डेरा सच्चा सौदा प्रमुख गुरमीत राम रहीम सिंह (Ram Rahim)को पत्रकार रामचंद्र छत्रपति हत्याकांड में बड़ी कानूनी राहत मिली है। पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट ने इस मामले में राम रहीम को बरी कर दिया है। करीब सात साल पहले सीबीआई की विशेष अदालत ने उन्हें हत्या की साजिश का दोषी मानते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई थी, जिसे अब हाईकोर्ट ने रद्द कर दिया है। हालांकि इस मामले में दोषी ठहराए गए तीन अन्य आरोपियों की सजा बरकरार रखी गई है।
2002 का बहुचर्चित मामला
यह मामला साल 2002 का है, जब हरियाणा के सिरसा में स्थानीय पत्रकार रामचंद्र छत्रपति पर गोलीबारी की गई थी। गंभीर रूप से घायल होने के बाद कुछ दिनों बाद उनकी मौत हो गई थी। छत्रपति अपने अखबार में डेरा सच्चा सौदा से जुड़े विवादित मुद्दों और आरोपों पर लगातार खबरें प्रकाशित कर रहे थे। उस समय यह घटना पूरे क्षेत्र में सनसनी का कारण बनी थी।
CBI जांच के बाद हुई थी उम्रकैद
मामले की जांच बाद में केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) को सौंपी गई। लंबी जांच और अदालती सुनवाई के बाद साल 2019 में सीबीआई की विशेष अदालत ने गुरमीत राम रहीम सिंह को हत्या की साजिश का दोषी करार देते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई थी। इसके साथ ही तीन अन्य आरोपियों को भी सजा दी गई थी।
हाईकोर्ट ने क्यों दिया राहत
Ram Rahim ने निचली अदालत के फैसले को पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट में चुनौती दी थी। लंबे समय तक चली सुनवाई के बाद हाईकोर्ट ने सबूतों और गवाहों के आधार पर फैसला सुनाते हुए उन्हें बरी कर दिया। अदालत ने कहा कि उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर उनकी दोषसिद्धि को बरकरार रखना उचित नहीं है। हालांकि बाकी तीन दोषियों के खिलाफ सजा को कायम रखा गया है।
जेल में ही रहेंगे राम रहीम
हालांकि इस मामले में राहत मिलने के बावजूद राम रहीम फिलहाल जेल से बाहर नहीं आएंगे। वे साध्वियों के यौन शोषण से जुड़े एक अन्य मामले में 20 साल की सजा काट रहे हैं। इसलिए कानूनी तौर पर उनकी रिहाई फिलहाल संभव नहीं है।
देशभर में फिर चर्चा में आया मामला
हाईकोर्ट के इस फैसले के बाद एक बार फिर पत्रकार रामचंद्र छत्रपति हत्याकांड चर्चा में आ गया है। लगभग दो दशक पुराने इस मामले का यह फैसला न्यायिक प्रक्रिया और सबूतों की अहमियत को एक बार फिर सामने लाता है।
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