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India AI Summit विवाद BJP का दावा Congress ने पैसे देकर कराई Online बदनामी

भारत में आयोजित India AI Impact Summit 2026 को लेकर सियासत तेज हो गई है। एक तरफ सरकार इस ग्लोबल टेक इवेंट को भारत की डिजिटल ताकत का प्रतीक बता रही है, तो वहीं दूसरी ओर यह आयोजन अब राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप का केंद्र बन चुका है। सत्तारूढ़ दल भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने कांग्रेस पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा है कि पार्टी ने कुछ सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर्स को पैसे का ऑफर देकर AI समिट के खिलाफ नकारात्मक माहौल बनाने की कोशिश की। भाजपा नेताओं का दावा है कि इस संबंध में कुछ वीडियो और चैट स्क्रीनशॉट सामने आए हैं, जिनमें कथित तौर पर पैसों के बदले समिट की आलोचना करने की बात कही गई है। BJP का आरोप क्या है? भाजपा प्रवक्ताओं के अनुसार, कुछ इन्फ्लुएंसर्स को मैसेज भेजकर कहा गया कि वे AI Summit से जुड़ी कमियों को बढ़ा-चढ़ाकर पेश करें। आरोप है कि इसके बदले उन्हें तय रकम देने का प्रस्ताव रखा गया। पार्टी का कहना है कि यह केवल सरकार की आलोचना नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारत की छवि को नुकसान पहुँचाने की कोशिश है। हालांकि इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि अब तक नहीं हुई है। मामले को लेकर आधिकारिक जांच या किसी एजेंसी की पुष्टि सामने नहीं आई है। Youth Congress Protest से बढ़ा विवाद विवाद तब और गहरा गया जब AI समिट के दौरान Indian Youth Congress के कुछ कार्यकर्ताओं ने प्रदर्शन किया। बताया गया कि प्रदर्शन के दौरान कुछ कार्यकर्ताओं ने शर्ट उतारकर नारेबाजी की। पुलिस ने इसे सुरक्षा नियमों का उल्लंघन बताया और कई लोगों को हिरासत में लिया। भाजपा ने इस प्रदर्शन को “सुनियोजित” करार देते हुए कहा कि यह आयोजन की गरिमा को ठेस पहुँचाने के लिए किया गया कदम था। वहीं कांग्रेस का कहना है कि यह लोकतांत्रिक विरोध का हिस्सा था और सरकार को आलोचना स्वीकार करनी चाहिए। Congress का पक्ष कांग्रेस नेताओं ने भाजपा के आरोपों को निराधार बताया है। उनका कहना है कि पार्टी का किसी भी इन्फ्लुएंसर को पैसे देने से कोई लेना-देना नहीं है। कांग्रेस का तर्क है कि जब भी सरकार की नीतियों पर सवाल उठते हैं, तो सत्ता पक्ष उसे देश विरोधी करार दे देता है। पार्टी नेताओं ने यह भी कहा कि AI Summit जैसे बड़े आयोजन पर सवाल उठाना या प्रदर्शन करना लोकतंत्र का हिस्सा है और इसे देश की छवि से जोड़कर देखना सही नहीं है। Political Narrative और Public Perception AI Summit, जिसे भारत की तकनीकी प्रगति और स्टार्टअप इकोसिस्टम के लिए अहम माना जा रहा था, अब राजनीतिक बहस का विषय बन गया है। आम नागरिकों के बीच भी इस मुद्दे को लेकर अलग-अलग राय देखने को मिल रही है। कुछ लोगों का मानना है कि अंतरराष्ट्रीय मंच पर ऐसे विवाद देश की छवि पर असर डाल सकते हैं। वहीं कई लोग इसे लोकतांत्रिक व्यवस्था का स्वाभाविक हिस्सा बताते हैं, जहां सरकार और विपक्ष के बीच मतभेद खुलकर सामने आते हैं। आगे क्या? फिलहाल यह मामला राजनीतिक बयानबाजी तक सीमित है। यदि आरोपों से जुड़े वीडियो और सबूतों की जांच होती है, तो स्थिति और स्पष्ट हो सकती है। तब तक यह मुद्दा सियासी गर्मी बढ़ाता रहेगा। AI Summit Controversy अब केवल एक टेक इवेंट की खबर नहीं रह गई है, बल्कि यह इस बात का उदाहरण बन गई है कि डिजिटल युग में राजनीति, सोशल मीडिया और पब्लिक ओपिनियन किस तरह एक-दूसरे से जुड़ चुके हैं। आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या इस मामले में कोई आधिकारिक जांच होती है या यह विवाद भी भारतीय राजनीति की कई बहसों की तरह समय के साथ ठंडा पड़ जाएगा। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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NCERT

Education vs Judiciary Row NCERT बदलाव पर Supreme Court बोला– सिर्फ माफी काफी नहीं

देश में शिक्षा व्यवस्था को लेकर एक बार फिर बहस तेज हो गई है। इस बार मामला स्कूल की किताबों और उनमें किए गए बदलावों से जुड़ा है। हाल ही में National Council of Educational Research and Training (NCERT) द्वारा कुछ पाठ्यपुस्तकों में संशोधन किए जाने के बाद विवाद खड़ा हो गया। मामला अदालत तक पहुंचा और सुनवाई के दौरान Supreme Court of India ने कड़ी टिप्पणी करते हुए कहा कि अगर न्यायपालिका की छवि को नुकसान पहुंचाने की कोशिश हुई है तो “सिर्फ माफी काफी नहीं” मानी जाएगी। क्या है पूरा मामला? NCERT ने हाल के समय में पाठ्यक्रम को “रैशनलाइज” करने और छात्रों पर पढ़ाई का बोझ कम करने के उद्देश्य से कुछ अध्यायों और अंशों में बदलाव किए। इन बदलावों में इतिहास, लोकतांत्रिक संस्थाओं और न्यायपालिका से जुड़े कुछ हिस्सों को हटाया या संक्षिप्त किया गया। यहीं से विवाद शुरू हुआ। कई शिक्षाविदों और सामाजिक संगठनों ने सवाल उठाया कि क्या इन संशोधनों से छात्रों को देश की संवैधानिक संस्थाओं की भूमिका की पूरी और संतुलित जानकारी मिल पाएगी? सुप्रीम कोर्ट की सख्त प्रतिक्रिया सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि शिक्षा सामग्री बेहद संवेदनशील विषय है। कोर्ट की टिप्पणी का सार यह था कि अगर किसी संस्था—खासकर न्यायपालिका—को बदनाम करने की मंशा से बदलाव किए गए हैं, तो केवल माफी मांग लेना पर्याप्त नहीं होगा। अदालत ने यह भी संकेत दिया कि शिक्षा प्रणाली में पारदर्शिता और जवाबदेही बेहद जरूरी है, क्योंकि स्कूल की किताबें ही छात्रों की सोच और समझ की नींव रखती हैं। NCERT का पक्ष क्या है? NCERT का कहना है कि यह पूरी प्रक्रिया शैक्षणिक समीक्षा का हिस्सा थी। संस्था के अनुसार: हालांकि, आलोचकों का मानना है कि पाठ्यपुस्तकों में किए गए बदलावों का प्रभाव लंबे समय तक छात्रों की समझ पर पड़ सकता है। क्यों महत्वपूर्ण है यह विवाद? यह मुद्दा केवल एक अध्याय या किताब तक सीमित नहीं है। यह बहस तीन बड़े सवालों को सामने लाती है: जब न्यायपालिका जैसी संस्था इस पर टिप्पणी करती है, तो मामला और गंभीर हो जाता है। शिक्षा और समाज पर संभावित असर स्कूल की किताबें सिर्फ परीक्षा पास करने का माध्यम नहीं होतीं। वे समाज, संविधान और लोकतंत्र की समझ विकसित करती हैं। ऐसे में अगर किसी भी बदलाव को लेकर संदेह पैदा होता है, तो उसका असर भरोसे पर पड़ता है—चाहे वह छात्रों का हो, अभिभावकों का या शिक्षकों का। इस पूरे विवाद ने यह साफ कर दिया है कि शिक्षा नीति में किया गया हर छोटा बदलाव भी व्यापक सामाजिक और संवैधानिक चर्चा का विषय बन सकता है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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मोदी

PM मोदी की Israel यात्रा Defense, Technology और Trade में नई दिशा

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी 25-26 फरवरी 2026 को इज़राइल के लिए दो दिवसीय राजकीय दौरे पर गए। इस यात्रा को इज़रायली मीडिया ने “Strategic Reset” और “Landmark Moment” बताया है, यानी इसे भारत-इज़राइल संबंधों में एक महत्वपूर्ण और ऐतिहासिक मोड़ के रूप में देखा जा रहा है। यह मोदी का इज़राइल में दूसरा दौरा है, पिछला दौरा 2017 में हुआ था। इज़राइल में मोदी का गर्मजोशी से स्वागत इज़राइल में पीएम मोदी का स्वागत बेहद भव्य और रंगीन रहा। सड़कों पर “Namaste” के नारे लगे और भारतीय तिरंगे की रोशनी से जगह-जगह इमारतें जगमगा उठीं। संसद भवन कनेसट को भी भारतीय तिरंगे के रंगों में रोशन किया गया। मीडिया ने इस स्वागत को भारत और इज़राइल के बीच मित्रता और साझा सम्मान का प्रतीक बताया। Strategic Reset: क्या है खास? “Strategic Reset” का मतलब है कि भारत और इज़राइल अब अपने रिश्तों को सिर्फ औपचारिक दोस्ती तक सीमित नहीं रखेंगे। इस यात्रा के जरिए दोनों देशों के बीच रक्षा, सुरक्षा, तकनीकी नवाचार, निवेश और व्यापार सहयोग को नई ऊँचाइयों तक ले जाने की योजना है। यानी यह दौरा केवल औपचारिकता नहीं है, बल्कि दोनों देशों के बीच विशेष रणनीतिक साझेदारी (Special Strategic Partnership) का मार्ग प्रशस्त करने वाला कदम है। मोदी का कार्यक्रम और ऐतिहासिक बातें पीएम मोदी इज़राइली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू और राष्ट्रपति इसहाक हर्जोग से मुलाकात करेंगे। वे कनेसट (इज़राइली संसद) को संबोधित करेंगे, और इस तरह मोदी पहले भारतीय प्रधानमंत्री होंगे, जिन्होंने यह अवसर प्राप्त किया। इसके अलावा मोदी याद वशेम (Holocaust Memorial) का दौरा भी करेंगे, जो दोनों देशों के साझा इतिहास और सम्मान को दर्शाता है। रक्षा और तकनीक के क्षेत्र में कई महत्वपूर्ण समझौतों की संभावनाएँ भी हैं। क्यों कहा जा रहा है ‘New Phase’? इज़रायली मीडिया और विशेषज्ञ मानते हैं कि यह दौरा भारत-इज़राइल रिश्तों में नए अध्याय (New Phase) की शुरुआत है। पिछली यात्राओं के मुकाबले अब सहयोग पहले से कहीं अधिक गहरा और व्यापक है। रक्षा, तकनीक, व्यापार और वैश्विक सहयोग के क्षेत्रों में यह एक ऐतिहासिक मोड़ साबित हो सकता है। राजनीतिक और वैश्विक प्रभाव इस दौरे से क्षेत्रीय राजनीति और सुरक्षा पर भी असर पड़ सकता है। इज़राइल के प्रधानमंत्री ने इसे स्थिरता और साझेदारी के प्रतीक के रूप में बताया। वहीं कुछ आलोचक, विशेषकर भारत में विपक्ष, यह कहते हैं कि भारत को फिलीस्तीन संकट जैसे मानवीय मुद्दों पर भी ध्यान देना चाहिए। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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NCERT

Education vs Judiciary Debate NCERT के ‘Judicial Corruption’ चैप्टर पर CJI का सख्त स्टैंड

देश की स्कूली शिक्षा और न्यायपालिका—दोनों ही लोकतंत्र के मजबूत स्तंभ माने जाते हैं। ऐसे में जब National Council of Educational Research and Training (NCERT) की एक किताब में शामिल ‘Judicial Corruption’ (ज्यूडिशियल करप्शन) चैप्टर को लेकर विवाद खड़ा हुआ, तो मामला सीधे देश की सर्वोच्च अदालत तक पहुंच गया। इस मुद्दे पर सुनवाई के दौरान भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि न्यायपालिका को बदनाम करने की इजाजत नहीं दी जा सकती। उन्होंने यह भी कहा कि मामला पहली नजर में सोचा-समझा कदम लगता है और वे स्वयं इस केस को देखेंगे। क्या है NCERT Judicial Corruption Controversy? विवाद उस अध्याय को लेकर है जिसमें न्यायिक भ्रष्टाचार से जुड़े संदर्भ और उदाहरण शामिल किए गए हैं। याचिकाकर्ताओं का आरोप है कि इस तरह की सामग्री छात्रों के मन में न्यायपालिका की छवि को लेकर नकारात्मक प्रभाव डाल सकती है। उनका कहना है कि स्कूल स्तर पर पढ़ाई जाने वाली किताबों में संवैधानिक संस्थाओं के बारे में संतुलित और जिम्मेदार भाषा होनी चाहिए। दूसरी तरफ कुछ शिक्षा विशेषज्ञों का मत है कि लोकतंत्र में पारदर्शिता और संस्थाओं की आलोचनात्मक समझ भी जरूरी है। उनके अनुसार, यदि विषय तथ्यों और ऐतिहासिक संदर्भों के साथ रखा गया है, तो इसे शिक्षा के दायरे में ही देखा जाना चाहिए, न कि संस्थान के खिलाफ अभियान के रूप में। CJI का सख्त रुख सुनवाई के दौरान CJI ने कहा कि न्यायपालिका की साख और विश्वसनीयता पर आंच नहीं आने दी जा सकती। उन्होंने संकेत दिया कि अगर सामग्री भ्रामक या एकतरफा पाई गई तो अदालत जरूरी निर्देश दे सकती है। CJI का खुद इस मामले को देखने का फैसला बताता है कि सुप्रीम कोर्ट इस विवाद को बेहद गंभीरता से ले रहा है। Education vs Institution Reputation: बड़ा सवाल यह मामला केवल एक अध्याय तक सीमित नहीं है। यह उस बड़े सवाल को सामने लाता है—क्या पाठ्यपुस्तकों में संवैधानिक संस्थाओं की आलोचनात्मक चर्चा होनी चाहिए? अगर हां, तो उसकी सीमा क्या हो? एक ओर अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता है, दूसरी ओर संस्थाओं की गरिमा। संतुलन कहां बनेगा, यह अब अदालत के फैसले से तय होगा। आगे क्या हो सकता है? आगामी सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट यह तय कर सकता है कि: देशभर के अभिभावक, शिक्षक और छात्र अब इस फैसले का इंतजार कर रहे हैं। क्योंकि यह मामला केवल एक चैप्टर का नहीं, बल्कि शिक्षा व्यवस्था और न्यायपालिका के बीच भरोसे के रिश्ते का भी है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Kerala

Kerala का नाम बदलेगा अब “Keralam” होगा आधिकारिक नाम

देश की राजनीति और सांस्कृतिक पहचान से जुड़ी एक बड़ी खबर सामने आई है। केंद्र सरकार ने केरल (Kerala) का नाम बदलकर “केरलम (Keralam)” करने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। केंद्रीय मंत्रिमंडल के इस फैसले के बाद अब आधिकारिक रूप से राज्य का नाम बदलने की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी। यह प्रस्ताव पहले ही केरल विधानसभा द्वारा पारित किया जा चुका था। विधानसभा ने सर्वसम्मति से केंद्र से आग्रह किया था कि राज्य का पारंपरिक और स्थानीय नाम “केरलम” ही संविधान और सभी सरकारी दस्तावेजों में दर्ज किया जाए। मलयालम भाषा में राज्य को लंबे समय से “केरलम” कहा जाता रहा है, इसलिए इसे औपचारिक मान्यता देने की मांग उठी थी। क्यों बदला जा रहा है Kerala का नाम? राज्य सरकार का कहना है कि “केरल” नाम अंग्रेज़ी और अन्य भाषाओं में प्रचलित रूप है, जबकि स्थानीय भाषा मलयालम में सही उच्चारण और ऐतिहासिक पहचान “केरलम” है। इस बदलाव को सांस्कृतिक सम्मान और भाषाई अस्मिता से जोड़कर देखा जा रहा है। मुख्यमंत्री पिनराई विजयन के नेतृत्व में राज्य सरकार ने यह प्रस्ताव केंद्र को भेजा था। उनका तर्क था कि जब कई राज्यों ने अपने पारंपरिक नामों को आधिकारिक रूप दिया है, तो केरल भी अपनी मूल पहचान के साथ जाना जाए। अब आगे क्या होगा? कैबिनेट की मंजूरी के बाद अगला कदम संसद में संविधान संशोधन विधेयक लाना होगा। संविधान के अनुच्छेद 3 के तहत और पहली अनुसूची में संशोधन के जरिए “केरल” की जगह “केरलम” दर्ज किया जाएगा। राष्ट्रपति की स्वीकृति मिलने के बाद यह बदलाव आधिकारिक रूप से लागू हो जाएगा। इसके बाद सरकारी दस्तावेज, आधिकारिक वेबसाइटें, साइनबोर्ड और अन्य प्रशासनिक अभिलेखों में भी नया नाम अपडेट किया जाएगा। राजनीतिक और सांस्कृतिक मायने यह फैसला ऐसे समय आया है जब राज्य में आगामी विधानसभा चुनाव की चर्चा भी तेज हो रही है। हालांकि सरकार इसे पूरी तरह सांस्कृतिक और भाषाई सम्मान से जुड़ा कदम बता रही है। कई लोगों के लिए यह सिर्फ नाम बदलने का मामला नहीं है, बल्कि अपनी जड़ों और परंपरा को पहचान देने का प्रयास है। “केरलम” शब्द राज्य की मिट्टी, भाषा और इतिहास से गहराई से जुड़ा हुआ है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Prayagraj Controversy शंकराचार्य को गिरफ्तारी का अंदेशा, IPS अधिकारी पर साजिश का आरोप

ज्योतिष पीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने संभावित गिरफ्तारी की आशंका जताते हुए हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की है। उनका कहना है कि प्रयागराज में तैनात आईपीएस अधिकारी अजय पाल शर्मा उनके खिलाफ साजिश रच रहे हैं और प्रशासनिक तंत्र उनके विरुद्ध सक्रिय है। इस घटनाक्रम ने धार्मिक और राजनीतिक हलकों में नई चर्चा छेड़ दी है। क्या है पूरा मामला? शंकराचार्य का आरोप है कि उन्हें झूठे मामलों में फंसाने की कोशिश की जा रही है। उनका कहना है कि हाल के दिनों में जिस तरह की प्रशासनिक गतिविधियां हुई हैं, उससे उन्हें अपनी गिरफ्तारी का अंदेशा है। उन्होंने अदालत से गुहार लगाई है कि बिना निष्पक्ष जांच के कोई कठोर कदम न उठाया जाए। करीबी सूत्रों के मुताबिक, शंकराचार्य ने अपनी याचिका में कहा है कि उन्हें व्यक्तिगत और संस्थागत तौर पर निशाना बनाया जा रहा है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि “सारा सिस्टम” उनके खिलाफ खड़ा नजर आ रहा है। हाईकोर्ट से क्या मांग? याचिका में मुख्य रूप से तीन मांगें रखी गई हैं: कानूनी जानकारों का कहना है कि यदि अदालत को प्रथम दृष्टया मामला गंभीर लगा, तो अंतरिम राहत मिल सकती है। हालांकि अंतिम फैसला सुनवाई के बाद ही होगा। क्यों बढ़ी चर्चा? यह मामला केवल कानूनी विवाद तक सीमित नहीं है। एक प्रमुख धार्मिक पद पर आसीन व्यक्ति द्वारा खुले तौर पर गिरफ्तारी की आशंका जताना कई सवाल खड़े करता है। समर्थकों का कहना है कि यह धार्मिक आवाज को दबाने की कोशिश है, जबकि प्रशासन की ओर से अभी तक औपचारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। आगे क्या? अब सभी की नजर हाईकोर्ट की सुनवाई पर टिकी है। अदालत प्रशासन से जवाब तलब कर सकती है और यह तय करेगी कि शंकराचार्य को तत्काल राहत मिलेगी या नहीं। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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CM Nitish

Bihar Political Drama लाठीचार्ज मुद्दे पर विधानसभा में टकराव, CM Nitish ने दिया करारा जवाब

बिहार की सियासत एक बार फिर गरमा गई है। बिहार विधानसभा के बजट सत्र के दौरान चौकीदारों और दफेदारों पर हुए लाठीचार्ज का मुद्दा ऐसा उठा कि सदन में तीखी बहस, नारेबाजी और हंगामे का माहौल बन गया। बात इतनी बढ़ी कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार (CM Nitish) और राजद विधायक भाई वीरेंद्र के बीच खुली नोकझोंक देखने को मिली। क्या है पूरा मामला? हाल ही में पटना में अपनी मांगों को लेकर चौकीदार और दफेदार सड़कों पर उतरे थे। उनका कहना था कि वे लंबे समय से वेतन, सेवा शर्तों और सुविधाओं से जुड़ी समस्याओं को लेकर सरकार से गुहार लगा रहे हैं। प्रदर्शन के दौरान पुलिस ने बल प्रयोग किया, जिसे विपक्ष ने “अनावश्यक लाठीचार्ज” बताया। इसी मुद्दे को लेकर विधानसभा में विपक्ष ने सरकार को घेरा। सदन की कार्यवाही शुरू होते ही विपक्षी सदस्यों ने जोरदार विरोध जताया और जवाब की मांग की। सदन में क्यों बढ़ी तल्खी? बहस के दौरान मुख्यमंत्री नीतीश कुमार (CM Nitish) ने कहा कि सरकार कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए प्रतिबद्ध है और किसी भी तरह की अव्यवस्था बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उनका इशारा इस ओर था कि प्रदर्शन के दौरान हालात बिगड़ रहे थे। लेकिन भाई वीरेंद्र ने सरकार के इस पक्ष को सिरे से खारिज करते हुए कहा कि अपनी मांगों को लेकर आवाज उठाना लोकतांत्रिक अधिकार है। उन्होंने सवाल किया कि आखिर शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे कर्मचारियों पर लाठी क्यों चली? इसी बात पर दोनों के बीच तीखी बहस हुई, जिसने माहौल और गर्म कर दिया। RJD का हमला, सरकार का बचाव मुख्य विपक्षी दल राष्ट्रीय जनता दल ने इसे कर्मचारियों की आवाज दबाने की कोशिश बताया। पार्टी नेताओं का कहना है कि अगर सरकार समय रहते संवाद करती, तो नौबत लाठीचार्ज तक नहीं पहुंचती। वहीं सत्ता पक्ष का तर्क है कि पुलिस ने स्थिति को नियंत्रित करने के लिए आवश्यक कदम उठाए। सरकार का कहना है कि विपक्ष इस मुद्दे को राजनीतिक रंग देकर जनता को भ्रमित कर रहा है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Mexico में ड्रग माफिया सरगना की मौत के बाद भड़की हिंसा: 25 सैनिकों समेत 32 की मौत, 20 बैंक फूंके

Mexico में ड्रग माफिया सरगना की मौत के बाद भड़की हिंसा: 25 सैनिकों समेत 32 की मौत, 20 बैंक फूंके

Mexico में एक बड़े ड्रग माफिया सरगना की मौत के बाद हालात बेकाबू हो गए हैं। देश के करीब 20 राज्यों में हिंसा भड़क उठी है। अब तक 32 लोगों की मौत की खबर है, जिनमें 25 सैनिक भी शामिल हैं। कई जगह आगजनी, फायरिंग और तोड़फोड़ की घटनाएं सामने आई हैं। गर्लफ्रेंड से मिली लोकेशन, फिर हुआ एनकाउंटर मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक सुरक्षा एजेंसियों को ड्रग माफिया की लोकेशन उसकी गर्लफ्रेंड के जरिए मिली। इसके बाद ऑपरेशन चलाया गया, जिसमें माफिया सरगना मारा गया। लेकिन उसकी मौत के बाद उसके गैंग के लोगों ने बदला लेने के लिए कई शहरों में हिंसा शुरू कर दी। 20 राज्यों में आगजनी और हमला हिंसा की लहर इतनी तेज रही कि करीब 20 राज्यों में सरकारी और निजी संपत्तियों को निशाना बनाया गया। 20 से ज्यादा बैंकों को आग के हवाले कर दिया गया। कई जगहों पर सड़कों को ब्लॉक किया गया और वाहनों में आग लगा दी गई। स्थानीय लोगों का कहना है कि उन्होंने ऐसा डर और तनाव पहले कभी नहीं देखा। आम नागरिक अपने घरों में छिपने को मजबूर हो गए। स्कूल और बाजार बंद कर दिए गए हैं। सेना और पुलिस अलर्ट पर मेक्सिको सरकार ने हालात को काबू में करने के लिए सेना और पुलिस की अतिरिक्त तैनाती की है। कई इलाकों में कर्फ्यू जैसे हालात हैं। सरकार ने लोगों से शांति बनाए रखने की अपील की है। आम लोगों पर सबसे ज्यादा असर इस हिंसा का सबसे ज्यादा असर आम नागरिकों पर पड़ा है। रोज कमाने-खाने वाले लोगों का काम ठप हो गया है। कई परिवारों ने अपने प्रियजनों को खो दिया। मेक्सिको में ड्रग माफिया की जड़ें लंबे समय से मजबूत रही हैं। ऐसे में यह घटना एक बार फिर दिखाती है कि अपराध के खिलाफ लड़ाई कितनी चुनौतीपूर्ण है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Jharkhand के चतरा में एयर एंबुलेंस क्रैश, 7 की मौत: रांची से दिल्ली जा रहा था विमान

Jharkhand के चतरा में एयर एंबुलेंस क्रैश, 7 की मौत: रांची से दिल्ली जा रहा था विमान

Jharkhand के चतरा जिले से एक दर्दनाक खबर सामने आई है। रांची से दिल्ली जा रहा एक एयर एंबुलेंस विमान क्रैश हो गया। इस हादसे में 7 लोगों की मौत हो गई। बताया जा रहा है कि टेकऑफ के करीब 20 मिनट बाद ही विमान का संपर्क एयर ट्रैफिक कंट्रोल से टूट गया था। क्या हुआ हादसे के दिन? जानकारी के मुताबिक, विमान ने Ranchi से उड़ान भरी थी और उसे New Delhi पहुंचना था। लेकिन उड़ान भरने के कुछ ही देर बाद पायलट से संपर्क टूट गया। बाद में खोजबीन के दौरान विमान का मलबा Chatra जिले के एक दूरदराज इलाके में मिला। स्थानीय प्रशासन और राहत दल तुरंत मौके पर पहुंचे, लेकिन तब तक काफी देर हो चुकी थी। हादसे में विमान में सवार सभी 7 लोगों की जान चली गई। राहत और जांच कार्य जारी हादसे की सूचना मिलते ही प्रशासन ने इलाके को घेर लिया। बचाव दल और पुलिस ने शवों को बरामद कर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है। शुरुआती जानकारी के अनुसार, खराब मौसम या तकनीकी खराबी की आशंका जताई जा रही है। हालांकि, असली कारण जांच के बाद ही साफ होगा। केंद्र और राज्य सरकार ने हादसे पर दुख जताया है। मृतकों के परिवारों के प्रति संवेदना व्यक्त की गई है। परिवारों पर टूटा दुखों का पहाड़ एयर एंबुलेंस का काम ही जिंदगी बचाना होता है, लेकिन इस बार वही उड़ान कई परिवारों के लिए अंतिम सफर बन गई। जिन लोगों ने अपनों को सुरक्षित पहुंचाने की उम्मीद की थी, उन्हें यह दुखद खबर मिली। पूरे इलाके में शोक का माहौल है। प्रशासन ने भरोसा दिलाया है कि हादसे की निष्पक्ष जांच कराई जाएगी और जो भी कारण सामने आएंगे, उन्हें सार्वजनिक किया जाएगा। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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AI Summit

AI Summit हंगामा 2026 Youth Congress अध्यक्ष Uday Bhanu Chib Arrested, अब तक 8 गिरफ्तार

नई दिल्ली में आयोजित India AI Impact Summit 2026 के दौरान हुई अप्रत्याशित घटना ने राजनीतिक और सामाजिक सुर्खियों को छा दिया। इस हंगामे के बाद Youth Congress के राष्ट्रीय अध्यक्ष उदय भानु चिब को गिरफ्तार किया गया, और अब तक इस मामले में कुल 8 लोगों की गिरफ्तारी हो चुकी है। आइए इस पूरे मामले को विस्तार से समझें। क्या हुआ था — AI Summit में शर्टलेस प्रदर्शन 20 फरवरी 2026 को नई दिल्ली के भारत मंडपम में आयोजित India AI Impact Summit के दौरान Youth Congress के कुछ कार्यकर्ताओं ने शर्टलेस प्रदर्शन किया। उन्होंने टी‑शर्ट पर सरकार और प्रधानमंत्री मोदी के खिलाफ संदेश लिखकर विरोध जताया। इस दौरान कार्यक्रम में व्यवधान और सुरक्षा नियमों का उल्लंघन हुआ। पुलिस के अनुसार, प्रदर्शन शांतिपूर्ण था, लेकिन कार्यक्रम स्थल पर अशांति और अव्यवस्था उत्पन्न हुई, जिसके बाद कार्रवाई की गई। गिरफ्तारी और पूछताछ अब तक कितनी गिरफ्तारियां हुईं इस मामले में 8 लोग गिरफ्तार किए गए हैं। इसमें मुख्य रूप से Youth Congress के पदाधिकारी और सदस्य शामिल हैं। कुछ गिरफ्तारियां दिल्ली में हुईं, जबकि कुछ अन्य स्थानों से भी कार्यकर्ताओं को हिरासत में लिया गया। FIR और कानूनी कार्रवाई दिल्ली पुलिस ने Tilak Marg पुलिस स्टेशन में दर्ज FIR में कई गंभीर धाराओं को शामिल किया है, जैसे: इन धाराओं के तहत पुलिस अब मामले की पूरी जांच कर रही है। राजनीतिक और सामाजिक प्रतिक्रिया इस विवाद ने लोकतंत्र बनाम कानून व्यवस्था की बहस को और तेज कर दिया है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Bengaluru में केंद्रीय शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग को लेकर कॉकरोच पार्टी ने विरोध प्रदर्शन करने का ऐलान किया है। पार्टी के अनुसार रविवार शाम 4 बजे फ्रीडम पार्क में समर्थक जुटेंगे और अपनी मांगों के समर्थन में शांतिपूर्ण प्रदर्शन करेंगे। Freedom Park में होगा प्रदर्शन प्रदर्शन का आयोजन Freedom Park में किया जाएगा। पार्टी का कहना है कि प्रदर्शन पूरी तरह लोकतांत्रिक और अहिंसक तरीके से आयोजित होगा। कॉकरोच पार्टी के संस्थापक Abhijeet Deepke ने कहा कि पार्टी सरकार के सामने अपनी मांगों को शांतिपूर्ण तरीके से रखना चाहती है। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में विरोध प्रदर्शन जनता की आवाज उठाने का एक महत्वपूर्ण माध्यम है। समर्थकों से बड़ी संख्या में पहुंचने की अपील पार्टी ने अपने समर्थकों से बड़ी संख्या में प्रदर्शन में शामिल होने की अपील की है। सोशल मीडिया के जरिए भी लोगों को कार्यक्रम की जानकारी दी जा रही है।
West Bengal Fake Signature Case: CID मुख्यालय पहुंचे Abhishek Banerjee, फिर होगी पूछताछ

West Bengal Fake Signature Case: CID मुख्यालय पहुंचे Abhishek Banerjee, फिर होगी पूछताछ

West Bengal में विधायकों के फर्जी हस्ताक्षर मामले को लेकर जांच तेज हो गई है। इसी केस में Abhishek Banerjee रविवार को एक बार फिर CID मुख्यालय पहुंचे, जहां उनसे पूछताछ की जा रही है। यह मामला विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष की नियुक्ति से जुड़े कथित फर्जी हस्ताक्षरों के आरोपों से जुड़ा हुआ है। जांच एजेंसी के मुताबिक पिछली पूछताछ में मिले जवाबों से पूरी संतुष्टि नहीं मिली थी, जिसके बाद उन्हें दोबारा तलब किया गया। कुणाल घोष को भी भेजा गया समन CID ने इस मामले में Kunal Ghosh को भी पूछताछ के लिए बुलाया है। जानकारी के अनुसार उन्हें दोपहर करीब 3 बजे भवानी भवन स्थित CID कार्यालय में पेश होने के निर्देश दिए गए हैं। सूत्रों के मुताबिक जांच एजेंसी दोनों नेताओं को आमने-सामने बैठाकर भी सवाल-जवाब कर सकती है ताकि मामले के अलग-अलग पहलुओं को स्पष्ट किया जा सके। जरूरी दस्तावेज भी मांगे गए अधिकारियों का कहना है कि मामले से जुड़े कुछ महत्वपूर्ण दस्तावेज भी अभिषेक बनर्जी से मांगे गए हैं। इन दस्तावेजों की मदद से जांच को आगे बढ़ाने और कथित फर्जी हस्ताक्षरों की सच्चाई सामने लाने की कोशिश की जा रही है। पहले भी हो चुकी है पूछताछ जांच से जुड़े सूत्रों के अनुसार CID इससे पहले भी अभिषेक बनर्जी से पूछताछ कर चुकी है। हालांकि कई सवालों के जवाबों को लेकर एजेंसी को स्पष्टता नहीं मिल पाई थी। इसी वजह से उन्हें दोबारा समन जारी किया गया।
Sushant Singh Rajput Death Anniversary: सुशांत को याद कर भावुक हुईं बहन श्वेता, बोलीं- कुछ लोग समय से बड़े हो जाते हैं

Sushant Singh Rajput Death Anniversary: सुशांत को याद कर भावुक हुईं बहन श्वेता, बोलीं- कुछ लोग समय से बड़े हो जाते हैं

आज ही के दिन, 14 जून 2020 को बॉलीवुड अभिनेता Sushant Singh Rajput ने दुनिया को अलविदा कह दिया था। उनके निधन को आज 6 साल पूरे हो गए हैं, लेकिन आज भी वह करोड़ों प्रशंसकों के दिलों में जिंदा हैं। छठी पुण्यतिथि पर उनकी बहन Shweta Singh Kirti ने एक भावुक पोस्ट शेयर कर अपने भाई को याद किया। उन्होंने लिखा कि समय बीत जाता है, लेकिन कुछ लोग समय से भी बड़े हो जाते हैं। श्वेता ने याद की सुशांत की सोच और व्यक्तित्व श्वेता सिंह कीर्ति ने अपने पोस्ट में सुशांत की जिज्ञासु सोच, विज्ञान और ब्रह्मांड के प्रति उनके गहरे लगाव का जिक्र किया। उन्होंने बताया कि सुशांत हर व्यक्ति का सम्मान करते थे और हमेशा दयालुता के साथ पेश आते थे। उन्होंने लिखा कि सुशांत ने जिंदगी से यह सीख दी कि सफलता तभी मायने रखती है, जब उसके साथ विनम्रता और इंसानियत भी जुड़ी हो। फैंस आज भी कर रहे याद सुशांत सिंह राजपूत की पुण्यतिथि पर सोशल मीडिया पर फैंस लगातार उन्हें श्रद्धांजलि दे रहे हैं। कई लोगों ने उनकी फिल्मों, इंटरव्यू और प्रेरणादायक बातों को साझा करते हुए उन्हें याद किया। फिल्मों से बनाई थी खास पहचान टीवी से अपने करियर की शुरुआत करने वाले सुशांत ने बॉलीवुड में भी अपनी अलग पहचान बनाई थी। उनकी मेहनत, अभिनय और सरल स्वभाव ने उन्हें लाखों लोगों का पसंदीदा कलाकार बना दिया था। आज भी उनके चाहने वाले मानते हैं कि सुशांत सिर्फ एक अभिनेता नहीं, बल्कि प्रेरणा देने वाली शख्सियत थे।
Assam AN-32 Plane Crash: जोरहाट हादसे में वायुसेना के 5 जवान शहीद, जांच के आदेश

Assam AN-32 Plane Crash: जोरहाट हादसे में वायुसेना के 5 जवान शहीद, जांच के आदेश

Assam के जोरहाट में भारतीय वायुसेना के एएन-32 विमान के दुर्घटनाग्रस्त होने से देश ने अपने पांच वीर सपूतों को खो दिया। यह हादसा उस समय हुआ जब विमान वायुसेना स्टेशन पर लैंडिंग कर रहा था। दुर्घटना में स्क्वाड्रन लीडर प्रशांत सिंह, फ्लाइट लेफ्टिनेंट शुभम कुमार, सार्जेंट जितेंद्र शर्मा, अग्निवीर वायु खेमाराम कुमावत और अग्निवीर वायु दानिश आलम शहीद हो गए। देशभर में शोक की लहर इस दुखद हादसे के बाद पूरे देश में शोक की लहर है। रक्षा मंत्री Rajnath Singh ने शहीद जवानों को श्रद्धांजलि देते हुए कहा कि ड्यूटी के दौरान सर्वोच्च बलिदान देने वाले इन वीर जवानों को देश हमेशा गर्व और कृतज्ञता के साथ याद रखेगा। उन्होंने शहीदों के परिवारों के प्रति संवेदना व्यक्त करते हुए कहा कि इस कठिन समय में पूरा देश उनके साथ मजबूती से खड़ा है। लैंडिंग के दौरान हुआ हादसा जानकारी के अनुसार भारतीय वायुसेना का Antonov An-32 विमान जोरहाट एयरफोर्स स्टेशन पर लैंडिंग कर रहा था, तभी यह हादसा हुआ। दुर्घटना के तुरंत बाद राहत और बचाव कार्य शुरू किया गया, लेकिन विमान में सवार पांचों जवानों को बचाया नहीं जा सका।
Ayodhya Ram Mandir Donation Case: चढ़ावे में गड़बड़ी के आरोपों की जांच तेज, SIT गठित

Ayodhya Ram Mandir Donation Case: चढ़ावे में गड़बड़ी के आरोपों की जांच तेज, SIT गठित

Ayodhya Ram Mandir में श्रद्धालुओं के चढ़ावे से जुड़ी कथित वित्तीय गड़बड़ी के मामले में जांच तेज हो गई है। स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप (SOG) ने एक युवक को हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू कर दी है, जबकि उत्तर प्रदेश सरकार ने मामले की जांच के लिए विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया है। जानकारी के मुताबिक हिरासत में लिया गया युवक रुदौली क्षेत्र का रहने वाला है। जांच के दौरान उसके घर से करीब 10 लाख रुपये नकद बरामद होने की बात सामने आई है। जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि दानपात्रों में जमा राशि की गिनती और उससे जुड़े कार्यों में उसकी क्या भूमिका थी। कई कर्मचारी जांच के दायरे में अधिकारियों के अनुसार मामले में केवल एक व्यक्ति ही नहीं, बल्कि चढ़ावे की गिनती और प्रबंधन से जुड़े कई कर्मचारी भी जांच के दायरे में हैं। जांच टीम सीसीटीवी फुटेज, वित्तीय रिकॉर्ड और अन्य तकनीकी साक्ष्यों की बारीकी से जांच कर रही है। सूत्रों के मुताबिक दान राशि की गिनती और रिकॉर्ड में कथित अनियमितताओं की शिकायत मिलने के बाद यह कार्रवाई शुरू की गई। अब जांच एजेंसियां पूरे नेटवर्क और संभावित लापरवाही या गड़बड़ी की कड़ियों को जोड़ने में जुटी हैं। सात दिनों में रिपोर्ट देगी SIT Shri Ram Janmabhoomi Teerth Kshetra Trust के अनुरोध पर गठित SIT को सात दिनों के भीतर अपनी प्रारंभिक रिपोर्ट सौंपने के निर्देश दिए गए हैं। सरकार का कहना है कि मामले की निष्पक्ष और पारदर्शी जांच कराई जाएगी।

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