100 सालों बाद एक दुर्लभ संयोग बनने जा रहा है जब चंद्र ग्रहण और पितृपक्ष एक साथ पड़ेंगे। जानें किस राशि पर इसका शुभ-अशुभ असर होगा, सूतक काल कब से शुरू होगा और किन बातों का ध्यान रखना ज़रूरी है।
भोपाल, देश हरपल।
साल 2025 में एक अद्भुत खगोलीय घटना घटने जा रही है। लगभग 100 वर्षों बाद ऐसा संयोग बन रहा है जब पितृपक्ष और चंद्र ग्रहण (Lunar Eclipse) एक साथ पड़ेंगे। ज्योतिषाचार्यों के अनुसार यह संयोग मानव जीवन, धार्मिक परंपराओं और विभिन्न राशियों पर गहरा प्रभाव डाल सकता है।
कब लगेगा चंद्र ग्रहण और सूतक काल?
- चंद्र ग्रहण 2025 की तिथि: 7 सितंबर 2025 (रविवार)
- ग्रहण का समय: रात 8:12 बजे से 11:45 बजे तक
- सूतक काल: ग्रहण से 9 घंटे पूर्व यानी सुबह 11:12 बजे से ही सूतक काल मान्य होगा।
- इस दौरान धार्मिक अनुष्ठान, भोजन और पूजा-पाठ वर्जित होंगे।
चंद्र ग्रहण और पितृपक्ष का दुर्लभ संयोग
पितृपक्ष हिंदू धर्म में पितरों को तर्पण और श्राद्ध अर्पित करने का विशेष काल होता है। ज्योतिष के जानकार बताते हैं कि इस बार चंद्र ग्रहण और पितृपक्ष का एक साथ आना ऊर्जा संतुलन और कर्मफल के प्रबल होने का संकेत है।
किन राशियों के लिए रहेगा शुभ
- मेष (Aries): करियर में नया अवसर मिलेगा, नौकरीपेशा जातकों को प्रमोशन की संभावना।
- मिथुन (Gemini): व्यापार में लाभ, परिवार में सुख-शांति।
- सिंह (Leo): समाज में मान-सम्मान और धन वृद्धि।
- धनु (Sagittarius): विदेश यात्रा और शिक्षा में सफलता।
- कुंभ (Aquarius): लंबे समय से रुका काम पूरा होगा, धनलाभ संभव।
किन राशियों के लिए रहेगा अशुभ
- वृषभ (Taurus): स्वास्थ्य समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है।
- कर्क (Cancer): पारिवारिक विवाद और मानसिक तनाव की आशंका।
- कन्या (Virgo): आर्थिक नुकसान और कार्यक्षेत्र में बाधा।
- वृश्चिक (Scorpio): रिश्तों में तनाव और भावनात्मक उथल-पुथल।
- मकर (Capricorn): अनचाहे खर्च और कानूनी परेशानियां।
- मीन (Pisces): काम में अड़चन और आत्मविश्वास की कमी।
ग्रहण के समय बरतें ये सावधानियां
- ग्रहण काल में भोजन और जल का सेवन न करें।
- गर्भवती महिलाओं को विशेष सावधानी रखनी चाहिए।
- ग्रहण समाप्त होने के बाद स्नान करके भगवान का पूजन करें।
- पितरों के लिए तर्पण करते समय शुद्धता का ध्यान रखें।


