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EPFO Update: Portal और UMANG App ठप, PF Claim से लेकर Passbook तक सभी सेवाएं प्रभावित

कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) की ऑनलाइन सेवाएं तय समय के बाद भी पूरी तरह बहाल नहीं हो सकी हैं। गुरुवार को भी लाखों कर्मचारियों और पेंशनधारकों को EPFO Portal और UMANG App पर लॉगिन करने, PF क्लेम दर्ज करने और ई-पासबुक देखने में परेशानी का सामना करना पड़ा। लंबे समय तक सेवाएं बंद रहने से सोशल मीडिया पर भी यूजर्स ने नाराजगी जताई और कई लोगों ने इसे “तारीख पर तारीख” वाला मामला बताया। तय समय के बाद भी शुरू नहीं हुईं EPFO Services EPFO ने पहले जानकारी दी थी कि ऑनलाइन सेवाओं को कुछ समय के लिए बंद रखा जाएगा, क्योंकि संगठन अपने डिजिटल सिस्टम को अपग्रेड कर रहा है। उम्मीद थी कि मेंटेनेंस पूरा होने के बाद सभी सुविधाएं सामान्य हो जाएंगी, लेकिन तकनीकी काम अपेक्षा से अधिक समय लेने के कारण गुरुवार को भी अधिकांश सेवाएं प्रभावित रहीं। इस वजह से जिन कर्मचारियों को तत्काल PF क्लेम करना था या अपने खाते से जुड़ी जानकारी देखनी थी, उन्हें इंतजार करना पड़ा। क्यों किया जा रहा है सिस्टम Upgrade? EPFO के अनुसार, संगठन डेटाबेस कंसोलिडेशन और सॉफ्टवेयर अपग्रेडेशन पर काम कर रहा है। इसका उद्देश्य ऑनलाइन सेवाओं को पहले से अधिक तेज, सुरक्षित और भरोसेमंद बनाना है, ताकि भविष्य में क्लेम प्रोसेसिंग और अन्य डिजिटल सुविधाएं बेहतर तरीके से उपलब्ध कराई जा सकें। हालांकि, इस अपग्रेडेशन के दौरान अस्थायी रूप से कई ऑनलाइन सेवाएं बंद रखी गई हैं। कौन-कौन सी सुविधाएं हैं प्रभावित? सर्वर अपग्रेड के चलते फिलहाल कई जरूरी सेवाएं उपलब्ध नहीं हैं, जिनमें शामिल हैं— इन सेवाओं के बंद रहने से कर्मचारियों के साथ-साथ कंपनियों और HR विभागों का काम भी प्रभावित हुआ है। PF Balance कैसे चेक करें? अगर EPFO Portal या UMANG App काम नहीं कर रहे हैं, तो खाताधारक अपने रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर से SMS या Missed Call Service का इस्तेमाल करके PF खाते की बेसिक जानकारी और बैलेंस प्राप्त कर सकते हैं। यह सुविधा फिलहाल वैकल्पिक माध्यम के रूप में उपलब्ध है। EPFO ने क्या कहा? EPFO का कहना है कि तकनीकी अपग्रेडेशन का काम तेजी से पूरा किया जा रहा है। जैसे ही प्रक्रिया पूरी होगी, सभी ऑनलाइन सेवाएं चरणबद्ध तरीके से फिर से शुरू कर दी जाएंगी। संगठन ने सदस्यों से धैर्य रखने की अपील की है और सलाह दी है कि जरूरी काम के लिए कुछ समय बाद दोबारा पोर्टल या ऐप पर प्रयास करें। करोड़ों कर्मचारियों की निगाहें बहाली पर देशभर में करोड़ों कर्मचारी अपनी PF से जुड़ी जरूरतों के लिए EPFO की डिजिटल सेवाओं पर निर्भर हैं। ऐसे में पोर्टल और UMANG App लंबे समय तक बंद रहने से क्लेम, ट्रांसफर और अन्य जरूरी प्रक्रियाएं प्रभावित हुई हैं। अब सभी की नजर इस बात पर है कि सेवाएं पूरी तरह कब तक सामान्य होती हैं। उम्मीद की जा रही है कि अपग्रेडेशन पूरा होने के बाद EPFO का नया सिस्टम पहले की तुलना में अधिक तेज, सुरक्षित और यूजर-फ्रेंडली अनुभव देगा। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Japan

Japan PM Meets PM Modi: भारत में Investment बढ़ाने और Semiconductor Mission

भारत (India) और जापान (Japan) के रिश्तों को नई मजबूती देने की दिशा में गुरुवार को नई दिल्ली में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और जापान के प्रधानमंत्री के बीच महत्वपूर्ण द्विपक्षीय वार्ता हुई। इस बैठक में दोनों देशों ने निवेश, रक्षा सहयोग, सेमीकंडक्टर निर्माण, हाई-टेक टेक्नोलॉजी, सप्लाई चेन और इंडो-पैसिफिक क्षेत्र की सुरक्षा जैसे कई अहम विषयों पर विस्तार से चर्चा की। इस दौरे की एक और खास बात यह रही कि जापान की वरिष्ठ नेता सनाए ताकाइची पहली बार भारत पहुंचीं। उनकी मौजूदगी को दोनों देशों के बीच बढ़ते रणनीतिक और आर्थिक संबंधों का सकारात्मक संकेत माना जा रहा है। भारत-जापान साझेदारी को मिलेगा नया विस्तार भारत और जापान लंबे समय से रणनीतिक साझेदार रहे हैं, लेकिन बदलते वैश्विक हालात ने इस रिश्ते को और अधिक महत्वपूर्ण बना दिया है। दोनों देशों का लक्ष्य केवल व्यापार बढ़ाना नहीं, बल्कि तकनीक, रक्षा और भविष्य की अर्थव्यवस्था से जुड़े क्षेत्रों में मिलकर आगे बढ़ना भी है। बैठक के दौरान दोनों नेताओं ने इस बात पर जोर दिया कि आने वाले वर्षों में दोनों देशों के बीच सहयोग को और व्यापक बनाया जाएगा, ताकि एशिया-प्रशांत क्षेत्र में स्थिरता और आर्थिक विकास को गति मिल सके। Investment बढ़ाने पर बनी सहमति वार्ता में जापानी कंपनियों के भारत में निवेश बढ़ाने पर विशेष जोर दिया गया। ऑटोमोबाइल, इलेक्ट्रॉनिक्स, रेलवे, इंफ्रास्ट्रक्चर, लॉजिस्टिक्स और ग्रीन एनर्जी जैसे क्षेत्रों में नए अवसरों पर चर्चा हुई। भारत सरकार चाहती है कि अधिक से अधिक जापानी कंपनियां देश में उत्पादन इकाइयां स्थापित करें। इससे रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे और भारतीय विनिर्माण क्षेत्र को भी मजबूती मिलेगी। Semiconductor Sector बना बैठक का प्रमुख एजेंडा आज दुनिया में सेमीकंडक्टर की मांग लगातार बढ़ रही है। भारत इस क्षेत्र में अपनी मजबूत मौजूदगी दर्ज कराना चाहता है, जबकि जापान के पास चिप निर्माण और एडवांस टेक्नोलॉजी का लंबा अनुभव है। इसी वजह से बैठक में सेमीकंडक्टर मैन्युफैक्चरिंग, रिसर्च, तकनीकी सहयोग, कुशल मानव संसाधन तैयार करने और मजबूत सप्लाई चेन विकसित करने पर विशेष चर्चा हुई। माना जा रहा है कि आने वाले समय में इस क्षेत्र में दोनों देशों के बीच कई नई परियोजनाएं शुरू हो सकती हैं। Defence Cooperation को मिलेगी नई मजबूती रक्षा क्षेत्र भी इस बैठक का प्रमुख हिस्सा रहा। दोनों नेताओं ने समुद्री सुरक्षा, रक्षा उपकरणों के संयुक्त विकास, सैन्य तकनीक, साइबर सुरक्षा और संयुक्त अभ्यासों को लेकर सहयोग बढ़ाने पर विचार-विमर्श किया। इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में शांति, स्वतंत्र नौवहन और नियम-आधारित व्यवस्था बनाए रखने को लेकर भारत और जापान ने एक बार फिर अपनी साझा प्रतिबद्धता दोहराई। नई टेक्नोलॉजी और Supply Chain पर भी चर्चा कोविड महामारी के बाद वैश्विक सप्लाई चेन को लेकर दुनिया का नजरिया बदल चुका है। ऐसे में भारत और जापान दोनों ही सुरक्षित और भरोसेमंद सप्लाई नेटवर्क विकसित करना चाहते हैं। बैठक में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), डिजिटल टेक्नोलॉजी, क्रिटिकल मिनरल्स, स्वच्छ ऊर्जा और उन्नत विनिर्माण जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर भी चर्चा हुई। पहली बार भारत आईं सनाए ताकाइची जापान की वरिष्ठ नेता सनाए ताकाइची का यह पहला भारत दौरा है। आर्थिक सुरक्षा और तकनीकी नीतियों में उनकी अहम भूमिका रही है। माना जा रहा है कि उनकी यह यात्रा भविष्य में भारत-जापान सहयोग को और नई दिशा देने में मददगार साबित हो सकती है। क्यों महत्वपूर्ण है यह बैठक? विशेषज्ञों का मानना है कि मौजूदा वैश्विक परिस्थितियों में भारत और जापान की साझेदारी पहले से कहीं अधिक अहम हो गई है। दोनों देश आर्थिक विकास के साथ-साथ तकनीकी आत्मनिर्भरता, सुरक्षित सप्लाई चेन और क्षेत्रीय सुरक्षा को लेकर साझा रणनीति पर आगे बढ़ रहे हैं। यदि इन चर्चाओं के बाद प्रस्तावित योजनाएं जमीन पर उतरती हैं, तो भारत में निवेश बढ़ने के साथ-साथ सेमीकंडक्टर, रक्षा उत्पादन और हाई-टेक उद्योगों को भी बड़ा लाभ मिल सकता है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Mohan Bhagwat

Mohan Bhagwat on Partition: ‘उन्होंने घर नहीं, अपनी मातृभूमि चुनी’, RSS प्रमुख का संदेश

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के सरसंघचालक मोहन भागवत (Mohan Bhagwat) ने भारत के विभाजन और उसके बाद देश में आए लाखों लोगों को लेकर ऐसा बयान दिया है, जिसकी चर्चा राजनीतिक और सामाजिक दोनों हलकों में हो रही है। उन्होंने कहा कि 1947 के विभाजन के बाद भारत आने वाले लोगों को ‘शरणार्थी’ (Refugees) कहना सही नहीं है, क्योंकि वे किसी दूसरे देश में शरण लेने नहीं आए थे, बल्कि अपने ही देश लौटे थे। भागवत के मुताबिक, इन लोगों ने धन-दौलत, कारोबार और पुश्तैनी घर पीछे छोड़ दिए, लेकिन अपनी संस्कृति, आस्था और राष्ट्रीय पहचान से समझौता नहीं किया। इसलिए उनके संघर्ष को केवल ‘शरणार्थी’ शब्द में नहीं बांधा जा सकता। “उन्होंने संपत्ति नहीं, अपना देश चुना” अपने संबोधन में मोहन भागवत ने कहा कि विभाजन के समय लाखों परिवारों को मजबूरी में अपना सब कुछ छोड़ना पड़ा। इसके बावजूद उन्होंने भारत को इसलिए चुना क्योंकि यह उनकी आस्था, परंपरा और सांस्कृतिक मूल्यों की भूमि थी। उन्होंने कहा कि “इन लोगों ने संपत्ति नहीं, अपना देश चुना। वे यहां इसलिए आए ताकि बिना किसी डर के अपने धर्म का पालन कर सकें और सम्मान के साथ जीवन जी सकें।” सिंधी समाज के योगदान का किया उल्लेख RSS प्रमुख ने सिंधी समाज के संघर्ष और योगदान का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि विभाजन का सबसे गहरा असर जिन समुदायों पर पड़ा, उनमें सिंधी समाज भी शामिल था। लाखों लोगों ने रातों-रात अपना घर-बार छोड़ दिया, लेकिन भारत में नई शुरुआत करते हुए व्यापार, शिक्षा, उद्योग और समाज सेवा के क्षेत्र में अपनी अलग पहचान बनाई। भागवत ने कहा कि आज देश के विकास में इन परिवारों का योगदान किसी से छिपा नहीं है। विभाजन को बताया बड़ी मानवीय त्रासदी अपने संबोधन में उन्होंने कहा कि भारत का विभाजन केवल सीमाओं का बंटवारा नहीं था, बल्कि करोड़ों लोगों के जीवन को बदल देने वाली त्रासदी थी। लाखों परिवार बिछड़ गए, हजारों लोगों ने अपने प्रियजनों को खोया और करोड़ों लोगों को नए सिरे से जीवन शुरू करना पड़ा। उन्होंने कहा कि इस इतिहास को केवल किताबों तक सीमित नहीं रखना चाहिए, बल्कि आने वाली पीढ़ियों को इसके बारे में बताना जरूरी है, ताकि समाज में एकता और राष्ट्रीय चेतना मजबूत हो सके। इतिहास से सीख लेने की जरूरत मोहन भागवत ने कहा कि इतिहास को भूलना किसी भी समाज के लिए ठीक नहीं होता। उनका मानना है कि अतीत की घटनाओं से सीख लेकर ही बेहतर भविष्य बनाया जा सकता है। उन्होंने सभी नागरिकों से सामाजिक सौहार्द, सांस्कृतिक विरासत और राष्ट्रीय एकता को मजबूत करने का आह्वान किया। बयान क्यों बना चर्चा का विषय? मोहन भागवत का यह बयान ऐसे समय सामने आया है, जब देश में विभाजन, नागरिकता और ऐतिहासिक पहचान जैसे मुद्दों पर लगातार बहस हो रही है। ऐसे में उनका यह कहना कि विभाजन के बाद भारत आए लोगों को शरणार्थी नहीं कहा जाना चाहिए, राजनीतिक और सामाजिक दोनों स्तरों पर चर्चा का विषय बन गया है। हालांकि, इस मुद्दे पर अलग-अलग राजनीतिक दलों और सामाजिक संगठनों की अपनी-अपनी राय है। ऐसे में आने वाले दिनों में इस बयान पर और प्रतिक्रियाएं देखने को मिल सकती हैं। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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IMD

Heavy Rain in Mumbai: IMD का बड़ा Alert, समुद्र किनारे जाने से बचें; Rajasthan में मानसून की एंट्री में देरी

देश में मानसून अब दो अलग-अलग तस्वीरें पेश कर रहा है। एक तरफ आर्थिक राजधानी मुंबई में लगातार हो रही Heavy Rain ने लोगों की दिनचर्या को पूरी तरह प्रभावित कर दिया है, तो दूसरी तरफ राजस्थान अब भी मानसून की पहली अच्छी बारिश का इंतजार कर रहा है। भारतीय मौसम विभाग (IMD) ने मुंबई और आसपास के तटीय इलाकों में अगले 24 से 48 घंटे बेहद अहम बताते हुए लोगों को समुद्र से दूर रहने की सलाह दी है। मौसम विभाग के अनुसार हाई टाइड के दौरान अरब सागर में करीब 15 फीट तक ऊंची लहरें उठ सकती हैं। ऐसे में किसी भी तरह की लापरवाही जानलेवा साबित हो सकती है। प्रशासन ने मछुआरों के साथ-साथ पर्यटकों और स्थानीय लोगों से भी समुद्र किनारे न जाने की अपील की है। मुंबई में बारिश बनी बड़ी चुनौती बुधवार से शुरू हुई तेज बारिश गुरुवार को भी कई इलाकों में जारी रही। शहर के निचले हिस्सों में पानी भरने से सड़क यातायात प्रभावित हुआ। कई जगहों पर लंबा ट्रैफिक जाम देखने को मिला, जबकि लोकल ट्रेन सेवाओं पर भी बारिश का असर पड़ा। ऑफिस जाने वाले कर्मचारियों और स्कूल-कॉलेज के छात्रों को भी काफी परेशानियों का सामना करना पड़ा। नगर निगम और आपदा प्रबंधन की टीमें लगातार हालात पर नजर बनाए हुए हैं। जलभराव वाले इलाकों में पंपिंग मशीनें लगाई गई हैं और जरूरत पड़ने पर राहत एवं बचाव दलों को तुरंत भेजने की तैयारी की गई है। समुद्र में 15 फीट तक उठ सकती हैं लहरें IMD ने चेतावनी दी है कि हाई टाइड के समय समुद्र बेहद उग्र रूप ले सकता है। अनुमान है कि लहरों की ऊंचाई 15 फीट (करीब 4.5 मीटर) तक पहुंच सकती है। इसी वजह से मछुआरों को फिलहाल समुद्र में न उतरने की सलाह दी गई है। वहीं, लोकप्रिय समुद्र तटों पर भी सुरक्षा बढ़ा दी गई है ताकि किसी तरह की दुर्घटना न हो। Rajasthan में Monsoon की एंट्री क्यों हुई लेट? हर साल जून के आखिर तक मानसून राजस्थान के अधिकांश हिस्सों में पहुंच जाता है, लेकिन इस बार इसकी रफ्तार धीमी रही। मौसम विभाग का अनुमान है कि राजस्थान में मानसून सामान्य समय से लगभग 7 दिन की देरी से प्रवेश करेगा। हालांकि राहत की बात यह है कि जुलाई के पहले सप्ताह में मानसून तेजी पकड़ सकता है। इसके बाद जयपुर, कोटा, उदयपुर, भरतपुर, अजमेर और आसपास के कई जिलों में अच्छी बारिश होने की संभावना जताई गई है, जिससे किसानों को राहत मिलने की उम्मीद है। इन राज्यों में भी बारिश का Alert IMD के मुताबिक अगले कुछ दिनों में महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश, गुजरात, राजस्थान, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, बिहार, झारखंड, ओडिशा और पश्चिम बंगाल के कई हिस्सों में भारी से बहुत भारी बारिश हो सकती है। पहाड़ी इलाकों में भूस्खलन और मैदानी क्षेत्रों में जलभराव का खतरा बना हुआ है। क्या करें, क्या न करें? मौसम विभाग ने लोगों से अपील की है कि खराब मौसम के दौरान अनावश्यक यात्रा से बचें। यदि बहुत जरूरी हो तभी घर से निकलें। समुद्र किनारे सेल्फी लेने या लहरों के करीब जाने से बचें। स्थानीय प्रशासन और मौसम विभाग द्वारा जारी अलर्ट पर लगातार नजर रखें। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Ram Mandir

Ayodhya Ram Mandir चढ़ावा चोरी केस में जांच तेज, आरोपियों के घरों पर Bulldozer चलाने की तैयारी

अयोध्या के राम मंदिर (Ram Mandir) में चढ़ावे की कथित चोरी का मामला अब सिर्फ पुलिस जांच तक सीमित नहीं रह गया है। मामले में गिरफ्तार आरोपियों के खिलाफ प्रशासन ने सख्त रुख अपनाना शुरू कर दिया है। जानकारी के अनुसार, आरोपियों की संपत्तियों की जांच की जा रही है और यदि इनमें अवैध निर्माण या नियमों का उल्लंघन मिलता है तो कानूनी प्रक्रिया के तहत बुलडोजर कार्रवाई भी की जा सकती है। इसी बीच, राम मंदिर ट्रस्ट के ट्रस्टी महंत दिनेंद्र दास के बयान ने इस पूरे विवाद को नया मोड़ दे दिया है। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि इस मामले की जड़ गोपाल राव हैं और उनकी कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े होते हैं। क्या है पूरा मामला? राम मंदिर में श्रद्धालुओं द्वारा चढ़ाए गए दान और चढ़ावे में कथित गड़बड़ी की शिकायत सामने आने के बाद जांच शुरू की गई। जांच एजेंसियों ने शुरुआती पड़ताल में कुछ लोगों की भूमिका संदिग्ध पाई, जिसके बाद उन्हें गिरफ्तार किया गया। अब पुलिस वित्तीय लेन-देन, संपत्तियों और अन्य दस्तावेजों की भी जांच कर रही है। प्रशासन का कहना है कि कार्रवाई पूरी तरह कानून के दायरे में की जाएगी। यदि जांच में अवैध संपत्ति या निर्माण की पुष्टि होती है, तो नियमानुसार आगे की कार्रवाई की जाएगी। महंत दिनेंद्र दास ने क्या कहा? राम मंदिर ट्रस्ट के ट्रस्टी महंत दिनेंद्र दास ने कहा कि मंदिर की व्यवस्था में पारदर्शिता सबसे महत्वपूर्ण है। उनका आरोप है कि गोपाल राव राम परंपरा का पालन नहीं करते और इसी वजह से व्यवस्था पर सवाल उठे हैं। उन्होंने कहा कि राम मंदिर करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र है। ऐसे में मंदिर से जुड़े हर व्यक्ति की जिम्मेदारी है कि वह पूरी ईमानदारी और जवाबदेही के साथ अपना दायित्व निभाए। यदि किसी स्तर पर लापरवाही या गड़बड़ी हुई है, तो उसकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए और दोषियों पर कानून के अनुसार कार्रवाई की जानी चाहिए। Bulldozer Action की तैयारी, लेकिन फैसला जांच पर निर्भर सूत्रों के मुताबिक, प्रशासन आरोपियों की संपत्तियों का रिकॉर्ड खंगाल रहा है। यदि जांच में अवैध निर्माण या गैरकानूनी तरीके से अर्जित संपत्ति के प्रमाण मिलते हैं, तो संबंधित नियमों के तहत बुलडोजर कार्रवाई की जा सकती है। हालांकि, प्रशासन की ओर से अभी तक इस संबंध में कोई अंतिम आधिकारिक आदेश जारी नहीं किया गया है। श्रद्धालुओं की आस्था से जुड़ा है मामला राम मंदिर देशभर के करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था का प्रतीक है। ऐसे में चढ़ावे से जुड़ी किसी भी तरह की अनियमितता स्वाभाविक रूप से लोगों की चिंता बढ़ाती है। यही वजह है कि इस मामले की हर अपडेट पर लोगों की नजर बनी हुई है। फिलहाल पुलिस और जांच एजेंसियां सभी पहलुओं की पड़ताल कर रही हैं। आने वाले दिनों में जांच रिपोर्ट और प्रशासनिक फैसलों के बाद यह स्पष्ट होगा कि इस मामले में आगे क्या कार्रवाई होती है।
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Rajasthan में भीषण सड़क हादसा: बस-ट्रेलर की टक्कर के बाद लगी आग, 8 लोगों की मौत, 6 जिंदा जले

Rajasthan में भीषण सड़क हादसा: बस-ट्रेलर की टक्कर के बाद लगी आग, 8 लोगों की मौत, 6 जिंदा जले

Rajasthan में शुक्रवार सुबह एक दर्दनाक सड़क हादसे ने कई परिवारों की खुशियां छीन लीं। दौसा-मनोहरपुर हाईवे पर एक निजी बस और ट्रेलर की आमने-सामने टक्कर हो गई। टक्कर इतनी जोरदार थी कि बस में तुरंत आग लग गई। हादसे में 8 लोगों की मौत हो गई, जिनमें 6 यात्री जिंदा जल गए। कई अन्य लोग गंभीर रूप से घायल हुए हैं और उनका अस्पताल में इलाज चल रहा है। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, टक्कर के बाद बस कुछ ही मिनटों में आग का गोला बन गई। बस में सवार कई यात्रियों को बाहर निकलने का मौका तक नहीं मिला। मौके पर मौजूद लोगों ने अपनी जान जोखिम में डालकर यात्रियों को बचाने की कोशिश की, लेकिन तेज आग के कारण सभी तक पहुंच पाना संभव नहीं हो सका। स्थानीय विधायक ने हादसे के बाद बड़ा सवाल उठाया है। उनका कहना है कि बस का इमरजेंसी गेट समय पर नहीं खुला, जिसकी वजह से कई यात्री अंदर ही फंस गए। यदि आपातकालीन गेट खुल जाता तो शायद कई लोगों की जान बचाई जा सकती थी। हादसे के बाद यह भी दावा किया गया कि बस की डिक्की में बड़ी मात्रा में सिगरेट के बॉक्स रखे हुए थे। आशंका जताई जा रही है कि इससे आग तेजी से फैल गई। हालांकि, प्रशासन ने इस दावे की जांच शुरू कर दी है और अभी इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। घटना की सूचना मिलते ही पुलिस, दमकल और प्रशासन की टीमें मौके पर पहुंचीं। कड़ी मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया गया और घायलों को अस्पताल पहुंचाया गया। मृतकों की पहचान की जा रही है, जबकि घायलों का इलाज जारी है। पुलिस ने हादसे की जांच शुरू कर दी है। शुरुआती जांच में तेज रफ्तार और आमने-सामने की टक्कर को हादसे की वजह माना जा रहा है। वहीं, बस के सुरक्षा इंतजाम, इमरजेंसी गेट और डिक्की में रखे सामान की भी जांच की जाएगी। इस दर्दनाक हादसे ने एक बार फिर सड़क सुरक्षा और सार्वजनिक परिवहन में सुरक्षा मानकों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। देश और प्रदेश की ताजा एवं विश्वसनीय खबरों के लिए जुड़े रहें Deshharpal News Portal के साथ। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Ethanol

Ethanol Blending Policy: सुप्रीम कोर्ट में मामला, क्या महंगा होगा या सस्ता Petrol?

भारत में पेट्रोल में एथेनॉल (Ethanol) मिलाने की नीति (E20 Fuel Policy) को लेकर चल रही बहस अब सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच गई है। इस मामले ने सिर्फ एक तकनीकी मुद्दे को नहीं, बल्कि आम लोगों की रोज़मर्रा की ईंधन लागत और गाड़ियों की परफॉर्मेंस से जुड़े सवालों को भी सामने ला दिया है। सुप्रीम कोर्ट में हुई सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार ने इस पूरे मामले पर अपना पक्ष रखते हुए साफ किया कि एथेनॉल ब्लेंडिंग नीति कोई अचानक लिया गया फैसला नहीं है, बल्कि यह लंबे समय से चल रही राष्ट्रीय ऊर्जा रणनीति का हिस्सा है। सुप्रीम कोर्ट में क्या हुआ? सुनवाई के दौरान सरकार ने कोर्ट को बताया कि: सरकार ने यह भी कहा कि यह नीति भारत को विदेशी तेल पर निर्भरता से कम करने की दिशा में एक बड़ा कदम है। Ethanol Blending क्या है और क्यों लागू किया गया? आसान भाषा में समझें तो: पेट्रोल में एथेनॉल (जो कि गन्ने जैसी फसलों से बनने वाला बायो-फ्यूल है) मिलाया जाता है। अभी भारत में E20 पेट्रोल यानी 20% एथेनॉल मिश्रित ईंधन का उपयोग बढ़ाया जा रहा है। सरकार के अनुसार इसके फायदे: लोगों की चिंता कहाँ है? इस नीति को लेकर आम लोगों और याचिकाकर्ताओं की कुछ चिंताएँ भी सामने आई हैं: इन मुद्दों को लेकर ही यह मामला अदालत तक पहुंचा है। सरकार का मजबूत पक्ष केंद्र सरकार का कहना है कि: सरकार ने कोर्ट को भरोसा दिलाया कि E20 को लेकर सभी सुरक्षा और तकनीकी मानकों की लगातार समीक्षा की जा रही है। क्या पेट्रोल का फॉर्मूला बदलने वाला है? फिलहाल स्थिति बिल्कुल साफ है: हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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नितिन नवीन

UP Politics: नितिन नवीन का दौरा, BJP की सत्ता की हैट्रिक का रोडमैप तैयार

बिहार सरकार के मंत्री और भाजपा के वरिष्ठ नेता नितिन नवीन का पहला उत्तर प्रदेश दौरा राजनीतिक हलकों में चर्चा का बड़ा विषय बन गया है। यह दौरा केवल एक औपचारिक यात्रा नहीं माना जा रहा, बल्कि इसे संगठन को मजबूत करने और आगामी चुनावों की रणनीति तय करने की दिशा में अहम कदम के रूप में देखा जा रहा है। उत्तर प्रदेश, जो देश की राजनीति का सबसे निर्णायक राज्य माना जाता है, वहां भाजपा लगातार तीसरी जीत यानी “सत्ता की हैट्रिक” के लक्ष्य को लेकर पूरी तरह सक्रिय है। ऐसे में नितिन नवीन का यह दौरा संगठन को जमीनी स्तर पर मजबूत करने की बड़ी कवायद का हिस्सा माना जा रहा है। संगठन को मजबूत करने पर खास फोकस इस दौरे के दौरान नितिन नवीन पार्टी पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं के साथ कई अहम बैठकें करेंगे। इन बैठकों में संगठन विस्तार, बूथ मैनेजमेंट, युवा कार्यकर्ताओं की भागीदारी और स्थानीय स्तर पर जनसंपर्क अभियान को और प्रभावी बनाने जैसे मुद्दों पर विस्तार से चर्चा होने की संभावना है। पार्टी की कोशिश है कि हर बूथ तक संगठन की पकड़ मजबूत हो और कार्यकर्ता सीधे जनता से जुड़कर सरकार की योजनाओं को प्रभावी तरीके से पहुंचा सकें। UP में सत्ता की हैट्रिक का रोडमैप भाजपा का फोकस इस समय उत्तर प्रदेश में लगातार तीसरी बार सरकार बनाने पर है। इसके लिए संगठनात्मक ढांचे को और मजबूत करने के साथ-साथ ग्राउंड लेवल पर एक्टिव कार्यकर्ताओं की भूमिका को बढ़ाया जा रहा है।राजनीतिक जानकारों का मानना है कि इस तरह के दौरे सिर्फ बैठकों तक सीमित नहीं रहते, बल्कि यह आने वाले चुनावों के लिए रणनीतिक दिशा तय करने का काम करते हैं। राजनीतिक संदेश भी साफ नितिन नवीन का यह पहला यूपी दौरा पार्टी के भीतर एक मजबूत संदेश भी देता है कि संगठनात्मक मजबूती और चुनावी तैयारी अब और तेज की जाएगी। भाजपा का फोकस साफ है—हर स्तर पर कार्यकर्ताओं को सक्रिय करना और जनता के बीच अपनी पकड़ और मजबूत करना। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Bullet Train

India First Bullet Train: 100 KM के Surat-Vapi सेक्शन पर अगले साल शुरू होगी हाई-स्पीड सेवा

भारत में हाई-स्पीड रेल का सपना अब हकीकत बनने के बेहद करीब है। लंबे समय से चर्चा में रही मुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन (Bullet Train) परियोजना का पहला चरण अगले साल शुरू होने की उम्मीद है। शुरुआती दौर में गुजरात के सूरत से वापी के बीच करीब 100 किलोमीटर लंबे सेक्शन पर बुलेट ट्रेन दौड़ सकती है। यह सिर्फ एक नई ट्रेन की शुरुआत नहीं होगी, बल्कि भारतीय रेलवे के इतिहास में एक नया अध्याय भी जोड़ेगी। अगले साल यात्रियों को मिल सकती है पहली Bullet Train की सौगात परियोजना पर काम कर रही नेशनल हाई स्पीड रेल कॉर्पोरेशन लिमिटेड (NHSRCL) के अनुसार, सूरत-वापी सेक्शन का निर्माण तेजी से आगे बढ़ रहा है। ट्रैक, स्टेशन, बिजली व्यवस्था और सिग्नलिंग जैसे महत्वपूर्ण कार्य अंतिम चरण में हैं। यदि ट्रायल सफल रहता है, तो अगले साल इसी सेक्शन पर नियमित संचालन शुरू किया जा सकता है। 320 KM/H की रफ्तार से बदलेगा सफर का अनुभव भारत की पहली बुलेट ट्रेन की अधिकतम रफ्तार 320 किलोमीटर प्रति घंटा होगी, जबकि सामान्य परिचालन के दौरान इसकी गति करीब 300 किलोमीटर प्रति घंटा रहने की संभावना है। इससे यात्रियों का सफर पहले की तुलना में काफी तेज और आरामदायक हो जाएगा। जिन यात्राओं में आज कई घंटे लगते हैं, उन्हें भविष्य में बहुत कम समय में पूरा किया जा सकेगा। जापान की Shinkansen तकनीक से तैयार हो रहा है प्रोजेक्ट मुंबई-अहमदाबाद हाई-स्पीड रेल प्रोजेक्ट जापान के सहयोग से विकसित किया जा रहा है। इसमें Shinkansen तकनीक का इस्तेमाल हो रहा है, जिसे दुनिया की सबसे सुरक्षित और समय की पाबंद हाई-स्पीड रेल सेवाओं में गिना जाता है। यही तकनीक जापान में दशकों से लाखों यात्रियों को सुरक्षित सफर का अनुभव दे रही है। 508 KM लंबे कॉरिडोर से जुड़ेगा मुंबई और अहमदाबाद पूरी परियोजना पूरी होने के बाद मुंबई और अहमदाबाद के बीच करीब 508 किलोमीटर लंबा हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर तैयार होगा। इससे दोनों शहरों के बीच यात्रा का समय काफी कम हो जाएगा। साथ ही व्यापार, उद्योग, पर्यटन और निवेश को भी नई गति मिलने की उम्मीद है। तेजी से आगे बढ़ रहा है निर्माण कार्य परियोजना के तहत एलिवेटेड ट्रैक, स्टेशन, पुल, सुरंग और विद्युत प्रणाली का निर्माण तेजी से किया जा रहा है। गुजरात में कई हिस्सों में सिविल कार्य पूरा हो चुका है, जबकि ट्रैक बिछाने और आधुनिक सिग्नलिंग सिस्टम लगाने का काम लगातार जारी है। अधिकारियों का कहना है कि पहले चरण को तय समय पर शुरू करने के लिए सभी एजेंसियां समन्वय के साथ काम कर रही हैं। यात्रियों को मिलेंगी आधुनिक सुविधाएं बुलेट ट्रेन में यात्रियों को विश्वस्तरीय सुविधाएं मिलेंगी। आरामदायक सीटें, आधुनिक सुरक्षा प्रणाली, बेहतर स्टेशन, समय की बचत और तेज यात्रा इसका सबसे बड़ा आकर्षण होंगे। इसके अलावा यह परियोजना पर्यावरण के लिहाज से भी बेहतर सार्वजनिक परिवहन को बढ़ावा देगी। भारत के इंफ्रास्ट्रक्चर में जुड़ेगा नया अध्याय विशेषज्ञों का मानना है कि यह परियोजना केवल मुंबई और अहमदाबाद को जोड़ने तक सीमित नहीं है, बल्कि भारत में भविष्य के हाई-स्पीड रेल नेटवर्क की मजबूत नींव भी रखेगी। यदि पहला चरण सफल रहता है, तो आने वाले वर्षों में देश के अन्य हिस्सों में भी ऐसी परियोजनाओं को गति मिल सकती है। Highlights
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CM Yogi

CM Yogi Statement: ‘जय श्री राम’ पर सपा को घेरा, बोले- जनता सब कुछ याद रखती है

उत्तर प्रदेश की राजनीति एक बार फिर गरमा गई है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ (CM Yogi) ने समाजवादी पार्टी (सपा) पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि जो लोग कभी ‘जय श्री राम’ का नारा लगाने वालों पर लाठी चलाते थे और राम भक्तों पर गोली चलाने के लिए बदनाम थे, वही आज राम भक्ति की बात कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि जनता इतिहास को भूली नहीं है और सच को अच्छी तरह जानती है। मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में कहा कि उत्तर प्रदेश की जनता ने पिछले कुछ वर्षों में बड़ा बदलाव देखा है। उनके अनुसार, पहले जिन मुद्दों पर राजनीति होती थी, आज वही लोग बदलते माहौल को देखकर अपनी छवि बदलने की कोशिश कर रहे हैं। सपा पर सीधा राजनीतिक हमला योगी आदित्यनाथ ने बिना किसी का नाम लिए समाजवादी पार्टी पर निशाना साधते हुए कहा कि सत्ता में रहते हुए जिन लोगों ने राम भक्तों की भावनाओं की परवाह नहीं की, वे आज खुद को राम भक्त बताने का प्रयास कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि जनता को सब याद है और लोकतंत्र में जनता ही अंतिम फैसला करती है। उन्होंने यह भी कहा कि प्रदेश में अब कानून-व्यवस्था पहले से कहीं बेहतर हुई है। धार्मिक आयोजनों को सम्मान मिल रहा है और सरकार विकास के साथ-साथ सांस्कृतिक विरासत को भी मजबूत करने का काम कर रही है। अयोध्या, विकास और आस्था का किया जिक्र अपने भाषण में मुख्यमंत्री ने अयोध्या में बने भव्य राम मंदिर, धार्मिक पर्यटन और प्रदेश में चल रहे विकास कार्यों का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि सरकार की प्राथमिकता केवल आधारभूत सुविधाओं का विस्तार नहीं, बल्कि भारत की सांस्कृतिक और धार्मिक पहचान को भी मजबूत करना है। योगी ने दावा किया कि उत्तर प्रदेश आज निवेश, इंफ्रास्ट्रक्चर, पर्यटन और धार्मिक आस्था—चारों क्षेत्रों में तेजी से आगे बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि सरकार का लक्ष्य विकास और सुशासन को अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाना है। बयान के बाद सियासत तेज होने के आसार मुख्यमंत्री के इस बयान के बाद उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक बार फिर आरोप-प्रत्यारोप का दौर तेज होने की संभावना है। भाजपा और समाजवादी पार्टी के बीच पहले से जारी राजनीतिक मुकाबले के बीच इस बयान को आगामी चुनावी माहौल से भी जोड़कर देखा जा रहा है। फिलहाल, समाजवादी पार्टी की ओर से मुख्यमंत्री योगी के इस बयान पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। हालांकि, राजनीतिक जानकारों का मानना है कि आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर दोनों दलों के बीच बयानबाजी और तेज हो सकती है। क्या है पूरा मामला? मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अपने संबोधन के दौरान कहा कि “जो जय श्री राम बोलने पर लाठी चलाते थे और राम भक्तों पर गोली चलाते थे, वे आज राम भक्ति की दुहाई दे रहे हैं।” इस बयान को भाजपा ने अपनी वैचारिक राजनीति से जोड़कर पेश किया है, जबकि विपक्ष इसे राजनीतिक बयानबाजी का हिस्सा बता सकता है। उत्तर प्रदेश की राजनीति में राम मंदिर, आस्था और विकास जैसे मुद्दे लंबे समय से चुनावी विमर्श का अहम हिस्सा रहे हैं। ऐसे में मुख्यमंत्री का यह बयान आने वाले राजनीतिक घटनाक्रम में चर्चा का केंद्र बन सकता है।
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मां स्कंदमाता

Navratri 2026: पांचवें दिन मां स्कंदमाता की पूजा, जानें महत्त्व, कथा और मंत्र

नवरात्रि के पांचवें दिन मां स्कंदमाता की पूजा की जाती है। भगवान कार्तिकेय को स्कंद भी कहा जाता है। उन्हें गोद में धारण करने के कारण देवी पार्वती के इस स्वरूप का नाम स्कंदमाता पड़ा। मां का यह रूप मातृत्व, प्रेम और करुणा का प्रतीक है। मां स्कंदमाता की कथा पौराणिक मान्यता के अनुसार, देवी पार्वती ने भगवान स्कंद यानी कार्तिकेय को जन्म दिया, जो देवताओं की सेना के सेनापति बने। स्कंदमाता का स्वरूप एक मां की शक्ति और अपने संतान के प्रति अटूट स्नेह को दर्शाता है। मां का स्वरूप और महत्त्व पूजा विधि मंत्र: ॐ देवी स्कन्दमातायै नमः। भोग: मां को केला अर्पित करने की परंपरा प्रचलित है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!

मेरठ हत्याकांड: मुस्कान और साहिल को फांसी की सजा, पति सौरभ की हत्या के मामले में कोर्ट का फैसला

मेरठ। उत्तर प्रदेश के मेरठ में सौरभ राजपूत हत्याकांड में अदालत ने उनकी पत्नी मुस्कान रस्तोगी और उसके प्रेमी साहिल को फांसी की सजा सुनाई है। दोनों पर सौरभ की हत्या करने का आरोप साबित होने के बाद यह फैसला सुनाया गया। सजा सुनाते हुए जज ने वारदात को नृशंस हत्याकांड बताया और कहा कि इसमें माफी स्वीकार नहीं होगी। वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से कोर्ट में पेश हुए मुस्कान और साहिल सजा सुनाए जाने से पहले जेल में बंद मुस्कान और साहिल को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए अदालत से जोड़ा गया। इस दौरान दोनों रोने लगे। जज ने मुस्कान से पूछा कि पति सौरभ राजपूत की हत्या के मामले में दोषी ठहराए जाने के बाद वह क्या सजा चाहती है। इस पर मुस्कान ने कहा, “मेरी बच्चियों का ख्याल रखा जाए।” इसके बाद वह खामोश हो गई। वहीं, साहिल से भी यही सवाल पूछा गया, लेकिन उसने कोई जवाब नहीं दिया। सजा के ऐलान के बाद रो पड़ीं सौरभ की मां अदालत के फैसले के बाद सौरभ राजपूत की मां भावुक हो गईं और रो पड़ीं। उन्होंने कहा कि उन्हें शांति से न्याय मिल गया। इस मामले में सजा का ऐलान सौरभ के परिवार के लिए लंबे इंतजार के बाद आया है। 3 मार्च 2025 को हुई थी सौरभ की हत्या सौरभ राजपूत की हत्या 3 मार्च 2025 को हुई थी। मामले में सामने आए विवरण के अनुसार, हत्या के बाद शव के पांच टुकड़े किए गए और उन्हें नीले ड्रम में भर दिया गया था। इस वारदात ने पूरे देश में व्यापक चर्चा बटोरी थी। अदालत ने मामले में मुस्कान रस्तोगी और साहिल को दोषी ठहराते हुए मृत्युदंड की सजा सुनाई है।

इंदौर में प्लॉट बेचने के नाम पर 7.80 लाख की ठगी का आरोप, ब्रोकर समेत दो पर FIR

शहर के एरोड्रम थाना क्षेत्र में प्लॉट बेचने के नाम पर धोखाधड़ी का मामला सामने आया है। आरोप है कि प्लॉट का सौदा करने के बाद ब्रोकर और प्लॉट मालिक ने फरियादी से 7 लाख 80 हजार रुपये ले लिए, लेकिन न तो प्लॉट की रजिस्ट्री कराई और न ही कब्जा दिया। शिकायत की जांच के बाद एरोड्रम थाना पुलिस ने नंदकिशोर मनावत और धर्मेंद्र ठाकुर के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर ली है। 9.30 लाख में तय हुआ था प्लॉट का सौदा पुलिस के मुताबिक, नंदबाग कॉलोनी निवासी विजय चौहान ने शिकायत में बताया कि उन्होंने नंदबाग में एक प्लॉट का सौदा 9 लाख 30 हजार रुपये में तय किया था। इस संबंध में एग्रीमेंट भी किया गया था। फरियादी ने आरोप लगाया कि उन्होंने नकद और ऑनलाइन माध्यम से कुल 7 लाख 80 हजार रुपये का भुगतान कर दिया, लेकिन इसके बावजूद उन्हें प्लॉट का कब्जा नहीं मिला और रजिस्ट्री भी नहीं कराई गई। ब्रोकर ने परिचित बताकर कराया था सौदा विजय चौहान के अनुसार, धर्मेंद्र ठाकुर ने उन्हें बताया था कि नंदकिशोर मनावत उसका परिचित है और वह अपना प्लॉट बेचना चाहता है। इसके बाद धर्मेंद्र ने सौदे में ब्रोकर की भूमिका निभाई और इसके बदले 10 हजार रुपये लिए। शिकायतकर्ता का आरोप है कि भुगतान के बाद जब उन्होंने रजिस्ट्री कराने और प्लॉट का कब्जा देने की मांग की, तो उन्हें लगातार टालमटोल का सामना करना पड़ा। 25 से ज्यादा केस होने की धमकी देने का आरोप फरियादी ने आरोप लगाया कि रजिस्ट्री और कब्जे के लिए दबाव बनाने पर धर्मेंद्र ठाकुर ने धमकी दी। शिकायत के मुताबिक, उसने कहा कि उसके खिलाफ 25 से ज्यादा मामले चल रहे हैं। साथ ही, उसके या नंदकिशोर मनावत के पास दोबारा आने पर अंजाम भुगतने की चेतावनी भी दी। 2.80 लाख रुपये लौटाए, 5 लाख बाकी होने का दावा विजय चौहान के मुताबिक, पुलिस में शिकायत करने की बात कहने के बाद नंदकिशोर मनावत ने 2 लाख 50 हजार रुपये नकद और 30 हजार रुपये ऑनलाइन वापस किए। हालांकि, फरियादी का आरोप है कि बाकी 5 लाख रुपये लौटाने से इनकार कर दिया गया। इसके बाद विजय चौहान ने पुलिस अधिकारियों से शिकायत की। जांच के बाद एरोड्रम थाना पुलिस ने नंदकिशोर मनावत और धर्मेंद्र ठाकुर के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर आगे की कार्रवाई शुरू कर दी है। मामले में लगाए गए आरोपों की पुष्टि न्यायिक प्रक्रिया के तहत होनी बाकी है।

SIR के खिलाफ प्रदर्शन करने वाले छात्रों से मिले राहुल गांधी, दिल्ली पुलिस पर मारपीट के आरोप

नई दिल्ली। SIR के खिलाफ दिल्ली में प्रदर्शन करने वाले छात्रों ने बुधवार को कांग्रेस नेता राहुल गांधी से मुलाकात की। इसके बाद राहुल गांधी और छात्रों ने संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस की, जिसमें प्रदर्शनकारियों ने दिल्ली पुलिस पर मारपीट और हिरासत के दौरान दुर्व्यवहार करने के आरोप लगाए। प्रेस कॉन्फ्रेंस में NSUI के छात्रों, कार्यकर्ताओं और कंटेंट क्रिएटर्स ने अपने साथ हुई कथित घटनाओं की जानकारी दी। प्रदर्शनकारियों ने पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए मामले में जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की। छात्रा ने कान पर चोट लगने का लगाया आरोप प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान एक छात्रा ने आरोप लगाया कि हिरासत के दौरान पुलिसकर्मी ने उसके प्राइवेट पार्ट पर लात मारी। वहीं, दिल्ली विश्वविद्यालय की छात्रा अदिरा ने दावा किया कि पुलिस की पिटाई के कारण उसके एक कान की सुनने की क्षमता चली गई। प्रदर्शनकारियों ने हिरासत के दौरान कथित ज्यादती और मारपीट से जुड़े अपने अनुभव साझा किए। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि की जानकारी सामने नहीं आई है। RSS और भाजपा से जुड़े लोगों के कहने पर हिरासत का आरोप एक अन्य प्रदर्शनकारी ने आरोप लगाया कि पुलिस RSS और भाजपा से जुड़े लोगों के कहने पर प्रदर्शनकारियों को हिरासत में ले रही थी। यह आरोप भी प्रदर्शनकारियों की ओर से लगाया गया है। राहुल गांधी ने सबूत सुरक्षित रखने को कहा राहुल गांधी ने छात्रों से घटनाओं से जुड़े वीडियो और अन्य सबूत सुरक्षित रखने को कहा। उन्होंने कहा कि इन सबूतों के आधार पर पुलिसकर्मियों से लेकर मुख्य चुनाव आयुक्त तक, जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की जाएगी। प्रदर्शनकारियों के आरोपों और पुलिस की कार्रवाई को लेकर आगे क्या कदम उठाए जाते हैं, इस पर नजर रहेगी।

बांग्लादेश टेस्ट सीरीज से बाहर हुए शाई होप और अल्जारी जोसेफ, केविन विकहम को पहली बार मिला मौका

क्रिकेट न्यूज। वेस्टइंडीज को बांग्लादेश के खिलाफ आगामी दो टेस्ट मैचों की सीरीज से पहले बड़ा झटका लगा है। टीम के बल्लेबाज शाई होप और तेज गेंदबाज अल्जारी जोसेफ सीरीज से बाहर हो गए हैं। क्रिकेट वेस्टइंडीज (CWI) ने 23 वर्षीय टॉप ऑर्डर बल्लेबाज केविन विकहम को पहली बार टेस्ट टीम में शामिल किया है। ऑलराउंडर कीमो पॉल को भी टीम में जगह मिली है। CWI के मुताबिक, मेडिकल जांच और विशेषज्ञों की सलाह के बाद अल्जारी जोसेफ को सीरीज से हटाने का फैसला लिया गया। बोर्ड उनके कार्यभार को नियंत्रित कर चोट के जोखिम को कम करना चाहता है। वहीं, तीनों फॉर्मेट में लगातार खेलने के बाद शाई होप को आराम दिया गया है। चोट के खतरे को देखते हुए जोसेफ को आराम क्रिकेट वेस्टइंडीज ने बताया कि अल्जारी जोसेफ को टीम से बाहर रखने का फैसला उनकी सहमति से लिया गया है। बोर्ड के अनुसार, टेस्ट क्रिकेट में तेज गेंदबाजों को लंबे स्पेल में लगातार गेंदबाजी करनी पड़ती है। इससे छोटे फॉर्मेट की तुलना में कार्यभार और चोट का जोखिम बढ़ सकता है। इसी को ध्यान में रखते हुए जोसेफ के वर्कलोड को कम करने का फैसला किया गया है, ताकि उनके स्वास्थ्य और फिटनेस का ध्यान रखा जा सके। शाई होप को भी दिया गया आराम CWI ने कहा कि शाई होप तीनों फॉर्मेट में लगातार खेल रहे थे। ऐसे में उनके कार्यभार और स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए उन्हें टेस्ट सीरीज से आराम दिया गया है। बोर्ड का यह फैसला फरवरी 2027 में होने वाले वनडे वर्ल्ड कप क्वालिफायर्स को ध्यान में रखकर भी लिया गया है। टीम प्रबंधन चाहता है कि खिलाड़ी आगामी महत्वपूर्ण मुकाबलों के लिए फिट रहें। केविन विकहम को पहली बार टेस्ट टीम में मौका शाई होप की गैरमौजूदगी में 23 वर्षीय टॉप ऑर्डर बल्लेबाज केविन विकहम को पहली बार टेस्ट टीम में शामिल किया गया है। इसके अलावा ऑलराउंडर कीमो पॉल को भी टीम में जगह मिली है। अब देखना होगा कि बांग्लादेश की घरेलू परिस्थितियों में वेस्टइंडीज की टीम नए संयोजन के साथ कैसा प्रदर्शन करती है। कोच डैरेन सैमी ने सीरीज जीत को बताया अहम वेस्टइंडीज के मुख्य कोच डैरेन सैमी ने कहा कि वर्ल्ड टेस्ट चैंपियनशिप के मौजूदा चक्र की शुरुआत में टीम ने कुछ लक्ष्य तय किए थे। इनमें टेस्ट रैंकिंग के ऊपरी आधे हिस्से में जगह बनाना भी शामिल है। उन्होंने कहा कि बांग्लादेश के खिलाफ सीरीज जीतने से टीम अपने लक्ष्य के करीब पहुंच सकती है। सैमी के मुताबिक, बांग्लादेश को उसकी घरेलू परिस्थितियों में हराना चुनौतीपूर्ण होगा, लेकिन टीम इसके लिए तैयार है। 28 अक्टूबर से शुरू होगा पहला टेस्ट बांग्लादेश और वेस्टइंडीज के बीच दो टेस्ट मैचों की सीरीज खेली जाएगी। पहला टेस्ट 28 अक्टूबर से ढाका में शुरू होगा, जबकि दूसरा टेस्ट 5 नवंबर से सिलहट में खेला जाएगा।

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