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PM MODI से मिले ब्राजील के राष्ट्रपति लूला, राष्ट्रपति भवन में भव्य स्वागत

PM MODI से मिले ब्राजील के राष्ट्रपति लूला, राष्ट्रपति भवन में भव्य स्वागत

PM MODI ने ब्राजील के राष्ट्रपति Luiz Inacio Lula da Silva का राष्ट्रपति भवन में भव्य स्वागत किया। पारंपरिक सम्मान और गार्ड ऑफ ऑनर के साथ यह मुलाकात खास रही। दोनों नेताओं के बीच द्विपक्षीय बैठक जारी है, जिसमें व्यापार, रक्षा, टेक्नोलॉजी और एयरोस्पेस सेक्टर पर खास चर्चा हो रही है। राष्ट्रपति लूला पहले ही संकेत दे चुके हैं कि ब्राजील की प्रमुख एयरोस्पेस कंपनी भारत में अपना प्लांट लगाने की योजना बना रही है। अगर यह योजना साकार होती है तो भारत में रोजगार और टेक्नोलॉजी ट्रांसफर को बड़ी गति मिल सकती है। भारत और ब्राजील के बीच लंबे समय से रणनीतिक साझेदारी रही है। दोनों देश BRICS जैसे अंतरराष्ट्रीय मंचों पर साथ काम करते रहे हैं। इस मुलाकात को वैश्विक स्तर पर भी अहम माना जा रहा है, क्योंकि यह सहयोग रक्षा उत्पादन, विमानन और औद्योगिक निवेश को नई दिशा दे सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह दौरा सिर्फ कूटनीतिक शिष्टाचार नहीं, बल्कि आर्थिक साझेदारी को मजबूत करने की ठोस पहल है। आम लोगों के लिए भी यह खबर उम्मीद लेकर आई है—नई फैक्ट्रियां, नए निवेश और नए रोजगार के अवसर। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Trade

Global Trade 18% से 10% पर आया भारत का टैरिफ, ट्रम्प की नई नीति लागू

अमेरिका की व्यापार नीति में एक बड़ा और अचानक बदलाव देखने को मिला है। Donald Trump ने सभी देशों से अमेरिका में आयात होने वाले सामान पर 10% का नया यूनिवर्सल टैरिफ लगाने की घोषणा की है। यह फैसला ऐसे समय में आया जब इससे कुछ घंटे पहले ही Supreme Court of the United States ने एक पुराने आदेश को रद्द कर दिया, जिसके तहत भारत पर 18% का विशेष टैरिफ लागू था। इस घटनाक्रम ने भारत-अमेरिका व्यापार संबंधों को लेकर नई बहस छेड़ दी है। क्या है पूरा मामला? पहले भारत से अमेरिका जाने वाले कुछ उत्पादों पर 18% तक का अतिरिक्त शुल्क लगाया गया था। इससे भारतीय निर्यातकों—खासतौर पर स्टील, इंजीनियरिंग गुड्स और मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर—को सीधा असर झेलना पड़ रहा था। सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद यह 18% टैरिफ समाप्त हो गया। लेकिन उसी के तुरंत बाद 10% का नया सार्वभौमिक टैरिफ लागू करने की घोषणा ने तस्वीर बदल दी। भारत के लिए राहत या नई चुनौती? सीधी बात करें तो 18% से घटकर 10% होना भारत के लिए आंशिक राहत है।मतलब: लेकिन 10% टैरिफ पूरी तरह राहत नहीं है। इससे लागत बढ़ेगी और मुनाफे पर असर पड़ेगा। Global Trade पर क्या असर पड़ेगा? यह फैसला सिर्फ भारत तक सीमित नहीं है। सभी देशों पर समान 10% शुल्क लगाने से: विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम अमेरिकी घरेलू उद्योगों को बढ़ावा देने के उद्देश्य से उठाया गया है। आम लोगों पर क्या असर? यह सवाल भी अहम है।अगर आयात महंगे होंगे तो अमेरिका में उपभोक्ताओं को ज्यादा कीमत चुकानी पड़ सकती है। वहीं भारत में निर्यात से जुड़े उद्योगों और कामगारों के लिए यह राहत और चिंता—दोनों का मिश्रण है। आगे क्या? अब निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि भारत सरकार इस नए 10% टैरिफ को लेकर क्या रुख अपनाती है। क्या द्विपक्षीय व्यापार वार्ता तेज होगी? क्या कुछ सेक्टर को छूट मिल सकती है? फिलहाल इतना साफ है कि अमेरिका की यह नई टैरिफ नीति वैश्विक व्यापार संतुलन को प्रभावित करेगी, और भारत को भी अपनी रणनीति नए सिरे से तय करनी होगी। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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AI SUMMIT में कांग्रेस का विरोध, आज BJP का प्रदर्शन: भिवंडी में राहुल गांधी को काले झंडे

AI SUMMIT में कांग्रेस का विरोध, आज BJP का प्रदर्शन: भिवंडी में राहुल गांधी को काले झंडे

AI Summit के दौरान कांग्रेस के विरोध के बाद अब भारतीय जनता पार्टी (BJP) सड़कों पर उतर आई है। इस पूरे घटनाक्रम ने राजधानी दिल्ली से लेकर महाराष्ट्र के भिवंडी तक राजनीतिक माहौल को गर्म कर दिया है। भिवंडी में राहुल गांधी को दिखाए गए काले झंडे Rahul Gandhi जब महाराष्ट्र के भिवंडी पहुंचे, तो वहां कुछ लोगों ने उनका विरोध किया। प्रदर्शनकारियों ने काले झंडे दिखाकर नाराजगी जताई। मौके पर मौजूद पुलिस ने स्थिति को संभाला और किसी बड़े टकराव की खबर नहीं है। स्थानीय लोगों का कहना है कि हाल के राजनीतिक बयानों को लेकर असंतोष है, जिसके कारण यह विरोध हुआ। हालांकि कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने इसे राजनीतिक साजिश बताया है। दिल्ली में कांग्रेस मुख्यालय के बाहर BJP का प्रदर्शन राजधानी दिल्ली में भी राजनीतिक हलचल देखने को मिली। Bharatiya Janata Party के कार्यकर्ताओं ने Indian National Congress मुख्यालय के बाहर प्रदर्शन किया। इस दौरान जमकर नारेबाजी की गई। BJP नेताओं का कहना है कि AI समिट के दौरान कांग्रेस द्वारा किए गए प्रदर्शन के जवाब में यह विरोध दर्ज कराया गया है। बढ़ता राजनीतिक तनाव दोनों पार्टियों के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर जारी है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि आने वाले चुनावों को देखते हुए इस तरह के विरोध और प्रदर्शन और तेज हो सकते हैं। आम जनता के लिए यह राजनीतिक खींचतान कई सवाल खड़े करती है—क्या यह मुद्दों की राजनीति है या सिर्फ सियासी रणनीति? फिलहाल देश की राजनीति में गर्माहट बढ़ी हुई है और आने वाले दिनों में यह विवाद और तूल पकड़ सकता है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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AI

AI Summit Controversy भारत मंडपम में Youth Congress का Protest, लगे “Modi is Compromised” के नारे

नई दिल्ली के प्रतिष्ठित भारत मंडपम में आयोजित एक हाई-प्रोफाइल एआई (AI) समिट उस समय अचानक सुर्खियों में आ गया, जब यूथ कांग्रेस के कुछ कार्यकर्ताओं ने कार्यक्रम के दौरान विरोध प्रदर्शन किया। इस समिट में देश-विदेश से टेक्नोलॉजी विशेषज्ञ, उद्योगपति और नीति-निर्माता शामिल हुए थे। कार्यक्रम में प्रधानमंत्री Narendra Modi की मौजूदगी भी चर्चा का केंद्र थी। अचानक बदला माहौल कार्यक्रम अपने निर्धारित एजेंडे के अनुसार चल रहा था, तभी कुछ युवक अपनी सीटों से खड़े हुए और टी-शर्ट उतारकर नारे लगाने लगे। “Modi is Compromised” के नारे कुछ मिनटों तक गूंजते रहे। वहां मौजूद लोगों के लिए यह एक अप्रत्याशित पल था—तकनीक और भविष्य की बातों के बीच अचानक राजनीतिक विरोध ने माहौल को तनावपूर्ण बना दिया। सुरक्षा कर्मियों ने तुरंत कार्रवाई करते हुए प्रदर्शनकारियों को बाहर ले जाया। थोड़ी देर की अफरा-तफरी के बाद कार्यक्रम फिर सामान्य रूप से जारी रहा। विरोध की वजह क्या है? यूथ कांग्रेस से जुड़े प्रदर्शनकारियों का कहना है कि भारत और अमेरिका के बीच प्रस्तावित ट्रेड डील को लेकर उनकी चिंताएं हैं। उनका आरोप है कि इस तरह के समझौते से छोटे उद्योगों, किसानों और स्थानीय व्यापारियों पर दबाव बढ़ सकता है। उनका मानना है कि सरकार को किसी भी बड़े अंतरराष्ट्रीय समझौते से पहले व्यापक चर्चा और पारदर्शिता सुनिश्चित करनी चाहिए। राजनीतिक बयानबाजी तेज घटना के बाद सियासी बयानबाजी भी तेज हो गई। विपक्षी नेताओं ने इसे लोकतांत्रिक विरोध का हिस्सा बताया, जबकि सत्तारूढ़ पक्ष के नेताओं ने इसे एक महत्वपूर्ण अंतरराष्ट्रीय मंच की गरिमा को ठेस पहुंचाने वाला कदम करार दिया। यह घटना एक बार फिर दिखाती है कि वैश्विक साझेदारियों और आर्थिक नीतियों को लेकर देश के भीतर अलग-अलग मत मौजूद हैं। सुरक्षा व्यवस्था पर उठे सवाल भारत मंडपम जैसे उच्च-सुरक्षा वाले स्थल पर इस तरह का विरोध कैसे हुआ, इसे लेकर भी चर्चा शुरू हो गई है। हालांकि अधिकारियों का कहना है कि स्थिति को तुरंत नियंत्रण में ले लिया गया था और किसी तरह की बड़ी बाधा नहीं आई। तकनीक के मंच पर राजनीति की गूंज एआई समिट का मकसद भारत की तकनीकी क्षमता और वैश्विक सहयोग को मजबूत करना था। लेकिन इस घटना ने यह भी दिखा दिया कि देश में आर्थिक नीतियों और अंतरराष्ट्रीय समझौतों को लेकर भावनाएं कितनी प्रबल हैं। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Tharoor

PR Show या Progress Delhi AI Summit पर Tharoor और Rahul आमने-सामने

नई दिल्ली में आयोजित Delhi AI Summit 2026 इन दिनों सिर्फ तकनीक नहीं, बल्कि राजनीति का भी बड़ा मुद्दा बन गया है। जहां एक तरफ यह समिट भारत को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के क्षेत्र में वैश्विक स्तर पर मजबूत पहचान दिलाने की कोशिश के रूप में पेश किया जा रहा है, वहीं दूसरी तरफ इसे लेकर सियासी बयानबाज़ी भी तेज हो गई है। कांग्रेस सांसद Shashi Tharoor ने इस आयोजन की सराहना करते हुए कहा कि इतने बड़े स्तर के कार्यक्रमों में छोटी-मोटी गड़बड़ियां होना असामान्य नहीं है। उनका मानना है कि भारत को नई तकनीकों, खासकर AI, के क्षेत्र में आगे बढ़ाने के लिए ऐसे अंतरराष्ट्रीय मंच बेहद जरूरी हैं। थरूर ने संकेत दिया कि कमियों पर ध्यान देना चाहिए, लेकिन सकारात्मक पहल को नज़रअंदाज़ नहीं करना चाहिए। वहीं कांग्रेस नेता Rahul Gandhi ने इस समिट को “PR तमाशा” करार दिया। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार बड़े आयोजनों के जरिए अपनी छवि चमकाने की कोशिश कर रही है, जबकि असली जरूरत रोजगार सृजन, शिक्षा सुधार और तकनीकी बुनियादी ढांचे को मजबूत करने की है। क्या है Delhi AI Summit का मकसद? सरकार के अनुसार, इस समिट का उद्देश्य भारत को AI इनोवेशन हब के रूप में स्थापित करना, स्टार्टअप्स को बढ़ावा देना, निवेश आकर्षित करना और नीति-निर्माण में वैश्विक सहयोग बढ़ाना है। कई देशी-विदेशी विशेषज्ञों, कंपनियों और नीति-निर्माताओं की भागीदारी इसे अंतरराष्ट्रीय महत्व का आयोजन बना रही है। राजनीतिक हलकों में क्यों बढ़ी चर्चा? दिलचस्प बात यह है कि एक ही पार्टी के दो बड़े नेताओं के अलग-अलग रुख ने राजनीतिक बहस को और तेज कर दिया है। थरूर का संतुलित समर्थन और राहुल गांधी की कड़ी आलोचना इस बात की ओर इशारा करती है कि AI समिट अब तकनीकी मंच से आगे बढ़कर राजनीतिक विमर्श का हिस्सा बन चुका है। आम लोगों के लिए इसका क्या मतलब? तकनीकी समिट की चर्चा भले ही बड़े मंचों पर हो रही हो, लेकिन आम नागरिक के मन में सवाल यही है—क्या इससे रोजगार बढ़ेंगे? क्या युवाओं को नए अवसर मिलेंगे? क्या भारत सच में AI क्षेत्र में अग्रणी बन पाएगा? फिलहाल, Delhi AI Summit 2026 ने एक बात साफ कर दी है—AI सिर्फ टेक्नोलॉजी का मुद्दा नहीं रहा, बल्कि यह राजनीति, विकास और भविष्य की दिशा तय करने वाला विषय बन चुका है। आने वाले दिनों में इस पर बहस और तेज होने की संभावना है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Himachal

Himachal Road Trip 2026 नई Entry Fee लागू, अब सफर होगा महंगा

अगर आप इस साल गर्मियों में Himachal Trip प्लान कर रहे हैं, तो आपके बजट पर थोड़ा अतिरिक्त बोझ पड़ सकता है। Himachal Pradesh सरकार ने बाहरी राज्यों से आने वाले वाहनों पर लगने वाली Entry Fee/Green Tax में बड़ा इजाफा कर दिया है। नई दरें 1 अप्रैल 2026 से लागू होंगी। इस फैसले का सीधा असर उन पर्यटकों पर पड़ेगा जो अपनी गाड़ी से Shimla, मनाली या धर्मशाला जैसी जगहों की यात्रा करते हैं। क्या है नया Entry Fee Structure? सरकार द्वारा जारी नई दरों के अनुसार: कुछ श्रेणियों में फीस लगभग ढाई गुना तक बढ़ाई गई है। ध्यान देने वाली बात यह है कि यह शुल्क केवल बाहरी राज्यों में रजिस्टर्ड वाहनों पर लागू होगा। हिमाचल में पंजीकृत गाड़ियों को इससे छूट मिलेगी। क्यों बढ़ाई गई फीस? राज्य सरकार का कहना है कि प्रदेश की आर्थिक स्थिति को मजबूत करने और अतिरिक्त राजस्व जुटाने के लिए यह कदम उठाया गया है। प्राकृतिक आपदाओं और वित्तीय दबाव के बीच सरकार नए संसाधन जुटाने की कोशिश कर रही है। सरकार का तर्क है कि पर्यटन से होने वाली आय का एक हिस्सा बुनियादी ढांचे और सड़कों के रखरखाव पर खर्च किया जाएगा। आम यात्रियों पर क्या असर पड़ेगा? साफ है कि अब हिमाचल की यात्रा पहले से थोड़ी महंगी हो जाएगी। हालांकि कई पर्यटक मानते हैं कि हिमाचल की खूबसूरती और ठंडी वादियां आज भी हर खर्च को जायज़ ठहराती हैं। फिर भी, अगर आप Road Trip प्लान कर रहे हैं, तो अब अपने बजट में Entry Tax को जरूर शामिल करें। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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राहुल गांधी

Defamation Case में राहुल गांधी का बयान सुल्तानपुर कोर्ट के बाहर नजर आया ‘सत्यमेव जयते’

सुल्तानपुर, 20 फरवरी 2026: कांग्रेस नेता और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी आज सुल्तानपुर कोर्ट पहुंचे, जहां उनका Defamation Case (मानहानि मुकदमा) सुनवाई के लिए निर्धारित था। यह मामला 2018 का है, जब स्थानीय भाजपा नेता विजय मिश्रा ने राहुल गांधी के कथित आपत्तिजनक बयान को लेकर शिकायत दर्ज करवाई थी। राहुल गांधी सुबह कोर्ट पहुंचे और उन्होंने सीधे अपनी बयानबाजी की। सुनवाई के दौरान सुरक्षा के कड़े इंतजाम थे। कोर्ट परिसर के बाहर कांग्रेस समर्थकों ने ‘सत्यमेव जयते’ जैसे पोस्टर लगाकर सत्य और न्याय का संदेश फैलाया। केस की पृष्ठभूमि इस मानहानि केस में राहुल गांधी ने कथित रूप से अमित शाह (केंद्र गृह मंत्री) के खिलाफ बयान दिया था, जिसे वादी ने मानहानि बताया। पिछले पाँच साल से यह मामला कोर्ट में चल रहा है। दिसंबर 2023 में राहुल गांधी की गैरमौजूदगी के कारण उनके खिलाफ वारंट जारी हुआ था। इसके बाद उन्होंने कोर्ट में आत्मसमर्पण किया और दो जमानतें (प्रत्येक ₹25,000) पर जमानत दी गई। राहुल गांधी ने अपनी बयानबाजी में खुद को निर्दोष बताया और इसे राजनीतिक साजिश करार दिया। कोर्ट ने वादी को साक्ष्य पेश करने का निर्देश दिया था, और आज की सुनवाई में राहुल गांधी ने अपना बयान दर्ज करवाया। राजनीतिक और सामाजिक असर यह मामला न केवल राजनीतिक दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण है, बल्कि चुनावी माहौल पर भी असर डाल सकता है। कोर्ट के बाहर लगे पोस्टर और समर्थकों का उत्साह इस बात का संकेत दे रहे हैं कि यह केस जनता और मीडिया की नजरों में है। संक्षेप: हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Om Birla

Speaker Om Birla AI Controversy लोकसभा विशेषाधिकार विभाग का कांग्रेस के 8 नेताओं को नोटिस

देश की राजनीति में एक बार फिर डिजिटल कंटेंट को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। लोकसभा स्पीकर ओम बिरला (Om Birla) से जुड़े एक कथित AI-जनित वीडियो को लेकर भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के मीडिया सेल को लोकसभा के विशेषाधिकार विभाग की ओर से नोटिस जारी किया गया है। इस मामले में पार्टी के आठ नेताओं से जवाब मांगा गया है, जिससे राजनीतिक हलकों में हलचल तेज हो गई है। क्या है पूरा मामला? सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक वीडियो शेयर किया गया, जिसे आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) तकनीक से तैयार बताया जा रहा है। आरोप है कि वीडियो में लोकसभा स्पीकर के संदर्भ में आपत्तिजनक और भ्रामक प्रस्तुति की गई। शिकायत के मुताबिक, इससे न केवल एक संवैधानिक पद की गरिमा प्रभावित हुई, बल्कि संसद के विशेषाधिकार का भी संभावित उल्लंघन हुआ है। डिजिटल दौर में इस तरह की सामग्री तेजी से वायरल होती है और आम लोगों तक कुछ ही मिनटों में पहुंच जाती है। यही वजह है कि यह मामला राजनीतिक दायरे से निकलकर सार्वजनिक चर्चा का विषय बन गया है। शिकायत के बाद कैसे बढ़ा मामला? बीजेपी सांसद विष्णु दत्त शर्मा ने इस वीडियो को लेकर औपचारिक शिकायत दर्ज कराई। शिकायत में कहा गया कि वीडियो भ्रामक है और इससे लोकसभा की छवि को नुकसान पहुंचाने की कोशिश की गई है। शिकायत मिलने के बाद लोकसभा के विशेषाधिकार विभाग ने संज्ञान लेते हुए कांग्रेस मीडिया सेल को नोटिस जारी कर दिया। किन नेताओं को मिला नोटिस? नोटिस के दायरे में कांग्रेस की सोशल मीडिया और डिजिटल प्लेटफॉर्म की चेयरपर्सन सुप्रिया श्रीनेत समेत कुल आठ पदाधिकारी शामिल हैं। सभी से तीन दिनों के भीतर लिखित जवाब मांगा गया है। सूत्रों के अनुसार, जवाब मिलने के बाद उसे स्पीकर के समक्ष प्रस्तुत किया जाएगा और उसी के आधार पर आगे की कार्रवाई तय की जाएगी। AI और राजनीति: क्यों बढ़ रही चिंता? यह विवाद ऐसे समय में सामने आया है जब राजनीति में AI और डिजिटल टूल्स का इस्तेमाल तेजी से बढ़ रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि तकनीक का जिम्मेदारी से उपयोग न हो, तो इससे भ्रम, गलतफहमियां और संस्थाओं की साख पर असर पड़ सकता है। आम नागरिकों के लिए भी यह एक याद दिलाने वाला क्षण है कि सोशल मीडिया पर दिखने वाली हर चीज पूरी तरह सच हो—यह जरूरी नहीं। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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RJD

Rajya Sabha Election 2026 5वीं सीट पर दिलचस्प मुकाबला, Owaisi–Mayawati दिलाएंगे RJD को जीत

बिहार में तेज हुई सियासी हलचल बिहार में राज्यसभा (Rajya Sabha)चुनाव को लेकर राजनीतिक माहौल पूरी तरह गर्म हो चुका है। विधानसभा के भीतर संख्या बल का गणित और बाहर जारी राजनीतिक बयानबाजी ने मुकाबले को रोचक बना दिया है। खासकर 5वीं सीट को लेकर जो स्थिति बनी है, उसने सभी दलों की धड़कनें बढ़ा दी हैं। RJD के सामने कठिन गणित मौजूदा समीकरणों के अनुसार राष्ट्रीय जनता दल (RJD) शुरुआती सीटों पर तो मजबूत नजर आती है, लेकिन 5वीं सीट के लिए उसे अतिरिक्त समर्थन की जरूरत पड़ सकती है। राज्यसभा चुनाव में जीत के लिए तय कोटा पूरा करना जरूरी होता है, और यही गणित इस बार चुनौती बन गया है। Owaisi और Mayawati क्यों अहम? इस पूरे समीकरण में दो नाम लगातार चर्चा में हैं— असदुद्दीन ओवैसी और मायावती। AIMIM और BSP के विधायकों का रुख तय कर सकता है कि मुकाबला किस दिशा में जाएगा।अगर इनका समर्थन RJD को मिलता है, तो 5वीं सीट की राह आसान हो सकती है। लेकिन तटस्थता या विपक्ष का साथ पूरी तस्वीर बदल सकता है। सिंगल ट्रांसफरेबल वोट सिस्टम का असर राज्यसभा चुनाव सिंगल ट्रांसफरेबल वोट प्रणाली के तहत होता है। इसमें विधायकों की प्राथमिकताएं भी महत्वपूर्ण होती हैं। ऐसे में क्रॉस-वोटिंग या रणनीतिक मतदान की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। यही वजह है कि यह मुकाबला आखिरी क्षण तक रोमांच बनाए रख सकता है। छोटे दल और निर्दलीय बन सकते हैं किंगमेकर इस चुनाव ने छोटे दलों और निर्दलीय विधायकों की अहमियत भी बढ़ा दी है। कई बार यही नेता सत्ता के समीकरण बदल देते हैं। पर्दे के पीछे जारी बैठकों और बातचीत का दौर इसी रणनीतिक महत्व को दर्शाता है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Editor's Picks

मदनमहल रेलवे स्टेशन की लिफ्ट में फंसे यात्री, 50 मिनट बाद सुरक्षित निकाले गए

जबलपुर के तेजी से विकसित हो रहे मदनमहल रेलवे स्टेशन पर रविवार रात उस समय अफरा-तफरी मच गई, जब प्लेटफॉर्म नंबर-4 पर लगी लिफ्ट अचानक बीच रास्ते में बंद हो गई और उसमें सवार यात्री अंदर फंस गए। करीब 50 मिनट तक लिफ्ट में बंद रहे यात्रियों को गर्मी और घुटन का सामना करना पड़ा। घटना का वीडियो भी सोशल मीडिया पर सामने आया है। जानकारी के मुताबिक, रात में अमरकंटक एक्सप्रेस के स्टेशन पहुंचने के बाद बड़ी संख्या में यात्री स्टेशन से बाहर निकलने के लिए लिफ्ट का उपयोग कर रहे थे। इसी दौरान करीब 15 यात्री अपने सामान के साथ लिफ्ट में सवार हो गए। क्षमता से अधिक भार होने के कारण लिफ्ट बीच रास्ते में रुक गई और लॉक हो गई। लिफ्ट बंद होते ही अंदर मौजूद यात्रियों में घबराहट फैल गई। बच्चों और महिलाओं के रोने-चिल्लाने की आवाजें बाहर तक सुनाई देने लगीं। सूचना मिलते ही रेलवे सुरक्षा बल (RPF) और जीआरपी की टीम मौके पर पहुंची और राहत कार्य शुरू किया। मुख्य स्टेशन से बुलाना पड़ा विशेषज्ञ मौके पर मौजूद कर्मचारियों ने लिफ्ट को चालू करने की कोशिश की, लेकिन सफलता नहीं मिली। इसके बाद मुख्य रेलवे स्टेशन से लिफ्ट विशेषज्ञ को बुलाया गया। तकनीकी सुधार के बाद करीब 50 मिनट बाद लिफ्ट को सुरक्षित नीचे लाया गया और सभी यात्रियों को बाहर निकाला गया। ओवरलोडिंग बनी वजह रेलवे अधिकारियों के अनुसार, लिफ्ट में क्षमता से अधिक यात्री और भारी सामान होने के कारण तकनीकी समस्या आई। घटना रात करीब 9:40 बजे से 10:30 बजे के बीच की बताई जा रही है। यात्रियों ने उठाए सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल घटना के बाद यात्रियों ने स्टेशन पर तकनीकी विशेषज्ञों की उपलब्धता और सुरक्षा व्यवस्थाओं पर सवाल उठाए। उनका कहना है कि ऐसे व्यस्त रेलवे स्टेशन पर हर समय तकनीकी स्टाफ मौजूद रहना चाहिए ताकि आपात स्थिति में तुरंत मदद मिल सके। रेल प्रशासन ने यात्रियों से अपील की है कि लिफ्ट का उपयोग करते समय निर्धारित क्षमता और सुरक्षा निर्देशों का पालन करें, ताकि इस तरह की घटनाओं से बचा जा सके। अधिक खबरों और ताजा अपडेट्स के लिए पढ़ते रहें www.deshharpal.com
G7 Summit

G7 Summit ट्रम्प-मेलोनी ने फ्रांस में की एंट्री, मोदी आज पहुंचेंगे Trump–Modi Meet पर दुनिया की नजर

फ्रांस के खूबसूरत शहर Evian-les-Bains में चल रहे G7 Summit 2026 में इस बार वैश्विक राजनीति का माहौल काफी गर्म है। दुनिया के कई बड़े नेता पहले ही फ्रांस पहुंच चुके हैं, जबकि भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज इस हाई-प्रोफाइल समिट में शामिल होने के लिए पहुंचेंगे। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प और इटली की प्रधानमंत्री जियोर्जिया मेलोनी पहले ही फ्रांस में मौजूद हैं। इस बार का G7 सिर्फ एक मीटिंग नहीं, बल्कि आने वाले समय की वैश्विक नीतियों की दिशा तय करने वाला मंच माना जा रहा है। Trump–Modi Meeting: 16 महीने बाद हो सकती है अहम मुलाकात इस समिट की सबसे बड़ी चर्चा यही है कि प्रधानमंत्री मोदी और डोनाल्ड ट्रम्प के बीच करीब 16 महीने बाद आमने-सामने मुलाकात हो सकती है। सूत्रों के अनुसार: यह मुलाकात सिर्फ कूटनीति नहीं, बल्कि वैश्विक व्यापार समीकरणों पर असर डाल सकती है। G7 Summit Agenda: किन मुद्दों पर होगी बड़ी चर्चा? इस साल G7 समिट में कई अहम वैश्विक मुद्दे शामिल किए गए हैं: इन मुद्दों पर बड़े फैसले आने की उम्मीद जताई जा रही है। फ्रांस की मेजबानी और हाई-लेवल डिप्लोमेसी फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों इस समिट की मेजबानी कर रहे हैं। उन्होंने दुनिया के प्रमुख नेताओं के लिए कई bilateral meetings की व्यवस्था की है ताकि अलग-अलग देशों के बीच बातचीत को आगे बढ़ाया जा सके। फ्रांस की कोशिश है कि इस समिट से: भारत के लिए क्यों खास है G7 Summit 2026? भारत की भागीदारी इस बार कई मायनों में महत्वपूर्ण मानी जा रही है:

महिला पत्रकार के खिलाफ FIR और चार्जशीट रद्द, हाईकोर्ट की बड़ी टिप्पणी

बिलासपुर। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने एक महिला पत्रकार के खिलाफ दर्ज एफआईआर और चार्जशीट को रद्द करते हुए कहा है कि बिना किसी ठोस कारण के जांच और चार्जशीट दाखिल करने में 6 साल से अधिक की देरी करना आरोपी को प्रताड़ित करने के समान है। अदालत ने इसे संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत मिलने वाले त्वरित न्याय और शीघ्र सुनवाई के अधिकार का उल्लंघन माना। यह फैसला रमेश सिन्हा और रवींद्र कुमार अग्रवाल की डिवीजन बेंच ने सुनाया। 2018 की घटना से जुड़ा मामला याचिकाकर्ता श्रिया पांडेय वर्ष 2018 में एक न्यूज चैनल में रिपोर्टर के रूप में कार्यरत थीं। उस दौरान पुलिसकर्मियों का आंदोलन चल रहा था। 20 जून 2018 को आंदोलनकारी पुलिसकर्मियों की पत्नियों को महिला थाने में बैठाए जाने की सूचना मिलने पर श्रिया अपनी टीम के साथ जानकारी लेने महिला थाना पहुंची थीं। पत्रकार पर दर्ज कर दिया गया था केस याचिका के अनुसार, जानकारी मांगने पर पुलिसकर्मियों ने सहयोग नहीं किया और बाद में श्रिया पांडेय के खिलाफ शासकीय कार्य में बाधा, मारपीट और अन्य धाराओं में मामला दर्ज कर दिया गया था। हाईकोर्ट पहुंची पत्रकार पुलिस कार्रवाई को चुनौती देते हुए श्रिया पांडेय ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की। सुनवाई के दौरान अदालत ने पाया कि घटना वर्ष 2018 की थी, जबकि पुलिस ने चार्जशीट नवंबर 2024 में पेश की। इस छह साल की देरी को लेकर पुलिस विभाग कोई संतोषजनक कारण नहीं बता सका। कोई स्वतंत्र गवाह नहीं मिला अदालत ने केस डायरी और चार्जशीट का अवलोकन करने के बाद कहा कि पूरा मामला केवल पुलिसकर्मियों और उनसे जुड़े गवाहों के बयानों पर आधारित था। घटनास्थल पर कोई स्वतंत्र गवाह मौजूद नहीं था। हाईकोर्ट ने यह भी पाया कि गवाहों के बयानों में कई विरोधाभास हैं और पत्रकार द्वारा अपराध किए जाने का कोई प्रत्यक्ष एवं ठोस साक्ष्य रिकॉर्ड पर नहीं है। कानून के दुरुपयोग पर अदालत की टिप्पणी डिवीजन बेंच ने कहा कि ऐसे मामले को आगे बढ़ाना न्यायिक प्रक्रिया का दुरुपयोग होगा। इसलिए महिला पत्रकार के खिलाफ दर्ज एफआईआर और चार्जशीट को निरस्त किया जाता है। अदालत ने स्पष्ट किया कि किसी भी आरोपी को अनिश्चितकाल तक मुकदमे की प्रक्रिया में उलझाकर रखना उसके मौलिक अधिकारों का उल्लंघन है। अधिक जानकारी और ताजा खबरों के लिए विजिट करें:www.deshharpal.com

राम मंदिर दान राशि पर जयवर्धन सिंह का भाजपा पर हमला, बोले- आस्था के नाम पर राजनीति नहीं होनी चाहिए

पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह के पुत्र और मध्य प्रदेश के पूर्व मंत्री जयवर्धन सिंह ने अयोध्या स्थित राम मंदिर के निर्माण के लिए जुटाई गई दान राशि को लेकर भाजपा पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने कहा कि मंदिर निर्माण के लिए देशभर के करोड़ों श्रद्धालुओं ने श्रद्धा और विश्वास के साथ योगदान दिया था, ऐसे में दान राशि को लेकर सामने आ रही खबरें गंभीर सवाल खड़े करती हैं। भाजपा सनातन धर्म की ठेकेदार नहीं जयवर्धन सिंह ने कहा कि भाजपा एक राजनीतिक दल है, जबकि सनातन धर्म हजारों वर्षों पुरानी परंपरा है। उन्होंने कहा कि कोई भी राजनीतिक दल स्वयं को सनातन धर्म का ठेकेदार नहीं बता सकता। सनातन धर्म करोड़ों लोगों की आस्था और जीवन शैली का हिस्सा है, किसी एक संगठन की संपत्ति नहीं। राम मंदिर निर्माण में सभी का योगदान पूर्व मंत्री ने कहा कि अयोध्या में राम मंदिर निर्माण के लिए देशभर से लोगों ने अपनी श्रद्धा के अनुसार दान दिया था। उन्होंने दावा किया कि उनके परिवार ने भी मंदिर निर्माण में सहयोग राशि प्रदान की थी। उनके अनुसार यह मंदिर करोड़ों लोगों की आस्था का केंद्र है और इसके निर्माण में समाज के सभी वर्गों की भागीदारी रही है। दान राशि को लेकर उठाए सवाल जयवर्धन सिंह ने कहा कि मंदिर निर्माण से जुड़ी दान राशि में कथित आर्थिक अनियमितताओं और भ्रष्टाचार की खबरें सामने आ रही हैं। उन्होंने मांग की कि यदि ऐसे आरोप लगाए जा रहे हैं तो उनकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए, ताकि सच्चाई जनता के सामने आ सके। प्राण-प्रतिष्ठा का किया उल्लेख उन्होंने कहा कि जिस मंदिर की प्राण-प्रतिष्ठा में स्वयं नरेंद्र मोदी शामिल हुए थे और जिससे करोड़ों श्रद्धालुओं की भावनाएं जुड़ी हैं, वहां किसी भी प्रकार के वित्तीय विवाद या भ्रष्टाचार के आरोप गंभीर विषय हैं। ऐसे मामलों में पारदर्शिता बेहद जरूरी है। धर्म और राजनीति को अलग रखने की बात जयवर्धन सिंह ने कहा कि धर्म और राजनीति दो अलग-अलग विषय हैं। धार्मिक आस्था का उपयोग राजनीतिक लाभ के लिए नहीं किया जाना चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा भगवान राम और अयोध्या के नाम पर राजनीति कर रही है, जो उचित नहीं है। साधु-संतों को मिले संचालन की जिम्मेदारी पूर्व मंत्री ने कहा कि अयोध्या की धार्मिक परंपराओं से जुड़े पुराने साधु-संतों को मंदिर संचालन में प्रमुख भूमिका मिलनी चाहिए। उनका मानना है कि स्थानीय संत समाज और धार्मिक परंपराओं का सम्मान किया जाना आवश्यक है। अयोध्या के चुनाव परिणामों का भी किया जिक्र उन्होंने लोकसभा चुनाव 2024 का उल्लेख करते हुए कहा कि अयोध्या क्षेत्र में भाजपा को जिस प्रकार चुनावी नुकसान उठाना पड़ा, उसके पीछे स्थानीय स्तर पर असंतोष भी एक कारण माना जा सकता है। उनका दावा था कि कई संत और पुजारी मौजूदा व्यवस्थाओं से संतुष्ट नहीं थे। भाजपा की नीतियों पर निशाना अपने बयान में जयवर्धन सिंह ने भाजपा की कार्यप्रणाली और नीतियों पर सवाल उठाते हुए कहा कि धार्मिक संस्थाओं के संचालन में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित की जानी चाहिए, ताकि लोगों की आस्था और विश्वास कायम रह सके। नोट: राम मंदिर दान राशि को लेकर लगाए गए आरोप जयवर्धन सिंह के राजनीतिक बयान का हिस्सा हैं। संबंधित आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है और इस विषय पर संबंधित पक्षों की प्रतिक्रिया आना बाकी है। अधिक जानकारी और ताजा खबरों के लिए विजिट करें:www.deshharpal.com

भोपाल में पत्रकार से चाकू की नोक पर लूट: बंधक बनाकर खातों में ट्रांसफर कराए 32 हजार रुपए

भोपाल। राजधानी भोपाल के निशातपुरा थाना क्षेत्र में एक पत्रकार के साथ कथित लूट की सनसनीखेज वारदात सामने आई है। आरोप है कि घर लौट रहे पत्रकार को कुछ बदमाशों ने चाकू की नोक पर बंधक बनाकर एक कमरे में ले गए और परिचितों से ऑनलाइन पैसे मंगवाकर अपने खातों में ट्रांसफर करवा लिए। मामले में करीब 32 हजार रुपए की लूट होने की बात सामने आई है। लिफ्ट मांगने के बहाने रोका जानकारी के अनुसार, घटना सोमवार और मंगलवार की दरमियानी रात करीब 12:30 बजे की है। पत्रकार अनुज मीणा अपना काम खत्म कर दोपहिया वाहन से घर लौट रहे थे। इसी दौरान निशातपुरा इलाके में एक युवक ने उनसे लिफ्ट मांगी। पीड़ित के अनुसार, उन्होंने लिफ्ट देने से मना कर दिया। इसके कुछ ही देर बाद एक अन्य युवक अचानक उनकी बाइक के सामने आ गया, जिससे उनका वाहन अनियंत्रित होकर गिर गया। चाकू दिखाकर कमरे में ले गए अनुज मीणा का आरोप है कि बाइक गिरते ही वहां पहले से मौजूद तीन अन्य युवक भी पहुंच गए। बदमाशों ने उनकी गर्दन पर चाकू अड़ा दिया और जबरन पास के एक कमरे में ले गए। कमरे में आरोपियों ने उनसे नकदी की मांग की। पर्याप्त रकम नहीं मिलने पर उन्होंने जान से मारने की धमकी दी और परिचितों से ऑनलाइन पैसे मंगवाने का दबाव बनाया। खातों में ट्रांसफर कराए 32 हजार रुपए पीड़ित के मुताबिक, आरोपियों ने अलग-अलग माध्यमों से कुल 32 हजार रुपए अपने बैंक खातों में ट्रांसफर करवा लिए। वारदात के बाद बदमाशों ने उन्हें करीब रात 3 बजे छोड़ा। CCTV फुटेज खंगाल रही पुलिस निशातपुरा थाना प्रभारी मनोज पटवा ने बताया कि घटना की सूचना पुलिस को मिली है और मामले की जांच की जा रही है। पुलिस क्षेत्र में लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाल रही है, ताकि आरोपियों की पहचान कर जल्द गिरफ्तारी की जा सके। फिलहाल पुलिस सभी पहलुओं की जांच कर रही है और पीड़ित के बयान के आधार पर आगे की कार्रवाई की जा रही है। अधिक जानकारी और ताजा खबरों के लिए विजिट करें:www.deshharpal.com

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