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West Bengal Election 2026, Left vote share Bengal, CPI(M) seats 2026, Bengal election analysis, Left collapse Bengal, TMC vs BJP vs Left data
Breaking Analysis: 34 साल की सत्ता से 1 सीट तक – बंगाल में Left का Collapse (2021 vs 2026 Full Data Report) West Bengal Election 2021 vs 2026 में Left (CPI(M)) का प्रदर्शन क्यों गिरा? जानें सीट, वोट शेयर, सीट-वाइज पैटर्न और पूरा डेटा एनालिसिस। एक समय था जब Communist Party of India (Marxist) और उसका Left Front, West Bengal की राजनीति पर 34 साल तक राज करता था। लेकिन 2021 और फिर 2026 के चुनावों ने एक ऐसी तस्वीर पेश की, जो सिर्फ हार नहीं… बल्कि राजनीतिक अस्तित्व के संकट को दिखाती है। 2021 vs 2026 – Key Data Comparison 🗳️ सीट और वोट शेयर Year Seats Won Vote Share Position 2021 0 ~4.7% 3rd/4th 2026 1 ~4.45% 3rd/4th Seat Comparison 2021 → ░░░░░░░░ (0)2026 → █░░░░░░░ (1)5 साल में सुधार नहीं… सिर्फ “symbolic survivalVote Share Trend2021 → ████░░ (~4.7%)2026 → ███░░░ (~4.45%)वोट शेयर stagnant ही नहीं… थोड़ा और गिराGround Level Seat-wise Patternकुल 294 सीटों का pattern:🟢 ~250+ सीट → सीधा मुकाबला TMC vs BJP🔴 Left → तीसरे या चौथे नंबर पर Rare cases में:Left No.2 भी नहीं बन पाई2026 में सिर्फ 1 सीट जीतStrongholds भी कमजोर पड़ेकुछ सीटें जहां Left का vote share relatively ज्यादा था:Singur → ~16–18%Jadavpur → ~15–17%Ballygunge → ~14–16%Durgapur/Asansol belt → ~10–12% लेकिन यहां भी:No.2 नहीं… mostly No.3Political Shift – TMC vs BJP Era👉 आज बंगाल की राजनीति का equation:🟠 BJP → No.1🟢 TMC → No.2🔴 Left → Out of main contestइसका मतलब:Bipolar politics ने Left को squeeze कर दिया Collapse के बड़े कारण (Deep Analysis) 1. Leadership Vacuum 2. Vote Transfer Failure 3. Youth Disconnect 4. BJP का Rise
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Mamta

Bengal Election 2026 में बदला खेल, Muslim बहुल सीटों पर भी BJP की बढ़त

West Bengal Election 2026 में Muslim बहुल सीटों पर भी बदलते रुझान, BJP की बढ़त से Mamata Banerjee को कड़ी चुनौती। डिजिटल डेस्क। West Bengal विधानसभा चुनाव 2026 की मतगणना ने सियासी तस्वीर बदल दी। शुरुआती रुझानों में BJP ने 191 सीटों पर बढ़त बनाई। मुकाबला सीधा Mamata Banerjee की TMC और BJP के बीच दिख रहा है। इस बार सबसे बड़ा बदलाव उन सीटों पर दिखा, जिन्हें लंबे समय से Muslim बहुल माना जाता रहा है। इनमें Murshidabad, Malda, Uttar Dinajpur, Basirhat, Diamond Harbour, Metiabruz, Bhangar, Jangipur जैसी सीटें शामिल हैं। इन इलाकों में अब तक TMC का मजबूत प्रभाव माना जाता रहा है। शुरुआती रुझानों में इन क्षेत्रों की कई सीटों पर BJP ने कड़ी टक्कर दी। कुछ जगहों पर बढ़त भी दर्ज की। इससे चुनावी गणित बदल गया। विश्लेषकों के अनुसार, इस बार Muslim वोट बैंक पूरी तरह एक तरफ नहीं गया। कई सीटों पर वोटिंग पैटर्न बदला हुआ नजर आया। इसका सीधा असर रिजल्ट ट्रेंड पर पड़ा। करीब 15 साल से सत्ता में रही TMC के सामने एंटी-इनकंबेंसी भी एक बड़ा कारण बनी। BJP ने स्थानीय मुद्दों और नए वोटर्स पर फोकस किया। मतगणना के दौरान Mamata Banerjee ने अपने कार्यकर्ताओं से धैर्य रखने को कहा। उन्होंने दावा किया कि अंतिम नतीजे उनके पक्ष में आएंगे। राज्य की 294 में से 293 सीटों पर मतगणना जारी है। एक सीट पर पुनर्मतदान के कारण नतीजा बाद में आएगा। ग्राउंड लेवल पर देखा जाए तो इस बार Bengal की राजनीति में बड़ा बदलाव संभव दिख रहा है। Muslim बहुल सीटों पर बदलते रुझानों ने मुकाबले को और ज्यादा दिलचस्प बना दिया है। अब नजर अंतिम नतीजों पर है। यही तय करेगा कि राज्य में सत्ता परिवर्तन होगा या TMC एक बार फिर वापसी करेगी।
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Raghav Chadha news

AAP Crisis: “आप” की झाड़ू क्यों बिखरी? | केजरीवाल की राजनीति पर बड़ा सवाल

संपादकीय – निखिल सिद्धभट्टी भारतीय घरों में झाड़ू सिर्फ सफाई का साधन नहीं, एक प्रतीक भी है—संगठन का, संतुलन का और टिकाऊपन का। कोई भी गृहिणी आपको बताएगी कि अच्छी झाड़ू वही होती है जिसकी हर एक तिनकी मजबूती से एक-दूसरे से जुड़ी हो और बीच में एक मजबूत आधार हो। लेकिन अगर वही झाड़ू सिर्फ दिखावे के लिए किसी चमकदार पाइप में कसकर बंद कर दी जाए, तो वह ज़्यादा दिन नहीं चलती। यही रूपक आज आम आदमी पार्टी (AAP) की स्थिति पर सटीक बैठता है। AAP की स्थापना भ्रष्टाचार के खिलाफ एक जनांदोलन के रूप में हुई थी। इसमें समाज के वे लोग जुड़े थे जो पारंपरिक राजनीति से दूर रहकर देश को एक नई दिशा देना चाहते थे—शांति भूषण, योगेंद्र यादव, आशुतोष, कुमार विश्वास और आगे चलकर राघव चड्ढा जैसे नाम इस विचारधारा के स्तंभ बने। यह वह जमात थी जो सिर्फ सत्ता नहीं, बल्कि व्यवस्था परिवर्तन की बात करती थी। लेकिन समय के साथ यह झाड़ू बिखरती चली गई। सवाल उठता है—क्या यह बिखराव सिर्फ “ऑपरेशन लोटस” जैसी राजनीतिक रणनीतियों का परिणाम है? या इसके पीछे कुछ और गहरी वजहें हैं? निस्संदेह, भारतीय राजनीति में विपक्षी दलों को तोड़ने के आरोप नई बात नहीं हैं। “ऑपरेशन लोटस” का नाम भी इसी संदर्भ में बार-बार सामने आता है। लेकिन अगर हम ईमानदारी से विश्लेषण करें, तो यह मानना मुश्किल है कि AAP से जुड़े इतने शिक्षित, वैचारिक और स्वतंत्र सोच वाले लोग सिर्फ बाहरी दबाव में पार्टी छोड़ते चले गए। असली कारण कहीं अधिक आंतरिक दिखाई देता है। AAP के भीतर समय के साथ एक “वन मैन शो” की छवि उभरती गई। अरविंद केजरीवाल का नेतृत्व शुरुआत में आंदोलनकारी ऊर्जा से भरा हुआ था, लेकिन धीरे-धीरे उसी नेतृत्व में केंद्रीकरण और कथित “सिंडिकेट संस्कृति” की झलक दिखने लगी। निर्णय लेने की प्रक्रिया सीमित होती गई, असहमति के लिए जगह सिकुड़ती गई, और नतीजा यह हुआ कि एक-एक कर पार्टी के संस्थापक चेहरे किनारे होते चले गए। विडंबना यह भी है कि जो पार्टी भ्रष्टाचार के खिलाफ खड़ी हुई थी, उसके कई प्रमुख नेता खुद भ्रष्टाचार के आरोपों में घिरकर जेल तक पहुंच गए। इससे न केवल पार्टी की नैतिक साख को झटका लगा, बल्कि उसके मूल विचार को भी कमजोर किया। राघव चड्ढा जैसे युवा और प्रभावशाली नेता का लंबे समय तक पार्टी की सक्रिय गतिविधियों से दूरी बनाना भी एक संकेत था—एक ऐसा संकेत जिसे शायद समय रहते समझा नहीं गया। आज भी पार्टी के भीतर ऐसे कई चेहरे हैं जो खुलकर सामने नहीं आ रहे, लेकिन “घुटन” महसूस कर रहे हैं। अब सवाल यह नहीं है कि दोष किस पर डाला जाए—BJP, मोदी या अमित शाह पर। सवाल यह है कि क्या AAP अपने भीतर झांकने को तैयार है? अरविंद केजरीवाल के सामने आज सबसे बड़ी चुनौती आत्ममंथन की है। उन्हें यह समझना होगा कि AAP कोई पारंपरिक पार्टी नहीं थी, बल्कि एक विचार था—और विचार को आदेशों से नहीं, संवाद से चलाया जाता है। उन्हें अपने पुराने और नए साथियों के साथ बैठकर एक नया रास्ता तैयार करना होगा, न कि “सुपर CM” की छवि में सिमट जाना होगा। अगर समय रहते यह झाड़ू फिर से नहीं गूंथी गई, तो वह दिन दूर नहीं जब इस झाड़ू में सिर्फ एक ही तिनका बचेगा—और तब सफाई नहीं, सिर्फ प्रतीक रह जाएगा। अब वक्त है—हर तिनके को फिर से जोड़ने का। वरना इतिहास गवाह है, बिखरी हुई झाड़ू न घर साफ कर पाती है, न राजनीति।
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Breaking: बिहार में ‘घर वापसी’ की गूंज, रफीक मियां के परिवार ने अपनाया सनातन धर्म

Bihar East Champaran ghar wapsi case: Rafiq Miyan family adopts Sanatan Dharma. Know full story, background and ground reality analysis. हमने अपनी जड़ें वापस पाईं” – पूर्वी चंपारण से सामने आई बड़ी खबर बिहार के पूर्वी चंपारण जिले से एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसने सामाजिक और धार्मिक बहस को फिर तेज कर दिया है।यहां एक मुस्लिम परिवार के 6 सदस्यों ने सनातन धर्म अपनाने का फैसला किया, और इसे अपनी “जड़ों में वापसी” बताया। क्या है पूरा मामला? यह घटना तुरकौलिया प्रखंड के महनवा गांव की बताई जा रही है, जहां रहने वाले रफीक मियां और उनके परिवार ने सामूहिक रूप से धर्म परिवर्तन किया। परिवार का कहना है: उनके पूर्वज मूल रूप से हिंदू थे पीढ़ियों पहले धर्म बदला गया थाअब उन्होंने “अपनी जड़ों में लौटने” का फैसला लियाउनके मुताबिक, यह फैसला पूरी तरह स्वेच्छा से लिया गया, इसमें किसी तरह का दबाव या लालच नहीं था। कैसे हुई ‘घर वापसी’? परिवार के सदस्यों ने कहा कि अब वे सनातन परंपराओं के अनुसार जीवन जीना चाहते हैं। देश हरपल Analysis (सबसे अहम पहलू) यह घटना सिर्फ एक परिवार का फैसला नहीं… बल्कि समाज में चल रही पहचान और आस्था की बहस को भी दिखाती हैकुछ बड़े सवाल: पूर्वी चंपारण का यह मामला साफ करता है कि भारत में धर्म और पहचान का मुद्दा आज भी बेहद संवेदनशील है और ऐसे घटनाक्रम सिर्फ खबर नहीं… बल्कि समाज की बदलती सोच का संकेत भी होते हैं। 👉 ““लव जिहाद और धर्म परिवर्तन: देश में क्या कहता है कानून?” –https://deshharpal.com/love-jihad-debate-nashik-bhopal-cases-facts-law-india/
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Love Jihad Debate: नासिक से भोपाल तक बढ़ते केस, सच्चाई क्या है?

संपादकीय भारत में “लव जिहाद” बहस तेज—नासिक, भोपाल समेत कई शहरों में सामने आए मामलों का विश्लेषण। क्या कहते हैं कानून, आंकड़े और विशेषज्ञ? पढ़ें पूरा संपादकीय। भारत में पिछले कुछ वर्षों में “लव जिहाद” को लेकर बहस लगातार तेज होती जा रही है। नासिक, परतवाड़ा, अकोला और भोपाल जैसे शहरों से सामने आए मामलों ने इस मुद्दे को फिर से चर्चा के केंद्र में ला दिया है। सवाल यह है कि क्या ये घटनाएं अलग-अलग आपराधिक मामले हैं, या इसके पीछे कोई बड़ा पैटर्न है? क्या कहते हैं कानून और सरकार? सबसे पहले यह समझना जरूरी है कि “लव जिहाद” शब्द भारतीय कानून में परिभाषित नहीं है। केंद्र सरकार ने संसद में कई बार स्पष्ट किया है कि इस नाम से कोई अलग अपराध श्रेणी नहीं है। हालांकि, कई राज्यों ने जबरन या धोखे से धर्म परिवर्तन को रोकने के लिए कानून बनाए हैं: इन कानूनों के लागू होने के बाद दर्ज मामलों में कुछ वृद्धि देखी गई है, लेकिन विशेषज्ञ मानते हैं कि यह बढ़ती जागरूकता और रिपोर्टिंग का असर भी हो सकता है। आंकड़े क्या बताते हैं? यानी, आंकड़े मिश्रित तस्वीर दिखाते हैं—कुछ मामले वास्तविक अपराध के हैं, तो कुछ व्यक्तिगत विवाद या सहमति वाले रिश्तों के। हाईली एजुकेटेड लड़कियां क्यों बनती हैं टारगेट? यह सबसे बड़ा सवाल है। आम धारणा के विपरीत, शिक्षा हमेशा भावनात्मक निर्णयों को नहीं रोकती। विशेषज्ञों के अनुसार: ये सभी कारण किसी भी व्यक्ति को प्रभावित कर सकते हैं—चाहे वह कितना भी शिक्षित क्यों न हो। क्या हर इंटरफेथ शादी संदिग्ध है? बिल्कुल नहीं। भारत में हजारों अंतर-धार्मिक शादियां हर साल होती हैं, जिनमें से अधिकांश पूरी तरह सहमति और वैध प्रक्रिया के तहत होती हैं। समस्या तब शुरू होती है जब: यहीं पर कानून हस्तक्षेप करता है। क्या यह केवल एक समुदाय का मुद्दा है? इस तरह की घटनाओं को किसी एक धर्म से जोड़ना वास्तविकता को सरल बना देना होगा पर यह भी उतना ही बड़ा सच हैं की अधिकांश घटनाओ में मुस्लिम युवा इसमें संलिप्त पाये गए हैं । दुनिया भर में “रोमांस स्कैम”, “ऑनलाइन ग्रूमिंग” और “इमोशनल एक्सप्लॉइटेशन” के मामले बढ़ रहे हैं—और यह हर समाज में मौजूद समस्या है। समाज और संगठनों की भूमिका “लव जिहाद” की बहस भावनात्मक जरूर है, लेकिन इसका समाधान केवल भावनाओं से नहीं निकलेगा। जरूरत है: हर अंतर-धार्मिक रिश्ते को शक की नजर से देखना गलत है, लेकिन वास्तविक अपराधों को नजरअंदाज करना भी उतना ही खतरनाक हैl
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Virat Kohli और Anushka Sharma पहुंचे संत प्रेमानंद के सत्संग में, अक्षय तृतीया पर लिया आशीर्वाद

Virat Kohli और Anushka Sharma पहुंचे संत प्रेमानंद के सत्संग में, अक्षय तृतीया पर लिया आशीर्वाद

भारतीय क्रिकेटर Virat Kohli और उनकी पत्नी Anushka Sharma पहुंचे संत प्रेमानंद के सत्संग में, अक्षय तृतीया पर लिया आशीर्वाद एक बार फिर आध्यात्मिक मार्ग पर नजर आए। दोनों अक्षय तृतीया के शुभ अवसर पर संत प्रेमानंद महाराज के सत्संग में पहुंचे और उनका आशीर्वाद लिया। यह दोनों की संत प्रेमानंद से छठी मुलाकात बताई जा रही है, जिससे साफ है कि वे लगातार उनके विचारों और सत्संग से जुड़े हुए हैं। सत्संग में शामिल हुए विराट-अनुष्का अक्षय तृतीया के मौके पर आयोजित इस सत्संग में दोनों ने शांत वातावरण में संत के प्रवचन सुने। वहां मौजूद श्रद्धालुओं के बीच उनकी उपस्थिति चर्चा का विषय बनी रही। लगातार बढ़ रहा आध्यात्मिक जुड़ाव विराट और अनुष्का पहले भी कई बार संत प्रेमानंद महाराज से मिल चुके हैं। दोनों का यह बार-बार सत्संग में आना उनके आध्यात्मिक विश्वास और शांति की ओर झुकाव को दिखाता है। फैंस में चर्चा सोशल मीडिया पर उनकी इस मुलाकात की तस्वीरें और वीडियो तेजी से वायरल हो रही हैं। फैंस इसे “सरल और शांत जीवन की ओर कदम” के रूप में देख रहे हैं।
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Kanpur में दर्दनाक घटना: पिता ने जुड़वां बेटियों की ली जान, खुद ही पुलिस को किया फोन

Kanpur में दर्दनाक घटना: पिता ने जुड़वां बेटियों की ली जान, खुद ही पुलिस को किया फोन

उत्तर प्रदेश के Kanpur से एक बेहद दुखद और चौंकाने वाली घटना सामने आई है। यहां एक पिता पर अपनी ही जुड़वां बेटियों की हत्या करने का आरोप है। बताया जा रहा है कि घटना के बाद आरोपी पिता वहीं बैठा रहा और उसने खुद ही पुलिस को फोन कर इसकी जानकारी दी। जब पुलिस मौके पर पहुंची, तो घर का माहौल बेहद गमगीन था। इस दौरान आरोपी की पत्नी का दर्द भी सामने आया। उसने गुस्से और सदमे में पुलिस अधिकारियों से कहा कि आरोपी को तुरंत सजा दी जाए। परिवार पर अचानक आए इस दुख ने सभी को हिला कर रख दिया है। पुलिस ने मौके पर पहुंचकर दोनों बच्चियों के शव को कब्जे में लिया और जांच शुरू कर दी है। आरोपी पिता को हिरासत में लेकर पूछताछ की जा रही है, ताकि घटना के पीछे की वजह साफ हो सके। स्थानीय लोगों के अनुसार, यह घटना पूरे इलाके में चर्चा का विषय बन गई है और हर कोई इस दर्दनाक मामले से स्तब्ध है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि मामले की गंभीरता से जांच की जा रही है और सच्चाई सामने आने के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी।
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चुनावी रैली के बीच PM Modi का ‘बंगाली अंदाज’, लोगों संग चखा झालमुड़ी का स्वाद

चुनावी रैली के बीच PM Modi का ‘बंगाली अंदाज’, लोगों संग चखा झालमुड़ी का स्वाद

चुनावी माहौल के बीच PM Modi का एक अलग और दिलचस्प अंदाज देखने को मिला। रैली के दौरान उन्होंने न सिर्फ लोगों को संबोधित किया, बल्कि स्थानीय संस्कृति से जुड़ते हुए बंगाली स्टाइल में झालमुड़ी का स्वाद भी लिया। रैली के बीच जब पीएम मोदी लोगों के बीच पहुंचे, तो उन्होंने आम लोगों की तरह सड़क किनारे मिलने वाली मशहूर स्नैक ‘झालमुड़ी’ का आनंद लिया। यह पल वहां मौजूद लोगों के लिए खास बन गया। कई लोगों ने इस दौरान तस्वीरें और वीडियो भी बनाए, जो अब सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहे हैं। पीएम मोदी का यह अंदाज लोगों को काफी पसंद आ रहा है। आम जनता से इस तरह जुड़ना और उनकी संस्कृति को अपनाना, लोगों के बीच एक अलग संदेश देता है। यह दिखाता है कि नेता सिर्फ मंच तक सीमित नहीं हैं, बल्कि लोगों के बीच जाकर उनके साथ पल भी साझा करते हैं। स्थानीय लोगों ने भी इस मौके को खास बताया। उनका कहना है कि प्रधानमंत्री का इस तरह उनके बीच आना और स्थानीय खाने का स्वाद लेना उनके लिए गर्व की बात है। चुनावी रैलियों के बीच इस तरह के छोटे-छोटे पल माहौल को हल्का और यादगार बना देते हैं। पीएम मोदी की यह तस्वीरें अब इंटरनेट पर चर्चा का विषय बनी हुई हैं और लोग इसे खूब शेयर कर रहे हैं।
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Tamil Nadu में पटाखा फैक्ट्री में भयानक धमाका, 16 लोगों की मौत, कई घायल

Tamil Nadu में पटाखा फैक्ट्री में भयानक धमाका, 16 लोगों की मौत, कई घायल

Tamil Nadu के विरुधुनगर जिले में एक पटाखा फैक्ट्री में हुए जोरदार धमाके ने पूरे इलाके को दहला दिया। इस दर्दनाक हादसे में अब तक 16 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 6 लोग गंभीर रूप से घायल बताए जा रहे हैं। धमाका इतना तेज था कि फैक्ट्री पूरी तरह से तबाह हो गई और आसपास की इमारतों में भी दरारें आ गईं। हादसे के समय कई मजदूर फैक्ट्री के अंदर काम कर रहे थे, जिनमें से कुछ अभी भी मलबे में दबे होने की आशंका है। स्थानीय प्रशासन और राहत टीमों ने तुरंत मौके पर पहुंचकर बचाव कार्य शुरू किया। घायलों को पास के अस्पताल में भर्ती कराया गया है, जहां उनका इलाज जारी है। इस घटना के बाद इलाके में डर और शोक का माहौल है। मृतकों के परिवारों का रो-रोकर बुरा हाल है। प्रशासन ने हादसे की जांच के आदेश दे दिए हैं और यह पता लगाया जा रहा है कि फैक्ट्री में सुरक्षा नियमों का पालन किया जा रहा था या नहीं।
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Gurugram में नकली डायबिटीज इंजेक्शन बनाने वाले गिरोह का भंडाफोड़, मास्टरमाइंड गिरफ्तार

Gurugram में नकली डायबिटीज इंजेक्शन बनाने वाले गिरोह का भंडाफोड़, मास्टरमाइंड गिरफ्तार

हरियाणा के Gurugram में नकली डायबिटीज इंजेक्शन बनाने वाले गिरोह का भंडाफोड़, मास्टरमाइंड गिरफ्तार से एक गंभीर मामला सामने आया है, जहां पुलिस ने नकली डायबिटीज इंजेक्शन बनाने वाले गिरोह का पर्दाफाश किया है। इस मामले में गिरोह के मास्टरमाइंड को भी गिरफ्तार कर लिया गया है। पुलिस के अनुसार, यह गिरोह लंबे समय से नकली इंजेक्शन बनाकर बाजार में बेच रहा था। ये इंजेक्शन देखने में बिल्कुल असली जैसे लगते थे, जिससे आम लोग आसानी से धोखा खा जाते थे। सबसे चिंता की बात यह है कि इन नकली दवाओं से मरीजों की सेहत को गंभीर खतरा हो सकता था। जांच में सामने आया कि गिरोह सस्ती और घटिया सामग्री का इस्तेमाल कर इन इंजेक्शनों को तैयार करता था और उन्हें ऊंचे दामों पर बेचता था। कई मरीज, जो रोजाना डायबिटीज की दवा पर निर्भर हैं, इस धोखाधड़ी का शिकार हो सकते थे। स्थानीय लोगों का कहना है कि इस खुलासे ने सभी को चौंका दिया है। एक मरीज ने बताया कि, “हम अपनी सेहत के लिए दवाओं पर भरोसा करते हैं, लेकिन अगर वही नकली निकलें तो यह बहुत डराने वाली बात है।” फिलहाल पुलिस इस मामले में आगे की जांच कर रही है और गिरोह से जुड़े अन्य लोगों की तलाश जारी है। प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि वे दवाएं केवल भरोसेमंद मेडिकल स्टोर से ही खरीदें और किसी भी संदिग्ध गतिविधि की जानकारी तुरंत पुलिस को दें। यह मामला एक बार फिर दिखाता है कि थोड़े से लालच के लिए कुछ लोग दूसरों की जान तक जोखिम में डाल देते हैं। ऐसे में सतर्क रहना और सही जानकारी रखना बेहद जरूरी है।
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Ujjain

Ujjain में बनेगी Malakhamb Academy, 111 करोड़ के Project से खिलाड़ियों को मिलेंगी World-Class सुविधाएं

मध्यप्रदेश के मलखंब खिलाड़ियों के लिए बड़ी खुशखबरी है। प्रदेश सरकार Ujjain में एक ऐसी Malakhamb और Gymnastics Academy विकसित करने की तैयारी में है, जहां खिलाड़ियों को बेहतर प्रशिक्षण के साथ आधुनिक सुविधाएं भी मिलेंगी। खेल एवं युवा कल्याण मंत्री विश्वास सारंग के प्रयासों से तैयार किए गए प्रस्ताव के मुताबिक, करीब 20 एकड़ जमीन पर इस अकादमी को विकसित किया जाएगा। अकादमी में खिलाड़ियों के लिए खेल अधोसंरचना, हॉस्टल, आधुनिक उपकरण, फिटनेस सेंटर, फिजियोथेरेपी और खेल विज्ञान से जुड़ी सुविधाएं उपलब्ध कराने की योजना है। इसका मकसद प्रदेश की युवा मलखंब प्रतिभाओं को कम उम्र से ही बेहतर ट्रेनिंग देकर उन्हें राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर के लिए तैयार करना है। 111 करोड़ रुपये से ज्यादा का प्रस्ताव प्रस्तावित मलखंब एवं जिम्नास्टिक अकादमी के निर्माण पर करीब 86 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है। वहीं वर्ष 2026-27 से 2028-29 तक अकादमी के संचालन के लिए लगभग 25.33 करोड़ रुपये का प्रावधान प्रस्तावित किया गया है। इस तरह निर्माण और संचालन को मिलाकर परियोजना की कुल प्रस्तावित लागत करीब 111.33 करोड़ रुपये बताई गई है। खिलाड़ियों को सिर्फ Training नहीं, पूरी सुविधा मिलेगी इस अकादमी की खास बात यह होगी कि खिलाड़ियों को केवल मलखंब की ट्रेनिंग तक सीमित सुविधाएं नहीं मिलेंगी। यहां हॉस्टल, आधुनिक खेल उपकरण, फिटनेस, फिजियोथेरेपी और Sports Science आधारित प्रशिक्षण की व्यवस्था भी प्रस्तावित है। सरकार का जोर ऐसे Training Environment पर है, जहां खिलाड़ियों की तकनीक के साथ उनकी फिटनेस और खेल प्रदर्शन पर भी लगातार काम किया जा सके। 70 खिलाड़ियों को मिलेगा मौका प्रस्ताव के अनुसार अकादमी में कुल 70 खिलाड़ियों को प्रशिक्षण दिया जाएगा। इनमें: शामिल होंगे। यानी कुल 50 खिलाड़ी बोर्डिंग और 20 खिलाड़ी डे-बोर्डिंग व्यवस्था में रहेंगे। खिलाड़ियों का चयन Talent Search के माध्यम से किए जाने का प्रस्ताव है। Academy शुरू होने से पहले उज्जैन में शुरू होगी Training स्थायी अकादमी की इमारत तैयार होने में समय लगने के दौरान भी खिलाड़ियों की ट्रेनिंग को रोका नहीं जाएगा। वर्ष 2026-27 और 2027-28 में अकादमी को राजमाता खेल परिसर, तानाखेड़ा, उज्जैन में डे-बोर्डिंग मॉडल पर संचालित करने का प्रस्ताव है। इस शुरुआती चरण में कुल 40 खिलाड़ियों को प्रवेश देने की योजना है। इनमें 30 बालक और 10 बालिकाएं शामिल होंगी। उज्जैन से बाहर के चयनित खिलाड़ियों के लिए विभाग की ओर से आवास की व्यवस्था करने का भी प्रस्ताव है। Expert Coaches के साथ Sports Science पर रहेगा फोकस नई अकादमी में खिलाड़ियों को आधुनिक और उच्च तकनीकी प्रशिक्षण देने की तैयारी है। इसके लिए उच्च तकनीकी सलाहकार और विशेषज्ञ प्रशिक्षकों की सेवाएं अनुबंध के आधार पर लेने का प्रावधान प्रस्तावित किया गया है। डे-बोर्डिंग व्यवस्था में खिलाड़ियों को प्रशिक्षकों के साथ फिजियोथेरेपिस्ट और मसाजर की सुविधा भी उपलब्ध कराने की योजना है। इसमें एक महिला फिजियोथेरेपिस्ट और दो मसाजर—एक महिला तथा एक पुरुष—का प्रावधान प्रस्तावित है। मंत्री विश्वास सारंग बोले- प्रतिभाओं को मिलेगा बड़ा मंच खेल एवं युवा कल्याण मंत्री विश्वास सारंग के मुताबिक मध्यप्रदेश में खेल प्रतिभाओं की कमी नहीं है। जरूरत सिर्फ इतनी है कि इन खिलाड़ियों को सही समय पर आधुनिक सुविधाएं, विशेषज्ञ मार्गदर्शन और बेहतर अवसर मिलें। उन्होंने कहा कि मलखंब मध्यप्रदेश की गौरवशाली खेल परंपरा का हिस्सा है और प्रदेश के खिलाड़ियों ने राष्ट्रीय स्तर पर अपनी प्रतिभा साबित की है। प्रस्तावित अकादमी के जरिए खिलाड़ियों को शुरुआती उम्र से वैज्ञानिक और तकनीकी प्रशिक्षण देने पर जोर रहेगा। मंत्री के अनुसार लक्ष्य यह है कि मध्यप्रदेश के खिलाड़ी राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं के साथ-साथ अंतरराष्ट्रीय मंच पर भी प्रदेश और देश का नाम रोशन करें। Khelo India में MP के Malakhamb खिलाड़ियों का शानदार प्रदर्शन मलखंब अकादमी की जरूरत इसलिए भी महसूस की गई क्योंकि मध्यप्रदेश के खिलाड़ियों ने हाल के वर्षों में राष्ट्रीय स्तर पर अच्छा प्रदर्शन किया है। Khelo India Youth Games 2025, बिहार में मध्यप्रदेश के मलखंब खिलाड़ियों ने शानदार प्रदर्शन करते हुए कुल 10 पदक जीते। इनमें 7 Gold, 2 Silver और 1 Bronze Medal शामिल रहे। इस प्रदर्शन ने एक बार फिर दिखाया कि प्रदेश में मलखंब की प्रतिभाओं की मजबूत नींव मौजूद है। अब नई अकादमी के जरिए इन खिलाड़ियों को लगातार और बेहतर प्रशिक्षण देने की दिशा में काम किया जा रहा है। उज्जैन बन सकता है Malakhamb Talent Hub अकादमी के संचालन और निगरानी की जिम्मेदारी जिला खेल एवं युवा कल्याण अधिकारी, उज्जैन को देने का प्रस्ताव है। शुरुआत में विभाग में उपलब्ध स्टाफ के जरिए अकादमी की दैनिक गतिविधियां संचालित की जाएंगी। उज्जैन जिले के लिए कुल 12 पद स्वीकृत किए गए हैं। इनमें संभागीय खेल एवं युवा कल्याण अधिकारी, जिला खेल एवं युवा कल्याण अधिकारी, लेखापाल, सहायक ग्रेड-2, सहायक ग्रेड-3 और भृत्य के पद शामिल हैं। खिलाड़ियों के लिए नई उम्मीद उज्जैन में प्रस्तावित Malakhamb Academy सिर्फ एक नई खेल सुविधा नहीं, बल्कि प्रदेश की युवा प्रतिभाओं के लिए आगे बढ़ने का बड़ा रास्ता बन सकती है। अभी जहां खिलाड़ी अलग-अलग स्थानों पर प्रशिक्षण लेते हैं, वहीं भविष्य में उन्हें एक ही जगह पर ट्रेनिंग, फिटनेस, आवास और Sports Science जैसी सुविधाएं मिलने की उम्मीद है। अगर प्रस्तावित योजना अपने स्वरूप में आगे बढ़ती है, तो उज्जैन आने वाले समय में मध्यप्रदेश की मलखंब प्रतिभाओं की नई नर्सरी और प्रमुख Training Hub के रूप में अपनी पहचान बना सकता है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
India-Belgium

India-Belgium Partnership: जोरावर Tank बना नई दोस्ती की पहचान, कई अहम MoU पर सहमति

India-Belgium के रिश्तों में गुरुवार को एक अहम पड़ाव जुड़ गया। बेल्जियम के प्रधानमंत्री बार्ट डी वेवर भारत दौरे पर पहुंचे, जहां प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ उनकी महत्वपूर्ण द्विपक्षीय बैठक हुई। बातचीत के बाद दोनों देशों ने Defence, Clean Energy, Critical Minerals, Semiconductor, Maritime Cooperation और व्यापार जैसे कई क्षेत्रों में साझेदारी को आगे बढ़ाने पर सहमति जताई। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बैठक के बाद कहा कि भारत और बेल्जियम के संबंध अब केवल पारंपरिक व्यापार तक सीमित नहीं हैं। दोनों देश अब Defence और Clean Energy जैसे रणनीतिक क्षेत्रों में भी तेजी से साथ आ रहे हैं। इसी दौरान पीएम मोदी ने जोरावर Tank का भी जिक्र किया। जोरावर Tank ने बढ़ाया Defence Cooperation भारत के लिए पहाड़ी और कठिन इलाकों में इस्तेमाल होने वाला हल्का जोरावर टैंक Defence Sector का अहम प्रोजेक्ट है। पीएम मोदी ने भारत-बेल्जियम सहयोग का उल्लेख करते हुए कहा कि दोनों देश आधुनिक रक्षा उपकरणों के क्षेत्र में साथ काम कर रहे हैं। दोनों देशों के बीच Military Exchanges और Training Cooperation बढ़ाने पर भी सहमति बनी है। इससे भारतीय और बेल्जियम की सेनाओं के बीच संपर्क और अनुभव साझा करने के अवसर बढ़ेंगे। हालांकि, जोरावर टैंक को लेकर इसे सीधे तौर पर कोई अलग Tank Purchase Deal कहना सही नहीं होगा। इस प्रोजेक्ट का उल्लेख दोनों देशों के बढ़ते Defence और Technology Cooperation के उदाहरण के तौर पर किया गया है। Clean Energy में भी नई Partnership Defence के साथ-साथ Green Energy भारत-बेल्जियम सहयोग का एक और बड़ा क्षेत्र बनकर सामने आया है। दोनों देशों ने Renewable Energy के क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने के लिए समझौता किया है। पीएम मोदी ने आंध्र प्रदेश के काकीनाडा में विकसित हो रहे Green Ammonia Project का भी जिक्र किया। भारत की बढ़ती Clean Energy जरूरतों और बेल्जियम की तकनीकी क्षमता को देखते हुए यह Partnership आने वाले समय में काफी अहम हो सकती है। Critical Minerals और Semiconductor पर नजर आज की Technology Economy में Critical Minerals और Semiconductor की भूमिका लगातार बढ़ रही है। ऐसे में भारत और बेल्जियम ने इन क्षेत्रों में भी सहयोग बढ़ाने का फैसला किया है। दोनों देश Critical Minerals की Processing और Recycling में मिलकर काम करने की दिशा में आगे बढ़ेंगे। वहीं Semiconductor Sector में बेल्जियम की तकनीकी विशेषज्ञता और भारत के बड़े Manufacturing Ecosystem को जोड़ने पर जोर दिया गया है। खास तौर पर बेल्जियम के प्रसिद्ध Research Institute IMEC और भारत के Semiconductor Ecosystem के बीच सहयोग बढ़ाने की संभावना को महत्वपूर्ण माना जा रहा है। 5 साल में Double हो सकता है Bilateral Trade बैठक में आर्थिक रिश्तों को लेकर भी बड़ा लक्ष्य सामने आया। भारत और बेल्जियम अगले पांच वर्षों में Bilateral Trade को दोगुना करने की दिशा में काम करेंगे। भारत और बेल्जियम के बीच व्यापार में Diamond Industry की लंबे समय से बड़ी भूमिका रही है। बेल्जियम का एंटवर्प शहर दुनिया के प्रमुख Diamond Trading Hubs में शामिल है और यहां भारतीय कारोबारियों की भी मजबूत मौजूदगी है। अब दोनों देश इस पुराने व्यापारिक रिश्ते को Defence, Technology, Energy और Critical Minerals जैसे नए क्षेत्रों से जोड़ना चाहते हैं। Maritime और Startup Sector में भी बढ़ेगा सहयोग भारत और बेल्जियम के बीच सहयोग का दायरा केवल Defence और Trade तक नहीं रहेगा। दोनों देशों ने Maritime Sector में Capacity Building और Startups के बीच संपर्क बढ़ाने पर भी सहमति जताई है। इसके अलावा Cybercrime से मुकाबला, Diplomatic Training और अन्य क्षेत्रों में भी सहयोग को मजबूत करने के लिए समझौते किए गए हैं। दोनों देश Migration and Mobility Partnership Agreement को जल्द पूरा करने की दिशा में भी आगे बढ़ रहे हैं। इससे दोनों देशों के बीच छात्रों, Professionals और लोगों के आवागमन से जुड़े अवसरों को बढ़ावा मिल सकता है। Terrorism पर भारत-बेल्जियम का एक सुर बैठक में आतंकवाद और दुनिया में चल रहे विभिन्न संघर्षों पर भी चर्चा हुई। भारत और बेल्जियम ने आतंकवाद के सभी रूपों के खिलाफ अपनी प्रतिबद्धता दोहराई। पीएम मोदी ने कहा कि दोनों देश Dialogue और Diplomacy के जरिए विवादों के शांतिपूर्ण समाधान में विश्वास रखते हैं। वैश्विक स्तर पर बढ़ती अस्थिरता के बीच भारत और बेल्जियम के बीच रणनीतिक सहयोग को और मजबूत करने पर जोर दिया गया। भारत-बेल्जियम रिश्तों की पुरानी कहानी पीएम मोदी ने दोनों देशों के ऐतिहासिक रिश्तों का भी जिक्र किया। प्रथम विश्व युद्ध के दौरान बेल्जियम में भारतीय सैनिकों के योगदान और बलिदान को याद करते हुए उन्होंने कहा कि भारत और बेल्जियम के संबंध काफी पुराने हैं। बेल्जियम के प्रधानमंत्री बार्ट डी वेवर की यह पहली आधिकारिक भारत यात्रा है। एंटवर्प के मेयर के तौर पर उनका भारत और भारतीय समुदाय से पहले भी संपर्क रहा है। अब Diamond Trade से आगे बढ़ रही दोस्ती भारत और बेल्जियम की दोस्ती की पहचान लंबे समय तक Diamond Trade से जुड़ी रही है। लेकिन बदलती दुनिया में दोनों देशों के रिश्ते अब एक बड़े दायरे में फैल रहे हैं। जोरावर Tank से Defence Cooperation, Green Energy से Critical Minerals और Semiconductor से Bilateral Trade तक, भारत और बेल्जियम कई नए क्षेत्रों में साझेदारी बढ़ाने की कोशिश कर रहे हैं। पीएम मोदी और बार्ट डी वेवर की बैठक को इसी बदलती Partnership की एक अहम कड़ी माना जा रहा है। आने वाले वर्षों में अगर इन समझौतों और सहयोग योजनाओं को जमीन पर तेजी से उतारा जाता है, तो भारत-बेल्जियम संबंध आर्थिक रिश्तों से आगे बढ़कर एक मजबूत Strategic Partnership का रूप ले सकते हैं। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
Tibet

Nepal Flood के बीच बड़ा Earthquake: Tibet में 5.1 Magnitude के झटके, अब तक 1,273 लोगों की मौत

Nepal-Tibet Flood हिमालयी इलाके में पिछले एक हफ्ते से जारी तबाही के बीच गुरुवार को एक और झटका महसूस किया गया। चीन के तिब्बत (Tibet) क्षेत्र में 5.1 तीव्रता का भूकंप आया। भूकंप ऐसे वक्त आया है, जब नेपाल और तिब्बत में भीषण Flood और Landslide के बाद हजारों लोग लापता हैं और राहत-बचाव अभियान लगातार चल रहा है। 26 अगस्त को नेपाल-चीन सीमा के पास आई विनाशकारी बाढ़ ने देखते ही देखते कई इलाकों की तस्वीर बदल दी थी। घर, सड़कें, पुल और Hydropower Projects मलबे और पानी की चपेट में आ गए। अब तक इस आपदा में नेपाल और तिब्बत को मिलाकर 1,273 लोगों की मौत हो चुकी है। Tibet में 5.1 तीव्रता का Earthquake जर्मन रिसर्च सेंटर फॉर जियोसाइंसेज (GFZ) के अनुसार गुरुवार को तिब्बत में 5.1 तीव्रता का भूकंप दर्ज किया गया। भूकंप करीब 10 किलोमीटर की गहराई पर आया और इसका क्षेत्र नेपाल तथा भारत की सीमाओं के आसपास बताया गया है। हालांकि शुरुआती रिपोर्टों में इस भूकंप से बड़े पैमाने पर नए नुकसान की पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन पहले से तबाह इलाके में इसके झटके ने लोगों और Rescue Teams की चिंता जरूर बढ़ा दी है। एक हफ्ते पहले आई बाढ़ ने मचाई थी भारी तबाही 26 अगस्त को Bhote Koshi River के आसपास अचानक आई बाढ़ ने नेपाल-चीन सीमा क्षेत्र में भारी तबाही मचाई। अधिकारियों और विशेषज्ञों के मुताबिक इस आपदा के पीछे ग्लेशियर और चट्टानों के खिसकने से पैदा हुआ भारी मलबा और पानी प्रमुख वजह रहा। बाढ़ का तेज बहाव अपने साथ मिट्टी, चट्टान और मलबा लेकर नीचे की ओर आया और रास्ते में आने वाले घरों, सड़कों और पुलों को तबाह करता चला गया। नेपाल के विदेश मंत्रालय ने इस घटना को बेहद असाधारण बताते हुए इसे ‘Himalayan Tsunami’ तक कहा है। तिब्बत की ओर Gyirong Port भी बुरी तरह प्रभावित हुआ था। संपर्क मार्गों को नुकसान पहुंचने से शुरुआती दौर में राहत सामग्री और भारी मशीनरी को प्रभावित क्षेत्रों तक पहुंचाना बड़ी चुनौती बन गया। Nepal-Tibet Disaster में 1,273 लोगों की मौत 3 सितंबर तक सामने आए आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार नेपाल में 1,252 लोगों की मौत हो चुकी है और कम से कम 4,216 लोग अब भी लापता हैं। वहीं चीन के तिब्बत क्षेत्र में 21 लोगों की मौत और 541 लोगों के लापता होने की जानकारी सामने आई है। इस तरह दोनों क्षेत्रों में मृतकों की संख्या 1,273 हो गई है। नेपाल में सबसे ज्यादा मौतें चितवन, नवलपरासी पूर्व, नवलपरासी पश्चिम और नुवाकोट जैसे जिलों में दर्ज हुई हैं। कई शवों की पहचान अभी बाकी है, जिससे परिवारों की बेचैनी और बढ़ गई है। हजारों लोग अब भी Missing, Tunnel में फंसे लोगों की तलाश सबसे बड़ी चिंता उन लोगों को लेकर है, जिनका अभी तक कोई पता नहीं चल पाया है। नेपाल में हजारों लोगों के लापता होने के अलावा कई Hydropower Projects में काम करने वाले कर्मचारियों के भी फंसे होने की आशंका है। करीब 900 Hydropower workers के अब भी लापता होने की बात सामने आई है। कुछ लोगों के सुरंगों में फंसे होने की आशंका के चलते Rescue Teams भारी मशीनों और अन्य उपकरणों की मदद से मलबा हटाने में जुटी हैं। नेपाल सरकार के मुताबिक भारत, चीन और दक्षिण कोरिया की Tunnel Rescue Teams नेपाली सेना के साथ मिलकर अभियान चला रही हैं। ड्रोन, भारी मशीनरी और अन्य राहत उपकरणों की मदद भी ली जा रही है। हजारों घर हुए तबाह, सामने बड़ी Rebuilding Challenge बाढ़ ने सिर्फ लोगों की जान नहीं ली, बल्कि हजारों परिवारों से उनका घर और रोजी-रोटी भी छीन ली। Reuters की रिपोर्ट के मुताबिक नेपाल में करीब 7,500 घर पूरी तरह तबाह हो चुके हैं और लगभग 20,000 घरों को दोबारा बनाने की जरूरत पड़ सकती है। सड़क और पुल टूटने के कारण कई इलाकों में राहत पहुंचाना अभी भी मुश्किल है। कुछ जगहों पर लोगों को नदी पार करने के लिए अस्थायी साधनों का सहारा लेना पड़ रहा है। Rescue Operation के बीच नया भूकंप चिंता की वजह राहत और बचाव दल पहले ही बारिश, मलबे, तेज बहाव और अस्थिर पहाड़ी ढलानों से जूझ रहे हैं। ऐसे में तिब्बत में आया नया भूकंप हालात को और संवेदनशील बना सकता है। फिलहाल अधिकारियों की प्राथमिकता लापता लोगों की तलाश और प्रभावित परिवारों तक राहत पहुंचाना है। नेपाल सरकार के मुताबिक Search and Rescue Operation अभी भी पूरी क्षमता के साथ जारी है। हिमालयी क्षेत्र की इस त्रासदी ने एक बार फिर दिखाया है कि पहाड़ी इलाकों में प्राकृतिक आपदाएं कितनी तेजी से बड़े संकट में बदल सकती हैं। बाढ़ के बाद भूकंप के झटके ने प्रभावित लोगों की मुश्किलें और बढ़ा दी हैं, लेकिन Rescue Teams अब भी मलबे के बीच जिंदगी की तलाश में जुटी हैं। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!

जन्माष्टमी और गोगा नवमी पर इंदौर में ट्रैफिक व्यवस्था बदली, राजबाड़ा जाने से पहले जान लें ये रूट

इंदौर। जन्माष्टमी और गोगा नवमी के दौरान राजबाड़ा और आसपास के इलाकों में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के पहुंचने की संभावना है। इसे देखते हुए इंदौर यातायात पुलिस ने 4 और 5 सितंबर को विशेष ट्रैफिक व्यवस्था लागू की है। इस दौरान कई प्रमुख मार्गों पर वाहनों की आवाजाही और पार्किंग पर रोक रहेगी, जबकि कुछ रास्तों पर ट्रैफिक डायवर्ट किया जाएगा। प्रशासन ने श्रद्धालुओं से अपील की है कि वे भीड़भाड़ वाले इलाकों में वाहन लेकर जाने से बचें और निर्धारित पार्किंग स्थलों का ही इस्तेमाल करें। 4 सितंबर को मंदिरों में उमड़ेगी भीड़ जन्माष्टमी के मौके पर 4 सितंबर को राजबाड़ा क्षेत्र के बांके बिहारी मंदिर, गोपाल मंदिर और यशोदा माता मंदिर सहित अन्य धार्मिक स्थलों पर बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के पहुंचने की संभावना है। इसके अलावा नरसिंह बाजार स्थित द्वारकाधीश मंदिर, गोराकुंड चौराहे के जानकीनाथ मंदिर और छीपाबाकल क्षेत्र में मटकी फोड़ प्रतियोगिताओं का आयोजन होगा। इन कार्यक्रमों में प्रतियोगियों और दर्शकों की भीड़ को देखते हुए ट्रैफिक पुलिस ने विशेष इंतजाम किए हैं। 5 सितंबर को गोगा नवमी के चलते भी राजबाड़ा और आसपास के क्षेत्रों में यातायात का दबाव बढ़ सकता है। राजबाड़ा क्षेत्र में इन रास्तों पर रहेगा प्रतिबंध सिटी बसों के रूट में भी बदलाव मृगनयनी और फ्रूट मार्केट की ओर से राजबाड़ा आने वाली सिटी बसें शाम 5 बजे के बाद राजबाड़ा नहीं जा सकेंगी। इनका संचालन संजय सेतु की ओर से किया जाएगा। वहीं कलेक्ट्रेट और हरसिद्धि की ओर से आने वाली सिटी बसें हरसिद्धि मंदिर चौराहे से आगे राजबाड़ा की ओर नहीं जा सकेंगी। बड़ा गणपति से एमजी रोड होते हुए राजबाड़ा जाने वाले वाहन चालकों को सुभाष मार्ग का इस्तेमाल करने की सलाह दी गई है। एयरपोर्ट जाने वालों के लिए ये रास्ते रहेंगे बेहतर त्योहार के दौरान राजबाड़ा क्षेत्र में ट्रैफिक दबाव को देखते हुए एयरपोर्ट जाने वाले यात्री वैकल्पिक मार्गों का इस्तेमाल कर सकते हैं। कलेक्ट्रेट- महूनाका-गंगवाल-एयरपोर्ट मार्ग के अलावा विजयनगर-सुपर कॉरिडोर-बिजासन मार्ग से भी एयरपोर्ट पहुंचा जा सकता है। इन रास्तों से भी कर सकते हैं आवाजाही नगर निगम की ओर से आने वाले वाहन चालक शिवालय-भागीरथपुरा टी-पोलो ग्राउंड होते हुए परिवर्तित मार्ग का उपयोग कर सकते हैं। नंदलालपुरा, गुरुद्वारा चौराहा और अन्य भीड़भाड़ वाले इलाकों में जाने से बचने की सलाह दी गई है। जरूरत के अनुसार ट्रैफिक को संजय सेतु-चंद्रभागा-हरसिद्धि-जेएनबी-महू नाका मार्ग से संचालित किया जा सकता है। व्यावसायिक वाहनों पर भी रहेगी रोक बाजारों में भीड़ और ट्रैफिक दबाव को देखते हुए दोपहर बाद से व्यावसायिक वाहन, सिटी बस और ऑटो रिक्शा राजबाड़ा से सुभाष चौक, सराफा और बर्तन बाजार की ओर नहीं जा सकेंगे। निर्धारित पार्किंग स्थल श्रद्धालुओं के लिए प्रमुख पार्किंग स्थल इस प्रकार हैं: आपातकालीन सेवाओं से जुड़े वाहनों पर यह प्रतिबंध लागू नहीं होगा। जरूरत के अनुसार बदले जा सकते हैं रूट यातायात पुलिस के मुताबिक भीड़ और ट्रैफिक की स्थिति को देखते हुए समय-समय पर व्यवस्था में बदलाव किया जा सकता है। जरूरत पड़ने पर अतिरिक्त डायवर्शन भी लागू किया जाएगा। यातायात पुलिस ने लोगों से अपील की है कि वे धार्मिक आयोजनों के दौरान अनावश्यक रूप से वाहन लेकर भीड़ वाले क्षेत्रों में न जाएं, निर्धारित पार्किंग का इस्तेमाल करें और ट्रैफिक व्यवस्था बनाए रखने में पुलिस का सहयोग करें।

बिलासपुर हिंसा मामले में फरार राम सिंह का वीडियो आया सामने, कहा- जल्द करूंगा सरेंडर

बिलासपुर। छत्तीसगढ़ के बिलासपुर में हुई हिंसा के मामले में पुलिस की कार्रवाई लगातार जारी है। पुलिस दोनों पक्षों के आरोपियों की तलाश कर रही है और अब तक 20 आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है। इसी बीच मामले में फरार आरोपी राम सिंह का सोशल मीडिया पर वीडियो सामने आया है। वीडियो में राम सिंह ने खुद को निर्दोष बताते हुए कहा है कि वह अपने धर्म के लिए लड़ने की वजह से आरोपी बनाया जा रहा है। उसने यह भी कहा कि वह जल्द ही पुलिस के सामने सरेंडर करेगा। साथ ही राम सिंह ने जेल में अपनी जान को खतरा होने की आशंका भी जताई है। राम सिंह ने वीडियो में पुलिस पर उसे टारगेट करने का आरोप लगाया है। हालांकि, उसके इन आरोपों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है। दोनों पक्षों के 20 आरोपी गिरफ्तार पुलिस के मुताबिक, मामले में अब तक दोनों पक्षों के 20 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है। इनमें सोहेल खान गुट के 17 और ठाकुर राम सिंह गुट के 3 आरोपी शामिल हैं। कुछ आरोपी अभी भी फरार हैं, जिनकी तलाश के लिए पुलिस की टीमें लगातार संभावित ठिकानों पर दबिश दे रही हैं। यह पूरा मामला सिटी कोतवाली थाना क्षेत्र का है। पुलिस CCTV फुटेज और सोशल मीडिया पर सामने आए वीडियो की भी जांच कर रही है, ताकि हिंसा, पथराव, मारपीट, तोड़फोड़ और भीड़ को उकसाने में शामिल लोगों की पहचान की जा सके। CCTV में कट्टा लहराते नजर आया सोहेल पुलिस ने हिंसा के मामले में गिरफ्तार आरोपी सोहेल खान समेत 6 आरोपियों का पैदल जुलूस निकाला था। इसी बीच सोहेल का एक CCTV फुटेज सामने आया है, जिसमें वह हाथ में हथियार लहराते हुए दिखाई दे रहा है। पुलिस का कहना है कि फुटेज में सोहेल द्वारा हवाई फायरिंग किए जाने की भी बात सामने आई है। इस वीडियो की जांच पुलिस द्वारा की जा रही है। सोहेल से एयर पिस्टल और देशी कट्टा बरामद गिरफ्तारी के बाद पुलिस ने सोहेल खान, अब्दुल रज्जाक मकवाना, अरबाज खान, नुमान अली, शेख सुल्तान और मोहम्मद मुस्तकीन से पूछताछ की। पुलिस के अनुसार, सोहेल की निशानदेही पर उसके घर से एयर पिस्टल और देशी कट्टा बरामद किया गया है। पुलिस के मुताबिक, सोहेल के खिलाफ पहले से कई मामले दर्ज हैं। एसएसपी रजनेश सिंह ने बताया कि कोतवाली थाना क्षेत्र के निगरानी बदमाश सोहेल के खिलाफ 20 मामले दर्ज हैं। राम सिंह और उसके भाई के घर पुलिस की दबिश राम सिंह और उसके भाई की तलाश में पुलिस ने देर रात उनके घरों पर भी दबिश दी। हालांकि, पुलिस को दोनों जगहों से कोई सुराग नहीं मिला। पुलिस को आशंका है कि राम सिंह और उसके साथी बिलासपुर, रायपुर या आसपास के ग्रामीण इलाकों में छिपे हो सकते हैं। उनकी तलाश में पुलिस की टीमें लगातार संभावित ठिकानों पर कार्रवाई कर रही हैं। अब राम सिंह के सोशल मीडिया वीडियो के बाद उसके सरेंडर करने की बात सामने आई है। पुलिस की नजर उसकी अगली गतिविधियों पर है और उसके ठिकाने की तलाश भी जारी है।

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