नवरात्रि के आठवें दिन मां महागौरी की पूजा की जाती है। उनका स्वरूप शांति, पवित्रता और करुणा का प्रतीक माना जाता है। कई परिवारों में इस दिन महाष्टमी का व्रत, कन्या पूजन और विशेष पूजा की जाती है। हालांकि, कन्या पूजन का दिन परिवार और क्षेत्र की परंपरा के अनुसार अलग भी हो सकता है।
मां महागौरी की पौराणिक कथा
पौराणिक मान्यता के अनुसार, देवी पार्वती ने भगवान शिव को पति रूप में पाने के लिए कठोर तपस्या की। तपस्या के कारण उनका शरीर काला पड़ गया था। भगवान शिव की कृपा से उन्हें गौर वर्ण प्राप्त हुआ और वे महागौरी कहलायीं।
मां का स्वरूप और महत्त्व
- मां को श्वेत वस्त्रों में दर्शाया जाता है।
- उनका वाहन वृषभ यानी बैल है।
- उनकी पूजा शांति, करुणा और मन की पवित्रता से जोड़ी जाती है।
पूजा विधि
- सुबह स्नान कर मां की पूजा करें।
- सफेद फूल, फल, अक्षत और धूप-दीप अर्पित करें।
- मां महागौरी के मंत्र का जाप करें।
- परंपरा के अनुसार कन्या पूजन करें और कन्याओं को भोजन कराएं।
मंत्र: ॐ देवी महागौर्यै नमः।
भोग: मां को नारियल अर्पित करने की परंपरा प्रचलित है।
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