राष्ट्रीय जनता दल (RJD) प्रमुख और बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव को देवघर चारा घोटाला (Fodder Scam) मामले में सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत मिली है। सोमवार को हुई सुनवाई में सर्वोच्च अदालत ने CBI की उस याचिका पर हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया, जिसमें झारखंड हाईकोर्ट द्वारा दी गई जमानत को रद्द करने की मांग की गई थी। अदालत के इस फैसले के बाद फिलहाल लालू यादव की जमानत बरकरार रहेगी।
यह फैसला ऐसे समय आया है जब चारा घोटाले से जुड़े मामलों को लेकर लंबे समय से कानूनी लड़ाई जारी है। सुप्रीम कोर्ट के ताजा रुख को लालू यादव के लिए बड़ी कानूनी राहत माना जा रहा है।
क्या है देवघर Fodder Scam Case?
देवघर ट्रेजरी से पशुपालन विभाग के नाम पर फर्जी बिलों के जरिए सरकारी खजाने से करीब 89 लाख रुपये की अवैध निकासी का मामला चर्चित चारा घोटाले का हिस्सा है। इस मामले में विशेष CBI अदालत ने लालू प्रसाद यादव को दोषी ठहराते हुए साढ़े तीन साल की सजा सुनाई थी। बाद में झारखंड हाईकोर्ट ने उनकी सजा पर रोक लगाते हुए उन्हें जमानत दे दी थी।
इसी आदेश को चुनौती देते हुए CBI सुप्रीम कोर्ट पहुंची थी और जमानत रद्द करने की मांग की थी।
Supreme Court में CBI की दलील
सुनवाई के दौरान CBI ने अदालत में कहा कि झारखंड हाईकोर्ट ने जमानत देते समय कानूनी पहलुओं का सही तरीके से मूल्यांकन नहीं किया। जांच एजेंसी का कहना था कि लालू यादव द्वारा सजा पूरी करने की अवधि और अलग-अलग मामलों की गणना को लेकर हाईकोर्ट का निष्कर्ष उचित नहीं था। इसी आधार पर CBI ने जमानत रद्द करने की अपील की।
कोर्ट ने क्यों नहीं दी CBI को राहत?
सुप्रीम कोर्ट ने CBI की दलीलों पर तत्काल हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया। अदालत ने फिलहाल हाईकोर्ट के आदेश में कोई बदलाव नहीं किया और लालू यादव की जमानत जारी रहने दी। हालांकि, कोर्ट ने यह भी संकेत दिया कि इतने पुराने मामलों का जल्द निपटारा होना जरूरी है।
इस फैसले के बाद लालू यादव को फिलहाल किसी नई कानूनी कार्रवाई का सामना नहीं करना पड़ेगा।
बचाव पक्ष ने क्या कहा?
लालू यादव की ओर से पेश वकीलों ने अदालत को बताया कि उनकी उम्र 70 वर्ष से अधिक है और वे कई स्वास्थ्य समस्याओं से जूझ रहे हैं। इसी आधार पर हाईकोर्ट ने उन्हें राहत दी थी। बचाव पक्ष ने कहा कि जमानत रद्द करने का कोई ठोस आधार नहीं है।
क्या है पूरा चारा घोटाला?
बिहार का बहुचर्चित चारा घोटाला देश के सबसे बड़े भ्रष्टाचार मामलों में शामिल है। इसमें पशुपालन विभाग के जरिए सरकारी खजाने से करोड़ों रुपये की फर्जी निकासी का आरोप है। इस मामले में कई अलग-अलग ट्रेजरी से जुड़ी FIR दर्ज हुई थीं और लालू प्रसाद यादव को कई मामलों में दोषी ठहराया जा चुका है।
हालांकि, अलग-अलग मामलों में कानूनी प्रक्रिया अब भी जारी है और कई याचिकाओं पर अदालतों में सुनवाई चल रही है।
बिहार की राजनीति पर क्या पड़ेगा असर?
सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले को सिर्फ कानूनी राहत ही नहीं, बल्कि राजनीतिक दृष्टि से भी अहम माना जा रहा है। बिहार में आगामी राजनीतिक गतिविधियों के बीच लालू यादव को मिली यह राहत राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के लिए सकारात्मक मानी जा रही है।
हालांकि, कानूनी लड़ाई अभी खत्म नहीं हुई है। चारा घोटाले से जुड़े अन्य मामलों में आगे भी सुनवाई जारी रहेगी और भविष्य में अदालत के फैसले इस मामले की दिशा तय करेंगे।
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