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PahalgamTerrorist Attack

PahalgamTerrorist Attack: सऊदी से लौटे पीएम मोदी ने एयरपोर्ट पर ही कि डोभाल-जयशंकर से बैठक

(Desh Harpal के लिए विशेष रिपोर्ट): Pahalgam Terrorist Attack – जम्मू-कश्मीर के खूबसूरत पर्यटन स्थल पहलगाम में मंगलवार को एक दिल दहला देने वाला आतंकी हमला हुआ, जिसमें 26 निर्दोष नागरिकों की जान चली गई। मरने वालों में बड़ी संख्या में पर्यटक शामिल थे, जो छुट्टियां बिताने पहलगाम पहुंचे थे। आतंकियों ने चुन-चुनकर लोगों को निशाना बनाया, जिससे पूरे देश में शोक और आक्रोश की लहर दौड़ गई है। इस हमले की गंभीरता को देखते हुए प्रधानमंत्री Narendra Modi अपना विदेश दौरा बीच में छोड़कर भारत लौट आए। एयरपोर्ट पर उतरते ही उन्होंने National Security Advisor अजीत डोभाल और विदेश मंत्री एस. जयशंकर के साथ आपात बैठक की और हमले की पूरी जानकारी ली। इसके बाद पीएम मोदी ने कैबिनेट कमेटी ऑन सिक्योरिटी (CCS) की हाई-लेवल मीटिंग बुलाई है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी इस हमले की निंदा हो रही है। अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने कहा कि “कश्मीर से आ रही खबरें बेहद दुखद हैं। आतंक के खिलाफ अमेरिका, भारत के साथ खड़ा है।” उन्होंने पीड़ित परिवारों के लिए शांति की प्रार्थना की और घायलों के शीघ्र स्वस्थ होने की कामना की। रूसी राष्ट्रपति Vladimir Putin, इजरायली प्रधानमंत्री Benjamin Netanyahu, और इटली की प्रधानमंत्री Giorgia Meloni ने भी भारत के प्रति एकजुटता जताई है और हमले की कड़ी निंदा की है। इन सभी नेताओं ने कहा कि आतंक के खिलाफ लड़ाई में भारत अकेला नहीं है। सरकारी सूत्रों के अनुसार, इस हमले की योजना सीमापार से रची गई थी और इसका उद्देश्य भारत की Tourism Industry और शांति व्यवस्था को नुकसान पहुंचाना था। घटनास्थल पर सेना और सुरक्षाबल सक्रिय हैं और इलाके में सर्च ऑपरेशन जारी है। भारत सरकार ने यह भी संकेत दिए हैं कि इस हमले का कड़ा जवाब दिया जाएगा और दोषियों को बख्शा नहीं जाएगा। Desh Harpal की विशेष टिप्पणी:एक ओर भारत अपनी Soft Power और पर्यटन को बढ़ावा देने की दिशा में आगे बढ़ रहा है, वहीं दूसरी ओर आतंकियों की यह कायराना हरकत दर्शाती है कि शांति से उन्हें सबसे ज़्यादा डर लगता है। यह हमला सिर्फ जम्मू-कश्मीर पर नहीं, बल्कि पूरे भारत पर किया गया हमला है।
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Congress

Judicial Politics और Congress का ‘संविधान बचाओ’ ड्रामा – निशिकांत दुबे का तगड़ा वार

(Desh Harpal l News Desk):BJP सांसद निशिकांत दुबे ने एक बार फिर Congress पर करारा हमला बोला है, लेकिन इस बार उनका निशाना बना एक ऐसा नाम जिसे लेकर राजनीति और न्यायपालिका के संबंधों पर गंभीर सवाल उठाए जा सकते हैं – Justice Baharul Islam. निशिकांत दुबे ने सोशल मीडिया और संसद में Judicial Politics और Congress का ‘संविधान बचाओ’ ड्रामा – निशिकांत दुबे का तगड़ा वार की संविधान बचाओ मुहिम को ‘मजेदार कहानी’ बताते हुए तंज कसा कि Judicial Politics और Congress का ‘संविधान बचाओ’ ड्रामा – निशिकांत दुबे का तगड़ा वारही वो पार्टी है जो जब सत्ता में थी, तब उसने कैसे न्यायपालिका का अपने हिसाब से इस्तेमाल किया। उन्होंने Justice Baharul Islam का उदाहरण देते हुए कहा: “1977 में जब इंदिरा गांधी पर भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप लगे थे, तब Baharul Islam ने वह सभी केस तन्मयता से समाप्त कर दिए। इसके इनामस्वरूप कांग्रेस ने उन्हें 1983 में सुप्रीम कोर्ट से रिटायर करवा कर तीसरी बार राज्यसभा में भेज दिया।” निशिकांत दुबे के इस बयान की पुष्टि सुप्रीम कोर्ट की वेबसाइट से भी होती है, जहाँ के अनुसार: निशिकांत दुबे ने इस इतिहास को उजागर करते हुए पूछा कि “क्या यही है कांग्रेस की न्यायपालिका की स्वतंत्रता की रक्षा?” इस बयान के जरिए BJP सांसद ने न केवल कांग्रेस की राजनीतिक नीयत पर सवाल उठाया, बल्कि वर्तमान में जारी Judiciary vs Politics बहस को भी एक नया मोड़ दे दिया है। उन्होंने कांग्रेस पर आरोप लगाया कि ये पार्टी सिर्फ जब विपक्ष में होती है, तभी उसे संविधान और न्यायपालिका की याद आती है। अब देखना ये होगा कि कांग्रेस इस गंभीर आरोप का क्या जवाब देती है। लेकिन इतना तो तय है कि Baharul Islam का यह केस एक बार फिर Judicial Appointments और Political Rewards के बीच की ‘Thin Line’ को लोगों के सामने ला रहा है।
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Nishikant Dubye

Supreme Court, Contempt, Nishikant Dubey – अब कानूनी घेरे में घिरते दिख रहे हैं बीजेपी सांसद?

नई दिल्ली।Supreme Court के खिलाफ की गई कथित ‘अवमाननापूर्ण टिप्पणी’ अब बीजेपी सांसद निशिकांत दुबे के लिए बड़ी मुश्किलें खड़ी कर सकती है। यह मामला तब और गंभीर हो गया जब वरिष्ठ अधिवक्ता शिवकुमार त्रिपाठी ने देश के Attorney General (एटॉर्नी जनरल) को एक आधिकारिक चिट्ठी भेजकर निशिकांत दुबे के खिलाफ Contempt of Court (कोर्ट की अवमानना) की कार्यवाही की अनुमति मांगी। यह पूरा विवाद तब शुरू हुआ जब दुबे ने उच्चतम न्यायालय के एक आदेश को लेकर आपत्ति जताते हुए एक सोशल मीडिया पोस्ट में कथित तौर पर ऐसी टिप्पणी की, जिसे न्यायपालिका के सम्मान और स्वायत्तता पर सीधा हमला माना जा रहा है। शिवकुमार त्रिपाठी की इस चिट्ठी में कहा गया है कि सुप्रीम कोर्ट के खिलाफ इस तरह की सार्वजनिक टिप्पणियां न केवल अदालत की गरिमा को ठेस पहुंचाती हैं, बल्कि आम जनता में न्यायिक व्यवस्था के प्रति विश्वास को भी कमजोर करती हैं। उन्होंने मांग की है कि सांसद दुबे पर Contempt of Court Act, 1971 के तहत कार्यवाही होनी चाहिए। त्रिपाठी ने चिट्ठी में यह भी उल्लेख किया है कि एक जनप्रतिनिधि होने के नाते निशिकांत दुबे को न्यायपालिका की स्वतंत्रता और गरिमा का सम्मान करना चाहिए था, न कि उस पर उंगली उठानी चाहिए। हालांकि, इस मामले पर अब तक दुबे की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है। लेकिन यह साफ है कि अगर एटॉर्नी जनरल इस चिट्ठी को गंभीरता से लेते हैं और सहमति देते हैं, तो निशिकांत दुबे के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में अवमानना की विधिवत सुनवाई शुरू हो सकती है। इस प्रकरण ने एक बार फिर Judiciary vs Legislature की पुरानी बहस को हवा दे दी है, जिसमें यह सवाल उठ रहा है कि क्या लोकसभा सदस्य न्यायपालिका की आलोचना की आड़ में अपनी सीमाएं लांघ रहे हैं? अब सबकी निगाहें Attorney General की प्रतिक्रिया और Supreme Court के रुख पर टिकी हैं। क्या यह मामला आने वाले दिनों में संसद और अदालत के बीच टकराव का कारण बनेगा? देश हरपल इस प्रकरण से जुड़ी हर अहम जानकारी आपको सबसे पहले देगा।
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West Bengal Riots, Murshidabad Violence

West Bengal Riots: मुर्शिदाबाद से मालदा तक बेघर हुए हिंदू परिवार, ममता सरकार पर उठे गंभीर सवाल”

(Desh Harpal l विशेष रिपोर्ट): West Bengal Riots, Murshidabad Violence, Hindu Refugees, Detention Camp Allegations West Bengal के Murshidabad जिले में दंगों के बाद हालात इतने बिगड़ गए कि सैकड़ों Hindu Families को जान बचाकर Malda के शरणार्थी शिविरों में पनाह लेनी पड़ी। पर अफसोस की बात यह रही कि जिस सरकार से उन्हें सुरक्षा की उम्मीद थी, उसी के तंत्र ने उन्हें ‘डिटेंशन कैंप’ जैसे माहौल में कैद कर दिया। Murshidabad Riots के दौरान, बड़ी संख्या में दंगाई भीड़ ने हिंदू घरों और दुकानों को निशाना बनाया। जब ये लोग जान बचाकर Malda पहुंचे, तो उन्हें सरकारी कैंपों में रखा गया—जहां उनके साथ मानवीय व्यवहार की जगह उन्हें धमकियों और निगरानी का सामना करना पड़ा। Refugees ने State Human Rights Commission, Mahila Aayog और यहां तक कि राज्यपाल तक को अपनी पीड़ा सुनाई। सबसे चौंकाने वाला हिस्सा ये रहा कि जब मीडिया इस मुद्दे को रिपोर्ट करने पहुंचा, तो उन्हें अंदर जाने से रोक दिया गया। IPS Officer Faisal Raza ने कोर्ट के किसी कथित आदेश का हवाला देकर मीडिया कवरेज पर रोक लगाई, लेकिन जब उनसे आदेश दिखाने की मांग की गई तो वो टालमटोल और धमकियों पर उतर आए। BJP Leader Suvendu Adhikari ने इन शिविरों को ‘Detention Camps’ बताया और कहा, “सरकार ने इन शरणार्थियों को संवेदनशील क्षेत्र में राहत देने की बजाय जेल जैसा ट्रीटमेंट दिया है। करीब 400 लोग अपने घर छोड़कर यहां आए हैं और अब उन्हें कैद की तरह रखा जा रहा है।” Congress ने भी राज्य सरकार पर हमला बोलते हुए इसे मानवाधिकारों का उल्लंघन बताया और निष्पक्ष जांच की मांग की। इस बीच सबसे गंभीर सवाल यह है कि – मिडिया की टीम ने जब इन कैंपों की जमीनी सच्चाई जानने की कोशिश की, तो कई स्थानीय लोगों ने बताया कि उन्हें Forced Silence में रखा गया है। न मीडिया से बात करने की अनुमति है, न ही बाहर किसी को बुलाने की। ये हालात न सिर्फ एक राज्य की विफलता को दिखाते हैं, बल्कि ये भी दर्शाते हैं कि भारत में अपने ही देश में कुछ नागरिक खुद को Refugee जैसा महसूस कर रहे हैं। Note: यह मामला सिर्फ कानून-व्यवस्था का नहीं बल्कि मानवता का भी है। देश को इस पर ध्यान देने की सख्त ज़रूरत है। (पांचजन्य से साभार)
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SupremeCourtHearingControversy; Supreme Court

वक्फ कानून पर SC से स्टे नहीं, सरकार को 7 दिन का समय , डिनोटिफाई करने और नई नियुक्तियों पर रहेगी रोक

Waqf Act Hearing | Supreme Court Latest Update | Centre Seeks Time नई दिल्लीl देश हरपल रिपोर्ट — Waqf Act को लेकर सुप्रीम कोर्ट में गुरुवार को लगातार दूसरे दिन अहम सुनवाई हुई। इस दौरान केंद्र सरकार ने Supreme Court से जवाब दाखिल करने के लिए एक सप्ताह का समय मांगा, जिसे अदालत ने स्वीकार कर लिया। Chief Justice of India (CJI) की अध्यक्षता वाली पीठ ने स्पष्ट कर दिया कि जब तक अगला आदेश नहीं आता, तब तक status quo यानी वर्तमान स्थिति बनी रहेगी। सुप्रीम कोर्ट ने अपने अंतरिम आदेश में कहा कि केंद्र सरकार जब तक अपना जवाब दाखिल नहीं करती, तब तक Waqf Board में किसी भी प्रकार की नियुक्ति नहीं की जाएगी। साथ ही यह भी साफ किया कि waqf properties को लेकर किसी भी Collector द्वारा कोई नया आदेश पारित नहीं होगा। Chief Justice ने कहा, “जब तक अगली सुनवाई नहीं होती, तब तक बोर्ड या काउंसिल में कोई नई नियुक्ति नहीं हो सकती। और अगर किसी संपत्ति का पंजीकरण 1995 Waqf Act के तहत हुआ है, तो उन संपत्तियों को किसी भी तरह का नुकसान नहीं पहुंचाया जाएगा।” CJI ने यह भी कहा कि कार्यपालिका को प्रशासनिक निर्णय लेने का अधिकार है जबकि न्यायपालिका न्यायिक फैसले लेती है। इसी संदर्भ में उन्होंने 2013 Waqf Amendment Act को चुनौती देने वाली याचिका पर कुछ विशेष पक्षों को अपना जवाब दाखिल करने की अनुमति दी है। सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि केंद्र सरकार, राज्य सरकारें और संबंधित वक्फ बोर्ड को 7 दिनों के भीतर अपना official response दाखिल करना होगा। इसके बाद याचिकाकर्ताओं को केवल 5 याचिकाएं दाखिल करने की अनुमति होगी। इस पूरे मामले को कोर्ट ने “विशेष प्रकृति” का बताते हुए कहा है कि सुनवाई निष्पक्ष और त्वरित होगी। फिलहाल, वक्फ संपत्तियों की मौजूदा स्थिति यथावत बनी रहेगी और किसी भी तरह का नया प्रशासनिक या कानूनी हस्तक्षेप रोक दिया गया है। Desh Harpal की विशेष रिपोर्ट में हम आने वाले दिनों में केंद्र सरकार और वक्फ बोर्ड के जवाबों की विस्तृत जानकारी भी देंगे। यह मामला न सिर्फ कानूनी बल्कि सामाजिक दृष्टिकोण से भी बेहद महत्वपूर्ण बनता जा रहा है।
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National Herald Case ED

National Herald Case: ED ने सोनिया-राहुल गांधी पर चार्जशीट दायर, कांग्रेस बोली – ‘ये बदले की राजनीति है’

16 अप्रैल 2025 – प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने नेशनल हेराल्ड मनी लॉन्ड्रिंग मामले में बड़ी कार्रवाई करते हुए कांग्रेस नेता सोनिया गांधी और राहुल गांधी समेत सात लोगों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल कर दी है। कांग्रेस ने इस कार्रवाई को “राजनीतिक बदले और डराने की कोशिश” बताया है और बुधवार को देशभर में ED दफ्तरों के बाहर प्रदर्शन की घोषणा की है। चार्जशीट में कौन-कौन? ED ने 9 अप्रैल को विशेष PMLA अदालत में चार्जशीट दाखिल की थी। इसमें जिन लोगों के नाम शामिल हैं, वे हैं: अदालत ने चार्जशीट पर संज्ञान लेते हुए मामले की अगली सुनवाई 25 अप्रैल को तय की है।क्या है नेशनल हेराल्ड केस? यह मामला एसोसिएटेड जर्नल्स लिमिटेड (AJL) की संपत्तियों को लेकर है, जो National Herald अखबार का प्रकाशन करती है। ED का आरोप है कि कांग्रेस ने AJL को ₹50 लाख में यंग इंडियन नाम की कंपनी के ज़रिए अधिग्रहित किया, जबकि उसकी संपत्ति की कीमत ₹2,000 करोड़ से ज्यादा थी। सोनिया गांधी और राहुल गांधी यंग इंडियन में बहुमत हिस्सेदारी रखते हैं। ED ने हाल ही में ₹661 करोड़ की संपत्ति दिल्ली, मुंबई और लखनऊ में जब्त करने के नोटिस भी दिए हैं। जांच की शुरुआत कैसे हुई? ये जांच भाजपा नेता सुब्रमण्यम स्वामी की 2013 में दाखिल याचिका के आधार पर शुरू हुई थी। इसके बाद दिल्ली की एक अदालत ने इनकम टैक्स विभाग को जांच की अनुमति दी थी। ED ने कहा कि जांच के दौरान उन्हें ₹18 करोड़ के फर्जी डोनेशन, ₹38 करोड़ के फर्जी किराया और ₹29 करोड़ के फर्जी विज्ञापन की जानकारी मिली।कांग्रेस ने क्या कहा? कांग्रेस नेता अभिषेक मनु सिंघवी ने कहा, “यह पूरा मामला फर्जी है। ना कोई पैसा ट्रांसफर हुआ, ना कोई संपत्ति बेची गई। फिर भी सरकार इसे मनी लॉन्ड्रिंग बता रही है।” केसी वेणुगोपाल ने कहा, “मोदी-शाह सरकार जनता के मुद्दों से ध्यान भटकाने के लिए विपक्ष को टारगेट कर रही है। ये केस राजनीति को दबाने का तरीका है।” जयराम रमेश ने X (पूर्व में ट्विटर) पर लिखा, “नेशनल हेराल्ड की संपत्तियों की जब्ती कानून की आड़ में किया गया अपराध है।” भाजपा का पलटवार भाजपा प्रवक्ता शहजाद पूनावाला ने कहा, “जो लोग भ्रष्टाचार और जनता की संपत्ति की लूट में शामिल रहे हैं, अब उन्हें जवाब देना होगा। ED का मतलब अब ‘एंटाइटलमेंट टू डकैती’ नहीं है।”कोर्ट की टिप्पणी विशेष अदालत ने कहा कि PMLA की कार्रवाई के साथ-साथ CBI की जांच से जुड़ा मामला भी इसी अदालत में स्थानांतरित किया जा सकता है, लेकिन इसके लिए आदेश जिला जज को देना होगा। DeshHarpal पर पढ़ते रहिए देश-दुनिया की सबसे सटीक और सरल खबरें।
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“Coca-Cola ने मुसलमानों के लिए की पीली केप वाली कोल्ड ड्रिंक….?

Coca-Cola Special Coldrink Only For One Religion? Here’s The Truth | देश हरपल स्पेशल रिपोर्ट Coca-Cola की एक खास बोतल चर्चा में है — जिसकी कैप है पीले रंग की, और बताया जा रहा है कि यह केवल एक खास धर्म के लिए बनाई गई है। सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे इस दावे ने कई लोगों को चौंका दिया है। दावा ये भी किया जा रहा है कि यह “Special Coldrink” सिर्फ रमज़ान के महीने में बनाई जाती है और इसमें इस्तेमाल होने वाले Ingredients बाकी कोल्ड्रिंक्स से अलग हैं। लेकिन क्या यह सच है? चलिए देश हरपल पर जानते हैं इसकी पूरी सच्चाई। वायरल क्या हुआ? कुछ दिनों से सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर Coca-Cola की एक बोतल की तस्वीर वायरल हो रही है जिसकी Yellow Cap है। दावा किया जा रहा है कि ये बोतल सिर्फ मुस्लिम समुदाय के लिए बनाई गई है और इसमें इस्तेमाल किए गए प्रोडक्ट्स को Halal Certified किया गया है। ये Yellow Cap आखिर है क्या? असल में, कोका-कोला कंपनी रमज़ान के मौके पर Middle East और कुछ अन्य मुस्लिम देशों में एक खास पैकेजिंग के साथ अपने प्रोडक्ट्स लॉन्च करती है। ये Yellow Cap उसी कस्टम पैकेजिंग का हिस्सा है। लेकिन इसका मतलब ये कतई नहीं है कि यह सिर्फ एक धर्म विशेष के लिए है। Coca-Cola का क्या कहना है? Coca-Cola Middle East की ओर से स्पष्ट किया गया है कि Yellow Cap Bottles में ऐसा कुछ भी नहीं है जो केवल किसी एक धर्म विशेष के लिए बनाया गया हो। बल्कि, यह Marketing Strategy है, ताकि रमज़ान के दौरान consumers को special feel दिया जा सके। इसके साथ ही ये Cap कुछ खास Instructions को Represent करता है जैसे कि “Halal Certified” होने की जानकारी। Halal Certification क्या होता है? Halal एक Arabic Word है जिसका मतलब होता है “वो जो अनुमति प्राप्त हो”। खाने-पीने के Products के लिए Halal Certification यह बताता है कि उसमें ऐसा कोई Ingredient नहीं है जो इस्लामिक कानून के विरुद्ध हो। भारत सहित कई देशों में Halal और Vegetarian दोनों तरह के Certification आम हैं। क्या भारत में भी यह Yellow Cap Bottle मिलती है? नहीं। यह पैकेजिंग केवल Middle East और कुछ चुनिंदा देशों में ही उपलब्ध है। भारत में फिलहाल ऐसी कोई Coca-Cola Bottle officially Launch नहीं की गई है। अफवाह क्यों फैली? Social Media पर आधी-अधूरी जानकारी के साथ Sensational Claims करना आजकल आम हो गया है। कुछ लोगों ने बिना पुख्ता जानकारी के सिर्फ Cap के रंग को देखकर यह मान लिया कि पूरी Drink एक धर्म विशेष के लिए बनाई गई है, जो कि ग़लत है। Coca-Cola की Yellow Cap वाली Bottle कोई धार्मिक पक्षपात नहीं बल्कि एक खास त्योहार के लिए मार्केटिंग रणनीति है। यह Drink सभी के लिए है, और इसमें ऐसा कुछ नहीं जो किसी एक धर्म के लिए Exclusively बनाया गया हो। Desh Harpal आपसे अपील करता है कि ऐसी अफवाहों से बचें और किसी भी खबर को आगे बढ़ाने से पहले उसकी सत्यता ज़रूर जांचें।
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Aligarh Saas Damad Love Story

Aligarh Saas Damad Love Story: में हर दिन नया ड्रामा, Gujarat तक पहुंचा मामला!

उत्तर प्रदेश के अलीगढ़ जिले की एक Aligarh Saas Damad Love Story ने पूरे इलाके में सनसनी फैला दी है। इस कहानी में किरदार हैं—एक होने वाला दामाद और उसकी होने वाली सास, जो शादी से ठीक पहले भाग निकले। अब यह सास-दामाद की unexpected प्रेम कहानी पूरे प्रदेश में चर्चा का विषय बन चुकी है। भागे प्रेमियों की तलाश में जुटी पुलिस मडराक थाना क्षेत्र के मनोहरपुर कायस्त गांव की एक युवती की शादी 16 अप्रैल को दादों निवासी युवक से तय हुई थी। लेकिन इससे पहले ही युवती की मां अपने होने वाले दामाद संग फरार हो गई। फिलहाल दोनों का कुछ अता-पता नहीं है। पुलिस ने युवक के पिता, बहनोई और अन्य परिजनों से पूछताछ की है। शुरुआती लोकेशन उत्तराखंड मिलने पर टीम वहां भेजने की बात हुई थी, लेकिन अब नया अंदेशा है कि वे Gujarat में भी हो सकते हैं। युवक के कुछ दोस्तों पर इन्हें भगाने में मदद करने का शक है, इसलिए पुलिस अब उनसे कड़ी पूछताछ कर रही है। CO इगलास महेश कुमार ने बताया कि जानकारी मिलते ही टीमें संभावित ठिकानों पर भेजी जाएंगी। ताबीज से वशीकरण का आरोप युवक के पिता ने चौंकाने वाला आरोप लगाया है कि उसकी सास ने उसे ताबीज देकर वशीकरण कर लिया। उनके अनुसार, जब वह महिला बेटे की तबीयत खराब होने पर घर आई थी, तब वह दो ताबीज लेकर आई—एक गर्दन में और एक कमर में बांधने के लिए। इसके बाद से ही बेटे का व्यवहार पूरी तरह बदल गया। उन्होंने मीडिया से कहा, “अब यह साफ हो गया है कि हमारा बेटा किसी तंत्र-मंत्र के जाल में फंस गया है। वह महिला ही उसे बहका कर ले गई है। समाज में हमारी बहुत बदनामी हो गई है। इसलिए अब हम उसे घर नहीं लाएंगे और उसे संपत्ति से भी बेदखल किया जाएगा।” महिला के पति ने तोड़ी चुप्पी इस प्रेम-कांड में महिला के पति ने भी अब चुप्पी तोड़ी है। मिडिया से बातचीत में उन्होंने बताया कि रात करीब 10 बजे उन्होंने अपने होने वाले दामाद को कॉल किया था। पहले तो उसने बात टालनी चाही, लेकिन जब शक गहराया तो उसने धमकी देते हुए कहा, “तुमने 19 साल की शादी में अपनी पत्नी को बहुत परेशान किया है। अब उसे भूल जाओ, नहीं तो तुम्हारा घर वीरान कर दूंगा।” महिला के पति ने यह भी बताया कि उसी ने जिद करके अपने दामाद को मोबाइल दिलवाया था। जबकि वह अपनी होने वाली पत्नी से सिर्फ चंद मिनट बात करता था, लेकिन महिला से दिन भर बातें करता था। यह रिश्ता कब emotional affair बन गया, उन्हें अंदाज़ा नहीं हुआ। दोनों परिवारों ने तोड़ा रिश्ता अब इस लव स्टोरी का अंजाम यह है कि दोनों ही परिवारों ने महिला और युवक से रिश्ता खत्म कर दिया है। युवती व उसके पिता ने महिला को अपनाने से इनकार कर दिया है, वहीं युवक के परिवार ने भी साफ कह दिया है कि अब वह उनके लिए मरा हुआ है। अब दोनों परिवारों की सिर्फ एक ही मांग है—पुलिस जल्द से जल्द उन्हें ढूंढ़कर सामने लाए और जो जेवर-नकदी वे ले गए हैं, वह वापस करा दे। Aligarh की ये unconventional love story हर रोज़ नए मोड़ ले रही है—वशीकरण, भागना, धमकी, सामाजिक बदनामी और पारिवारिक टूटन सब कुछ इसमें है। पुलिस अपनी जांच में जुटी हुई है, लेकिन फिलहाल यह मामला और भी रहस्यमय होता जा रहा है। Desh Harpal इस अजीब प्रेम कहानी पर नज़र बनाए हुए है। आगे के अपडेट्स के लिए जुड़े रहिए।
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मेहुल चोकसी

मेहुल चोकसी बेल्जियम में गिरफ्तार: PNB घोटाले का भगोड़ा आखिरकार पकड़ा गया

₹13,000 करोड़ की धोखाधड़ी का आरोपी था चोकसी, भारत लाने की तैयारी तेज बेल्जियम में पकड़ा गया मेहुल चोकसी PNB घोटाले के आरोपी और देश से फरार कारोबारी मेहुल चोकसी को आखिरकार बेल्जियम में गिरफ्तार कर लिया गया है। PTI की रिपोर्ट के मुताबिक, भारत सरकार के प्रत्यर्पण अनुरोध के बाद बेल्जियम पुलिस ने उसे हिरासत में लिया। चोकसी इलाज के लिए बेल्जियम पहुंचा था, लेकिन एजेंसियों को शक था कि वह वहां से स्विट्ज़रलैंड भागने की कोशिश कर रहा है। CBI और ED की नजरें शुरू से थीं चोकसी परजैसे ही भारतीय एजेंसियों को जानकारी मिली कि चोकसी बेल्जियम में है, वे तुरंत एक्टिव हो गईं। CBI और ED ने तुरंत जरूरी दस्तावेज और गिरफ्तारी से जुड़े कागज़ात बेल्जियम प्रशासन को भेजे। बेल्जियम की एजेंसियों ने कार्रवाई करते हुए चोकसी को हिरासत में ले लिया। भारत लाने की प्रक्रिया अंतिम चरण मेंचोकसी की गिरफ्तारी के बाद अब उसे भारत लाने की प्रक्रिया तेज़ हो गई है। भारत पहले ही औपचारिक रूप से उसके प्रत्यर्पण की मांग कर चुका था। अब उम्मीद जताई जा रही है कि वह जल्द भारत की जेल में होगा। 2018 में भागा था एंटीगुआ, अब छिपाई भारतीय नागरिकताचोकसी ने 2017 में एंटीगुआ की नागरिकता ले ली थी और 2018 में अपने परिवार समेत भारत से फरार हो गया था। गिरफ्तारी के वक्त उसने अपनी भारतीय और एंटीगुआ की नागरिकता छिपाने की कोशिश की, लेकिन अब सच्चाई सामने आ गई है। इससे पहले वह डोमिनिका में भी गिरफ्तार हो चुका है, लेकिन 51 दिन जेल में रहने के बाद ब्रिटेन की क्वीन की प्रिवी काउंसिल से उसे राहत मिल गई थी। क्या है PNB घोटाला?चोकसी की कंपनी ‘गीतांजलि जेम्स लिमिटेड’ पर आरोप है कि उसने अपने भांजे नीरव मोदी के साथ मिलकर पंजाब नेशनल बैंक (PNB) को करीब ₹13,500 करोड़ का नुकसान पहुंचाया। 2014 से 2017 के बीच PNB के कुछ अधिकारियों की मदद से LOU (लेटर ऑफ अंडरटेकिंग) और फॉरेन लेटर ऑफ क्रेडिट के जरिए घोटाला किया गया। अकेले चोकसी पर ₹6,098 करोड़ की धोखाधड़ी का आरोप है। अब उम्मीद है इंसाफ कीचोकसी की गिरफ्तारी से भारत को बड़ी कामयाबी मिली है। सरकार और एजेंसियां अब पूरी कोशिश कर रही हैं कि उसे जल्द से जल्द भारत लाया जाए और घोटाले के लिए सज़ा दिलाई जाए। 👉 DeshHarpal इस बड़ी खबर पर नज़र बनाए हुए है। आगे की अपडेट्स के लिए जुड़े रहें!
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Tahawwur Rana Extradition

Tahawwur Rana Extradition : तहव्वुर राणा को NIA की कस्टडी में कहां रखा गया है और 18 दिन में क्या-क्या उगलवाएगी जांच एजेंसी?

देश हरपल न्यूज़ डेस्कतारीख: 11 अप्रैल 2025 मुंबई आतंकी हमले का साजिशकर्ता तहव्वुर राणा आखिरकार भारत की गिरफ्त में है। अमेरिका से कानूनी औपचारिकताओं के बाद भारत लाया गया राणा फिलहाल राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) की हिरासत में है। लेकिन उसे तिहाड़ जेल में नहीं रखा गया है। सवाल उठता है – आखिर Tahawwur Rana को कहां रखा गया है? कैसी है सुरक्षा? और NIA उससे कौन-कौन से राज उगलवाने की तैयारी में है? कहां रखा गया है तहव्वुर राणा? सूत्रों के मुताबिक, तहव्वुर राणा को तिहाड़ जेल के बजाय NIA के सेंट्रल जोधपुर ऑफिस (CJO Complex) में रखा गया है, जो एक हाई-सिक्योरिटी फैसिलिटी है। यहां सिर्फ बेहद संवेदनशील और हाई-प्रोफाइल मामलों से जुड़े आरोपियों को ही रखा जाता है। NIA ने यह फैसला इसलिए लिया है ताकि राणा से बिना किसी रुकावट के पूछताछ की जा सके और उसकी सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके। बता दें कि तिहाड़ जेल में पहले भी कई आतंकियों पर हमले हो चुके हैं, इसलिए NIA कोई जोखिम नहीं लेना चाहती। कैसी है सुरक्षा व्यवस्था? CJO कॉम्प्लेक्स में राणा को 24×7 Z+ श्रेणी की सुरक्षा में रखा गया है। उसके आसपास सशस्त्र कमांडो तैनात हैं और हर मूवमेंट पर CCTV से निगरानी रखी जा रही है। उसे एक अलग हाई-सिक्योरिटी बैरक में रखा गया है, जहां किसी बाहरी व्यक्ति को मिलने की अनुमति नहीं है। NIA की 18 दिनों की कस्टडी में क्या होगा? एनआईए को अदालत ने तहव्वुर राणा की 18 दिनों की रिमांड दी है। इस दौरान जांच एजेंसी का मकसद है: कौन है तहव्वुर राणा? तहव्वुर हुसैन राणा एक पाकिस्तानी मूल का कनाडाई नागरिक है, जो अमेरिका में मेडिकल क्लिनिक चलाता था। वह 26/11 के मास्टरमाइंड डेविड हेडली का करीबी दोस्त और साथी था। हेडली ने भारत में रेकी करने और आतंकियों की मदद करने में राणा की भूमिका को स्वीकारा था। अमेरिका से भारत कैसे लाया गया? तहव्वुर राणा के प्रत्यर्पण की प्रक्रिया में भारत को लंबा इंतजार करना पड़ा। अमेरिका की अदालत ने तमाम दलीलों के बाद आखिरकार उसके भारत प्रत्यर्पण की मंजूरी दी। इसके बाद NIA की एक विशेष टीम अमेरिका गई, जहां उसने अमेरिकी अधिकारियों के साथ सारे कागजात और कानूनी प्रक्रियाएं पूरी कीं। इसके बाद उसे फ्लाइट से भारत लाया गया। निष्कर्ष तहव्वुर राणा की गिरफ्तारी और भारत लाया जाना देश की सुरक्षा एजेंसियों के लिए एक बड़ी कामयाबी है। अब सबकी निगाहें NIA की पूछताछ पर हैं, जिससे आने वाले दिनों में कई बड़े खुलासे हो सकते हैं। यह केस न सिर्फ 26/11 के घावों को भरने की दिशा में एक कदम है, बल्कि आतंकवाद के खिलाफ भारत की अंतरराष्ट्रीय लड़ाई में भी अहम मोड़ साबित हो सकता है। देश हरपल न्यूज़ पर हम ऐसे ही राष्ट्रहित से जुड़ी खबरों को आपके सामने लाते रहेंगे। हमारे साथ जुड़े रहें।
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बिलासपुर “बादाम कांड” के बाद नया विवाद: NOC के बदले पैसे मांगने का आरोप, वीडियो वायरल

छत्तीसगढ़ के बिलासपुर में चर्चित “बादाम कांड” के बाद एक बार फिर हाउसिंग बोर्ड का दफ्तर सुर्खियों में है। इस बार वरिष्ठ सहायक पूनम बंजारे का एक नया वीडियो सामने आया है, जिसमें उन पर NOC (नो ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट) के बदले पैसे मांगने का आरोप लगाया जा रहा है। हालांकि, वीडियो में पूनम बंजारे खुद इन आरोपों से इनकार करती नजर आ रही हैं। वहीं, ऑफिस में बहस और हंगामा भी साफ दिखाई दे रहा है। फिलहाल इस मामले में किसी भी पक्ष ने आधिकारिक शिकायत दर्ज नहीं कराई है। नामांतरण के लिए लोगों को काटने पड़ रहे चक्कर जानकारी के मुताबिक, छत्तीसगढ़ हाउसिंग बोर्ड के ऑफिस में मकान और फ्लैट खरीदने के बाद नामांतरण (ट्रांसफर) के लिए लोगों को महीनों तक चक्कर लगाने पड़ रहे हैं। नियमों के अनुसार आवेदन देने के बाद भी फाइलें लंबित रखी जा रही हैं, जिससे लोगों में नाराजगी बढ़ती जा रही है। एक महिला ने बताया कि उसने 17 मार्च 2025 को नामांतरण के लिए आवेदन किया था। 11 नवंबर 2025 को आदेश जारी होने के बाद भी उसे राहत नहीं मिली। वीडियो में क्या दिखा? सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो में एक महिला पूनम बंजारे पर NOC देने के बदले पैसे मांगने का आरोप लगा रही है। वहीं, पूनम बंजारे इन आरोपों से साफ इनकार करती दिखती हैं। वीडियो बनते देख वह नाराज हो जाती हैं और ऑफिस में हंगामा करती नजर आती हैं। अधिकारी बोले – शिकायत मिलने पर होगी कार्रवाई हाउसिंग बोर्ड के संपदा अधिकारी एसके शर्मा ने कहा कि उन्हें इस वायरल वीडियो की जानकारी नहीं है।उन्होंने कहा कि अगर इस मामले में कोई शिकायत आती है, तो नियमानुसार जांच कर कार्रवाई की जाएगी। “बादाम कांड” से पहले ही चर्चा में था दफ्तर इससे पहले भी यही हाउसिंग बोर्ड ऑफिस “बादाम कांड” को लेकर चर्चा में आया था। दरअसल, एक युवक तरुण साहू ने नामांतरण के लिए आवेदन किया था। प्रक्रिया पूरी होने के बाद भी उसकी फाइल उसे नहीं दी गई और वह महीनों तक ऑफिस के चक्कर लगाता रहा। आखिरकार परेशान होकर युवक आधा किलो बादाम लेकर ऑफिस पहुंचा और अधिकारियों की टेबल पर फेंकते हुए कहा—“इसे खाइए, याददाश्त बढ़ेगी… जब मेरी फाइल मिल जाए, तो बता दीजिए।” इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुआ था, जिसके बाद विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठे थे। 👉 ऐसी ही जमीनी और सच्ची खबरों के लिए विजिट करें: www.deshharpal.com
RBI

RBI ने बदले Auto Debit नियम अब बैंक खाते से पैसे कटने से पहले मिलेगा अलर्ट और ज्यादा कंट्रोल

भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने auto-debit यानी e-mandate नियमों में बड़ा बदलाव किया है। यह बदलाव सीधे उन करोड़ों लोगों को प्रभावित करेगा जो EMI, SIP, OTT subscriptions, insurance premium या ऑनलाइन बिल पेमेंट के लिए auto-debit का इस्तेमाल करते हैं। नया सिस्टम डिजिटल पेमेंट को आसान बनाने के साथ-साथ ज्यादा सुरक्षित और पारदर्शी बनाने के लिए लाया गया है। RBI ने Auto-Debit नियमों में क्या बदला? RBI के नए e-mandate framework के तहत recurring payments को लेकर प्रक्रिया को अपडेट किया गया है, ताकि ग्राहकों को बेहतर सुविधा और कंट्रोल मिल सके। ₹15,000 तक के पेमेंट पर OTP की जरूरत नहीं अब ₹15,000 तक की recurring payments जैसे OTT subscription, मोबाइल बिल, बिजली-पानी बिल आदि पर हर बार OTP डालने की जरूरत नहीं होगी। इससे छोटे-मोटे डिजिटल पेमेंट बिना रुकावट अपने आप हो जाएंगे। बड़ी ट्रांजैक्शन पर सुरक्षा बनी रहेगी ₹15,000 से ज्यादा की किसी भी auto-debit ट्रांजैक्शन पर OTP या अतिरिक्त verification पहले की तरह जरूरी रहेगा। जरूरी सेवाओं के लिए ₹1 लाख तक की सुविधा Insurance premium, mutual fund SIP और credit card बिल जैसे जरूरी payments में ₹1 लाख तक की auto-debit सुविधा मिल सकती है। पेमेंट से पहले 24 घंटे का अलर्ट अनिवार्य अब किसी भी auto-debit से पहले बैंक या कंपनी को ग्राहक को कम से कम 24 घंटे पहले सूचना (notification) देना जरूरी होगा। आम लोगों पर इसका क्या असर पड़ेगा? नए नियमों का असर रोजमर्रा की जिंदगी पर साफ दिखेगा: EMI और SIP जैसी जरूरी सेवाएं बिना रुकावट चलेंगीOTT और subscription payments आसान हो जाएंगेगलत या unauthorized debit का खतरा कम होगाहर transaction की पहले से जानकारी मिलेगीयूजर्स को अपने पैसों पर ज्यादा कंट्रोल मिलेगा हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!

सागर में दिल्ली नंबर कार से अवैध शराब बरामद: हादसे के बाद खुला राज, एक गिरफ्तार, 3 फरार

मध्यप्रदेश के सागर जिले में गढ़ाकोटा थाना पुलिस ने एक बड़ी कार्रवाई करते हुए दिल्ली नंबर की कार से अवैध शराब बरामद की है। खास बात यह है कि यह पूरा मामला एक सड़क हादसे के बाद सामने आया। पुलिस के अनुसार, मंगलवार रात सूचना मिली थी कि चनौआ खुर्द के पास बरखेड़ा गौतम मार्ग पर एक क्षतिग्रस्त कार सड़क किनारे खड़ी है और उसका चालक अंदर फंसा हुआ है। सूचना मिलते ही पुलिस टीम मौके पर पहुंची और चालक को सुरक्षित बाहर निकाला। तलाशी में मिली 9 पेटी देशी शराब जब पुलिस ने कार की तलाशी ली, तो अंदर से 9 पेटी देशी शराब बरामद हुई। इसके बाद पुलिस ने तुरंत कार्रवाई करते हुए कार और शराब को जब्त कर लिया। पकड़े गए चालक ने अपना नाम जोगेंद्र पिता वीरसिंह राजपूत बताया है। हादसे ने खोल दी तस्करी की पोल पूछताछ में आरोपी ने बताया कि वह अपने तीन साथियों के साथ सागर से गढ़ाकोटा की ओर शराब लेकर जा रहा था। इसी दौरान रास्ते में कार दुर्घटनाग्रस्त हो गई, जिससे पूरी साजिश सामने आ गई। एक गिरफ्तार, 3 आरोपी फरार गढ़ाकोटा थाना प्रभारी शुभम दुबे ने बताया कि आरोपी जोगेंद्र को गिरफ्तार कर लिया गया है और उसके खिलाफ आबकारी एक्ट के तहत मामला दर्ज किया गया है। वहीं, उसके तीन साथी अभी फरार हैं, जिनकी तलाश में पुलिस लगातार दबिश दे रही है। 👉 ऐसी ही ताजा और सटीक खबरों के लिए विजिट करें www.deshharpal.com

जबलपुर में नौकरानी से मारपीट और ठगी: नशा देकर 6.30 लाख निकाले, CCTV में कैद हुई क्रूरता

मध्यप्रदेश के जबलपुर से इंसानियत को शर्मसार कर देने वाला मामला सामने आया है। यहां एक नौकरानी के साथ न सिर्फ बेरहमी से मारपीट की गई, बल्कि साजिश रचकर उसके बैंक खाते से लाखों रुपये भी निकाल लिए गए। घटना आधारताल थाना क्षेत्र की है। पीड़िता पूनम बर्मन ने एएसपी सूर्यकांत शर्मा को शिकायत के साथ CCTV फुटेज भी सौंपे हैं। वीडियो में साफ देखा जा सकता है कि मालकिन अंजू पांडे उसे थप्पड़ मार रही है और बाल पकड़कर जमीन पर घसीट रही है। नशा देकर चेक पर साइन करवाए, खाते से निकाले पैसे जानकारी के मुताबिक पूनम, अंजू पांडे के घर काम करती थी। आरोप है कि उसे नशे की गोलियां खिलाकर जबरन चेक पर साइन करवाए गए। इसके बाद उसे कार में बैठाकर बैंक ले जाया गया और खाते से पैसे निकलवा लिए गए। जब पूनम को होश आया और उसने विरोध किया, तो उसके साथ मारपीट की गई। खाते में थे 6.30 लाख रुपए, सब निकाल लिए पीड़िता की बहन हीरा बाई ने बताया कि पूनम के बैंक खाते में करीब 6 लाख 30 हजार रुपए थे, जिन्हें आरोपी ने निकलवा लिया। इतना ही नहीं, उसकी पूरी कमाई और बैंक से जुड़े जरूरी दस्तावेज भी अपने पास रख लिए गए। “पैसे देने से मना किया तो पीटा” पूनम ने बताया कि वह कई महीनों से काम कर रही थी। अचानक उसकी मालकिन ने पैसों की मांग शुरू कर दी। जब उसने मना किया, तो उसके साथ मारपीट की गई और पूरी साजिश के तहत उसके खाते से पैसे निकलवा लिए गए। पुलिस को सौंपी शिकायत, जांच जारी बुधवार को पूनम अपनी बहनों के साथ एसपी कार्यालय पहुंची और पूरे मामले की शिकायत की। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि CCTV फुटेज और शिकायत के आधार पर जल्द कार्रवाई की जाएगी। शिवपुरी में भी शर्मनाक घटना इसी तरह का एक और मामला शिवपुरी से सामने आया है, जहां एक बस कंडक्टर ने महिला यात्री को सड़क पर फेंक दिया। महिला का कसूर सिर्फ इतना था कि उसने ज्यादा किराया देने से इनकार किया। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, कंडक्टर ने महिला के साथ मारपीट की और गालियां दीं। इस दौरान पास खड़ा उसका मासूम बच्चा अपनी मां को छोड़ने की गुहार लगाता रहा, लेकिन कंडक्टर का दिल नहीं पसीजा। 👉 ऐसी ही सच्ची और जमीनी खबरों के लिए विजिट करें:www.deshharpal.com
ईरान

Middle East Tension ईरान ने पकड़े दो जहाज, भारत आ रहा पोत भी रोक दिया गया

मध्य पूर्व में एक बार फिर तनाव बढ़ गया है। ईरान ने समुद्री क्षेत्र में बड़ी कार्रवाई करते हुए दो जहाजों को जब्त कर लिया है। इनमें से एक जहाज दुबई से होते हुए भारत की ओर आ रहा था। इस घटना ने न सिर्फ क्षेत्रीय बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी चिंता बढ़ा दी है। जहाजों की जब्ती से मचा हड़कंप जानकारी के अनुसार, ईरानी सुरक्षा बलों ने खाड़ी क्षेत्र में निगरानी के दौरान दो जहाजों को रोका और अपने कब्जे में ले लिया। बताया जा रहा है कि दोनों जहाजों को संदिग्ध गतिविधियों के आधार पर रोका गया, हालांकि अभी तक आधिकारिक तौर पर यह स्पष्ट नहीं हुआ है कि उनमें क्या माल लदा था और क्रू मेंबर कौन थे। सबसे अहम बात यह है कि जिन जहाजों में से एक भारत की ओर आ रहा था, उसका रास्ता दुबई से होकर गुजर रहा था, जिससे इस मामले में भारत की भी अप्रत्यक्ष एंट्री हो गई है। India Alert: भारत की नजर स्थिति पर भारत इस पूरे मामले पर लगातार नजर बनाए हुए है। भारतीय एजेंसियां यह जानने की कोशिश कर रही हैं कि क्या इस जहाज का कोई सीधा संबंध भारत से जुड़ा है या नहीं। फिलहाल स्थिति को लेकर सावधानी बरती जा रही है। Gulf Region में बढ़ता तनाव यह घटना ऐसे समय पर हुई है जब खाड़ी क्षेत्र पहले से ही भू-राजनीतिक तनाव से गुजर रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की घटनाएं समुद्री व्यापार और शिपिंग रूट्स पर सीधा असर डाल सकती हैं। खासकर तेल और जरूरी वस्तुओं की सप्लाई पर दबाव बढ़ने की आशंका जताई जा रही है। International Reaction भी शुरू इस घटना के बाद अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी प्रतिक्रिया आने लगी है। कई देशों ने समुद्री सुरक्षा को मजबूत करने की मांग की है ताकि इस तरह की घटनाओं से वैश्विक व्यापार प्रभावित न हो। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!

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