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Delhi

Red Fort Bomb Threat: ईमेल से मिली धमकी के बाद लाल किले में सघन तलाशी, Delhi Police जांच में जुटी

देश की राजधानी Delhi के ऐतिहासिक लाल किले (Red Fort) को बम से उड़ाने की धमकी मिलने के बाद सुरक्षा एजेंसियां पूरी तरह सतर्क हो गई हैं। शनिवार को एक धमकी भरा ईमेल मिलने के बाद दिल्ली पुलिस, बम निरोधक दस्ता, डॉग स्क्वॉड और अन्य सुरक्षा एजेंसियों ने तत्काल कार्रवाई शुरू कर दी। पूरे लाल किला परिसर की गहन तलाशी ली गई। हालांकि शुरुआती जांच में कोई संदिग्ध वस्तु नहीं मिली, लेकिन मामले को गंभीर मानते हुए जांच कई स्तरों पर जारी है। इस घटना के बाद न केवल दिल्ली बल्कि मुंबई सहित अन्य सुरक्षा एजेंसियों को भी अलर्ट कर दिया गया है। साइबर एक्सपर्ट धमकी भेजने वाले तक पहुंचने की कोशिश कर रहे हैं। ईमेल से मिली धमकी, तुरंत हरकत में आई पुलिस जानकारी के मुताबिक, लाल किले को उड़ाने की धमकी ईमेल के जरिए दी गई थी। सूचना मिलते ही पुलिस कंट्रोल रूम सक्रिय हुआ और कुछ ही मिनटों में सुरक्षा बलों की टीमें मौके पर पहुंच गईं। बम निरोधक दस्ते और डॉग स्क्वॉड ने लाल किले के हर हिस्से की बारीकी से जांच की। कई घंटे तक चले सर्च ऑपरेशन में किसी तरह का विस्फोटक या संदिग्ध सामान नहीं मिला। इसके बावजूद सुरक्षा व्यवस्था में किसी तरह की ढिलाई नहीं बरती गई। मुंबई तक पहुंची जांच, Cyber Team कर रही पड़ताल धमकी भरे ईमेल की तकनीकी जांच के दौरान कुछ डिजिटल सुराग मिलने के बाद मुंबई पुलिस को भी सतर्क किया गया है। साइबर सेल ईमेल की आईपी डिटेल, सर्वर और अन्य तकनीकी जानकारियों की जांच कर रही है। जांच एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि ईमेल किसी शरारती तत्व ने भेजा है या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश है। फिलहाल सभी पहलुओं को ध्यान में रखकर जांच आगे बढ़ाई जा रही है। Red Fort की सुरक्षा पहले से ज्यादा कड़ी घटना के बाद लाल किले की सुरक्षा व्यवस्था और मजबूत कर दी गई है। प्रवेश द्वारों पर अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया है। आने वाले पर्यटकों की जांच पहले से अधिक सख्ती के साथ की जा रही है। वहीं आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की निगरानी भी बढ़ा दी गई है। इसके अलावा दिल्ली के अन्य संवेदनशील स्थानों और प्रमुख सरकारी इमारतों की सुरक्षा की भी समीक्षा की जा रही है। पहले भी मिल चुकी हैं ऐसी धमकियां बीते कुछ वर्षों में देश के कई एयरपोर्ट, स्कूल, अस्पताल, धार्मिक स्थलों और सरकारी संस्थानों को ईमेल के जरिए बम से उड़ाने की धमकियां मिल चुकी हैं। अधिकांश मामलों में ये धमकियां फर्जी निकलीं, लेकिन सुरक्षा एजेंसियां हर सूचना को गंभीरता से लेते हुए तत्काल कार्रवाई करती हैं ताकि किसी भी संभावित खतरे को समय रहते टाला जा सके। पुलिस ने लोगों से की अपील दिल्ली पुलिस ने नागरिकों से अफवाहों पर ध्यान न देने की अपील की है। यदि किसी को कोई संदिग्ध वस्तु, लावारिस बैग या संदिग्ध गतिविधि दिखाई देती है तो उसकी जानकारी तुरंत पुलिस को देने के लिए कहा गया है। फिलहाल लाल किले पर स्थिति पूरी तरह सामान्य है। जांच एजेंसियां धमकी भरे ईमेल की असली सच्चाई सामने लाने और जिम्मेदार व्यक्ति तक पहुंचने के लिए लगातार काम कर रही हैं। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Nripendra Mishra

Ayodhya राम मंदिर चढ़ावा विवाद पर Nripendra Mishra हुए भावुक, SP के पोस्टर से तेज हुई सियासत

अयोध्या के श्रीराम जन्मभूमि मंदिर में चढ़ावे की कथित चोरी का मामला अब धार्मिक आस्था के साथ-साथ राजनीतिक बहस का विषय भी बन गया है। मंदिर निर्माण समिति के अध्यक्ष नृपेंद्र मिश्रा (Nripendra Mishra) ने इस घटना पर गहरा दुख व्यक्त करते हुए इसे “राम मंदिर पर कलंक” बताया। दूसरी ओर, समाजवादी पार्टी (SP) ने इस मुद्दे को लेकर भाजपा सरकार और मंदिर प्रबंधन पर सवाल उठाते हुए पोस्टर जारी किया, जिसके बाद प्रदेश की राजनीति में बयानबाजी तेज हो गई है। नृपेंद्र मिश्रा ने जताई नाराजगी राम मंदिर निर्माण समिति के अध्यक्ष नृपेंद्र मिश्रा ने मीडिया से बातचीत में कहा कि मंदिर में चढ़ावे से जुड़ी इस तरह की घटना बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है। उन्होंने कहा कि यह मामला केवल धन की चोरी का नहीं, बल्कि करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था से जुड़ा हुआ है। उन्होंने कहा, “मुझे इस घटना से छोटापन महसूस हो रहा है। यह राम मंदिर के लिए एक कलंक है।” उनके मुताबिक, मंदिर में आने वाला हर श्रद्धालु पूरी श्रद्धा और विश्वास के साथ दान देता है। ऐसे में यदि उस दान के साथ किसी भी तरह की अनियमितता होती है, तो इससे लोगों का भरोसा प्रभावित होता है। क्या है पूरा मामला? राम मंदिर में श्रद्धालुओं द्वारा चढ़ाए गए दान और चढ़ावे को लेकर कथित गड़बड़ी की शिकायत सामने आई थी। इसके बाद मंदिर प्रशासन और संबंधित अधिकारियों ने मामले की जांच शुरू कर दी। शुरुआती जांच में कुछ कर्मचारियों से पूछताछ की गई है और उपलब्ध रिकॉर्ड तथा अन्य साक्ष्यों की जांच की जा रही है। हालांकि, अभी जांच जारी है और किसी भी व्यक्ति को आधिकारिक तौर पर दोषी घोषित नहीं किया गया है। प्रशासन का कहना है कि जांच पूरी होने के बाद ही आगे की कार्रवाई की जाएगी। SP ने पोस्टर जारी कर सरकार को घेरा इस मामले के सामने आने के बाद समाजवादी पार्टी ने सोशल मीडिया और पोस्टर के जरिए भाजपा सरकार पर निशाना साधा। पार्टी के पोस्टर पर लिखा था— “राम नाम जपना, चढ़ाया दान अपना।” इस पोस्टर के जरिए सपा ने मंदिर में दान की सुरक्षा और पारदर्शिता पर सवाल उठाए तथा पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की। पोस्टर सामने आने के बाद राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप का दौर और तेज हो गया। भाजपा का जवाब भाजपा नेताओं का कहना है कि सरकार इस मामले को पूरी गंभीरता से देख रही है। उनका दावा है कि यदि जांच में कोई भी व्यक्ति दोषी पाया जाता है तो उसके खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी। पार्टी ने विपक्ष पर धार्मिक मुद्दे का राजनीतिक फायदा उठाने का आरोप भी लगाया। श्रद्धालुओं की आस्था से जुड़ा है मामला राम मंदिर देश और विदेश के करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र है। ऐसे में चढ़ावे से जुड़ी किसी भी तरह की कथित गड़बड़ी स्वाभाविक रूप से लोगों की चिंता बढ़ाती है। कई श्रद्धालुओं का कहना है कि मंदिर में दान पूरी श्रद्धा और विश्वास के साथ दिया जाता है, इसलिए उसकी सुरक्षा और पारदर्शी व्यवस्था सुनिश्चित करना मंदिर प्रशासन की सबसे बड़ी जिम्मेदारी है। जांच रिपोर्ट का इंतजार फिलहाल पूरे मामले की जांच जारी है। मंदिर ट्रस्ट और प्रशासन का कहना है कि सभी तथ्यों की निष्पक्ष जांच की जा रही है। जांच पूरी होने के बाद रिपोर्ट सार्वजनिक की जाएगी और यदि किसी की भूमिका सामने आती है तो कानून के अनुसार उचित कार्रवाई की जाएगी। अब सभी की नजर जांच के नतीजों पर है। यह मामला न केवल मंदिर प्रशासन की कार्यप्रणाली बल्कि श्रद्धालुओं के विश्वास और राजनीतिक माहौल, दोनों के लिहाज से अहम माना जा रहा है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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FTA

India-New Zealand Relations: FTA को मिली रफ्तार, PM Modi बोले- भारत में होगा ₹1.72 लाख करोड़ का निवेश

भारत और न्यूजीलैंड के रिश्तों में एक नया अध्याय जुड़ गया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के न्यूजीलैंड दौरे के दौरान दोनों देशों ने व्यापार, निवेश, शिक्षा, तकनीक और सुरक्षा जैसे कई अहम क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर सहमति जताई। इस यात्रा की सबसे बड़ी उपलब्धि Free Trade Agreement (FTA) को आगे बढ़ाने की दिशा में बनी सहमति और 18 महत्वपूर्ण फैसलों पर मुहर मानी जा रही है। दौरे के दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने यह भी बताया कि न्यूजीलैंड भारत में करीब ₹1.72 लाख करोड़ का निवेश करेगा। माना जा रहा है कि इससे दोनों देशों के आर्थिक रिश्तों को नई मजबूती मिलेगी और भारत में रोजगार व निवेश के नए अवसर भी बनेंगे। FTA पर बढ़ी रफ्तार, व्यापार को मिलेगा फायदा भारत और न्यूजीलैंड पिछले काफी समय से Free Trade Agreement (FTA) पर बातचीत कर रहे हैं। अब दोनों देशों ने इस प्रक्रिया को तेजी से आगे बढ़ाने पर सहमति जताई है। अगर यह समझौता अंतिम रूप लेता है, तो दोनों देशों के बीच व्यापार पहले से अधिक आसान हो जाएगा। कई उत्पादों पर आयात-निर्यात शुल्क कम होने की संभावना है, जिससे भारतीय उद्योग, कृषि उत्पाद और सेवा क्षेत्र को भी फायदा मिल सकता है। 18 बड़े फैसलों में किन क्षेत्रों पर रहा फोकस? प्रधानमंत्री मोदी और न्यूजीलैंड के नेतृत्व के बीच हुई बैठक में कई अहम क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर सहमति बनी। इनमें शामिल हैं— इन समझौतों का उद्देश्य केवल व्यापार बढ़ाना नहीं, बल्कि दोनों देशों के बीच दीर्घकालिक रणनीतिक साझेदारी को मजबूत करना भी है। ₹1.72 लाख करोड़ का Investment क्यों है खास? प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि न्यूजीलैंड भारत में लगभग ₹1.72 लाख करोड़ का निवेश करेगा। यह निवेश इंफ्रास्ट्रक्चर, आधुनिक तकनीक, ऊर्जा, कृषि और अन्य विकास परियोजनाओं में किया जा सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे विदेशी निवेश बढ़ेगा, नए उद्योगों को बढ़ावा मिलेगा और युवाओं के लिए रोजगार के अवसर भी पैदा होंगे। Auckland में भारतीय समुदाय को करेंगे संबोधित दौरे के दूसरे दिन प्रधानमंत्री मोदी न्यूजीलैंड के Auckland में भारतीय समुदाय के एक बड़े कार्यक्रम में शामिल होंगे। इस कार्यक्रम में करीब 40 हजार लोगों के पहुंचने की संभावना है। भारतीय समुदाय लंबे समय से इस कार्यक्रम का इंतजार कर रहा है। अपने संबोधन में प्रधानमंत्री मोदी भारत-न्यूजीलैंड संबंधों, प्रवासी भारतीयों की भूमिका और भविष्य की साझेदारी पर विस्तार से बात कर सकते हैं। भारत के लिए क्यों महत्वपूर्ण है यह दौरा? न्यूजीलैंड के साथ मजबूत होते रिश्ते भारत की आर्थिक और रणनीतिक नीति के लिहाज से महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं। इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने, व्यापार का दायरा विस्तार करने और विदेशी निवेश आकर्षित करने की दिशा में यह यात्रा एक अहम कदम मानी जा रही है। यदि आने वाले समय में India-New Zealand FTA पर अंतिम मुहर लगती है, तो दोनों देशों के बीच व्यापारिक गतिविधियां तेज होंगी और निवेश का दायरा भी बढ़ेगा। इससे भारतीय कंपनियों, किसानों, स्टार्टअप और सेवा क्षेत्र को नए अवसर मिल सकते हैं। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Monsoon

India Monsoon Update: बारिश से कई राज्यों में तबाही, UP हादसे के बाद Uttarakhand-Himachal में सड़कें ठप

देशभर में मानसून (Monsoon) अब राहत से ज्यादा मुसीबत बनता नजर आ रहा है। उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश और मिजोरम समेत कई राज्यों में लगातार हो रही भारी बारिश ने जनजीवन को बुरी तरह प्रभावित कर दिया है। कहीं तेज बहाव में वाहन बह रहे हैं तो कहीं भूस्खलन से सड़कें बंद हो गई हैं। पिछले तीन दिनों में बारिश से जुड़े अलग-अलग हादसों में कम से कम 15 लोगों की मौत हो चुकी है। कई इलाकों में बचाव अभियान लगातार जारी है, जबकि मौसम विभाग ने आने वाले दिनों में भी भारी बारिश की चेतावनी दी है। UP में उफनते पानी में बह गई कार उत्तर प्रदेश में तेज बारिश के बीच एक दर्दनाक हादसा सामने आया। उफनते नाले पर बने पुल को पार करते समय एक कार अचानक तेज बहाव की चपेट में आ गई और देखते ही देखते पानी में बह गई। घटना के बाद मौके पर मौजूद लोगों ने तुरंत पुलिस और राहत दल को सूचना दी। बचाव टीमों ने मौके पर पहुंचकर रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू किया। लगातार बारिश के कारण प्रदेश के कई जिलों में नदियों और नालों का जलस्तर तेजी से बढ़ रहा है। प्रशासन ने लोगों से जलभराव वाले क्षेत्रों और तेज बहाव वाले पुलों से दूर रहने की अपील की है। Uttarakhand और Himachal में बारिश बनी बड़ी चुनौती पहाड़ी राज्यों उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश में लगातार हो रही बारिश ने हालात बेहद कठिन बना दिए हैं। भूस्खलन और सड़क धंसने की घटनाओं के कारण दोनों राज्यों में कुल 438 सड़कें बंद हैं। कई गांवों का जिला मुख्यालयों से संपर्क टूट गया है और लोगों को जरूरी सामान पहुंचाने में भी परेशानी हो रही है। राज्य सरकारें युद्ध स्तर पर सड़कें खोलने का प्रयास कर रही हैं। जेसीबी मशीनों और राहत दलों की मदद से मलबा हटाया जा रहा है, लेकिन लगातार हो रही बारिश राहत कार्यों को प्रभावित कर रही है। Mizoram में चार दिनों से फंसे पर्यटक पूर्वोत्तर राज्य मिजोरम में भी मौसम ने मुश्किलें बढ़ा दी हैं। लगातार बारिश और भूस्खलन के चलते कई प्रमुख सड़कें बंद हो गई हैं। इसके कारण बड़ी संख्या में पर्यटक पिछले चार दिनों से अलग-अलग इलाकों में फंसे हुए हैं। स्थानीय प्रशासन ने राहत अभियान तेज कर दिया है। फंसे हुए लोगों तक भोजन, पीने का पानी और अन्य जरूरी सामान पहुंचाया जा रहा है, जबकि सुरक्षित रास्ते तैयार करने का काम भी जारी है। तीन दिन में 15 लोगों की मौत देश के विभिन्न राज्यों में बारिश, बाढ़ और भूस्खलन से जुड़े हादसों में पिछले तीन दिनों के दौरान कम से कम 15 लोगों की जान जा चुकी है। कई लोग घायल हुए हैं, जबकि कुछ अब भी लापता बताए जा रहे हैं। प्रशासन और आपदा राहत एजेंसियां लगातार प्रभावित इलाकों में खोज एवं बचाव अभियान चला रही हैं। IMD का अलर्ट, अगले कुछ दिन रहेंगे भारी भारतीय मौसम विभाग (IMD) ने उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश सहित कई राज्यों के लिए भारी से बहुत भारी बारिश का अलर्ट जारी किया है। विभाग के अनुसार कुछ इलाकों में अचानक बाढ़ (Flash Flood), भूस्खलन और जलभराव की स्थिति बन सकती है। मौसम विशेषज्ञों का कहना है कि लोगों को अनावश्यक यात्रा से बचना चाहिए और नदी-नालों के किनारे जाने से परहेज करना चाहिए। प्रशासन की ओर से जारी दिशा-निर्देशों का पालन करना इस समय सबसे सुरक्षित विकल्प है। राहत कार्य तेज, लोगों से सतर्क रहने की अपील NDRF, SDRF और स्थानीय प्रशासन की टीमें प्रभावित क्षेत्रों में लगातार राहत एवं बचाव कार्य कर रही हैं। बंद सड़कों को खोलने, फंसे लोगों को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाने और जरूरतमंद परिवारों को राहत सामग्री उपलब्ध कराने का काम जारी है। प्रशासन ने नागरिकों से अपील की है कि मौसम की ताजा जानकारी पर नजर रखें, अफवाहों से बचें और खराब मौसम के दौरान बिना जरूरी कारण यात्रा न करें। विशेषज्ञों का मानना है कि अगले कुछ दिनों तक सतर्कता ही सबसे बड़ा बचाव साबित होगी। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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PM Modi

India New Zealand FTA: PM Modi के दौरे से व्यापारिक रिश्तों को नई उड़ान, Auckland Speech होगा खास

PM Modi की विदेश यात्रा इस समय सुर्खियों में है। ऑस्ट्रेलिया दौरे के बाद पीएम मोदी अब न्यूजीलैंड पहुंच चुके हैं, जहां उनका जोर दोनों देशों के बीच India-New Zealand Relations को और मजबूत करने पर रहेगा। इस दौरे में सबसे अहम मुद्दा Free Trade Agreement (FTA) Deal है, जिसे लेकर दोनों देशों के बीच अंतिम चरण की बातचीत होने की उम्मीद है। पीएम मोदी के न्यूजीलैंड दौरे को आर्थिक, कूटनीतिक और प्रवासी भारतीयों से जुड़ाव के लिहाज से काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। प्रधानमंत्री ऑकलैंड में भारतीय समुदाय के एक बड़े कार्यक्रम को भी संबोधित करेंगे, जिसमें करीब 40 हजार भारतीयों के शामिल होने की संभावना है। FTA Deal से बढ़ेंगे व्यापार के नए अवसर भारत और न्यूजीलैंड के बीच प्रस्तावित FTA Agreement दोनों देशों के व्यापारिक रिश्तों को नई दिशा दे सकता है। इस समझौते का उद्देश्य व्यापार को आसान बनाना, निवेश को बढ़ावा देना और दोनों देशों के कारोबारियों के लिए नए अवसर तैयार करना है। FTA लागू होने के बाद भारत से न्यूजीलैंड जाने वाले कई उत्पादों और सेवाओं के लिए बाजार में पहुंच बेहतर हो सकती है। वहीं न्यूजीलैंड की कंपनियों के लिए भी भारत के बड़े बाजार में निवेश के नए रास्ते खुल सकते हैं। PM Modi Auckland Speech पर भारतीय समुदाय की नजर प्रधानमंत्री मोदी की विदेश यात्राओं में प्रवासी भारतीयों से मुलाकात हमेशा खास हिस्सा रही है। न्यूजीलैंड के ऑकलैंड में होने वाले कार्यक्रम में बड़ी संख्या में भारतीय मूल के लोग पीएम मोदी का स्वागत करेंगे। भारतीय समुदाय के साथ यह संवाद दोनों देशों के बीच लोगों के स्तर पर मजबूत रिश्तों को दिखाता है। विदेशों में बसे भारतीय भारत की संस्कृति, व्यापार और कूटनीति को आगे बढ़ाने में अहम भूमिका निभाते हैं। India-New Zealand Partnership में नई उम्मीदें पीएम मोदी के इस दौरे में व्यापार के अलावा शिक्षा, तकनीक, रक्षा सहयोग, पर्यटन और इंडो-पैसिफिक क्षेत्र से जुड़े मुद्दों पर भी चर्चा होने की उम्मीद है। भारत और न्यूजीलैंड पिछले कई वर्षों से अपने संबंधों को मजबूत करने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं। दोनों देश लोकतांत्रिक मूल्यों और आर्थिक सहयोग के आधार पर साझेदारी को विस्तार देने पर काम कर रहे हैं। ऑस्ट्रेलिया के बाद न्यूजीलैंड दौरे का क्या है महत्व? प्रधानमंत्री मोदी की ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड यात्रा भारत की वैश्विक कूटनीति के लिहाज से महत्वपूर्ण मानी जा रही है। हिंद-प्रशांत क्षेत्र में भारत अपनी भूमिका को मजबूत करने के साथ-साथ मित्र देशों के साथ आर्थिक साझेदारी बढ़ाने पर ध्यान दे रहा है। न्यूजीलैंड दौरे से दोनों देशों के रिश्तों में नई ऊर्जा आने की उम्मीद है। अब सभी की नजर FTA Deal के ऐलान और पीएम मोदी के Auckland Address पर बनी हुई है।
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Bihar

Bihar Government Action: Fake Degree वाले Teachers की बढ़ी मुश्किलें

Bihar में शिक्षक भर्ती से जुड़ा एक बड़ा मामला सामने आया है, जिसने शिक्षा विभाग से लेकर शिक्षक समुदाय तक हलचल बढ़ा दी है। फर्जी डिग्री और संदिग्ध प्रमाणपत्रों के सहारे सरकारी नौकरी हासिल करने वाले करीब 3000 शिक्षकों पर अब कार्रवाई की तलवार लटक रही है। शिक्षा विभाग ने ऐसे शिक्षकों के दस्तावेजों की जांच तेज कर दी है। अगर जांच में प्रमाणपत्र फर्जी पाए जाते हैं तो संबंधित शिक्षकों की नौकरी खत्म की जा सकती है। इतना ही नहीं, नौकरी के दौरान मिली Salary भी ब्याज सहित वापस लेने की तैयारी की जा रही है। Fake Degree Case में कैसे सामने आया मामला? बिहार में सरकारी शिक्षकों के प्रमाणपत्रों की जांच प्रक्रिया लंबे समय से चल रही है। इसी दौरान कई शिक्षकों के शैक्षणिक दस्तावेजों में गड़बड़ी सामने आई। कुछ डिग्रियों की मान्यता और सत्यता पर सवाल उठने के बाद विभाग ने विस्तृत जांच शुरू की। जांच में जिन शिक्षकों के दस्तावेज गलत या फर्जी पाए जाएंगे, उनके खिलाफ नियमों के अनुसार सख्त कार्रवाई की जाएगी। नौकरी जाने के साथ Salary Recovery का खतरा सरकार का मानना है कि फर्जी दस्तावेजों के आधार पर नौकरी पाना एक गंभीर मामला है। ऐसे मामलों में सिर्फ सेवा समाप्त करना ही नहीं, बल्कि सरकारी धन की वसूली भी की जा सकती है। विभाग की योजना के अनुसार, दोषी पाए जाने वाले शिक्षकों से नौकरी के दौरान प्राप्त वेतन को ब्याज के साथ वापस लेने की प्रक्रिया शुरू हो सकती है। योग्य उम्मीदवारों के हित में बड़ा कदम शिक्षा विभाग का कहना है कि सरकारी नौकरी में पारदर्शिता बनाए रखना जरूरी है। फर्जी प्रमाणपत्रों के जरिए नौकरी पाने वालों की वजह से योग्य अभ्यर्थियों के अधिकार प्रभावित होते हैं। इस कार्रवाई को शिक्षक भर्ती प्रक्रिया को साफ और भरोसेमंद बनाने की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है। जांच पूरी होने के बाद होगा अंतिम फैसला फिलहाल सभी संदिग्ध शिक्षकों के दस्तावेजों की जांच प्रक्रिया जारी है। अंतिम निर्णय जांच रिपोर्ट और नियमों के आधार पर लिया जाएगा। जिन शिक्षकों के प्रमाणपत्र सही पाए जाएंगे, उन्हें राहत मिल सकती है, लेकिन फर्जी दस्तावेज साबित होने पर कार्रवाई तय मानी जा रही है। बिहार में 3000 शिक्षकों पर होने वाली इस कार्रवाई ने शिक्षा विभाग में नई चर्चा शुरू कर दी है। अब सबकी नजर जांच के अंतिम परिणाम और सरकार के अगले आदेश पर बनी हुई है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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दवाओं

Health Update: Alcohol वाली दवाओं पर सरकार सख्त, 12% से ज्यादा Content पर बिना Prescription बिक्री बंद

दवाओं की बिक्री को लेकर सरकार ने नियमों में बड़ा बदलाव किया है। अब 12 प्रतिशत से ज्यादा Alcohol Content वाली दवाएं बिना डॉक्टर के Prescription के नहीं खरीदी जा सकेंगी। इस फैसले का सबसे ज्यादा असर Cough Syrup, Tonic और अन्य Liquid Medicines पर देखने को मिलेगा, जिनमें अल्कोहल की मात्रा मौजूद होती है। नए नियमों के बाद मेडिकल स्टोर संचालकों के लिए भी जिम्मेदारियां बढ़ गई हैं। अब उन्हें ऐसी दवाओं की बिक्री का पूरा रिकॉर्ड रखना होगा और जरूरत पड़ने पर जांच एजेंसियों को उपलब्ध कराना होगा। Cough Syrup और Tonic पर बढ़ेगी निगरानी कई कफ सिरप और टॉनिक में अल्कोहल का इस्तेमाल दवा को लंबे समय तक सुरक्षित रखने और उसकी गुणवत्ता बनाए रखने के लिए किया जाता है। हालांकि, इन दवाओं के गलत इस्तेमाल की आशंका को देखते हुए सरकार ने इनकी बिक्री पर निगरानी बढ़ाने का फैसला लिया है। अब मेडिकल दुकानदारों को यह सुनिश्चित करना होगा कि 12% से अधिक Alcohol वाली Medicines केवल वैध डॉक्टर की पर्ची के आधार पर ही बेची जाएं। Medical Stores को रखना होगा 3 साल का Record नए नियमों के तहत मेडिकल स्टोर संचालकों को अल्कोहल युक्त दवाओं की खरीद और बिक्री से जुड़ा रिकॉर्ड कम से कम 3 साल तक सुरक्षित रखना होगा। इस रिकॉर्ड में दवा की बिक्री, ग्राहक से जुड़ी जानकारी और Prescription से संबंधित दस्तावेज शामिल हो सकते हैं। जांच के दौरान अगर संबंधित विभाग रिकॉर्ड मांगता है तो दुकानदारों को इसे उपलब्ध कराना होगा। मरीजों के लिए क्या बदलेगा? आम लोगों के लिए राहत की बात यह है कि सभी दवाओं की खरीद पर नया नियम लागू नहीं होगा। यह नियम केवल उन्हीं दवाओं पर लागू होगा जिनमें अल्कोहल की मात्रा तय सीमा से ज्यादा है। अगर किसी मरीज को ऐसी दवा की जरूरत होगी तो उसे डॉक्टर की सलाह और Prescription लेना जरूरी हो सकता है। इससे यह सुनिश्चित होगा कि दवा का इस्तेमाल सही कारण और सही मात्रा में किया जाए। सरकार ने क्यों लिया यह फैसला? सरकार का उद्देश्य दवाओं के गलत इस्तेमाल को रोकना और Medicine Sale System को ज्यादा सुरक्षित बनाना है। खासतौर पर अल्कोहल वाली दवाओं को लेकर समय-समय पर उठने वाली चिंताओं को देखते हुए यह कदम उठाया गया है। स्वास्थ्य क्षेत्र से जुड़े विशेषज्ञों का मानना है कि दवाओं की बिक्री में सख्ती से मरीजों को सुरक्षित इलाज उपलब्ध कराने में मदद मिलेगी और बिना जरूरत दवाओं के इस्तेमाल पर रोक लग सकेगी। Pharmacy Sector पर भी पड़ेगा असर नए नियमों के बाद Pharmacy Sector में निगरानी और बढ़ जाएगी। मेडिकल स्टोर्स को अब हर बिक्री में नियमों का पालन करना होगा। बिना Prescription के ऐसी दवाएं बेचने पर दुकानदारों को कार्रवाई का सामना करना पड़ सकता है। कुल मिलाकर, 12% से ज्यादा Alcohol Content वाली Medicines को लेकर सरकार का यह नया नियम मरीजों की सुरक्षा और दवाओं के सही इस्तेमाल की दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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CM Yogi

UP Politics: हनुमानगढ़ी से Jama Masjid तक छिड़ी बहस, CM Yogi के बयान से गरमाई सियासत

उत्तर प्रदेश की सियासत में एक बार फिर धार्मिक मुद्दे को लेकर बयानबाजी तेज हो गई है। CM Yogi ने समाजवादी पार्टी (SP) पर निशाना साधते हुए हनुमानगढ़ी से जुड़े पुराने विवाद का जिक्र किया। योगी ने सवाल उठाया कि अगर किसी धार्मिक स्थल की मर्यादा का सवाल उठता है, तो क्या वही नियम हर जगह लागू किया जा सकता है? सीएम योगी ने कहा कि अयोध्या की हनुमानगढ़ी की सीढ़ियों पर नमाज पढ़ाने की कोशिश को लेकर पहले विवाद सामने आया था। उन्होंने इस घटना को लेकर सपा पर हमला बोला और कहा कि आस्था से जुड़े स्थानों की अपनी परंपराएं और सम्मान होता है, जिसका पालन किया जाना चाहिए। योगी का SP पर सीधा हमला, उठाया बड़ा सवाल मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अपने बयान में कहा कि कुछ राजनीतिक दल धार्मिक भावनाओं से जुड़े मामलों को अपने राजनीतिक हितों के लिए इस्तेमाल करते हैं। उन्होंने सपा पर आरोप लगाते हुए कहा कि पिछली सरकारों में तुष्टिकरण की राजनीति को बढ़ावा दिया गया। योगी ने सवाल किया कि अगर हनुमानगढ़ी जैसे धार्मिक स्थल पर ऐसी मांग की जा सकती है, तो क्या जामा मस्जिद जैसे दूसरे धार्मिक स्थल पर हनुमान चालीसा पढ़ने की अनुमति दी जाएगी? उनके इस बयान के बाद राजनीतिक गलियारों में चर्चा तेज हो गई है। Ayodhya Politics: धार्मिक मुद्दों पर फिर गर्म हुई सियासत अयोध्या हमेशा से उत्तर प्रदेश की राजनीति का अहम केंद्र रहा है। राम मंदिर निर्माण के बाद भी अयोध्या से जुड़े कई मुद्दे समय-समय पर राजनीतिक बहस का हिस्सा बनते रहे हैं। योगी आदित्यनाथ के इस बयान को भाजपा समर्थक जहां धार्मिक समानता और परंपराओं की बात बता रहे हैं, वहीं विपक्ष इसे राजनीतिक बयानबाजी करार दे रहा है। इस पूरे मामले ने एक बार फिर BJP और SP के बीच जुबानी जंग को तेज कर दिया है। CM Yogi ने कानून व्यवस्था और परंपरा पर दिया जोर मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि सरकार की जिम्मेदारी सभी धर्मों की आस्था और कानून व्यवस्था को बनाए रखना है। उन्होंने कहा कि किसी भी धार्मिक स्थल की गरिमा को बनाए रखना जरूरी है और समाज में शांति बनाए रखना सभी की जिम्मेदारी है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि उत्तर प्रदेश में धार्मिक और सांस्कृतिक मुद्दे हमेशा चुनावी राजनीति को प्रभावित करते रहे हैं। ऐसे में योगी का यह बयान आने वाले दिनों में सियासी बहस का बड़ा मुद्दा बन सकता है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Jagannath Rath Yatra

Jagannath Rath Yatra 2026: Tradition बनाम अलग आयोजन, ISKCON को लेकर पुरी राजा ने उठाई आवाज

भगवान जगन्नाथ की ऐतिहासिक Jagannath Puri Rath Yatra को लेकर विवाद बढ़ता नजर आ रहा है। पुरी के राजा ने ISKCON (International Society for Krishna Consciousness) की ओर से अलग समय पर रथयात्रा आयोजित किए जाने पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने इस मामले में राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री को पत्र लिखकर भगवान जगन्नाथ की सदियों पुरानी परंपराओं और धार्मिक मर्यादाओं की रक्षा करने की अपील की है। पुरी राजा का कहना है कि Jagannath Rath Yatra सिर्फ एक धार्मिक उत्सव नहीं, बल्कि करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था और भारत की प्राचीन सांस्कृतिक विरासत का प्रतीक है। इसलिए इससे जुड़े नियमों और परंपराओं का पालन बेहद जरूरी है। ISKCON की अलग रथयात्रा पर क्यों उठा विवाद? ISKCON दुनिया के कई देशों में भगवान कृष्ण और भगवान जगन्नाथ से जुड़े धार्मिक कार्यक्रम आयोजित करता है। संस्था की ओर से कई जगहों पर Rath Yatra का आयोजन भी किया जाता है। हालांकि, पुरी की मुख्य रथयात्रा की अपनी अलग धार्मिक मान्यता और परंपरागत व्यवस्था है। पुरी राजा ने अपनी चिंता जाहिर करते हुए कहा कि अलग-अलग समय पर रथयात्रा आयोजित होने से भगवान जगन्नाथ की परंपरा को लेकर भ्रम पैदा हो सकता है। उन्होंने केंद्र सरकार से अपील की है कि इस विषय पर ध्यान दिया जाए और सदियों से चली आ रही धार्मिक व्यवस्था को सुरक्षित रखा जाए। President और PM को लिखा पत्र, परंपरा बचाने की अपील पुरी राजा की ओर से लिखे गए पत्र में राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री से अनुरोध किया गया है कि भगवान जगन्नाथ से जुड़ी परंपराओं की गरिमा बनाए रखने के लिए उचित कदम उठाए जाएं। उन्होंने कहा कि पुरी की रथयात्रा केवल ओडिशा की पहचान नहीं है, बल्कि देश-विदेश में रहने वाले करोड़ों भक्तों की भावनाओं से जुड़ी हुई है। ऐसे में इससे जुड़े किसी भी बदलाव को संवेदनशीलता के साथ देखा जाना चाहिए। Jagannath Rath Yatra का है ऐतिहासिक महत्व पुरी की जगन्नाथ रथयात्रा भारत के सबसे प्रसिद्ध धार्मिक आयोजनों में से एक है। हर साल लाखों श्रद्धालु भगवान जगन्नाथ, भगवान बलभद्र और देवी सुभद्रा के दर्शन के लिए पुरी पहुंचते हैं। इस यात्रा में भगवान जगन्नाथ अपने भाई बलभद्र और बहन सुभद्रा के साथ रथ पर सवार होकर गुंडिचा मंदिर की ओर जाते हैं। सदियों से चली आ रही यह परंपरा आज भी उसी श्रद्धा और उत्साह के साथ निभाई जाती है। आस्था और Tradition के बीच बढ़ी बहस Jagannath Puri Rath Yatra से जुड़ा यह विवाद एक बार फिर इस बात को सामने लाता है कि धार्मिक परंपराओं और आधुनिक आयोजनों के बीच संतुलन कितना जरूरी है। जहां ISKCON दुनिया भर में भगवान जगन्नाथ और कृष्ण भक्ति का प्रचार करता है, वहीं पुरी की पारंपरिक व्यवस्था से जुड़े लोग मूल परंपराओं और धार्मिक नियमों को बनाए रखने की मांग कर रहे हैं। अब सभी की नजरें इस बात पर हैं कि सरकार और संबंधित पक्ष इस मामले में आगे क्या कदम उठाते हैं। फिलहाल, Jagannath Puri Rath Yatra Controversy ने धार्मिक और सामाजिक स्तर पर नई चर्चा शुरू कर दी है।
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Ayushi

Mother Murder Case: Ayushi का चौंकाने वाला रवैया, गिरफ्तारी के बाद Police को भी धमकाने का आरोप

किसी भी हत्या के मामले में गिरफ्तारी के बाद आरोपी के चेहरे पर घबराहट, तनाव या पछतावे के भाव देखने को मिलते हैं। लेकिन Ayushi Murder Case में पुलिस के सामने जो तस्वीर आई, उसने जांच अधिकारियों को भी हैरान कर दिया। मां की हत्या के आरोप में गिरफ्तार आयुषी ने पूछताछ के दौरान न केवल बेखौफ अंदाज दिखाया, बल्कि कई सवालों पर पुलिस को ही उल्टे जवाब देती रही। जांच से जुड़े सूत्रों के अनुसार, उसके व्यवहार में अपराधबोध या पछतावे के कोई स्पष्ट संकेत नजर नहीं आए। Police पूछताछ में दिखा अलग ही अंदाज जांच अधिकारियों के मुताबिक, गिरफ्तारी के बाद आयुषी से कई दौर की पूछताछ की गई। इस दौरान उससे घटना की पूरी जानकारी और हत्या के पीछे की वजह जानने की कोशिश की गई। हालांकि, पूछताछ के दौरान उसका रवैया सामान्य आरोपियों से बिल्कुल अलग दिखाई दिया। सूत्रों का दावा है कि कई सवालों के जवाब देने के बजाय वह बहस करने लगी। कुछ मौकों पर उसने पुलिस टीम से तीखे लहजे में बात की और कथित तौर पर धमकी भरे अंदाज में भी जवाब दिए। अधिकारियों का कहना है कि उसका यह व्यवहार जांच का एक अहम हिस्सा बन गया है। चेहरे पर नहीं दिखा पछतावा पुलिस सूत्रों के अनुसार, पूछताछ के दौरान आयुषी के चेहरे पर किसी तरह की घबराहट या अफसोस नहीं दिखा। यही वजह है कि जांच एजेंसियां अब उसके व्यवहार और मानसिक स्थिति के पहलुओं का भी अध्ययन कर रही हैं। हालांकि, इस संबंध में अभी तक कोई आधिकारिक मनोवैज्ञानिक रिपोर्ट सामने नहीं आई है। हर एंगल से हो रही है जांच पुलिस केवल आरोपी के बयान पर निर्भर नहीं है। मामले से जुड़े हर पहलू की गहराई से जांच की जा रही है। घटनास्थल से मिले साक्ष्य, फॉरेंसिक रिपोर्ट, मोबाइल फोन का डेटा, कॉल डिटेल रिकॉर्ड (CDR), डिजिटल सबूत और सीसीटीवी फुटेज की भी बारीकी से पड़ताल की जा रही है। अधिकारियों का कहना है कि जांच का उद्देश्य केवल आरोपी के बयान पर भरोसा करना नहीं, बल्कि हर तथ्य को वैज्ञानिक सबूतों के आधार पर परखना है। परिवार और परिचितों से भी पूछताछ जांच टीम परिवार के अन्य सदस्यों, रिश्तेदारों और आसपास के लोगों से भी लगातार जानकारी जुटा रही है। पुलिस यह समझने की कोशिश कर रही है कि घटना से पहले परिवार में क्या परिस्थितियां थीं और क्या किसी तरह का विवाद या तनाव पहले से मौजूद था। जल्द सामने आ सकती है पूरी सच्चाई पुलिस का कहना है कि जांच अभी जारी है और कई महत्वपूर्ण रिपोर्ट का इंतजार है। सभी फॉरेंसिक और तकनीकी साक्ष्य मिलने के बाद ही मामले की पूरी तस्वीर साफ हो पाएगी। इसके बाद अदालत में चार्जशीट दाखिल की जाएगी। फिलहाल Ayushi Murder Case ने लोगों को इसलिए भी चौंकाया है क्योंकि आरोपी का कथित व्यवहार सामान्य आपराधिक मामलों से अलग बताया जा रहा है। हालांकि, यह ध्यान रखना जरूरी है कि मामले की जांच अभी जारी है और अंतिम निष्कर्ष अदालत में पेश किए जाने वाले सबूतों और न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही सामने आएंगे। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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मेरठ हत्याकांड: मुस्कान और साहिल को फांसी की सजा, पति सौरभ की हत्या के मामले में कोर्ट का फैसला

मेरठ। उत्तर प्रदेश के मेरठ में सौरभ राजपूत हत्याकांड में अदालत ने उनकी पत्नी मुस्कान रस्तोगी और उसके प्रेमी साहिल को फांसी की सजा सुनाई है। दोनों पर सौरभ की हत्या करने का आरोप साबित होने के बाद यह फैसला सुनाया गया। सजा सुनाते हुए जज ने वारदात को नृशंस हत्याकांड बताया और कहा कि इसमें माफी स्वीकार नहीं होगी। वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से कोर्ट में पेश हुए मुस्कान और साहिल सजा सुनाए जाने से पहले जेल में बंद मुस्कान और साहिल को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए अदालत से जोड़ा गया। इस दौरान दोनों रोने लगे। जज ने मुस्कान से पूछा कि पति सौरभ राजपूत की हत्या के मामले में दोषी ठहराए जाने के बाद वह क्या सजा चाहती है। इस पर मुस्कान ने कहा, “मेरी बच्चियों का ख्याल रखा जाए।” इसके बाद वह खामोश हो गई। वहीं, साहिल से भी यही सवाल पूछा गया, लेकिन उसने कोई जवाब नहीं दिया। सजा के ऐलान के बाद रो पड़ीं सौरभ की मां अदालत के फैसले के बाद सौरभ राजपूत की मां भावुक हो गईं और रो पड़ीं। उन्होंने कहा कि उन्हें शांति से न्याय मिल गया। इस मामले में सजा का ऐलान सौरभ के परिवार के लिए लंबे इंतजार के बाद आया है। 3 मार्च 2025 को हुई थी सौरभ की हत्या सौरभ राजपूत की हत्या 3 मार्च 2025 को हुई थी। मामले में सामने आए विवरण के अनुसार, हत्या के बाद शव के पांच टुकड़े किए गए और उन्हें नीले ड्रम में भर दिया गया था। इस वारदात ने पूरे देश में व्यापक चर्चा बटोरी थी। अदालत ने मामले में मुस्कान रस्तोगी और साहिल को दोषी ठहराते हुए मृत्युदंड की सजा सुनाई है।

इंदौर में प्लॉट बेचने के नाम पर 7.80 लाख की ठगी का आरोप, ब्रोकर समेत दो पर FIR

शहर के एरोड्रम थाना क्षेत्र में प्लॉट बेचने के नाम पर धोखाधड़ी का मामला सामने आया है। आरोप है कि प्लॉट का सौदा करने के बाद ब्रोकर और प्लॉट मालिक ने फरियादी से 7 लाख 80 हजार रुपये ले लिए, लेकिन न तो प्लॉट की रजिस्ट्री कराई और न ही कब्जा दिया। शिकायत की जांच के बाद एरोड्रम थाना पुलिस ने नंदकिशोर मनावत और धर्मेंद्र ठाकुर के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर ली है। 9.30 लाख में तय हुआ था प्लॉट का सौदा पुलिस के मुताबिक, नंदबाग कॉलोनी निवासी विजय चौहान ने शिकायत में बताया कि उन्होंने नंदबाग में एक प्लॉट का सौदा 9 लाख 30 हजार रुपये में तय किया था। इस संबंध में एग्रीमेंट भी किया गया था। फरियादी ने आरोप लगाया कि उन्होंने नकद और ऑनलाइन माध्यम से कुल 7 लाख 80 हजार रुपये का भुगतान कर दिया, लेकिन इसके बावजूद उन्हें प्लॉट का कब्जा नहीं मिला और रजिस्ट्री भी नहीं कराई गई। ब्रोकर ने परिचित बताकर कराया था सौदा विजय चौहान के अनुसार, धर्मेंद्र ठाकुर ने उन्हें बताया था कि नंदकिशोर मनावत उसका परिचित है और वह अपना प्लॉट बेचना चाहता है। इसके बाद धर्मेंद्र ने सौदे में ब्रोकर की भूमिका निभाई और इसके बदले 10 हजार रुपये लिए। शिकायतकर्ता का आरोप है कि भुगतान के बाद जब उन्होंने रजिस्ट्री कराने और प्लॉट का कब्जा देने की मांग की, तो उन्हें लगातार टालमटोल का सामना करना पड़ा। 25 से ज्यादा केस होने की धमकी देने का आरोप फरियादी ने आरोप लगाया कि रजिस्ट्री और कब्जे के लिए दबाव बनाने पर धर्मेंद्र ठाकुर ने धमकी दी। शिकायत के मुताबिक, उसने कहा कि उसके खिलाफ 25 से ज्यादा मामले चल रहे हैं। साथ ही, उसके या नंदकिशोर मनावत के पास दोबारा आने पर अंजाम भुगतने की चेतावनी भी दी। 2.80 लाख रुपये लौटाए, 5 लाख बाकी होने का दावा विजय चौहान के मुताबिक, पुलिस में शिकायत करने की बात कहने के बाद नंदकिशोर मनावत ने 2 लाख 50 हजार रुपये नकद और 30 हजार रुपये ऑनलाइन वापस किए। हालांकि, फरियादी का आरोप है कि बाकी 5 लाख रुपये लौटाने से इनकार कर दिया गया। इसके बाद विजय चौहान ने पुलिस अधिकारियों से शिकायत की। जांच के बाद एरोड्रम थाना पुलिस ने नंदकिशोर मनावत और धर्मेंद्र ठाकुर के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर आगे की कार्रवाई शुरू कर दी है। मामले में लगाए गए आरोपों की पुष्टि न्यायिक प्रक्रिया के तहत होनी बाकी है।

SIR के खिलाफ प्रदर्शन करने वाले छात्रों से मिले राहुल गांधी, दिल्ली पुलिस पर मारपीट के आरोप

नई दिल्ली। SIR के खिलाफ दिल्ली में प्रदर्शन करने वाले छात्रों ने बुधवार को कांग्रेस नेता राहुल गांधी से मुलाकात की। इसके बाद राहुल गांधी और छात्रों ने संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस की, जिसमें प्रदर्शनकारियों ने दिल्ली पुलिस पर मारपीट और हिरासत के दौरान दुर्व्यवहार करने के आरोप लगाए। प्रेस कॉन्फ्रेंस में NSUI के छात्रों, कार्यकर्ताओं और कंटेंट क्रिएटर्स ने अपने साथ हुई कथित घटनाओं की जानकारी दी। प्रदर्शनकारियों ने पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए मामले में जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की। छात्रा ने कान पर चोट लगने का लगाया आरोप प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान एक छात्रा ने आरोप लगाया कि हिरासत के दौरान पुलिसकर्मी ने उसके प्राइवेट पार्ट पर लात मारी। वहीं, दिल्ली विश्वविद्यालय की छात्रा अदिरा ने दावा किया कि पुलिस की पिटाई के कारण उसके एक कान की सुनने की क्षमता चली गई। प्रदर्शनकारियों ने हिरासत के दौरान कथित ज्यादती और मारपीट से जुड़े अपने अनुभव साझा किए। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि की जानकारी सामने नहीं आई है। RSS और भाजपा से जुड़े लोगों के कहने पर हिरासत का आरोप एक अन्य प्रदर्शनकारी ने आरोप लगाया कि पुलिस RSS और भाजपा से जुड़े लोगों के कहने पर प्रदर्शनकारियों को हिरासत में ले रही थी। यह आरोप भी प्रदर्शनकारियों की ओर से लगाया गया है। राहुल गांधी ने सबूत सुरक्षित रखने को कहा राहुल गांधी ने छात्रों से घटनाओं से जुड़े वीडियो और अन्य सबूत सुरक्षित रखने को कहा। उन्होंने कहा कि इन सबूतों के आधार पर पुलिसकर्मियों से लेकर मुख्य चुनाव आयुक्त तक, जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की जाएगी। प्रदर्शनकारियों के आरोपों और पुलिस की कार्रवाई को लेकर आगे क्या कदम उठाए जाते हैं, इस पर नजर रहेगी।

बांग्लादेश टेस्ट सीरीज से बाहर हुए शाई होप और अल्जारी जोसेफ, केविन विकहम को पहली बार मिला मौका

क्रिकेट न्यूज। वेस्टइंडीज को बांग्लादेश के खिलाफ आगामी दो टेस्ट मैचों की सीरीज से पहले बड़ा झटका लगा है। टीम के बल्लेबाज शाई होप और तेज गेंदबाज अल्जारी जोसेफ सीरीज से बाहर हो गए हैं। क्रिकेट वेस्टइंडीज (CWI) ने 23 वर्षीय टॉप ऑर्डर बल्लेबाज केविन विकहम को पहली बार टेस्ट टीम में शामिल किया है। ऑलराउंडर कीमो पॉल को भी टीम में जगह मिली है। CWI के मुताबिक, मेडिकल जांच और विशेषज्ञों की सलाह के बाद अल्जारी जोसेफ को सीरीज से हटाने का फैसला लिया गया। बोर्ड उनके कार्यभार को नियंत्रित कर चोट के जोखिम को कम करना चाहता है। वहीं, तीनों फॉर्मेट में लगातार खेलने के बाद शाई होप को आराम दिया गया है। चोट के खतरे को देखते हुए जोसेफ को आराम क्रिकेट वेस्टइंडीज ने बताया कि अल्जारी जोसेफ को टीम से बाहर रखने का फैसला उनकी सहमति से लिया गया है। बोर्ड के अनुसार, टेस्ट क्रिकेट में तेज गेंदबाजों को लंबे स्पेल में लगातार गेंदबाजी करनी पड़ती है। इससे छोटे फॉर्मेट की तुलना में कार्यभार और चोट का जोखिम बढ़ सकता है। इसी को ध्यान में रखते हुए जोसेफ के वर्कलोड को कम करने का फैसला किया गया है, ताकि उनके स्वास्थ्य और फिटनेस का ध्यान रखा जा सके। शाई होप को भी दिया गया आराम CWI ने कहा कि शाई होप तीनों फॉर्मेट में लगातार खेल रहे थे। ऐसे में उनके कार्यभार और स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए उन्हें टेस्ट सीरीज से आराम दिया गया है। बोर्ड का यह फैसला फरवरी 2027 में होने वाले वनडे वर्ल्ड कप क्वालिफायर्स को ध्यान में रखकर भी लिया गया है। टीम प्रबंधन चाहता है कि खिलाड़ी आगामी महत्वपूर्ण मुकाबलों के लिए फिट रहें। केविन विकहम को पहली बार टेस्ट टीम में मौका शाई होप की गैरमौजूदगी में 23 वर्षीय टॉप ऑर्डर बल्लेबाज केविन विकहम को पहली बार टेस्ट टीम में शामिल किया गया है। इसके अलावा ऑलराउंडर कीमो पॉल को भी टीम में जगह मिली है। अब देखना होगा कि बांग्लादेश की घरेलू परिस्थितियों में वेस्टइंडीज की टीम नए संयोजन के साथ कैसा प्रदर्शन करती है। कोच डैरेन सैमी ने सीरीज जीत को बताया अहम वेस्टइंडीज के मुख्य कोच डैरेन सैमी ने कहा कि वर्ल्ड टेस्ट चैंपियनशिप के मौजूदा चक्र की शुरुआत में टीम ने कुछ लक्ष्य तय किए थे। इनमें टेस्ट रैंकिंग के ऊपरी आधे हिस्से में जगह बनाना भी शामिल है। उन्होंने कहा कि बांग्लादेश के खिलाफ सीरीज जीतने से टीम अपने लक्ष्य के करीब पहुंच सकती है। सैमी के मुताबिक, बांग्लादेश को उसकी घरेलू परिस्थितियों में हराना चुनौतीपूर्ण होगा, लेकिन टीम इसके लिए तैयार है। 28 अक्टूबर से शुरू होगा पहला टेस्ट बांग्लादेश और वेस्टइंडीज के बीच दो टेस्ट मैचों की सीरीज खेली जाएगी। पहला टेस्ट 28 अक्टूबर से ढाका में शुरू होगा, जबकि दूसरा टेस्ट 5 नवंबर से सिलहट में खेला जाएगा।

IMF ने बढ़ाया भारत की GDP ग्रोथ का अनुमान, 2026 और 2027 में 7% विकास दर रहने की उम्मीद

नई दिल्ली। अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) ने साल 2026 के लिए भारत की आर्थिक विकास दर का अनुमान 6.4% से बढ़ाकर 7% कर दिया है। वैश्विक तनाव, आर्थिक सुस्ती और कच्चे तेल की ऊंची कीमतों के बावजूद भारतीय अर्थव्यवस्था की मजबूती ने अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं का ध्यान खींचा है। मजबूत घरेलू मांग और सर्विसेज सेक्टर के बेहतर प्रदर्शन को भारत की तेज विकास दर की प्रमुख वजह माना गया है। IMF ने अक्टूबर 2026 की अपनी वर्ल्ड इकोनॉमिक आउटलुक रिपोर्ट में भारत की विकास संभावनाओं को सकारात्मक बताया है। रिपोर्ट के अनुसार, ऊर्जा आयात पर निर्भर कई उभरती अर्थव्यवस्थाएं जहां दबाव का सामना कर रही हैं, वहीं भारत की आर्थिक गतिविधियों में मजबूती बनी हुई है। 2027 में भी 7% ग्रोथ का अनुमान IMF ने 2026 के लिए भारत की विकास दर के अनुमान में जुलाई के मुकाबले 0.6 प्रतिशत अंक और अप्रैल के मुकाबले 0.5 प्रतिशत अंक की बढ़ोतरी की है। वहीं, 2027 के लिए भी विकास दर का अनुमान बढ़ाकर 7% कर दिया गया है। दिए गए आंकड़ों के मुताबिक, 2027 का अनुमान जुलाई के मुकाबले 0.3 प्रतिशत अंक और अप्रैल के मुकाबले 0.5 प्रतिशत अंक अधिक है। इससे संकेत मिलता है कि वैश्विक आर्थिक चुनौतियों के बीच भी भारत में विकास की संभावनाओं को लेकर उम्मीद बनी हुई है। IMF से पहले विश्व बैंक और आर्थिक सहयोग एवं विकास संगठन (OECD) जैसी अंतरराष्ट्रीय संस्थाएं भी भारत की विकास दर के अनुमान में बढ़ोतरी कर चुकी हैं। चीन की सुस्ती के बीच भारत पर नजर रिपोर्ट के मुताबिक, एशिया की अर्थव्यवस्थाओं में मजबूती देखने को मिल रही है। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) से जुड़ी गतिविधियों में तेजी ने भी वैश्विक आर्थिक परिदृश्य को प्रभावित किया है। भारत और चीन एशिया की आर्थिक गतिविधियों में अहम भूमिका निभा रहे हैं, हालांकि दोनों देशों की विकास संभावनाओं में अंतर दिखाई दे रहा है। IMF के अनुमान के अनुसार, चीन की विकास दर 2026 में 4.5% और 2027 में 4% रह सकती है। वैश्विक तनाव और ऊर्जा की ऊंची कीमतों को चीन की आर्थिक वृद्धि के सामने चुनौतियों में शामिल किया गया है। दुनिया की आर्थिक विकास दर पर दबाव IMF के मुताबिक, 2028 से 2031 के बीच वैश्विक अर्थव्यवस्था औसतन 3.2% की दर से बढ़ सकती है। यह 2000 से 2019 के बीच महामारी से पहले दर्ज औसत 3.7% की विकास दर से कम है। रिपोर्ट में वैश्विक तनाव, ऊर्जा बाजार में अनिश्चितता और ऊर्जा आयात पर निर्भर उभरती अर्थव्यवस्थाओं पर पड़ने वाले दबाव को आर्थिक विकास के लिए चुनौती बताया गया है। ऐसे माहौल में भारत की अनुमानित विकास दर अपेक्षाकृत मजबूत दिखाई देती है। मजबूत घरेलू मांग और जनसांख्यिकी से मिल रहा सहारा भारत की आर्थिक मजबूती के पीछे बढ़ता घरेलू बाजार, मजबूत मांग, अनुकूल जनसांख्यिकी और सुधारों को अहम कारक माना गया है। सर्विसेज सेक्टर का बेहतर प्रदर्शन भी विकास दर को सहारा दे रहा है। हालांकि, बेहतर अनुमान के बावजूद चुनौतियां खत्म नहीं हुई हैं। कच्चे तेल की ऊंची कीमतें भारत के आयात बिल और महंगाई पर दबाव डाल सकती हैं। इसके अलावा, अंतरराष्ट्रीय तनाव और वैश्विक मांग में कमजोरी का असर भारतीय अर्थव्यवस्था पर भी पड़ सकता है।

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