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मां महागौरी

Navratri 2026: आठवें दिन मां महागौरी की पूजा, जानें कथा, महत्त्व और मंत्र

नवरात्रि के आठवें दिन मां महागौरी की पूजा की जाती है। उनका स्वरूप शांति, पवित्रता और करुणा का प्रतीक माना जाता है। कई परिवारों में इस दिन महाष्टमी का व्रत, कन्या पूजन और विशेष पूजा की जाती है। हालांकि, कन्या पूजन का दिन परिवार और क्षेत्र की परंपरा के अनुसार अलग भी हो सकता है। मां महागौरी की पौराणिक कथा पौराणिक मान्यता के अनुसार, देवी पार्वती ने भगवान शिव को पति रूप में पाने के लिए कठोर तपस्या की। तपस्या के कारण उनका शरीर काला पड़ गया था। भगवान शिव की कृपा से उन्हें गौर वर्ण प्राप्त हुआ और वे महागौरी कहलायीं। मां का स्वरूप और महत्त्व पूजा विधि मंत्र: ॐ देवी महागौर्यै नमः। भोग: मां को नारियल अर्पित करने की परंपरा प्रचलित है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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मां कालरात्रि

Navratri 2026: सातवें दिन मां कालरात्रि की पूजा, जानें कथा, महत्त्व और मंत्र

नवरात्रि के सातवें दिन मां कालरात्रि की आराधना की जाती है। उनका स्वरूप देखने में उग्र है, लेकिन धार्मिक मान्यताओं में वे अपने भक्तों का कल्याण करने वाली देवी मानी जाती हैं। उन्हें भय, अज्ञान और नकारात्मक शक्तियों से मुक्ति का प्रतीक माना जाता है। मां कालरात्रि की पौराणिक कथा पौराणिक मान्यताओं में मां कालरात्रि को देवी दुर्गा का वह शक्तिशाली स्वरूप बताया गया है, जो दुष्ट शक्तियों का संहार करता है। उनका उग्र रूप यह संदेश देता है कि बुराई और अन्याय का सामना करने के लिए साहस जरूरी है। मां का स्वरूप और महत्त्व पूजा विधि मंत्र: ॐ देवी कालरात्र्यै नमः। भोग: मां को गुड़ अर्पित करने की परंपरा प्रचलित है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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मां कात्यायनी

Navratri 2026: छठे दिन मां कात्यायनी की पूजा, जानें महिषासुर वध की कथा और मंत्र

नवरात्रि के छठे दिन मां कात्यायनी की पूजा की जाती है। देवी दुर्गा का यह स्वरूप शक्ति, साहस और अन्याय के विरुद्ध संघर्ष का प्रतीक माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं में मां कात्यायनी को महिषासुर का वध करने वाली देवी के रूप में भी पूजा जाता है। मां कात्यायनी की पौराणिक कथा पौराणिक कथा के अनुसार, महर्षि कात्यायन ने देवी की कठोर आराधना की थी। उनकी तपस्या से प्रसन्न होकर देवी ने उनके यहां पुत्री रूप में जन्म लिया और कात्यायनी कहलायीं। मान्यता है कि देवी ने महिषासुर का वध कर देवताओं को उसके अत्याचारों से मुक्ति दिलाई। मां का स्वरूप और महत्त्व पूजा विधि मंत्र: ॐ देवी कात्यायन्यै नमः। भोग: मां को शहद अर्पित करने की परंपरा है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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मां स्कंदमाता

Navratri 2026: पांचवें दिन मां स्कंदमाता की पूजा, जानें महत्त्व, कथा और मंत्र

नवरात्रि के पांचवें दिन मां स्कंदमाता की पूजा की जाती है। भगवान कार्तिकेय को स्कंद भी कहा जाता है। उन्हें गोद में धारण करने के कारण देवी पार्वती के इस स्वरूप का नाम स्कंदमाता पड़ा। मां का यह रूप मातृत्व, प्रेम और करुणा का प्रतीक है। मां स्कंदमाता की कथा पौराणिक मान्यता के अनुसार, देवी पार्वती ने भगवान स्कंद यानी कार्तिकेय को जन्म दिया, जो देवताओं की सेना के सेनापति बने। स्कंदमाता का स्वरूप एक मां की शक्ति और अपने संतान के प्रति अटूट स्नेह को दर्शाता है। मां का स्वरूप और महत्त्व पूजा विधि मंत्र: ॐ देवी स्कन्दमातायै नमः। भोग: मां को केला अर्पित करने की परंपरा प्रचलित है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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मां कूष्मांडा

Navratri 2026: चौथे दिन मां कूष्मांडा की पूजा, जानें कथा, भोग और मंत्र

नवरात्रि के चौथे दिन मां कूष्मांडा की पूजा की जाती है। धार्मिक मान्यताओं में उन्हें सृष्टि की रचनात्मक ऊर्जा से जोड़ा जाता है। माना जाता है कि उनकी आराधना से भक्तों को उत्साह, सकारात्मकता और नई शुरुआत की प्रेरणा मिलती है। मां कूष्मांडा की पौराणिक कथा पौराणिक मान्यता के अनुसार, जब चारों ओर अंधकार था, तब मां कूष्मांडा ने अपनी दिव्य मुस्कान से ब्रह्मांड की रचना की। इसी कारण उन्हें सृष्टि की आदिशक्ति के रूप में पूजा जाता है। यह कथा सृजन और ऊर्जा के महत्त्व को दर्शाती है। मां का स्वरूप और महत्त्व पूजा विधि मंत्र: ॐ देवी कूष्माण्डायै नमः। भोग: मां को मालपुआ या मीठे फल अर्पित करने की परंपरा कुछ क्षेत्रों में प्रचलित है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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मां चंद्रघंटा

Navratri 2026: तीसरे दिन करें मां चंद्रघंटा की पूजा, जानें महत्त्व, कथा और मंत्र

नवरात्रि के तीसरे दिन मां चंद्रघंटा की आराधना की जाती है। उनके मस्तक पर घंटे के आकार का अर्धचंद्र सुशोभित होता है, इसलिए उन्हें चंद्रघंटा कहा जाता है। उनका स्वरूप साहस, शक्ति और अन्याय के विरुद्ध खड़े होने का प्रतीक माना जाता है। मां चंद्रघंटा की कथा पौराणिक मान्यताओं में मां चंद्रघंटा को देवी दुर्गा का युद्ध के लिए तत्पर स्वरूप बताया गया है। मान्यता है कि वे अपने भक्तों की रक्षा करती हैं और दुष्ट शक्तियों का सामना करती हैं। उनका स्वरूप यह संदेश देता है कि शक्ति के साथ विवेक और साहस भी जरूरी हैं। मां का स्वरूप और महत्त्व पूजा विधि मंत्र: ॐ देवी चन्द्रघण्टायै नमः। भोग: मां को दूध से बनी मिठाई या खीर अर्पित करने की परंपरा है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Shardiya Navratri

Shardiya Navratri 2026: कलश स्थापना का शुभ मुहूर्त कब तक? जानें सही समय

Shardiya Navratri का पर्व मां दुर्गा के भक्तों के लिए बेहद खास होता है। इन नौ दिनों में घरों से लेकर मंदिरों तक भक्ति और उत्साह का माहौल देखने को मिलता है। कोई मां दुर्गा के लिए व्रत रखता है, तो कोई घर में अखंड ज्योत जलाकर परिवार की सुख-समृद्धि की कामना करता है। नवरात्रि की शुरुआत कलश स्थापना यानी घटस्थापना से होती है। ऐसे में अगर आप भी मां दुर्गा की पूजा की तैयारी कर रहे हैं, तो सबसे पहले शुभ मुहूर्त और पूजा की सही विधि जान लें। Shardiya Navratri 2026: कलश स्थापना का शुभ मुहूर्त शारदीय नवरात्रि के पहले दिन कलश स्थापना का विशेष महत्व माना जाता है। उपलब्ध पंचांग विवरण के अनुसार, 11 अक्टूबर 2026 को घटस्थापना का सुबह का शुभ मुहूर्त सुबह 6:19 बजे से 10:12 बजे तक बताया गया है। वहीं, अभिजीत मुहूर्त सुबह 11:44 बजे से दोपहर 12:31 बजे तक रहेगा। हालांकि, पूजा का मुहूर्त शहर और स्थानीय पंचांग के अनुसार अलग हो सकता है। इसलिए भोपाल, इंदौर या किसी अन्य शहर में पूजा करने वाले भक्त अपने क्षेत्र के पंचांग से समय की पुष्टि जरूर कर लें। कलश स्थापना क्यों है इतनी खास? हिंदू मान्यताओं के अनुसार, कलश को सुख, समृद्धि और शुभता का प्रतीक माना जाता है। नवरात्रि के पहले दिन कलश स्थापना करके मां दुर्गा का आह्वान किया जाता है। इसके साथ ही नौ दिनों तक चलने वाली पूजा और साधना की शुरुआत होती है। कई घरों में नवरात्रि के दौरान जौ बोने, अखंड ज्योत जलाने और सुबह-शाम आरती करने की परंपरा है। मान्यता है कि इन दिनों सच्चे मन से मां दुर्गा की आराधना करने से जीवन में सुख-शांति और सकारात्मकता आती है। Kalash Sthapana Puja Vidhi: ऐसे करें घटस्थापना अगर आप पहली बार घर में कलश स्थापना करने जा रहे हैं, तो पूजा से पहले सभी जरूरी सामग्री तैयार कर लें। इससे पूजा के समय जल्दबाजी नहीं होगी। कलश स्थापना की आसान विधि: पूजा की विधि में परिवार और क्षेत्र की परंपराओं के अनुसार कुछ अंतर हो सकता है। इसलिए अपनी मान्यता के अनुसार पूजा करना उचित रहेगा। कलश स्थापना के लिए पूजा सामग्री घटस्थापना से पहले इन चीजों की व्यवस्था कर लें: नवरात्रि में व्रत रखने वाले इन बातों का रखें ध्यान नवरात्रि में कई भक्त नौ दिनों तक व्रत रखते हैं, जबकि कुछ लोग पहले और आखिरी दिन उपवास करते हैं। व्रत का तरीका हर परिवार की परंपरा और व्यक्ति की सुविधा के अनुसार अलग हो सकता है। पूजा के दौरान साफ-सफाई का ध्यान रखें और अपनी क्षमता के अनुसार ही व्रत रखें। पर्याप्त पानी पिएं और जरूरत के मुताबिक पौष्टिक भोजन करें। धार्मिक आस्था के साथ अपनी सेहत का ध्यान रखना भी जरूरी है। शारदीय नवरात्रि का इंतजार भक्त पूरे साल करते हैं। इन नौ दिनों में मां दुर्गा के अलग-अलग स्वरूपों की पूजा की जाती है और घर-परिवार की खुशहाली की कामना की जाती है। कलश स्थापना इसी आस्था और भक्ति का पहला कदम है। अगर आप भी इस नवरात्रि घर में घटस्थापना करने जा रहे हैं, तो शुभ मुहूर्त की पुष्टि पहले कर लें और पूजा की सामग्री समय रहते तैयार रखें। इसके बाद पूरे श्रद्धाभाव से मां दुर्गा की आराधना करें। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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बिलासपुर: बांग्लादेशी नागरिक होने के संदेह में पकड़े गए 23 लोगों में 18 भारतीय निकले, 15 दिन बाद रिहा

छत्तीसगढ़ के बिलासपुर जिले के सिरगिट्टी इलाके से बांग्लादेशी नागरिक होने के संदेह में पकड़े गए 23 लोगों में से 18 भारतीय नागरिक पाए गए हैं। मुर्शिदाबाद और संबंधित थाना क्षेत्रों से दस्तावेजों व पहचान का सत्यापन होने के बाद इन सभी को रायपुर स्थित होल्डिंग/डिटेंशन सेंटर से 15 दिन के भीतर रिहा कर दिया गया। अब पुलिस बचे हुए 5 लोगों के दस्तावेजों की जांच कर रही है। इनके अतिरिक्त दस्तावेज भी मंगाए गए हैं। कुछ दस्तावेजों में कमियां सामने आई हैं, जबकि कुछ लोगों के नाम एसआईआर से हटाए जाने की जानकारी भी मिली है। पुलिस सत्यापन पूरा होने के बाद आगे की कार्रवाई करेगी। 4 सितंबर को 23 लोगों को रायपुर भेजा गया था दरअसल, बिलासपुर पुलिस ने स्पेशल टास्क फोर्स गठित कर सिरगिट्टी इलाके में अभियान चलाया था। इस दौरान 23 लोगों को संदिग्ध मानकर पकड़ा गया। पुलिस के अनुसार, करीब दो महीने तक चले अभियान में जिले में 1,162 लोगों की जांच की गई थी। इनमें 23 लोगों के दस्तावेज और पहचान संदिग्ध पाए गए थे। इसके बाद पुलिस टीम मुर्शिदाबाद, जंगीपुर और आसपास के संबंधित थाना क्षेत्रों में पहुंची। संदिग्धों द्वारा बताए गए पते और दस्तावेजों का सत्यापन कराया गया। शुरुआती जांच के बाद 4 सितंबर को सभी 23 लोगों को पहचान और दस्तावेजों के अंतिम सत्यापन तक रायपुर के होल्डिंग/डिटेंशन सेंटर भेजा गया था। पिता की जगह ससुर का नाम मिलने से बढ़ा संदेह पुलिस की शुरुआती जांच में कुछ लोगों के दस्तावेजों को लेकर सवाल उठे थे। बताया गया कि कुछ दस्तावेजों में पिता की जगह ससुर का नाम दर्ज था। इसके अलावा मूल निवास और पहचान से जुड़े कागजात में भी कमियां मिली थीं। इन्हीं आधारों पर पुलिस ने इन लोगों को संदिग्ध मानकर जांच आगे बढ़ाई थी। हालांकि, सत्यापन के बाद 18 लोगों के भारतीय नागरिक होने की पुष्टि हुई है। बाल के बदले बर्तन और टेंट-पंडाल का करते थे काम जांच के दौरान पुलिस को पता चला था कि इनमें से अधिकांश लोग सिरगिट्टी क्षेत्र में रहकर अलग-अलग छोटे-मोटे काम करते थे। कुछ लोग बाल के बदले बर्तन देने का काम करते थे, जबकि कुछ टेंट-पंडाल लगाने सहित अन्य कार्यों से जुड़े थे। पुलिस ने इनके पश्चिम बंगाल स्थित बताए गए पते और स्थानीय दस्तावेजों से संबंधित जानकारी भी जुटाई थी। अब 5 लोगों के दस्तावेजों की जांच जारी 18 लोगों के सत्यापन के बाद पुलिस का फोकस अब बचे हुए 5 लोगों पर है। पुलिस इनके अतिरिक्त दस्तावेज और पहचान से जुड़े रिकॉर्ड मंगा रही है। जिन लोगों के दस्तावेज अधूरे या संदिग्ध पाए गए हैं, उनका सत्यापन संबंधित थानों और स्थानीय रिकॉर्ड के आधार पर कराया जाएगा। जांच पूरी होने के बाद पुलिस आगे की कार्रवाई तय करेगी।
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Radha Ashtami 2026

Radha Ashtami 2026: राधा रानी के जन्मोत्सव पर जानें पूजा का शुभ मुहूर्त और Vrat Vidhi

Radha Ashtami 2026 राधा रानी के भक्तों के लिए राधा अष्टमी का दिन बेहद खास होता है। हर साल भाद्रपद महीने के शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि को राधा अष्टमी मनाई जाती है। इस बार तारीख को लेकर लोगों के मन में सवाल है कि आखिर राधा अष्टमी 18 सितंबर को है या 19 सितंबर को? अगर आपके मन में भी यही Confusion है, तो जान लीजिए कि इस साल राधा अष्टमी 19 सितंबर 2026, शनिवार को मनाई जाएगी। इस दिन राधा-कृष्ण की पूजा के साथ व्रत और विशेष आराधना करने की परंपरा है। Radha Ashtami 2026 Date: कब है राधा अष्टमी? हिंदू पंचांग के अनुसार भाद्रपद शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि 18 सितंबर 2026 को दोपहर के समय शुरू होगी और 19 सितंबर की दोपहर तक रहेगी। उदया तिथि के नियम के अनुसार राधा अष्टमी का पर्व 19 सितंबर को मनाया जाएगा। यानी अगर आप सोच रहे हैं कि पूजा आज करनी है या कल, तो मुख्य पूजा 19 सितंबर को करना उचित माना गया है। राधा अष्टमी 2026 का शुभ मुहूर्त राधा रानी की पूजा के लिए मध्याह्न का समय विशेष माना जाता है। नई दिल्ली के पंचांग के अनुसार 19 सितंबर को पूजा का मध्याह्न मुहूर्त करीब सुबह 11:01 बजे से दोपहर 1:28 बजे तक रहेगा। हालांकि, शहर के अनुसार सूर्योदय और पंचांग के समय में थोड़ा अंतर हो सकता है। इसलिए स्थानीय पंचांग के समय को भी जरूर देखें। राधा अष्टमी 2026 की जरूरी Details Radha Ashtami Puja Vidhi: ऐसे करें पूजा राधा अष्टमी के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और साफ कपड़े पहनें। इसके बाद पूजा स्थान की सफाई कर राधा-कृष्ण की प्रतिमा या तस्वीर स्थापित करें। सबसे पहले दीपक जलाकर भगवान का ध्यान करें। राधा रानी को फूल, माला, फल, मिठाई और अपनी श्रद्धा के अनुसार अन्य पूजन सामग्री अर्पित करें। इसके बाद राधा-कृष्ण के मंत्रों का जाप करें और आरती करें। कई जगहों पर इस दिन राधा रानी का विशेष अभिषेक भी किया जाता है। पूजा में सबसे जरूरी चीज दिखावा नहीं, बल्कि श्रद्धा और साफ मन माना जाता है। Radha Ashtami Vrat का क्या है महत्व? राधा अष्टमी पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु व्रत रखते हैं। कुछ लोग पूरे दिन उपवास करते हैं, जबकि कुछ भक्त फलाहार करते हैं। व्रत रखने का तरीका अपनी क्षमता और परिवार की परंपरा के अनुसार रखा जा सकता है। धार्मिक मान्यता है कि राधा रानी की भक्ति करने से मन को शांति और सकारात्मकता मिलती है। इस दिन जरूरतमंदों को भोजन या अपनी क्षमता के अनुसार दान करने की परंपरा भी कई जगह देखने को मिलती है। बरसाना और वृंदावन में खास रहती है रौनक राधा अष्टमी का सबसे खास रंग ब्रज क्षेत्र में देखने को मिलता है। बरसाना और वृंदावन में इस अवसर पर मंदिरों को सजाया जाता है और बड़ी संख्या में श्रद्धालु राधा रानी के दर्शन के लिए पहुंचते हैं। भक्तों के लिए यह सिर्फ एक धार्मिक पर्व नहीं, बल्कि राधा-कृष्ण के प्रति अपनी आस्था और प्रेम व्यक्त करने का अवसर भी होता है। आज या कल? जान लें सही तारीख तारीख को लेकर चल रहे Confusion को अब दूर कर लें। Radha Ashtami 2026 का मुख्य पर्व 19 सितंबर, शनिवार को मनाया जाएगा। इस दिन राधा रानी की पूजा, व्रत और भक्ति कार्यक्रम किए जाएंगे। अगर आप भी राधा रानी के भक्त हैं, तो इस पावन दिन उनके चरणों में अपनी श्रद्धा अर्पित करें और परिवार के साथ पूजा-अर्चना करें। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Ganesh Chaturthi 2026

Ganesh Chaturthi 2026 11 बजे वाला मुहूर्त छूटा? जानें अब कब करें Ganpati Sthapana

Ganesh Chaturthi 2026 आज 14 सितंबर को देशभर में गणपति बप्पा के स्वागत की धूम है। कहीं घरों में छोटी-बड़ी गणेश प्रतिमाएं सजाई जा रही हैं, तो कहीं बड़े पंडालों में बप्पा की स्थापना की तैयारियां पूरी हो चुकी हैं। भक्तों के बीच सबसे ज्यादा उत्सुकता इस बात को लेकर है कि Ganpati Sthapana का शुभ मुहूर्त कब है। गणपति स्थापना के लिए आज का मुख्य मध्याह्न मुहूर्त सुबह 11:02 बजे से दोपहर 1:31 बजे तक बताया गया है। माना जाता है कि इस दौरान गणेश जी की पूजा और स्थापना करना विशेष शुभ रहता है। लेकिन अगर आपका यह मुहूर्त किसी वजह से निकल गया है तो परेशान होने की जरूरत नहीं है। दिन में कुछ और शुभ समय भी मिल सकते हैं, जिनमें स्थानीय पंचांग के अनुसार बप्पा की स्थापना की जा सकती है। पहला मुहूर्त निकल गया तो क्या करें? कई बार ऑफिस, यात्रा या घर के जरूरी कामों के चलते लोग तय समय पर गणपति स्थापना नहीं कर पाते। ऐसे में पूजा को लेकर चिंता करने की जरूरत नहीं है। शुभ, लाभ और अमृत चौघड़िया को धार्मिक कार्यों के लिए शुभ माना जाता है। इसलिए मुख्य स्थापना मुहूर्त निकलने के बाद इन चौघड़ियों में अपने शहर के पंचांग के अनुसार गणपति स्थापना की जा सकती है। 1. शुभ चौघड़िया शुभ चौघड़िया में पूजा-पाठ और दूसरे मांगलिक कार्य किए जाते हैं। अगर मुख्य मुहूर्त निकल गया है तो स्थानीय पंचांग में शुभ चौघड़िया का समय देखकर बप्पा को घर में स्थापित कर सकते हैं। 2. लाभ चौघड़िया लाभ चौघड़िया को भी शुभ समय माना जाता है। गणपति स्थापना के लिए इसका इस्तेमाल किया जा सकता है। हालांकि सही समय शहर के अनुसार बदल सकता है, इसलिए स्थानीय पंचांग देखना बेहतर रहेगा। 3. अमृत चौघड़िया अमृत चौघड़िया को शुभ कार्यों के लिए खास माना जाता है। अगर दिन का मुख्य मुहूर्त छूट गया है तो इस समय में भी गणपति स्थापना का विकल्प रखा जा सकता है। Ganpati Sthapana के लिए मध्याह्न समय क्यों खास? गणेश चतुर्थी पर मध्याह्न काल का विशेष महत्व बताया गया है। धार्मिक मान्यता के अनुसार भगवान गणेश का जन्म मध्याह्न के समय हुआ था। यही वजह है कि इस दौरान गणपति की स्थापना और पूजा को विशेष महत्व दिया जाता है। शहर के हिसाब से बदल सकता है शुभ समय गणपति स्थापना के मुहूर्त में स्थान के अनुसार थोड़ा अंतर हो सकता है। अलग-अलग शहरों में सूर्योदय और सूर्यास्त के समय में अंतर होने की वजह से चौघड़िया भी बदलते हैं। इसलिए अगर आप भोपाल, इंदौर, दिल्ली, मुंबई या किसी दूसरे शहर में रहते हैं तो अपने स्थानीय पंचांग के अनुसार Ganpati Sthapana का समय जरूर जांच लें। घर में ऐसे करें बप्पा का स्वागत गणपति स्थापना से पहले पूजा की जगह को अच्छी तरह साफ कर लें। चौकी पर साफ कपड़ा बिछाकर भगवान गणेश की प्रतिमा स्थापित करें। इसके बाद गणपति बप्पा को फूल, दूर्वा और मोदक अर्पित करें। पूजा के दौरान गणेश मंत्र का जाप करें और अंत में आरती करें। परिवार के सभी सदस्य मिलकर पूजा करें तो त्योहार की खुशी और भी बढ़ जाती है। मुहूर्त निकल गया है तो घबराएं नहीं गणेश चतुर्थी सिर्फ शुभ समय देखने का पर्व नहीं, बल्कि बप्पा के स्वागत और आस्था का त्योहार भी है। अगर किसी कारण से मुख्य मुहूर्त निकल गया है तो परेशान होने की जरूरत नहीं है। अपने शहर के पंचांग में दिए गए शुभ समय के अनुसार गणपति स्थापना कर सकते हैं। गणपति बप्पा से घर में सुख-शांति, समृद्धि और खुशहाली की कामना करें। गणपति बप्पा मोरया!
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Gold

Gold Price Today: सोने के दाम में बड़ी गिरावट, 10 ग्राम का भाव ₹1.43 लाख पर

सोना (Gold) और चांदी (Silver) खरीदने का इंतजार कर रहे लोगों के लिए राहत की खबर है। पिछले तीन दिनों में दोनों कीमती धातुओं के भाव में अच्छी-खासी गिरावट आई है। सोना करीब ₹3,000 और चांदी लगभग ₹9,000 तक सस्ती हुई है। ऐसे में शादी-ब्याह के लिए गहने खरीदने या निवेश की योजना बना रहे लोगों की नजर अब बाजार के अगले रुख पर है। 22 अक्टूबर 2026 के बाजार अपडेट के मुताबिक, 10 ग्राम सोने की कीमत करीब ₹1.43 लाख और चांदी का भाव लगभग ₹2.01 लाख प्रति किलो बताया जा रहा है। हालांकि, अलग-अलग बाजारों में कीमतों का अंतर हो सकता है। Gold Rate Today: ₹1.43 लाख पर पहुंचा 10 ग्राम सोना Gold Price में आई गिरावट से खरीदारों को कुछ राहत जरूर मिली है। बीते तीन दिनों में भाव करीब ₹3,000 नीचे आने से उन लोगों के लिए खरीदारी का मौका बन सकता है, जो लंबे समय से कीमतें कम होने का इंतजार कर रहे थे। हालांकि, सोना खरीदने से पहले अपने शहर का ताजा भाव जरूर पता कर लें। 24 कैरेट सोने की कीमत और गहने बनाने में इस्तेमाल होने वाले 22 कैरेट सोने के भाव में अंतर होता है। इसके अलावा ज्वेलरी खरीदते समय मेकिंग चार्ज और GST भी देना पड़ता है। Silver Rate Today: चांदी ₹9,000 तक हुई सस्ती सोने के साथ चांदी की कीमतों में भी गिरावट देखने को मिली है। पिछले तीन दिनों में चांदी करीब ₹9,000 तक सस्ती हुई है और इसका भाव लगभग ₹2.01 लाख प्रति किलो के स्तर पर बताया जा रहा है। चांदी की कीमतों में उतार-चढ़ाव का असर उन ग्राहकों पर भी पड़ता है, जो त्योहारों पर चांदी के सिक्के, बर्तन या दूसरे सामान खरीदते हैं। हालांकि, खरीदारी से पहले स्थानीय बाजार में चांदी का ताजा भाव और शुद्धता की जानकारी लेना जरूरी है। सोना-चांदी के दाम क्यों गिर रहे हैं? Gold or Silver की कीमतें केवल घरेलू मांग से तय नहीं होतीं। अंतरराष्ट्रीय बाजार में होने वाले बदलाव, डॉलर की चाल, रुपये की स्थिति और ब्याज दरों को लेकर निवेशकों की उम्मीदें भी इनके भाव पर असर डालती हैं। जब अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने-चांदी की कीमतें कमजोर होती हैं, तो भारतीय बाजार में भी इसका असर दिखाई दे सकता है। इसके अलावा मुनाफावसूली के कारण भी कीमतों में गिरावट आ सकती है। हालांकि, बाजार में आई गिरावट की किसी एक वजह को जिम्मेदार ठहराना सही नहीं होगा। कीमतों की चाल कई आर्थिक और वैश्विक कारकों पर निर्भर करती है। क्या अभी सोना और चांदी खरीदना सही रहेगा? अगर आप शादी या त्योहार के लिए गहने खरीदने की योजना बना रहे हैं, तो मौजूदा गिरावट आपके लिए राहत की बात हो सकती है। लेकिन केवल तीन दिन की गिरावट देखकर यह मान लेना ठीक नहीं है कि आगे भी भाव लगातार कम होंगे। खरीदारी से पहले अलग-अलग ज्वेलर्स के रेट की तुलना करें। सोने पर हॉलमार्क और शुद्धता की जांच करें तथा बिल में मेकिंग चार्ज और GST का पूरा विवरण देखें। निवेश के लिहाज से भी जल्दबाजी करने के बजाय अपने बजट और जोखिम उठाने की क्षमता को ध्यान में रखना बेहतर है। आगे Gold-Silver Price में क्या बदलाव हो सकता है? आने वाले दिनों में अंतरराष्ट्रीय बाजार का रुख, अमेरिकी डॉलर, ब्याज दरों से जुड़ी खबरें और रुपये की चाल सोने-चांदी की कीमतों को प्रभावित कर सकती हैं। ऐसे में भाव में फिर तेजी आने या गिरावट जारी रहने, दोनों की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। कुल मिलाकर, तीन दिनों में सोने और चांदी के दाम में आई गिरावट ने खरीदारों को थोड़ी राहत दी है। अगर आप आज खरीदारी करने जा रहे हैं, तो पहले अपने शहर का ताजा भाव जरूर जांच लें, क्योंकि बाजार भाव और ज्वेलरी की अंतिम कीमत में अंतर हो सकता है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
Amit Shah

Amit Shah Statement: धरने से कुछ नहीं होगा, जनता के बीच जाएं- विपक्ष को शाह की सलाह

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह (Amit Shah) ने कांग्रेस और विपक्षी दलों पर निशाना साधते हुए कहा कि सिर्फ धरना-प्रदर्शन करने से जनता का भरोसा नहीं जीता जा सकता। अगर विपक्ष को राजनीति में आगे बढ़ना है, तो उसे जनता के बीच जाकर काम करना होगा। शाह ने कांग्रेस को लेकर दावा किया कि पार्टी अगले 30 साल तक सत्ता में नहीं लौट पाएगी। उन्होंने अपने बयान में राहुल गांधी का नाम नहीं लिया, लेकिन उनकी राजनीति और विपक्ष के विरोध प्रदर्शनों पर सवाल उठाए। अमित शाह का यह बयान ऐसे समय आया है, जब देश में चुनाव प्रक्रिया, मतदाता सूची और कथित वोट चोरी को लेकर भाजपा और विपक्ष के बीच सियासी टकराव जारी है। कांग्रेस लगातार चुनाव आयोग से जवाब मांग रही है, जबकि भाजपा विपक्ष के आरोपों को राजनीतिक हताशा से जोड़ रही है। Amit Shah Statement: कांग्रेस पर क्यों बरसे गृह मंत्री? अमित शाह ने अपने संबोधन में कांग्रेस की राजनीति पर सवाल उठाते हुए कहा कि चुनाव जीतने के लिए केवल विरोध प्रदर्शन करना काफी नहीं है। राजनीतिक दलों को जनता की समस्याओं को समझना और उनके समाधान के लिए काम करना चाहिए। शाह के मुताबिक, विपक्ष को अपनी चुनावी हार की वजहों पर विचार करना चाहिए। उन्होंने कांग्रेस की राजनीतिक रणनीति पर निशाना साधते हुए दावा किया कि पार्टी की मौजूदा राजनीति उसे लंबे समय तक सत्ता से दूर रख सकती है। हालांकि, कांग्रेस के अगले 30 साल तक सत्ता में नहीं आने का बयान अमित शाह का राजनीतिक दावा है। इसे किसी निश्चित चुनावी नतीजे के तौर पर नहीं देखा जा सकता। Rahul Gandhi का नाम लिए बिना क्या बोले अमित शाह? अमित शाह ने राहुल गांधी का नाम लिए बिना विपक्ष के धरने और प्रदर्शनों पर टिप्पणी की। उनके बयान को कांग्रेस और राहुल गांधी की ओर से चुनाव आयोग के खिलाफ उठाए जा रहे सवालों के जवाब के रूप में देखा जा रहा है। शाह का कहना है कि विपक्ष को जनता के बीच जाकर अपना समर्थन बढ़ाना चाहिए। केवल आरोप लगाने या सड़कों पर उतरने से चुनावी राजनीति में सफलता नहीं मिलती। दूसरी तरफ, कांग्रेस का तर्क है कि चुनाव प्रक्रिया में पारदर्शिता बनाए रखना जरूरी है। पार्टी और INDIA गठबंधन के नेता मतदाता सूची में कथित गड़बड़ियों को लेकर सवाल उठाते रहे हैं। Vote Chori और SIR पर भाजपा-विपक्ष में टकराव देश की राजनीति में वोट चोरी और SIR यानी Special Intensive Revision का मुद्दा लगातार चर्चा में है। राहुल गांधी समेत कई विपक्षी नेताओं ने मतदाता सूची में नाम हटाए जाने और चुनावी प्रक्रिया से जुड़ी कथित अनियमितताओं पर सवाल उठाए हैं। विपक्ष का कहना है कि इन मामलों में स्पष्ट जवाब मिलना चाहिए। वहीं, भाजपा इन आरोपों को खारिज करती रही है और विपक्ष पर चुनावी हार के बाद संस्थाओं पर सवाल उठाने का आरोप लगाती है। इस विवाद में दोनों पक्षों के अपने-अपने दावे हैं। मतदाता सूची से जुड़े आरोपों की सच्चाई समझने के लिए आधिकारिक आंकड़ों, चुनाव आयोग के जवाब और उपलब्ध प्रमाणों को देखना जरूरी है। चुनाव आयोग को लेकर भी जारी है सियासी लड़ाई मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और चुनाव आयोग को लेकर कांग्रेस तथा अन्य विपक्षी दलों का विरोध पहले भी सामने आ चुका है। विपक्ष ने मतदाता सूची और चुनावी प्रक्रिया में कथित गड़बड़ियों पर जवाब मांगा है। वहीं, भाजपा का कहना है कि चुनावी नतीजों को लेकर बेबुनियाद आरोप लगाने के बजाय विपक्ष को अपनी रणनीति पर ध्यान देना चाहिए। इस मुद्दे ने भाजपा और INDIA गठबंधन के बीच राजनीतिक बहस को और तेज कर दिया है। आने वाले समय में यह विवाद चुनावी भाषणों और विपक्षी अभियानों में भी अहम भूमिका निभा सकता है। Amit Shah ने AAP पर भी साधा निशाना अमित शाह ने अपने संबोधन में आम आदमी पार्टी (AAP) की राजनीति पर भी सवाल उठाए। उन्होंने विपक्षी दलों को सलाह दी कि वे आरोप-प्रत्यारोप से आगे बढ़कर जनता के लिए काम करें। दिल्ली की राजनीति में भाजपा और आम आदमी पार्टी के बीच लंबे समय से टकराव रहा है। ऐसे में शाह का बयान विपक्ष पर राजनीतिक दबाव बनाने के साथ-साथ भाजपा के चुनावी संदेश को मजबूत करने की कोशिश के रूप में भी देखा जा रहा है। आगे क्या होगा? कांग्रेस के सामने क्या चुनौती है? अमित शाह के बयान से साफ है कि भाजपा कांग्रेस और दूसरे विपक्षी दलों के विरोध प्रदर्शनों को लेकर आक्रामक रुख अपनाए हुए है। दूसरी ओर, कांग्रेस चुनाव आयोग और मतदाता सूची से जुड़े मुद्दों पर जवाब मांगने की अपनी रणनीति पर कायम है। अब नजर इस बात पर रहेगी कि विपक्ष अपने आरोपों के समर्थन में क्या तथ्य सामने रखता है और चुनाव आयोग इन सवालों पर क्या जवाब देता है। साथ ही, यह भी देखना होगा कि इन मुद्दों का आने वाले चुनावों में मतदाताओं पर कितना असर पड़ता है। फिलहाल, अमित शाह का 30 साल वाला बयान राजनीतिक चर्चा का विषय बन गया है। लेकिन आखिरकार चुनाव में किसे जनता का समर्थन मिलेगा, इसका फैसला मतदाता ही करेंगे। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
Ranbir Kapoor

Ranbir Kapoor Controversy: सच्चाई और अच्छाई पर गलत बोल गए रणबीर, अब मांगी माफी

बॉलीवुड एक्टर रणबीर कपूर (Ranbir Kapoor) अपने एक बयान को लेकर चर्चा में हैं। दशहरे के मौके पर कोलकाता में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान उन्होंने सच्चाई और अच्छाई को लेकर कुछ ऐसा कह दिया, जिस पर सोशल मीडिया पर सवाल उठने लगे। वीडियो वायरल हुआ तो लोगों ने उन्हें ट्रोल करना शुरू कर दिया। अब रणबीर कपूर ने अपनी गलती स्वीकार करते हुए माफी मांगी है। उन्होंने सफाई दी कि बोलते समय उनकी जुबान फिसल गई थी और वह कुछ और कहना चाहते थे। दशहरे पर क्या बोल गए रणबीर कपूर? दरअसल, दशहरे के मौके पर Ranbir Kapoor कोलकाता में एक कार्यक्रम में शामिल हुए थे। इस दौरान वह बुराई पर अच्छाई की जीत के संदेश के बारे में बात कर रहे थे। लेकिन अपनी बात रखते समय वह ‘सच्चाई और अच्छाई की जीत’ की जगह उनके अंत होने जैसी बात कह गए। उनके इस बयान का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गया। इसके बाद कई यूजर्स ने उनके शब्दों पर सवाल उठाए, तो कुछ ने मजाकिया अंदाज में प्रतिक्रिया दी। मामला इसलिए भी चर्चा में आया क्योंकि रणबीर कपूर अपनी आगामी फिल्म ‘रामायण’ में भगवान राम की भूमिका निभा रहे हैं। ट्रोलिंग के बाद Ranbir Kapoor ने मांगी माफी बयान को लेकर विवाद बढ़ने के बाद रणबीर कपूर ने चेन्नई में आयोजित ‘रामायण’ के म्यूजिकल इवेंट में इस पर सफाई दी। उन्होंने माना कि उस समय बोलते हुए उनकी जुबान फिसल गई थी। Ranbir ने बताया कि वह कहना चाहते थे कि बुराई कितनी भी ताकतवर क्यों न हो, आखिरकार जीत सच्चाई और अच्छाई की ही होती है। लेकिन शब्दों के गलत इस्तेमाल के कारण उनकी बात का अर्थ बदल गया। उन्होंने अपनी गलती के लिए माफी भी मांगी। अभिनेता ने हल्के-फुल्के अंदाज में यह भी समझाया कि कभी-कभी वह कहना कुछ चाहते हैं, लेकिन उनके मुंह से कुछ और निकल जाता है। उनकी इस सफाई के बाद यह साफ हुआ कि उनका इरादा दशहरे के संदेश के उलट बात कहने का नहीं था। Social Media पर क्यों होने लगे Ranbir Kapoor ट्रोल? Ranbir Kapoor का वीडियो सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर प्रतिक्रियाओं की बाढ़ आ गई। कुछ लोगों ने इसे जुबान फिसलने की सामान्य गलती बताया, जबकि कुछ यूजर्स ने सार्वजनिक मंच पर बोलते समय ज्यादा सावधानी बरतने की बात कही। फिल्म ‘रामायण’ में भगवान राम का किरदार निभाने की वजह से भी यह बयान लोगों के बीच चर्चा का विषय बन गया। हालांकि, रणबीर ने ज्यादा देर तक इस मामले पर चुप रहने के बजाय अपनी बात स्पष्ट की और गलती स्वीकार कर ली। Ranbir Kapoor की अपकमिंग फिल्म Ramayana भी चर्चा में रणबीर कपूर इन दिनों निर्देशक नितेश तिवारी की फिल्म ‘रामायण’ को लेकर भी सुर्खियों में हैं। फिल्म में साई पल्लवी माता सीता, यश रावण, सनी देओल हनुमान और रवि दुबे लक्ष्मण की भूमिका में नजर आएंगे। फिल्म के पहले भाग की रिलीज 5 नवंबर 2026 को तय बताई गई है। ऐसे में फिल्म के प्रमोशन के दौरान रणबीर कपूर के बयान ने भी लोगों का ध्यान खींचा है। Ranbir Kapoor Controversy: क्या है पूरा मामला? इस पूरे विवाद की शुरुआत दशहरे के कार्यक्रम में बोले गए गलत शब्दों से हुई। सोशल मीडिया पर वीडियो वायरल होने के बाद रणबीर कपूर को आलोचनाओं का सामना करना पड़ा। इसके बाद उन्होंने सफाई देते हुए कहा कि उनकी जुबान फिसल गई थी और वह अच्छाई व सच्चाई की जीत की बात कर रहे थे। फिलहाल, रणबीर कपूर की माफी के बाद इस मामले में उनकी सफाई सामने आ चुकी है। अब दर्शकों की नजर उनकी फिल्म ‘रामायण’ पर है, जिसे लेकर पहले से ही काफी उत्सुकता बनी हुई है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!

छत्तीसगढ़ में परीक्षा में नकल और गड़बड़ी के मामलों की सुनवाई के लिए 3 स्पेशल कोर्ट गठित

छत्तीसगढ़ में प्रतियोगी परीक्षाओं और अन्य सार्वजनिक परीक्षाओं में नकल व गड़बड़ी से जुड़े मामलों की सुनवाई के लिए तीन स्पेशल कोर्ट बनाई गई हैं। राज्य शासन ने रायपुर, बिलासपुर और कोरिया के डिस्ट्रिक्ट एंड सेशंस कोर्ट को विशेष अदालत के रूप में नामित किया है। कोरिया जिले की स्पेशल कोर्ट बैकुंठपुर में होगी। इस संबंध में कानून एवं विधायी कार्य विभाग ने अधिसूचना जारी की है। इन अदालतों में सार्वजनिक परीक्षाओं के दौरान नकल और अनुचित तरीकों के इस्तेमाल से जुड़े मामलों की सुनवाई की जाएगी। 2024 के कानून के तहत गठित हुईं विशेष अदालतें राज्य में यह व्यवस्था पब्लिक एग्जामिनेशन (प्रिवेंशन ऑफ अनफेयर मीन्स) एक्ट, 2024 के तहत की गई है। अधिसूचना में कानून की धारा 12-क की उपधारा (2) का उल्लेख किया गया है। इसी प्रावधान के तहत राज्य शासन ने तीन जिलों के डिस्ट्रिक्ट एंड सेशंस कोर्ट को स्पेशल कोर्ट के रूप में नामित किया है। इसका उद्देश्य सार्वजनिक परीक्षाओं में अनुचित साधनों से जुड़े मामलों की सुनवाई के लिए विशेष न्यायिक व्यवस्था उपलब्ध कराना है। हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस से परामर्श के बाद जारी हुई अधिसूचना छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश कृष्ण राम महापात्र से परामर्श के बाद राज्य शासन ने यह अधिसूचना जारी की है। हाईकोर्ट के रजिस्ट्रार जनरल रजनीश श्रीवास्तव ने संबंधित जिलों के डिस्ट्रिक्ट एंड सेशंस जजों को अधिसूचना की प्रतियां भेजकर आवश्यक निर्देश दिए हैं। तीनों विशेष अदालतें अपने-अपने न्यायिक क्षेत्राधिकार में आने वाले परीक्षा संबंधी गड़बड़ी के मामलों की सुनवाई करेंगी। इस व्यवस्था के तहत प्रतियोगी परीक्षाओं और अन्य सार्वजनिक परीक्षाओं में नकल या अनुचित तरीकों के इस्तेमाल से जुड़े मामलों को निर्धारित कानूनी प्रक्रिया के अनुसार सुना जाएगा।
Akhilesh Yadav

Akhilesh Yadav Rampur Visit: रामपुर जेल पहुंचे अखिलेश, आजम खान से करेंगे मुलाकात

समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव (Akhilesh Yadav) गुरुवार, 22 अक्टूबर को रामपुर जिला जेल पहुंचे। यहां उनकी पार्टी के वरिष्ठ नेता आजम खान से मुलाकात होनी है। इस दौरे पर राजनीतिक गलियारों की नजरें टिकी हैं। इसकी वजह सिर्फ दोनों नेताओं की मुलाकात नहीं, बल्कि उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले बदलते राजनीतिक समीकरण भी हैं। Akhilesh Yadav के रामपुर पहुंचने के बाद अब सबकी नजर इस बात पर है कि आजम खान से बातचीत के बाद वह क्या कहते हैं और इस मुलाकात से पार्टी के भीतर क्या संदेश जाता है। Akhilesh Yadav कैसे रामपुर पहुंचे ? निर्धारित कार्यक्रम के मुताबिक, अखिलेश यादव (Akhilesh Yadav) लखनऊ से निजी विमान के जरिए बरेली पहुंचे। इसके बाद हेलीकॉप्टर से रामपुर स्थित जौहर विश्वविद्यालय पहुंचे और वहां से जिला जेल के लिए रवाना हुए। कार्यक्रम में आजम खान से मुलाकात के साथ उनके परिवार से मिलने की योजना भी शामिल है। आजम खान की तबीयत और उनके हालात जानने को इस दौरे की अहम वजह बताया गया है। Azam Khan से मुलाकात क्यों है खास? आजम खान समाजवादी पार्टी के पुराने और प्रभावशाली नेताओं में गिने जाते हैं। रामपुर और आसपास के इलाकों में उनकी राजनीतिक पहचान लंबे समय से रही है। ऐसे में अखिलेश यादव का उनसे मिलने पहुंचना पार्टी के कार्यकर्ताओं और समर्थकों के लिए भी महत्वपूर्ण है। पिछले कुछ समय से आजम खान और सपा नेतृत्व के संबंधों को लेकर राजनीतिक चर्चाएं होती रही हैं। उनकी पत्नी तजीन फातिमा की अखिलेश यादव से मुलाकात के बाद रामपुर आने का कार्यक्रम भी चर्चा में रहा। अब दोनों नेताओं की मुलाकात से यह देखने की उत्सुकता है कि उनके बीच किन मुद्दों पर बात होती है और आगे पार्टी की ओर से क्या संदेश दिया जाता है। UP Politics: 2027 चुनाव से पहले बढ़ी हलचल उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 से पहले सभी प्रमुख दल अपने राजनीतिक समीकरण मजबूत करने में जुटे हैं। ऐसे समय में आजम खान से अखिलेश यादव की मुलाकात को पश्चिमी उत्तर प्रदेश की राजनीति के नजरिए से भी देखा जा रहा है। हालांकि, इस मुलाकात में चुनावी रणनीति या संगठन से जुड़े मुद्दों पर चर्चा होगी या नहीं, इसकी आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है। इसलिए इसे किसी बड़े राजनीतिक फैसले से जोड़कर देखना अभी जल्दबाजी होगी। Asaduddin Owaisi के दौरे के बाद चर्चा तेज रामपुर में एआईएमआईएम प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी के दौरे और समाजवादी पार्टी पर उनकी राजनीतिक टिप्पणियों के बाद भी इस मुलाकात को लेकर चर्चा हो रही है। ओवैसी मुस्लिम राजनीति और सपा के नेतृत्व को लेकर सवाल उठाते रहे हैं। ऐसे में अखिलेश यादव और आजम खान की मुलाकात पर राजनीतिक दलों की नजर होना स्वाभाविक है। हालांकि, दोनों नेताओं के बीच बातचीत का वास्तविक एजेंडा सामने आने के बाद ही इसके राजनीतिक मायने स्पष्ट होंगे। Om Prakash Rajbhar के बयान से भी गरमाई सियासत उत्तर प्रदेश सरकार में मंत्री ओम प्रकाश राजभर ने भी अखिलेश यादव के रामपुर दौरे को लेकर टिप्पणी की है। इस बयानबाजी के बीच सपा प्रमुख का आजम खान से मिलना राजनीतिक चर्चा का विषय बन गया है। फिलहाल, इस दौरे को लेकर अलग-अलग राजनीतिक प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। लेकिन अखिलेश यादव और आजम खान की बातचीत के बाद ही यह साफ होगा कि मुलाकात में किन मुद्दों पर चर्चा हुई। मुलाकात के बाद क्या होगा अगला कदम? अखिलेश यादव के रामपुर पहुंचने के बाद अब आजम खान से मुलाकात और उनके परिवार से बातचीत पर सबकी नजर है। समर्थकों को उम्मीद है कि इस मुलाकात से दोनों नेताओं के बीच संवाद को लेकर स्थिति और स्पष्ट होगी। फिलहाल, किसी नई चुनावी रणनीति या बड़े फैसले की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। मुलाकात के बाद अखिलेश यादव का बयान और समाजवादी पार्टी की आगे की गतिविधियां इस दौरे की अहमियत को समझने में मदद करेंगी। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!

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