नई दिल्ली: दिल्ली जल बोर्ड के दो दिवसीय सम्मेलन ‘जल मंथन 2026’ का बुधवार को समापन हो गया। 15 और 16 सितंबर को आयोजित इस सम्मेलन में दिल्ली को जल सुरक्षा प्रदान करने, हर घर तक 24×7 गुणवत्तापूर्ण पानी पहुंचाने और यमुना के कायाकल्प के लिए व्यापक रोडमैप तैयार करने पर चर्चा हुई।
सम्मेलन में भारत के अलावा इजराइल, ब्रिटेन, नीदरलैंड और फ्रांस के जल विशेषज्ञों ने हिस्सा लिया। इसके साथ ही विश्व बैंक और एशियाई विकास बैंक के प्रतिनिधि भी कार्यक्रम में शामिल हुए।
जल नेटवर्क में AI और डिजिटल तकनीक के इस्तेमाल पर जोर
जल मंथन 2026 के दौरान पानी की लीकेज रोकने और जल आपूर्ति नेटवर्क की क्षमता बढ़ाने के लिए आधुनिक तकनीकों के इस्तेमाल पर जोर दिया गया।
इनमें शामिल हैं:
- आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI)
- मशीन लर्निंग
- डिजिटल ट्विन तकनीक
- स्मार्ट मीटरिंग
इन तकनीकों की मदद से जल नेटवर्क की निगरानी, लीकेज की पहचान और पानी की आपूर्ति व्यवस्था को अधिक प्रभावी बनाने पर विचार किया गया।
उपचारित अपशिष्ट जल के पुन: उपयोग पर सहमति
सम्मेलन में उपचारित अपशिष्ट जल और कीचड़ के पुन: उपयोग तथा पुनर्चक्रण की रणनीति पर भी चर्चा हुई। इसके तहत उपचारित पानी का इस्तेमाल गैर-पेय जरूरतों के लिए करने पर जोर दिया गया।
इससे ताजे पानी की मांग को कम करने और यमुना पर पड़ने वाले दबाव को घटाने में मदद मिलने की उम्मीद है।
24×7 जल आपूर्ति और सर्कुलर वॉटर इकोनॉमी पर चर्चा
जल मंथन में दिल्ली की जल व्यवस्था से जुड़े कई महत्वपूर्ण विषयों पर विचार-विमर्श किया गया। इनमें प्रमुख रूप से शामिल रहे:
- 24×7 जल आपूर्ति
- सर्कुलर वॉटर इकोनॉमी
- डिजिटल जल बोर्ड
- कुशल कार्यबल का विकास
- वित्तीय स्थिरता
- यमुना पुनरुद्धार
विभिन्न कार्य समूहों की सिफारिशों को ‘जल संकल्प’ के रूप में संकलित किया गया है। इन सुझावों को दिल्ली की जल व्यवस्था में लागू करने के लिए आगे की कार्ययोजना तैयार की जाएगी।
जल मंत्री ने बताया सम्मेलन का उद्देश्य
दिल्ली के जल मंत्री प्रवेश साहिब सिंह ने कहा कि ‘जल मंथन’ का उद्देश्य केवल चर्चा तक सीमित रहना नहीं है। इसका लक्ष्य दुनिया में इस्तेमाल हो रही बेहतर तकनीकों और विचारों को दिल्ली की जरूरतों के अनुसार जमीन पर लागू करना है।
उन्होंने कहा कि सरकार का उद्देश्य हर घर तक गुणवत्तापूर्ण पानी पहुंचाना और यमुना की स्थिति में स्पष्ट सुधार लाना है।
सम्मेलन में सामने आए सुझावों के आधार पर दिल्ली की जल आपूर्ति व्यवस्था को मजबूत करने और यमुना पुनरुद्धार के लिए आगे की रणनीति तैयार की जाएगी।



