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Gurugram

Mega Search Operation in Gurugram: पुलिस ने शुरू की सघन छापेमारी, दस्तावेजों की हो रही जांच

गुरुग्राम (Gurugram) में अवैध रूप से रह रहे विदेशी नागरिकों की पहचान और शहर की सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने के लिए पुलिस ने बड़ा Mega Search Operation in Gurugram शुरू किया है। इस अभियान के तहत शहर के कई इलाकों में एक साथ तलाशी और दस्तावेजों की जांच की जा रही है। स्थानीय लोगों के मुताबिक, अचानक शुरू हुए इस अभियान से कई इलाकों में हलचल देखने को मिली, क्योंकि पुलिस टीमें अलग-अलग जगहों पर पहुंचकर किरायेदारों और बाहरी लोगों का रिकॉर्ड खंगाल रही हैं। शहर में कई इलाकों में एक साथ चला सर्च अभियान पुलिस ने यह कार्रवाई एक साथ कई टीमों के जरिए शुरू की है। झुग्गी बस्तियों से लेकर हाई-राइज सोसायटी तक, हर जगह संदिग्ध रूप से रह रहे लोगों की पहचान की जा रही है। किन जगहों पर हो रही जांच? दस्तावेजों की गहन जांच इस अभियान में पुलिस आधार कार्ड, पहचान पत्र, किरायानामा और अन्य दस्तावेजों की जांच कर रही है। खास तौर पर ऐसे लोगों पर ध्यान दिया जा रहा है जो बिना वैध दस्तावेजों के शहर में रह सकते हैं। पुलिस का साफ संदेश अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि इस ऑपरेशन का उद्देश्य किसी को परेशान करना नहीं, बल्कि शहर में सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करना और अवैध रूप से रह रहे लोगों की पहचान करना है। वैध दस्तावेज रखने वाले लोगों के साथ कोई कार्रवाई नहीं की जा रही है। लोगों और RWA से अपील प्रशासन ने नागरिकों और रेजिडेंट वेलफेयर एसोसिएशन (RWA) से अपील की है कि वे अपने यहां रहने वाले किरायेदारों और कर्मचारियों का Police Verification जरूर कराएं। इससे भविष्य में किसी भी तरह की सुरक्षा समस्या से बचा जा सकता है। Gurugram Security Operation पर असर इस मेगा सर्च ऑपरेशन से शहर में सुरक्षा व्यवस्था और निगरानी प्रणाली को और मजबूत करने की कोशिश की जा रही है। पुलिस का कहना है कि यह अभियान आगे भी जारी रह सकता है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Meta

India AI Meta और Reliance मिलकर बनाएंगे पहला AI Data Center, जामनगर बनेगा नया Tech Hub

भारत में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के क्षेत्र में एक ऐतिहासिक कदम उठाया जा रहा है। सोशल मीडिया और टेक दिग्गज Meta (Facebook, Instagram और WhatsApp की पैरेंट कंपनी) और भारत की सबसे बड़ी कंपनियों में से एक Reliance Industries ने मिलकर देश में पहला AI आधारित डेटा सेंटर बनाने की योजना बनाई है। यह प्रोजेक्ट भारत के डिजिटल भविष्य को एक नई दिशा देने वाला माना जा रहा है। कहाँ बनेगा यह AI Data Center? यह अत्याधुनिक AI डेटा सेंटर गुजरात के जामनगर (Jamnagar) में स्थापित किया जाएगा। जामनगर पहले से ही Reliance के बड़े एनर्जी और डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स के लिए जाना जाता है, और अब यह शहर AI टेक्नोलॉजी का नया केंद्र बनने जा रहा है। Meta और Reliance की बड़ी साझेदारी इस प्रोजेक्ट में दो दिग्गज कंपनियों की साझेदारी शामिल है: Reliance इस डेटा सेंटर को डिजाइन और डेवलप करेगी, जबकि Meta इसकी AI कंप्यूटिंग क्षमता को लीज पर इस्तेमाल करेगी। यह मॉडल भारत में बड़े स्तर पर AI इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। कितना बड़ा होगा यह प्रोजेक्ट? यह डेटा सेंटर भारत में AI वर्कलोड को लोकल स्तर पर प्रोसेस करने में मदद करेगा, जिससे स्पीड और एफिशिएंसी दोनों बढ़ेंगी। क्यों है यह प्रोजेक्ट खास? यह सिर्फ एक डेटा सेंटर नहीं बल्कि एक बड़ी टेक क्रांति की शुरुआत है: जामनगर क्यों बना पसंदीदा लोकेशन? जामनगर को इस प्रोजेक्ट के लिए चुनने के पीछे कई अहम वजहें हैं: भारत के लिए क्या मायने रखता है यह कदम? इस AI डेटा सेंटर से भारत को कई स्तरों पर फायदा मिलेगा: हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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नरेंद्र मोदी

4399 Days as PM: नरेंद्र मोदी ने रचा इतिहास, कैबिनेट में तालियों से स्वागत

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लगातार 4399 दिनों तक प्रधानमंत्री पद पर रहते हुए भारत के पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू का रिकॉर्ड पीछे छोड़ दिया है। इस मौके पर कैबिनेट बैठक में माहौल सामान्य राजनीतिक बैठक से थोड़ा अलग नजर आया, जहां मंत्रियों ने खड़े होकर प्रधानमंत्री का स्वागत किया और तालियां बजाईं। सरकार इसे एक ऐतिहासिक उपलब्धि और स्थिर नेतृत्व का संकेत बता रही है, जबकि विपक्ष ने इस पर सवाल उठाते हुए इसे “संदिग्ध उपलब्धि” कहा है। कैबिनेट में दिखा खास माहौल कैबिनेट बैठक की शुरुआत से पहले कई मंत्रियों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का स्वागत किया। बैठक में मौजूद मंत्रियों ने खड़े होकर तालियां बजाईं, जिससे पूरा माहौल कुछ देर के लिए औपचारिक से अधिक भावनात्मक और उत्सव जैसा हो गया। भाजपा नेताओं का कहना है कि यह जनता के विश्वास और लगातार मजबूत नेतृत्व का नतीजा है, जिसने सरकार को लंबे समय तक स्थिर रखा है। Nehru का रिकॉर्ड टूटा, ऐतिहासिक आंकड़ा भारतीय राजनीतिक इतिहास में जवाहरलाल नेहरू लंबे समय तक प्रधानमंत्री रहने वाले नेता थे। अब 4399 दिनों के कार्यकाल के साथ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने यह रिकॉर्ड पार कर लिया है। भाजपा समर्थक इसे लोकतंत्र में स्थिरता और नेतृत्व की निरंतरता के रूप में देख रहे हैं, जबकि आलोचक इसे केवल कार्यकाल की लंबाई तक सीमित उपलब्धि मान रहे हैं। Congress का रिएक्शन: “संदिग्ध उपलब्धि” कांग्रेस ने इस पूरे घटनाक्रम पर तीखी प्रतिक्रिया दी है। पार्टी का कहना है कि देश में असली मुद्दे जैसे महंगाई, बेरोजगारी और आर्थिक चुनौतियाँ ज्यादा महत्वपूर्ण हैं। कांग्रेस नेताओं ने इसे “संदिग्ध उपलब्धि” बताते हुए कहा कि लोकतंत्र में सफलता का पैमाना केवल लंबे कार्यकाल से नहीं तय किया जा सकता। BJP का पक्ष: जनता का भरोसा सबसे बड़ा कारण भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) का कहना है कि यह उपलब्धि जनता के भरोसे और लगातार चुनावी समर्थन का परिणाम है। पार्टी नेताओं ने इसे “मजबूत लोकतंत्र और स्थिर सरकार” का उदाहरण बताया। सोशल मीडिया पर भी समर्थकों ने इस उपलब्धि को लेकर उत्साह जताया और इसे एक ऐतिहासिक क्षण बताया। राजनीतिक बहस आगे भी जारी रहने के संकेत राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि यह मुद्दा आने वाले दिनों में और तेज बहस का कारण बनेगा। सरकार इसे उपलब्धि के रूप में पेश कर रही है, जबकि विपक्ष इसे सवालों के घेरे में रख रहा है। कुल मिलाकर यह घटना भारतीय राजनीति में नेतृत्व, रिकॉर्ड और लोकतांत्रिक मूल्य—तीनों पर नई चर्चा को जन्म दे रही है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Delhi

Delhi Hotel Fire Mystery: कर्मचारी के नाम License, मालिक पर बढ़ा Suspense

Delhi में हुए होटल आग हादसे की जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है, वैसे-वैसे नए खुलासे सामने आ रहे हैं। अब पता चला है कि जिस होटल में आग लगी, उसका लाइसेंस असली मालिक के नाम पर नहीं बल्कि एक कर्मचारी के नाम पर जारी किया गया था। इस जानकारी के सामने आते ही पूरे मामले ने नया मोड़ ले लिया है। हादसे के बाद पुलिस, फायर विभाग और नगर निगम लगातार होटल से जुड़े लोगों से पूछताछ कर रहे हैं। वहीं होटल के अकाउंटेंट के बयान ने जांच एजेंसियों की चिंता और बढ़ा दी है। अकाउंटेंट बोला- आग में जल गए सारे जरूरी कागजात जांच के दौरान होटल के अकाउंटेंट ने दावा किया कि आग लगने के बाद होटल से जुड़े सभी अहम दस्तावेज जलकर राख हो गए। उसने पुलिस को बताया कि घटना के समय वह होटल में मौजूद नहीं था और मेट्रो से दिल्ली के अलग-अलग इलाकों में घूम रहा था। हालांकि पुलिस सिर्फ बयान पर भरोसा नहीं कर रही। अधिकारियों ने उसकी मोबाइल लोकेशन, सीसीटीवी फुटेज और कॉल रिकॉर्ड खंगालने शुरू कर दिए हैं। जांच टीम को शक है कि कुछ जरूरी दस्तावेज पहले ही हटाए जा चुके थे। License कर्मचारी के नाम, असली मालिक कौन? सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर होटल का संचालन कौन कर रहा था। जांच में सामने आया कि होटल का आधिकारिक लाइसेंस एक कर्मचारी के नाम पर था। ऐसे में यह आशंका जताई जा रही है कि कानूनी जिम्मेदारियों और कार्रवाई से बचने के लिए यह तरीका अपनाया गया हो सकता है। अब पुलिस होटल के वास्तविक मालिक और उससे जुड़े कारोबारियों की पहचान करने में जुटी है। कई वित्तीय रिकॉर्ड और प्रॉपर्टी दस्तावेजों की भी जांच की जा रही है। Fire Safety को लेकर भी बड़ा खुलासा हादसे के बाद होटल की फायर सेफ्टी व्यवस्था पर भी गंभीर सवाल उठे हैं। शुरुआती जांच में सामने आया कि होटल में सुरक्षा मानकों का पूरी तरह पालन नहीं किया गया था। कई जगहों पर आपातकालीन निकास और सुरक्षा उपकरणों की कमी पाई गई। फायर विभाग अब होटल की फायर एनओसी, सुरक्षा प्रमाणपत्र और अन्य सरकारी मंजूरियों की जांच कर रहा है। अगर लापरवाही साबित होती है तो होटल प्रबंधन के खिलाफ सख्त कार्रवाई तय मानी जा रही है। दिल्ली में शुरू हुआ बड़ा Checking Campaign इस घटना के बाद दिल्ली प्रशासन भी अलर्ट मोड में आ गया है। राजधानी के कई होटल, गेस्ट हाउस और कमर्शियल बिल्डिंग्स की जांच शुरू कर दी गई है। अधिकारियों का कहना है कि जिन संस्थानों में सुरक्षा नियमों की अनदेखी मिलेगी, उनके खिलाफ तुरंत कार्रवाई होगी। दिल्ली होटल आग कांड अब सिर्फ एक हादसा नहीं बल्कि सिस्टम में मौजूद लापरवाही और नियमों की अनदेखी की बड़ी कहानी बनता जा रहा है। आने वाले दिनों में इस केस में और भी कई बड़े खुलासे हो सकते हैं। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Sushmita Dev

Mamata Banerjee को एक और झटका, Rajya Sabha सांसद Sushmita Dev ने छोड़ा पद

पश्चिम बंगाल की राजनीति में एक बार फिर हलचल तेज हो गई है। तृणमूल कांग्रेस (TMC) की राज्यसभा सांसद और ममता बनर्जी की करीबी मानी जाने वाली सुष्मिता देव (Sushmita Dev) ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। उनके इस फैसले ने न सिर्फ पार्टी के भीतर चल रही खींचतान की चर्चाओं को हवा दी है, बल्कि विपक्ष को भी TMC पर हमला बोलने का मौका दे दिया है। बीते कुछ दिनों से पार्टी के अंदर असंतोष की खबरें लगातार सामने आ रही थीं। ऐसे में सुष्मिता देव का इस्तीफा TMC के लिए एक बड़े राजनीतिक संकेत के तौर पर देखा जा रहा है। लगातार इस्तीफों से बढ़ी TMC की परेशानी सुष्मिता देव का इस्तीफा ऐसे समय आया है जब हाल ही में पार्टी के वरिष्ठ नेता सुखेंदु शेखर रॉय भी TMC से दूरी बना चुके हैं। एक हफ्ते के भीतर दो बड़े नेताओं का पार्टी छोड़ना ममता बनर्जी के लिए चिंता बढ़ाने वाला माना जा रहा है। राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि लोकसभा चुनाव और संगठनात्मक बदलावों के बाद पार्टी के अंदर कई नेताओं में नाराजगी बढ़ी है। हालांकि पार्टी की ओर से अब तक इस मुद्दे पर कोई बड़ा बयान सामने नहीं आया है। कांग्रेस से TMC तक का सफर सुष्मिता देव लंबे समय तक कांग्रेस का प्रमुख चेहरा रही हैं। वह पूर्व केंद्रीय मंत्री संतोष मोहन देव की बेटी हैं और असम की राजनीति में उनकी अच्छी पकड़ मानी जाती है। साल 2021 में उन्होंने कांग्रेस छोड़कर TMC जॉइन की थी। पार्टी ने उन्हें पूर्वोत्तर राज्यों में संगठन मजबूत करने की अहम जिम्मेदारी भी दी थी। राज्यसभा में भी वह TMC की सक्रिय और मुखर सांसदों में शामिल थीं। इस्तीफे के पीछे क्या है वजह? हालांकि सुष्मिता देव ने अपने इस्तीफे की स्पष्ट वजह सार्वजनिक नहीं की है, लेकिन राजनीतिक गलियारों में कई तरह की चर्चाएं शुरू हो गई हैं। माना जा रहा है कि पार्टी के अंदर बढ़ती गुटबाजी और नेतृत्व को लेकर असहमति इसके पीछे की बड़ी वजह हो सकती है। कुछ राजनीतिक जानकार इसे आने वाले समय में TMC के अंदर बड़े बदलावों का संकेत भी मान रहे हैं। विपक्ष को मिला हमला बोलने का मौका सुष्मिता देव के इस्तीफे के बाद भाजपा और कांग्रेस समेत विपक्षी दलों ने TMC पर निशाना साधना शुरू कर दिया है। विपक्ष का कहना है कि पार्टी के अंदर सबकुछ ठीक नहीं चल रहा और यही वजह है कि नेता लगातार किनारा कर रहे हैं। अब सभी की नजर इस बात पर टिकी है कि सुष्मिता देव आगे कौन-सा राजनीतिक कदम उठाती हैं और TMC इस बढ़ते संकट से कैसे निपटती है। बंगाल की राजनीति में बढ़ी हलचल सुष्मिता देव का इस्तीफा सिर्फ एक राजनीतिक घटना नहीं माना जा रहा, बल्कि इसे बंगाल की बदलती राजनीतिक तस्वीर से जोड़कर भी देखा जा रहा है। आने वाले दिनों में यह मामला और ज्यादा चर्चा में रह सकता है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Weather

Weather कहीं बारिश तो कहीं Dust Storm, UP-Bihar से Mumbai तक मौसम का कहर

देशभर में मौसम (Weather) का मिजाज तेजी से बदल रहा है। कहीं तेज आंधी और बारिश लोगों की परेशानी बढ़ा रही है तो कहीं रेतीले तूफान और लैंडस्लाइड जैसी घटनाएं डर पैदा कर रही हैं। उत्तर प्रदेश और बिहार में बुधवार को आई तेज आंधी और बारिश ने भारी नुकसान पहुंचाया। वहीं मुंबई में लगातार बारिश के बीच लैंडस्लाइड की घटना सामने आई, जबकि राजस्थान में धूल भरी आंधी ने जनजीवन को प्रभावित कर दिया। UP-Bihar में तेज हवाओं और बारिश से बिगड़े हालात उत्तर प्रदेश और बिहार के कई जिलों में अचानक मौसम बदल गया। तेज हवाओं के साथ हुई बारिश ने लोगों को गर्मी से राहत जरूर दी, लेकिन इसके साथ कई परेशानियां भी लेकर आई। करीब 100 से ज्यादा जगहों पर पेड़ और बिजली के पोल गिर गए, जिससे कई इलाकों में बिजली सप्लाई बाधित हो गई। लखनऊ, कानपुर, वाराणसी, पटना और गया समेत कई शहरों में सड़कों पर पानी भर गया। ऑफिस से लौट रहे लोगों और यात्रियों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ा। कई जगह ट्रैफिक भी प्रभावित रहा। स्थानीय प्रशासन की टीमें रातभर गिरे हुए पेड़ों को हटाने और बिजली व्यवस्था बहाल करने में जुटी रहीं। मौसम विभाग ने आने वाले दिनों में भी तेज हवाओं और बारिश की संभावना जताई है। Mumbai Landslide: मलबे में दबीं 5 कारें मुंबई में मानसून से पहले ही भारी बारिश का असर दिखने लगा है। शहर के एक पहाड़ी इलाके में अचानक लैंडस्लाइड हो गया, जिससे वहां खड़ी 5 कारें मलबे में दब गईं। घटना के बाद इलाके में अफरा-तफरी का माहौल बन गया। राहत और बचाव दल ने तुरंत मौके पर पहुंचकर मलबा हटाने का काम शुरू किया। शुरुआती रिपोर्ट के मुताबिक किसी के हताहत होने की खबर नहीं है, लेकिन प्रशासन ने लोगों को संवेदनशील इलाकों से दूर रहने की सलाह दी है। मुंबई में लगातार हो रही बारिश को देखते हुए बीएमसी और मौसम विभाग अलर्ट मोड पर हैं। Rajasthan Dust Storm ने बढ़ाई मुश्किलें राजस्थान के जैसलमेर, बाड़मेर और बीकानेर में तेज रेतीला तूफान देखने को मिला। धूल भरी आंधी की वजह से विजिबिलिटी काफी कम हो गई, जिससे हाईवे पर वाहनों की आवाजाही प्रभावित हुई। कई इलाकों में दिन में ही अंधेरा जैसा माहौल बन गया। स्थानीय लोगों का कहना है कि तेज हवाओं के कारण घरों और दुकानों में भी धूल भर गई। मौसम विभाग के अनुसार पश्चिमी विक्षोभ के असर से राजस्थान समेत उत्तर भारत के कई राज्यों में मौसम तेजी से बदल रहा है। IMD ने जारी किया Alert भारतीय मौसम विभाग (IMD) ने कई राज्यों के लिए खराब मौसम का अलर्ट जारी किया है। विभाग ने लोगों से अपील की है कि खराब मौसम के दौरान खुले मैदान, पुराने पेड़ों और बिजली के खंभों के आसपास जाने से बचें। विशेषज्ञों का कहना है कि अगले 48 घंटों में उत्तर और पश्चिम भारत के कई हिस्सों में तेज आंधी, बारिश और धूल भरी हवाएं चल सकती हैं। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Narendra Modi vs Nehru

सिर्फ नेहरू का रिकॉर्ड टूटा, या मोदी ने भारत की दिशा भी बदल दी…?

संपादकीय | निखिल सिद्धभट्टी 10 जून 2026 भारतीय राजनीति के इतिहास में एक महत्वपूर्ण तारीख बन गई है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश के सबसे लंबे समय तक लगातार निर्वाचित प्रधानमंत्री रहने का रिकॉर्ड अपने नाम कर लिया है। 26 मई 2014 को प्रधानमंत्री पद की शपथ लेने वाले मोदी ने आज अपने कार्यकाल के 4399 दिन पूरे कर लिए हैं। इसके साथ ही उन्होंने जवाहरलाल नेहरू के उस रिकॉर्ड को पीछे छोड़ दिया, जो 1952 से 1964 तक लगातार 4398 दिनों तक निर्वाचित प्रधानमंत्री रहे थे। यहां एक तथ्य समझना जरूरी है। जवाहरलाल नेहरू 15 अगस्त 1947 से ही देश के प्रधानमंत्री थे, लेकिन उस समय वे स्वतंत्र भारत के पहले प्रधानमंत्री के रूप में नियुक्त हुए थे। 1952 में देश के पहले आम चुनाव के बाद कांग्रेस संसदीय दल ने उन्हें नेता चुना और वे 13 मई 1952 से 27 मई 1964 तक लगातार निर्वाचित प्रधानमंत्री रहे। अब, 74 वर्ष बाद नरेंद्र मोदी ने उस रिकॉर्ड को पार कर लिया है। यही वह क्षण है, जिसने हमें यह संपादकीय लिखने के लिए प्रेरित किया। क्योंकि यह केवल एक रिकॉर्ड टूटने की घटना नहीं है। यह भारत के दो सबसे प्रभावशाली प्रधानमंत्रियों, दो अलग-अलग विचारधाराओं और दो अलग-अलग विकास मॉडलों की तुलना का अवसर भी है। एक रिकॉर्ड, लेकिन दो बिल्कुल अलग भारत जब नेहरू ने 1952 में जनता के जनादेश के साथ सरकार बनाई, तब भारत एक नवजात राष्ट्र था। देश विभाजन की त्रासदी झेल चुका था। करोड़ों लोग गरीबी में जी रहे थे। औद्योगिक आधार लगभग नहीं था। साक्षरता बेहद कम थी और लोकतंत्र का भविष्य भी अनिश्चित था। नेहरू के सामने चुनौती थी—भारत को टूटने से बचाना और उसे खड़ा करना। दूसरी ओर, जब नरेंद्र मोदी 2014 में सत्ता में आए, तब भारत दुनिया की सबसे बड़ी लोकतांत्रिक व्यवस्था था। अर्थव्यवस्था वैश्विक मंच पर हाफ राही थी, सेना मजबूत थी पर उसे नियंत्रण में रखा था , परमाणु शक्ति मौजूद थी और सूचना क्रांति देश में प्रवेश कर चुकी थी पर उस की गाती धीमी थी । लेकिन मोदी के सामने सवाल अलग था—क्या भारत केवल एक विकासशील देश बना रहेगा या 21वीं सदी की वैश्विक शक्ति बनेगा? यहीं से दोनों नेताओं की तुलना शुरू होती है। नेहरू ने नींव रखी, इसमें विवाद नहीं आज जो लोग नेहरू की आलोचना करते हैं, उन्हें भी यह स्वीकार करना होगा कि स्वतंत्र भारत की लोकतांत्रिक संस्थाओं की बुनियाद उनके दौर में रखी गई। संसद, चुनाव आयोग, सर्वोच्च न्यायालय की प्रतिष्ठा, IIT, AIIMS, बड़े बांध, सार्वजनिक क्षेत्र के उद्योग—ये सब उस दौर की उपलब्धियां हैं। दुनिया के कई नवस्वतंत्र देशों में लोकतंत्र असफल हो गया। कहीं सेना सत्ता में आ गई, कहीं तानाशाही स्थापित हो गई। भारत उस रास्ते पर नहीं गया। यह नेहरू युग की एक बड़ी उपलब्धि मानी जाएगी। लेकिन इतिहास का दूसरा पक्ष भी है। नेहरू ने जिस समाजवादी आर्थिक मॉडल को अपनाया, उसने राज्य को अत्यधिक शक्तिशाली बना दिया। लाइसेंस-परमिट राज ने आने वाले दशकों में निजी क्षेत्र की ऊर्जा को सीमित कर दिया। और फिर 1962 में चीन युद्ध ने उनकी विदेश नीति की सबसे बड़ी कमजोरी उजागर कर दी। “हिंदी-चीनी भाई-भाई” का आदर्शवाद चीन की सैन्य आक्रामकता के सामने टिक नहीं सका। यहीं से नेहरू की विरासत पर बहस शुरू होती है। मोदी की सबसे बड़ी उपलब्धि क्या है? यहां अक्सर लोग UPI, एक्सप्रेस-वे, जी-20, अनुच्छेद 370 या डिजिटल इंडिया की बात करते हैं। लेकिन क्या यही मोदी की सबसे बड़ी उपलब्धि है? शायद नहीं। मोदी की सबसे बड़ी उपलब्धि यह हो सकती है कि उन्होंने भारत की शासन प्रणाली और विकास की सोच को बदलने का प्रयास किया। दशकों तक भारत में सरकार योजनाएं बनाती थी, लेकिन लाभार्थी तक पहुंचने से पहले व्यवस्था में रिसाव हो जाता था। जनधन, आधार और मोबाइल के संयोजन ने पहली बार सरकार और नागरिक के बीच सीधा संपर्क स्थापित किया। UPI केवल एक भुगतान प्रणाली नहीं है। यह उस नए भारत का प्रतीक है जो तकनीक को शासन का उपकरण बना रहा है। इसी तरह सड़क, रेलवे, एयरपोर्ट और रक्षा ढांचे में जो निवेश हुआ, उसने भारत के इंफ्रास्ट्रक्चर को नई गति दी। चीन: दो युग, दो प्रतिक्रियाएं यदि किसी एक मुद्दे पर नेहरू और मोदी की तुलना सबसे स्पष्ट रूप से दिखाई देती है, तो वह चीन है। 1962 में भारत तैयार नहीं था। राजनीतिक आदर्शवाद राष्ट्रीय सुरक्षा पर भारी पड़ गया। 2020 में गलवान घाटी में फिर चीन सामने था। यह कहना सही नहीं होगा कि भारत ने चीन को पराजित कर दिया। लेकिन यह जरूर कहा जा सकता है कि इस बार भारत ने 1962 जैसी असहाय स्थिति नहीं दिखाई। सीमा पर सड़कें बनीं, सैन्य तैनाती बढ़ी और चीन को लेकर नीति अधिक यथार्थवादी दिखाई दी। यहीं दोनों नेताओं के दृष्टिकोण का मूल अंतर दिखता है। असली बहस मोदी बनाम नेहरू नहीं, दो मॉडलों की है नेहरू का भारत राज्य-नियंत्रित अर्थव्यवस्था, समाजवादी सोच और गुटनिरपेक्ष विदेश नीति पर आधारित था। मोदी का भारत बाज़ार आधारित विकास, डिजिटल शासन, राष्ट्रीय पहचान और बहु-संरेखीय (Multi-alignment) कूटनीति पर आधारित दिखाई देता है। नेहरू संस्थानों के जरिए भारत को मजबूत करना चाहते थे। मोदी नेतृत्व और क्रियान्वयन की गति के जरिए भारत को बदलना चाहते हैं। एक ने भारत का ढांचा बनाया। दूसरा उस ढांचे को नए सिरे से आकार देने की कोशिश कर रहा है। क्या मोदी नेहरू से बेहतर प्रधानमंत्री साबित हुए हैं? इस प्रश्न का उत्तर राजनीति नहीं, इतिहास देगा। लेकिन 2026 में खड़े होकर यदि केवल प्रभाव, निर्णायकता, वैश्विक उपस्थिति, डिजिटल परिवर्तन, इंफ्रास्ट्रक्चर निर्माण और शासन की गति को मापदंड बनाया जाए, तो नरेंद्र मोदी का कार्यकाल स्वतंत्र भारत के सबसे प्रभावशाली प्रधानमंत्रियों में निश्चित रूप से गिना जाएगा। इतना ही नहीं, वे संभवतः नेहरू के बाद पहले ऐसे प्रधानमंत्री हैं जिन्होंने भारत के विकास मॉडल की दिशा बदलने का प्रयास किया है। नरेंद्र मोदी द्वारा नेहरू का रिकॉर्ड तोड़ना केवल एक सांख्यिकीय उपलब्धि नहीं है। यह उस राजनीतिक यात्रा का प्रतीक है जिसमें भारत ने समाजवादी दौर से डिजिटल दौर तक, गुटनिरपेक्षता से बहु-संरेखीय कूटनीति तक और धीमी प्रशासनिक प्रक्रियाओं से तकनीक-आधारित शासन तक का सफर तय किया है। नेहरू ने आधुनिक भारत की नींव रखी थी। मोदी उस भारत को...
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Strait of Hormuz

Strait of Hormuz Crisis: भारत का बड़ा दांव, Gujarat–Oman Gas Pipeline से बदलेगी Energy Strategy

भारत अपनी ऊर्जा सुरक्षा (Energy Security) को मजबूत करने के लिए अब स्ट्रेट ऑफ होर्मुज (Strait of Hormuz) पर निर्भरता कम करने की दिशा में बड़ा कदम उठा रहा है। यह वही समुद्री रास्ता है जिससे दुनिया का बड़ा हिस्सा तेल और गैस की सप्लाई होती है, लेकिन लगातार बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव (Geopolitical Risks) ने इसे बेहद संवेदनशील बना दिया है। इसी पृष्ठभूमि में भारत और ओमान के बीच एक पुराने लेकिन महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट को फिर से गति मिली है—गुजरात से ओमान तक सीधा ऊर्जा और व्यापार कॉरिडोर। India–Oman Corridor: क्या है पूरा प्लान? इस प्रस्तावित योजना के तहत ओमान के रणनीतिक पोर्ट्स जैसे Duqm और Sohar को भारत के गुजरात स्थित प्रमुख बंदरगाहों—मुंद्रा और कांडला—से जोड़ा जाएगा। इसका मकसद सिर्फ व्यापार नहीं, बल्कि एक मजबूत alternate supply route तैयार करना है, ताकि किसी भी वैश्विक संकट में भारत की ऊर्जा सप्लाई बाधित न हो। सबसे बड़ा गेमचेंजर: Deep Sea Gas Pipeline Project इस पूरे प्लान का सबसे अहम हिस्सा है प्रस्तावित डीप-सी गैस पाइपलाइन, जो ओमान से सीधे गुजरात तक बिछाई जा सकती है। अगर यह प्रोजेक्ट सफल होता है, तो भारत को मध्य-पूर्व की सप्लाई चेन पर कम निर्भर रहना पड़ेगा। क्यों जरूरी है यह प्रोजेक्ट? स्ट्रेट ऑफ होर्मुज दुनिया का सबसे अहम लेकिन सबसे जोखिम भरा तेल मार्ग माना जाता है। इसीलिए भारत अब “single route dependency” से निकलकर multi-route energy strategy अपना रहा है। 30 साल पुराना सपना, अब क्यों हो रहा एक्टिव? भारत–ओमान ऊर्जा सहयोग की यह सोच नई नहीं है। यह योजना पिछले करीब 30 साल से चर्चा में थी, लेकिन कभी तकनीकी तो कभी राजनीतिक कारणों से आगे नहीं बढ़ सकी। अब बदलते वैश्विक हालात, ऊर्जा संकट और समुद्री सुरक्षा चिंताओं ने इस प्रोजेक्ट को फिर से प्राथमिकता दिलाई है। ओमान क्यों है भारत के लिए इतना अहम? हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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CID

West Bengal Politics: TMC विधायकों की शिकायत पर CID जांच, ममता आवास के बाहर रुकी टीम

पश्चिम बंगाल की राजनीति में एक बार फिर बड़ा राजनीतिक विवाद सामने आया है। तृणमूल कांग्रेस (TMC) के कुछ विधायकों की शिकायत के बाद CID (Criminal Investigation Department) की टीम ममता बनर्जी के आवास तक पहुंच गई। मामला विधानसभा में नेता विपक्ष (Leader of Opposition) चुनने से जुड़े प्रस्ताव पर कथित फर्जी दस्तखत (Fake Signature Allegation) का बताया जा रहा है। हालांकि, इस पूरे घटनाक्रम में एक अहम मोड़ तब आया जब CID टीम को ममता बनर्जी के घर के अंदर प्रवेश की अनुमति नहीं दी गई। सुरक्षा और प्रोटोकॉल का हवाला देते हुए जांच टीम को बाहर ही रोक दिया गया, जिससे मामला और ज्यादा सुर्खियों में आ गया। क्या है पूरा पूरा विवाद? सूत्रों के मुताबिक, TMC के कुछ विधायकों ने आरोप लगाया है कि नेता प्रतिपक्ष के चयन से जुड़े प्रस्ताव पर उनके हस्ताक्षर बिना अनुमति के या कथित तौर पर फर्जी तरीके से किए गए। इसी शिकायत के आधार पर CID टीम जांच के लिए मुख्यमंत्री आवास पहुंची थी। लेकिन अंदर प्रवेश न मिलने के कारण जांच प्रक्रिया वहीं अटक गई। बंगाल पॉलिटिक्स में बढ़ा सियासी तापमान इस घटना के बाद पश्चिम बंगाल की राजनीति में हलचल तेज हो गई है। राजनीतिक जानकारों का कहना है कि यह विवाद सिर्फ एक प्रशासनिक मामला नहीं, बल्कि आने वाले समय में TMC की अंदरूनी राजनीति पर भी असर डाल सकता है। आगे क्या होगा? अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि CID इस मामले की जांच को आगे कैसे बढ़ाती है और क्या विधायकों के आरोपों में कोई सच्चाई सामने आती है या नहीं। अगर फर्जी दस्तखत के आरोप साबित होते हैं, तो यह मामला TMC और बंगाल की राजनीति दोनों के लिए बड़ा झटका साबित हो सकता है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Driving License

Driving License को लेकर बड़ी राहत, 50 साल तक वैध रखने पर सरकार का विचार

देश में ड्राइविंग लाइसेंस (Driving License) से जुड़े नियमों में जल्द बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है। केंद्र सरकार ऐसे प्रस्ताव पर काम कर रही है, जिसमें लोगों का DL सीधे 50 साल की उम्र तक वैध रखने पर विचार किया जा रहा है। अगर यह नियम लागू होता है, तो करोड़ों वाहन चालकों को बार-बार लाइसेंस रिन्यू कराने की परेशानी से राहत मिल सकती है। आज के समय में हर छोटे-बड़े काम के लिए लोगों को RTO के चक्कर लगाने पड़ते हैं। लाइसेंस रिन्यूअल भी उन्हीं प्रक्रियाओं में शामिल है, जिसमें समय और पैसा दोनों खर्च होते हैं। ऐसे में सरकार अब इस सिस्टम को आसान और डिजिटल बनाने की दिशा में कदम बढ़ा रही है। अभी क्या हैं Driving License के नियम? फिलहाल भारत में ड्राइविंग लाइसेंस की वैधता एक तय अवधि तक रहती है। सामान्य तौर पर DL 20 साल या फिर 40-50 वर्ष की उम्र तक मान्य होता है। इसके बाद वाहन चालक को दोबारा रिन्यूअल कराना पड़ता है। रिन्यूअल के दौरान कई दस्तावेज जमा करने होते हैं और कई बार मेडिकल फिटनेस सर्टिफिकेट भी देना पड़ता है। ग्रामीण इलाकों और छोटे शहरों में रहने वाले लोगों के लिए यह प्रक्रिया कई बार काफी मुश्किल बन जाती है। सरकार किन बदलावों पर कर रही है विचार? रिपोर्ट्स के मुताबिक सड़क परिवहन मंत्रालय ड्राइविंग लाइसेंस से जुड़ी कई सेवाओं को आसान बनाने की तैयारी में है। इसके तहत सिर्फ DL की वैधता बढ़ाने ही नहीं, बल्कि कई प्रक्रियाओं को पूरी तरह ऑनलाइन करने पर भी काम चल रहा है। संभावित बदलावों में शामिल हैं: सरकार का फोकस लोगों को तेज और पारदर्शी सेवाएं देने पर है, ताकि आम नागरिकों को कम परेशानी हो। 50 साल के बाद क्या बदल सकता है? सूत्रों के अनुसार 50 वर्ष की उम्र के बाद ड्राइविंग लाइसेंस रिन्यू कराने के लिए मेडिकल फिटनेस जरूरी हो सकती है। यानी उम्र बढ़ने के साथ ड्राइविंग क्षमता और स्वास्थ्य की जांच की जाएगी, ताकि सड़क सुरक्षा बनी रहे। अभी भी 50 साल के बाद DL रिन्यूअल के समय मेडिकल सर्टिफिकेट देना पड़ता है। माना जा रहा है कि नए नियमों में भी यह व्यवस्था जारी रह सकती है। आम लोगों को कैसे मिलेगा फायदा? अगर सरकार यह नया नियम लागू करती है, तो इसका सीधा फायदा करोड़ों वाहन चालकों को मिलेगा। खास बात यह है कि डिजिटल प्रक्रिया बढ़ने से भ्रष्टाचार और फर्जीवाड़े पर भी लगाम लग सकती है। अभी नहीं आया Final Notification हालांकि सरकार की तरफ से अभी तक कोई आधिकारिक अधिसूचना जारी नहीं की गई है। फिलहाल यह प्रस्ताव चर्चा और विचार के स्तर पर है। अंतिम फैसला आने के बाद ही नए नियम लागू होंगे। लेकिन अगर यह बदलाव मंजूर हो जाता है, तो यह देश के करोड़ों ड्राइविंग लाइसेंस धारकों के लिए बड़ी राहत साबित हो सकता है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Editor's Picks

Sugar

Sugar Rate Hike: त्योहारों से पहले चीनी के दाम बढ़े, Blinkit-Swiggy पर खरीदना हुआ Limited

चीनी (Sugar), जो हर घर की रसोई की रोजमर्रा की जरूरत है, इन दिनों लोगों की जेब पर भारी पड़ रही है। पिछले कुछ हफ्तों में चीनी के दाम तेजी से बढ़े हैं। इसी बीच Blinkit, Swiggy Instamart, BigBasket और D-Mart जैसे रिटेल और क्विक-कॉमर्स प्लेटफॉर्म्स पर चीनी की खरीद को लेकर लिमिट लगाई गई है। कई जगहों पर ग्राहक एक बार में 3 से 5 किलो तक ही चीनी खरीद पा रहे हैं। यानी अगर घर में ज्यादा मात्रा में चीनी खरीदने की जरूरत है, तो एक साथ बड़ी खरीदारी करना अब आसान नहीं है। Sugar Price: एक महीने में तेजी से बढ़े दाम Sugar की कीमतों में हालिया तेजी ने आम परिवारों की चिंता बढ़ा दी है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, जुलाई में चीनी की औसत खुदरा कीमत करीब ₹48 प्रति किलो के आसपास थी, जो अगस्त में बढ़कर ₹55 से ऊपर पहुंच गई। इसके बाद कुछ बाजारों में कीमतें और ऊपर गई हैं। शहर और बाजार के हिसाब से कीमतों में अंतर जरूर है, लेकिन जिस रफ्तार से दाम बढ़े हैं, उसका असर घर के मासिक बजट पर साफ दिखाई दे रहा है। Online Grocery पर क्यों लगाई गई खरीद Limit? Blinkit और Swiggy Instamart जैसे क्विक-कॉमर्स प्लेटफॉर्म्स पर खरीदारी की लिमिट लगाए जाने के पीछे मुख्य वजह उपलब्ध स्टॉक को संतुलित रखना मानी जा रही है। त्योहारी सीजन में चीनी की मांग अचानक बढ़ जाती है। मिठाइयों से लेकर घर में बनने वाले पकवानों तक, इस दौरान चीनी की खपत सामान्य दिनों की तुलना में बढ़ जाती है। ऐसे में कंपनियां ज्यादा मात्रा में खरीदारी को रोककर स्टॉक को ज्यादा ग्राहकों तक पहुंचाने की कोशिश कर रही हैं। हालांकि, यह लिमिट हर जगह एक जैसी नहीं है। कुछ स्थानों पर 5 किलो तक की खरीद की अनुमति है, जबकि कुछ जगहों पर इससे कम मात्रा की सीमा दिखाई दे रही है। चीनी महंगी होने की क्या है वजह? चीनी के दाम बढ़ने के पीछे कई कारण सामने आ रहे हैं। घरेलू उत्पादन में कमी, मौसम से जुड़ी परेशानियां, बढ़ती मांग और बाजार में स्टॉक को लेकर गतिविधियां कीमतों पर दबाव बना रही हैं। त्योहारी सीजन भी इस समय एक बड़ा फैक्टर है। रक्षाबंधन के बाद अब आने वाले त्योहारों में मिठाइयों और अन्य खाद्य पदार्थों की मांग बढ़ने की उम्मीद है। इसका सीधा असर चीनी की खपत पर पड़ सकता है। सरकार ने Duty-Free Sugar Import को दी मंजूरी बढ़ती कीमतों पर लगाम लगाने और घरेलू बाजार में सप्लाई बढ़ाने के लिए केंद्र सरकार ने 10 लाख टन कच्ची चीनी के Duty-Free Import की अनुमति दी है। सरकार का लक्ष्य बाजार में पर्याप्त उपलब्धता बनाए रखना और कीमतों पर दबाव कम करना है। इसके अलावा बड़े थोक खरीदारों के लिए चीनी का स्टॉक रखने की सीमा में भी बदलाव किया गया है। इससे बाजार में जरूरत से ज्यादा चीनी जमा करने की गतिविधियों पर रोक लगाने की कोशिश की जा रही है। आम लोगों के लिए क्या मतलब? फिलहाल इसका सबसे सीधा असर उन परिवारों पर पड़ रहा है, जो महीने का राशन एक साथ खरीदते हैं। जहां दुकानों या ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर खरीद सीमा लागू है, वहां लोगों को जरूरत के हिसाब से छोटी मात्रा में चीनी खरीदनी पड़ सकती है। दूसरी तरफ, सरकार की ओर से सप्लाई बढ़ाने के कदमों के बाद बाजार में स्थिति सामान्य होने की उम्मीद है। अगर नई चीनी समय पर बाजार में पहुंचती है और त्योहारी मांग के मुताबिक स्टॉक उपलब्ध रहता है, तो कीमतों में आगे राहत मिल सकती है। Sugar Price पर आगे रहेगी नजर चीनी के बढ़ते दाम इस समय सिर्फ घरेलू बजट का मुद्दा नहीं हैं, बल्कि आने वाले त्योहारी सीजन के लिए भी अहम हैं। सरकार, मिलों और रिटेल कंपनियों के फैसलों पर अब बाजार की नजर रहेगी। फिलहाल ग्राहकों के लिए बेहतर यही है कि जरूरत के मुताबिक ही खरीदारी करें और अलग-अलग दुकानों या ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स पर कीमतों की तुलना कर लें। आने वाले दिनों में सप्लाई की स्थिति साफ होने के साथ चीनी के दाम में भी बदलाव देखने को मिल सकता है।
Gold-Silver

Gold-Silver Price: त्योहार से पहले मिली राहत, सोना-चांदी के दाम में बड़ी गिरावट

Gold-Silver Price Today: रक्षाबंधन की खरीदारी के बीच सोना और चांदी खरीदने वालों के लिए बाजार से राहत वाली खबर आई है। 27 अगस्त 2026 को सोने और चांदी दोनों के भाव में गिरावट दर्ज की गई। 24 कैरेट सोना करीब ₹2,860 प्रति 10 ग्राम सस्ता होकर ₹1,58,477 पर आ गया। वहीं, 1 किलो चांदी का भाव ₹2,791 घटकर करीब ₹2,40,168 रह गया। त्योहार से ठीक पहले कीमतों में आई इस कमी से उन लोगों को थोड़ी राहत मिल सकती है, जो राखी के मौके पर बहन या परिवार के लिए सोने-चांदी की ज्वेलरी खरीदने का मन बना रहे हैं। Gold Price Today: सोने के भाव में ₹2,860 की गिरावट 27 अगस्त को 24 कैरेट सोने की कीमत में अच्छी-खासी गिरावट देखने को मिली। IBJA आधारित आंकड़ों के अनुसार, सोना करीब ₹2,860 प्रति 10 ग्राम टूटकर ₹1,58,477 पर पहुंच गया। वहीं, 23 कैरेट सोना करीब ₹1,57,842, 22 कैरेट सोना लगभग ₹1,45,165 और 18 कैरेट सोना करीब ₹1,18,858 प्रति 10 ग्राम के स्तर पर रहा। हालांकि, यहां एक बात ध्यान रखना जरूरी है कि शहर और ज्वेलर के हिसाब से Gold Rate थोड़ा अलग हो सकता है। ज्वेलरी खरीदते समय मेकिंग चार्ज और दूसरे शुल्क भी जुड़ते हैं। Silver Price Today: चांदी भी हुई ₹2,791 सस्ती सोने के साथ चांदी की कीमत में भी गिरावट आई है। 1 किलो चांदी का भाव ₹2,791 कम होकर करीब ₹2,40,168 पर आ गया। चांदी में पिछले दिनों तेजी देखने को मिली थी, इसलिए मौजूदा गिरावट के बावजूद इसका भाव काफी ऊंचे स्तर पर बना हुआ है। त्योहारों और शादी-ब्याह के सीजन में चांदी की मांग बढ़ने से इसकी कीमत पर भी असर पड़ सकता है। Raksha Bandhan से पहले क्यों खास है Gold-Silver Price? रक्षाबंधन के मौके पर लोग सिर्फ राखी और मिठाई ही नहीं खरीदते, बल्कि कई परिवार इस दिन सोने या चांदी की छोटी ज्वेलरी खरीदना भी पसंद करते हैं। ऐसे में त्योहार से एक दिन पहले Gold और Silver के दाम में आई गिरावट खरीदारों के लिए अच्छी खबर मानी जा रही है। अगर आप भी खरीदारी की तैयारी कर रहे हैं तो बाजार में जाने से पहले अपने शहर का ताजा रेट जरूर देख लें। ऑनलाइन दिखने वाला IBJA या बुलियन रेट और ज्वेलरी शॉप का अंतिम बिल एक जैसा होना जरूरी नहीं है। सोना खरीदते समय इन बातों का रखें ध्यान सोने की ज्वेलरी खरीदते समय केवल Gold Rate देखना काफी नहीं है। बिल बनते समय मेकिंग चार्ज, GST और अन्य शुल्क जुड़ सकते हैं। इसलिए खरीदारी से पहले ज्वेलर से पूरी कीमत का ब्रेकअप मांगना बेहतर रहेगा। साथ ही, सोने की शुद्धता के लिए BIS Hallmark जरूर जांचें। इससे आपको खरीदे जा रहे सोने की शुद्धता के बारे में भरोसा मिलता है। आगे क्या हो सकता है Gold और Silver का भाव? सोने और चांदी की कीमतों में आगे भी उतार-चढ़ाव बना रह सकता है। अंतरराष्ट्रीय बाजार, डॉलर की चाल, ब्याज दरों की उम्मीद और निवेशकों की खरीदारी जैसे कई फैक्टर कीमती धातुओं के भाव को प्रभावित करते हैं। इसलिए आज आई गिरावट को देखकर यह तय नहीं किया जा सकता कि आने वाले दिनों में कीमतें लगातार नीचे जाएंगी। बाजार की चाल बदलने में ज्यादा समय नहीं लगता। Gold-Silver Price Today का सीधा अपडेट रक्षाबंधन से पहले 24 कैरेट Gold करीब ₹2,860 सस्ता होकर ₹1,58,477 प्रति 10 ग्राम और Silver करीब ₹2,791 गिरकर ₹2,40,168 प्रति किलो पर आ गई है। अगर आप आज सोना या चांदी खरीदने जा रहे हैं, तो अंतिम खरीदारी से पहले अपने स्थानीय बाजार का लेटेस्ट रेट जरूर जांचें।
Raksha Bandhan

Raksha Bandhan 2026: राखी बांधने से पहले जान लें Bhadra का समय, ये है शुभ Muhurat

Raksha Bandhan 2026: भाई-बहन के रिश्ते में प्यार, अपनापन और थोड़ी-सी नोकझोंक हमेशा बनी रहती है। इन्हीं खूबसूरत रिश्तों को सेलिब्रेट करने वाला रक्षाबंधन इस बार 28 अगस्त 2026, शुक्रवार को मनाया जाएगा। राखी को लेकर इस बार एक सवाल काफी लोगों के मन में है—27 अगस्त या 28 अगस्त, आखिर किस दिन भाई की कलाई पर राखी बांधना शुभ रहेगा? पंचांग के अनुसार सावन पूर्णिमा 27 अगस्त की सुबह शुरू होगी और 28 अगस्त की सुबह तक रहेगी। उदया तिथि के आधार पर रक्षाबंधन 28 अगस्त को मनाया जाएगा। Raksha Bandhan 2026 Date: 27 या 28 अगस्त? रक्षाबंधन सावन मास की पूर्णिमा तिथि पर मनाया जाता है। इस साल पूर्णिमा तिथि 27 अगस्त की सुबह करीब 9 बजे के बाद शुरू होकर 28 अगस्त की सुबह करीब 9:48 बजे तक रहेगी। चूंकि 28 अगस्त को सूर्योदय के समय पूर्णिमा तिथि मौजूद रहेगी, इसलिए इसी दिन रक्षाबंधन मनाने की परंपरा रहेगी। यानी बहनें 28 अगस्त को भाई की कलाई पर राखी बांध सकती हैं। Rakhi Shubh Muhurat 2026: इस समय बांधें राखी 28 अगस्त को राखी बांधने के लिए सुबह का समय शुभ माना जा रहा है। उपलब्ध पंचांग गणना के अनुसार सुबह करीब 5:57 बजे से 9:48 बजे तक राखी बांधने का समय बताया गया है। हालांकि, शुभ मुहूर्त में शहर के सूर्योदय और स्थानीय पंचांग के अनुसार थोड़ा अंतर हो सकता है। इसलिए अगर आप किसी खास शहर में हैं, तो वहां के पंचांग से समय जरूर मिला लें। Bhadra Kaal: इस बार नहीं होगी बड़ी परेशानी रक्षाबंधन पर भद्रा का विशेष ध्यान रखा जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार भद्रा के दौरान राखी बांधना शुभ नहीं माना जाता। यही वजह है कि हर साल राखी बांधने से पहले लोग भद्रा समाप्त होने का इंतजार करते हैं। इस बार राहत की बात यह है कि 28 अगस्त को राखी बांधने के प्रमुख समय में भद्रा का प्रभाव नहीं रहेगा। ऐसे में बहनों को राखी बांधने के लिए भद्रा खत्म होने का लंबा इंतजार नहीं करना पड़ेगा। Raksha Bandhan 2026: एक नजर में पूरी जानकारी जानकारी विवरण रक्षाबंधन 28 अगस्त 2026, शुक्रवार पर्व सावन पूर्णिमा पूर्णिमा शुरुआत 27 अगस्त की सुबह पूर्णिमा समाप्त 28 अगस्त की सुबह करीब 9:48 बजे राखी बांधने का शुभ समय सुबह करीब 5:57 से 9:48 बजे तक भद्रा 28 अगस्त के प्रमुख राखी मुहूर्त में नहीं Rakhi बांधने की पूजा विधि रक्षाबंधन के दिन सुबह स्नान करके भगवान का ध्यान करें और पूजा की तैयारी करें। राखी की थाली में रोली या कुमकुम, अक्षत, दीपक, फूल, मिठाई और राखी रखें। भाई को आसन पर बैठाकर पहले तिलक लगाएं। इसके बाद अक्षत लगाकर आरती करें और शुभ मुहूर्त में उसकी कलाई पर राखी बांधें। फिर मिठाई खिलाकर भाई के सुखी और खुशहाल जीवन की कामना करें। भाई भी बहन को प्यार और सम्मान के साथ उपहार देता है और हर परिस्थिति में उसके साथ खड़े रहने का संकल्प करता है। Raksha Bandhan का असली मतलब क्या है? राखी का धागा देखने में भले ही छोटा हो, लेकिन इसके पीछे छिपी भावना बहुत बड़ी है। बचपन में एक-दूसरे से लड़ने वाले भाई-बहन जब बड़े होते हैं तो यही रिश्ता सबसे मजबूत सहारा बन जाता है। रक्षाबंधन इसी भरोसे और अपनापन को फिर से महसूस करने का दिन है। इसलिए इस बार राखी बांधते समय सिर्फ मुहूर्त ही नहीं, बल्कि उस रिश्ते की मिठास को भी याद रखें, जो जिंदगी के हर पड़ाव पर साथ चलती है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
Kanpur

Kanpur Plane Crash: अचानक नीचे गिरा Training Plane, दो पायलटों की मौत

उत्तर प्रदेश के कानपुर (Kanpur) से गुरुवार को एक बेहद दुखद खबर सामने आई। गंगा बैराज के पास नत्थूपुरवा गांव के नजदीक एक Twin-Engine Training Aircraft खेत में दुर्घटनाग्रस्त हो गया। विमान में सवार इंस्ट्रक्टर पायलट और ट्रेनी पायलट की मौत हो गई। हादसे के बाद मौके पर पहुंची पुलिस और रेस्क्यू टीमों ने इलाके को घेरकर राहत एवं बचाव कार्य शुरू किया। Training Flight के दौरान हुआ हादसा मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक विमान ट्रेनिंग उड़ान पर था और इसी दौरान हादसे का शिकार हो गया। यह चार सीटों वाला ट्विन-इंजन विमान था। शुरुआती जानकारी में बताया गया कि विमान नीचे गिरने से पहले आसपास के लोगों ने तेज आवाज सुनी थी। हालांकि, उस आवाज की वजह क्या थी, इसे लेकर अभी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। बताया जा रहा है कि विमान गंगा बैराज के करीब नत्थूपुरवा गांव के पास खुले खेत में गिरा। हादसा आबादी वाले इलाके से कुछ दूरी पर हुआ, जिसके बाद स्थानीय लोगों की भीड़ मौके पर जमा हो गई। हादसे के बाद मची अफरा-तफरी विमान के खेत में गिरने की सूचना मिलते ही पुलिस और इमरजेंसी टीमें घटनास्थल पर पहुंचीं। दुर्घटनाग्रस्त विमान बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया था और उसका मलबा खेत में बिखरा मिला। पुलिस ने घटनास्थल को सुरक्षित किया और दोनों पायलटों को मलबे से बाहर निकालने की कोशिश की, लेकिन उनकी जान नहीं बचाई जा सकी। शुरुआती रिपोर्टों में एक पायलट की मौत और दूसरे के गंभीर रूप से घायल होने की जानकारी सामने आई थी। बाद में पुलिस अधिकारियों के हवाले से दोनों पायलटों की मौत की पुष्टि हुई। Crash की असली वजह अभी सामने नहीं आई कानपुर Plane Crash की वजह फिलहाल साफ नहीं है। शुरुआती स्तर पर विमान के अचानक नियंत्रण खोने और नीचे गिरने की बात सामने आई है, लेकिन तकनीकी खराबी, इंजन से जुड़ी समस्या या किसी अन्य कारण की आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है। अधिकारियों की ओर से दुर्घटना की परिस्थितियों की जांच की जा रही है। विमान के मलबे, उड़ान से जुड़ी जानकारी और घटनास्थल से मिले सबूतों की जांच के बाद ही Crash की वास्तविक वजह सामने आ सकेगी। Aviation Safety पर फिर उठे सवाल कानपुर में हुआ यह हादसा Flight Training के दौरान सुरक्षा इंतजामों को लेकर भी सवाल खड़े करता है। हालांकि, अभी किसी निष्कर्ष पर पहुंचना जल्दबाजी होगी। जांच पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि हादसा किस वजह से हुआ और क्या इसके पीछे कोई तकनीकी या संचालन संबंधी कारण था। फिलहाल प्रशासन की टीमें घटनास्थल पर मौजूद हैं और मामले की जांच आगे बढ़ाई जा रही है। कानपुर विमान हादसे से जुड़ी नई जानकारी जांच एजेंसियों की रिपोर्ट के बाद ही सामने आएगी। Kanpur Plane Crash Latest Update: गंगा बैराज के पास Training Aircraft के क्रैश होने से दो पायलटों की मौत ने इलाके में शोक का माहौल पैदा कर दिया है। हादसे की पूरी तस्वीर जांच के बाद ही साफ होगी।
Share Market

Share Market Today: Sensex 77,250 के करीब, Nifty भी टूटा; जानें बाजार में क्यों आई गिरावट

भारतीय शेयर बाजार (Indian Share Market) में गुरुवार, 27 अगस्त को कारोबार के दौरान उतार-चढ़ाव देखने को मिला। शुरुआती कारोबार में Sensex और Nifty बढ़त के साथ खुले, लेकिन कुछ ही देर बाद बाजार की चाल बदल गई। बिकवाली बढ़ने से दोनों प्रमुख इंडेक्स लाल निशान में पहुंच गए। सुबह 10:30 बजे Sensex 123.89 अंक की गिरावट के साथ 77,349.05 पर था, जबकि Nifty 24.60 अंक टूटकर 24,183.15 पर कारोबार कर रहा था। Sensex-Nifty पर बढ़ा दबाव गुरुवार की शुरुआत बाजार के लिए सकारात्मक रही। Nvidia के मजबूत नतीजों और कच्चे तेल की कीमतों में नरमी से निवेशकों को कुछ राहत मिली, लेकिन यह बढ़त ज्यादा देर टिक नहीं पाई। Nifty 24,200 के स्तर के नीचे चला गया, वहीं Sensex भी शुरुआती बढ़त गंवाकर कमजोर हो गया। इससे पहले सुबह 10:13 बजे Reuters के आंकड़ों में Sensex 77,379.50 और Nifty 24,191.85 पर था। यानी उस समय दोनों इंडेक्स में हल्की गिरावट दर्ज की जा रही थी। FMCG और Media Shares में बिकवाली सेक्टोरल कारोबार की बात करें तो FMCG शेयरों पर दबाव नजर आया। शुरुआती कारोबार में Nifty FMCG इंडेक्स भी लाल निशान में था। इसके साथ ही Media शेयरों में भी कमजोरी देखने को मिली। सुबह 10:30 बजे Nifty Media करीब 0.60 फीसदी नीचे 1,601.30 पर कारोबार कर रहा था। Media इंडेक्स इससे पहले लगातार दो कारोबारी सत्रों में बढ़त दर्ज कर चुका था। ऐसे में आज की गिरावट को कुछ हद तक मुनाफावसूली से भी जोड़कर देखा जा रहा है। HDFC Bank बना बाजार पर दबाव का बड़ा कारण आज बाजार में HDFC Bank का प्रदर्शन भी निवेशकों के रडार पर रहा। शेयर में करीब 1 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई। Reuters के मुताबिक, अमेरिका में बैंक और उसके दो वरिष्ठ अधिकारियों के खिलाफ दायर एक securities lawsuit की खबर के बाद शेयर पर दबाव बढ़ा। Upstox के अनुसार, HDFC Bank में बिकवाली के चलते Sensex दिन के ऊपरी स्तर से करीब 300 अंक नीचे आया, जबकि Nifty 24,200 के महत्वपूर्ण स्तर के नीचे फिसल गया। Global Market से मिले-जुले संकेत भारतीय बाजार को एक तरफ Nvidia के मजबूत नतीजों और कच्चे तेल की कीमतों में नरमी से सहारा मिला। Brent crude करीब 87.4 डॉलर प्रति बैरल तक आ गया था। ईरान और ओमान के बीच Strait of Hormuz को लेकर बातचीत आगे बढ़ने की खबरों से तेल आपूर्ति को लेकर चिंता कुछ कम हुई है। दूसरी ओर, अमेरिकी महंगाई के आंकड़ों को लेकर बनी चिंता ने निवेशकों को थोड़ा सतर्क रखा। यही वजह रही कि एशियाई बाजारों में मजबूती के बावजूद भारतीय बाजार में तेजी टिक नहीं सकी। निवेशकों की नजर अब बाजार की अगली चाल पर फिलहाल घरेलू बाजार में तस्वीर पूरी तरह साफ नहीं है। एक तरफ कच्चे तेल में नरमी और मजबूत ग्लोबल टेक्नोलॉजी संकेत सकारात्मक हैं, तो दूसरी तरफ HDFC Bank जैसे बड़े शेयरों में कमजोरी और सेक्टोरल बिकवाली बाजार पर दबाव बना रही है। ऐसे माहौल में Sensex और Nifty की आगे की दिशा, 24,200 के आसपास Nifty की चाल और प्रमुख सेक्टर्स में खरीदारी-बिकवाली पर निवेशकों की नजर रहेगी। बाजार में उतार-चढ़ाव को देखते हुए किसी भी निवेश निर्णय से पहले अपने वित्तीय सलाहकार की राय लेना बेहतर है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!

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