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NEET Exam News Hindi: क्या फिर से देना होगा एग्जाम? जानें सभी जरूरी जवाब

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NEET UG परीक्षा को लेकर आई रद्द या स्थगित होने की खबर ने लाखों मेडिकल स्टूडेंट्स को परेशान कर दिया है। हर कोई यही जानना चाहता है कि अब आगे क्या होगा—क्या फिर से फॉर्म भरना होगा, नई परीक्षा कब होगी और तैयारी पर क्या असर पड़ेगा। आइए इसे आसान और साफ भाषा में समझते हैं।

NEET Exam क्यों हुआ Cancel / Postpone?

NEET जैसी बड़ी मेडिकल एंट्रेंस परीक्षा कई वजहों से प्रभावित हो सकती है, जैसे:

  • पेपर लीक या सुरक्षा से जुड़ी आशंका
  • परीक्षा केंद्रों पर तकनीकी समस्या
  • प्रशासनिक या कानूनी आदेश
  • किसी गंभीर स्थिति या जांच प्रक्रिया का असर

इन सभी मामलों में अंतिम फैसला NTA (National Testing Agency) द्वारा लिया जाता है।

क्या दोबारा करना होगा NEET Application?

यह सबसे बड़ा सवाल है।

अगर परीक्षा सिर्फ postpone (स्थगित) हुई है:

  • आपका पहले वाला आवेदन पूरी तरह valid रहता है
  • दोबारा फॉर्म भरने की जरूरत नहीं होती

अगर परीक्षा पूरी तरह cancel और re-conduct होती है:

  • ज्यादातर मामलों में पुराने आवेदन ही मान्य रहते हैं
  • नया नोटिफिकेशन आने पर ही स्थिति साफ होती है

NEET Exam New Date कब आएगी?

  • नई तारीख NTA की official वेबसाइट पर जारी की जाएगी
  • छात्रों को SMS और email के जरिए भी सूचना मिल सकती है
  • कभी-कभी कोर्ट या जांच के बाद डेट फाइनल होती है

क्या New Admit Card मिलेगा?

हाँ, अगर परीक्षा दोबारा होती है:

  • नया admit card जारी किया जाएगा
  • उसमें नई exam date, center और timing अपडेट होंगे

क्या Exam Fee फिर से देनी होगी?

  • नहीं
  • पहले से जमा की गई फीस आगे की परीक्षा के लिए valid रहती है

छात्रों को अब क्या करना चाहिए?

यह समय घबराने का नहीं है, बल्कि संभलकर तैयारी करने का है:

  • सिर्फ official NTA website पर भरोसा करें
  • अफवाहों और सोशल मीडिया खबरों से दूर रहें
  • अपना admit card और registration details सुरक्षित रखें
  • नई notification का इंतजार करें

क्या Syllabus या Exam Pattern बदलेगा?

  • आमतौर पर NEET का syllabus और pattern वही रहता है
  • बदलाव तभी होता है जब official notification में साफ लिखा हो

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Yukta

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कैंसर की दवाओं की कीमतों में बड़ा अंतर: ₹538 का इंजेक्शन बाजार में ₹1,500 तक, एक ही दवा की MRP में 16 गुना तक फर्क

रायपुर। कैंसर जैसी गंभीर बीमारी से जूझ रहे मरीजों और उनके परिजनों पर इलाज के खर्च का भारी बोझ पड़ रहा है। दवाओं की कीमतों में बड़े अंतर ने इस परेशानी को और बढ़ा दिया है। एक ही दवा अलग-अलग कंपनियों के ब्रांड में अलग कीमत पर बेची जा रही है। वहीं, सरकारी खरीद दर और बाजार में मिलने वाली कीमत के बीच भी काफी अंतर सामने आया है। कैंसर की दवाओं की कीमतों को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने भी सवाल उठाया है। कोर्ट ने टिप्पणी करते हुए पूछा कि 2,700 रुपये की दवा 27,000 रुपये की कैसे हो सकती है? इसी मुद्दे पर दैनिक भास्कर की पड़ताल में दवाओं की एमआरपी, बाजार में उपलब्ध कीमत और सरकारी खरीद दरों के बीच बड़ा अंतर सामने आया है। ₹538 का इंजेक्शन बाजार में 1,500 रुपये तक पड़ताल के मुताबिक, एज़ासिटिडाइन (Azacitidine) 100 एमजी इंजेक्शन सरकारी खरीद में 538 रुपये में उपलब्ध कराया जा रहा है, जबकि बाजार में इसकी कीमत करीब 1,200 से 1,500 रुपये तक बताई गई है। एक ही दवा के अलग-अलग ब्रांड की एमआरपी और वास्तविक बिक्री कीमत में भी बड़ा अंतर मिला। एक ब्रांड के इंजेक्शन की एमआरपी 8,888 रुपये दर्ज है, लेकिन कुछ मेडिकल स्टोर पर यह 1,890 रुपये में मिल रहा है। दूसरे ब्रांड की एमआरपी 6,337 रुपये है, जबकि इसकी कीमत 1,100 रुपये बताई गई। वहीं, तीसरे ब्रांड की एमआरपी 5,964.70 रुपये होने के बावजूद यह 800 रुपये में बिक रहा है। इन आंकड़ों से पता चलता है कि केवल एमआरपी देखकर मरीज के लिए दवा की वास्तविक कीमत का अंदाजा लगाना मुश्किल हो सकता है। 10 में से 8 दवाओं की कीमतों में बड़ा अंतर दैनिक भास्कर की पड़ताल में कैंसर की 10 आमतौर पर इस्तेमाल होने वाली दवाओं की कीमतों की सरकारी खरीद दरों से तुलना की गई। इसके लिए रायपुर के थोक दवा बाजार, मेडिकल स्टोर, निजी अस्पतालों की फार्मेसी, एम्स की फार्मेसी और सरकारी खरीद के आंकड़े जुटाए गए। कैंसर विशेषज्ञों की मदद से इन कीमतों का विश्लेषण भी किया गया। रिपोर्ट के अनुसार, 10 में से 2 दवाओं की कीमतों में सरकारी खरीद दर की तुलना में 12 से 16 गुना तक अंतर मिला। वहीं, 6 अन्य दवाओं की कीमतें 2 से 8 गुना तक अधिक पाई गईं। पड़ताल में यह भी सामने आया कि कई दवाओं की एमआरपी काफी ऊंची दर्ज है। ऐसे में मेडिकल स्टोर पर मरीजों को वास्तविक कीमत और उपलब्ध विकल्पों की जानकारी न होने पर अधिक खर्च करना पड़ सकता है। सरकारी अस्पताल में मुफ्त दवा, बिल आयुष्मान कार्ड से रायपुर के डॉ. भीमराव अंबेडकर अस्पताल स्थित कैंसर रिसर्च इंस्टीट्यूट की फार्मेसी में सरकारी दरों पर खरीदी गई दवाओं पर 12 प्रतिशत टैक्स लगाए जाने की जानकारी भी पड़ताल में सामने आई। रिपोर्ट के अनुसार, यहां मरीजों को ये दवाएं मुफ्त दी जाती हैं, जबकि इनका बिल आयुष्मान कार्ड के माध्यम से समायोजित किया जाता है। मरीजों के लिए कीमतों में पारदर्शिता जरूरी कैंसर का इलाज अक्सर लंबे समय तक चलता है और मरीजों को कई महंगी दवाओं की जरूरत पड़ सकती है। ऐसे में सरकारी खरीद दर, दवा की एमआरपी और वास्तविक बिक्री मूल्य के बीच बड़ा अंतर मरीजों के लिए आर्थिक परेशानी बढ़ा सकता है। दवाओं की कीमतों में पारदर्शिता, अलग-अलग ब्रांड की कीमतों की स्पष्ट जानकारी और निर्धारित दरों की निगरानी से मरीजों को राहत मिल सकती है। हालांकि, किसी दवा की वास्तविक कीमत उसके ब्रांड, पैकिंग, उपलब्धता और खरीद की शर्तों के आधार पर अलग हो सकती है।

बिलासपुर एयरपोर्ट को 4C श्रेणी में अपग्रेड करने पर हाईकोर्ट सख्त, सरकार से 3 सप्ताह में मांगा जवाब

बिलासपुर। छत्तीसगढ़ के बिलासा देवी केवट एयरपोर्ट के रनवे विस्तार और हवाई सुविधाओं में बढ़ोतरी को लेकर हाईकोर्ट ने राज्य सरकार और एयरपोर्ट अथॉरिटी ऑफ इंडिया (AAI) से जवाब मांगा है। मंगलवार को हुई सुनवाई में चीफ जस्टिस कृष्ण राम महापात्र और जस्टिस संतोष शर्मा की डिवीजन बेंच ने राज्य सरकार को निर्देश दिया कि बिलासपुर एयरपोर्ट को 4C श्रेणी में अपग्रेड करने के लिए अब तक किए गए प्रयासों की विस्तृत जानकारी तीन सप्ताह के भीतर शपथ पत्र के जरिए पेश की जाए। कोर्ट ने AAI से भी एयरपोर्ट के प्रबंधन, संचालन और विकास की जिम्मेदारी संभालने के संबंध में अब तक उठाए गए कदमों की जानकारी मांगी है। मामले की अगली सुनवाई 23 नवंबर को होगी। पत्राचार से नहीं चलेगा काम, ठोस कदम उठाने की जरूरत सुनवाई के दौरान चीफ जस्टिस ने कहा कि बिलासपुर एयरपोर्ट और हवाई सुविधाओं के विस्तार के लिए केंद्र और राज्य सरकार से ठोस कदमों की अपेक्षा है। केवल आपस में पत्राचार करते हुए समय नहीं गंवाया जाना चाहिए। राज्य सरकार ने कोर्ट को बताया कि बिलासपुर एयरपोर्ट वर्तमान में 3C श्रेणी में एटीआर विमानों के संचालन के लिए उपयुक्त है। साथ ही, इसे 4C श्रेणी में अपग्रेड करने के लिए राज्य सरकार तैयार है। AAI के जवाब पर याचिकाकर्ताओं ने उठाए सवाल पिछली सुनवाई 29 सितंबर को हुई थी। उस दौरान हाईकोर्ट ने AAI के वरिष्ठ और सक्षम अधिकारी को शपथ पत्र दाखिल कर यह स्पष्ट करने का निर्देश दिया था कि बिलासपुर एयरपोर्ट के प्रबंधन, विकास और संचालन की जिम्मेदारी AAI को सौंपने के राज्य सरकार के प्रस्ताव पर क्या कार्रवाई की गई है। मंगलवार को याचिकाकर्ताओं ने कोर्ट को बताया कि AAI की ओर से दाखिल शपथ पत्र ऐसे वरिष्ठ और सक्षम अधिकारी का नहीं है, जैसा कोर्ट ने निर्देश दिया था। याचिकाकर्ताओं के मुताबिक, दस्तावेजों से यह भी सामने आया है कि राज्य सरकार बिलासपुर के साथ अंबिकापुर और जगदलपुर एयरपोर्ट को भी AAI को सौंपने पर विचार कर रही है। जमीन और सुविधाओं की जानकारी मांगने में उलझा मामला याचिकाकर्ताओं ने बताया कि राज्य सरकार के प्रस्ताव पर AAI ने स्पष्ट सहमति या असहमति देने के बजाय एयरपोर्ट की उपलब्ध जमीन, कुल क्षेत्रफल, खसरा-वार विवरण, स्वामित्व और मौजूदा सुविधाओं से जुड़ी जानकारी मांगी है। उनका कहना है कि इस तरह के पत्राचार से एयरपोर्ट को समयबद्ध तरीके से AAI को सौंपने की प्रक्रिया आगे बढ़ती नहीं दिख रही है। बिलासपुर का रनवे अंबिकापुर और जगदलपुर से छोटा याचिकाकर्ताओं के अनुसार, बिलासपुर एयरपोर्ट का रनवे करीब 1,495 मीटर लंबा है। वहीं, अंबिकापुर एयरपोर्ट का रनवे 1,900 मीटर और जगदलपुर का रनवे 1,707 मीटर लंबा बताया गया है। याचिकाकर्ताओं ने दलील दी कि गर्मियों में तापमान बढ़ने के कारण विमान की क्षमता के अनुसार सभी यात्रियों को ले जाना संभव नहीं हो पाता। उनके मुताबिक, 72 यात्रियों की क्षमता वाले विमान में यात्रियों की संख्या घटाकर करीब 52 करनी पड़ती है। इसी वजह से अब तक कोई निजी विमानन कंपनी बिलासपुर से अपना संचालन शुरू नहीं कर पाई है। रनवे विस्तार और नए ATC टावर के प्रस्ताव अटके याचिकाकर्ताओं ने कोर्ट को बताया कि रनवे विस्तार के लिए 63 करोड़ रुपये और नए एयर ट्रैफिक कंट्रोल (ATC) टावर के निर्माण के लिए 41 करोड़ रुपये का प्रस्ताव बिलासपुर एयरपोर्ट प्रबंधन की ओर से मंत्रालय भेजा जा चुका है। हालांकि, इन कार्यों को AAI करेगी या राज्य सरकार, इसे लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं है। इसी असमंजस के कारण काम आगे नहीं बढ़ पा रहा है। तीन सप्ताह में शपथ पत्र, 23 नवंबर को अगली सुनवाई हाईकोर्ट ने विमानन विभाग के सचिव को निर्देश दिया है कि बिलासपुर एयरपोर्ट को 4C श्रेणी में अपग्रेड करने के लिए अब तक किए गए प्रयासों का विस्तृत ब्यौरा तीन सप्ताह के भीतर शपथ पत्र के माध्यम से पेश किया जाए। AAI को भी मामले की अद्यतन स्थिति बताते हुए शपथ पत्र दाखिल करना होगा। अब अगली सुनवाई 23 नवंबर को होगी। इस मामले में केंद्र और राज्य सरकार की ओर से उठाए जाने वाले कदमों पर एयरपोर्ट के विस्तार और बेहतर हवाई कनेक्टिविटी की दिशा तय हो सकती है।

छत्तीसगढ़ में बस किराया 75% तक बढ़ा, रायपुर-बिलासपुर सफर के लिए अब देने होंगे ₹228

छत्तीसगढ़ में यात्री बसों का किराया करीब एक साल के भीतर दूसरी बार बढ़ा दिया गया है। परिवहन विभाग ने 8 अक्टूबर को नई किराया दरों की अधिसूचना जारी की है। इस बार सबसे ज्यादा असर साधारण बसों में सफर करने वाले यात्रियों पर पड़ेगा। साधारण बसों का प्रति किलोमीटर किराया 1 रुपये से बढ़ाकर 1.75 रुपये कर दिया गया है। यानी प्रति किलोमीटर दर में 75 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है। इसके अलावा शुरुआती 5 किलोमीटर का किराया भी 8 रुपये से बढ़ाकर 10 रुपये कर दिया गया है। नई दरें साधारण बसों के साथ डीलक्स, लग्जरी और एसी स्लीपर बसों पर भी लागू होंगी। रायपुर से बिलासपुर और जगदलपुर का सफर होगा महंगा नई किराया दरों के कारण प्रदेश के प्रमुख शहरों के बीच यात्रा करने वाले यात्रियों को अब अधिक पैसे खर्च करने होंगे। इस बढ़ोतरी का असर रोजाना और नियमित रूप से बसों में यात्रा करने वाले लोगों के मासिक खर्च पर भी पड़ सकता है। पिछले साल किराया घटने से मिली राहत अब खत्म साल 2025 में सरकार ने साधारण बसों का शुरुआती किराया 7.50 रुपये से बढ़ाकर 8 रुपये किया था। हालांकि, उस समय प्रति किलोमीटर किराया 1.25 रुपये से घटाकर 1 रुपये कर दिया गया था। अब नई दरों में प्रति किलोमीटर किराया 1 रुपये से बढ़ाकर 1.75 रुपये कर दिया गया है। इससे पिछले साल प्रति किलोमीटर दर में कटौती से यात्रियों को मिली राहत खत्म हो गई है और उन पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ेगा। प्रदेश में 13 हजार से ज्यादा यात्री बसें छत्तीसगढ़ में 13 हजार से अधिक यात्री बसें पंजीकृत हैं। इनमें करीब 5 हजार साधारण बसें हैं। बाकी बसें स्लीपर, एसी, सेमी स्लीपर, डीलक्स और लग्जरी श्रेणियों में आती हैं। साधारण बसों का इस्तेमाल मुख्य रूप से मध्यम और कम आय वर्ग के यात्री करते हैं। ऐसे में किराया बढ़ने का सीधा असर इन यात्रियों के परिवहन खर्च पर पड़ने की संभावना है। बस ऑपरेटरों की मांग के बाद बढ़ाया गया किराया बस ऑपरेटर पिछले कई दिनों से किराया बढ़ाने की मांग कर रहे थे। उनका कहना था कि ईंधन, टायर, कल-पुर्जों और वाहनों के रखरखाव का खर्च बढ़ने के कारण पुरानी दरों पर बसों का संचालन मुश्किल हो रहा है। ऑपरेटरों ने मांग पूरी नहीं होने पर हड़ताल करने और बसों का संचालन बंद करने की चेतावनी भी दी थी। इसके बाद किराया बढ़ाने का प्रस्ताव शासन को भेजा गया, जिस पर परिवहन विभाग ने नई दरों की अधिसूचना जारी की।

भोपाल के केरवा डैम के अतिक्रमणों की होगी जांच, NGT ने कमेटी को दिए निरीक्षण के निर्देश

भोपाल के केरवा डैम की सीमा और उसके आसपास हुए अतिक्रमणों को लेकर नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) ने सख्ती दिखाई है। ट्रिब्यूनल ने संबंधित कमेटी को डैम के फुल टैंक लेवल (FTL) और बफर एरिया का अंतिम निर्धारण करने के लिए निरीक्षण कर विस्तृत रिपोर्ट तैयार करने के निर्देश दिए हैं। इस प्रक्रिया में सरकारी रिकॉर्ड, जल संसाधन विभाग के कंटूर और टोपोग्राफिकल मैप, ड्रोन सर्वे, सैटेलाइट इमेजरी और मौके पर किए जाने वाले भौतिक सत्यापन को आधार बनाया जाएगा। बुधवार को प्रस्तावित ग्राउंड ट्रूथिंग अंतिम समय पर स्थगित कर दी गई। अब गुरुवार को टीम के निरीक्षण करने की संभावना है। NGT ने FTL और बफर एरिया तय करने के दिए निर्देश केरवा डैम के आसपास अतिक्रमणों को लेकर हाल ही में हुई सुनवाई में NGT ने कमेटी को उपलब्ध रिकॉर्ड के आधार पर जलाशय की वास्तविक सीमा का निरीक्षण करने को कहा था। ट्रिब्यूनल के निर्देशों के अनुसार, FTL और बफर एरिया का अंतिम निर्धारण ड्रोन सर्वे, सैटेलाइट तस्वीरों, ग्राउंड ट्रूथिंग और सरकारी दस्तावेजों के मिलान के बाद किया जाएगा। कमेटी को इस संबंध में विस्तृत रिपोर्ट अगली सुनवाई में पेश करनी है। मामले की अगली सुनवाई 29 अक्टूबर को निर्धारित है। 108 सीमा-चिह्नों की भी होगी जांच उपलब्ध पुराने रिकॉर्ड के अनुसार, केरवा डैम का जलमग्न क्षेत्र लगभग 462.150 हेक्टेयर है। पहले इसकी सीमा को 1,080 कंक्रीट ब्लॉकों और खंभों से चिह्नित किया गया था। अब भौतिक सत्यापन के दौरान यह भी देखा जाएगा कि इनमें से कितने सीमा-चिह्न मौके पर मौजूद हैं और क्या उनकी स्थिति पुराने रिकॉर्ड से मेल खाती है। इससे जलाशय की वास्तविक सीमा निर्धारित करने में मदद मिलेगी। पहले की जांच में मिले थे 33 अतिक्रमण पूर्व में हुई जांच के दौरान केरवा जलाशय क्षेत्र में कुल 33 अतिक्रमण चिह्नित किए गए थे। इनमें 18 संरचनाएं सरकारी भूमि और 15 निजी भूमि से संबंधित बताई गई थीं। अब ड्रोन सर्वे और जमीनी निरीक्षण के जरिए यह पता लगाया जाएगा कि पहले चिह्नित अतिक्रमणों में से कितने अभी भी मौके पर मौजूद हैं। साथ ही, उनकी वास्तविक स्थिति और निर्धारित जलाशय सीमा से उनकी दूरी का सत्यापन भी किया जाएगा। तीन सप्ताह में रिपोर्ट तैयार करने का निर्देश NGT ने कमेटी को FTL और उसके बफर एरिया के अंतिम निर्धारण की प्रक्रिया तीन सप्ताह में पूरी करने के निर्देश दिए हैं। इसके तहत टीम को उपलब्ध सरकारी दस्तावेजों और मौके की स्थिति का मिलान करना होगा। निरीक्षण के बाद तैयार रिपोर्ट से केरवा डैम की सीमा और आसपास मौजूद अतिक्रमणों की स्थिति स्पष्ट होने की उम्मीद है। हालांकि, अतिक्रमणों को लेकर आगे क्या कार्रवाई होगी, यह निरीक्षण और संबंधित अधिकारियों की रिपोर्ट के बाद स्पष्ट होगा।

इंदौर के होलकर कॉलेज में छात्रों की अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल, एक छात्र की तबीयत बिगड़ी; युवती बेहोश

इंदौर के होलकर कॉलेज में अपनी विभिन्न मांगों को लेकर श्री राजपूत करणी सेना छात्र संगठन के पदाधिकारी और विद्यार्थी अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर बैठे हैं। सोमवार को शुरू हुई भूख हड़ताल मंगलवार को दूसरे दिन भी जारी रही। इस दौरान एक छात्र की तबीयत बिगड़ गई और उसे उल्टी होने लगी, जबकि प्रदर्शन में शामिल एक युवती बेहोश हो गई। संगठन के होलकर कॉलेज इकाई के उपाध्यक्ष और छात्र हर्ष तिवारी के मुताबिक, 25 सितंबर को कॉलेज में दो गुटों के बीच विवाद हुआ था। इस मामले में उन्हें और उनके सात साथियों को ट्रांसफर सर्टिफिकेट (TC) दे दिया गया। साथ ही, उनके खिलाफ एफआईआर भी दर्ज कराई गई। सस्पेंशन लेटर की तारीख पर उठाए सवाल हर्ष तिवारी ने कॉलेज प्रशासन की कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए कहा कि विवाद 25 सितंबर को हुआ था, लेकिन सस्पेंशन लेटर कॉलेज की वेबसाइट पर 24 सितंबर की तारीख में तैयार दिखाई दे रहा है। उनके मुताबिक, पत्र पर आधिकारिक मुहर और हस्ताक्षर भी हैं। संगठन का कहना है कि इस मामले में कॉलेज प्रशासन को स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए। इसी मांग को लेकर छात्र अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर बैठे हैं। भूख हड़ताल के दौरान छात्र की तबीयत बिगड़ी मंगलवार को भूख हड़ताल के दौरान एक छात्र की तबीयत खराब हो गई और उसे उल्टी हुई। वहीं, प्रदर्शन में शामिल एक युवती भी बेहोश हो गई। घटना के बाद प्रदर्शनकारी विद्यार्थियों ने कॉलेज प्रबंधन से जवाब मांगा और अपनी मांगों पर कार्रवाई करने की अपील की। छात्र संगठन की चार प्रमुख मांगें श्री राजपूत करणी सेना छात्र संगठन ने कॉलेज प्रशासन के सामने चार प्रमुख मांगें रखी हैं। फिलहाल, छात्र संगठन की मांगों और कॉलेज प्रशासन की प्रतिक्रिया को लेकर आगे की स्थिति स्पष्ट होना बाकी है।

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