आपका चैनल --
ताज़ा खबर
BREAKINGदेश-हरपलBihar Politics में घमासान, Bankipur पर Priyanka का BJP पर वार; Giriraj बोले- ज्यादा खुश न होंBREAKINGबिज़नेस6 साल बाद UPI पर फिर MDR की तैयारी! बड़े कारोबारियों से वसूली जा सकती है Payment FeeBREAKINGदेश-हरपलDelhi Politics में फिर हलचल, Kejriwal का PM House की ओर March; Police हुई AlertBREAKINGदेश-हरपलYogi Cabinet का बड़ा प्रस्ताव: मदरसों में 12वीं तक Education, Kamil-Fazil Degree पर रोकBREAKINGदेश-हरपलFSSAI ने डाबर इंडिया को भेजा नोटिस, 100% दावे के साथ शहद, घी, तेल आदि की बिक्री पर लगाई रोकBREAKINGवर्ल्ड न्यूज़IRAN में सेना का बढ़ा दबदबा! सुप्रीम लीडर खामेनेई ने राष्ट्रपति पजशकियान को दी सख्त चेतावनीBREAKINGदेश-हरपलTrisha Krishna Controversy ने पकड़ा Political रंग, Udhayanidhi Stalin को Tamil Nadu Police ने हिरासत में लियाBREAKINGदेश-हरपलबांकीपुर में Prashant Kishor की धमाकेदार जीत, JDU-BJP के बीच बढ़ी Political TensionBREAKINGदेश-हरपलBihar Politics में घमासान, Bankipur पर Priyanka का BJP पर वार; Giriraj बोले- ज्यादा खुश न होंBREAKINGबिज़नेस6 साल बाद UPI पर फिर MDR की तैयारी! बड़े कारोबारियों से वसूली जा सकती है Payment FeeBREAKINGदेश-हरपलDelhi Politics में फिर हलचल, Kejriwal का PM House की ओर March; Police हुई AlertBREAKINGदेश-हरपलYogi Cabinet का बड़ा प्रस्ताव: मदरसों में 12वीं तक Education, Kamil-Fazil Degree पर रोकBREAKINGदेश-हरपलFSSAI ने डाबर इंडिया को भेजा नोटिस, 100% दावे के साथ शहद, घी, तेल आदि की बिक्री पर लगाई रोकBREAKINGवर्ल्ड न्यूज़IRAN में सेना का बढ़ा दबदबा! सुप्रीम लीडर खामेनेई ने राष्ट्रपति पजशकियान को दी सख्त चेतावनीBREAKINGदेश-हरपलTrisha Krishna Controversy ने पकड़ा Political रंग, Udhayanidhi Stalin को Tamil Nadu Police ने हिरासत में लियाBREAKINGदेश-हरपलबांकीपुर में Prashant Kishor की धमाकेदार जीत, JDU-BJP के बीच बढ़ी Political Tension

IRAN में सेना का बढ़ा दबदबा! सुप्रीम लीडर खामेनेई ने राष्ट्रपति पजशकियान को दी सख्त चेतावनी

Table of Content

IRAN की राजनीति में एक बड़ा घटनाक्रम सामने आया है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई ने राष्ट्रपति मसूद पजशकियान को साफ संदेश दिया है कि देश की सरकार को सुरक्षा और सैन्य मामलों में सेना के फैसलों के अनुसार काम करना होगा।

रिपोर्ट में दावा किया गया है कि राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े किसी भी बड़े फैसले का अंतिम अधिकार अब वरिष्ठ सैन्य कमांडर अहमद वाहिदी के पास रहेगा। यानी सुरक्षा से जुड़े मामलों में सरकार का फैसला तभी लागू होगा, जब सेना की मंजूरी होगी।

सुरक्षा को लेकर बढ़ी चिंता

विशेषज्ञों का मानना है कि हाल के महीनों में ईरान के सामने बढ़ती सुरक्षा चुनौतियों और क्षेत्रीय तनाव को देखते हुए सेना की भूमिका और मजबूत की जा रही है। ऐसे समय में सरकार और सैन्य नेतृत्व के बीच बेहतर तालमेल बनाए रखने की कोशिश की जा रही है।

राष्ट्रपति के अधिकारों पर उठे सवाल

इस घटनाक्रम के बाद राजनीतिक हलकों में यह चर्चा भी तेज हो गई है कि क्या राष्ट्रपति के अधिकार सीमित किए जा रहे हैं। हालांकि, ईरानी सरकार की ओर से इस मामले पर अभी तक कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है।

मध्य पूर्व की राजनीति पर पड़ेगा असर

विशेषज्ञों का कहना है कि यदि सुरक्षा मामलों में सेना की भूमिका इसी तरह बढ़ती रही, तो इसका असर केवल ईरान की आंतरिक राजनीति ही नहीं बल्कि पूरे मध्य पूर्व की रणनीतिक स्थिति पर भी पड़ सकता है। आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर दुनिया की नजर बनी रहेगी।

हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!

Neha Pandey

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Editor's Picks

Priyanka Gandhi

Bihar Politics में घमासान, Bankipur पर Priyanka का BJP पर वार; Giriraj बोले- ज्यादा खुश न हों

बिहार की राजनीति में बांकीपुर विधानसभा सीट को लेकर सियासी बयानबाजी तेज हो गई है। सीट पर सामने आए राजनीतिक समीकरणों के बीच कांग्रेस नेता प्रियंका गांधी (Priyanka Gandhi) ने बीजेपी पर निशाना साधते हुए कहा कि लोग अब भाजपा से थक चुके हैं। प्रियंका के इस बयान के बाद केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह ने भी पलटवार किया और विपक्ष को ज्यादा खुश नहीं होने की नसीहत दे दी। बांकीपुर को लेकर नेताओं के बीच जुबानी जंग ने बिहार की राजनीति का माहौल और गर्म कर दिया है। एक तरफ विपक्ष इसे बीजेपी के खिलाफ जनता के बदलते मूड के तौर पर देख रहा है, तो दूसरी ओर बीजेपी नेता इन दावों को लेकर सावधानी बरतने की बात कह रहे हैं। प्रियंका गांधी ने BJP पर साधा निशाना प्रियंका गांधी ने बांकीपुर के राजनीतिक घटनाक्रम को लेकर बीजेपी पर तंज कसते हुए कहा कि जनता अब भाजपा से थक चुकी है। उनके बयान को विपक्ष की ओर से बीजेपी के खिलाफ माहौल बनने के दावे के तौर पर देखा जा रहा है। बांकीपुर जैसी चर्चित सीट पर इस तरह की राजनीतिक टिप्पणी इसलिए भी अहम मानी जा रही है, क्योंकि यहां का चुनावी मुकाबला लंबे समय से बिहार की राजनीति में चर्चा का विषय रहा है। कांग्रेस और विपक्षी दल लगातार सरकार और बीजेपी की नीतियों को लेकर सवाल उठाते रहे हैं। Giriraj Singh का Priyanka Gandhi को जवाब प्रियंका गांधी के बयान पर केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह ने पलटवार किया। उन्होंने विपक्ष को बांकीपुर के राजनीतिक समीकरणों को लेकर जल्दबाजी में उत्साहित नहीं होने की सलाह दी। गिरिराज सिंह का कहना है कि चुनावी राजनीति में किसी एक घटनाक्रम या बयान के आधार पर अंतिम निष्कर्ष निकालना ठीक नहीं है। उन्होंने विपक्ष को संकेत दिया कि अभी ज्यादा खुश होने की जरूरत नहीं है और तस्वीर आगे और साफ होगी। Bankipur में बढ़ी Political हलचल बांकीपुर की राजनीति में इस बयानबाजी के बाद हलचल बढ़ गई है। एक ओर प्रियंका गांधी का बयान कांग्रेस और विपक्ष के लिए उत्साह बढ़ाने वाला माना जा रहा है, वहीं गिरिराज सिंह की प्रतिक्रिया बीजेपी के आत्मविश्वास को दिखाती है। दरअसल, बिहार की राजनीति में हर चुनावी सीट का अपना महत्व है, लेकिन बांकीपुर पर होने वाली राजनीतिक गतिविधियों पर खास नजर रहती है। यही वजह है कि यहां से जुड़े नेताओं के बयान भी तेजी से चर्चा में आ जाते हैं। जनता के मूड पर टिकी निगाहें फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही है कि बांकीपुर में जनता का मूड किस ओर है। राजनीतिक दल अपने-अपने दावे कर रहे हैं, लेकिन अंतिम फैसला मतदाताओं के हाथ में होगा। प्रियंका गांधी के ‘लोग BJP से थक चुके हैं’ वाले बयान और गिरिराज सिंह के ‘ज्यादा खुश न हों’ वाले पलटवार ने बिहार की सियासत में नया राजनीतिक वार-पलटवार जरूर शुरू कर दिया है। आने वाले दिनों में इस सीट को लेकर और बयान सामने आने की संभावना है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
UPI

6 साल बाद UPI पर फिर MDR की तैयारी! बड़े कारोबारियों से वसूली जा सकती है Payment Fee

अगर आप रोजाना UPI से Payment करते हैं तो यह खबर आपके लिए काफी अहम है। देश में डिजिटल पेमेंट का सबसे लोकप्रिय माध्यम बन चुके UPI को लेकर सरकार ने एक ऐसा कदम उठाया है, जिसके बाद आने वाले समय में कुछ ट्रांजैक्शन पर MDR यानी Merchant Discount Rate लागू होने का रास्ता खुल सकता है। ध्यान देने वाली बात यह है कि अभी UPI पर कोई नई फीस लागू नहीं हुई है। वित्त मंत्रालय ने Payment and Settlement Systems Act, 2007 में बदलाव का प्रस्ताव रखा है। अगर इस प्रस्ताव को मंजूरी मिलती है तो सरकार के पास कुछ डिजिटल पेमेंट ट्रांजैक्शन पर शुल्क लगाने की व्यवस्था करने का विकल्प होगा। 2020 में खत्म कर दिया गया था MDR UPI को बढ़ावा देने के लिए सरकार ने साल 2020 में UPI के जरिए होने वाले Merchant Payments पर MDR को खत्म कर दिया था। इसका सीधा फायदा दुकानदारों और कारोबारियों को मिला और डिजिटल पेमेंट को तेजी से अपनाने में मदद मिली। धीरे-धीरे UPI छोटे किराना स्टोर से लेकर बड़े Shopping Platforms तक पहुंच गया। आज चाय की दुकान से लेकर बड़े मॉल तक QR Code से Payment करना आम बात हो चुकी है। लेकिन इस पूरी व्यवस्था के पीछे बैंक और Payment Companies लगातार टेक्नोलॉजी, सर्वर, नेटवर्क और साइबर सिक्योरिटी पर खर्च कर रहे हैं। इसी वजह से लंबे समय से UPI के लिए एक स्थायी Revenue Model की जरूरत पर चर्चा होती रही है। Payment Act में बदलाव क्यों जरूरी माना जा रहा है? वित्त मंत्रालय ने कानून के मौजूदा प्रावधानों में बदलाव का प्रस्ताव रखा है। इसका मकसद डिजिटल पेमेंट से जुड़े शुल्क के लिए मौजूदा कानूनी व्यवस्था को बदलना है। अगर संशोधन को मंजूरी मिल जाती है तो सरकार आगे यह तय कर सकती है कि किन पेमेंट सिस्टम, कारोबारियों या ट्रांजैक्शन पर MDR लगाया जाए। यानी अभी सरकार ने यह नहीं कहा है कि हर UPI Payment पर शुल्क लगेगा। फिलहाल मामला कानूनी बदलाव के प्रस्ताव तक सीमित है। क्या आम UPI Users को देना होगा पैसा? यही सवाल इस समय सबसे ज्यादा पूछा जा रहा है। फिलहाल उपलब्ध जानकारी के मुताबिक आम लोगों के सामान्य UPI Payments पर सीधे शुल्क लगाने की कोई अंतिम घोषणा नहीं हुई है। संभावना यह जताई जा रही है कि अगर MDR लागू किया जाता है तो इसका फोकस मुख्य रूप से बड़े कारोबारियों या कुछ खास तरह के Merchant Transactions पर हो सकता है। इसका मतलब है कि किसी दोस्त को पैसे भेजना, परिवार के सदस्य को Payment करना या रोजमर्रा की छोटी खरीदारी के लिए UPI इस्तेमाल करना फिलहाल शुल्क के दायरे में आने की पुष्टि नहीं हुई है। बड़े कारोबारियों पर क्यों हो सकता है असर? UPI का इस्तेमाल अब बड़े E-commerce Platforms, Food Delivery Apps, Travel Companies और दूसरे बड़े कारोबारों में भी बड़े पैमाने पर होता है। इन कंपनियों के जरिए रोजाना बड़ी संख्या में डिजिटल भुगतान किए जाते हैं। ऐसे में अगर सरकार बड़े कारोबारियों के कुछ UPI Transactions पर MDR लागू करती है तो सबसे पहले इसका असर इसी वर्ग पर पड़ सकता है। हालांकि, अंतिम नियम आने के बाद ही पता चलेगा कि किस Merchant को कितना MDR देना होगा और इसकी दर क्या होगी। छोटे दुकानदारों के लिए क्या बदलेगा? छोटे व्यापारियों के लिए UPI लंबे समय से एक आसान और कम लागत वाला Payment Option रहा है। इसलिए सरकार के सामने यह चुनौती भी होगी कि MDR की व्यवस्था बनाते समय छोटे दुकानदारों और छोटे कारोबारियों पर अतिरिक्त बोझ न पड़े। अगर भविष्य में शुल्क सिर्फ बड़े कारोबारियों और निर्धारित श्रेणी के Transactions तक सीमित रखा जाता है तो छोटे दुकानदारों पर इसका असर अपेक्षाकृत कम रह सकता है। UPI Users के लिए अभी क्या समझना जरूरी है? इस पूरे मामले को लेकर सोशल मीडिया पर ऐसी चर्चाएं भी हो सकती हैं कि अब हर UPI Payment पर Fee लगेगी। लेकिन फिलहाल ऐसा कहना सही नहीं होगा। अभी UPI Payment पर नई अनिवार्य फीस लागू नहीं हुई है। सरकार ने सिर्फ कानून में बदलाव का प्रस्ताव रखा है। आगे संसद की प्रक्रिया, सरकार के नियम और संबंधित Notification के बाद ही पूरी तस्वीर साफ होगी। UPI के Future के लिए बड़ा फैसला UPI ने भारत में Payment करने का तरीका ही बदल दिया है। छोटी रकम से लेकर लाखों रुपये के Business Transactions तक इसका इस्तेमाल हो रहा है। ऐसे में MDR की संभावित वापसी सिर्फ फीस से जुड़ा मुद्दा नहीं है, बल्कि भारत के पूरे Digital Payment Ecosystem के भविष्य से जुड़ा फैसला है। सरकार के सामने दो बड़ी जरूरतें हैं—एक तरफ आम लोगों के लिए UPI को आसान और किफायती बनाए रखना और दूसरी तरफ इस पूरे सिस्टम को चलाने वाले बैंकों और Payment Companies के लिए टिकाऊ Revenue Model तैयार करना। फिलहाल नजर सरकार के अगले कदम पर है। अगर प्रस्ताव आगे बढ़ता है तो आने वाले दिनों में यह साफ हो सकता है कि UPI पर MDR किन लोगों और किन Transactions पर लागू होगा। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
Kejriwal

Delhi Politics में फिर हलचल, Kejriwal का PM House की ओर March; Police हुई Alert

दिल्ली की राजनीति में एक बार फिर सियासी हलचल तेज हो गई है। आम आदमी पार्टी (AAP) के नेता अरविंद केजरीवाल ने प्रधानमंत्री आवास की ओर मार्च शुरू किया। केजरीवाल के इस कदम के बाद दिल्ली पुलिस भी अलर्ट नजर आई और उन्हें प्रधानमंत्री आवास की ओर आगे बढ़ने से रोकने की तैयारी शुरू कर दी गई। मार्च के दौरान बड़ी संख्या में पार्टी कार्यकर्ता और समर्थक उनके साथ नजर आए। जैसे-जैसे काफिला आगे बढ़ा, सुरक्षा व्यवस्था भी सख्त कर दी गई। पुलिस ने फिरोज शाह रोड के आसपास बैरिकेडिंग कर रास्ता रोकने की तैयारी की, ताकि प्रदर्शनकारियों को आगे बढ़ने से रोका जा सके। PM House की ओर मार्च से बढ़ा राजनीतिक तनाव Kejriwal के प्रधानमंत्री आवास की ओर मार्च ने राजधानी में राजनीतिक तापमान बढ़ा दिया है। आम आदमी पार्टी का कहना है कि वह अपनी मांगों और मुद्दों को लेकर सरकार के सामने आवाज उठा रही है। वहीं, पुलिस की ओर से सुरक्षा व्यवस्था को देखते हुए प्रदर्शन को नियंत्रित करने की कोशिश की जा रही है। फिरोज शाह रोड पर पुलिस की मौजूदगी बढ़ने के साथ ही प्रदर्शनकारियों और सुरक्षाकर्मियों के बीच तनाव की स्थिति बनने लगी। पुलिस ने एहतियात के तौर पर बैरिकेड्स लगाए और मार्च के संभावित रास्ते पर सुरक्षा बढ़ाई। दिल्ली में सुरक्षा व्यवस्था सख्त PM House की ओर मार्च को देखते हुए दिल्ली पुलिस ने सुरक्षा इंतजाम कड़े किए हैं। संवेदनशील इलाकों में अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया है। अधिकारियों की कोशिश है कि प्रदर्शन के दौरान किसी तरह की अव्यवस्था न हो और यातायात भी प्रभावित न हो। केजरीवाल के इस मार्च को लेकर आम आदमी पार्टी और बीजेपी के बीच सियासी बयानबाजी तेज होने की संभावना है। राजधानी की राजनीति में यह घटनाक्रम आने वाले समय में बड़ा राजनीतिक मुद्दा बन सकता है। समर्थकों में दिखा उत्साह मार्च के दौरान AAP कार्यकर्ताओं में खासा उत्साह देखने को मिला। समर्थक नारेबाजी करते हुए केजरीवाल के साथ आगे बढ़ते नजर आए। पार्टी नेताओं का कहना है कि जनता से जुड़े मुद्दों को लेकर उनकी लड़ाई जारी रहेगी। फिलहाल सबकी नजर इस बात पर है कि पुलिस के बैरिकेड्स के बाद मार्च किस दिशा में जाता है और क्या अरविंद केजरीवाल प्रधानमंत्री आवास तक पहुंच पाते हैं या पुलिस उन्हें रास्ते में ही रोक देती है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
मदरसों

Yogi Cabinet का बड़ा प्रस्ताव: मदरसों में 12वीं तक Education, Kamil-Fazil Degree पर रोक

उत्तर प्रदेश में मदरसा शिक्षा को लेकर योगी आदित्यनाथ सरकार एक बड़ा बदलाव करने की तैयारी में है। सरकार UP Madrasa Education से जुड़े कानून में संशोधन का प्रस्ताव लाने जा रही है। अगर यह प्रस्ताव मंजूर होता है तो मदरसा बोर्ड के तहत चलने वाले संस्थानों में पढ़ाई 12वीं कक्षा तक ही होगी। इसके बाद Kamil और Fazil Degree देने की व्यवस्था खत्म हो सकती है। सरकार के इस प्रस्ताव ने मदरसा शिक्षा से जुड़े छात्रों, शिक्षकों और संस्थानों के बीच चर्चा तेज कर दी है। खासतौर पर उन विद्यार्थियों के लिए यह बदलाव महत्वपूर्ण है, जो 12वीं के बाद मदरसा बोर्ड से कामिल या फाजिल की पढ़ाई करने की योजना बना रहे हैं। 12वीं तक सीमित होगी मदरसा बोर्ड की पढ़ाई प्रस्तावित संशोधन के तहत मदरसा बोर्ड की जिम्मेदारी मुख्य रूप से स्कूली शिक्षा तक सीमित किए जाने की बात है। यानी मदरसों में शुरुआती कक्षाओं से लेकर हाईस्कूल और इंटरमीडिएट यानी 12वीं तक पढ़ाई जारी रह सकेगी। लेकिन 12वीं के बाद मिलने वाली उच्च शिक्षा की डिग्री मदरसा बोर्ड के माध्यम से नहीं दी जाएगी। छात्रों को आगे की पढ़ाई के लिए विश्वविद्यालय या अन्य मान्यता प्राप्त उच्च शिक्षण संस्थानों में जाना होगा। Kamil और Fazil Course पर क्या होगा असर? इस प्रस्ताव का सबसे अहम हिस्सा Kamil और Fazil courses से जुड़ा है। मौजूदा व्यवस्था में इन पाठ्यक्रमों को उच्च शिक्षा के स्तर से जोड़ा जाता रहा है। नए प्रावधान लागू होने पर मदरसा बोर्ड इन स्तरों की डिग्री जारी नहीं कर सकेगा। इसका मतलब साफ है कि 12वीं के बाद अगर कोई छात्र उच्च शिक्षा हासिल करना चाहता है तो उसे संबंधित यूनिवर्सिटी या मान्यता प्राप्त संस्थान का विकल्प चुनना होगा। Supreme Court के फैसले के बाद क्यों आया बदलाव? मदरसा शिक्षा में प्रस्तावित संशोधन को सुप्रीम कोर्ट के मदरसा कानून से जुड़े फैसले की पृष्ठभूमि में भी देखा जा रहा है। अदालत की सुनवाई के दौरान मदरसा बोर्ड की शक्तियों और उच्च शिक्षा की डिग्री से जुड़े अधिकारों पर महत्वपूर्ण सवाल सामने आए थे। इसके बाद राज्य सरकार की ओर से कानून में बदलाव की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा रही है। प्रस्तावित संशोधन का उद्देश्य मदरसा बोर्ड की भूमिका को स्कूली शिक्षा तक सीमित करने और उच्च शिक्षा को विश्वविद्यालयी व्यवस्था से जोड़ने की दिशा में कदम माना जा रहा है। छात्रों पर क्या पड़ेगा असर? अगर यह संशोधन लागू हो जाता है तो मदरसा बोर्ड से 12वीं तक पढ़ाई करने वाले छात्रों के लिए आगे की राह बदल जाएगी। उन्हें कामिल या फाजिल की डिग्री के लिए मदरसा बोर्ड पर निर्भर रहने के बजाय संबंधित विश्वविद्यालय या उच्च शिक्षण संस्थान की व्यवस्था में जाना होगा। वहीं, मौजूदा छात्रों और पहले से पढ़ाई कर रहे विद्यार्थियों को लेकर सरकार किस तरह की व्यवस्था लागू करेगी, यह अंतिम नियम सामने आने के बाद ही स्पष्ट होगा। अभी प्रस्ताव है, अंतिम फैसला बाकी यहां यह समझना जरूरी है कि फिलहाल इसे सरकार का प्रस्तावित संशोधन बताया जा रहा है। जब तक कैबिनेट से अंतिम मंजूरी और उसके बाद जरूरी कानूनी प्रक्रिया पूरी नहीं होती, तब तक इसे लागू नियम नहीं माना जा सकता। अब सबकी नजर योगी कैबिनेट के फैसले पर है। यदि प्रस्ताव को मंजूरी मिलती है तो उत्तर प्रदेश में मदरसा शिक्षा का मौजूदा ढांचा बदल जाएगा और 12वीं के बाद की पढ़ाई पूरी तरह उच्च शिक्षा संस्थानों की व्यवस्था से जुड़ सकती है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
FSSAI

FSSAI ने डाबर इंडिया को भेजा नोटिस, 100% दावे के साथ शहद, घी, तेल आदि की बिक्री पर लगाई रोक

खाद्य उत्पादों की पैकेजिंग और विज्ञापन में किए जाने वाले दावों को लेकर FSSAI ने बड़ी कार्रवाई की है। खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण ने Dabur India को नोटिस जारी करते हुए उसके कुछ खाद्य उत्पादों की बिक्री पर रोक लगाने का निर्देश दिया है। मामला खास तौर पर उत्पादों की पैकेजिंग और ऑनलाइन लिस्टिंग में इस्तेमाल किए जा रहे ‘100%’ दावों से जुड़ा है। FSSAI की कार्रवाई के बाद शहद, घी, तेल, नारियल पानी और एप्पल साइडर विनेगर जैसे उत्पादों को लेकर चर्चा तेज हो गई है। हालांकि, इस कार्रवाई का मतलब यह नहीं है कि डाबर के सभी संबंधित उत्पादों को मिलावटी या स्वास्थ्य के लिए असुरक्षित घोषित कर दिया गया है। नियामक की मुख्य आपत्ति लेबलिंग और विज्ञापन में किए गए दावों को लेकर है। किन उत्पादों पर FSSAI की नजर? रिपोर्ट्स के मुताबिक, FSSAI ने डाबर के कई खाद्य उत्पादों पर इस्तेमाल किए जा रहे ‘100%’ जैसे दावों पर आपत्ति जताई है। इनमें Honey, Apple Cider Vinegar, Virgin Coconut Oil, Sesame Oil, Cow Ghee, Coconut Water और Coconut Milk जैसे उत्पाद शामिल हैं। नियामक ने कंपनी की वेबसाइट और उत्पादों की ऑनलाइन लिस्टिंग में इस्तेमाल की गई भाषा की भी जांच की। कुछ उत्पादों के साथ ‘100% Natural’, ‘100% Pure’, ‘100% Purity Guaranteed’ और ‘100% Organic’ जैसे दावे पाए गए। FSSAI का मानना है कि इस तरह के दावे उपभोक्ताओं के मन में उत्पाद की पूरी तरह शुद्ध, प्राकृतिक या जैविक होने की धारणा बना सकते हैं। इसलिए खाद्य उत्पादों के प्रचार और लेबलिंग में ऐसी भाषा के इस्तेमाल को लेकर नियमों का पालन जरूरी है। Organic Products के दावों पर भी सवाल इस मामले में केवल ‘100%’ दावे ही नहीं, बल्कि कुछ ऑर्गेनिक उत्पादों की लेबलिंग भी जांच के दायरे में आई है। रिपोर्ट्स के अनुसार, Dabur Organic Honey और Dabur Himalayan Organic Apple Cider Vinegar पर इस्तेमाल किए गए ‘Jaivik Bharat’ लोगो को लेकर भी नियामक ने सवाल उठाए हैं। FSSAI ने संबंधित ऑर्गेनिक दावों और उनके लिए जरूरी प्रमाणन की स्थिति को लेकर कंपनी से स्पष्टीकरण मांगा है। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि उपभोक्ताओं को पैकेजिंग पर वही जानकारी दी जाए, जिसे नियमों के तहत प्रमाणित किया जा सकता है। पहले भी दी गई थी चेतावनी FSSAI की मौजूदा कार्रवाई अचानक नहीं हुई है। इससे पहले भी खाद्य कंपनियों को ‘100%’ जैसे दावों के इस्तेमाल को लेकर सावधानी बरतने के निर्देश दिए गए थे। मई 2025 में FSSAI ने खाद्य कारोबारियों को ऐसे दावों से बचने की सलाह दी थी, क्योंकि ‘100%’ जैसी भाषा किसी खाद्य उत्पाद की पूर्ण गुणवत्ता या श्रेष्ठता की गारंटी के तौर पर समझी जा सकती है। डाबर के मामले में भी नियामक की ओर से पहले सुधारात्मक कदम उठाने के लिए कहा गया था। रिपोर्ट्स के अनुसार, कंपनी की ओर से की गई कार्रवाई को संतोषजनक नहीं माने जाने के बाद बिक्री रोकने का निर्देश दिया गया। 15 दिन में Action Taken Report मांगी FSSAI ने डाबर से इस मामले में 15 दिनों के भीतर Action Taken Report (ATR) जमा करने को कहा है। यानी कंपनी को यह जानकारी देनी होगी कि नियामक की आपत्तियों के बाद उसने क्या सुधारात्मक कदम उठाए हैं। यह कदम खाद्य कंपनियों के लिए एक महत्वपूर्ण संदेश भी माना जा रहा है कि उत्पाद की पैकेजिंग, वेबसाइट और विज्ञापन में इस्तेमाल किए जाने वाले दावों को लेकर नियमों का सख्ती से पालन करना होगा। क्या Dabur के उत्पाद मिलावटी हैं? इस मामले में सबसे महत्वपूर्ण बात यही है कि FSSAI की कार्रवाई को उत्पादों के मिलावटी या असुरक्षित होने की घोषणा के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। मौजूदा विवाद मुख्य रूप से ‘100%’ दावों, लेबलिंग और ऑर्गेनिक प्रमाणन से जुड़े पहलुओं पर है। इसलिए सोशल मीडिया या अन्य जगहों पर इस कार्रवाई को सीधे तौर पर ‘डाबर के उत्पाद मिलावटी पाए गए’ कहना भ्रामक हो सकता है। कंपनियों के लिए बढ़ी चुनौती FSSAI की यह कार्रवाई खाद्य उद्योग में लेबलिंग और मार्केटिंग के बढ़ते नियामकीय दबाव को भी दिखाती है। आज उपभोक्ता किसी उत्पाद को खरीदने से पहले पैकेजिंग पर लिखे शब्दों, ऑनलाइन डिस्क्रिप्शन और विज्ञापनों पर काफी भरोसा करते हैं। ऐसे में ‘Pure’, ‘Natural’, ‘Organic’ या ‘100%’ जैसे शब्दों का इस्तेमाल कंपनियों के लिए सिर्फ मार्केटिंग का हिस्सा नहीं, बल्कि नियमों के दायरे में आने वाला विषय भी है। डाबर मामले में अब नजर कंपनी की अगली कार्रवाई और FSSAI को दी जाने वाली रिपोर्ट पर रहेगी। अगर कंपनी को अपने उत्पादों की पैकेजिंग या ऑनलाइन दावों में बदलाव करना पड़ता है, तो इसका असर बाजार में मौजूद उत्पादों की लेबलिंग पर भी दिखाई दे सकता है। फिलहाल FSSAI का संदेश स्पष्ट है—खाद्य उत्पादों को बेचते समय कंपनियों को ऐसे दावों से बचना होगा, जो उपभोक्ताओं को उत्पाद की गुणवत्ता या शुद्धता के बारे में गलत या बढ़ा-चढ़ाकर धारणा दे सकते हैं। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!

About Me

देशहरपल सिर्फ खबरों का मंच नहीं, बल्कि आपकी आवाज़ को सामने लाने का एक सशक्त माध्यम भी है। यहां आपको ताज़ातरीन खबरों के साथ-साथ नौकरी, शिक्षा, और नए भारत की बदलती आर्थिक तस्वीर पर उपयोगी और भरोसेमंद जानकारी मिलेगी।

Phone: +91 9406783569, +91 755 484 8829
Email: support@deshharpal.com
Address : A-23 Sakshi Bunglow Trilanga Near Aura Mall Bhopal M.P

Recent Posts

  • All Post
  • Breaking News
  • Education
  • More News
  • Web Story
  • एंटरटेनमेंट
  • देश-हरपल
  • धर्म-कर्म
  • प्रदेश
  • बिज़नेस
  • वर्ल्ड न्यूज़
  • वीडियो
  • स्पोर्ट्स
    •   Back
    • एक्सक्लूसिव
    • Editorial
    •   Back
    • IPL 2026
    • T20 वर्ल्ड कप
    • FIFA 2026
    •   Back
    • सोच-विचार
    • हेल्थ
    • ट्रैवल
    • कल्चर
    • एनवायरनमेंट
    • Impact Feature
    •   Back
    • राशिफल
    • पंचांग
    • पर्व-त्यौहार
    • पूजा-पाठ
    • चैत्र नवरात्रि 2025
    •   Back
    • मध्य प्रदेश
    • छत्तीसगढ़
    •   Back
    • टीवी
    • वेब-सीरीज
    • फिल्म रिव्यू
    • बॉलीवुड
    •   Back
    • लाइफस्टाइल
    •   Back
    • स्टॉक-मार्केट

© 2023 Deshharpal. All Rights Reserved.