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Pahalgam Terror Attack

Pahalgam Terror Attack के बाद Pakistan Army Chief को अपने ही देश में झेलना पड़ा विरोध

📰 Desh Harpal | राष्ट्रीय समाचार इस्लामाबाद और पहलगाम के बीच तनाव की कड़ी जुड़ती दिख रही है। Pahalgam Terror Attack- पहलगाम में मंगलवार को हुए आतंकी हमले में 26 निर्दोष लोगों की मौत के बाद, Pakistan Army Chief असीम मुनीर (General Asim Munir) एक बार फिर विवादों में घिर गए हैं। दरअसल, इस हमले से ठीक पाँच दिन पहले उन्होंने इस्लामाबाद में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान कश्मीर को लेकर एक उकसावे वाला बयान दिया था, जिसे भारत ही नहीं, अब उनके अपने देश के सोशल मीडिया यूज़र्स भी खारिज कर रहे हैं। मुनीर ने अपने भाषण में कश्मीर को पाकिस्तान की “गर्दन की नस” बताते हुए कहा था, “हम इसे नहीं भूलेंगे और अपने कश्मीरी भाइयों को संघर्ष में अकेला नहीं छोड़ेंगे।” उन्होंने भारत-पाक विभाजन के पीछे दो-राष्ट्र सिद्धांत को भी सही ठहराते हुए कहा, “हमारे पूर्वजों ने पाकिस्तान इसलिए बनाया क्योंकि हम हिंदुओं से पूरी तरह अलग थे – हमारी परंपराएं, धर्म, सोच, और रीति-रिवाज सब अलग हैं।” लेकिन पहलगाम की इस क्रूर घटना ने उनके इस बयान को कटघरे में खड़ा कर दिया है। सोशल मीडिया पर कई पाकिस्तानी यूज़र्स ने उन्हें घेरते हुए पूछा है कि क्या कश्मीर को लेकर इस तरह की भड़काऊ बातें करना ही समाधान है? कई लोगों ने यह भी कहा कि जब पाकिस्तान खुद आंतरिक उथल-पुथल से जूझ रहा है, तब ऐसे बयानों से क्षेत्रीय शांति को खतरा पैदा करना गैर-जिम्मेदाराना है। एक पाकिस्तानी ट्विटर यूजर ने लिखा, “जब मुल्क में खुद रोटी नसीब नहीं हो रही, तब दूसरों की ‘गर्दन की नस’ पकड़ने की बात करना बेवकूफी नहीं तो और क्या है?” वहीं एक और यूजर ने तीखा सवाल दागा, “आपके बयान के बाद ही 26 बेगुनाह लोग मारे गए। क्या ये ‘भाईचारा’ है?” भारत में इस हमले को लेकर ग़ुस्सा है ही, लेकिन अब पाकिस्तान के भीतर से भी असीम मुनीर को जवाब मिलना यह दर्शाता है कि केवल भारत ही नहीं, उनके अपने देशवासी भी अब युद्धोन्माद और धार्मिक ध्रुवीकरण की राजनीति से थक चुके हैं। 📌 Desh Harpal पर पढ़ते रहिए ऐसे ही निर्भीक और राष्ट्रवादी खबरें।
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Pahalgam Attack Live

Pahalgam Attack Live: पाकिस्तान में बंद होगा भारतीय उच्चायुक्त, सिंधु जल समझौता रोका गया

23 अप्रैल 2025 को जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए भीषण आतंकी हमले के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में कैबिनेट कमेटी ऑन सिक्योरिटी (CCS) की आपात बैठक आयोजित की गई। इस बैठक में भारत की सुरक्षा और पाकिस्तान के साथ संबंधों को लेकर कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए। बैठक में गृह मंत्री अमित शाह, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, विदेश मंत्री एस. जयशंकर, वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण, राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे। बैठक में लिए गए प्रमुख निर्णय निम्नलिखित हैं:​ यह बैठक लगभग तीन घंटे तक चली और इसमें लिए गए निर्णयों से स्पष्ट है कि भारत आतंकवाद के खिलाफ कड़ा रुख अपनाने के लिए प्रतिबद्ध है।​ पहलगाम आतंकी हमले के बाद भारत के कड़े कदम
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Pahalgam terror attack

Pahalgam Terror Attack में शहीद Navy Officer Lt. Vinay Narwal को पत्नी ने दी अंतिम विदाई, कांप उठी हर आंख

भारतीय नौसेना के OFFICER लेफ्टिनेंट विनय नरवाल की पत्नी ने अपने पति को भावभीनी विदाई दी, जो पहलगाम आतंकी हमले में शहीद हो गए थे। दोनों की शादी 16 अप्रैल को हुई थी।हाथ जोड़कर विनती कर रही थीं, “मेरे पति को छोड़ दो!” लेकिन क्रूर आतंकियों ने एक न सुनी और गोलियों से भून दिया। इन आसुओं और चीख का जिम्मेदार कौन? Lt. Vinay Narwal की पत्नी के दर्द को और उनकी हालत को देखिए! महज 6 दिन पहले उनकी शादी हुई थी और हनीमून के लिए वे कश्मीर के पहलगाम गए थे।
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Pahalgam terror attack

Pahalgam terror attack: ‘चाय-पंक्चर-ढाबा-पौनी’, क्या इन पर भरोसा बना इंटेलिजेंस चूक

Intelligence Failure in Pahalgam? Sleeper Cells, Local Informants & TRF Network Exposed Pahalgam terror attack- Intelligence Failure एक बार फिर Jammu-Kashmir की सुरक्षा व्यवस्था पर बड़ा सवाल खड़ा कर रहा है। पहलगाम की बैसरन घाटी में हुए आतंकवादी हमले ने यह स्पष्ट कर दिया है कि आतंकियों के पास सुरक्षा ढांचे, पुलिस मूवमेंट और इलाके की बारीक जानकारियां पहले से मौजूद थीं। मंगलवार दोपहर हुए इस हमले में 26 निर्दोष लोगों की जान चली गई, जबकि 17 लोग घायल हुए। हमले की जिम्मेदारी पाकिस्तान समर्थित आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा की फ्रंट विंग The Resistance Front (TRF) ने ली है। सूत्रों का मानना है कि इस हमले की योजना बड़ी बारीकी से बनाई गई थी। आतंकियों को न सिर्फ गश्त की टाइमिंग की जानकारी थी, बल्कि वे जानते थे कि किस समय सुरक्षा बल मौके पर नहीं होंगे। Sleeper Cells ने आतंकियों को लोकल मूवमेंट, पुलिस चौकी की दूरी और पर्यटकों की मौजूदगी के बारे में पूरी सूचना दी थी। जिन चाय वालों, ढाबा संचालकों, पंक्चर मेकेनिकों और Mule-Pony Operators को आमतौर पर शक के दायरे से बाहर रखा जाता है, वहीं अब सुरक्षा एजेंसियों के लिए चिंता का कारण बनते जा रहे हैं। इन स्थानीय लोगों को पहचानना मुश्किल होता है, क्योंकि वे क्षेत्रीय भाषा जानते हैं, इलाके के भूगोल से वाकिफ हैं और पर्यटकों के साथ सहजता से घुलमिल जाते हैं। Retired Defence Expert Capt. Anil Gaur का कहना है कि ऐसे Sleeper Cells लंबे समय से घाटी में सक्रिय हैं। साल 2020 में भारतीय खुफिया एजेंसियों ने ISI और जैश-ए-मोहम्मद के एक ऑडियो इंटरसेप्ट से यह खुलासा किया था कि कैसे पंक्चर की दुकानें, ढाबे और चाय स्टॉल आतंकियों के मददगार के रूप में काम कर रहे हैं। सड़क किनारे प्लास्टिक में हथियार छिपाने, संचार यंत्र रखने और क्रॉस फायरिंग के लिए चुनी गई जगहों की प्लानिंग बाकायदा पाकिस्तान की एजेंसियों द्वारा की जाती है। Why this matters now? क्योंकि पहलगाम जैसे संवेदनशील इलाके में इतनी बड़ी संख्या में पर्यटकों की मौजूदगी के बावजूद सुरक्षा बलों की गैरमौजूदगी और आतंकियों की सटीक रणनीति दर्शाती है कि ground intelligence बुरी तरह फेल हुई है। सुरक्षा बलों के विश्वस्त सूत्र बताते हैं कि हमले के वक्त कोई क्रॉस फायरिंग नहीं हुई, क्योंकि आस-पास कोई सुरक्षा बल मौजूद ही नहीं था। ये भी देखा गया कि आतंकी घोड़ों, खच्चरों और ढाबों के बीच से निकले, लेकिन इन पर किसी को शक नहीं हुआ। यही नहीं, हमला होने के काफी देर बाद सुरक्षा बल मौके पर पहुंचे – तब तक आतंकी जंगलों की ओर भाग चुके थे। घटना की एक और चिंताजनक बात यह है कि आतंकी ढाबा संचालकों और उनके कर्मचारियों को टारगेट नहीं कर रहे थे – इसका मतलब साफ है कि वे ‘अपने लोग’ थे या उन्हें पहले से सावधान किया गया था। इस बात से इनकार नहीं किया जा सकता कि ऐसी घटनाएं आतंकियों की गहरी local network intelligence की ओर इशारा करती हैं। Conclusion:अब वक्त आ गया है कि Jammu-Kashmir में चाय बेचने वालों, ढाबा संचालकों और घोड़ा-खच्चर वालों पर भी सतर्क नजर रखी जाए। हर ‘Local’ को ‘Friendly’ मान लेना अब महंगा साबित हो सकता है। सुरक्षा एजेंसियों को पुराने खांचे से बाहर आकर Hybrid Militants और Sleeper Informants की पहचान करनी होगी, नहीं तो अगला हमला और भी ज्यादा विनाशकारी हो सकता है।
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PahalgamTerrorist Attack

PahalgamTerrorist Attack: सऊदी से लौटे पीएम मोदी ने एयरपोर्ट पर ही कि डोभाल-जयशंकर से बैठक

(Desh Harpal के लिए विशेष रिपोर्ट): Pahalgam Terrorist Attack – जम्मू-कश्मीर के खूबसूरत पर्यटन स्थल पहलगाम में मंगलवार को एक दिल दहला देने वाला आतंकी हमला हुआ, जिसमें 26 निर्दोष नागरिकों की जान चली गई। मरने वालों में बड़ी संख्या में पर्यटक शामिल थे, जो छुट्टियां बिताने पहलगाम पहुंचे थे। आतंकियों ने चुन-चुनकर लोगों को निशाना बनाया, जिससे पूरे देश में शोक और आक्रोश की लहर दौड़ गई है। इस हमले की गंभीरता को देखते हुए प्रधानमंत्री Narendra Modi अपना विदेश दौरा बीच में छोड़कर भारत लौट आए। एयरपोर्ट पर उतरते ही उन्होंने National Security Advisor अजीत डोभाल और विदेश मंत्री एस. जयशंकर के साथ आपात बैठक की और हमले की पूरी जानकारी ली। इसके बाद पीएम मोदी ने कैबिनेट कमेटी ऑन सिक्योरिटी (CCS) की हाई-लेवल मीटिंग बुलाई है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी इस हमले की निंदा हो रही है। अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने कहा कि “कश्मीर से आ रही खबरें बेहद दुखद हैं। आतंक के खिलाफ अमेरिका, भारत के साथ खड़ा है।” उन्होंने पीड़ित परिवारों के लिए शांति की प्रार्थना की और घायलों के शीघ्र स्वस्थ होने की कामना की। रूसी राष्ट्रपति Vladimir Putin, इजरायली प्रधानमंत्री Benjamin Netanyahu, और इटली की प्रधानमंत्री Giorgia Meloni ने भी भारत के प्रति एकजुटता जताई है और हमले की कड़ी निंदा की है। इन सभी नेताओं ने कहा कि आतंक के खिलाफ लड़ाई में भारत अकेला नहीं है। सरकारी सूत्रों के अनुसार, इस हमले की योजना सीमापार से रची गई थी और इसका उद्देश्य भारत की Tourism Industry और शांति व्यवस्था को नुकसान पहुंचाना था। घटनास्थल पर सेना और सुरक्षाबल सक्रिय हैं और इलाके में सर्च ऑपरेशन जारी है। भारत सरकार ने यह भी संकेत दिए हैं कि इस हमले का कड़ा जवाब दिया जाएगा और दोषियों को बख्शा नहीं जाएगा। Desh Harpal की विशेष टिप्पणी:एक ओर भारत अपनी Soft Power और पर्यटन को बढ़ावा देने की दिशा में आगे बढ़ रहा है, वहीं दूसरी ओर आतंकियों की यह कायराना हरकत दर्शाती है कि शांति से उन्हें सबसे ज़्यादा डर लगता है। यह हमला सिर्फ जम्मू-कश्मीर पर नहीं, बल्कि पूरे भारत पर किया गया हमला है।
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Congress

Judicial Politics और Congress का ‘संविधान बचाओ’ ड्रामा – निशिकांत दुबे का तगड़ा वार

(Desh Harpal l News Desk):BJP सांसद निशिकांत दुबे ने एक बार फिर Congress पर करारा हमला बोला है, लेकिन इस बार उनका निशाना बना एक ऐसा नाम जिसे लेकर राजनीति और न्यायपालिका के संबंधों पर गंभीर सवाल उठाए जा सकते हैं – Justice Baharul Islam. निशिकांत दुबे ने सोशल मीडिया और संसद में Judicial Politics और Congress का ‘संविधान बचाओ’ ड्रामा – निशिकांत दुबे का तगड़ा वार की संविधान बचाओ मुहिम को ‘मजेदार कहानी’ बताते हुए तंज कसा कि Judicial Politics और Congress का ‘संविधान बचाओ’ ड्रामा – निशिकांत दुबे का तगड़ा वारही वो पार्टी है जो जब सत्ता में थी, तब उसने कैसे न्यायपालिका का अपने हिसाब से इस्तेमाल किया। उन्होंने Justice Baharul Islam का उदाहरण देते हुए कहा: “1977 में जब इंदिरा गांधी पर भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप लगे थे, तब Baharul Islam ने वह सभी केस तन्मयता से समाप्त कर दिए। इसके इनामस्वरूप कांग्रेस ने उन्हें 1983 में सुप्रीम कोर्ट से रिटायर करवा कर तीसरी बार राज्यसभा में भेज दिया।” निशिकांत दुबे के इस बयान की पुष्टि सुप्रीम कोर्ट की वेबसाइट से भी होती है, जहाँ के अनुसार: निशिकांत दुबे ने इस इतिहास को उजागर करते हुए पूछा कि “क्या यही है कांग्रेस की न्यायपालिका की स्वतंत्रता की रक्षा?” इस बयान के जरिए BJP सांसद ने न केवल कांग्रेस की राजनीतिक नीयत पर सवाल उठाया, बल्कि वर्तमान में जारी Judiciary vs Politics बहस को भी एक नया मोड़ दे दिया है। उन्होंने कांग्रेस पर आरोप लगाया कि ये पार्टी सिर्फ जब विपक्ष में होती है, तभी उसे संविधान और न्यायपालिका की याद आती है। अब देखना ये होगा कि कांग्रेस इस गंभीर आरोप का क्या जवाब देती है। लेकिन इतना तो तय है कि Baharul Islam का यह केस एक बार फिर Judicial Appointments और Political Rewards के बीच की ‘Thin Line’ को लोगों के सामने ला रहा है।
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Nishikant Dubye

Supreme Court, Contempt, Nishikant Dubey – अब कानूनी घेरे में घिरते दिख रहे हैं बीजेपी सांसद?

नई दिल्ली।Supreme Court के खिलाफ की गई कथित ‘अवमाननापूर्ण टिप्पणी’ अब बीजेपी सांसद निशिकांत दुबे के लिए बड़ी मुश्किलें खड़ी कर सकती है। यह मामला तब और गंभीर हो गया जब वरिष्ठ अधिवक्ता शिवकुमार त्रिपाठी ने देश के Attorney General (एटॉर्नी जनरल) को एक आधिकारिक चिट्ठी भेजकर निशिकांत दुबे के खिलाफ Contempt of Court (कोर्ट की अवमानना) की कार्यवाही की अनुमति मांगी। यह पूरा विवाद तब शुरू हुआ जब दुबे ने उच्चतम न्यायालय के एक आदेश को लेकर आपत्ति जताते हुए एक सोशल मीडिया पोस्ट में कथित तौर पर ऐसी टिप्पणी की, जिसे न्यायपालिका के सम्मान और स्वायत्तता पर सीधा हमला माना जा रहा है। शिवकुमार त्रिपाठी की इस चिट्ठी में कहा गया है कि सुप्रीम कोर्ट के खिलाफ इस तरह की सार्वजनिक टिप्पणियां न केवल अदालत की गरिमा को ठेस पहुंचाती हैं, बल्कि आम जनता में न्यायिक व्यवस्था के प्रति विश्वास को भी कमजोर करती हैं। उन्होंने मांग की है कि सांसद दुबे पर Contempt of Court Act, 1971 के तहत कार्यवाही होनी चाहिए। त्रिपाठी ने चिट्ठी में यह भी उल्लेख किया है कि एक जनप्रतिनिधि होने के नाते निशिकांत दुबे को न्यायपालिका की स्वतंत्रता और गरिमा का सम्मान करना चाहिए था, न कि उस पर उंगली उठानी चाहिए। हालांकि, इस मामले पर अब तक दुबे की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है। लेकिन यह साफ है कि अगर एटॉर्नी जनरल इस चिट्ठी को गंभीरता से लेते हैं और सहमति देते हैं, तो निशिकांत दुबे के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में अवमानना की विधिवत सुनवाई शुरू हो सकती है। इस प्रकरण ने एक बार फिर Judiciary vs Legislature की पुरानी बहस को हवा दे दी है, जिसमें यह सवाल उठ रहा है कि क्या लोकसभा सदस्य न्यायपालिका की आलोचना की आड़ में अपनी सीमाएं लांघ रहे हैं? अब सबकी निगाहें Attorney General की प्रतिक्रिया और Supreme Court के रुख पर टिकी हैं। क्या यह मामला आने वाले दिनों में संसद और अदालत के बीच टकराव का कारण बनेगा? देश हरपल इस प्रकरण से जुड़ी हर अहम जानकारी आपको सबसे पहले देगा।
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West Bengal Riots, Murshidabad Violence

West Bengal Riots: मुर्शिदाबाद से मालदा तक बेघर हुए हिंदू परिवार, ममता सरकार पर उठे गंभीर सवाल”

(Desh Harpal l विशेष रिपोर्ट): West Bengal Riots, Murshidabad Violence, Hindu Refugees, Detention Camp Allegations West Bengal के Murshidabad जिले में दंगों के बाद हालात इतने बिगड़ गए कि सैकड़ों Hindu Families को जान बचाकर Malda के शरणार्थी शिविरों में पनाह लेनी पड़ी। पर अफसोस की बात यह रही कि जिस सरकार से उन्हें सुरक्षा की उम्मीद थी, उसी के तंत्र ने उन्हें ‘डिटेंशन कैंप’ जैसे माहौल में कैद कर दिया। Murshidabad Riots के दौरान, बड़ी संख्या में दंगाई भीड़ ने हिंदू घरों और दुकानों को निशाना बनाया। जब ये लोग जान बचाकर Malda पहुंचे, तो उन्हें सरकारी कैंपों में रखा गया—जहां उनके साथ मानवीय व्यवहार की जगह उन्हें धमकियों और निगरानी का सामना करना पड़ा। Refugees ने State Human Rights Commission, Mahila Aayog और यहां तक कि राज्यपाल तक को अपनी पीड़ा सुनाई। सबसे चौंकाने वाला हिस्सा ये रहा कि जब मीडिया इस मुद्दे को रिपोर्ट करने पहुंचा, तो उन्हें अंदर जाने से रोक दिया गया। IPS Officer Faisal Raza ने कोर्ट के किसी कथित आदेश का हवाला देकर मीडिया कवरेज पर रोक लगाई, लेकिन जब उनसे आदेश दिखाने की मांग की गई तो वो टालमटोल और धमकियों पर उतर आए। BJP Leader Suvendu Adhikari ने इन शिविरों को ‘Detention Camps’ बताया और कहा, “सरकार ने इन शरणार्थियों को संवेदनशील क्षेत्र में राहत देने की बजाय जेल जैसा ट्रीटमेंट दिया है। करीब 400 लोग अपने घर छोड़कर यहां आए हैं और अब उन्हें कैद की तरह रखा जा रहा है।” Congress ने भी राज्य सरकार पर हमला बोलते हुए इसे मानवाधिकारों का उल्लंघन बताया और निष्पक्ष जांच की मांग की। इस बीच सबसे गंभीर सवाल यह है कि – मिडिया की टीम ने जब इन कैंपों की जमीनी सच्चाई जानने की कोशिश की, तो कई स्थानीय लोगों ने बताया कि उन्हें Forced Silence में रखा गया है। न मीडिया से बात करने की अनुमति है, न ही बाहर किसी को बुलाने की। ये हालात न सिर्फ एक राज्य की विफलता को दिखाते हैं, बल्कि ये भी दर्शाते हैं कि भारत में अपने ही देश में कुछ नागरिक खुद को Refugee जैसा महसूस कर रहे हैं। Note: यह मामला सिर्फ कानून-व्यवस्था का नहीं बल्कि मानवता का भी है। देश को इस पर ध्यान देने की सख्त ज़रूरत है। (पांचजन्य से साभार)
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SupremeCourtHearingControversy; Supreme Court

वक्फ कानून पर SC से स्टे नहीं, सरकार को 7 दिन का समय , डिनोटिफाई करने और नई नियुक्तियों पर रहेगी रोक

Waqf Act Hearing | Supreme Court Latest Update | Centre Seeks Time नई दिल्लीl देश हरपल रिपोर्ट — Waqf Act को लेकर सुप्रीम कोर्ट में गुरुवार को लगातार दूसरे दिन अहम सुनवाई हुई। इस दौरान केंद्र सरकार ने Supreme Court से जवाब दाखिल करने के लिए एक सप्ताह का समय मांगा, जिसे अदालत ने स्वीकार कर लिया। Chief Justice of India (CJI) की अध्यक्षता वाली पीठ ने स्पष्ट कर दिया कि जब तक अगला आदेश नहीं आता, तब तक status quo यानी वर्तमान स्थिति बनी रहेगी। सुप्रीम कोर्ट ने अपने अंतरिम आदेश में कहा कि केंद्र सरकार जब तक अपना जवाब दाखिल नहीं करती, तब तक Waqf Board में किसी भी प्रकार की नियुक्ति नहीं की जाएगी। साथ ही यह भी साफ किया कि waqf properties को लेकर किसी भी Collector द्वारा कोई नया आदेश पारित नहीं होगा। Chief Justice ने कहा, “जब तक अगली सुनवाई नहीं होती, तब तक बोर्ड या काउंसिल में कोई नई नियुक्ति नहीं हो सकती। और अगर किसी संपत्ति का पंजीकरण 1995 Waqf Act के तहत हुआ है, तो उन संपत्तियों को किसी भी तरह का नुकसान नहीं पहुंचाया जाएगा।” CJI ने यह भी कहा कि कार्यपालिका को प्रशासनिक निर्णय लेने का अधिकार है जबकि न्यायपालिका न्यायिक फैसले लेती है। इसी संदर्भ में उन्होंने 2013 Waqf Amendment Act को चुनौती देने वाली याचिका पर कुछ विशेष पक्षों को अपना जवाब दाखिल करने की अनुमति दी है। सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि केंद्र सरकार, राज्य सरकारें और संबंधित वक्फ बोर्ड को 7 दिनों के भीतर अपना official response दाखिल करना होगा। इसके बाद याचिकाकर्ताओं को केवल 5 याचिकाएं दाखिल करने की अनुमति होगी। इस पूरे मामले को कोर्ट ने “विशेष प्रकृति” का बताते हुए कहा है कि सुनवाई निष्पक्ष और त्वरित होगी। फिलहाल, वक्फ संपत्तियों की मौजूदा स्थिति यथावत बनी रहेगी और किसी भी तरह का नया प्रशासनिक या कानूनी हस्तक्षेप रोक दिया गया है। Desh Harpal की विशेष रिपोर्ट में हम आने वाले दिनों में केंद्र सरकार और वक्फ बोर्ड के जवाबों की विस्तृत जानकारी भी देंगे। यह मामला न सिर्फ कानूनी बल्कि सामाजिक दृष्टिकोण से भी बेहद महत्वपूर्ण बनता जा रहा है।
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National Herald Case ED

National Herald Case: ED ने सोनिया-राहुल गांधी पर चार्जशीट दायर, कांग्रेस बोली – ‘ये बदले की राजनीति है’

16 अप्रैल 2025 – प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने नेशनल हेराल्ड मनी लॉन्ड्रिंग मामले में बड़ी कार्रवाई करते हुए कांग्रेस नेता सोनिया गांधी और राहुल गांधी समेत सात लोगों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल कर दी है। कांग्रेस ने इस कार्रवाई को “राजनीतिक बदले और डराने की कोशिश” बताया है और बुधवार को देशभर में ED दफ्तरों के बाहर प्रदर्शन की घोषणा की है। चार्जशीट में कौन-कौन? ED ने 9 अप्रैल को विशेष PMLA अदालत में चार्जशीट दाखिल की थी। इसमें जिन लोगों के नाम शामिल हैं, वे हैं: अदालत ने चार्जशीट पर संज्ञान लेते हुए मामले की अगली सुनवाई 25 अप्रैल को तय की है।क्या है नेशनल हेराल्ड केस? यह मामला एसोसिएटेड जर्नल्स लिमिटेड (AJL) की संपत्तियों को लेकर है, जो National Herald अखबार का प्रकाशन करती है। ED का आरोप है कि कांग्रेस ने AJL को ₹50 लाख में यंग इंडियन नाम की कंपनी के ज़रिए अधिग्रहित किया, जबकि उसकी संपत्ति की कीमत ₹2,000 करोड़ से ज्यादा थी। सोनिया गांधी और राहुल गांधी यंग इंडियन में बहुमत हिस्सेदारी रखते हैं। ED ने हाल ही में ₹661 करोड़ की संपत्ति दिल्ली, मुंबई और लखनऊ में जब्त करने के नोटिस भी दिए हैं। जांच की शुरुआत कैसे हुई? ये जांच भाजपा नेता सुब्रमण्यम स्वामी की 2013 में दाखिल याचिका के आधार पर शुरू हुई थी। इसके बाद दिल्ली की एक अदालत ने इनकम टैक्स विभाग को जांच की अनुमति दी थी। ED ने कहा कि जांच के दौरान उन्हें ₹18 करोड़ के फर्जी डोनेशन, ₹38 करोड़ के फर्जी किराया और ₹29 करोड़ के फर्जी विज्ञापन की जानकारी मिली।कांग्रेस ने क्या कहा? कांग्रेस नेता अभिषेक मनु सिंघवी ने कहा, “यह पूरा मामला फर्जी है। ना कोई पैसा ट्रांसफर हुआ, ना कोई संपत्ति बेची गई। फिर भी सरकार इसे मनी लॉन्ड्रिंग बता रही है।” केसी वेणुगोपाल ने कहा, “मोदी-शाह सरकार जनता के मुद्दों से ध्यान भटकाने के लिए विपक्ष को टारगेट कर रही है। ये केस राजनीति को दबाने का तरीका है।” जयराम रमेश ने X (पूर्व में ट्विटर) पर लिखा, “नेशनल हेराल्ड की संपत्तियों की जब्ती कानून की आड़ में किया गया अपराध है।” भाजपा का पलटवार भाजपा प्रवक्ता शहजाद पूनावाला ने कहा, “जो लोग भ्रष्टाचार और जनता की संपत्ति की लूट में शामिल रहे हैं, अब उन्हें जवाब देना होगा। ED का मतलब अब ‘एंटाइटलमेंट टू डकैती’ नहीं है।”कोर्ट की टिप्पणी विशेष अदालत ने कहा कि PMLA की कार्रवाई के साथ-साथ CBI की जांच से जुड़ा मामला भी इसी अदालत में स्थानांतरित किया जा सकता है, लेकिन इसके लिए आदेश जिला जज को देना होगा। DeshHarpal पर पढ़ते रहिए देश-दुनिया की सबसे सटीक और सरल खबरें।
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Voter ID

30 Crore Voter ID Cards होंगे अपडेट, पहचान और Verification होगा आसान

देशभर के करोड़ों मतदाताओं के लिए जल्द बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है। चुनाव आयोग पुराने वोटर आईडी कार्ड्स को अपडेट करने की तैयारी में है। इस अभियान के तहत करीब 30 करोड़ Voter ID Cards में मौजूद धुंधले फोटो बदले जाएंगे और जिन कार्ड्स में मकान नंबर की जगह “00” लिखा है, वहां पूरा और सही पता दर्ज किया जाएगा। दरअसल, लंबे समय से शिकायतें सामने आ रही थीं कि कई वोटर कार्ड्स में फोटो इतने पुराने या धुंधले हैं कि पहचान करना मुश्किल हो जाता है। वहीं कई कार्ड्स में अधूरा पता होने से वोटिंग के दौरान लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ता है। अब चुनाव आयोग इन खामियों को दूर करने के लिए बड़ा अपडेट अभियान शुरू करने जा रहा है। Blur Photo और गलत Address बने परेशानी की वजह ग्रामीण और शहरी इलाकों में बड़ी संख्या में ऐसे वोटर कार्ड पाए गए हैं, जिनमें फोटो साफ दिखाई नहीं देते। कई मामलों में कार्ड पर सिर्फ “00” लिखा होने से सही पता पता नहीं चल पाता। इससे मतदान केंद्रों पर पहचान सत्यापन में समय ज्यादा लगता है और कई बार विवाद जैसी स्थिति भी बन जाती है। इसी को देखते हुए अब रिकॉर्ड को ज्यादा सटीक और डिजिटल बनाने पर जोर दिया जा रहा है। माना जा रहा है कि इस कदम से फर्जी मतदान रोकने में भी मदद मिलेगी। कैसे होगा Voter Card Update? जानकारी के मुताबिक चुनाव आयोग चरणबद्ध तरीके से यह प्रक्रिया पूरी करेगा। जरूरत पड़ने पर मतदाताओं से नया फोटो और सही पता मांगा जा सकता है। कई जगह ऑनलाइन अपडेट की सुविधा भी दी जाएगी ताकि लोगों को बार-बार सरकारी दफ्तरों के चक्कर न लगाने पड़ें। अगर किसी मतदाता के कार्ड में फोटो साफ नहीं है या पता गलत दर्ज है, तो उसे अपडेट करवाने का मौका मिलेगा। आयोग का फोकस डेटा को पूरी तरह साफ और आधुनिक बनाने पर है। चुनाव से पहले रिकॉर्ड सुधारने की तैयारी आने वाले चुनावों को देखते हुए चुनाव आयोग मतदाता सूची और पहचान संबंधी रिकॉर्ड को मजबूत करना चाहता है। साफ फोटो और सही एड्रेस होने से मतदान प्रक्रिया पहले से ज्यादा आसान और पारदर्शी हो सकती है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह अभियान करोड़ों लोगों के लिए राहत लेकर आएगा, क्योंकि लंबे समय से लोग पुराने और खराब प्रिंट वाले वोटर कार्ड्स की समस्या झेल रहे थे।
India vs Afghanistan

India vs Afghanistan ODI 2026: पहली बार भारत के खिलाफ वनडे सीरीज खेलेगा अफगानिस्तान

भारत और अफगानिस्तान (India vs Afghanistan) के बीच तीन मैचों की वनडे सीरीज का आगाज आज धर्मशाला के खूबसूरत HPCA स्टेडियम में होने जा रहा है। यह सीरीज इसलिए भी खास मानी जा रही है क्योंकि अफगानिस्तान पहली बार भारत के खिलाफ पूरी ODI सीरीज खेलने उतर रहा है। दोनों टीमों के फैंस इस मुकाबले का लंबे समय से इंतजार कर रहे थे, लेकिन मैच से पहले मौसम ने चिंता बढ़ा दी है। Kohli-Hardik के बिना उतरेगी Team India भारतीय टीम इस सीरीज में कई बड़े बदलावों के साथ मैदान पर उतरेगी। स्टार बल्लेबाज विराट कोहली चोट के कारण उपलब्ध नहीं हैं, जबकि हार्दिक पंड्या भी फिटनेस समस्या की वजह से टीम से बाहर हैं। ऐसे में टीम इंडिया की जिम्मेदारी कप्तान रोहित शर्मा और युवा खिलाड़ियों पर होगी। टीम मैनेजमेंट इस सीरीज को भविष्य की तैयारी के तौर पर देख रहा है। माना जा रहा है कि आने वाले बड़े टूर्नामेंट्स को ध्यान में रखते हुए कुछ नए खिलाड़ियों को मौका दिया जा सकता है। ईशान किशन, यशस्वी जायसवाल और नितीश कुमार रेड्डी जैसे युवा खिलाड़ियों पर सभी की नजरें रहेंगी। Afghanistan के पास भी हैं मैच विनर खिलाड़ी अफगानिस्तान की टीम अब सिर्फ कमजोर टीम नहीं मानी जाती। पिछले कुछ वर्षों में टीम ने अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में शानदार प्रदर्शन किया है। राशिद खान, मोहम्मद नबी और रहमानुल्लाह गुरबाज जैसे खिलाड़ी किसी भी मैच का रुख बदलने की क्षमता रखते हैं। भारतीय परिस्थितियों में खेलने का अनुभव भी अफगानिस्तान के खिलाड़ियों के पास है। ऐसे में टीम इंडिया के लिए यह सीरीज आसान नहीं रहने वाली। Dharamshala Weather ने बढ़ाई टेंशन धर्मशाला में मौसम मैच का सबसे बड़ा विलेन बन सकता है। मौसम विभाग के अनुसार मुकाबले के दौरान करीब 55 प्रतिशत बारिश की संभावना है। सुबह से ही इलाके में बादल छाए हुए हैं और हल्की बारिश भी देखने को मिली है। अगर बारिश लगातार होती रही तो मैच में ओवर कट सकते हैं या मुकाबला प्रभावित भी हो सकता है। हालांकि फैंस उम्मीद कर रहे हैं कि मौसम साफ हो और उन्हें पूरा मैच देखने को मिले। तेज गेंदबाजों को मिल सकती है मदद धर्मशाला की पिच आमतौर पर तेज गेंदबाजों के लिए मददगार मानी जाती है। बादलों और नमी की वजह से शुरुआती ओवरों में गेंद ज्यादा स्विंग कर सकती है। ऐसे में टॉस जीतने वाली टीम पहले गेंदबाजी चुन सकती है। मैच की जरूरी जानकारी भारत जहां घरेलू मैदान का फायदा उठाकर सीरीज में जीत के साथ शुरुआत करना चाहेगा, वहीं अफगानिस्तान की नजर इतिहास रचने पर होगी। अब देखना दिलचस्प होगा कि बारिश के बीच कौन सी टीम मैदान पर बेहतर प्रदर्शन करती है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
Pranit More

Pranit More Controversy: महिलाओं पर विवादित Comments के बाद कॉमेडियन की माफी

स्टैंड-अप कॉमेडियन प्रणित मोरे (Pranit More) एक बार फिर सोशल मीडिया पर चर्चा में हैं। महिलाओं को लेकर किए गए विवादित कमेंट्स के बाद इंटरनेट पर उनके खिलाफ भारी नाराजगी देखने को मिल रही है। मामला बढ़ने के बाद अब कॉमेडियन ने सार्वजनिक तौर पर माफी मांगते हुए लोगों से एक मौका देने की अपील की है। प्रणित मोरे का एक वीडियो पिछले कुछ दिनों से सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। वीडियो में वह महिलाओं को लेकर ऐसी टिप्पणियां करते दिखाई दिए, जिन्हें कई लोगों ने अपमानजनक और असंवेदनशील बताया। वीडियो सामने आने के बाद यूजर्स ने जमकर आलोचना शुरू कर दी और देखते ही देखते मामला सोशल मीडिया ट्रेंड बन गया। Viral Video के बाद बढ़ा विवाद वीडियो वायरल होने के बाद X, Instagram और अन्य सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर लोगों ने कड़ी प्रतिक्रिया दी। कई यूजर्स ने कहा कि कॉमेडी के नाम पर महिलाओं का मजाक उड़ाना गलत है। कुछ लोगों ने यह भी सवाल उठाया कि आखिर मनोरंजन की सीमा क्या होनी चाहिए। सोशल मीडिया पर #PranitMoreControversy ट्रेंड करने लगा और कई महिला संगठनों ने भी इस बयान पर नाराजगी जताई। सोशल मीडिया पोस्ट में मांगी माफी लगातार बढ़ते विवाद के बीच प्रणित मोरे ने अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर एक लंबा नोट शेयर किया। उन्होंने माना कि उनके शब्दों से लोगों की भावनाएं आहत हुई हैं। प्रणित ने लिखा, “मैं समझता हूं कि लोग मुझसे नाराज हैं। शायद मैं इस नफरत का हकदार भी हूं, लेकिन मैं सिर्फ इतना चाहता हूं कि लोग मुझे खुद को सुधारने का एक मौका दें।” उन्होंने यह भी कहा कि उनका उद्देश्य किसी का अपमान करना नहीं था, लेकिन अब उन्हें अपनी गलती का एहसास हो चुका है। लोगों की राय बंटी हुई नजर आई इस पूरे मामले में सोशल मीडिया यूजर्स दो हिस्सों में बंटे नजर आए। कुछ लोगों का कहना है कि सार्वजनिक मंच पर इस तरह की भाषा स्वीकार नहीं की जानी चाहिए। वहीं दूसरी तरफ कुछ यूजर्स का मानना है कि गलती मान लेने के बाद किसी को सुधारने का मौका मिलना चाहिए। हालांकि, विवाद अभी भी पूरी तरह शांत नहीं हुआ है और सोशल मीडिया पर बहस जारी है। करियर पर पड़ सकता है असर मनोरंजन जगत से जुड़े लोगों का मानना है कि इस विवाद का असर प्रणित मोरे की इमेज और करियर पर पड़ सकता है। आज के डिजिटल दौर में किसी भी बयान पर तुरंत प्रतिक्रिया देखने को मिलती है और सोशल मीडिया का दबाव कई बार कलाकारों के लिए बड़ी चुनौती बन जाता है। फिलहाल, सभी की नजर इस बात पर टिकी है कि दर्शक और इंडस्ट्री उनके माफीनामे को किस तरह लेते हैं। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
S Jaishankar

3 भारतीयों की मौत से भारत सख्त, US Secretary S Jaishankar की अहम बातचीत

मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव के बीच भारत ने अपने नागरिकों की मौत को लेकर कड़ा रुख अपनाया है। विदेश मंत्री S Jaishankar ने अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो से फोन पर बातचीत कर कॉमर्शियल जहाज पर हुए हमले में तीन भारतीय नागरिकों की मौत पर गहरी चिंता और विरोध दर्ज कराया। भारत ने साफ शब्दों में कहा है कि अंतरराष्ट्रीय समुद्री मार्गों पर चल रहे व्यावसायिक जहाजों को निशाना बनाना पूरी तरह गलत है और इससे वैश्विक सुरक्षा पर गंभीर असर पड़ सकता है। क्या है पूरा मामला? हाल ही में मध्य पूर्व के समुद्री क्षेत्र में एक कॉमर्शियल जहाज पर हमला हुआ था। इस हमले में तीन भारतीय नागरिकों की मौत हो गई। घटना के बाद भारत सरकार लगातार स्थिति पर नजर बनाए हुए है और पीड़ित परिवारों के संपर्क में है। विदेश मंत्रालय के अनुसार, जयशंकर ने अमेरिकी विदेश मंत्री से बातचीत के दौरान इस मुद्दे को गंभीरता से उठाया और कहा कि निर्दोष नागरिकों की जान जाना बेहद दुखद है। भारत ने क्या कहा? विदेश मंत्री जयशंकर ने बातचीत में कहा कि समुद्री व्यापार दुनिया की अर्थव्यवस्था की रीढ़ माना जाता है। ऐसे में कॉमर्शियल जहाजों पर हमला न केवल अंतरराष्ट्रीय कानून के खिलाफ है, बल्कि इससे वैश्विक व्यापार और कई देशों की सुरक्षा भी प्रभावित हो सकती है। उन्होंने यह भी कहा कि भारत अपने नागरिकों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देता है और इस तरह की घटनाओं को लेकर बेहद संवेदनशील है। Middle East Tension पर बढ़ी चिंता मध्य पूर्व में पिछले कुछ समय से तनाव लगातार बढ़ रहा है। कई देशों ने समुद्री रास्तों की सुरक्षा को लेकर चिंता जताई है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के हमले अंतरराष्ट्रीय स्तर पर दबाव और कूटनीतिक गतिविधियों को और तेज कर सकते हैं। भारत भी लगातार शांति और सुरक्षित समुद्री व्यापार की वकालत करता रहा है। भारत सरकार की नजर स्थिति पर सरकार ने कहा है कि प्रभावित भारतीयों के परिवारों को हर संभव सहायता दी जाएगी। साथ ही क्षेत्र में मौजूद भारतीय नागरिकों की सुरक्षा को लेकर भी लगातार निगरानी रखी जा रही है। इस घटना के बाद भारत ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से समुद्री सुरक्षा सुनिश्चित करने की अपील भी की है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
धर्मेंद्र प्रधान

“खेल और पढ़ाई साथ-साथ चलेंगे” — Bhopal में धर्मेंद्र प्रधान ने खिलाड़ियों को दिया बड़ा संदेश

भोपाल में केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने खिलाड़ियों के साथ संवाद करते हुए देश की नई शिक्षा और खेल नीति को लेकर बड़ा संदेश दिया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार के 12 वर्ष पूरे होने के अवसर पर धर्मेंद्र प्रधान मध्यप्रदेश पहुंचे, जहां उन्होंने खेल एवं युवा कल्याण मंत्री विश्वास सारंग के साथ शूटिंग एकेडमी का दौरा किया। खिलाड़ियों से सीधा संवाद, स्किल और स्पोर्ट्स पर जोर इस दौरान उन्होंने खिलाड़ियों से मुलाकात की और कहा कि भारत अब शिक्षा के साथ-साथ स्किल और स्पोर्ट्स सेक्टर में भी तेजी से आगे बढ़ रहा है। उन्होंने बताया कि नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) के जरिए पहली बार खेल और पढ़ाई को एक साथ जोड़ने पर गंभीरता से काम किया जा रहा है। पढ़ाई और खेल साथ-साथ चलेंगे धर्मेंद्र प्रधान ने कहा कि अब ऐसा सिस्टम तैयार किया जा रहा है, जिससे खिलाड़ी अपनी पढ़ाई और खेल दोनों को संतुलित तरीके से आगे बढ़ा सकें। इसके लिए अलग से कोर्स वर्क तैयार किया जा रहा है, ताकि छात्रों को खेल गतिविधियों का भी अकादमिक लाभ मिल सके। APAAR ID और Credit Score सिस्टम पर काम उन्होंने बताया कि खिलाड़ियों की APAAR ID के माध्यम से उनकी पढ़ाई और खेल उपलब्धियों को एक प्लेटफॉर्म पर जोड़ा जाएगा। साथ ही इंटर स्पोर्ट्स एक्टिविटी को क्रेडिट स्कोर सिस्टम से जोड़ने की तैयारी भी की जा रही है। इससे खिलाड़ियों को भविष्य में शिक्षा और करियर दोनों में फायदा मिलेगा। IIT में Sports Quota से युवाओं को मिलेगा फायदा केंद्रीय मंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में पहली बार IIT जैसे बड़े संस्थानों में स्पोर्ट्स कोटा लागू किया गया है। यह कदम उन युवाओं के लिए नई उम्मीद लेकर आया है, जो खेल के साथ-साथ उच्च शिक्षा में भी आगे बढ़ना चाहते हैं। 2036 Olympics और Developed India Vision 2047 पर फोकस उन्होंने खिलाड़ियों को संबोधित करते हुए कहा कि आने वाले 20 वर्षों में भारत को आत्मनिर्भर और विकसित राष्ट्र बनाने का लक्ष्य रखा गया है। भारत का फोकस अब 2036 ओलंपिक की तैयारियों पर भी है और देश खेलों में विश्व स्तर पर अपनी मजबूत पहचान बनाने की दिशा में काम कर रहा है। धर्मेंद्र प्रधान ने कहा कि जब भारत आजादी के 100 वर्ष पूरे करेगा, तब प्रधानमंत्री मोदी का विकसित भारत का सपना साकार होगा और देश दुनिया की महाशक्ति के रूप में उभरेगा। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!

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