संसद के मानसून सत्र में शुक्रवार को एक बार फिर राजनीतिक माहौल गर्म रहा। लोकसभा (Lok Sabha) और राज्यसभा (Rajya Sabha) की कार्यवाही शुरू होते ही विपक्ष ने कई अहम मुद्दों को लेकर सरकार के खिलाफ जोरदार विरोध प्रदर्शन किया। हंगामे के बीच कांग्रेस अध्यक्ष और राज्यसभा में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से सदन में आकर बयान देने की मांग की। उनका कहना था कि देश से जुड़े महत्वपूर्ण मामलों पर प्रधानमंत्री को संसद के भीतर जवाब देना चाहिए।
लगातार नारेबाजी और विरोध के कारण दोनों सदनों की कार्यवाही सुचारु रूप से नहीं चल सकी। आखिरकार पीठासीन अधिकारियों ने लोकसभा और राज्यसभा की कार्यवाही दोपहर 12 बजे तक स्थगित कर दी।
Kharge ने PM Modi से क्या कहा?
मल्लिकार्जुन खड़गे ने कहा कि संसद लोकतंत्र का सबसे बड़ा मंच है और यहां उठाए गए सवालों का जवाब भी यहीं मिलना चाहिए। उन्होंने कहा कि यदि प्रधानमंत्री स्वयं सदन में आकर बयान देंगे, तभी उनकी बातों को आधिकारिक रूप से स्वीकार किया जा सकेगा। खड़गे ने सरकार से विपक्ष के सवालों का सीधे जवाब देने की अपील भी की।
विपक्ष ने सरकार को किन मुद्दों पर घेरा?
सदन की कार्यवाही शुरू होते ही विपक्षी सांसदों ने कई राष्ट्रीय और जनहित से जुड़े मुद्दों को लेकर सरकार के खिलाफ नारेबाजी की। विपक्ष का आरोप था कि सरकार महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा से बच रही है और संसद में स्पष्ट जवाब नहीं दे रही। विपक्ष ने मांग की कि सभी अहम मुद्दों पर विस्तृत चर्चा कराई जाए और प्रधानमंत्री स्वयं सदन में अपना पक्ष रखें।
हंगामे के कारण नहीं चल सकी कार्यवाही
विपक्ष के लगातार विरोध और शोर-शराबे के चलते लोकसभा और राज्यसभा में सामान्य कामकाज प्रभावित हुआ। कई बार सदन को व्यवस्थित करने की कोशिश की गई, लेकिन स्थिति सामान्य नहीं हो सकी। इसके बाद दोनों सदनों की कार्यवाही दोपहर 12 बजे तक के लिए स्थगित कर दी गई।
सरकार और विपक्ष के बीच बढ़ा राजनीतिक टकराव
मानसून सत्र के दौरान सरकार और विपक्ष के बीच लगातार टकराव देखने को मिल रहा है। विपक्ष जवाबदेही की मांग कर रहा है, जबकि सरकार का कहना है कि वह संसद में चर्चा के लिए तैयार है। हालांकि, लगातार हो रहे हंगामे के कारण कई महत्वपूर्ण विधायी और संसदीय कार्य प्रभावित हो रहे हैं।
अब आगे क्या होगा?
अब सभी की नजर दोपहर 12 बजे के बाद शुरू होने वाली संसद की कार्यवाही पर रहेगी। यदि सरकार और विपक्ष के बीच सहमति बनती है तो सदन की कार्यवाही सामान्य हो सकती है। वहीं, यदि गतिरोध जारी रहा तो संसद में एक बार फिर हंगामा देखने को मिल सकता है।

