिहासिक स्थलों में से एक है, जिसको लेकर लंबे समय से हिंदू और मुस्लिम पक्षों के बीच विवाद चल रहा है। हिंदू पक्ष का दावा है कि भोजशाला मां सरस्वती (वाग्देवी) का प्राचीन मंदिर है, जबकि मुस्लिम पक्ष इसे कमाल मौला मस्जिद से जुड़ा धार्मिक स्थल मानता है। यह पूरा परिसर भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) के संरक्षण में आता है। हाईकोर्ट के फैसले के बाद पहुंचा मामला Supreme Court भोजशाला विवाद में मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के फैसले के बाद मुस्लिम पक्ष ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया था। हाईकोर्ट के आदेश के बाद विवादित परिसर में नमाज को लेकर पहले से चली आ रही व्यवस्था में बदलाव हुआ था। मुस्लिम पक्ष ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल कर शुक्रवार की नमाज की अनुमति फिर से देने की मांग की थी। सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने फिलहाल अंतरिम व्यवस्था बनाए रखने का फैसला लिया। ASI को भी दिए गए निर्देश सुप्रीम कोर्ट ने भोजशाला परिसर की स्थिति को बनाए रखने के निर्देश दिए हैं। अदालत ने कहा है कि मामले की सुनवाई पूरी होने तक स्थल पर ऐसा कोई बड़ा बदलाव नहीं किया जाएगा, जिससे विवाद की स्थिति प्रभावित हो। कोर्ट ने दोनों पक्षों से शांति और संयम बनाए रखने की अपील भी की है, क्योंकि यह मामला धार्मिक भावनाओं से जुड़ा हुआ है। आगे क्या होगा? अब सभी की नजर सुप्रीम कोर्ट में होने वाली अगली सुनवाई पर है। अदालत दोनों पक्षों की दलीलों और संबंधित तथ्यों पर विचार करने के बाद आगे का फैसला सुनाएगी। फिलहाल सुप्रीम कोर्ट के अंतरिम आदेश के अनुसार भोजशाला परिसर में नमाज की अनुमति नहीं होगी, जबकि मुस्लिम पक्ष को शुक्रवार की नमाज के लिए अलग स्थान उपलब्ध कराया जाएगा। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Sonam Wangchuk,

Sonam Wangchuk Hunger Strike: लद्दाख के मुद्दे पर जारी आंदोलन, 3 Idiots के Omi Vaidya ने जताई चिंता

लद्दाख के सामाजिक कार्यकर्ता Sonam Wangchuk (सोनम वांगचुक) की Hunger Strike (भूख हड़ताल) का आज 17वां दिन है। लद्दाख के अधिकारों और भविष्य से जुड़े मुद्दों को लेकर चल रहे इस आंदोलन ने अब देशभर में चर्चा तेज कर दी है। लगातार अनशन के कारण सोनम वांगचुक की सेहत को लेकर उनके समर्थकों और शुभचिंतकों में चिंता बढ़ती जा रही है। इस बीच बॉलीवुड से भी उनके समर्थन में आवाजें उठने लगी हैं। फिल्म 3 Idiots में ‘चतुर रामलिंगम’ का किरदार निभाने वाले अभिनेता Omi Vaidya (ओमी वैद्य) ने सोनम वांगचुक के स्वास्थ्य को लेकर चिंता जताई है। उन्होंने कहा कि वह नहीं चाहते कि सोनम वांगचुक को किसी तरह का नुकसान पहुंचे और इस मामले का समाधान बातचीत के जरिए निकाला जाना चाहिए। Zeenat Aman ने भी की Government से बातचीत की अपील दिग्गज अभिनेत्री Zeenat Aman (जीनत अमान) ने भी सोनम वांगचुक के आंदोलन को लेकर अपनी चिंता जाहिर की है। उन्होंने कहा कि किसी भी समस्या का समाधान संवाद के माध्यम से होना चाहिए। उन्होंने सरकार से अपील की कि वह प्रदर्शनकारियों के साथ बातचीत कर इस मुद्दे का शांतिपूर्ण समाधान निकालने की कोशिश करे। क्यों कर रहे हैं Sonam Wangchuk Protest? सोनम वांगचुक लद्दाख के लोगों के लिए कई अहम मांगों को लेकर आंदोलन कर रहे हैं। उनकी प्रमुख मांगों में लद्दाख को पूर्ण राज्य का दर्जा, संविधान की Sixth Schedule (छठी अनुसूची) के तहत सुरक्षा और स्थानीय लोगों के अधिकारों की रक्षा शामिल है। उनका कहना है कि लद्दाख की अलग भौगोलिक परिस्थितियों, पर्यावरण और सांस्कृतिक पहचान को देखते हुए यहां के लोगों के हितों की सुरक्षा जरूरी है। 17 दिनों के अनशन से बढ़ी चिंता लगातार 17 दिनों से जारी भूख हड़ताल के चलते सोनम वांगचुक की स्वास्थ्य स्थिति को लेकर चिंता बढ़ रही है। उनके समर्थकों का कहना है कि सरकार को उनकी मांगों पर गंभीरता से विचार करना चाहिए और जल्द बातचीत शुरू करनी चाहिए। वहीं, सोनम वांगचुक लगातार अपने आंदोलन के जरिए लद्दाख के पर्यावरण और स्थानीय अधिकारों से जुड़े मुद्दों को सामने रख रहे हैं। Social Media पर भी छाया Ladakh Movement सोनम वांगचुक के आंदोलन को लेकर सोशल मीडिया पर भी काफी चर्चा हो रही है। कई लोग उनके मुद्दों का समर्थन कर रहे हैं, जबकि कुछ लोग सरकार और आंदोलनकारियों के बीच बातचीत को सबसे बेहतर रास्ता बता रहे हैं। 3 Idiots फिल्म के बाद सोनम वांगचुक पहले से ही युवाओं के बीच लोकप्रिय रहे हैं। शिक्षा और पर्यावरण के क्षेत्र में उनके काम को लेकर उन्हें देशभर में पहचान मिली है। अब आगे क्या? सोनम वांगचुक की Hunger Strike के 17वें दिन पहुंचने के बाद सभी की नजरें सरकार और आंदोलनकारियों के बीच संभावित बातचीत पर टिकी हैं। लोगों को उम्मीद है कि जल्द ही इस मामले का कोई सकारात्मक रास्ता निकलेगा, जिससे लद्दाख से जुड़े मुद्दों का समाधान हो सके। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Govind Giri

मंदिर चढ़ावा चोरी मामला: Govind Giri का बड़ा दावा, बोले- गलत बताए जा रहे चोरी के आंकड़े

मंदिर चढ़ावा चोरी मामले को लेकर अब गोविंद गिरी महाराज ने अपनी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने चोरी की रकम को लेकर चल रही चर्चाओं पर सफाई देते हुए कहा कि घटना में नुकसान को लेकर जो आंकड़े सामने आ रहे हैं, वे वास्तविकता से ज्यादा बढ़ा-चढ़ाकर पेश किए जा रहे हैं। गोविंद गिरी के मुताबिक, चोरी की राशि 3 करोड़ रुपये से अधिक नहीं है। उन्होंने कहा कि इस मामले में सच्चाई जांच पूरी होने के बाद ही सामने आएगी। बिना आधिकारिक पुष्टि के बड़ी रकम के दावे करना सही नहीं है, क्योंकि इससे लोगों में भ्रम फैलता है। Govind Giri ने क्या कहा? Govind Giri ने चढ़ावा चोरी मामले पर बोलते हुए कहा कि मंदिरों में आने वाला दान और चढ़ावा श्रद्धालुओं की आस्था से जुड़ा होता है। इसलिए इस तरह के मामलों में सही जानकारी सामने आना बेहद जरूरी है। उन्होंने दावा किया कि चोरी की रकम को लेकर कुछ जगहों पर जो आंकड़े बताए जा रहे हैं, वे वास्तविक स्थिति से काफी अलग हैं। उन्होंने लोगों से अपील की कि किसी भी खबर पर विश्वास करने से पहले उसकी पुष्टि जरूर करें। चोरी की रकम को लेकर बना हुआ है विवाद चढ़ावा चोरी की खबर सामने आने के बाद से ही नुकसान की राशि को लेकर अलग-अलग दावे किए जा रहे थे। कुछ रिपोर्ट्स में बड़ी रकम का जिक्र किया गया था, जिसके बाद यह मामला काफी चर्चा में आ गया। अब गोविंद गिरी के बयान के बाद एक बार फिर चोरी की वास्तविक राशि को लेकर बहस शुरू हो गई है। हालांकि, जांच पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट हो पाएगा कि कुल कितना नुकसान हुआ है। जांच के बाद सामने आएगी पूरी सच्चाई फिलहाल मामले की जांच जारी है। संबंधित अधिकारी घटना से जुड़े सभी पहलुओं की जांच कर रहे हैं। जांच में यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि चोरी कैसे हुई और इसमें कितनी राशि या सामान का नुकसान हुआ। गोविंद गिरी ने उम्मीद जताई कि जांच के बाद पूरी तस्वीर साफ हो जाएगी और दोषियों के खिलाफ उचित कार्रवाई की जाएगी। मंदिरों की सुरक्षा व्यवस्था पर भी उठे सवाल इस घटना के बाद धार्मिक स्थलों पर सुरक्षा व्यवस्था को लेकर भी सवाल उठने लगे हैं। श्रद्धालुओं का कहना है कि मंदिरों में दान और चढ़ावे की सुरक्षा के लिए आधुनिक निगरानी व्यवस्था और बेहतर प्रबंधन जरूरी है। मंदिरों में आने वाला चढ़ावा लाखों लोगों की आस्था से जुड़ा होता है, ऐसे में इस तरह की घटनाएं चिंता बढ़ाती हैं। अब सभी की नजर जांच रिपोर्ट और आगे की कार्रवाई पर टिकी हुई है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Monsoon

IMD Weather Alert: Monsoon Break का असर, उत्तर भारत में थमी बारिश, Arunachal में ITBP के 15 जवान फंसे

देशभर में मानसून (Monsoon) की रफ्तार एक बार फिर धीमी पड़ गई है। जुलाई के मध्य में जहां आमतौर पर कई राज्यों में झमाझम बारिश होती है, वहीं इस बार मौसम ने अलग ही तस्वीर पेश की है। भारतीय मौसम विभाग (IMD) के अनुसार, 11 साल में तीसरी बार ऐसा Monsoon Break देखने को मिल रहा है। इसका सीधा असर उत्तर और मध्य भारत के कई राज्यों में दिखाई दे रहा है। उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश में सामान्य से कम बारिश दर्ज की गई है। दूसरी ओर, पूर्वोत्तर राज्यों में लगातार बारिश और भूस्खलन से हालात चुनौतीपूर्ण बने हुए हैं। अरुणाचल प्रदेश में ITBP के 15 जवान खराब मौसम के कारण दुर्गम इलाके में फंस गए हैं, जिन्हें सुरक्षित निकालने के लिए राहत अभियान जारी है। क्या है Monsoon Break और क्यों हुआ? Monsoon Break वह स्थिति होती है, जब कुछ दिनों के लिए मानसून की सक्रियता अचानक कम हो जाती है। इस दौरान उत्तर, मध्य और पश्चिम भारत के अधिकांश हिस्सों में बारिश लगभग रुक जाती है, जबकि पूर्वोत्तर और हिमालयी क्षेत्रों में बारिश जारी रह सकती है। मौसम वैज्ञानिकों के मुताबिक, इस समय मानसून ट्रफ अपनी सामान्य स्थिति से उत्तर की ओर खिसक गई है। साथ ही बंगाल की खाड़ी में कोई मजबूत लो-प्रेशर सिस्टम सक्रिय नहीं होने के कारण बारिश का सिलसिला कमजोर पड़ गया है। UP और MP में बारिश की कमी बढ़ी चिंता मानसून की सुस्ती का सबसे ज्यादा असर खेती पर पड़ने लगा है। बारिश कम होने से धान, सोयाबीन, मक्का और अन्य खरीफ फसलों की बुवाई और शुरुआती बढ़वार प्रभावित हो सकती है। कई जिलों में किसान सिंचाई के वैकल्पिक साधनों का सहारा लेने लगे हैं। राजस्थान, दिल्ली और आसपास के राज्यों में बढ़ी उमस मानसून कमजोर पड़ने का असर राजस्थान, दिल्ली, हरियाणा और पंजाब में भी महसूस किया जा रहा है। इन इलाकों में दिन का तापमान बढ़ा है और उमस ने लोगों की परेशानी बढ़ा दी है। मौसम विभाग का अनुमान है कि अगले कुछ दिनों तक इन क्षेत्रों में भारी बारिश की संभावना कम रहेगी। Arunachal Pradesh में ITBP के जवान फंसे पूर्वोत्तर भारत में स्थिति बिल्कुल अलग है। अरुणाचल प्रदेश में लगातार बारिश और भूस्खलन के कारण कई सड़कें बंद हो गई हैं। इसी बीच ITBP के 15 जवान एक दुर्गम इलाके में फंस गए। प्रशासन और सुरक्षा एजेंसियां लगातार राहत एवं बचाव अभियान चला रही हैं। मौसम साफ होते ही जवानों को सुरक्षित बाहर निकालने की कोशिश तेज की जाएगी। किसानों की बढ़ी चिंता जुलाई का महीना खरीफ फसलों के लिए बेहद अहम माना जाता है। ऐसे समय में बारिश कम होने से किसानों की चिंता बढ़ गई है। यदि अगले कुछ दिनों में अच्छी वर्षा नहीं होती, तो कई क्षेत्रों में फसलों की पैदावार प्रभावित हो सकती है। कृषि विशेषज्ञ किसानों को सलाह दे रहे हैं कि वे स्थानीय मौसम पूर्वानुमान के अनुसार सिंचाई और फसल प्रबंधन की योजना बनाएं। IMD ने क्या कहा? भारतीय मौसम विभाग का कहना है कि अगले कुछ दिनों में बंगाल की खाड़ी में नया लो-प्रेशर सिस्टम बनने की संभावना है। यदि यह सिस्टम मजबूत होता है, तो उत्तर, मध्य और पश्चिम भारत के कई हिस्सों में मानसून फिर से सक्रिय हो सकता है और अच्छी बारिश देखने को मिल सकती है। हालांकि, पूर्वोत्तर और दक्षिण भारत के कुछ इलाकों में फिलहाल बारिश का सिलसिला जारी रहने का अनुमान है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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मेरठ हत्याकांड: मुस्कान और साहिल को फांसी की सजा, पति सौरभ की हत्या के मामले में कोर्ट का फैसला

मेरठ। उत्तर प्रदेश के मेरठ में सौरभ राजपूत हत्याकांड में अदालत ने उनकी पत्नी मुस्कान रस्तोगी और उसके प्रेमी साहिल को फांसी की सजा सुनाई है। दोनों पर सौरभ की हत्या करने का आरोप साबित होने के बाद यह फैसला सुनाया गया। सजा सुनाते हुए जज ने वारदात को नृशंस हत्याकांड बताया और कहा कि इसमें माफी स्वीकार नहीं होगी। वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से कोर्ट में पेश हुए मुस्कान और साहिल सजा सुनाए जाने से पहले जेल में बंद मुस्कान और साहिल को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए अदालत से जोड़ा गया। इस दौरान दोनों रोने लगे। जज ने मुस्कान से पूछा कि पति सौरभ राजपूत की हत्या के मामले में दोषी ठहराए जाने के बाद वह क्या सजा चाहती है। इस पर मुस्कान ने कहा, “मेरी बच्चियों का ख्याल रखा जाए।” इसके बाद वह खामोश हो गई। वहीं, साहिल से भी यही सवाल पूछा गया, लेकिन उसने कोई जवाब नहीं दिया। सजा के ऐलान के बाद रो पड़ीं सौरभ की मां अदालत के फैसले के बाद सौरभ राजपूत की मां भावुक हो गईं और रो पड़ीं। उन्होंने कहा कि उन्हें शांति से न्याय मिल गया। इस मामले में सजा का ऐलान सौरभ के परिवार के लिए लंबे इंतजार के बाद आया है। 3 मार्च 2025 को हुई थी सौरभ की हत्या सौरभ राजपूत की हत्या 3 मार्च 2025 को हुई थी। मामले में सामने आए विवरण के अनुसार, हत्या के बाद शव के पांच टुकड़े किए गए और उन्हें नीले ड्रम में भर दिया गया था। इस वारदात ने पूरे देश में व्यापक चर्चा बटोरी थी। अदालत ने मामले में मुस्कान रस्तोगी और साहिल को दोषी ठहराते हुए मृत्युदंड की सजा सुनाई है।

इंदौर में प्लॉट बेचने के नाम पर 7.80 लाख की ठगी का आरोप, ब्रोकर समेत दो पर FIR

शहर के एरोड्रम थाना क्षेत्र में प्लॉट बेचने के नाम पर धोखाधड़ी का मामला सामने आया है। आरोप है कि प्लॉट का सौदा करने के बाद ब्रोकर और प्लॉट मालिक ने फरियादी से 7 लाख 80 हजार रुपये ले लिए, लेकिन न तो प्लॉट की रजिस्ट्री कराई और न ही कब्जा दिया। शिकायत की जांच के बाद एरोड्रम थाना पुलिस ने नंदकिशोर मनावत और धर्मेंद्र ठाकुर के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर ली है। 9.30 लाख में तय हुआ था प्लॉट का सौदा पुलिस के मुताबिक, नंदबाग कॉलोनी निवासी विजय चौहान ने शिकायत में बताया कि उन्होंने नंदबाग में एक प्लॉट का सौदा 9 लाख 30 हजार रुपये में तय किया था। इस संबंध में एग्रीमेंट भी किया गया था। फरियादी ने आरोप लगाया कि उन्होंने नकद और ऑनलाइन माध्यम से कुल 7 लाख 80 हजार रुपये का भुगतान कर दिया, लेकिन इसके बावजूद उन्हें प्लॉट का कब्जा नहीं मिला और रजिस्ट्री भी नहीं कराई गई। ब्रोकर ने परिचित बताकर कराया था सौदा विजय चौहान के अनुसार, धर्मेंद्र ठाकुर ने उन्हें बताया था कि नंदकिशोर मनावत उसका परिचित है और वह अपना प्लॉट बेचना चाहता है। इसके बाद धर्मेंद्र ने सौदे में ब्रोकर की भूमिका निभाई और इसके बदले 10 हजार रुपये लिए। शिकायतकर्ता का आरोप है कि भुगतान के बाद जब उन्होंने रजिस्ट्री कराने और प्लॉट का कब्जा देने की मांग की, तो उन्हें लगातार टालमटोल का सामना करना पड़ा। 25 से ज्यादा केस होने की धमकी देने का आरोप फरियादी ने आरोप लगाया कि रजिस्ट्री और कब्जे के लिए दबाव बनाने पर धर्मेंद्र ठाकुर ने धमकी दी। शिकायत के मुताबिक, उसने कहा कि उसके खिलाफ 25 से ज्यादा मामले चल रहे हैं। साथ ही, उसके या नंदकिशोर मनावत के पास दोबारा आने पर अंजाम भुगतने की चेतावनी भी दी। 2.80 लाख रुपये लौटाए, 5 लाख बाकी होने का दावा विजय चौहान के मुताबिक, पुलिस में शिकायत करने की बात कहने के बाद नंदकिशोर मनावत ने 2 लाख 50 हजार रुपये नकद और 30 हजार रुपये ऑनलाइन वापस किए। हालांकि, फरियादी का आरोप है कि बाकी 5 लाख रुपये लौटाने से इनकार कर दिया गया। इसके बाद विजय चौहान ने पुलिस अधिकारियों से शिकायत की। जांच के बाद एरोड्रम थाना पुलिस ने नंदकिशोर मनावत और धर्मेंद्र ठाकुर के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर आगे की कार्रवाई शुरू कर दी है। मामले में लगाए गए आरोपों की पुष्टि न्यायिक प्रक्रिया के तहत होनी बाकी है।

SIR के खिलाफ प्रदर्शन करने वाले छात्रों से मिले राहुल गांधी, दिल्ली पुलिस पर मारपीट के आरोप

नई दिल्ली। SIR के खिलाफ दिल्ली में प्रदर्शन करने वाले छात्रों ने बुधवार को कांग्रेस नेता राहुल गांधी से मुलाकात की। इसके बाद राहुल गांधी और छात्रों ने संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस की, जिसमें प्रदर्शनकारियों ने दिल्ली पुलिस पर मारपीट और हिरासत के दौरान दुर्व्यवहार करने के आरोप लगाए। प्रेस कॉन्फ्रेंस में NSUI के छात्रों, कार्यकर्ताओं और कंटेंट क्रिएटर्स ने अपने साथ हुई कथित घटनाओं की जानकारी दी। प्रदर्शनकारियों ने पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए मामले में जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की। छात्रा ने कान पर चोट लगने का लगाया आरोप प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान एक छात्रा ने आरोप लगाया कि हिरासत के दौरान पुलिसकर्मी ने उसके प्राइवेट पार्ट पर लात मारी। वहीं, दिल्ली विश्वविद्यालय की छात्रा अदिरा ने दावा किया कि पुलिस की पिटाई के कारण उसके एक कान की सुनने की क्षमता चली गई। प्रदर्शनकारियों ने हिरासत के दौरान कथित ज्यादती और मारपीट से जुड़े अपने अनुभव साझा किए। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि की जानकारी सामने नहीं आई है। RSS और भाजपा से जुड़े लोगों के कहने पर हिरासत का आरोप एक अन्य प्रदर्शनकारी ने आरोप लगाया कि पुलिस RSS और भाजपा से जुड़े लोगों के कहने पर प्रदर्शनकारियों को हिरासत में ले रही थी। यह आरोप भी प्रदर्शनकारियों की ओर से लगाया गया है। राहुल गांधी ने सबूत सुरक्षित रखने को कहा राहुल गांधी ने छात्रों से घटनाओं से जुड़े वीडियो और अन्य सबूत सुरक्षित रखने को कहा। उन्होंने कहा कि इन सबूतों के आधार पर पुलिसकर्मियों से लेकर मुख्य चुनाव आयुक्त तक, जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की जाएगी। प्रदर्शनकारियों के आरोपों और पुलिस की कार्रवाई को लेकर आगे क्या कदम उठाए जाते हैं, इस पर नजर रहेगी।

बांग्लादेश टेस्ट सीरीज से बाहर हुए शाई होप और अल्जारी जोसेफ, केविन विकहम को पहली बार मिला मौका

क्रिकेट न्यूज। वेस्टइंडीज को बांग्लादेश के खिलाफ आगामी दो टेस्ट मैचों की सीरीज से पहले बड़ा झटका लगा है। टीम के बल्लेबाज शाई होप और तेज गेंदबाज अल्जारी जोसेफ सीरीज से बाहर हो गए हैं। क्रिकेट वेस्टइंडीज (CWI) ने 23 वर्षीय टॉप ऑर्डर बल्लेबाज केविन विकहम को पहली बार टेस्ट टीम में शामिल किया है। ऑलराउंडर कीमो पॉल को भी टीम में जगह मिली है। CWI के मुताबिक, मेडिकल जांच और विशेषज्ञों की सलाह के बाद अल्जारी जोसेफ को सीरीज से हटाने का फैसला लिया गया। बोर्ड उनके कार्यभार को नियंत्रित कर चोट के जोखिम को कम करना चाहता है। वहीं, तीनों फॉर्मेट में लगातार खेलने के बाद शाई होप को आराम दिया गया है। चोट के खतरे को देखते हुए जोसेफ को आराम क्रिकेट वेस्टइंडीज ने बताया कि अल्जारी जोसेफ को टीम से बाहर रखने का फैसला उनकी सहमति से लिया गया है। बोर्ड के अनुसार, टेस्ट क्रिकेट में तेज गेंदबाजों को लंबे स्पेल में लगातार गेंदबाजी करनी पड़ती है। इससे छोटे फॉर्मेट की तुलना में कार्यभार और चोट का जोखिम बढ़ सकता है। इसी को ध्यान में रखते हुए जोसेफ के वर्कलोड को कम करने का फैसला किया गया है, ताकि उनके स्वास्थ्य और फिटनेस का ध्यान रखा जा सके। शाई होप को भी दिया गया आराम CWI ने कहा कि शाई होप तीनों फॉर्मेट में लगातार खेल रहे थे। ऐसे में उनके कार्यभार और स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए उन्हें टेस्ट सीरीज से आराम दिया गया है। बोर्ड का यह फैसला फरवरी 2027 में होने वाले वनडे वर्ल्ड कप क्वालिफायर्स को ध्यान में रखकर भी लिया गया है। टीम प्रबंधन चाहता है कि खिलाड़ी आगामी महत्वपूर्ण मुकाबलों के लिए फिट रहें। केविन विकहम को पहली बार टेस्ट टीम में मौका शाई होप की गैरमौजूदगी में 23 वर्षीय टॉप ऑर्डर बल्लेबाज केविन विकहम को पहली बार टेस्ट टीम में शामिल किया गया है। इसके अलावा ऑलराउंडर कीमो पॉल को भी टीम में जगह मिली है। अब देखना होगा कि बांग्लादेश की घरेलू परिस्थितियों में वेस्टइंडीज की टीम नए संयोजन के साथ कैसा प्रदर्शन करती है। कोच डैरेन सैमी ने सीरीज जीत को बताया अहम वेस्टइंडीज के मुख्य कोच डैरेन सैमी ने कहा कि वर्ल्ड टेस्ट चैंपियनशिप के मौजूदा चक्र की शुरुआत में टीम ने कुछ लक्ष्य तय किए थे। इनमें टेस्ट रैंकिंग के ऊपरी आधे हिस्से में जगह बनाना भी शामिल है। उन्होंने कहा कि बांग्लादेश के खिलाफ सीरीज जीतने से टीम अपने लक्ष्य के करीब पहुंच सकती है। सैमी के मुताबिक, बांग्लादेश को उसकी घरेलू परिस्थितियों में हराना चुनौतीपूर्ण होगा, लेकिन टीम इसके लिए तैयार है। 28 अक्टूबर से शुरू होगा पहला टेस्ट बांग्लादेश और वेस्टइंडीज के बीच दो टेस्ट मैचों की सीरीज खेली जाएगी। पहला टेस्ट 28 अक्टूबर से ढाका में शुरू होगा, जबकि दूसरा टेस्ट 5 नवंबर से सिलहट में खेला जाएगा।

IMF ने बढ़ाया भारत की GDP ग्रोथ का अनुमान, 2026 और 2027 में 7% विकास दर रहने की उम्मीद

नई दिल्ली। अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) ने साल 2026 के लिए भारत की आर्थिक विकास दर का अनुमान 6.4% से बढ़ाकर 7% कर दिया है। वैश्विक तनाव, आर्थिक सुस्ती और कच्चे तेल की ऊंची कीमतों के बावजूद भारतीय अर्थव्यवस्था की मजबूती ने अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं का ध्यान खींचा है। मजबूत घरेलू मांग और सर्विसेज सेक्टर के बेहतर प्रदर्शन को भारत की तेज विकास दर की प्रमुख वजह माना गया है। IMF ने अक्टूबर 2026 की अपनी वर्ल्ड इकोनॉमिक आउटलुक रिपोर्ट में भारत की विकास संभावनाओं को सकारात्मक बताया है। रिपोर्ट के अनुसार, ऊर्जा आयात पर निर्भर कई उभरती अर्थव्यवस्थाएं जहां दबाव का सामना कर रही हैं, वहीं भारत की आर्थिक गतिविधियों में मजबूती बनी हुई है। 2027 में भी 7% ग्रोथ का अनुमान IMF ने 2026 के लिए भारत की विकास दर के अनुमान में जुलाई के मुकाबले 0.6 प्रतिशत अंक और अप्रैल के मुकाबले 0.5 प्रतिशत अंक की बढ़ोतरी की है। वहीं, 2027 के लिए भी विकास दर का अनुमान बढ़ाकर 7% कर दिया गया है। दिए गए आंकड़ों के मुताबिक, 2027 का अनुमान जुलाई के मुकाबले 0.3 प्रतिशत अंक और अप्रैल के मुकाबले 0.5 प्रतिशत अंक अधिक है। इससे संकेत मिलता है कि वैश्विक आर्थिक चुनौतियों के बीच भी भारत में विकास की संभावनाओं को लेकर उम्मीद बनी हुई है। IMF से पहले विश्व बैंक और आर्थिक सहयोग एवं विकास संगठन (OECD) जैसी अंतरराष्ट्रीय संस्थाएं भी भारत की विकास दर के अनुमान में बढ़ोतरी कर चुकी हैं। चीन की सुस्ती के बीच भारत पर नजर रिपोर्ट के मुताबिक, एशिया की अर्थव्यवस्थाओं में मजबूती देखने को मिल रही है। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) से जुड़ी गतिविधियों में तेजी ने भी वैश्विक आर्थिक परिदृश्य को प्रभावित किया है। भारत और चीन एशिया की आर्थिक गतिविधियों में अहम भूमिका निभा रहे हैं, हालांकि दोनों देशों की विकास संभावनाओं में अंतर दिखाई दे रहा है। IMF के अनुमान के अनुसार, चीन की विकास दर 2026 में 4.5% और 2027 में 4% रह सकती है। वैश्विक तनाव और ऊर्जा की ऊंची कीमतों को चीन की आर्थिक वृद्धि के सामने चुनौतियों में शामिल किया गया है। दुनिया की आर्थिक विकास दर पर दबाव IMF के मुताबिक, 2028 से 2031 के बीच वैश्विक अर्थव्यवस्था औसतन 3.2% की दर से बढ़ सकती है। यह 2000 से 2019 के बीच महामारी से पहले दर्ज औसत 3.7% की विकास दर से कम है। रिपोर्ट में वैश्विक तनाव, ऊर्जा बाजार में अनिश्चितता और ऊर्जा आयात पर निर्भर उभरती अर्थव्यवस्थाओं पर पड़ने वाले दबाव को आर्थिक विकास के लिए चुनौती बताया गया है। ऐसे माहौल में भारत की अनुमानित विकास दर अपेक्षाकृत मजबूत दिखाई देती है। मजबूत घरेलू मांग और जनसांख्यिकी से मिल रहा सहारा भारत की आर्थिक मजबूती के पीछे बढ़ता घरेलू बाजार, मजबूत मांग, अनुकूल जनसांख्यिकी और सुधारों को अहम कारक माना गया है। सर्विसेज सेक्टर का बेहतर प्रदर्शन भी विकास दर को सहारा दे रहा है। हालांकि, बेहतर अनुमान के बावजूद चुनौतियां खत्म नहीं हुई हैं। कच्चे तेल की ऊंची कीमतें भारत के आयात बिल और महंगाई पर दबाव डाल सकती हैं। इसके अलावा, अंतरराष्ट्रीय तनाव और वैश्विक मांग में कमजोरी का असर भारतीय अर्थव्यवस्था पर भी पड़ सकता है।

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