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“Coca-Cola ने मुसलमानों के लिए की पीली केप वाली कोल्ड ड्रिंक….?

Coca-Cola Special Coldrink Only For One Religion? Here’s The Truth | देश हरपल स्पेशल रिपोर्ट Coca-Cola की एक खास बोतल चर्चा में है — जिसकी कैप है पीले रंग की, और बताया जा रहा है कि यह केवल एक खास धर्म के लिए बनाई गई है। सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे इस दावे ने कई लोगों को चौंका दिया है। दावा ये भी किया जा रहा है कि यह “Special Coldrink” सिर्फ रमज़ान के महीने में बनाई जाती है और इसमें इस्तेमाल होने वाले Ingredients बाकी कोल्ड्रिंक्स से अलग हैं। लेकिन क्या यह सच है? चलिए देश हरपल पर जानते हैं इसकी पूरी सच्चाई। वायरल क्या हुआ? कुछ दिनों से सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर Coca-Cola की एक बोतल की तस्वीर वायरल हो रही है जिसकी Yellow Cap है। दावा किया जा रहा है कि ये बोतल सिर्फ मुस्लिम समुदाय के लिए बनाई गई है और इसमें इस्तेमाल किए गए प्रोडक्ट्स को Halal Certified किया गया है। ये Yellow Cap आखिर है क्या? असल में, कोका-कोला कंपनी रमज़ान के मौके पर Middle East और कुछ अन्य मुस्लिम देशों में एक खास पैकेजिंग के साथ अपने प्रोडक्ट्स लॉन्च करती है। ये Yellow Cap उसी कस्टम पैकेजिंग का हिस्सा है। लेकिन इसका मतलब ये कतई नहीं है कि यह सिर्फ एक धर्म विशेष के लिए है। Coca-Cola का क्या कहना है? Coca-Cola Middle East की ओर से स्पष्ट किया गया है कि Yellow Cap Bottles में ऐसा कुछ भी नहीं है जो केवल किसी एक धर्म विशेष के लिए बनाया गया हो। बल्कि, यह Marketing Strategy है, ताकि रमज़ान के दौरान consumers को special feel दिया जा सके। इसके साथ ही ये Cap कुछ खास Instructions को Represent करता है जैसे कि “Halal Certified” होने की जानकारी। Halal Certification क्या होता है? Halal एक Arabic Word है जिसका मतलब होता है “वो जो अनुमति प्राप्त हो”। खाने-पीने के Products के लिए Halal Certification यह बताता है कि उसमें ऐसा कोई Ingredient नहीं है जो इस्लामिक कानून के विरुद्ध हो। भारत सहित कई देशों में Halal और Vegetarian दोनों तरह के Certification आम हैं। क्या भारत में भी यह Yellow Cap Bottle मिलती है? नहीं। यह पैकेजिंग केवल Middle East और कुछ चुनिंदा देशों में ही उपलब्ध है। भारत में फिलहाल ऐसी कोई Coca-Cola Bottle officially Launch नहीं की गई है। अफवाह क्यों फैली? Social Media पर आधी-अधूरी जानकारी के साथ Sensational Claims करना आजकल आम हो गया है। कुछ लोगों ने बिना पुख्ता जानकारी के सिर्फ Cap के रंग को देखकर यह मान लिया कि पूरी Drink एक धर्म विशेष के लिए बनाई गई है, जो कि ग़लत है। Coca-Cola की Yellow Cap वाली Bottle कोई धार्मिक पक्षपात नहीं बल्कि एक खास त्योहार के लिए मार्केटिंग रणनीति है। यह Drink सभी के लिए है, और इसमें ऐसा कुछ नहीं जो किसी एक धर्म के लिए Exclusively बनाया गया हो। Desh Harpal आपसे अपील करता है कि ऐसी अफवाहों से बचें और किसी भी खबर को आगे बढ़ाने से पहले उसकी सत्यता ज़रूर जांचें।
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Aligarh Saas Damad Love Story

Aligarh Saas Damad Love Story: में हर दिन नया ड्रामा, Gujarat तक पहुंचा मामला!

उत्तर प्रदेश के अलीगढ़ जिले की एक Aligarh Saas Damad Love Story ने पूरे इलाके में सनसनी फैला दी है। इस कहानी में किरदार हैं—एक होने वाला दामाद और उसकी होने वाली सास, जो शादी से ठीक पहले भाग निकले। अब यह सास-दामाद की unexpected प्रेम कहानी पूरे प्रदेश में चर्चा का विषय बन चुकी है। भागे प्रेमियों की तलाश में जुटी पुलिस मडराक थाना क्षेत्र के मनोहरपुर कायस्त गांव की एक युवती की शादी 16 अप्रैल को दादों निवासी युवक से तय हुई थी। लेकिन इससे पहले ही युवती की मां अपने होने वाले दामाद संग फरार हो गई। फिलहाल दोनों का कुछ अता-पता नहीं है। पुलिस ने युवक के पिता, बहनोई और अन्य परिजनों से पूछताछ की है। शुरुआती लोकेशन उत्तराखंड मिलने पर टीम वहां भेजने की बात हुई थी, लेकिन अब नया अंदेशा है कि वे Gujarat में भी हो सकते हैं। युवक के कुछ दोस्तों पर इन्हें भगाने में मदद करने का शक है, इसलिए पुलिस अब उनसे कड़ी पूछताछ कर रही है। CO इगलास महेश कुमार ने बताया कि जानकारी मिलते ही टीमें संभावित ठिकानों पर भेजी जाएंगी। ताबीज से वशीकरण का आरोप युवक के पिता ने चौंकाने वाला आरोप लगाया है कि उसकी सास ने उसे ताबीज देकर वशीकरण कर लिया। उनके अनुसार, जब वह महिला बेटे की तबीयत खराब होने पर घर आई थी, तब वह दो ताबीज लेकर आई—एक गर्दन में और एक कमर में बांधने के लिए। इसके बाद से ही बेटे का व्यवहार पूरी तरह बदल गया। उन्होंने मीडिया से कहा, “अब यह साफ हो गया है कि हमारा बेटा किसी तंत्र-मंत्र के जाल में फंस गया है। वह महिला ही उसे बहका कर ले गई है। समाज में हमारी बहुत बदनामी हो गई है। इसलिए अब हम उसे घर नहीं लाएंगे और उसे संपत्ति से भी बेदखल किया जाएगा।” महिला के पति ने तोड़ी चुप्पी इस प्रेम-कांड में महिला के पति ने भी अब चुप्पी तोड़ी है। मिडिया से बातचीत में उन्होंने बताया कि रात करीब 10 बजे उन्होंने अपने होने वाले दामाद को कॉल किया था। पहले तो उसने बात टालनी चाही, लेकिन जब शक गहराया तो उसने धमकी देते हुए कहा, “तुमने 19 साल की शादी में अपनी पत्नी को बहुत परेशान किया है। अब उसे भूल जाओ, नहीं तो तुम्हारा घर वीरान कर दूंगा।” महिला के पति ने यह भी बताया कि उसी ने जिद करके अपने दामाद को मोबाइल दिलवाया था। जबकि वह अपनी होने वाली पत्नी से सिर्फ चंद मिनट बात करता था, लेकिन महिला से दिन भर बातें करता था। यह रिश्ता कब emotional affair बन गया, उन्हें अंदाज़ा नहीं हुआ। दोनों परिवारों ने तोड़ा रिश्ता अब इस लव स्टोरी का अंजाम यह है कि दोनों ही परिवारों ने महिला और युवक से रिश्ता खत्म कर दिया है। युवती व उसके पिता ने महिला को अपनाने से इनकार कर दिया है, वहीं युवक के परिवार ने भी साफ कह दिया है कि अब वह उनके लिए मरा हुआ है। अब दोनों परिवारों की सिर्फ एक ही मांग है—पुलिस जल्द से जल्द उन्हें ढूंढ़कर सामने लाए और जो जेवर-नकदी वे ले गए हैं, वह वापस करा दे। Aligarh की ये unconventional love story हर रोज़ नए मोड़ ले रही है—वशीकरण, भागना, धमकी, सामाजिक बदनामी और पारिवारिक टूटन सब कुछ इसमें है। पुलिस अपनी जांच में जुटी हुई है, लेकिन फिलहाल यह मामला और भी रहस्यमय होता जा रहा है। Desh Harpal इस अजीब प्रेम कहानी पर नज़र बनाए हुए है। आगे के अपडेट्स के लिए जुड़े रहिए।
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मेहुल चोकसी

मेहुल चोकसी बेल्जियम में गिरफ्तार: PNB घोटाले का भगोड़ा आखिरकार पकड़ा गया

₹13,000 करोड़ की धोखाधड़ी का आरोपी था चोकसी, भारत लाने की तैयारी तेज बेल्जियम में पकड़ा गया मेहुल चोकसी PNB घोटाले के आरोपी और देश से फरार कारोबारी मेहुल चोकसी को आखिरकार बेल्जियम में गिरफ्तार कर लिया गया है। PTI की रिपोर्ट के मुताबिक, भारत सरकार के प्रत्यर्पण अनुरोध के बाद बेल्जियम पुलिस ने उसे हिरासत में लिया। चोकसी इलाज के लिए बेल्जियम पहुंचा था, लेकिन एजेंसियों को शक था कि वह वहां से स्विट्ज़रलैंड भागने की कोशिश कर रहा है। CBI और ED की नजरें शुरू से थीं चोकसी परजैसे ही भारतीय एजेंसियों को जानकारी मिली कि चोकसी बेल्जियम में है, वे तुरंत एक्टिव हो गईं। CBI और ED ने तुरंत जरूरी दस्तावेज और गिरफ्तारी से जुड़े कागज़ात बेल्जियम प्रशासन को भेजे। बेल्जियम की एजेंसियों ने कार्रवाई करते हुए चोकसी को हिरासत में ले लिया। भारत लाने की प्रक्रिया अंतिम चरण मेंचोकसी की गिरफ्तारी के बाद अब उसे भारत लाने की प्रक्रिया तेज़ हो गई है। भारत पहले ही औपचारिक रूप से उसके प्रत्यर्पण की मांग कर चुका था। अब उम्मीद जताई जा रही है कि वह जल्द भारत की जेल में होगा। 2018 में भागा था एंटीगुआ, अब छिपाई भारतीय नागरिकताचोकसी ने 2017 में एंटीगुआ की नागरिकता ले ली थी और 2018 में अपने परिवार समेत भारत से फरार हो गया था। गिरफ्तारी के वक्त उसने अपनी भारतीय और एंटीगुआ की नागरिकता छिपाने की कोशिश की, लेकिन अब सच्चाई सामने आ गई है। इससे पहले वह डोमिनिका में भी गिरफ्तार हो चुका है, लेकिन 51 दिन जेल में रहने के बाद ब्रिटेन की क्वीन की प्रिवी काउंसिल से उसे राहत मिल गई थी। क्या है PNB घोटाला?चोकसी की कंपनी ‘गीतांजलि जेम्स लिमिटेड’ पर आरोप है कि उसने अपने भांजे नीरव मोदी के साथ मिलकर पंजाब नेशनल बैंक (PNB) को करीब ₹13,500 करोड़ का नुकसान पहुंचाया। 2014 से 2017 के बीच PNB के कुछ अधिकारियों की मदद से LOU (लेटर ऑफ अंडरटेकिंग) और फॉरेन लेटर ऑफ क्रेडिट के जरिए घोटाला किया गया। अकेले चोकसी पर ₹6,098 करोड़ की धोखाधड़ी का आरोप है। अब उम्मीद है इंसाफ कीचोकसी की गिरफ्तारी से भारत को बड़ी कामयाबी मिली है। सरकार और एजेंसियां अब पूरी कोशिश कर रही हैं कि उसे जल्द से जल्द भारत लाया जाए और घोटाले के लिए सज़ा दिलाई जाए। 👉 DeshHarpal इस बड़ी खबर पर नज़र बनाए हुए है। आगे की अपडेट्स के लिए जुड़े रहें!
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Tahawwur Rana Extradition

Tahawwur Rana Extradition : तहव्वुर राणा को NIA की कस्टडी में कहां रखा गया है और 18 दिन में क्या-क्या उगलवाएगी जांच एजेंसी?

देश हरपल न्यूज़ डेस्कतारीख: 11 अप्रैल 2025 मुंबई आतंकी हमले का साजिशकर्ता तहव्वुर राणा आखिरकार भारत की गिरफ्त में है। अमेरिका से कानूनी औपचारिकताओं के बाद भारत लाया गया राणा फिलहाल राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) की हिरासत में है। लेकिन उसे तिहाड़ जेल में नहीं रखा गया है। सवाल उठता है – आखिर Tahawwur Rana को कहां रखा गया है? कैसी है सुरक्षा? और NIA उससे कौन-कौन से राज उगलवाने की तैयारी में है? कहां रखा गया है तहव्वुर राणा? सूत्रों के मुताबिक, तहव्वुर राणा को तिहाड़ जेल के बजाय NIA के सेंट्रल जोधपुर ऑफिस (CJO Complex) में रखा गया है, जो एक हाई-सिक्योरिटी फैसिलिटी है। यहां सिर्फ बेहद संवेदनशील और हाई-प्रोफाइल मामलों से जुड़े आरोपियों को ही रखा जाता है। NIA ने यह फैसला इसलिए लिया है ताकि राणा से बिना किसी रुकावट के पूछताछ की जा सके और उसकी सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके। बता दें कि तिहाड़ जेल में पहले भी कई आतंकियों पर हमले हो चुके हैं, इसलिए NIA कोई जोखिम नहीं लेना चाहती। कैसी है सुरक्षा व्यवस्था? CJO कॉम्प्लेक्स में राणा को 24×7 Z+ श्रेणी की सुरक्षा में रखा गया है। उसके आसपास सशस्त्र कमांडो तैनात हैं और हर मूवमेंट पर CCTV से निगरानी रखी जा रही है। उसे एक अलग हाई-सिक्योरिटी बैरक में रखा गया है, जहां किसी बाहरी व्यक्ति को मिलने की अनुमति नहीं है। NIA की 18 दिनों की कस्टडी में क्या होगा? एनआईए को अदालत ने तहव्वुर राणा की 18 दिनों की रिमांड दी है। इस दौरान जांच एजेंसी का मकसद है: कौन है तहव्वुर राणा? तहव्वुर हुसैन राणा एक पाकिस्तानी मूल का कनाडाई नागरिक है, जो अमेरिका में मेडिकल क्लिनिक चलाता था। वह 26/11 के मास्टरमाइंड डेविड हेडली का करीबी दोस्त और साथी था। हेडली ने भारत में रेकी करने और आतंकियों की मदद करने में राणा की भूमिका को स्वीकारा था। अमेरिका से भारत कैसे लाया गया? तहव्वुर राणा के प्रत्यर्पण की प्रक्रिया में भारत को लंबा इंतजार करना पड़ा। अमेरिका की अदालत ने तमाम दलीलों के बाद आखिरकार उसके भारत प्रत्यर्पण की मंजूरी दी। इसके बाद NIA की एक विशेष टीम अमेरिका गई, जहां उसने अमेरिकी अधिकारियों के साथ सारे कागजात और कानूनी प्रक्रियाएं पूरी कीं। इसके बाद उसे फ्लाइट से भारत लाया गया। निष्कर्ष तहव्वुर राणा की गिरफ्तारी और भारत लाया जाना देश की सुरक्षा एजेंसियों के लिए एक बड़ी कामयाबी है। अब सबकी निगाहें NIA की पूछताछ पर हैं, जिससे आने वाले दिनों में कई बड़े खुलासे हो सकते हैं। यह केस न सिर्फ 26/11 के घावों को भरने की दिशा में एक कदम है, बल्कि आतंकवाद के खिलाफ भारत की अंतरराष्ट्रीय लड़ाई में भी अहम मोड़ साबित हो सकता है। देश हरपल न्यूज़ पर हम ऐसे ही राष्ट्रहित से जुड़ी खबरों को आपके सामने लाते रहेंगे। हमारे साथ जुड़े रहें।
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Tahawwur Rana Extradition LIVE Updates:दिल्ली एयरपोर्ट पर उतरा विमान, एनआईए मुख्यालय ले जाया जायेगा

रिपोर्ट: देश हरपल न्यूज़ | तारीख: 30 मार्च 2025 26/11 मुंबई हमलों के मास्टरमाइंड और भारत के वांछित आतंकवादी तहव्वुर हुसैन राणा को अमेरिका से भारत लाने की लंबी प्रक्रिया के बाद आज आखिरकार प्रत्यर्पित कर लिया गया। राणा को लेकर आ रहा विमान आज सुबह दिल्ली के इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर लैंड हुआ। राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) की एक विशेष टीम पहले से एयरपोर्ट पर तैनात थी, जिसने सुरक्षा के कड़े इंतजामों के बीच उसे हिरासत में लिया और सीधे एनआईए हेडक्वार्टर ले जायागा । कौन है तहव्वुर राणा? तहव्वुर हुसैन राणा एक पाकिस्तानी मूल का कनाडाई नागरिक है, जो अमेरिका में रह रहा था। उसे अमेरिका में आतंकवाद से जुड़े एक अन्य मामले में दोषी ठहराया गया था। राणा, मुंबई हमलों के मुख्य साजिशकर्ता और लश्कर-ए-तैयबा के ऑपरेटिव डेविड कोलमैन हेडली का करीबी साथी रहा है। हेडली की गवाही के अनुसार, राणा को भारत में हमलों की साजिश की पूरी जानकारी थी और उसने अमेरिकी यात्रा दस्तावेजों के माध्यम से हेडली को भारत में दाखिल होने में मदद की थी। कई वर्षों की कानूनी लड़ाई के बाद हुई प्रत्यर्पण प्रक्रिया भारत सरकार ने 2011 में अमेरिका से राणा के प्रत्यर्पण की मांग की थी, लेकिन अमेरिकी अदालत में इस प्रक्रिया में कई अड़चनें आईं। वर्ष 2020 में अमेरिका में उसे फिर से गिरफ्तार किया गया और आखिरकार अमेरिका की अदालत ने भारत को राणा के प्रत्यर्पण की अनुमति दे दी। इस ऐतिहासिक फैसले के बाद एनआईए ने उसकी कस्टडी के लिए विस्तृत योजना तैयार की। एनआईए मुख्यालय में शुरू होगी पूछताछ राणा को एनआईए के दिल्ली स्थित मुख्यालय में ले जायागा , जहां उससे 26/11 हमलों से जुड़ी विस्तृत पूछताछ की जाएगी। सूत्रों के अनुसार, राणा से भारत में मौजूद अन्य संभावित आतंकियों और पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी ISI से उसके संबंधों को लेकर भी पूछताछ की जाएगी। एनआईए की टीम उससे उन तमाम ईमेल, नक्शों, लोकेशनों और साजिश की गहराई तक जुड़ी जानकारी निकालने की कोशिश करेगी, जो अब तक रहस्य में थी। भारत की न्याय प्रणाली के लिए अहम मोड़ तहव्वुर राणा का प्रत्यर्पण भारत की आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में एक बड़ी सफलता मानी जा रही है। यह संदेश देता है कि भारत अपने नागरिकों पर हमले करने वाले किसी भी आतंकी को छोड़ने वाला नहीं है, चाहे वह दुनिया के किसी भी कोने में क्यों न हो। देश हरपल की टीम इस मामले पर लगातार नजर बनाए हुए है। तहव्वुर राणा से पूछताछ के हर अहम अपडेट के लिए हमारे साथ जुड़े रहें। Breaking Updates, राष्ट्रहित की खबरें और हरपल की जानकारी के लिए जुड़े रहें — देश हरपल न्यूज़
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कोल्लम मंदिर में RSS के प्रार्थना गीत को लेकर विवाद: मंदिर कमेटी भंग करने की प्रक्रिया शुरू, पुलिस ने मामला दर्ज किया

कोल्लम, केरल | देश हरपल न्यूज | 8 अप्रैल 2025 कोल्लम जिले के एक मंदिर में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) का प्रार्थना गीत बजाए जाने को लेकर नया विवाद खड़ा हो गया है। घटना चटयमंगलम तालुक के अंतर्गत आने वाले वझाप्पल्ली मंदिर की है, जहां एक कार्यक्रम के दौरान संघ का पारंपरिक गीत “नमस्ते सदा वत्सले मातृभूमे” बजाया गया। इस पर वामपंथी दल सीपीएम और उनके समर्थकों ने तीखी आपत्ति जताई, जिसके चलते विवाद गहराता गया। घटना का विवरण: मंदिर में पारंपरिक अनुष्ठानों के दौरान यह गीत बजाया गया, जिसे कुछ स्थानीय लोगों ने रिकॉर्ड कर सोशल मीडिया पर वायरल कर दिया। इसके बाद सीपीएम कार्यकर्ताओं ने इसे ‘संघीकरण’ का प्रयास करार देते हुए तीव्र विरोध जताया। हालांकि, मंदिर का प्रबंधन देख रही देवस्वंम बोर्ड के अधीनस्थ चटयमंगलम सबग्रुप ऑफिसर दीप्ती ने कहा कि इस घटना को लेकर किसी ने कोई आधिकारिक शिकायत दर्ज नहीं कराई है। पुलिस ने दर्ज किया मामला: मामले की गंभीरता को देखते हुए स्थानीय पुलिस ने स्वतः संज्ञान लेते हुए केरल मंदिर अधिनियम और धार्मिक सौहार्द बनाए रखने से संबंधित धाराओं के तहत केस दर्ज कर लिया है। पुलिस जांच कर रही है कि किसकी अनुमति से यह गीत बजाया गया और क्या इससे मंदिर परंपराओं का उल्लंघन हुआ है। मंदिर कमेटी होगी भंग: केरल ट्रावणकोर देवस्वंम बोर्ड (TDB) ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए मंदिर समिति को भंग करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। TDB के अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि मंदिरों में राजनीतिक या वैचारिक झुकाव के प्रदर्शन की अनुमति नहीं दी जा सकती, चाहे वह किसी भी विचारधारा से संबंधित हो। राजनीतिक प्रतिक्रिया: स्थानीय लोगों की प्रतिक्रिया: स्थानीय लोगों में इस मुद्दे को लेकर मिश्रित प्रतिक्रियाएं हैं। कुछ लोगों का मानना है कि मंदिरों में इस तरह के गीत बजाना कोई अपराध नहीं है, जबकि कुछ लोगों ने इसे धार्मिक स्थलों का राजनीतिक उपयोग बताया है। 🔗 स्रोत: मातृभूमि समाचार, ANI न्यूज़
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22 की उम्र में बनीं IPS, 28 में दिया इस्तीफा: बिहार की ‘लेडी सिंघम’ काम्या मिश्रा की पूरी कहानी

बिहार कैडर की तेजतर्रार आईपीएस अधिकारी काम्या मिश्रा एक बार फिर सुर्खियों में हैं। मात्र 22 साल की उम्र में यूपीएससी परीक्षा पास कर आईपीएस बनीं काम्या ने अब 28 वर्ष की उम्र में अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। उनके इस फैसले ने न केवल प्रशासनिक हलकों बल्कि आम जनता के बीच भी हलचल मचा दी है। सवाल उठ रहे हैं कि आखिर क्यों एक काबिल और लोकप्रिय अधिकारी ने छह साल की सेवा के बाद पुलिस विभाग को अलविदा कह दिया? आइए जानते हैं उनकी पूरी कहानी। शुरुआत से लेकर आईपीएस बनने तक काम्या मिश्रा बिहार के एक प्रतिष्ठित परिवार से ताल्लुक रखती हैं। शुरू से ही पढ़ाई में अव्वल रहने वाली काम्या ने बेहद कम उम्र में यूपीएससी परीक्षा पास कर देश की सबसे कठिन परीक्षा में अपना लोहा मनवाया। 22 साल की उम्र में जब ज्यादातर युवा अपने करियर की दिशा तय कर रहे होते हैं, तब उन्होंने भारतीय पुलिस सेवा (IPS) में कदम रख लिया था। बिहार कैडर मिलने के बाद उन्होंने कई महत्वपूर्ण जिलों में अपनी सेवाएं दीं। उनकी कार्यशैली, बेबाक अंदाज और निष्पक्ष रवैया लोगों के बीच काफी लोकप्रिय रहा। अपराधियों के खिलाफ उनकी सख्त कार्रवाई के चलते लोग उन्हें ‘लेडी सिंघम’ के नाम से बुलाने लगे। पुलिस सेवा में शानदार कार्यकाल काम्या मिश्रा ने बिहार के कई संवेदनशील जिलों में अपनी सेवाएं दीं। अपराध और भ्रष्टाचार पर उनकी कड़ी निगरानी ने उन्हें जनता के बीच खास पहचान दिलाई। महिला सुरक्षा को लेकर किए गए उनके प्रयासों की भी खूब सराहना हुई। उन्होंने कई जिलों में महिला हेल्पलाइन और स्पेशल टास्क फोर्स के जरिए महिलाओं के खिलाफ होने वाले अपराधों पर लगाम लगाने की कोशिश की। उनका नाम तब और ज्यादा चर्चा में आया जब उन्होंने संगठित अपराधियों के खिलाफ कड़ा रुख अपनाया। कई बार उनकी पोस्टिंग राजनीतिक दबाव में भी चर्चा का विषय बनी, लेकिन उन्होंने कभी भी अपने सिद्धांतों से समझौता नहीं किया। आखिर क्यों दिया इस्तीफा? काम्या मिश्रा के अचानक इस्तीफे ने सभी को चौंका दिया। सूत्रों के मुताबिक, उन्होंने पिछले साल अगस्त में ही इस्तीफा देने का मन बना लिया था और इसकी वजह पारिवारिक कारण बताए जा रहे हैं। हालांकि, कुछ मीडिया रिपोर्ट्स का कहना है कि काम्या मिश्रा प्रशासनिक व्यवस्था से संतुष्ट नहीं थीं और उनकी कार्यशैली को लेकर अक्सर राजनीतिक दबाव बनाया जाता था। हालांकि, उन्होंने खुद अभी तक अपने इस्तीफे की असली वजह सार्वजनिक रूप से नहीं बताई है। लेकिन यह तय है कि बिहार की ‘लेडी सिंघम’ के रूप में मशहूर काम्या मिश्रा का यह फैसला पुलिस सेवा के लिए एक बड़ी क्षति मानी जा रही है। आगे क्या करेंगी काम्या मिश्रा? काम्या मिश्रा के आगे की योजनाओं को लेकर कई तरह की अटकलें लगाई जा रही हैं। कुछ लोगों का मानना है कि वे शिक्षा या सामाजिक सेवा के क्षेत्र में आगे बढ़ सकती हैं, जबकि कुछ रिपोर्ट्स के मुताबिक, वे निजी क्षेत्र में बड़ी जिम्मेदारी संभाल सकती हैं। बहरहाल, उनकी आगे की राह चाहे जो भी हो, लेकिन काम्या मिश्रा का नाम उन गिने-चुने अधिकारियों में शामिल रहेगा जिन्होंने ईमानदारी और कर्तव्यनिष्ठा के साथ अपनी सेवा दी। उनके फैसले को लेकर चर्चाओं का दौर जारी है और जनता उनके भविष्य को लेकर उत्सुकता से इंतजार कर रही है। देश हरपल के लिए विशेष रिपोर्ट
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क्या राणा सांगा ने बाबर को भारत आने का निमंत्रण दिया था? इतिहासकारों की राय और प्रमाण

देश हरपल एक्सक्लूसिव मुगल साम्राज्य के संस्थापक बाबर का भारत आगमन इतिहास के सबसे चर्चित विषयों में से एक है। एक लंबे समय से यह चर्चा होती रही है कि क्या मेवाड़ के राजा राणा सांगा ने वास्तव में बाबर को भारत पर आक्रमण करने के लिए आमंत्रित किया था या नहीं। इस सवाल का जवाब खोजने के लिए हमने कई प्रामाणिक ऐतिहासिक स्रोतों और इतिहासकारों की राय को खंगाला। क्या था ऐतिहासिक परिप्रेक्ष्य? 16वीं शताब्दी के प्रारंभ में उत्तर भारत छोटे-छोटे राज्यों में बंटा हुआ था। दिल्ली की सत्ता लोदी वंश के हाथों में थी, लेकिन सुल्तान इब्राहिम लोदी के खिलाफ कई विरोधी शासक थे, जिनमें राणा सांगा प्रमुख थे। दूसरी ओर, बाबर मध्य एशिया का एक शक्तिशाली शासक था, जिसने समरकंद और काबुल पर शासन किया था और उसकी नजरें हिंदुस्तान पर थीं। इतिहासकारों की राय और प्रमुख ग्रंथों का उल्लेख खानवा की लड़ाई: विश्वासघात या गलतफहमी? निष्कर्ष इतिहासकारों और प्रामाणिक ग्रंथों के अध्ययन से स्पष्ट होता है कि राणा सांगा ने बाबर को भारत आने का कोई औपचारिक निमंत्रण नहीं दिया था। हां, इब्राहिम लोदी के खिलाफ एक अनकहा गठबंधन जरूर था, लेकिन बाबर ने भारत पर अपने हितों के कारण आक्रमण किया था, न कि राणा सांगा के निमंत्रण पर। बाद में जब राणा सांगा को एहसास हुआ कि बाबर वापस नहीं जाने वाला, तो उन्होंने उसके खिलाफ युद्ध किया। (लेखक: देश हरपल न्यूज़ डेस्क)
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Kiran Rijiju

वक्फ संशोधन बिल पर किरन रिजिजू का बड़ा बयान: ‘विरोध करने वाले करोड़ों की जमीन पर काबिज’, जानिए पूरा मामला

नई दिल्ली: वक्फ संशोधन बिल को लेकर देशभर में बहस तेज हो गई है। इस बीच, केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने इस मुद्दे पर बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि जो लोग इस बिल का विरोध कर रहे हैं, वे खुद करोड़ों की जमीन पर अवैध कब्जा जमाए बैठे हैं। क्या है वक्फ संशोधन बिल? वक्फ संशोधन बिल 2023 को लेकर संसद में चर्चा जोरों पर है। सरकार का कहना है कि यह बिल वक्फ संपत्तियों से जुड़े विवादों को हल करने और पारदर्शिता लाने के लिए लाया गया है। इस बिल के जरिए वक्फ बोर्डों को दी जाने वाली कुछ विशेष शक्तियों में बदलाव किया गया है, जिससे संपत्ति विवादों को सुलझाने में आसानी होगी। किरन रिजिजू ने क्या कहा? केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने एक इंटरव्यू में कहा कि जो लोग इस बिल का विरोध कर रहे हैं, वे खुद करोड़ों रुपये की जमीन पर अवैध रूप से काबिज हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि वक्फ की आड़ में कई जगहों पर अवैध कब्जे हुए हैं और सरकार इन मामलों को ठीक करने के लिए यह कानून ला रही है। केरल के बिशप का समर्थन केरल के कैथोलिक बिशप ने भी वक्फ संशोधन बिल का समर्थन किया है। उन्होंने कहा कि वक्फ संपत्तियों को लेकर कई राज्यों में विवाद हैं और इस बिल से इस समस्या का हल निकल सकता है। विपक्ष का विरोध क्यों? विपक्षी दलों का कहना है कि यह बिल मुस्लिम समुदाय की संपत्तियों के खिलाफ है और इससे उनके अधिकारों का हनन होगा। वहीं, सरकार का कहना है कि यह बिल केवल पारदर्शिता और न्याय सुनिश्चित करने के लिए लाया गया है। सरकार की मंशा क्या है? सरकार का कहना है कि वक्फ संपत्तियों पर अनियमितताओं और अवैध कब्जों को रोकने के लिए इस बिल की जरूरत है। सरकार ने यह भी स्पष्ट किया कि इससे किसी भी धर्म विशेष के अधिकारों का उल्लंघन नहीं होगा। आगे क्या होगा? वक्फ संशोधन बिल पर संसद में बहस जारी है। यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या यह बिल पास होता है या विपक्षी विरोध के कारण इसमें और बदलाव किए जाते हैं।
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PM pays tribute to RSS founders in Nagpur

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का नागपुर दौरा: संघ संस्थापकों को श्रद्धांजलि, माधव नेत्रालय के कार्यक्रम में संबोधन

नागपुर, 30 मार्च: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने नागपुर दौरे के दौरान राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के संस्थापकों को श्रद्धांजलि अर्पित की और माधव नेत्रालय के एक विशेष कार्यक्रम में लोगों को संबोधित किया। इस अवसर पर उन्होंने चिकित्सा सेवा, सामाजिक योगदान और भारत के दृष्टिहीन नागरिकों के लिए सरकार द्वारा किए जा रहे प्रयासों पर प्रकाश डाला। संघ संस्थापकों को पुष्पांजलि प्रधानमंत्री मोदी ने नागपुर स्थित केशव कुंज पहुंचकर संघ के संस्थापकों डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार और माधव सदाशिव गोलवलकर (गुरुजी) को पुष्पांजलि अर्पित की। यह स्थान राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का ऐतिहासिक केंद्र माना जाता है, जहां से संघ की विचारधारा और राष्ट्र निर्माण की दिशा में कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए जाते हैं। माधव नेत्रालय के कार्यक्रम में PM मोदी का संबोधन इसके बाद प्रधानमंत्री माधव नेत्रालय के एक कार्यक्रम में पहुंचे, जहां उन्होंने समाज के जरूरतमंद लोगों के लिए इस संस्थान की सेवाओं की सराहना की। अपने संबोधन में उन्होंने कहा,“माधव नेत्रालय केवल नेत्रों का इलाज करने का केंद्र नहीं, बल्कि समाज की सेवा का एक बड़ा उदाहरण है। दृष्टिहीनता को कम करने के लिए किए जा रहे प्रयास सराहनीय हैं।” प्रधानमंत्री ने यह भी बताया कि सरकार की विभिन्न योजनाओं के तहत देशभर में आंखों की बीमारियों से बचाव और इलाज के लिए बड़े स्तर पर कार्य किया जा रहा है। उन्होंने आयुष्मान भारत योजना, डिजिटल हेल्थ मिशन और स्वास्थ्य सुविधाओं को मजबूत करने के लिए सरकार की प्रतिबद्धता को दोहराया। राष्ट्रीय सेवा और स्वास्थ्य के क्षेत्र में योगदान प्रधानमंत्री नेत्रालय के डॉक्टरों, विशेषज्ञों और सामाजिक कार्यकर्ताओं की भी प्रशंसा की, जो नि:स्वार्थ भाव से जरूरतमंदों की मदद कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य सेवा और समाज सेवा के क्षेत्र में नागपुर जैसे शहरों की भूमिका बहुत महत्वपूर्ण है, और यह संस्थान इस दिशा में एक मिसाल कायम कर रहा है। नागपुर दौरे का महत्व प्रधानमंत्री मोदी का यह दौरा कई मायनों में अहम माना जा रहा है। संघ के गढ़ नागपुर में उनकी उपस्थिति राजनीतिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है, क्योंकि आने वाले चुनावों में इससे भाजपा और संघ के संबंधों को नई ऊर्जा मिलने की संभावना जताई जा रही है। प्रधानमंत्री का यह दौरा केवल श्रद्धांजलि और संबोधन तक सीमित नहीं रहा, बल्कि उन्होंने नागपुरवासियों को यह संदेश दिया कि सरकार स्वास्थ्य, सेवा और समाज कल्याण के लिए निरंतर प्रयासरत है। (देश हरपल न्यूज के लिए विशेष रिपोर्ट)
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Gold

Gold Price Today: सोने के दाम में बड़ी गिरावट, 10 ग्राम का भाव ₹1.43 लाख पर

सोना (Gold) और चांदी (Silver) खरीदने का इंतजार कर रहे लोगों के लिए राहत की खबर है। पिछले तीन दिनों में दोनों कीमती धातुओं के भाव में अच्छी-खासी गिरावट आई है। सोना करीब ₹3,000 और चांदी लगभग ₹9,000 तक सस्ती हुई है। ऐसे में शादी-ब्याह के लिए गहने खरीदने या निवेश की योजना बना रहे लोगों की नजर अब बाजार के अगले रुख पर है। 22 अक्टूबर 2026 के बाजार अपडेट के मुताबिक, 10 ग्राम सोने की कीमत करीब ₹1.43 लाख और चांदी का भाव लगभग ₹2.01 लाख प्रति किलो बताया जा रहा है। हालांकि, अलग-अलग बाजारों में कीमतों का अंतर हो सकता है। Gold Rate Today: ₹1.43 लाख पर पहुंचा 10 ग्राम सोना Gold Price में आई गिरावट से खरीदारों को कुछ राहत जरूर मिली है। बीते तीन दिनों में भाव करीब ₹3,000 नीचे आने से उन लोगों के लिए खरीदारी का मौका बन सकता है, जो लंबे समय से कीमतें कम होने का इंतजार कर रहे थे। हालांकि, सोना खरीदने से पहले अपने शहर का ताजा भाव जरूर पता कर लें। 24 कैरेट सोने की कीमत और गहने बनाने में इस्तेमाल होने वाले 22 कैरेट सोने के भाव में अंतर होता है। इसके अलावा ज्वेलरी खरीदते समय मेकिंग चार्ज और GST भी देना पड़ता है। Silver Rate Today: चांदी ₹9,000 तक हुई सस्ती सोने के साथ चांदी की कीमतों में भी गिरावट देखने को मिली है। पिछले तीन दिनों में चांदी करीब ₹9,000 तक सस्ती हुई है और इसका भाव लगभग ₹2.01 लाख प्रति किलो के स्तर पर बताया जा रहा है। चांदी की कीमतों में उतार-चढ़ाव का असर उन ग्राहकों पर भी पड़ता है, जो त्योहारों पर चांदी के सिक्के, बर्तन या दूसरे सामान खरीदते हैं। हालांकि, खरीदारी से पहले स्थानीय बाजार में चांदी का ताजा भाव और शुद्धता की जानकारी लेना जरूरी है। सोना-चांदी के दाम क्यों गिर रहे हैं? Gold or Silver की कीमतें केवल घरेलू मांग से तय नहीं होतीं। अंतरराष्ट्रीय बाजार में होने वाले बदलाव, डॉलर की चाल, रुपये की स्थिति और ब्याज दरों को लेकर निवेशकों की उम्मीदें भी इनके भाव पर असर डालती हैं। जब अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने-चांदी की कीमतें कमजोर होती हैं, तो भारतीय बाजार में भी इसका असर दिखाई दे सकता है। इसके अलावा मुनाफावसूली के कारण भी कीमतों में गिरावट आ सकती है। हालांकि, बाजार में आई गिरावट की किसी एक वजह को जिम्मेदार ठहराना सही नहीं होगा। कीमतों की चाल कई आर्थिक और वैश्विक कारकों पर निर्भर करती है। क्या अभी सोना और चांदी खरीदना सही रहेगा? अगर आप शादी या त्योहार के लिए गहने खरीदने की योजना बना रहे हैं, तो मौजूदा गिरावट आपके लिए राहत की बात हो सकती है। लेकिन केवल तीन दिन की गिरावट देखकर यह मान लेना ठीक नहीं है कि आगे भी भाव लगातार कम होंगे। खरीदारी से पहले अलग-अलग ज्वेलर्स के रेट की तुलना करें। सोने पर हॉलमार्क और शुद्धता की जांच करें तथा बिल में मेकिंग चार्ज और GST का पूरा विवरण देखें। निवेश के लिहाज से भी जल्दबाजी करने के बजाय अपने बजट और जोखिम उठाने की क्षमता को ध्यान में रखना बेहतर है। आगे Gold-Silver Price में क्या बदलाव हो सकता है? आने वाले दिनों में अंतरराष्ट्रीय बाजार का रुख, अमेरिकी डॉलर, ब्याज दरों से जुड़ी खबरें और रुपये की चाल सोने-चांदी की कीमतों को प्रभावित कर सकती हैं। ऐसे में भाव में फिर तेजी आने या गिरावट जारी रहने, दोनों की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। कुल मिलाकर, तीन दिनों में सोने और चांदी के दाम में आई गिरावट ने खरीदारों को थोड़ी राहत दी है। अगर आप आज खरीदारी करने जा रहे हैं, तो पहले अपने शहर का ताजा भाव जरूर जांच लें, क्योंकि बाजार भाव और ज्वेलरी की अंतिम कीमत में अंतर हो सकता है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
Amit Shah

Amit Shah Statement: धरने से कुछ नहीं होगा, जनता के बीच जाएं- विपक्ष को शाह की सलाह

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह (Amit Shah) ने कांग्रेस और विपक्षी दलों पर निशाना साधते हुए कहा कि सिर्फ धरना-प्रदर्शन करने से जनता का भरोसा नहीं जीता जा सकता। अगर विपक्ष को राजनीति में आगे बढ़ना है, तो उसे जनता के बीच जाकर काम करना होगा। शाह ने कांग्रेस को लेकर दावा किया कि पार्टी अगले 30 साल तक सत्ता में नहीं लौट पाएगी। उन्होंने अपने बयान में राहुल गांधी का नाम नहीं लिया, लेकिन उनकी राजनीति और विपक्ष के विरोध प्रदर्शनों पर सवाल उठाए। अमित शाह का यह बयान ऐसे समय आया है, जब देश में चुनाव प्रक्रिया, मतदाता सूची और कथित वोट चोरी को लेकर भाजपा और विपक्ष के बीच सियासी टकराव जारी है। कांग्रेस लगातार चुनाव आयोग से जवाब मांग रही है, जबकि भाजपा विपक्ष के आरोपों को राजनीतिक हताशा से जोड़ रही है। Amit Shah Statement: कांग्रेस पर क्यों बरसे गृह मंत्री? अमित शाह ने अपने संबोधन में कांग्रेस की राजनीति पर सवाल उठाते हुए कहा कि चुनाव जीतने के लिए केवल विरोध प्रदर्शन करना काफी नहीं है। राजनीतिक दलों को जनता की समस्याओं को समझना और उनके समाधान के लिए काम करना चाहिए। शाह के मुताबिक, विपक्ष को अपनी चुनावी हार की वजहों पर विचार करना चाहिए। उन्होंने कांग्रेस की राजनीतिक रणनीति पर निशाना साधते हुए दावा किया कि पार्टी की मौजूदा राजनीति उसे लंबे समय तक सत्ता से दूर रख सकती है। हालांकि, कांग्रेस के अगले 30 साल तक सत्ता में नहीं आने का बयान अमित शाह का राजनीतिक दावा है। इसे किसी निश्चित चुनावी नतीजे के तौर पर नहीं देखा जा सकता। Rahul Gandhi का नाम लिए बिना क्या बोले अमित शाह? अमित शाह ने राहुल गांधी का नाम लिए बिना विपक्ष के धरने और प्रदर्शनों पर टिप्पणी की। उनके बयान को कांग्रेस और राहुल गांधी की ओर से चुनाव आयोग के खिलाफ उठाए जा रहे सवालों के जवाब के रूप में देखा जा रहा है। शाह का कहना है कि विपक्ष को जनता के बीच जाकर अपना समर्थन बढ़ाना चाहिए। केवल आरोप लगाने या सड़कों पर उतरने से चुनावी राजनीति में सफलता नहीं मिलती। दूसरी तरफ, कांग्रेस का तर्क है कि चुनाव प्रक्रिया में पारदर्शिता बनाए रखना जरूरी है। पार्टी और INDIA गठबंधन के नेता मतदाता सूची में कथित गड़बड़ियों को लेकर सवाल उठाते रहे हैं। Vote Chori और SIR पर भाजपा-विपक्ष में टकराव देश की राजनीति में वोट चोरी और SIR यानी Special Intensive Revision का मुद्दा लगातार चर्चा में है। राहुल गांधी समेत कई विपक्षी नेताओं ने मतदाता सूची में नाम हटाए जाने और चुनावी प्रक्रिया से जुड़ी कथित अनियमितताओं पर सवाल उठाए हैं। विपक्ष का कहना है कि इन मामलों में स्पष्ट जवाब मिलना चाहिए। वहीं, भाजपा इन आरोपों को खारिज करती रही है और विपक्ष पर चुनावी हार के बाद संस्थाओं पर सवाल उठाने का आरोप लगाती है। इस विवाद में दोनों पक्षों के अपने-अपने दावे हैं। मतदाता सूची से जुड़े आरोपों की सच्चाई समझने के लिए आधिकारिक आंकड़ों, चुनाव आयोग के जवाब और उपलब्ध प्रमाणों को देखना जरूरी है। चुनाव आयोग को लेकर भी जारी है सियासी लड़ाई मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और चुनाव आयोग को लेकर कांग्रेस तथा अन्य विपक्षी दलों का विरोध पहले भी सामने आ चुका है। विपक्ष ने मतदाता सूची और चुनावी प्रक्रिया में कथित गड़बड़ियों पर जवाब मांगा है। वहीं, भाजपा का कहना है कि चुनावी नतीजों को लेकर बेबुनियाद आरोप लगाने के बजाय विपक्ष को अपनी रणनीति पर ध्यान देना चाहिए। इस मुद्दे ने भाजपा और INDIA गठबंधन के बीच राजनीतिक बहस को और तेज कर दिया है। आने वाले समय में यह विवाद चुनावी भाषणों और विपक्षी अभियानों में भी अहम भूमिका निभा सकता है। Amit Shah ने AAP पर भी साधा निशाना अमित शाह ने अपने संबोधन में आम आदमी पार्टी (AAP) की राजनीति पर भी सवाल उठाए। उन्होंने विपक्षी दलों को सलाह दी कि वे आरोप-प्रत्यारोप से आगे बढ़कर जनता के लिए काम करें। दिल्ली की राजनीति में भाजपा और आम आदमी पार्टी के बीच लंबे समय से टकराव रहा है। ऐसे में शाह का बयान विपक्ष पर राजनीतिक दबाव बनाने के साथ-साथ भाजपा के चुनावी संदेश को मजबूत करने की कोशिश के रूप में भी देखा जा रहा है। आगे क्या होगा? कांग्रेस के सामने क्या चुनौती है? अमित शाह के बयान से साफ है कि भाजपा कांग्रेस और दूसरे विपक्षी दलों के विरोध प्रदर्शनों को लेकर आक्रामक रुख अपनाए हुए है। दूसरी ओर, कांग्रेस चुनाव आयोग और मतदाता सूची से जुड़े मुद्दों पर जवाब मांगने की अपनी रणनीति पर कायम है। अब नजर इस बात पर रहेगी कि विपक्ष अपने आरोपों के समर्थन में क्या तथ्य सामने रखता है और चुनाव आयोग इन सवालों पर क्या जवाब देता है। साथ ही, यह भी देखना होगा कि इन मुद्दों का आने वाले चुनावों में मतदाताओं पर कितना असर पड़ता है। फिलहाल, अमित शाह का 30 साल वाला बयान राजनीतिक चर्चा का विषय बन गया है। लेकिन आखिरकार चुनाव में किसे जनता का समर्थन मिलेगा, इसका फैसला मतदाता ही करेंगे। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
Ranbir Kapoor

Ranbir Kapoor Controversy: सच्चाई और अच्छाई पर गलत बोल गए रणबीर, अब मांगी माफी

बॉलीवुड एक्टर रणबीर कपूर (Ranbir Kapoor) अपने एक बयान को लेकर चर्चा में हैं। दशहरे के मौके पर कोलकाता में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान उन्होंने सच्चाई और अच्छाई को लेकर कुछ ऐसा कह दिया, जिस पर सोशल मीडिया पर सवाल उठने लगे। वीडियो वायरल हुआ तो लोगों ने उन्हें ट्रोल करना शुरू कर दिया। अब रणबीर कपूर ने अपनी गलती स्वीकार करते हुए माफी मांगी है। उन्होंने सफाई दी कि बोलते समय उनकी जुबान फिसल गई थी और वह कुछ और कहना चाहते थे। दशहरे पर क्या बोल गए रणबीर कपूर? दरअसल, दशहरे के मौके पर Ranbir Kapoor कोलकाता में एक कार्यक्रम में शामिल हुए थे। इस दौरान वह बुराई पर अच्छाई की जीत के संदेश के बारे में बात कर रहे थे। लेकिन अपनी बात रखते समय वह ‘सच्चाई और अच्छाई की जीत’ की जगह उनके अंत होने जैसी बात कह गए। उनके इस बयान का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गया। इसके बाद कई यूजर्स ने उनके शब्दों पर सवाल उठाए, तो कुछ ने मजाकिया अंदाज में प्रतिक्रिया दी। मामला इसलिए भी चर्चा में आया क्योंकि रणबीर कपूर अपनी आगामी फिल्म ‘रामायण’ में भगवान राम की भूमिका निभा रहे हैं। ट्रोलिंग के बाद Ranbir Kapoor ने मांगी माफी बयान को लेकर विवाद बढ़ने के बाद रणबीर कपूर ने चेन्नई में आयोजित ‘रामायण’ के म्यूजिकल इवेंट में इस पर सफाई दी। उन्होंने माना कि उस समय बोलते हुए उनकी जुबान फिसल गई थी। Ranbir ने बताया कि वह कहना चाहते थे कि बुराई कितनी भी ताकतवर क्यों न हो, आखिरकार जीत सच्चाई और अच्छाई की ही होती है। लेकिन शब्दों के गलत इस्तेमाल के कारण उनकी बात का अर्थ बदल गया। उन्होंने अपनी गलती के लिए माफी भी मांगी। अभिनेता ने हल्के-फुल्के अंदाज में यह भी समझाया कि कभी-कभी वह कहना कुछ चाहते हैं, लेकिन उनके मुंह से कुछ और निकल जाता है। उनकी इस सफाई के बाद यह साफ हुआ कि उनका इरादा दशहरे के संदेश के उलट बात कहने का नहीं था। Social Media पर क्यों होने लगे Ranbir Kapoor ट्रोल? Ranbir Kapoor का वीडियो सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर प्रतिक्रियाओं की बाढ़ आ गई। कुछ लोगों ने इसे जुबान फिसलने की सामान्य गलती बताया, जबकि कुछ यूजर्स ने सार्वजनिक मंच पर बोलते समय ज्यादा सावधानी बरतने की बात कही। फिल्म ‘रामायण’ में भगवान राम का किरदार निभाने की वजह से भी यह बयान लोगों के बीच चर्चा का विषय बन गया। हालांकि, रणबीर ने ज्यादा देर तक इस मामले पर चुप रहने के बजाय अपनी बात स्पष्ट की और गलती स्वीकार कर ली। Ranbir Kapoor की अपकमिंग फिल्म Ramayana भी चर्चा में रणबीर कपूर इन दिनों निर्देशक नितेश तिवारी की फिल्म ‘रामायण’ को लेकर भी सुर्खियों में हैं। फिल्म में साई पल्लवी माता सीता, यश रावण, सनी देओल हनुमान और रवि दुबे लक्ष्मण की भूमिका में नजर आएंगे। फिल्म के पहले भाग की रिलीज 5 नवंबर 2026 को तय बताई गई है। ऐसे में फिल्म के प्रमोशन के दौरान रणबीर कपूर के बयान ने भी लोगों का ध्यान खींचा है। Ranbir Kapoor Controversy: क्या है पूरा मामला? इस पूरे विवाद की शुरुआत दशहरे के कार्यक्रम में बोले गए गलत शब्दों से हुई। सोशल मीडिया पर वीडियो वायरल होने के बाद रणबीर कपूर को आलोचनाओं का सामना करना पड़ा। इसके बाद उन्होंने सफाई देते हुए कहा कि उनकी जुबान फिसल गई थी और वह अच्छाई व सच्चाई की जीत की बात कर रहे थे। फिलहाल, रणबीर कपूर की माफी के बाद इस मामले में उनकी सफाई सामने आ चुकी है। अब दर्शकों की नजर उनकी फिल्म ‘रामायण’ पर है, जिसे लेकर पहले से ही काफी उत्सुकता बनी हुई है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!

छत्तीसगढ़ में परीक्षा में नकल और गड़बड़ी के मामलों की सुनवाई के लिए 3 स्पेशल कोर्ट गठित

छत्तीसगढ़ में प्रतियोगी परीक्षाओं और अन्य सार्वजनिक परीक्षाओं में नकल व गड़बड़ी से जुड़े मामलों की सुनवाई के लिए तीन स्पेशल कोर्ट बनाई गई हैं। राज्य शासन ने रायपुर, बिलासपुर और कोरिया के डिस्ट्रिक्ट एंड सेशंस कोर्ट को विशेष अदालत के रूप में नामित किया है। कोरिया जिले की स्पेशल कोर्ट बैकुंठपुर में होगी। इस संबंध में कानून एवं विधायी कार्य विभाग ने अधिसूचना जारी की है। इन अदालतों में सार्वजनिक परीक्षाओं के दौरान नकल और अनुचित तरीकों के इस्तेमाल से जुड़े मामलों की सुनवाई की जाएगी। 2024 के कानून के तहत गठित हुईं विशेष अदालतें राज्य में यह व्यवस्था पब्लिक एग्जामिनेशन (प्रिवेंशन ऑफ अनफेयर मीन्स) एक्ट, 2024 के तहत की गई है। अधिसूचना में कानून की धारा 12-क की उपधारा (2) का उल्लेख किया गया है। इसी प्रावधान के तहत राज्य शासन ने तीन जिलों के डिस्ट्रिक्ट एंड सेशंस कोर्ट को स्पेशल कोर्ट के रूप में नामित किया है। इसका उद्देश्य सार्वजनिक परीक्षाओं में अनुचित साधनों से जुड़े मामलों की सुनवाई के लिए विशेष न्यायिक व्यवस्था उपलब्ध कराना है। हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस से परामर्श के बाद जारी हुई अधिसूचना छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश कृष्ण राम महापात्र से परामर्श के बाद राज्य शासन ने यह अधिसूचना जारी की है। हाईकोर्ट के रजिस्ट्रार जनरल रजनीश श्रीवास्तव ने संबंधित जिलों के डिस्ट्रिक्ट एंड सेशंस जजों को अधिसूचना की प्रतियां भेजकर आवश्यक निर्देश दिए हैं। तीनों विशेष अदालतें अपने-अपने न्यायिक क्षेत्राधिकार में आने वाले परीक्षा संबंधी गड़बड़ी के मामलों की सुनवाई करेंगी। इस व्यवस्था के तहत प्रतियोगी परीक्षाओं और अन्य सार्वजनिक परीक्षाओं में नकल या अनुचित तरीकों के इस्तेमाल से जुड़े मामलों को निर्धारित कानूनी प्रक्रिया के अनुसार सुना जाएगा।
Akhilesh Yadav

Akhilesh Yadav Rampur Visit: रामपुर जेल पहुंचे अखिलेश, आजम खान से करेंगे मुलाकात

समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव (Akhilesh Yadav) गुरुवार, 22 अक्टूबर को रामपुर जिला जेल पहुंचे। यहां उनकी पार्टी के वरिष्ठ नेता आजम खान से मुलाकात होनी है। इस दौरे पर राजनीतिक गलियारों की नजरें टिकी हैं। इसकी वजह सिर्फ दोनों नेताओं की मुलाकात नहीं, बल्कि उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले बदलते राजनीतिक समीकरण भी हैं। Akhilesh Yadav के रामपुर पहुंचने के बाद अब सबकी नजर इस बात पर है कि आजम खान से बातचीत के बाद वह क्या कहते हैं और इस मुलाकात से पार्टी के भीतर क्या संदेश जाता है। Akhilesh Yadav कैसे रामपुर पहुंचे ? निर्धारित कार्यक्रम के मुताबिक, अखिलेश यादव (Akhilesh Yadav) लखनऊ से निजी विमान के जरिए बरेली पहुंचे। इसके बाद हेलीकॉप्टर से रामपुर स्थित जौहर विश्वविद्यालय पहुंचे और वहां से जिला जेल के लिए रवाना हुए। कार्यक्रम में आजम खान से मुलाकात के साथ उनके परिवार से मिलने की योजना भी शामिल है। आजम खान की तबीयत और उनके हालात जानने को इस दौरे की अहम वजह बताया गया है। Azam Khan से मुलाकात क्यों है खास? आजम खान समाजवादी पार्टी के पुराने और प्रभावशाली नेताओं में गिने जाते हैं। रामपुर और आसपास के इलाकों में उनकी राजनीतिक पहचान लंबे समय से रही है। ऐसे में अखिलेश यादव का उनसे मिलने पहुंचना पार्टी के कार्यकर्ताओं और समर्थकों के लिए भी महत्वपूर्ण है। पिछले कुछ समय से आजम खान और सपा नेतृत्व के संबंधों को लेकर राजनीतिक चर्चाएं होती रही हैं। उनकी पत्नी तजीन फातिमा की अखिलेश यादव से मुलाकात के बाद रामपुर आने का कार्यक्रम भी चर्चा में रहा। अब दोनों नेताओं की मुलाकात से यह देखने की उत्सुकता है कि उनके बीच किन मुद्दों पर बात होती है और आगे पार्टी की ओर से क्या संदेश दिया जाता है। UP Politics: 2027 चुनाव से पहले बढ़ी हलचल उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 से पहले सभी प्रमुख दल अपने राजनीतिक समीकरण मजबूत करने में जुटे हैं। ऐसे समय में आजम खान से अखिलेश यादव की मुलाकात को पश्चिमी उत्तर प्रदेश की राजनीति के नजरिए से भी देखा जा रहा है। हालांकि, इस मुलाकात में चुनावी रणनीति या संगठन से जुड़े मुद्दों पर चर्चा होगी या नहीं, इसकी आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है। इसलिए इसे किसी बड़े राजनीतिक फैसले से जोड़कर देखना अभी जल्दबाजी होगी। Asaduddin Owaisi के दौरे के बाद चर्चा तेज रामपुर में एआईएमआईएम प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी के दौरे और समाजवादी पार्टी पर उनकी राजनीतिक टिप्पणियों के बाद भी इस मुलाकात को लेकर चर्चा हो रही है। ओवैसी मुस्लिम राजनीति और सपा के नेतृत्व को लेकर सवाल उठाते रहे हैं। ऐसे में अखिलेश यादव और आजम खान की मुलाकात पर राजनीतिक दलों की नजर होना स्वाभाविक है। हालांकि, दोनों नेताओं के बीच बातचीत का वास्तविक एजेंडा सामने आने के बाद ही इसके राजनीतिक मायने स्पष्ट होंगे। Om Prakash Rajbhar के बयान से भी गरमाई सियासत उत्तर प्रदेश सरकार में मंत्री ओम प्रकाश राजभर ने भी अखिलेश यादव के रामपुर दौरे को लेकर टिप्पणी की है। इस बयानबाजी के बीच सपा प्रमुख का आजम खान से मिलना राजनीतिक चर्चा का विषय बन गया है। फिलहाल, इस दौरे को लेकर अलग-अलग राजनीतिक प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। लेकिन अखिलेश यादव और आजम खान की बातचीत के बाद ही यह साफ होगा कि मुलाकात में किन मुद्दों पर चर्चा हुई। मुलाकात के बाद क्या होगा अगला कदम? अखिलेश यादव के रामपुर पहुंचने के बाद अब आजम खान से मुलाकात और उनके परिवार से बातचीत पर सबकी नजर है। समर्थकों को उम्मीद है कि इस मुलाकात से दोनों नेताओं के बीच संवाद को लेकर स्थिति और स्पष्ट होगी। फिलहाल, किसी नई चुनावी रणनीति या बड़े फैसले की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। मुलाकात के बाद अखिलेश यादव का बयान और समाजवादी पार्टी की आगे की गतिविधियां इस दौरे की अहमियत को समझने में मदद करेंगी। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!

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