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Yogini Ekadashi

Yogini Ekadashi 2026: दीपदान के ये 5 आसान उपाय, घर में सुख-समृद्धि आने की है मान्यता

हिंदू धर्म में एकादशी तिथि का विशेष महत्व बताया गया है, लेकिन योगिनी एकादशी (Yogini Ekadashi) को भगवान विष्णु की कृपा प्राप्त करने वाली प्रमुख एकादशियों में गिना जाता है। इस दिन श्रद्धालु व्रत रखते हैं, भगवान विष्णु और मां लक्ष्मी की पूजा करते हैं तथा सुख-समृद्धि की कामना करते हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, योगिनी एकादशी की शाम घर के कुछ खास स्थानों पर दीपक जलाने से सकारात्मक ऊर्जा बढ़ती है और आर्थिक परेशानियां दूर होने की प्रार्थना की जाती है। अगर आप भी इस शुभ अवसर पर पूजा-पाठ कर रहे हैं, तो जानिए वे पांच स्थान जहां दीपक जलाना शुभ माना जाता है। Yogini Ekadashi 2026 पर इन 5 जगहों पर जरूर जलाएं दीपक 1. मुख्य द्वार पर दीपक जलाएं घर का मुख्य द्वार सकारात्मक और नकारात्मक ऊर्जा का प्रवेश द्वार माना जाता है। ऐसी मान्यता है कि योगिनी एकादशी की शाम यहां घी या तिल के तेल का दीपक जलाने से घर में शुभता का आगमन होता है और मां लक्ष्मी की कृपा बनी रहती है। 2. तुलसी के पौधे के सामने तुलसी का पौधा भगवान विष्णु को अत्यंत प्रिय माना गया है। योगिनी एकादशी के दिन शाम के समय तुलसी के पास दीपक जलाकर पूजा करने से घर में सुख-शांति और समृद्धि आने की मान्यता है। कई परिवार इस दिन तुलसी की परिक्रमा भी करते हैं। 3. पूजा घर में भगवान विष्णु के समक्ष पूजा स्थल पर भगवान विष्णु और मां लक्ष्मी के सामने शुद्ध घी का दीपक जलाना विशेष फलदायी माना जाता है। पूजा के दौरान ‘ॐ नमो भगवते वासुदेवाय’ मंत्र का जाप और विष्णु सहस्रनाम का पाठ करना भी शुभ माना जाता है। 4. रसोईघर में वास्तु शास्त्र के अनुसार रसोईघर माता अन्नपूर्णा का स्थान माना जाता है। यहां दीपक जलाने की परंपरा को अन्न और धन की वृद्धि से जोड़कर देखा जाता है। मान्यता है कि इससे घर में कभी अन्न की कमी नहीं होती। 5. ईशान कोण (उत्तर-पूर्व दिशा) घर का उत्तर-पूर्व भाग यानी ईशान कोण सबसे पवित्र दिशा मानी जाती है। इस स्थान पर दीपक जलाने से सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है और परिवार के लिए सुख, शांति एवं आर्थिक उन्नति की कामना की जाती है। योगिनी एकादशी पर पूजा करते समय रखें इन बातों का ध्यान दान-पुण्य का भी है विशेष महत्व धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, योगिनी एकादशी के दिन अन्न, वस्त्र, फल, जल और दक्षिणा का दान करना अत्यंत पुण्यदायी माना जाता है। कहा जाता है कि इस दिन किए गए दान और सेवा का विशेष फल प्राप्त होता है तथा जीवन की कई बाधाएं दूर होने की कामना की जाती है। क्या सच में दूर होती है आर्थिक तंगी? धार्मिक ग्रंथों और परंपराओं में योगिनी एकादशी पर दीपदान, व्रत और भगवान विष्णु की आराधना का विशेष महत्व बताया गया है। हालांकि, इन मान्यताओं का आधार आस्था है। इसे धार्मिक विश्वास के रूप में ही देखा जाना चाहिए। नियमित पूजा, सकारात्मक सोच, मेहनत और सही आर्थिक योजना के साथ जीवन में सफलता के अवसर और भी मजबूत हो सकते हैं। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Amarnath Yatra

Amarnath Yatra 2026 गुफा में दिखा Baba Barfani, श्रद्धालुओं में उत्साह

जम्मू-कश्मीर की पवित्र अमरनाथ गुफा से इस साल की अमरनाथ यात्रा 2026 (Amarnath Yatra) से पहले बाबा बर्फानी (Baba Barfani) की पहली झलक सामने आई है। गुफा के अंदर इस बार प्राकृतिक रूप से बना बर्फ का शिवलिंग करीब 6 से 7 फीट ऊँचा दिखाई दे रहा है, जिसे देखकर श्रद्धालुओं में गहरी आस्था और उत्साह देखने को मिल रहा है। 6–7 फीट का प्राकृतिक Shivling बना आकर्षण हर साल की तरह इस बार भी यह बर्फीला शिवलिंग मौसम के साथ अपने अलग-अलग रूप में नजर आता है। श्रद्धालु इसे भगवान शिव का दिव्य स्वरूप मानते हैं। अमरनाथ की गुफा में बाबा बर्फानी के दर्शन को बेहद पवित्र और दुर्लभ माना जाता है। 3 जुलाई से शुरू होगी Amarnath Yatra 2026 इस वर्ष अमरनाथ यात्रा 3 जुलाई 2026 से शुरू होने जा रही है। यात्रा से पहले सुरक्षा बलों ने गुफा क्षेत्र का निरीक्षण किया और तैयारियों का जायजा लिया। जवानों ने भी मौके पर पहुंचकर बाबा बर्फानी के दर्शन किए। सुरक्षा और व्यवस्थाओं की कड़ी तैयारी प्रशासन का कहना है कि इस बार यात्रा को पहले से ज्यादा सुरक्षित और व्यवस्थित बनाने के लिए सभी जरूरी इंतजाम किए जा रहे हैं। रास्तों की निगरानी, मेडिकल सुविधा और सुरक्षा व्यवस्था पर खास ध्यान दिया जा रहा है। लाखों श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र देशभर से हर साल लाखों श्रद्धालु कठिन पहाड़ी रास्तों को पार कर अमरनाथ गुफा तक पहुंचते हैं और बाबा बर्फानी के दर्शन करते हैं। इस साल भी बड़ी संख्या में भक्तों के आने की उम्मीद है। प्रशासन की श्रद्धालुओं से अपील स्थानीय प्रशासन और सुरक्षा एजेंसियों ने यात्रियों से अपील की है कि वे मौसम की जानकारी लेकर ही यात्रा करें और नियमों का पालन करते हुए सुरक्षित दर्शन करें। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Adhik Maas

Adhik Maas 2026: भक्ति का महीना शुरू, जानें शुभ मंत्र और धार्मिक महत्व

आज से हिंदू पंचांग का सबसे पवित्र और खास समय Adhik Maas 2026 (Purushottam Maas) शुरू हो गया है। इसे सामान्य भाषा में मलमास भी कहा जाता है, लेकिन धार्मिक मान्यताओं के अनुसार यह कोई अशुभ समय नहीं, बल्कि भगवान विष्णु को समर्पित अत्यंत शुभ महीना माना जाता है। इस महीने को “पुरुषोत्तम मास” इसलिए कहा जाता है क्योंकि स्वयं भगवान विष्णु ने इसे अपना नाम देकर सम्मानित किया था। Adhik Maas 2026 क्या है और क्यों खास माना जाता है? अधिकमास हर 2–3 साल में आता है, जब चंद्र और सौर कैलेंडर के बीच अंतर को संतुलित करने के लिए एक अतिरिक्त महीना जोड़ा जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार जब किसी देवता ने इस अतिरिक्त महीने को स्वीकार नहीं किया, तब भगवान विष्णु ने इसे अपनाकर इसे भक्ति और साधना का सर्वोच्च समय बना दिया। यही कारण है कि इस महीने में भौतिक कार्यों से ज्यादा आध्यात्मिक गतिविधियों को महत्व दिया जाता है। Purushottam Maas में क्या करना चाहिए (Do’s) इस पूरे महीने में किए गए अच्छे कर्म कई गुना फल देने वाले माने जाते हैं: अधिकमास में क्या नहीं करना चाहिए (Don’ts) इस पवित्र अवधि में कुछ कार्यों से बचने की सलाह दी जाती है: Adhik Maas 2026 के शक्तिशाली मंत्र इस महीने में मंत्र जप का विशेष महत्व बताया गया है। माना जाता है कि इससे मन शांत होता है और जीवन में सकारात्मक ऊर्जा बढ़ती है। 1. विष्णु मंत्र “ॐ नमो भगवते वासुदेवाय”रोज 108 बार जप करना अत्यंत फलदायी माना जाता है। 2. महामंत्र हरे राम हरे राम, राम राम हरे हरेहरे कृष्ण हरे कृष्ण, कृष्ण कृष्ण हरे हरे 3. शांति मंत्र “शान्ताकारं भुजगशयनं पद्मनाभं सुरेशम्…” Adhik Maas 2026 का महत्व (Human Touch) आज की तेज़ रफ्तार जिंदगी में यह महीना एक तरह से “pause” लेने का मौका देता है। भागदौड़ के बीच कुछ समय अपने मन, विचार और आध्यात्म से जुड़ने का अवसर मिलता है। कई लोग इस महीने में व्रत रखते हैं, पूजा-पाठ बढ़ाते हैं और अपने जीवन में सरलता लाने की कोशिश करते हैं। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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वट सावित्री

वट सावित्री 2026: सुहागिन महिलाओं में दिखी आस्था, मंदिरों में उमड़ी भीड़

ज्येष्ठ अमावस्या के मौके पर शनिवार को देशभर में वट सावित्री व्रत श्रद्धा और विश्वास के साथ मनाया गया। सुबह से ही मंदिरों और बरगद के पेड़ों के पास सुहागिन महिलाओं की भीड़ देखने को मिली। महिलाओं ने पति की लंबी उम्र, सुखी वैवाहिक जीवन और परिवार की खुशहाली के लिए व्रत रखकर वट वृक्ष की पूजा की। इस दौरान महिलाओं ने पारंपरिक वेशभूषा में पूजा-अर्चना की, बरगद के पेड़ के चारों ओर धागा बांधा और सावित्री-सत्यवान की कथा सुनी। कई जगहों पर सामूहिक पूजा का आयोजन भी किया गया, जहां महिलाओं ने पूरे विधि-विधान से व्रत किया। क्यों खास माना जाता है Vat Savitri Vrat? हिंदू धर्म में वट सावित्री व्रत को सुहाग और समर्पण का प्रतीक माना जाता है। पौराणिक कथा के अनुसार माता सावित्री ने अपने तप, प्रेम और दृढ़ निश्चय से यमराज से अपने पति सत्यवान के प्राण वापस प्राप्त किए थे। तभी से यह व्रत पति की लंबी आयु और अखंड सौभाग्य के लिए रखा जाता है। धार्मिक मान्यता है कि बरगद का पेड़ त्रिदेवों का स्वरूप होता है। इसकी जड़ों में ब्रह्मा, तने में भगवान विष्णु और शाखाओं में भगवान शिव का वास माना जाता है। यही कारण है कि इस दिन वट वृक्ष की पूजा का विशेष महत्व होता है। परिक्रमा के समय बोलें ये शुभ मंत्र बरगद के पेड़ की परिक्रमा करते समय महिलाएं इस मंत्र का जाप करती हैं— “वट वृक्ष त्वं देववृक्षः त्वं च विष्णुस्वरूपधृक्।पति आयुः प्रदेहि त्वं नमस्ते वटवृक्षाय॥” मान्यता है कि श्रद्धा से इस मंत्र का जाप करने पर वैवाहिक जीवन में सुख-शांति बनी रहती है और अखंड सौभाग्य का आशीर्वाद मिलता है। ऐसे की जाती है वट सावित्री की पूजा बाजारों में भी दिखी रौनक वट सावित्री व्रत को लेकर पूजा सामग्री, फल, मिठाई और सजावटी सामान की दुकानों पर भी अच्छी भीड़ देखने को मिली। महिलाओं ने पूजा के लिए विशेष रूप से लाल और पीले रंग की सामग्री खरीदी। कई जगहों पर बरगद के पेड़ों को फूलों और रंगोली से सजाया गया। परिवार और रिश्तों से जुड़ा त्योहार वट सावित्री व्रत सिर्फ धार्मिक परंपरा नहीं, बल्कि पति-पत्नी के रिश्ते में विश्वास, प्रेम और समर्पण का प्रतीक भी माना जाता है। बदलते दौर में भी यह पर्व भारतीय संस्कृति और पारिवारिक मूल्यों को मजबूती से जोड़कर रखे हुए है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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शनि जयंती

शनि जयंती 2026: कल का दिन क्यों है खास? Shani Dev देंगे किसे सफलता और किसे चेतावनी

शनि जयंती 2026 इस बार 16 मई 2026 (शनिवार) को मनाई जाएगी। हिंदू धर्म में इसे बेहद पवित्र और शक्तिशाली दिन माना जाता है, क्योंकि इस दिन भगवान शनि देव के जन्मोत्सव का उत्सव होता है। शनिवार और ज्येष्ठ अमावस्या का यह दुर्लभ संयोग इस वर्ष शनि जयंती के महत्व को और बढ़ा रहा है। देशभर के शनि मंदिरों में इस दिन भक्त विशेष पूजा, व्रत और दान करते हैं। माना जाता है कि इस दिन शनि देव की कृपा से जीवन की परेशानियों में कमी आती है और कर्मों का फल बेहतर रूप में मिलता है। Shani Jayanti 2026 का धार्मिक महत्व Shani Jayanti को कर्म, न्याय और अनुशासन का प्रतीक माना जाता है। शनि देव को “कर्मफल दाता” कहा गया है, यानी व्यक्ति के अच्छे-बुरे कर्मों का परिणाम समय के साथ देते हैं। इस दिन पूजा करने से जीवन में स्थिरता, बाधाओं से राहत और मानसिक शांति मिलने की मान्यता है। किसकी चमकेगी किस्मत? इस Shani Jayanti पर कुछ लोगों के लिए समय काफी शुभ माना जा रहा है: ऐसे लोगों के लिए रुके हुए कामों में तेजी, आर्थिक लाभ और नए अवसरों के योग बन सकते हैं। किसे रहना होगा सावधान? कुछ लोगों को इस समय थोड़ा ध्यान रखने की जरूरत हो सकती है: इस समय सोच-समझकर कदम उठाना और धैर्य बनाए रखना सबसे जरूरी माना जाता है। सरल उपाय शनि देव को प्रसन्न करने के लिए इस दिन ये उपाय किए जाते हैं: हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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अक्षय तृतीया

अक्षय तृतीया 2026 Gold नहीं, ये 1 दान दिलाएगा सुख-समृद्धि और Good Luck

अक्षय तृतीया का दिन हिंदू धर्म में बेहद शुभ माना जाता है। मान्यता है कि इस दिन किया गया हर अच्छा काम—चाहे वो पूजा हो, दान हो या नई शुरुआत—उसका फल कभी खत्म नहीं होता। यही वजह है कि लोग इस दिन को अपने जीवन में सकारात्मक बदलाव लाने के मौके के रूप में देखते हैं। इस साल भी अक्षय तृतीया को लेकर लोगों में खास उत्साह है। जहां एक तरफ बाजारों में सोना-चांदी खरीदने की तैयारी है, वहीं दूसरी ओर धार्मिक मान्यताओं के अनुसार दान-पुण्य करने का महत्व भी काफी बढ़ जाता है। क्यों खास है “Ann Daan”? प्रसिद्ध संत Premanand Maharaj का कहना है कि अगर आप अक्षय तृतीया पर सिर्फ एक काम करना चाहते हैं, तो वो है अन्न दान। उनके अनुसार, जरूरतमंद को भोजन या अनाज देना सबसे बड़ा पुण्य है। उनका मानना है कि जो व्यक्ति इस दिन सच्चे मन से गेहूं, चावल या दाल का दान करता है, उसके घर में कभी अन्न की कमी नहीं होती। ये सिर्फ धार्मिक आस्था नहीं, बल्कि इंसानियत का सबसे सरल और असरदार तरीका भी है। कैसे करें ये आसान उपाय? अक्षय तृतीया के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और भगवान विष्णु व माता लक्ष्मी की पूजा करें। इसके बाद अपनी क्षमता के अनुसार अन्न का दान करें। आप चाहें तो किसी गरीब परिवार को राशन दे सकते हैं या किसी भूखे व्यक्ति को भोजन करा सकते हैं। ध्यान रखने वाली बात ये है कि दान दिखावे के लिए नहीं, बल्कि सच्चे मन से किया जाए—तभी उसका सही फल मिलता है। सिर्फ सोना खरीदना ही नहीं, ये भी करें अक्सर लोग अक्षय तृतीया को सिर्फ गोल्ड खरीदने से जोड़कर देखते हैं, लेकिन इसका असली महत्व दान और अच्छे कर्मों में छिपा है। इस दिन: दिल से किया छोटा काम, बड़ा असर अक्षय तृतीया हमें ये सिखाती है कि छोटे-छोटे अच्छे काम भी जीवन में बड़ा बदलाव ला सकते हैं। अगर आप इस दिन किसी की मदद करते हैं, तो उसका असर सिर्फ सामने वाले पर ही नहीं, बल्कि आपके जीवन पर भी पड़ता है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Ram Navami

Ram Navami 2026 सही Date,शुभ मुहूर्त और Puja Samagri पूरी जानकारी

राम नवमी (Ram Navami) हिंदू धर्म का एक अत्यंत पवित्र और महत्वपूर्ण त्योहार है। यह दिन भगवान श्रीराम के जन्मोत्सव के रूप में मनाया जाता है और भक्त इस दिन व्रत, पूजा और आरती करके भगवान की कृपा पाने का प्रयास करते हैं। साल 2026 में राम नवमी की तारीख को लेकर लोगों के बीच थोड़ी कन्फ्यूजन है कि यह 26 मार्च को है या 27 मार्च को। आइए इसे आसान भाषा में समझते हैं। Ram Navami 2026 Date: 26 या 27 मार्च? वर्ष 2026 में राम नवमी 26 मार्च, गुरुवार को पड़ रही है। कई लोग सोचते हैं कि 27 मार्च को मनाना चाहिए, लेकिन हिंदू पंचांग के अनुसार जिस दिन मध्याह्न (दोपहर) में नवमी तिथि आती है, उसी दिन राम नवमी मनाई जाती है, क्योंकि भगवान श्रीराम का जन्म दोपहर में हुआ था। इस कारण 26 मार्च ही मुख्य और शुभ दिन माना जाता है। Shubh Muhurat for Ram Navami 2026 राम नवमी पूजा का सबसे महत्वपूर्ण समय मध्याह्न होता है। इस समय भगवान श्रीराम की पूजा और अभिषेक करना सबसे शुभ माना जाता है। Ram Navami Puja Samagri List राम नवमी की पूजा में निम्न सामग्रियों की आवश्यकता होती है। इन्हें पहले से तैयार करना शुभ माना जाता है: मुख्य सामग्री Ram Navami Puja Vidhi (संक्षेप में) हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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शैलपुत्री

चैत्र नवरात्रि 2026 Day 1 शैलपुत्री माता की आराधना, व्रत और शुभ मुहूर्त

चैत्र नवरात्रि 2026 का पहला दिन 12 मार्च को मनाया जाएगा। यह नवरात्रि वसंत ऋतु के आगमन और माँ दुर्गा के नौ रूपों की आराधना का शुभ समय है। हर दिन माँ के अलग रूप की पूजा की जाती है, और पहले दिन शैलपुत्री माता की उपासना होती है। शैलपुत्री माता – पहला दिन का महत्व ‘शैलपुत्री’ का अर्थ है “पर्वत की कन्या”। माता शैलपुत्री भगवान शिव और पार्वती की पुत्री हैं। उनके वाहन बैल हैं और हाथ में त्रिशूल और कमल धारण है। शैलपुत्री माता धैर्य, साहस और मानसिक स्थिरता का प्रतीक हैं। उनके आशीर्वाद से जीवन में सकारात्मक ऊर्जा और आध्यात्मिक शक्ति का विकास होता है। शैलपुत्री माता का पूजन और मंत्र व्रत और अनुष्ठान शैलपुत्री माता के दिन विशेष सुझाव हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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चैत्र नवरात्रि 2026

चैत्र नवरात्रि 2026 माँ दुर्गा के नौ स्वरूपों की पूजा और व्रत नियम

जानें चैत्र नवरात्रि 2026 की तिथियाँ, महत्व, व्रत नियम और पूजा विधियाँ। यह पर्व सिर्फ भक्ति और श्रद्धा का समय नहीं है, बल्कि जीवन में सकारात्मक ऊर्जा, समर्पण और आध्यात्मिक शक्ति का प्रतीक भी माना जाता है। चैत्र नवरात्रि 2026 की तारीखें और महत्त्व चैत्र नवरात्रि को वसंत ऋतु में मनाया जाता है और यह नया हिंदू संवत्सर शुरू करने का प्रतीक है। नवरात्रि के अंतिम दिन राम नवमी भी मनाई जाती है, जो भगवान श्रीराम के जन्मोत्सव का शुभ अवसर है। माँ दुर्गा के नौ रूप और उनके लाभ हर दिन नवरात्रि में माँ दुर्गा के अलग-अलग रूप की पूजा की जाती है, जिनसे विशेष आशीर्वाद प्राप्त होता है। दिन देवी का रूप प्रमुख गुण 1 शैलपुत्री शक्ति और मूल तत्व 2 ब्रह्मचारिणी तप और समर्पण 3 चंद्रघंटा साहस और धैर्य 4 कुश्मांडा आनंद और सृजन शक्ति 5 स्कंदमाता मातृत्व और प्रेम 6 कात्यायनी वीरता और साहस 7 कालरात्रि भय नाश 8 महागौरी पवित्रता और शांति 9 सिद्धिदात्री सिद्धि और सफलता घट स्थापना और पूजा विधि नवरात्रि की शुरुआत घटस्थापना से होती है। घर या मंदिर में कलश स्थापित कर माँ दुर्गा के स्वागत के लिए मंत्रों का उच्चारण किया जाता है। इससे जीवन में सकारात्मक ऊर्जा और शुभता आती है। व्रत नियम और पूजा के टिप्स इन नियमों का पालन करने से न केवल धार्मिक पुण्य मिलता है, बल्कि शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य भी बेहतर होता है। समाज में नवरात्रि का महत्व नवरात्रि के अवसर पर धार्मिक स्थलों पर विशेष सुरक्षा और भीड़-प्रबंधन की तैयारी की जाती है। श्रद्धालुओं की सुविधा और स्वच्छता सुनिश्चित करने के लिए प्रशासन अतिरिक्त कदम उठाता है। नवरात्रि का संदेश नवरात्रि केवल पूजा और उत्सव नहीं है, बल्कि यह शक्ति, समर्पण और आत्म-नवीनीकरण का पर्व है। माँ दुर्गा के आदर्शों — धैर्य, करुणा, वीरता और शक्ति — को अपनाकर जीवन में सकारात्मक बदलाव लाया जा सकता है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Chandra Grahan

Chandra Grahan 2026 भारत में कितने बजे दिखा Lunar Eclipse? जानें Time, Sutak Kaal और पूरी जानकारी

3 मार्च 2026, मंगलवार — होली के रंगों के बीच आसमान में भी एक खास नज़ारा देखने को मिला। इस दिन पूर्ण Chandra Grahan 2026 यानी Lunar Eclipse लगा। देशभर में लोगों के मन में उत्सुकता थी कि भारत में यह ग्रहण कितने बजे दिखेगा और क्या “ब्लड मून” साफ दिखाई देगा। दिन में शुरू हुआ यह खगोलीय आयोजन शाम तक चर्चा का विषय बना रहा। आइए आसान भाषा में समझते हैं पूरी जानकारी। Chandra Grahan 2026 Date and Time in India (IST) यह एक पूर्ण चंद्र ग्रहण (Total Lunar Eclipse) था। पूर्ण अवस्था में चंद्रमा अक्सर लालिमा लिए दिखाई देता है, जिसे आम बोलचाल में “Blood Moon” कहा जाता है। भारत में कब और कितना दिखा Chandra Grahan? भारत में ग्रहण का मुख्य भाग चंद्रमा के उदय से पहले ही हो चुका था। इसलिए अधिकांश शहरों में लोग केवल अंतिम चरण ही देख पाए। पूर्वोत्तर भारत में चंद्रमा थोड़ा पहले उदित हुआ, जिससे वहां ग्रहण कुछ अधिक समय तक नजर आया। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, चंद्र ग्रहण से लगभग 9 घंटे पहले सूतक काल शुरू हो जाता है। इस बार सूतक काल सुबह करीब 6:20 बजे से प्रभावी माना गया। कई मंदिरों के कपाट बंद रहे कैसा दिखा चंद्रमा? (Human Experience) शाम को जब लोग छतों और बालकनियों में पहुंचे, तो चंद्रमा हल्की धुंधली छाया में दिखाई दे रहा था। जिन जगहों पर आसमान साफ था, वहां चंद्रमा का रंग थोड़ा तांबई झलक लिए नजर आया। हालांकि भारत में पूर्ण “Blood Moon” का गहरा लाल रंग साफ तौर पर नहीं दिखा, फिर भी यह अनुभव खास रहा। होली की शाम को आसमान में यह दृश्य कई लोगों के लिए यादगार बन गया। Chandra Grahan 2026 का वैज्ञानिक महत्व पूर्ण चंद्र ग्रहण तब लगता है जब सूर्य, पृथ्वी और चंद्रमा एक सीध में आ जाते हैं और पृथ्वी की छाया पूरी तरह चंद्रमा पर पड़ती है। यह एक प्राकृतिक खगोलीय घटना है और इसे देखने के लिए किसी विशेष उपकरण की जरूरत नहीं होती। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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ड्डा का राहुल पर पलटवार: बोले- कांग्रेस बताए अपने राज्यों में पेपर लीक क्यों हुए, सरकार चर्चा को तैयार

पेपर लीक के मुद्दे पर संसद में सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी बहस देखने को मिली। केंद्रीय मंत्री और भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी के आरोपों का जवाब देते हुए कहा कि कांग्रेस पहले यह बताए कि उसके शासन वाले राज्यों में पेपर लीक की घटनाएं क्यों हुईं। नड्डा ने कहा कि केंद्र सरकार इस गंभीर विषय पर संसद में विस्तृत चर्चा के लिए तैयार है। उन्होंने आरोप लगाया कि विपक्ष इस मुद्दे का राजनीतिकरण कर रहा है, जबकि सरकार दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई के पक्ष में है। दरअसल, राहुल गांधी ने हाल ही में दावा किया था कि पिछले 10 वर्षों में देशभर में 152 पेपर लीक की घटनाएं हुई हैं। उन्होंने इसे युवाओं के भविष्य से जुड़ा बड़ा मुद्दा बताते हुए सरकार पर परीक्षा प्रणाली को सुरक्षित रखने में विफल रहने का आरोप लगाया था। इस पर जवाब देते हुए नड्डा ने कहा कि केवल आंकड़े पेश करने से काम नहीं चलेगा। कांग्रेस को यह भी बताना चाहिए कि जिन राज्यों में उसकी सरकारें रही हैं, वहां भर्ती परीक्षाओं में पेपर लीक की घटनाएं क्यों हुईं और उन्हें रोकने के लिए क्या कदम उठाए गए। उन्होंने दोहराया कि केंद्र सरकार परीक्षा प्रणाली को पारदर्शी और सुरक्षित बनाने के लिए प्रतिबद्ध है तथा संसद में इस विषय पर सार्थक चर्चा का स्वागत करती है।

अजमेर में मार्बल व्यापारी पर जानलेवा हमला, CCTV में कैद हुई वारदात

राजस्थान के अजमेर जिले के किशनगढ़ में बुधवार सुबह मार्बल व्यापारी पर चार बदमाशों ने लाठी-डंडों से हमला कर दिया। स्कॉर्पियो से आए हमलावरों ने गोदाम में घुसकर व्यापारी के साथ बेरहमी से मारपीट की। पूरी घटना गोदाम में लगे सीसीटीवी कैमरे में कैद हो गई है। पुलिस ने मामला दर्ज कर आरोपियों की तलाश शुरू कर दी है। गोदाम में घुसकर किया हमला गांधीनगर थाना क्षेत्र स्थित मार्बल एरिया में बुधवार सुबह करीब 8:20 बजे स्कॉर्पियो में सवार चार युवक गोदाम के बाहर पहुंचे। गोदाम में बैठे मार्बल व्यापारी गोवर्धन पर उन्होंने लाठी-डंडों से हमला कर दिया। व्यापारी ने शुरुआत में हमलावरों का मुकाबला करने की कोशिश की, लेकिन चारों बदमाशों ने उसे घेर लिया और जमीन पर गिराकर लगातार लाठियों से पीटा। वारदात के बाद सभी आरोपी मौके से फरार हो गए। सिर और हाथ में गंभीर चोट हमले में व्यापारी के सिर और हाथ में गंभीर चोटें आईं। घायल अवस्था में उन्हें तत्काल किशनगढ़ के राजकीय अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां उनका इलाज जारी है। पीड़ित ने दर्ज कराई शिकायत गांधीनगर थाना प्रभारी अनिल शर्मा ने बताया कि पीड़ित व्यापारी की शिकायत पर अज्ञात आरोपियों के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया गया है। पुलिस सीसीटीवी फुटेज के आधार पर आरोपियों की पहचान कर उनकी गिरफ्तारी के प्रयास कर रही है। भाई के साथ गोदाम में मौजूद था व्यापारी पीड़ित गोवर्धन ने बताया कि वह बुधवार सुबह अपने भाई के साथ गोदाम में बैठा था। इसी दौरान स्कॉर्पियो में सवार चार युवक पहुंचे और बिना किसी बातचीत के अचानक हमला कर दिया। बदमाशों ने गोदाम के अंदर घुसकर उन्हें नीचे गिराया और लाठियों से बेरहमी से पीटा। पुलिस का कहना है कि मामले की जांच जारी है और जल्द ही आरोपियों को गिरफ्तार किया जाएगा। अधिक खबरों के लिए विजिट करें:deshharpal.com

BPCL को जून तिमाही में ₹3,962 करोड़ का घाटा, कच्चे तेल की महंगाई से बिगड़े नतीजे

भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड (BPCL) ने वित्त वर्ष 2026-27 की जून तिमाही (Q1) के नतीजे जारी कर दिए हैं। कंपनी को इस तिमाही में ₹3,962 करोड़ का शुद्ध घाटा हुआ है। पिछले साल की समान तिमाही में कंपनी ने ₹6,124 करोड़ का मुनाफा कमाया था, जबकि मार्च तिमाही में ₹3,191 करोड़ का लाभ दर्ज किया गया था। 23% बढ़ा कंपनी का रेवेन्यू घाटे के बावजूद BPCL का परिचालन से राजस्व (Revenue from Operations) बढ़कर ₹1.59 लाख करोड़ पहुंच गया। यह पिछले साल की समान तिमाही के ₹1.29 लाख करोड़ के मुकाबले करीब 23% अधिक है। वहीं, मार्च तिमाही के ₹1.35 लाख करोड़ की तुलना में इसमें करीब 18% की वृद्धि दर्ज की गई। कच्चे तेल की महंगाई बनी घाटे की वजह कंपनी के अनुसार, अमेरिका-ईरान तनाव के चलते अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें 120 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गईं। इसके साथ ही शिपिंग (भाड़ा) और इंश्योरेंस लागत भी बढ़ गई। हालांकि, बढ़ी हुई लागत का पूरा बोझ पेट्रोल, डीजल और एलपीजी की कीमतों में नहीं डाला जा सका, जिससे कंपनी की लाभप्रदता प्रभावित हुई और तिमाही घाटे में बदल गई। शेयर में गिरावट नतीजों के बाद BPCL का शेयर 3% की गिरावट के साथ ₹309 पर बंद हुआ। BPCL के बारे में भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड (BPCL) देश की प्रमुख सरकारी तेल कंपनियों में शामिल है। इसकी स्थापना 24 जनवरी 1976 को हुई थी। कंपनी मुंबई, कोच्चि, नुमालीगढ़ और बीना में रिफाइनरियों का संचालन करती है, जिनकी कुल रिफाइनिंग क्षमता 40 मिलियन मीट्रिक टन प्रति वर्ष से अधिक है। BPCL पेट्रोल, डीजल, एलपीजी, लुब्रिकेंट्स और अन्य पेट्रोलियम उत्पादों के रिफाइनिंग व वितरण का कार्य करती है। अधिक खबरों के लिए विजिट करें:deshharpal.com

फ्रांस की पर्यावरण मंत्री मोनिक बारबू का इस्तीफा, विवादित कृषि बिल के विरोध में छोड़ा पद

फ्रांस की पर्यावरण मंत्री मोनिक बारबू ने विवादित कृषि विधेयक के विरोध में इस्तीफा देने का ऐलान कर दिया है। इस बिल में दो प्रतिबंधित कीटनाशकों के सीमित इस्तेमाल और सिंचाई के लिए बड़े जलाशय बनाने की अनुमति देने का प्रावधान है। वैज्ञानिकों और पर्यावरणविदों का कहना है कि इससे मधुमक्खियों, जैव विविधता और पर्यावरण को गंभीर नुकसान हो सकता है। एसोसिएटेड प्रेस (AP) के अनुसार, बारबू बुधवार को राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों को अपना इस्तीफा सौंपेंगी। उन्होंने कहा कि सरकार ने पर्यावरण संरक्षण के अपने वादों से पीछे हटते हुए ऐसे प्रावधानों को मंजूरी दी, जिनका वह लगातार विरोध करती रही थीं। बिल के दो विवादित प्रावधान 1. प्रतिबंधित कीटनाशकों को मंजूरीविधेयक में एसेटामिप्रिड और फ्लुपाइराडीफ्यूरोन जैसे प्रतिबंधित कीटनाशकों के सीमित उपयोग की अनुमति दी गई है। इनका इस्तेमाल चुकंदर, सेब और चेरी जैसी फसलों में किया जा सकेगा। पर्यावरण विशेषज्ञों का कहना है कि ये रसायन मधुमक्खियों और अन्य परागण करने वाले कीड़ों के लिए बेहद हानिकारक हैं, जिससे कृषि उत्पादन और पारिस्थितिकी तंत्र दोनों प्रभावित हो सकते हैं। 2. सिंचाई के लिए बड़े जलाशयों की अनुमतिबिल में किसानों को सिंचाई के लिए बड़े जलाशय और कृत्रिम तालाब बनाने की प्रक्रिया आसान करने का भी प्रावधान है। पर्यावरणविदों का तर्क है कि इससे भूजल और नदियों पर अतिरिक्त दबाव पड़ेगा और गर्मियों में जल संकट बढ़ सकता है। संसद से पास हुआ विधेयक फ्रांस की संसद में मंगलवार को पेश किए गए इस विधेयक को सीनेट ने 214 के मुकाबले 111 मतों से पारित कर दिया। सरकार का कहना है कि यह कानून किसानों की बढ़ती लागत और घटती आय को देखते हुए लाया गया है, ताकि वे यूरोप के अन्य देशों के किसानों के साथ प्रतिस्पर्धा कर सकें। बारबू ने जताई नाराजगी मोनिक बारबू ने कहा कि विवादित प्रावधान आखिरी समय में बिल में जोड़े गए और उन्हें हटाने पर सरकार ने कोई गंभीर चर्चा नहीं की। उन्होंने सोशल मीडिया पर लिखा कि पिछले नौ महीनों में उन्होंने जंगलों, स्वच्छ जल, साफ हवा और जैव विविधता की रक्षा के लिए काम किया, लेकिन अब वह अपने उद्देश्यों को पूरा करने की स्थिति में नहीं हैं। पहले भी विवादों में रहा कीटनाशक एसेटामिप्रिड और फ्लुपाइराडीफ्यूरोन नियोनिकोटिनॉइड समूह के कीटनाशक हैं। फ्रांस ने 2018 में एसेटामिप्रिड पर प्रतिबंध लगाया था। इससे पहले भी इस प्रतिबंध को हटाने की कोशिश हुई थी, लेकिन फ्रांस की सर्वोच्च अदालत ने पर्यावरण और मानव स्वास्थ्य पर संभावित खतरे का हवाला देते हुए अनुमति देने से इनकार कर दिया था। अधिक खबरों के लिए विजिट करें:deshharpal.com

इंदौर में छात्र आंदोलन को मिला कांग्रेस का समर्थन, दिग्विजय सिंह और जीतू पटवारी धरने में पहुंचे

इंदौर के टंट्याभील चौराहे पर चल रहे छात्र आंदोलन को बुधवार रात कांग्रेस का खुला समर्थन मिला। पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह और प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी धरना स्थल पहुंचे और छात्रों के बीच बैठकर उनके आंदोलन में शामिल हुए। इस दौरान कांग्रेस नेताओं और प्रदर्शनकारियों ने केंद्र सरकार के खिलाफ नारेबाजी भी की। टंट्याभील चौराहे पर पिछले कई दिनों से छात्र शिक्षा व्यवस्था, कथित पेपर लीक और केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर प्रदर्शन कर रहे हैं। दिल्ली के जंतर-मंतर पर चल रहे आंदोलन और सोनम वांगचुक को हिरासत में लिए जाने के बाद इंदौर में भी आंदोलन तेज हो गया है। प्रतिदिन बड़ी संख्या में छात्र धरना स्थल पर पहुंचकर अपनी मांगों के समर्थन में प्रदर्शन कर रहे हैं। बुधवार रात दिग्विजय सिंह और जीतू पटवारी ने छात्रों के बीच बैठकर आंदोलन का समर्थन किया। उनके साथ शहर कांग्रेस अध्यक्ष चिंटू चौकसे सहित कई कांग्रेस पदाधिकारी और कार्यकर्ता भी धरने में शामिल हुए। दिग्विजय सिंह ने कहा कि केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को इस्तीफा देना चाहिए। उन्होंने दावा किया कि कांग्रेस पिछले 25 दिनों से यह मांग उठा रही है और उन्होंने स्वयं 21 जून को भी इस मुद्दे पर अपनी बात रखी थी। छात्रों का कहना है कि जब तक उनकी मांगों पर सकारात्मक निर्णय नहीं लिया जाता, तब तक उनका आंदोलन शांतिपूर्ण तरीके से जारी रहेगा। अधिक जानकारी के लिए विजिट करें:deshharpal.com

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