खंडवा। मध्य प्रदेश सरकार द्वारा कृषि उपज मंडियों में मंडी शुल्क 1 प्रतिशत से बढ़ाकर 1.5 प्रतिशत किए जाने के फैसले का विरोध तेज हो गया है। मंगलवार को खंडवा में व्यापार एवं उद्योग कांग्रेस के पदाधिकारियों और व्यापारियों ने पुरानी अनाज मंडी कार्यालय पहुंचकर मंडी सचिव को ज्ञापन सौंपा और शुल्क में की गई 0.5 प्रतिशत बढ़ोतरी वापस लेने की मांग की।
व्यापारियों ने बढ़ती लागत पर जताई चिंता
ज्ञापन में व्यापारियों ने कहा कि मंडी शुल्क बढ़ने से व्यापार की लागत में इजाफा होगा, जिसका सीधा असर किसानों और आम उपभोक्ताओं पर पड़ सकता है। उनका कहना है कि बढ़ा हुआ शुल्क मध्य प्रदेश की मंडियों को पड़ोसी राज्यों की मंडियों की तुलना में प्रतिस्पर्धा में कमजोर कर सकता है, जिससे कृषि व्यापार प्रभावित होने की आशंका है।
पुरानी व्यवस्था बहाल करने की मांग
व्यापार एवं उद्योग कांग्रेस के खंडवा शहर अध्यक्ष संदीप सोनी ने कहा कि संगठन व्यापार और उद्योग से जुड़े मुद्दों को शासन-प्रशासन के सामने मजबूती से उठाएगा। उन्होंने बताया कि यह संगठन का पहला सामूहिक कार्यक्रम था, जिसमें बड़ी संख्या में व्यापारियों ने भाग लिया।
उन्होंने सरकार से मंडी शुल्क में की गई वृद्धि को वापस लेकर पहले की व्यवस्था बहाल करने की मांग की।
कांग्रेस नेताओं ने दिया समर्थन
कार्यक्रम में शहर कांग्रेस अध्यक्ष प्रतिभा रघुवंशी और नेता प्रतिपक्ष मुल्लू राठौर भी मौजूद रहे। दोनों नेताओं ने व्यापारियों की मांग का समर्थन करते हुए कहा कि सरकार को ऐसे निर्णय लेने से बचना चाहिए, जिनका नकारात्मक प्रभाव व्यापार, कृषि और आम नागरिकों पर पड़े।
इस दौरान कार्यकर्ताओं ने “देश का कल्चर-एग्रीकल्चर” जैसे नारे लगाकर भी अपना विरोध दर्ज कराया।
ज्ञापन में रखी गई प्रमुख मांग
व्यापारियों ने सरकार से मांग की कि मंडी शुल्क में की गई 0.5 प्रतिशत की बढ़ोतरी तत्काल वापस ली जाए और किसानों, व्यापारियों तथा उपभोक्ताओं के हितों को ध्यान में रखते हुए पहले वाली शुल्क व्यवस्था दोबारा लागू की जाए।
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