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पेपर लीक संशोधन विधेयक राज्यसभा से भी पास, राष्ट्रपति की मंजूरी के बाद बनेगा कानून

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नई दिल्ली। पेपर लीक से जुड़े संशोधन विधेयक को लोकसभा के बाद गुरुवार को राज्यसभा से भी मंजूरी मिल गई। अब यह विधेयक राष्ट्रपति के पास भेजा जाएगा। राष्ट्रपति की स्वीकृति मिलने के बाद यह कानून के रूप में लागू हो जाएगा।

राज्यसभा में विधेयक पर चर्चा के दौरान विपक्ष और सत्ता पक्ष के बीच तीखी नोकझोंक देखने को मिली। सरकार की ओर से केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह जब विधेयक पर जवाब देने के लिए खड़े हुए, तभी विपक्ष ने सदन से वॉकआउट कर दिया।

इससे पहले चर्चा के दौरान राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के सांसद मनोज झा ने राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) को समाप्त करने की मांग करते हुए तीखी टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि NTA को “बंगाल की खाड़ी में फेंक देना चाहिए।”

वहीं, भारतीय जनता पार्टी (BJP) के सांसद अनुराग ठाकुर ने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को विपक्ष के नेता राहुल गांधी के खिलाफ विशेषाधिकार हनन और सदन की अवमानना का नोटिस सौंपा। अनुराग ठाकुर ने आरोप लगाया कि राहुल गांधी ने गृह मंत्री अमित शाह के खिलाफ असंसदीय और अपमानजनक भाषा का प्रयोग किया तथा गंभीर और निराधार आरोप लगाए।

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Muskan Negi

muskannegi1302@gmail.com

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छत्तीसगढ़ कांग्रेस में PCC पद को लेकर सियासत तेज, उमेश पटेल के समर्थन में पोस्ट पर नेता को नोटिस

रायपुर। छत्तीसगढ़ कांग्रेस में प्रदेश अध्यक्ष (PCC) पद को लेकर चल रही चर्चाओं के बीच संगठन ने अनुशासनात्मक कार्रवाई शुरू कर दी है। प्रदेश कांग्रेस कमेटी ने सारंगढ़-बिलाईगढ़ के पूर्व जिला कांग्रेस अध्यक्ष और कांग्रेस नेता अरुण मालाकार को कारण बताओ नोटिस जारी किया है। माना जा रहा है कि यह कार्रवाई सोशल मीडिया पर प्रदेश अध्यक्ष पद को लेकर की गई एक पोस्ट के बाद हुई है। कांग्रेस संगठन ने इसे पार्टी अनुशासन के खिलाफ मानते हुए जवाब मांगा है। उमेश पटेल के समर्थन में साझा की थी पोस्ट जानकारी के मुताबिक, अरुण मालाकार ने अपने फेसबुक अकाउंट पर वरिष्ठ कांग्रेस नेता उमेश पटेल के समर्थन में एक पोस्ट साझा की थी। इस पोस्ट में उन्होंने उमेश पटेल के नेतृत्व की सराहना करते हुए उन्हें प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष बनाए जाने की पैरवी की थी। पोस्ट सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुई, जिसके बाद प्रदेश कांग्रेस संगठन ने मामले को गंभीरता से लिया। संगठन ने बताया अनुशासनहीनता प्रदेश कांग्रेस कमेटी का कहना है कि पार्टी के महत्वपूर्ण संगठनात्मक पदों को लेकर सार्वजनिक रूप से किसी नेता के पक्ष में अभियान चलाना आंतरिक प्रक्रिया और अनुशासन के अनुरूप नहीं है। संगठन ने आशंका जताई कि इस तरह की गतिविधियों से पार्टी की छवि प्रभावित हो सकती है। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष के निर्देश पर प्रभारी महामंत्री की ओर से अरुण मालाकार को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है। तीन दिन में मांगा जवाब जारी नोटिस में अरुण मालाकार से तीन दिनों के भीतर लिखित स्पष्टीकरण देने को कहा गया है। कांग्रेस संगठन ने स्पष्ट किया है कि यदि तय समय सीमा में जवाब नहीं दिया गया या जवाब संतोषजनक नहीं पाया गया, तो पार्टी संविधान के अनुसार आगे अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी। नए PCC अध्यक्ष की नियुक्ति को लेकर चर्चा तेज छत्तीसगढ़ कांग्रेस में नए प्रदेश अध्यक्ष की नियुक्ति को लेकर पिछले कुछ समय से लगातार अटकलें लगाई जा रही हैं। दिल्ली दौरे से वरिष्ठ नेताओं के लौटने के बाद इन चर्चाओं ने और जोर पकड़ लिया है। इसी बीच कई नेता और कार्यकर्ता सोशल मीडिया के माध्यम से अलग-अलग नेताओं के समर्थन में अपनी राय जाहिर कर रहे हैं। संगठन की यह कार्रवाई पार्टी में अनुशासन बनाए रखने की कोशिश के तौर पर देखी जा रही है। आने वाले दिनों में PCC अध्यक्ष पद को लेकर कांग्रेस संगठन का रुख और स्पष्ट हो सकता है। अधिक जानकारी और ताज़ा राजनीतिक खबरों के लिए विजिट करें:deshharpal.com

बिलासपुर की 65 साल पुरानी कंपोजिट बिल्डिंग जर्जर, कर्मचारियों ने कलेक्टर से लगाई सुधार की गुहार

बिलासपुर। छत्तीसगढ़ के बिलासपुर में 65 साल पुरानी कंपोजिट बिल्डिंग की खराब हालत को लेकर 27 से अधिक विभागों के कर्मचारियों ने बुधवार को कलेक्टर संजय अग्रवाल से मुलाकात की। कर्मचारियों ने भवन में पानी रिसाव, बिजली व्यवस्था और अन्य बुनियादी समस्याओं को लेकर पांच सूत्रीय मांग पत्र सौंपा। कर्मचारियों ने बताया कि वर्ष 1959 में निर्मित यह सरकारी भवन लंबे समय से उचित रखरखाव के अभाव में जर्जर हो चुका है। उन्होंने प्रशासन से नई कंपोजिट बिल्डिंग के निर्माण की मांग भी रखी। कलेक्टर ने PWD अधिकारियों को दिए निर्देश कर्मचारियों की शिकायत सुनने के बाद कलेक्टर संजय अग्रवाल ने तत्काल लोक निर्माण विभाग (PWD) के अधिकारियों से फोन पर चर्चा कर भवन की स्थिति की जानकारी ली और आवश्यक कदम उठाने के निर्देश दिए। कर्मचारियों ने भवन की आंशिक मरम्मत, रंग-रोगन, पर्याप्त पार्किंग व्यवस्था, पुरुष और महिला शौचालयों के जीर्णोद्धार, नया ट्रांसफार्मर लगाने और नई विद्युत लाइन की व्यवस्था करने की मांग की। बारिश के बाद बढ़ी सीपेज की समस्या हाल ही में हुई भारी बारिश के कारण पुरानी कंपोजिट बिल्डिंग में कई स्थानों पर सीपेज की समस्या बढ़ गई है। कई कार्यालयों में पानी भरने से कर्मचारियों के साथ-साथ आम नागरिकों को भी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। कर्मचारियों का कहना है कि भवन की मौजूदा स्थिति में काम करना मुश्किल हो रहा है और जल्द स्थायी समाधान की आवश्यकता है। सितंबर से शुरू हो सकते हैं रखरखाव कार्य कलेक्टर ने कर्मचारियों को आश्वासन दिया कि बारिश का मौसम समाप्त होने के बाद सितंबर से पुरानी कंपोजिट बिल्डिंग में आवश्यक रखरखाव कार्य शुरू करने की प्रक्रिया की जाएगी। प्रतिनिधिमंडल में सुनील यादव, आर.के. गुप्ता, सूर्यप्रकाश कश्यप, राहुल यादव, देवेंद्र ठाकुर, किशोर शर्मा, जियाली राम सुरक्षित, एच.एन. पुरैना, डी.के. पाटिल, मनीष रात्रे, श्वेता दुबे और मीनू अग्रवाल सहित अन्य कर्मचारी शामिल थे। अधिक जानकारी और ताज़ा खबरों के लिए विजिट करें:deshharpal.com

नर्मदापुरम में 28 करोड़ की सरकारी मूंग घोटाला: मिट्टी से भरी मिलीं बोरियां, जिला प्रबंधक समेत 3 पर FIR

मध्यप्रदेश के नर्मदापुरम जिले में सरकारी मूंग के भंडारण में बड़े घोटाले का खुलासा हुआ है। जांच में सरकारी मूंग की बोरियों में मिट्टी और अन्य बाहरी पदार्थ मिलाए जाने का मामला सामने आने के बाद वेयरहाउस कॉर्पोरेशन के जिला प्रबंधक सहित तीन लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है। मामले में शासन को करीब 28.14 करोड़ रुपये के नुकसान का अनुमान है। जांच में मिट्टी से भरी मिलीं बोरियां माखननगर स्थित कनकधारा वेयरहाउस में रखी सरकारी मूंग की शिकायत मिलने पर कलेक्टर सोमेश मिश्रा के निर्देश पर 22 जुलाई को गठित जांच दल ने औचक निरीक्षण किया। जांच के दौरान वेयरहाउस में रखे 23 स्टैक में गंभीर अनियमितताएं मिलीं। कई बोरियों में निर्धारित सीमा से अधिक मिट्टी और अन्य बाहरी पदार्थ पाए गए, जबकि कुछ बोरियां पूरी तरह मिट्टी से भरी हुई थीं। मामला सामने आने के बाद वेयरहाउस को सील कर दिया गया और स्टॉक के नमूने प्रयोगशाला जांच के लिए भेजे गए। 31 हजार क्विंटल से अधिक सरकारी मूंग प्रभावित जांच रिपोर्ट के अनुसार वर्ष 2023-24 और 2024-25 के दौरान मार्कफेड और नाफेड की करीब 31,298.89 क्विंटल सरकारी मूंग में मिलावट की गई। प्रारंभिक आकलन के अनुसार इससे शासन को लगभग 28.14 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है। जिला प्रबंधक समेत तीन लोगों पर FIR जांच रिपोर्ट के आधार पर कनकधारा वेयरहाउस के संचालक तारेश पुरोहित, तत्कालीन शाखा प्रबंधक श्याम होसले और वेयरहाउस कॉर्पोरेशन के जिला प्रबंधक वासुदेव डवडे को लापरवाही और सरकारी संपत्ति के दुरुपयोग का जिम्मेदार माना गया है। जिला विपणन अधिकारी अनिल जैन की शिकायत पर माखननगर थाने में तीनों आरोपियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर ली गई है। पुलिस मामले की जांच कर रही है। पहले भी ब्लैकलिस्ट हो चुका था वेयरहाउस जांच में यह भी सामने आया कि जिस कनकधारा वेयरहाउस में यह गड़बड़ी मिली, उसे लगभग एक वर्ष पहले भी अनियमितताओं के कारण ब्लैकलिस्ट किया गया था। उस समय जांच समिति में जिला प्रबंधक वासुदेव डवडे भी शामिल थे। इसके बावजूद दोबारा सरकारी मूंग के भंडारण में गंभीर गड़बड़ी सामने आने से निगरानी व्यवस्था और जिम्मेदार अधिकारियों की भूमिका पर सवाल उठ रहे हैं। अन्य वेयरहाउसों की भी होगी जांच एसडीएम देवेंद्र प्रताप सिंह ने कहा कि किसानों के हितों से जुड़े मामलों में किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। जिले के अन्य वेयरहाउसों का भी चरणबद्ध तरीके से निरीक्षण और जांच की जाएगी ताकि भविष्य में ऐसी अनियमितताओं को रोका जा सके। आरोपी वेयरहाउस संचालक अस्पताल में भर्ती एफआईआर में नामजद वेयरहाउस संचालक तारेश पुरोहित फिलहाल एक निजी हार्ट केयर अस्पताल में भर्ती हैं। जानकारी के अनुसार वे पिछले तीन दिनों से उपचाराधीन हैं। अधिक जानकारी और ताज़ा खबरों के लिए विजिट करें:deshharpal.com

ICC ने 2027 वनडे वर्ल्ड कप के 12 मेजबान शहरों का किया ऐलान, 24 साल बाद अफ्रीका में लौटेगा टूर्नामेंट

अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद (ICC) ने 2027 वनडे वर्ल्ड कप के लिए 12 मेजबान शहरों की घोषणा कर दी है। क्रिकेट का यह महाकुंभ 4 अक्टूबर से 21 नवंबर 2027 तक दक्षिण अफ्रीका, जिम्बाब्वे और नामीबिया की संयुक्त मेजबानी में खेला जाएगा। 24 साल बाद वनडे वर्ल्ड कप की मेजबानी फिर से अफ्रीकी महाद्वीप को मिली है। दक्षिण अफ्रीका के 8 शहरों में होंगे सबसे ज्यादा मुकाबले टूर्नामेंट के अधिकांश मैच दक्षिण अफ्रीका में खेले जाएंगे। यहां जोहानसबर्ग, सेंचुरियन, डरबन, ग्केबेर्हा, कुगोम्पो सिटी, केपटाउन, पार्ल और ब्लोमफोंटेन को मेजबान शहर बनाया गया है। वहीं जिम्बाब्वे के हरारे, बुलावायो और विक्टोरिया फॉल्स, जबकि नामीबिया की राजधानी विंडहोक में भी मुकाबले आयोजित किए जाएंगे। फाइनल मुकाबला जोहानसबर्ग के वांडरर्स स्टेडियम या केपटाउन के न्यूलैंड्स स्टेडियम में आयोजित किया जा सकता है। 24 साल बाद अफ्रीका में लौटेगा वनडे वर्ल्ड कप इससे पहले वर्ष 2003 में दक्षिण अफ्रीका, जिम्बाब्वे और केन्या ने संयुक्त रूप से वनडे वर्ल्ड कप की मेजबानी की थी। इसके बाद दक्षिण अफ्रीका 2007 टी-20 वर्ल्ड कप, 2009 चैंपियंस ट्रॉफी और 2023 महिला टी-20 वर्ल्ड कप की सफल मेजबानी कर चुका है। वहीं नामीबिया पहली बार किसी सीनियर ICC टूर्नामेंट की मेजबानी करेगा। हालांकि इस वर्ष उसने जिम्बाब्वे के साथ मिलकर अंडर-19 वर्ल्ड कप का आयोजन किया था। 54 मैचों में से 41 मुकाबले दक्षिण अफ्रीका में संभव 2027 वर्ल्ड कप में कुल 54 मैच खेले जाएंगे। इनमें से कम से कम 41 मुकाबले दक्षिण अफ्रीका, 7 से 10 मैच जिम्बाब्वे और कम से कम तीन मैच नामीबिया में होने की संभावना है। इसके अलावा बेनोनी और पोटचेफस्ट्रूम को वॉर्म-अप मैचों के लिए चुना गया है। यही शहर अगले वर्ष होने वाले वर्ल्ड कप क्वालिफायर की भी मेजबानी कर सकते हैं। विक्टोरिया फॉल्स पहली बार बनेगा वर्ल्ड कप वेन्यू इस बार 12 मेजबान शहरों में विक्टोरिया फॉल्स नया नाम है। यहां लगभग 10 हजार दर्शकों की क्षमता वाला नया स्टेडियम बनाया जा रहा है, जिसके इस वर्ष के अंत तक तैयार होने की उम्मीद है। 14 टीमों के साथ नए फॉर्मेट में खेला जाएगा वर्ल्ड कप ICC ने 2027 वनडे वर्ल्ड कप के लिए नया थ्री-स्टेज फॉर्मेट लागू किया है। टूर्नामेंट में कुल 14 टीमें हिस्सा लेंगी। भारत-पाकिस्तान के बीच तीन मुकाबलों की संभावना नए फॉर्मेट के चलते भारत और पाकिस्तान के बीच अधिकतम तीन मैच खेले जा सकते हैं। यदि दोनों टीमें एक ही ग्रुप में रहती हैं तो पहला मुकाबला ग्रुप स्टेज में होगा। दोनों के सुपर-7 में पहुंचने पर दूसरी भिड़ंत होगी और यदि दोनों सेमीफाइनल या फाइनल तक पहुंचते हैं तो तीसरी बार आमना-सामना संभव है। मेजबान देशों की क्वालिफिकेशन स्थिति ICC के फुल मेंबर होने के कारण दक्षिण अफ्रीका और जिम्बाब्वे सीधे वर्ल्ड कप के लिए क्वालिफाई कर चुके हैं। वहीं तीसरे मेजबान नामीबिया को टूर्नामेंट में जगह बनाने के लिए क्वालिफिकेशन प्रक्रिया से गुजरना होगा। यह टूर्नामेंट 2027-31 फ्यूचर टूर्स प्रोग्राम (FTP) का पहला ICC इवेंट भी होगा। अधिक जानकारी और ताज़ा खेल खबरों के लिए विजिट करें:deshharpal.com

MP में बिल्डिंग परमिशन के नियम आसान: अब नहीं देनी होगी कई NOC, पूरी प्रक्रिया होगी ऑनलाइन

मध्यप्रदेश सरकार ने शहरी क्षेत्रों में भवन निर्माण की अनुमति (Building Permission) की प्रक्रिया को और सरल बनाने के लिए बड़ा फैसला लिया है। अब बिल्डिंग परमिशन के लिए विभिन्न विभागों से अनापत्ति प्रमाण-पत्र (NOC) लाने की अनिवार्यता खत्म कर दी गई है। साथ ही पूरी भवन अनुज्ञा प्रक्रिया पूरी तरह ऑनलाइन होगी और आवेदन के लिए केवल डिजिटल दस्तावेज ही मान्य होंगे। नगरीय विकास एवं आवास विभाग के अपर मुख्य सचिव संजय दुबे द्वारा सभी नगरीय निकायों को जारी निर्देशों के अनुसार, इस व्यवस्था से नागरिकों, निवेशकों, बिल्डर्स और निर्माण एजेंसियों को बड़ी राहत मिलेगी। सरकार का मानना है कि इससे भवन अनुमति प्रक्रिया तेज, पारदर्शी और निवेश-अनुकूल बनेगी, जिससे प्रदेश में Ease of Doing Business को भी बढ़ावा मिलेगा। पूरी प्रक्रिया होगी ऑनलाइन नई व्यवस्था के तहत भवन अनुज्ञा के लिए आवेदन, भवन का नक्शा और अन्य आवश्यक दस्तावेज केवल ऑनलाइन जमा किए जाएंगे। किसी भी स्थिति में हार्ड कॉपी जमा करने की जरूरत नहीं होगी। यदि भूमि स्वामी स्वयं आवेदन करता है तो उसे ऑनलाइन शपथ-पत्र देना होगा। वहीं, अधिकृत कंसल्टेंट के माध्यम से आवेदन करने पर भूमि स्वामी के हस्ताक्षरित शपथ-पत्र की डिजिटल कॉपी अपलोड करनी होगी। इन मामलों में ही लगेगी NOC की जरूरत सरकार ने स्पष्ट किया है कि एयरपोर्ट अथॉरिटी ऑफ इंडिया (AAI), राष्ट्रीय स्मारक प्राधिकरण (NMA) और हेरिटेज क्षेत्रों से संबंधित NOC केवल उन्हीं मामलों में आवश्यक होगी, जहां ऑनलाइन GIS आधारित जांच में संबंधित भूखंड प्रतिबंधित या प्रभावित क्षेत्र में पाया जाएगा। अन्य सभी मामलों में इन विभागों की अनापत्ति की जरूरत नहीं होगी। हाउसिंग सोसायटी, बिजली और नजूल विभाग से भी राहत नए निर्देशों के तहत सहकारिता विभाग, गृह निर्माण सहकारी समितियों, बिजली विभाग और नजूल विभाग से मांगी जाने वाली कई अनापत्ति प्रमाण-पत्रों की अनिवार्यता भी समाप्त कर दी गई है। इसके अलावा रक्षा प्रतिष्ठानों, मध्यप्रदेश गृह निर्माण एवं अधोसंरचना विकास मंडल तथा विकास प्राधिकरणों से जुड़े मामलों में आवेदकों को स्वयं NOC लाने की जरूरत नहीं होगी। आवश्यकता पड़ने पर संबंधित सक्षम प्राधिकारी आवेदन मिलने के सात दिनों के भीतर संबंधित विभाग को प्रकरण भेजेगा और विभाग को 21 दिनों के भीतर अपनी सहमति या आपत्ति दर्ज करनी होगी। तय समय में जवाब नहीं मिलने पर आगे की प्रक्रिया जारी रखी जाएगी। पर्यावरण और फायर NOC के नियम भी हुए आसान नए निर्देशों के अनुसार पर्यावरणीय स्वीकृति अब केवल निर्धारित क्षेत्रफल से बड़े भवनों और परियोजनाओं के लिए ही आवश्यक होगी। इसी तरह वृक्ष कटाई की अनुमति केवल उन्हीं मामलों में ली जाएगी, जहां वास्तव में पेड़ों की कटाई प्रस्तावित होगी। अग्निशमन विभाग (Fire NOC) से संबंधित प्रक्रिया भी राष्ट्रीय भवन संहिता (National Building Code) के प्रावधानों के अनुरूप लागू की जाएगी, जिससे भवन निर्माण अनुमति प्रक्रिया और अधिक सरल एवं पारदर्शी बनेगी। अधिक जानकारी और ताज़ा खबरों के लिए विजिट करें:deshharpal.com

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