भारत में घरेलू रसोई गैस (LPG) की कीमतों में एक बार फिर बढ़ोतरी हुई है। सरकार ने 14.2 किलो वाले घरेलू LPG सिलेंडर के दाम में 60 रुपये की वृद्धि कर दी है। वहीं 19 किलो के कमर्शियल सिलेंडर की कीमत में लगभग 115 रुपये का इजाफा किया गया है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में गैस की कीमतों में तेजी और मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव को इस फैसले की बड़ी वजह माना जा रहा है।
Middle East tension का असर भारत तक
मिडिल ईस्ट में ईरान से जुड़े संघर्ष और क्षेत्रीय तनाव के कारण तेल और गैस सप्लाई पर दबाव बढ़ गया है। खासकर होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले तेल और गैस टैंकरों की आवाजाही प्रभावित होने की आशंका जताई जा रही है। यह समुद्री रास्ता दुनिया के तेल और गैस व्यापार के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है।
भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा खाड़ी देशों से आयात करता है। ऐसे में क्षेत्र में किसी भी तरह का संकट सीधे भारत के ऊर्जा बाजार को प्रभावित कर सकता है। इसी कारण LPG की अंतरराष्ट्रीय कीमतों में उतार-चढ़ाव का असर घरेलू बाजार पर भी दिखाई देने लगा है।
सरकार ने LPG production बढ़ाने के दिए निर्देश
संभावित गैस संकट को देखते हुए केंद्र सरकार ने तेल कंपनियों और रिफाइनरियों को LPG का उत्पादन बढ़ाने के निर्देश दिए हैं। इसके अलावा प्रोपेन और ब्यूटेन जैसी गैसों को पेट्रोकेमिकल उद्योग की बजाय घरेलू LPG उत्पादन में इस्तेमाल करने पर जोर दिया जा रहा है।
सरकार का लक्ष्य यह सुनिश्चित करना है कि अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों के बावजूद देश में रसोई गैस की सप्लाई प्रभावित न हो और आम लोगों को किसी तरह की कमी का सामना न करना पड़े।
आम परिवारों के बजट पर असर
LPG सिलेंडर के दाम बढ़ने से आम परिवारों के मासिक बजट पर असर पड़ना तय है। कई घरों में पहले से ही महंगाई को लेकर चिंता बनी हुई है, ऐसे में गैस की कीमतों में बढ़ोतरी लोगों के लिए अतिरिक्त बोझ बन सकती है।
हालांकि सरकार का कहना है कि वैकल्पिक देशों से आयात बढ़ाने और घरेलू उत्पादन मजबूत करने की कोशिश की जा रही है, ताकि भविष्य में गैस की उपलब्धता बनी रहे।
आगे क्या हो सकता है
ऊर्जा विशेषज्ञों का मानना है कि अगर मिडिल ईस्ट में तनाव लंबे समय तक बना रहता है, तो LPG के साथ-साथ पेट्रोल और डीजल की कीमतों पर भी असर पड़ सकता है। इसलिए आने वाले महीनों में ऊर्जा बाजार पर सभी की नजर बनी रहेगी।
कुल मिलाकर, मिडिल ईस्ट के हालात ने एक बार फिर यह दिखा दिया है कि वैश्विक घटनाओं का असर सीधे आम लोगों की रसोई तक पहुंच सकता है। ऐसे में सरकार और तेल कंपनियां सप्लाई को स्थिर बनाए रखने के लिए लगातार स्थिति पर नजर रखे हुए हैं।
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