झारखंड में सरकारी नौकरी की तैयारी कर रहे छात्रों का गुस्सा एक बार फिर सड़कों पर दिखाई दे रहा है। JPSC और JSSC की परीक्षाओं में कथित गड़बड़ियों को लेकर रांची में चल रहे छात्र आंदोलन के बीच प्रदर्शनकारी नेता देवेंद्र नाथ महतो ने अपना Water Fast तोड़ दिया। करीब चार दिन तक बिना अन्न और जल के अनशन पर रहने के बाद सोनम वांगचुक से Live बातचीत हुई। इसके बाद उनकी अपील मानते हुए महतो ने पानी ग्रहण किया।
हालांकि, Water Fast खत्म होने का मतलब आंदोलन खत्म होना नहीं है। छात्रों की मांगें अभी भी बरकरार हैं और देवेंद्र महतो भी परीक्षा प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं की जांच और कार्रवाई की मांग पर कायम हैं।
Sonam Wangchuk से बातचीत के बाद बदला फैसला
देवेंद्र महतो के लगातार जल उपवास को लेकर समर्थकों और छात्रों में चिंता बढ़ रही थी। इसी बीच सोनम वांगचुक ने उनसे वीडियो कॉल के जरिए बातचीत की। बातचीत के दौरान वांगचुक ने महतो से अपनी सेहत का ध्यान रखने और Water Fast समाप्त करने की अपील की।
सोनम वांगचुक की बात सुनने के बाद देवेंद्र महतो ने पानी पीकर अपना जल उपवास समाप्त किया। इस दौरान आंदोलन स्थल पर मौजूद छात्रों और समर्थकों ने भी राहत की सांस ली।
लेकिन महतो ने साफ किया कि छात्रों की लड़ाई अभी खत्म नहीं हुई है। उनका विरोध JPSC-JSSC परीक्षा प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं और भर्ती व्यवस्था में पारदर्शिता की मांग को लेकर जारी है।
JPSC परीक्षा को लेकर क्यों नाराज हैं छात्र?
रांची में चल रहे इस आंदोलन की मुख्य वजह 14वीं JPSC सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा को लेकर उठे सवाल हैं। प्रदर्शनकारी छात्रों का आरोप है कि परीक्षा प्रक्रिया में गड़बड़ियां हुई हैं और पूरे मामले की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।
छात्रों की मांग है कि अगर जांच में अनियमितताएं सामने आती हैं तो जिम्मेदार लोगों पर सख्त कार्रवाई की जाए। इसके साथ ही परीक्षा प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने और अभ्यर्थियों के हित में स्पष्ट व्यवस्था तैयार करने की मांग भी उठ रही है।
JSSC की विभिन्न भर्ती परीक्षाओं को लेकर भी छात्रों के बीच नाराजगी है। यही वजह है कि आंदोलन अब केवल एक परीक्षा तक सीमित नहीं रह गया है।
CBI जांच की मांग ने बढ़ाई हलचल
प्रदर्शनकारी छात्र मामले की उच्चस्तरीय जांच की मांग कर रहे हैं। आंदोलन से जुड़े कई लोगों की ओर से CBI जैसी केंद्रीय एजेंसी से जांच कराने की मांग भी उठाई गई है।
छात्रों का कहना है कि सरकारी नौकरियों के लिए होने वाली परीक्षाओं में पारदर्शिता बेहद जरूरी है। युवाओं का भविष्य इन परीक्षाओं पर निर्भर करता है, इसलिए किसी भी तरह की कथित गड़बड़ी को गंभीरता से लिया जाना चाहिए।
CID जांच भी बनी चर्चा का विषय
इस मामले में राज्य की जांच एजेंसी CID की कार्रवाई भी सामने आई है। रिपोर्टों के अनुसार, जांच के दौरान पूछताछ और छापेमारी जैसी कार्रवाई की गई है। मामले से जुड़े कुछ लोगों के खिलाफ कार्रवाई की जानकारी भी सामने आई है।
हालांकि, किसी व्यक्ति की जिम्मेदारी या दोष तय होना जांच और कानूनी प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही संभव है। फिलहाल छात्रों की मांग है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच हो और सच्चाई सामने लाई जाए।
कौन हैं देवेंद्र नाथ महतो?
देवेंद्र नाथ महतो झारखंड के छात्र आंदोलनों में सक्रिय नाम रहे हैं। भर्ती परीक्षाओं, छात्रों की समस्याओं और रोजगार से जुड़े मुद्दों को लेकर वह पहले भी आवाज उठाते रहे हैं।
मौजूदा JPSC-JSSC आंदोलन में भी उनकी भूमिका प्रमुख रही है। लंबे Water Fast के कारण वह इस प्रदर्शन का एक प्रमुख चेहरा बन गए थे। सोनम वांगचुक से उनकी बातचीत के बाद जल उपवास खत्म करने का फैसला भी आंदोलन के बीच काफी चर्चा में रहा।
रांची में जारी है छात्रों का आंदोलन
रांची में छात्रों का प्रदर्शन लगातार जारी है। प्रदर्शनकारी अपनी मांगों को लेकर सरकार से ठोस कदम उठाने की उम्मीद कर रहे हैं। उनका कहना है कि भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता और समय पर नियुक्ति युवाओं के लिए सबसे अहम मुद्दों में से है।
देवेंद्र महतो के Water Fast खत्म करने के बाद अब आंदोलन की अगली रणनीति पर सबकी नजर है। एक तरफ महतो ने स्वास्थ्य को देखते हुए जल उपवास खत्म किया है, वहीं दूसरी तरफ छात्रों की मुख्य मांगें अभी भी जस की तस हैं।
आगे क्या होगा?
फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही है कि सरकार छात्रों की मांगों पर क्या कदम उठाती है। अगर जांच को लेकर कोई ठोस फैसला होता है तो आंदोलन की दिशा बदल सकती है। वहीं, मांगों पर संतोषजनक कार्रवाई नहीं होने पर प्रदर्शन आगे भी जारी रहने की संभावना है।
एक बात फिलहाल साफ है—देवेंद्र महतो का Water Fast भले ही खत्म हो गया हो, लेकिन JPSC-JSSC को लेकर छात्रों की नाराजगी अभी खत्म नहीं हुई है। अब नजर सरकार के अगले कदम और जांच की दिशा पर रहेगी।
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