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खंडवा में सीसी रोड निर्माण पर सवाल, ग्रामीणों ने घटिया सामग्री इस्तेमाल करने का लगाया आरोप

खंडवा। जिले के मोहद गांव में बीड़-मूंदी हाईवे पर बन रही सीसी रोड की गुणवत्ता को लेकर ग्रामीणों ने सवाल उठाए हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि सड़क निर्माण में सीमेंट की मात्रा कम रखी जा रही है और बालू रेत की जगह डस्ट का इस्तेमाल किया जा रहा है। ग्रामीणों ने रात में भी निर्माण कार्य कराए जाने की शिकायत की है। शिकायत सामने आने के बाद PWD ने ठेकेदार को नोटिस जारी करने और इंजीनियर को मौके पर जांच के लिए भेजने की बात कही है। तीन साल के संघर्ष के बाद शुरू हुआ सड़क निर्माण बीड-मूंदी हाईवे के तहत मोहद गांव में टू-लेन सीसी रोड का निर्माण होना था। ग्रामीणों के मुताबिक, बजट की कमी का हवाला देकर सड़क का काम अधूरा छोड़ दिया गया था। इसके बाद ग्रामीणों ने सड़क निर्माण की मांग को लेकर करीब तीन साल तक प्रयास किए। बाद में PWD ने सड़क निर्माण के लिए करीब एक करोड़ रुपए मंजूर किए, जिसके बाद काम दोबारा शुरू हुआ। सड़क निर्माण का ठेका खंडवा की एक कंपनी को मिला है। ग्रामीणों का आरोप है कि कंपनी पेटी कॉन्ट्रैक्ट के जरिए काम करा रही है। 12 बोरी की जगह 4 बोरी सीमेंट डालने का आरोप ग्रामीणों ने निर्माण सामग्री की गुणवत्ता को लेकर गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि सीमेंट-कांक्रीट तैयार करने के दौरान निर्धारित मात्रा में सीमेंट नहीं डाला जा रहा। ग्रामीणों के मुताबिक, विभागीय अधिकारियों ने एक मिक्सर में 12 बोरी सीमेंट डालने की जानकारी दी थी, लेकिन मौके पर कथित तौर पर सिर्फ 4 बोरी सीमेंट का इस्तेमाल किया जा रहा है। ग्रामीणों ने यह भी आरोप लगाया कि निर्माण में बालू रेत के स्थान पर डस्ट का इस्तेमाल किया जा रहा है। उनका कहना है कि यदि निर्माण में मानकों का पालन नहीं हुआ तो सड़क की गुणवत्ता प्रभावित हो सकती है। PWD ने कहा- गुणवत्ता की जांच कराई जाएगी PWD के कार्यपालन यंत्री नरेंद्र सिंह मंडलोई ने कहा कि सड़क का निर्माण निर्धारित गुणवत्ता मापदंडों के अनुसार कराया जा रहा है। उन्होंने बताया कि शिकायत मिलने के बाद संबंधित ठेकेदार को नोटिस दिया गया है। विभागीय इंजीनियर को मौके पर जांच के लिए भेजा गया है। साइट पर टाइमकीपर और अन्य कर्मचारी भी मौजूद हैं। मंडलोई के मुताबिक, यदि रात के समय नियमों के विपरीत निर्माण कार्य कराया जा रहा है तो उसे बंद कराया जाएगा। विभाग की जांच के बाद ही निर्माण सामग्री और सीमेंट की मात्रा को लेकर लगाए गए आरोपों की वास्तविक स्थिति स्पष्ट होगी।
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भोपाल में 2 महीने की बच्ची की इलाज के दौरान मौत, परिजनों ने टीकाकरण के बाद तबीयत बिगड़ने का लगाया आरोप

भोपाल। छोला मंदिर थाना क्षेत्र की नवजीवन कॉलोनी में दो महीने की बच्ची की इलाज के दौरान मौत हो गई। परिजनों का आरोप है कि 14 अगस्त को आंगनवाड़ी केंद्र में टीकाकरण और पोलियो की दवा पिलाने के बाद बच्ची की तबीयत बिगड़ गई थी। गंभीर हालत में उसे अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां रविवार सुबह उसने दम तोड़ दिया। मृतका की पहचान लक्ष्मी पिता हलके राम (2 माह) के रूप में हुई है। वह नवजीवन कॉलोनी, छोला में रहती थी। परिवार मूल रूप से सिरोंज का रहने वाला है। बच्ची परिवार की इकलौती बेटी थी और उसका एक बड़ा भाई है। टीकाकरण के बाद तबीयत बिगड़ने का दावा परिजनों के मुताबिक, 14 अगस्त को लक्ष्मी को आंगनवाड़ी केंद्र ले जाया गया था। वहां उसे पोलियो की दवा पिलाने के साथ टीकाकरण किया गया। बच्ची के पिता हलके राम का दावा है कि उसे पोलियो की सात बूंद दवा पिलाई गई और तीन इंजेक्शन भी लगाए गए। परिवार का कहना है कि आंगनवाड़ी से घर लौटने के बाद बच्ची की तबीयत बिगड़ने लगी। हालत गंभीर होने पर उसे अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उपचार शुरू किया। इलाज के दौरान रविवार सुबह उसकी मौत हो गई। पिता ने लगाया ओवरडोज का आरोप बच्ची के पिता ने आरोप लगाया कि दो महीने की बच्ची को पोलियो की सात बूंद दवा देने के अलावा तीन इंजेक्शन लगाए गए। उनका दावा है कि दवा के ओवरडोज के कारण बच्ची की तबीयत बिगड़ी और उसकी मौत हुई। हालांकि, पुलिस ने अभी मौत की वजह की पुष्टि नहीं की है। टीकाकरण और दवा से संबंधित परिजनों के आरोपों की जांच की जा रही है। पुलिस ने मर्ग कायम कर शुरू की जांच छोला मंदिर थाना पुलिस ने बच्ची की मौत के मामले में मर्ग कायम कर जांच शुरू कर दी है। थाना प्रभारी सरस्वती तिवारी के अनुसार, परिजनों के बयान में टीका लगने के बाद बच्ची की तबीयत बिगड़ने की बात सामने आई है। पुलिस मामले की सभी पहलुओं से जांच कर रही है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही मौत की वास्तविक वजह स्पष्ट होने की उम्मीद है। पीएम रिपोर्ट से सामने आएगा मौत का कारण पुलिस के मुताबिक, पोस्टमार्टम रिपोर्ट और जांच में सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर यह पता चलेगा कि बच्ची की मौत किन परिस्थितियों में हुई। साथ ही यह भी जांच का विषय होगा कि टीकाकरण या दवा से मौत का कोई संबंध था या किसी अन्य कारण से बच्ची की हालत बिगड़ी। रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई तय की जाएगी।
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राष्ट्रपति पदक से सम्मानित रामावतार सिंह और पुरस्कार विजेता अर्चना धुरंधर की सेवा को सलाम

रायपुर। स्वतंत्रता दिवस के मौके पर पुलिस विभाग के दो अधिकारियों की सेवा और उपलब्धियां खास चर्चा में हैं। एक ओर रामावतार सिंह हैं, जिन्हें विशेष सेवा के लिए राष्ट्रपति पदक से सम्मानित किया गया है। उन्होंने नक्सल प्रभावित इलाकों में VIP सुरक्षा, चुनाव और कानून-व्यवस्था जैसी चुनौतीपूर्ण जिम्मेदारियां निभाईं। वहीं दूसरी ओर रायपुर शहर की एकमात्र महिला टीआई अर्चना धुरंधर हैं। महिलाओं और अवयस्क बच्चों से जुड़ी शिकायतों के त्वरित निराकरण और पारिवारिक विवादों में सुलह कराने के लिए उन्हें राज्यपाल पुरस्कार और रानी सुबरन कुंवर पुरस्कार मिल चुका है। नक्सल प्रभावित इलाकों में VIP मूवमेंट बड़ी चुनौती रामावतार सिंह ने अपने सेवाकाल में नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में भी ड्यूटी की। उनका कहना है कि ऐसे इलाकों में VIP मूवमेंट सामान्य शहरों की तुलना में काफी चुनौतीपूर्ण होता है। सुरक्षा के लिए पहले से विस्तृत प्लानिंग करनी पड़ती है। VIP के रूट, फोर्स की तैनाती, जवानों के ठहरने की व्यवस्था और पूरे सुरक्षा बंदोबस्त की मॉनिटरिंग तक कई स्तरों पर तैयारी की जाती थी। नक्सल गतिविधियों वाले क्षेत्रों में रूट और सुरक्षा व्यवस्था को लेकर अतिरिक्त सावधानी बरतना जरूरी होता था। उन्होंने बताया कि VIP ड्यूटी सिर्फ सड़क पर जवान तैनात करने तक सीमित नहीं होती। कार्यक्रम स्थल, आने-जाने वाले रास्तों और आसपास के इलाकों का आकलन कर फोर्स की जरूरत और उसकी तैनाती तय की जाती है। चुनाव और कानून-व्यवस्था में भी निभाई जिम्मेदारी रामावतार सिंह ने निर्वाचन ड्यूटी के दौरान भी महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभाईं। चुनाव के समय संवेदनशील इलाकों और मतदान केंद्रों पर सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखना पुलिस के लिए बड़ी चुनौती होती है। उनके लंबे सेवाकाल में VIP बंदोबस्त, निर्वाचन ड्यूटी और कानून-व्यवस्था समेत कई महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां शामिल रही हैं। इन्हीं विशेष सेवाओं के लिए उन्हें राष्ट्रपति पदक से सम्मानित किया गया। सम्मानित अधिकारियों की सूची में उनका नाम सबसे ऊपर रहा, जिसे उन्होंने गर्व का पल बताया। महिलाओं और बच्चों के मामलों में भरोसा सबसे जरूरी अर्चना धुरंधर का पुलिसिंग का क्षेत्र अलग है। वह महिलाओं और बच्चों से जुड़े मामलों में संवेदनशीलता के साथ काम करती हैं। उनका कहना है कि ऐसे मामलों में शिकायतकर्ता की बात धैर्य से सुनना और उसे भरोसा दिलाना सबसे जरूरी होता है। कई महिलाएं और बच्चे डर या परेशानी की स्थिति में थाने पहुंचते हैं। ऐसे में पहले उन्हें सहज किया जाता है। इसके बाद पूरी बात सुनकर कानूनी प्रावधानों के अनुसार कार्रवाई की जाती है। अर्चना के मुताबिक, जब शिकायतकर्ता को यह भरोसा होता है कि उसकी समस्या को गंभीरता से लिया जा रहा है, तब वह अपनी बात खुलकर बता पाता है। 4 साल की बच्ची का मामला आज भी याद अर्चना ने अपने सेवाकाल के एक मामले को याद करते हुए बताया कि 2011 में राजनांदगांव में महिला चौकी प्रभारी रहते हुए उनके पास 4 साल की बच्ची से रेप का मामला आया था। मामले में तत्काल कार्रवाई करते हुए बच्ची को सुरक्षित बचाया गया और आरोपी को सजा दिलाई गई। अर्चना के मुताबिक, वह बच्ची आज भी उनके करीब है। वह इस मामले को अपने सेवाकाल की सबसे संतोषजनक उपलब्धियों में मानती हैं। उनके लिए सबसे बड़ी खुशी यह है कि बच्ची को समय पर न्याय मिला और आरोपी को सजा हुई। 2008 से पुलिस सेवा में हैं अर्चना अर्चना धुरंधर वर्ष 2008 से सब इंस्पेक्टर के रूप में पुलिस सेवा में हैं। वह अपने पुरस्कारों का श्रेय वरिष्ठ अधिकारियों, सहकर्मियों, कर्मचारियों और काउंसलर्स की पूरी टीम को देती हैं। उनके अनुसार, राज्यपाल पुरस्कार और रानी सुबरन कुंवर पुरस्कार महिलाओं और अवयस्क बच्चों की शिकायतों के त्वरित निराकरण तथा पारिवारिक विवादों में सुलह कराने के कार्य के लिए दिए गए हैं। दो अलग जिम्मेदारियां, लक्ष्य एक- सेवा रामावतार सिंह और अर्चना धुरंधर की जिम्मेदारियां भले अलग रही हों, लेकिन दोनों के काम का उद्देश्य लोगों की सुरक्षा और उन्हें न्याय दिलाना रहा है। रामावतार ने नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में सुरक्षा, VIP मूवमेंट और चुनाव जैसी चुनौतीपूर्ण जिम्मेदारियां निभाईं, जबकि अर्चना ने महिलाओं और बच्चों की शिकायतों को संवेदनशीलता के साथ सुना और उनके समाधान के लिए काम किया। एक अधिकारी को विशेष सेवा के लिए राष्ट्रपति पदक मिला, तो दूसरी अधिकारी को महिलाओं और बच्चों के मामलों में उल्लेखनीय कार्य के लिए राज्यपाल और रानी सुबरन कुंवर पुरस्कार से सम्मानित किया गया।
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सीहोर में अब तक 26.75 इंच बारिश, पिछले साल से 0.74 इंच कम; अगले 48 घंटे भी बारिश के आसार

सीहोर। जिले में मानसूनी गतिविधियों के चलते रुक-रुककर बारिश का दौर जारी है। कहीं रिमझिम तो कहीं हल्की से मध्यम बारिश हो रही है। भू-अभिलेख विभाग की ओर से 16 अगस्त को जारी दैनिक वर्षा आंकड़ों के अनुसार, सीहोर जिले में 1 जून से अब तक औसतन 26.75 इंच बारिश दर्ज की गई है। सीहोर में सबसे ज्यादा 32.68 इंच बारिश 1 जून से 16 अगस्त तक के आंकड़ों के मुताबिक सीहोर वर्षामापी केंद्र में सबसे ज्यादा 32.68 इंच बारिश रिकॉर्ड हुई है। इसके बाद रहटी में 29.58 इंच, भैरूंदा में 27.12 इंच और बुधनी में 26.37 इंच बारिश दर्ज की गई। अन्य क्षेत्रों में आष्टा में 26.18 इंच, इछावर में 25.82 इंच, श्यामपुर में 24.75 इंच और जावर में सबसे कम 21.45 इंच बारिश हुई है। पिछले साल के मुकाबले 0.74 इंच कम बारिश पिछले साल इसी अवधि तक सीहोर जिले में औसतन 27.49 इंच बारिश हुई थी। इस साल यह आंकड़ा 26.75 इंच है। यानी पिछले साल की तुलना में अब तक करीब 0.74 इंच कम बारिश दर्ज की गई है। जिले की सामान्य औसत वार्षिक बारिश 45.21 इंच है। ऐसे में सीहोर में अभी सामान्य बारिश का आंकड़ा पूरा होने में काफी बारिश बाकी है। बंगाल की खाड़ी के सिस्टम का असर मौसम विभाग के अनुसार, बंगाल की खाड़ी में बने मानसूनी सिस्टम और सक्रिय ट्रफ लाइन के कारण मध्य प्रदेश के मध्य हिस्सों में लगातार नमी पहुंच रही है। इसके प्रभाव से सीहोर और आसपास के इलाकों में बारिश का सिलसिला बना हुआ है। अगले 48 घंटे भी बारिश की संभावना मौसम विभाग ने अगले 48 घंटे के दौरान सीहोर और आसपास के क्षेत्रों में गरज-चमक के साथ मध्यम से भारी बारिश की संभावना जताई है। जिले के कई हिस्सों में रिमझिम से लेकर हल्की और मध्यम बारिश हो सकती है। कुछ स्थानों पर गरज-चमक के साथ तेज बारिश होने की भी संभावना है। ऐसे में मौसम का यह दौर अगले दो दिनों तक जारी रहने की उम्मीद है।
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गोपाल भार्गव बोले- भाजपा का हर कार्यकर्ता मुख्यमंत्री, ‘कुत्तों की चिंता नहीं की जाती’

सागर। रहली विधानसभा से 9 बार के विधायक और पूर्व मंत्री गोपाल भार्गव का एक बयान इन दिनों चर्चा में है। उन्होंने कहा कि भाजपा का हर कार्यकर्ता अपने आप को मुख्यमंत्री से कम नहीं समझता। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बयान का हवाला देते हुए कहा कि पार्टी का हर कार्यकर्ता प्रधानमंत्री भी है। रहली में वीर दुर्गादास राठौर जयंती समारोह के दौरान मंच से संबोधित करते हुए भार्गव ने कहा कि किसी से सर्टिफिकेट लेने की जरूरत नहीं है। उन्होंने कहा, “लोग तो ऐसे भौंकते रहते हैं। हाथी अपनी मस्त चाल चलता है और कुत्ते उसके पीछे लगे रहते हैं। कुत्तों की चिंता नहीं की जाती।” बोले- 2-4 चीटियां मिलकर गन्ना नहीं खींच सकतीं गोपाल भार्गव ने कहा कि ऐसी कोशिश करने वालों की चिंता नहीं करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि भाजपा का हर कार्यकर्ता खुद को मुख्यमंत्री और प्रधानमंत्री से कम नहीं समझता। उन्होंने कहा कि देश में लोकतंत्र है और सभी लोग बराबर हैं। कोई सेवक के रूप में काम कर रहा है तो कोई जनप्रतिनिधि के रूप में अपनी जिम्मेदारी निभा रहा है। भार्गव ने इसी दौरान उदाहरण देते हुए कहा कि “2-4 चीटियां मिलकर गन्ने को नहीं खींच सकतीं।” निवास बोर्ड पर चिपकाया गया था ‘स्वघोषित मुख्यमंत्री’ का पर्चा दरअसल, कुछ दिन पहले सोशल मीडिया पर एक वीडियो सामने आया था। इसमें एक व्यक्ति ने गढ़ाकोटा स्थित गोपाल भार्गव के निवास ‘गणनायक’ के बाहर सड़क पर लगे निवास बोर्ड पर ‘स्वघोषित मुख्यमंत्री’ लिखा हुआ पंपलेट चिपका दिया था। वीडियो सोशल मीडिया पर सामने आने के बाद यह मामला चर्चा में आया। वीर दुर्गादास राठौर जयंती कार्यक्रम के दौरान जब एक व्यक्ति ने इसी घटना का जिक्र किया, तब गोपाल भार्गव ने मंच से यह बयान दिया। ‘सर्टिफिकेट लेने की जरूरत नहीं’ भार्गव के बयान का संदेश साफ था कि राजनीतिक पद या भूमिका को लेकर किसी बाहरी व्यक्ति से प्रमाणपत्र लेने की जरूरत नहीं है। उन्होंने कहा कि भाजपा का प्रत्येक कार्यकर्ता पार्टी में महत्वपूर्ण है और लोकतंत्र में सभी को बराबर अधिकार प्राप्त हैं।
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भोपाल में राजा भोज नेशनल सेलिंग चैंपियनशिप का समापन, CM बोले- हर विधानसभा में बनेगा स्टेडियम

भोपाल। राजा भोज मल्टी क्लास नेशनल सेलिंग चैंपियनशिप (रैंकिंग)-2026 के तीसरे संस्करण का रविवार को भोपाल के बोट क्लब में समापन हुआ। पुरस्कार वितरण समारोह में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव शामिल हुए। उन्होंने कहा कि प्रदेश के सभी 230 विधानसभा क्षेत्रों में एक-एक स्टेडियम विकसित करने का प्रयास किया जा रहा है। इन स्टेडियमों में अलग-अलग खेलों के लिए जरूरी सुविधाएं भी उपलब्ध कराई जाएंगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि खेल विभाग का बजट बढ़ाना उनके लिए खुशी की बात है। सरकार का उद्देश्य प्रदेश के हर हिस्से की खेल प्रतिभाओं को आगे बढ़ने के समान अवसर देना है। 12 क्लबों के 87 खिलाड़ियों ने लिया हिस्सा चैंपियनशिप में 12 क्लबों के 87 खिलाड़ियों ने 110 रेस में हिस्सा लिया। प्रतियोगिता में नेशनल सेलिंग स्कूल (NSS) भोपाल ने पहला स्थान हासिल किया। नेवी यूथ स्पोर्ट्स क्लब (NYSC) गोवा दूसरे और सिकंदराबाद तीसरे स्थान पर रहा। तीन साल में 16वें-17वें से तीसरे स्थान पर पहुंचा MP CM मोहन यादव ने कहा कि खेलों में मध्यप्रदेश की स्थिति लगातार बेहतर हुई है। तीन साल पहले तक प्रदेश देश में खेलों के मामले में 16वें-17वें स्थान के आसपास था, लेकिन अब वह तीसरे स्थान पर पहुंच गया है। उन्होंने इसका श्रेय खिलाड़ियों की मेहनत और सरकार की खेलों के प्रति प्रतिबद्धता को दिया। CM ने कहा कि ओलंपिक और कॉमनवेल्थ जैसी अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में भी मध्यप्रदेश के खिलाड़ियों की उपलब्धियां दिखाई दे रही हैं। 18 खेलों की 11 अकादमियां संचालित मुख्यमंत्री के अनुसार मध्यप्रदेश में वर्तमान में 18 खेलों की 11 खेल अकादमियां संचालित हैं। सरकार खिलाड़ियों के प्रशिक्षण के साथ उनकी शिक्षा और भविष्य के अवसरों पर भी ध्यान दे रही है। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 में खेलों को शिक्षा का हिस्सा बनाने के साथ कोच के करियर को आगे बढ़ाने की संभावनाएं भी रखी गई हैं। खिलाड़ियों के साथ उनके प्रशिक्षकों के भविष्य पर भी ध्यान देना जरूरी है। ‘वंदे मातरम्’ को लेकर कांग्रेस पर निशाना कार्यक्रम के बाद मीडिया से चर्चा में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने ‘वंदे मातरम्’ को लेकर कांग्रेस नेताओं पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि स्वतंत्रता दिवस पर पहली बार लाल किले से ‘वंदे मातरम्’ को सम्मान मिलने से देश गौरवान्वित हुआ है। मुख्यमंत्री ने कांग्रेस नेताओं के बयानों की आलोचना करते हुए उनसे देश से माफी मांगने की मांग की। उन्होंने कहा कि ‘वंदे मातरम्’ केवल गीत नहीं, बल्कि स्वतंत्रता, राष्ट्रभक्ति और बलिदान की भावना से जुड़ा है। सारंग बोले- बड़े तालाब का खेल और पर्यटन में हो रहा उपयोग खेल एवं युवा कल्याण मंत्री विश्वास सारंग ने कहा कि मुख्यमंत्री का खेलों के प्रति जुड़ाव लगातार दिखाई दे रहा है। उन्होंने भोपाल के बड़े तालाब को खेल और पर्यटन दोनों के लिए उपयोगी बताया। सारंग ने कहा कि प्रदेश खेलों में तीसरे स्थान पर पहुंच चुका है और 18 खेलों की 11 अकादमियां खिलाड़ियों को राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय स्तर के लिए तैयार कर रही हैं। उन्होंने भोपाल में खेल संग्रहालय बनाने की दिशा में पहल करने का आग्रह भी मुख्यमंत्री से किया। खिलाड़ियों को किया गया सम्मानित समारोह में अलग-अलग खेलों में प्रदेश का नाम रोशन करने वाले खिलाड़ियों को सम्मानित किया गया। इनमें कॉमनवेल्थ गेम्स की रजत पदक विजेता जूडो खिलाड़ी यामिनी मौर्य, शॉटपुट खिलाड़ी समरदीप सिंह गिल, पोल वॉल्ट खिलाड़ी देव कुमार मीणा, कुलदीप कुमार और फेंसिंग खिलाड़ी खुशी दाबोड़े शामिल रहे। 16वीं हॉकी इंडिया जूनियर चैंपियनशिप में रजत पदक जीतने वाली मध्यप्रदेश हॉकी अकादमी की टीम के खिलाड़ियों को भी सम्मानित किया गया। NSS भोपाल चैंपियन, NYSC गोवा उपविजेता राजा भोज मल्टीक्लास नेशनल रैंकिंग सेलिंग चैंपियनशिप-2026 में NSS भोपाल विजेता रहा। टीम में वायु चंद्रवंशी, माही वर्मा, तुलसी पटले, एकलव्य वायम, वंशिका शिकारवार, आर्यन पाटीदार, प्रार्थना मोई, अंकित सिसोदिया, समर पंचेश्वर और सिद्धि टंडन शामिल रहे। NYSC गोवा की टीम उपविजेता रही। टीम में शशांक जाधव, हृदय जोशी, मोह रिजवान, शिवम वाल्मीकि और हेमंत पपौला शामिल थे। अपर लेक की लहरों पर खिलाड़ियों ने दिखाया हुनर चैंपियनशिप के दौरान खिलाड़ियों ने भोपाल के अपर लेक की लहरों पर सेलिंग का शानदार प्रदर्शन किया। विभिन्न वर्गों में खिलाड़ियों के बीच कड़ा मुकाबला हुआ। खिलाड़ियों ने संतुलन, गति और तकनीक के जरिए अपनी क्षमता का प्रदर्शन किया। वाटर स्पोर्ट्स का बड़ा केंद्र बन रहा भोपाल भोपाल की झीलें सेलिंग, रोइंग, कयाकिंग और केनोइंग जैसे वाटर स्पोर्ट्स के लिए अनुकूल हैं। मध्यप्रदेश राज्य जल क्रीड़ा अकादमी की स्थापना 2007 में हुई थी। अकादमी में सेलिंग, रोइंग, कयाकिंग, केनोइंग और स्लालम की प्रशिक्षण सुविधाएं उपलब्ध हैं। अकादमी के खिलाड़ियों ने अब तक 28 अंतरराष्ट्रीय और 69 राष्ट्रीय पदक हासिल किए हैं। खिलाड़ी 37 अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में भारत और मध्यप्रदेश का प्रतिनिधित्व भी कर चुके हैं।
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MP में कंप्यूटर ऑपरेटरों पर सरकार का बड़ा फैसला, 30 दिन में CPCT और साइबर सिक्योरिटी कोर्स जरूरी

भोपाल: मध्य प्रदेश के नगर निगम, नगरपालिका और नगर परिषद में काम करने वाले कंप्यूटर ऑपरेटरों के लिए नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग ने नए निर्देश जारी किए हैं। अब ऑपरेटरों को तकनीकी दक्षता के साथ साइबर सुरक्षा से जुड़ी अनिवार्य योग्यताएं पूरी करनी होंगी। इसके लिए 30 दिन की समय-सीमा दी गई है। तय समय में शर्तें पूरी नहीं करने वालों के मानदेय या वेतन भुगतान पर रोक लग सकती है। यह आदेश संचालनालय, नगरीय प्रशासन एवं विकास की अपर आयुक्त मिशा सिंह की ओर से जारी किया गया है। आदेश सभी नगर निगम आयुक्तों, संयुक्त संचालकों और मुख्य नगरपालिका अधिकारियों को भेजा गया है। क्यों लिया गया फैसला? विभाग के अनुसार नगरीय निकायों में कंप्यूटर ऑपरेटर कई महत्वपूर्ण ऑनलाइन पोर्टल और आईटी आधारित प्रणालियों का संचालन करते हैं। इनमें नागरिक सेवाओं, राजस्व, योजनाओं और अन्य विभागीय कार्यों से जुड़ा डेटा शामिल होता है। सरकारी डेटा की सुरक्षा और ऑनलाइन कामकाज को बेहतर बनाने के लिए ऑपरेटरों की तकनीकी दक्षता और साइबर सिक्योरिटी की जानकारी मजबूत करना जरूरी माना गया है। CPCT पास करना अनिवार्य नए निर्देशों के तहत कंप्यूटर ऑपरेटरों के लिए CPCT (Computer Proficiency Certification Test) परीक्षा पास होना अनिवार्य किया गया है। इसके अलावा उन्हें केंद्र सरकार के iGOT Karmayogi पोर्टल पर उपलब्ध साइबर सिक्योरिटी और आईटी से जुड़े कम से कम 10 सर्टिफिकेट कोर्स पूरे करने होंगे। 50 क्रेडिट पॉइंट भी जरूरी ऑपरेटरों को iGOT Karmayogi पोर्टल पर उपलब्ध पाठ्यक्रमों को पूरा करके कम से कम 50 क्रेडिट पॉइंट हासिल करने होंगे। इन कोर्स में कंप्यूटर की बेसिक जानकारी, Microsoft Word और Excel, डेटा एंट्री, रिकॉर्ड मैनेजमेंट, साइबर सिक्योरिटी और डिजिटल सेफ्टी जैसे विषय शामिल हैं। AI और डेटा मैनेजमेंट की भी ट्रेनिंग जारी सूची में आधुनिक तकनीक और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से जुड़े कोर्स भी शामिल किए गए हैं। इनमें ‘AI Using Google Bard and ChatGPT for Beginners’ जैसे कोर्स बताए गए हैं। इसके साथ ही Data Driven Decision Making और Responsible Data Management जैसे विषयों पर भी प्रशिक्षण लेना होगा। 30 दिन में शर्तें पूरी नहीं कीं तो वेतन पर असर सरकार ने स्पष्ट किया है कि निर्धारित समय में अनिवार्य योग्यताएं और प्रशिक्षण पूरा नहीं करने वाले ऑपरेटरों के संबंध में आगे नियोजन में रखने या हटाने तथा मानदेय/वेतन भुगतान की कार्रवाई नियमों के अनुसार की जाएगी। यानी 30 दिन की समय-सीमा कंप्यूटर ऑपरेटरों के लिए बेहद महत्वपूर्ण है, क्योंकि आवश्यक शर्तें पूरी नहीं करने पर उनकी नौकरी या भुगतान प्रभावित हो सकता है। नगर निकायों में कितने कंप्यूटर ऑपरेटर? किसी निकाय में कंप्यूटर ऑपरेटरों की वास्तविक संख्या स्वीकृत पदों, आउटसोर्स व्यवस्था, जनसंख्या, वार्डों और विभागों की जरूरत पर निर्भर करती है। सामान्य तौर पर अनुमान इस तरह बताया जाता है— बड़े नगर निगमों में अलग-अलग जोन और विभाग होने के कारण ऑपरेटरों की संख्या ज्यादा हो सकती है। इन विभागों में होता है कंप्यूटर ऑपरेटरों का काम कंप्यूटर ऑपरेटर आमतौर पर जन्म-मृत्यु प्रमाण पत्र, संपत्ति कर, जलकर, राजस्व, प्रधानमंत्री आवास योजना, स्थापना, लेखा और अन्य ऑनलाइन नागरिक सेवाओं से जुड़े काम संभालते हैं। ऐसे में सरकार का फोकस तकनीकी दक्षता के साथ सरकारी डेटा और ऑनलाइन सिस्टम की सुरक्षा मजबूत करने पर है।
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PM मोदी के स्वतंत्रता दिवस भाषण पर विधायक आरिफ मसूद ने उठाए सवाल, मुस्लिम स्वतंत्रता सेनानियों का जिक्र नहीं होने पर जताई नाराजगी

भोपाल: स्वतंत्रता दिवस पर लाल किले की प्राचीर से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों के योगदान का उल्लेख किए जाने के बाद भोपाल से कांग्रेस विधायक आरिफ मसूद ने मुस्लिम स्वतंत्रता सेनानियों का नाम नहीं लिए जाने पर सवाल उठाए हैं। मसूद ने प्रधानमंत्री को ज्ञापन भेजकर कहा कि देश की आजादी की लड़ाई किसी एक समुदाय की नहीं, बल्कि सभी वर्गों के लोगों के संघर्ष और बलिदान का परिणाम थी। मसूद ने कहा कि स्वतंत्रता संग्राम की चर्चा के दौरान मुस्लिम सेनानियों का उल्लेख नहीं होना अफसोसजनक है। उन्होंने प्रधानमंत्री से इस मामले पर देश से माफी मांगने की मांग भी की है। ‘मुस्लिम स्वतंत्रता सेनानियों के नाम भी मिलेंगे’ अपने ज्ञापन में आरिफ मसूद ने कहा कि प्रधानमंत्री ने 15 अगस्त को लाल किले से स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों के योगदान का उल्लेख किया, लेकिन मुस्लिम स्वतंत्रता सेनानियों का जिक्र नहीं किया। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री यदि इंडिया गेट स्थित नेशनल वॉर मेमोरियल या अंडमान-निकोबार की सेलुलर जेल की दीवारों पर दर्ज नाम देखें तो उन्हें मुस्लिम स्वतंत्रता सेनानियों के नाम भी मिलेंगे। मसूद ने दावा किया कि 1757 से 1947 तक चले आजादी के संघर्ष से जुड़े दस्तावेजों में मुस्लिम स्वतंत्रता सेनानियों के योगदान के अनेक प्रमाण मिलते हैं। मजनू शाह फकीर और 1857 के विद्रोह का दिया उदाहरण विधायक ने अपने ज्ञापन में बंकिमचंद्र चटर्जी के उपन्यास ‘आनंदमठ’ में वर्णित फकीर एवं संन्यासी विद्रोह का उल्लेख किया। उन्होंने मजनू शाह फकीर और उनके साथियों को अंग्रेजों के खिलाफ संघर्ष करने वाले प्रमुख नामों में बताया। मसूद के अनुसार, मजनू शाह के बाद मूसा शाह, चिराग अली और नूरुल मोहम्मद ने भी इस आंदोलन को आगे बढ़ाया। उन्होंने 1857 के विद्रोह का जिक्र करते हुए अहमदुल्ला शाह मदरासी के योगदान का भी उल्लेख किया। मसूद ने कहा कि उन्होंने दिल्ली, पटना, फैजाबाद और कलकत्ता समेत कई क्षेत्रों में अंग्रेजों के खिलाफ आंदोलन को मजबूत करने में भूमिका निभाई थी। अंग्रेजों की कार्रवाई का भी किया जिक्र ज्ञापन में मसूद ने 1857 के दौरान मुस्लिम उलेमा और अन्य लोगों पर अंग्रेजों की कार्रवाई का भी उल्लेख किया। उन्होंने दावा किया कि विद्रोह को दबाने के दौरान बड़ी संख्या में लोगों को बिना मुकदमे के फांसी दी गई थी। उन्होंने अपने दावों के समर्थन में विभिन्न ऐतिहासिक पुस्तकों और लेखकों के संदर्भ दिए हैं। ‘आजादी के योगदान को किसी एक समुदाय तक सीमित न करें’ आरिफ मसूद ने कहा कि देश की आजादी के लिए अपना सर्वस्व न्योछावर करने वाले स्वतंत्रता सेनानियों के योगदान को किसी एक समुदाय तक सीमित करके नहीं देखा जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि भारत की स्वतंत्रता की लड़ाई में अलग-अलग धर्मों और समुदायों के लोगों ने योगदान दिया था। ऐसे में सभी स्वतंत्रता सेनानियों के बलिदान को समान सम्मान मिलना चाहिए। मसूद ने प्रधानमंत्री के भाषण को लेकर कहा कि मुस्लिम स्वतंत्रता सेनानियों का उल्लेख नहीं किए जाने से उन लोगों के योगदान की तौहीन हुई है, जिन्होंने देश की आजादी के लिए अपना सबकुछ कुर्बान कर दिया। उन्होंने प्रधानमंत्री से इस पर माफी मांगने की मांग की है।
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शिवपुरी मेडिकल कॉलेज से ग्वालियर ले जाते समय मरीज की मौत, बेटे ने लगाए इलाज में लापरवाही के आरोप

शिवपुरी: मध्य प्रदेश के शिवपुरी मेडिकल कॉलेज से ग्वालियर रेफर किए गए 50 वर्षीय हरिराम प्रजापति की रास्ते में मौत हो गई। पिता की मौत के बाद बेटे अरुण प्रजापति ने शव के पास बैठकर वीडियो बनाया और डॉक्टरों, नर्सिंग स्टाफ तथा एंबुलेंस व्यवस्था पर गंभीर आरोप लगाए। हालांकि, मेडिकल कॉलेज प्रबंधन ने मरीज को प्राथमिक उपचार देने के बाद रेफर किए जाने की बात कही है। मामले में लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र जांच के बाद ही स्थिति स्पष्ट हो सकेगी। पैरों में दर्द और मुंह खोलने में परेशानी मामला खनियाधाना तहसील के आहार बानपुर गांव का है। अरुण के मुताबिक, दोपहर में उनके पिता हरिराम की अचानक तबीयत बिगड़ गई। उनके पैरों में दर्द था और मुंह भी नहीं खुल पा रहा था। परिजन उन्हें पहले खनियाधाना के सरकारी अस्पताल लेकर पहुंचे। यहां कुछ घंटे उपचार के बाद डॉक्टरों ने उन्हें शिवपुरी मेडिकल कॉलेज रेफर कर दिया। बेटे का आरोप- डॉक्टर और स्टाफ ने ठीक से इलाज नहीं किया अरुण का आरोप है कि रात में शिवपुरी मेडिकल कॉलेज पहुंचने के बाद उनके पिता का उचित इलाज नहीं किया गया। उन्होंने दावा किया कि डॉक्टर और नर्सिंग स्टाफ मरीज के उपचार पर ध्यान देने के बजाय मोबाइल में गेम खेल रहे थे। अरुण के मुताबिक, जब उन्होंने पिता का इलाज करने के लिए डॉक्टरों और स्टाफ से कहा तो उन्हें ग्वालियर रेफर कर दिया गया। एंबुलेंस के लिए 4:30 बजे फोन, 6 बजे पहुंची अरुण ने एंबुलेंस व्यवस्था पर भी सवाल उठाए। उनके अनुसार, सुबह करीब 4:30 बजे एंबुलेंस के लिए फोन किया गया, लेकिन एंबुलेंस करीब 6 बजे पहुंची। इसके बाद हरिराम को ग्वालियर ले जाने की तैयारी की गई। बेटे का कहना है कि इस दौरान समय निकलता गया और पिता की हालत लगातार बिगड़ती गई। ड्राइवर से तेज चलाने को कहा, रास्ते में मौत अरुण के मुताबिक, ग्वालियर जाते समय उन्होंने एंबुलेंस चालक से वाहन तेज चलाने के लिए कहा, लेकिन चालक ने 50 से 60 किलोमीटर प्रति घंटे से अधिक गति से वाहन चलाने से इनकार कर दिया। ग्वालियर पहुंचने से पहले ही हरिराम की हालत और बिगड़ गई और रास्ते में उनकी मौत हो गई। अरुण के अनुसार, सुबह करीब 7:30 बजे ग्वालियर पहुंचने से पहले पिता ने दम तोड़ दिया। बेटे ने लगाए गंभीर आरोप अरुण ने वीडियो में आरोप लगाया कि उनके पिता की मौत डॉक्टरों, नर्सिंग स्टाफ और एंबुलेंस व्यवस्था की कथित लापरवाही के कारण हुई। उन्होंने पूरे मामले की जांच कर जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है। हालांकि, फिलहाल ये आरोप बेटे के बयान पर आधारित हैं और इनकी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। मेडिकल कॉलेज प्रबंधन ने क्या कहा? मेडिकल कॉलेज अधीक्षक आशुतोष चौरसी ने बताया कि मरीज रात करीब 3 बजे रेफर होकर मेडिकल कॉलेज पहुंचा था। उस समय मेडिकल कॉलेज के सभी बेड फुल थे। डॉक्टरों ने मरीज को प्राथमिक उपचार दिया और इसके बाद उसे ग्वालियर रेफर कर दिया गया। जांच के बाद स्पष्ट होगी स्थिति मामले में एक तरफ परिवार ने इलाज में लापरवाही और एंबुलेंस मिलने में देरी के आरोप लगाए हैं, वहीं मेडिकल कॉलेज प्रबंधन ने मरीज को प्राथमिक उपचार देने और बेड उपलब्ध नहीं होने के बाद ग्वालियर रेफर किए जाने की बात कही है। अब मेडिकल रिकॉर्ड, मरीज के अस्पताल पहुंचने का समय, दिए गए उपचार, रेफर करने का चिकित्सकीय कारण और एंबुलेंस कॉल व पहुंचने के समय की जांच से ही वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
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सिम्स के इंटर्न डॉक्टरों ने बढ़ाया स्टाइपेंड मांगा, विधायक अमर अग्रवाल से की मुलाकात

बिलासपुर: बिलासपुर के सिम्स में कार्यरत इंटर्न डॉक्टरों ने मासिक स्टाइपेंड बढ़ाने की मांग को लेकर शहर विधायक और वरिष्ठ भाजपा नेता अमर अग्रवाल से मुलाकात की। डॉक्टरों ने अपनी मांगों और समस्याओं से जुड़ा ज्ञापन विधायक को सौंपकर सरकार के सामने उनकी बात रखने का आग्रह किया। स्टाइपेंड बढ़ाने की मांग को लेकर हड़ताल प्रदेशभर में जूनियर डॉक्टर एसोसिएशन की ओर से इंटर्न डॉक्टरों के स्टाइपेंड में बढ़ोतरी की मांग की जा रही है। इसी कड़ी में सिम्स के इंटर्न डॉक्टर भी अपनी मांग को लेकर हड़ताल पर हैं। डॉक्टरों का कहना है कि वर्तमान स्टाइपेंड उनकी जिम्मेदारियों और रोजमर्रा की जरूरतों के अनुरूप नहीं है। इसलिए इसमें उचित बढ़ोतरी की जानी चाहिए। विधायक को सौंपा ज्ञापन इंटर्न डॉक्टरों के प्रतिनिधिमंडल ने विधायक अमर अग्रवाल से मुलाकात कर अपनी समस्याएं विस्तार से रखीं। उन्होंने स्टाइपेंड बढ़ाने समेत अन्य मांगों का ज्ञापन सौंपा और सरकार के स्तर पर मामले को उठाने का अनुरोध किया। स्वास्थ्य और वित्त मंत्री से बात करेंगे विधायक अमर अग्रवाल ने डॉक्टरों की मांग को गंभीरता से लेते हुए हरसंभव सहयोग का आश्वासन दिया। उन्होंने कहा कि वह स्वास्थ्य मंत्री और वित्त मंत्री से मुलाकात कर इंटर्न डॉक्टरों के स्टाइपेंड में बढ़ोतरी की मांग उनके सामने रखेंगे। विधायक ने कहा कि सरकार समाज के विभिन्न वर्गों की समस्याओं को प्राथमिकता से सुन रही है। उन्होंने डॉक्टरों और अन्य पेशेवरों के हितों के प्रति सरकार की संवेदनशीलता की बात कही।
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IND vs NZ

IND vs NZ 1st T20I: संजू सैमसन-नमन धीर का धमाका, भारत ने रचा रिकॉर्ड

भारत और न्यूजीलैंड (IND vs NZ) के बीच पहले T20 इंटरनेशनल मुकाबले में टीम इंडिया ने शानदार जीत दर्ज की। 226 रन के बड़े लक्ष्य का पीछा करते हुए भारतीय बल्लेबाजों ने ऐसा खेल दिखाया कि न्यूजीलैंड के गेंदबाज दबाव में आ गए। संजू सैमसन की तूफानी पारी और नमन धीर की आखिरी ओवरों में विस्फोटक बल्लेबाजी ने मैच का रुख भारत की ओर मोड़ दिया। मुकाबले में भारत ने 19.4 ओवर में 6 विकेट खोकर 230 रन बनाए और 4 विकेट से जीत हासिल की। इस जीत के साथ भारतीय टीम ने पांच मैचों की T20 सीरीज में 1-0 की बढ़त बना ली। 226 रन का लक्ष्य हासिल करना भारत के लिए T20 इंटरनेशनल क्रिकेट में नया रिकॉर्ड भी रहा। NZ vs IND: न्यूजीलैंड ने खड़ा किया 225 रन का बड़ा स्कोर पहले बल्लेबाजी करने उतरी न्यूजीलैंड की टीम ने निर्धारित 20 ओवर में 4 विकेट के नुकसान पर 225 रन बनाए। मेजबान टीम के बल्लेबाजों ने शुरुआत से ही भारतीय गेंदबाजों पर दबाव बनाने की कोशिश की। ग्लेन फिलिप्स ने शानदार बल्लेबाजी करते हुए 40 गेंदों पर नाबाद 82 रन बनाए। उनकी पारी में 8 चौके और 3 छक्के शामिल रहे। वहीं, फिन एलन ने 24 गेंदों पर 45 रन बनाकर टीम को तेज शुरुआत दी। बेवॉन जैकब्स ने भी 16 गेंदों पर 31 रन की अहम पारी खेली। न्यूजीलैंड के बल्लेबाजों ने तेजी से रन बनाए और भारत के सामने 226 रन का चुनौतीपूर्ण लक्ष्य रख दिया। उस समय लग रहा था कि भारतीय टीम के लिए इस स्कोर तक पहुंचना आसान नहीं होगा। Sanju Samson ने खेली तूफानी पारी लक्ष्य का पीछा करने उतरी टीम इंडिया को संजू सैमसन ने शानदार शुरुआत दिलाई। उन्होंने न्यूजीलैंड के गेंदबाजों के खिलाफ आक्रामक बल्लेबाजी करते हुए मैदान के चारों ओर शॉट लगाए। संजू ने 33 गेंदों पर 67 रन बनाए। उनकी पारी में 8 चौके और 4 छक्के शामिल रहे। उन्होंने केवल 23 गेंदों में अपना अर्धशतक पूरा कर भारतीय टीम को मजबूत स्थिति में पहुंचा दिया। दूसरी ओर, अभिषेक शर्मा ने भी तेजी से रन बनाए। उन्होंने 12 गेंदों पर 29 रन की पारी खेली। दोनों बल्लेबाजों की आक्रामक शुरुआत से भारत को बड़े लक्ष्य का पीछा करने में काफी मदद मिली। हालांकि, शुरुआती विकेट गिरने के बाद भारतीय टीम की रफ्तार कुछ धीमी हुई। न्यूजीलैंड ने वापसी करने की कोशिश की, लेकिन भारत के बल्लेबाजों ने मैच को हाथ से निकलने नहीं दिया। Shreyas Iyer ने संभाली जिम्मेदारी मध्यक्रम में विकेट गिरने के बाद श्रेयस अय्यर ने पारी को संभाला। उन्होंने 28 गेंदों पर 42 रन बनाकर टीम को लक्ष्य के करीब पहुंचाया। ऐसे मुकाबलों में सिर्फ तेजी से रन बनाना ही जरूरी नहीं होता, बल्कि सही समय पर पारी को संभालना भी अहम होता है। अय्यर ने यही भूमिका निभाई और भारत की उम्मीदों को बनाए रखा। इसके बाद नमन धीर ने आक्रामक अंदाज में बल्लेबाजी करते हुए न्यूजीलैंड की जीत की उम्मीदों पर पानी फेर दिया। Naman Dhir बने भारत की जीत के हीरो मैच के आखिरी ओवरों में नमन धीर की बल्लेबाजी ने भारतीय प्रशंसकों का उत्साह बढ़ा दिया। उन्होंने महज 15 गेंदों पर नाबाद 42 रन बनाए। उनकी पारी में 5 चौके और 2 छक्के शामिल रहे। नमन ने तेजी से रन बनाकर न्यूजीलैंड के गेंदबाजों पर दबाव बढ़ाया। भारतीय टीम को जब जीत के लिए तेज रन बनाने की जरूरत थी, तब उनकी आक्रामक बल्लेबाजी सबसे ज्यादा काम आई। भारत ने 19.4 ओवर में 230 रन बनाकर मुकाबला अपने नाम कर लिया। संजू सैमसन की शुरुआत और नमन धीर की शानदार फिनिशिंग इस ऐतिहासिक रनचेज की सबसे बड़ी वजह बनी। IND vs NZ 1st T20I Scorecard: एक नजर में पूरा मैच न्यूजीलैंड: 225/4 (20 ओवर) भारत: 230/6 (19.4 ओवर) नतीजा: भारत 4 विकेट से जीता। न्यूजीलैंड के टॉप स्कोरर: ग्लेन फिलिप्स – 82* रन भारत के टॉप स्कोरर: संजू सैमसन – 67 रन मैच के अहम बल्लेबाज: नमन धीर – 15 गेंदों पर नाबाद 42 रन भारत ने अपने नाम किया बड़ा रिकॉर्ड इस जीत की सबसे खास बात भारत का रिकॉर्ड रनचेज रहा। 226 रन जैसे बड़े लक्ष्य को हासिल करके टीम इंडिया ने T20 इंटरनेशनल क्रिकेट में अपना सबसे बड़ा सफल रनचेज दर्ज किया। संजू सैमसन ने तेज शुरुआत देकर टीम को मजबूत आधार दिया, श्रेयस अय्यर ने मध्यक्रम में पारी संभाली और नमन धीर ने अंतिम ओवरों में तेजी से रन बनाकर जीत सुनिश्चित की। इस प्रदर्शन ने एक बार फिर दिखाया कि भारतीय टीम बड़े लक्ष्य का पीछा करते हुए भी दबाव में संयम बनाए रख सकती है। दूसरे T20I में भी रहेगी जीत की उम्मीद पहले मुकाबले में जीत के बाद भारतीय टीम सीरीज में अपनी बढ़त मजबूत करना चाहेगी। वहीं, न्यूजीलैंड की टीम अगले मैच में वापसी करने के इरादे से मैदान पर उतरेगी। पहले मैच में दोनों टीमों के बल्लेबाजों ने शानदार प्रदर्शन किया। ऐसे में अगले मुकाबले में भी क्रिकेट प्रशंसकों को एक रोमांचक भिड़ंत देखने की उम्मीद रहेगी। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
India vs New Zealand

India vs New Zealand: आखिरी 3 ओवर में 29 रन की जरूरत, रोमांचक मोड़ पर मैच

भारत और न्यूजीलैंड (India vs New Zealand) के बीच T20 मुकाबला अब बेहद रोमांचक मोड़ पर पहुंच गया है। न्यूजीलैंड के 226 रन के लक्ष्य का पीछा करते हुए भारतीय टीम ने 5 विकेट के नुकसान पर 197 रन बना लिए हैं। अब जीत के लिए भारत को 18 गेंदों में 29 रन बनाने हैं। क्रीज पर श्रेयस अय्यर और नमन धीर मौजूद हैं। ऐसे में भारतीय फैंस की नजरें दोनों बल्लेबाजों पर टिकी हैं। मैच के इस मोड़ पर एक छोटी-सी गलती भी टीम की मुश्किल बढ़ा सकती है। वहीं, अगर भारतीय बल्लेबाजों ने तेजी से रन बनाए और विकेट बचाए रखे, तो जीत हासिल करने का मौका बना हुआ है। IND vs NZ: न्यूजीलैंड ने खड़ा किया 225 रन का स्कोर पहले बल्लेबाजी करते हुए न्यूजीलैंड ने 20 ओवर में 4 विकेट खोकर 225 रन बनाए। टीम की ओर से ग्लेन फिलिप्स ने शानदार बल्लेबाजी की और 40 गेंदों पर नाबाद 82 रन बनाए। उनकी आक्रामक पारी ने न्यूजीलैंड को बड़े स्कोर तक पहुंचाने में अहम भूमिका निभाई। कीवी बल्लेबाजों ने भारतीय गेंदबाजों पर लगातार दबाव बनाए रखा। बड़े शॉट खेलने के साथ-साथ उन्होंने रन गति को भी धीमा नहीं पड़ने दिया। इसी वजह से भारत के सामने 226 रन का चुनौतीपूर्ण लक्ष्य आया। India vs New Zealand: लक्ष्य का पीछा करते हुए भारत की स्थिति 226 रन के लक्ष्य का पीछा करने उतरी भारतीय टीम को तेजी से रन बनाने थे। टीम ने स्कोर आगे बढ़ाया, लेकिन पांच विकेट गिरने के बाद मुकाबला और दिलचस्प हो गया है। अब श्रेयस अय्यर और नमन धीर के सामने दोहरी चुनौती है। उन्हें एक तरफ जरूरी रन बनाने हैं, तो दूसरी तरफ विकेट भी बचाकर रखना है। दोनों के बीच अच्छी साझेदारी भारत को जीत के करीब पहुंचा सकती है। आखिरी 18 गेंदों का खेल होगा निर्णायक भारत को 18 गेंदों में 29 रन चाहिए। इसका मतलब है कि टीम को बचे हुए तीन ओवरों में लगातार रन बनाने होंगे। T20 क्रिकेट में यह लक्ष्य हासिल किया जा सकता है, लेकिन न्यूजीलैंड के गेंदबाज भी इस मौके को आसानी से हाथ से जाने नहीं देना चाहेंगे। अगर भारतीय बल्लेबाज शुरुआती गेंदों पर बाउंड्री लगाने में सफल रहते हैं, तो आखिरी ओवर का दबाव कम हो सकता है। वहीं, विकेट गिरने की स्थिति में भारत की मुश्किलें बढ़ सकती हैं। क्या Team India हासिल कर पाएगी जीत? मैच का रुख अब काफी हद तक श्रेयस अय्यर और नमन धीर की बल्लेबाजी पर निर्भर करेगा। भारतीय टीम को जीत के लिए बड़े शॉट खेलने के साथ समझदारी से स्ट्राइक भी बदलनी होगी। न्यूजीलैंड की टीम अपने स्कोर का बचाव करने की पूरी कोशिश करेगी। ऐसे में अंतिम तीन ओवर में गेंदबाजों और बल्लेबाजों के बीच कड़ा मुकाबला देखने को मिल सकता है। फिलहाल मुकाबला रोमांचक स्थिति में है और भारत के पास लक्ष्य हासिल करने का मौका मौजूद है। अब देखना होगा कि भारतीय बल्लेबाज आखिरी गेंदों में टीम को जीत दिला पाते हैं या न्यूजीलैंड मुकाबले पर कब्जा जमा लेता है। IND vs NZ Live Score: मैच की ताजा स्थिति हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!

दिल्ली-NCR में GRAP-1 लागू, प्रदूषण से निपटने के लिए 334 टीमें करेंगी निगरानी; 1 नवंबर से सख्ती

दिल्ली की वायु गुणवत्ता खराब श्रेणी में पहुंचने के बाद वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (CAQM) ने पूरे दिल्ली-NCR में ग्रेडेड रिस्पॉन्स एक्शन प्लान (GRAP) का पहला चरण लागू कर दिया है। इस बीच दिल्ली के पर्यावरण मंत्री मनजिंदर सिंह सिरसा ने दावा किया कि सरकार के प्रयासों और जनभागीदारी के कारण इस बार पिछले वर्षों की तुलना में GRAP-1 देर से लागू हुआ है। सिरसा के मुताबिक, सर्दियों में प्रदूषण से निपटने के लिए दिल्ली सरकार 11 सूत्रीय एक्शन प्लान पर काम कर रही है। इसमें करीब 30 एजेंसियां शामिल हैं। प्रदूषण नियंत्रण के लिए अल्पकालिक और दीर्घकालिक, दोनों तरह के उपाय किए जा रहे हैं। 334 टीमें करेंगी निगरानी, मॉनिटरिंग स्टेशन बढ़कर होंगे 60 पर्यावरण मंत्री ने बताया कि दिल्ली में वायु गुणवत्ता की निगरानी करने वाले स्टेशनों की संख्या 47 से बढ़ाकर 60 की जाएगी। नियमों का पालन सुनिश्चित करने के लिए 334 प्रवर्तन टीमें तैनात की जाएंगी। सिरसा ने दावा किया कि दिल्ली के प्रदूषण में स्थानीय स्रोतों की हिस्सेदारी करीब 30% है, जबकि आसपास के राज्यों और क्षेत्रों से 60 से 65% प्रदूषण आता है। ऐसे में प्रदूषण पर नियंत्रण के लिए पूरे NCR में समन्वित कार्रवाई जरूरी है। 1 नवंबर से प्रदूषण रोकने के लिए प्रस्तावित सख्त कदम सरकार की ओर से साझा की गई योजना के मुताबिक, प्रदूषण नियंत्रण के लिए कई उपाय किए जाने हैं। 1. वैध PUC प्रमाणपत्र के बिना नहीं मिलेगा ईंधन ‘नो पीयूसीसी, नो फ्यूल’ व्यवस्था के तहत वैध प्रदूषण नियंत्रण प्रमाणपत्र (PUC) के बिना वाहनों को पेट्रोल या डीजल नहीं देने का प्रावधान है। 2. बाहरी राज्यों के वाहनों पर प्रतिबंध योजना के अनुसार, 1 नवंबर से 31 जनवरी तक दिल्ली के बाहर पंजीकृत गैर-BS-VI वाहनों के प्रवेश पर प्रतिबंध लगाने का प्रस्ताव है। इलेक्ट्रिक और CNG वाहनों को इससे छूट देने की बात कही गई है। 3. सरकारी और निजी दफ्तरों में 50% वर्क फ्रॉम होम प्रदूषण कम करने के लिए सरकारी और निजी कार्यालयों के आधे कर्मचारियों से घर से काम कराने की योजना भी शामिल है। 4. सरकारी दफ्तरों के समय में बदलाव योजना के मुताबिक, नगर निगम (MCD) के कार्यालय सुबह 8:30 बजे से शाम 5 बजे तक और दिल्ली सरकार के कार्यालय सुबह 10 बजे से शाम 6:30 बजे तक संचालित किए जाने का प्रस्ताव है। 5. पार्किंग शुल्क दोगुना करने की योजना निजी वाहनों के इस्तेमाल को हतोत्साहित करने के लिए 1 नवंबर से पार्किंग शुल्क दोगुना करने की योजना है। मेट्रो पार्किंग को इससे छूट देने की बात कही गई है। 6. निर्माण और तोड़फोड़ के काम पर रोक धूल से होने वाले प्रदूषण को कम करने के लिए 1 नवंबर से 31 जनवरी तक धूल फैलाने वाले निर्माण और तोड़फोड़ कार्यों पर रोक लगाने का प्रावधान है। इसके अलावा, 10 दिसंबर से 20 जनवरी तक निर्माण गतिविधियों पर पूर्ण प्रतिबंध की योजना भी बताई गई है।

दिवाली से पहले दिल्ली में रात को भी होगी सफाई, CM रेखा गुप्ता ने अधिकारियों को दिए सख्त निर्देश

दीपावली और अन्य त्योहारों को देखते हुए दिल्ली के रिहायशी इलाकों और प्रमुख बाजारों में अब रात के समय भी सफाई कराई जाएगी। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने बुधवार को दिल्ली सचिवालय में उच्चस्तरीय बैठक कर राजधानी की सफाई व्यवस्था की समीक्षा की। उन्होंने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि सफाई में किसी भी स्तर पर लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि जहां भी कूड़े के ढेर लगे हैं, उन्हें तत्काल हटाया जाए और नियमित सफाई सुनिश्चित की जाए। उन्होंने अधिकारियों से सफाई व्यवस्था में सुधार के लिए तेजी से काम करने को कहा। कूड़ा नहीं उठने की शिकायतों पर CM नाराज मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने कहा कि दिल्ली के कई इलाकों से समय पर कूड़ा नहीं उठने और जगह-जगह गंदगी की शिकायतें मिल रही हैं। कुछ जोन में सफाई व्यवस्था को लेकर लापरवाही भी सामने आई है। उन्होंने कहा कि सफाई के प्रयासों के बावजूद जमीन पर अपेक्षित सुधार दिखाई नहीं दे रहा है। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि लोगों की शिकायतों पर तत्काल कार्रवाई की जाए। साथ ही, सफाई व्यवस्था में किए जा रहे सुधार सड़कों और बाजारों में स्पष्ट रूप से दिखाई देने चाहिए। जरूरत पड़ने पर अतिरिक्त कर्मचारी होंगे तैनात मुख्यमंत्री ने मेयर प्रवेश वाही और नगर निगम आयुक्त संजीव खिरवार को पूरी दिल्ली में सफाई अभियान तेज करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि जिन इलाकों में सफाई कर्मचारियों की कमी है, वहां अतिरिक्त स्टाफ लगाया जाए। जरूरत पड़ने पर रात में सफाई के लिए नए कर्मचारियों की नियुक्ति भी की जाए। रात में सफाई से दिन में नहीं होगी परेशानी मुख्यमंत्री के मुताबिक, बाजारों और रिहायशी कॉलोनियों में रात के समय सफाई कराने से दिन में लोगों की आवाजाही प्रभावित नहीं होगी। इससे त्योहारों के दौरान भीड़भाड़ वाले इलाकों में स्वच्छता बनाए रखने में मदद मिलेगी। बैठक में शहरी विकास मंत्री आशीष सूद, मेयर प्रवेश वाही, मुख्य सचिव राजीव वर्मा, नगर निगम आयुक्त संजीव खिरवार और अन्य वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे

छत्तीसगढ़ में 11 डॉक्टरों के तबादले, डॉ. संजय कुमार बने रायपुर जिला अस्पताल के प्रभारी सिविल सर्जन

छत्तीसगढ़ सरकार के लोक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग ने 11 डॉक्टरों का तबादला किया है। प्रशासनिक आधार पर चिकित्सा अधिकारियों और विशेषज्ञों की नई पदस्थापना के आदेश जारी किए गए हैं। सभी संबंधित अधिकारियों को तत्काल प्रभाव से नई जगह पर कार्यभार संभालने के निर्देश दिए गए हैं। मंत्रालय महानदी भवन से अवर सचिव दिव्या वैष्णव की ओर से जारी आदेश के तहत यह फेरबदल किया गया है। डॉ. संजय कुमार को मिली रायपुर जिला अस्पताल की जिम्मेदारी तबादला आदेश के अनुसार, ईएनटी विशेषज्ञ डॉ. संजय कुमार को जिला चिकित्सालय रायपुर (पंडरी) में प्रभारी सिविल सर्जन सह मुख्य अस्पताल अधीक्षक नियुक्त किया गया है। वहीं, जिला चिकित्सालय रायपुर में अब तक प्रभारी सिविल सर्जन सह मुख्य अस्पताल अधीक्षक की जिम्मेदारी संभाल रहे डॉ. भेनुज कुमार सिन्हा को स्वास्थ्य सेवाएं संचालनालय में प्रभारी उप संचालक के पद पर पदस्थ किया गया है। स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार के लिए प्रशासनिक फेरबदल विभाग के अनुसार, स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाने के उद्देश्य से यह प्रशासनिक बदलाव किया गया है। इसके तहत दूरस्थ और ग्रामीण क्षेत्रों के साथ शहरी अस्पतालों में भी स्वास्थ्य सुविधाओं को सुचारु बनाए रखने पर जोर दिया जा रहा है। तबादला आदेश में सभी संबंधित डॉक्टरों को बिना देरी किए अपने नए पदस्थापना स्थल पर कार्यभार ग्रहण करने के निर्देश दिए गए हैं।

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