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Parliament Session धर्मेंद्र प्रधान का सम्मान, विपक्ष के हंगामे से Lok Sabha और Rajya Sabha की कार्यवाही प्रभावित

Table of Content

पूर्व केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद सोमवार का दिन संसद में कई अहम घटनाओं का गवाह बना। एक तरफ धर्मेंद्र प्रधान पहली बार संसद पहुंचे, जहां एनडीए (NDA) के सांसदों ने उनका गर्मजोशी से स्वागत करते हुए शॉल ओढ़ाई और मिथिला पाग पहनाकर सम्मानित किया। वहीं दूसरी ओर लोकसभा और राज्यसभा में विपक्ष के हंगामे के कारण सदन की कार्यवाही बार-बार बाधित हुई और दोनों सदनों को दोपहर 12 बजे तक स्थगित करना पड़ा।

यह पूरा घटनाक्रम संसद के मौजूदा सत्र का सबसे चर्चित घटनाक्रम बन गया।

संसद पहुंचते ही धर्मेंद्र प्रधान का हुआ भव्य स्वागत

शिक्षा मंत्री पद छोड़ने के बाद धर्मेंद्र प्रधान पहली बार संसद पहुंचे। संसद परिसर में एनडीए के कई सांसद पहले से उनका इंतजार कर रहे थे। जैसे ही वह पहुंचे, सांसदों ने उन्हें शॉल ओढ़ाकर और पारंपरिक मिथिला पाग पहनाकर सम्मानित किया।

इस दौरान सांसदों ने उनके शिक्षा मंत्री के रूप में किए गए कार्यों की सराहना की। कई नेताओं ने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) को लागू करने और शिक्षा क्षेत्र में सुधारों को आगे बढ़ाने में धर्मेंद्र प्रधान की भूमिका महत्वपूर्ण रही है।

सम्मान के पीछे क्या है राजनीतिक संदेश?

राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यह सम्मान केवल औपचारिक कार्यक्रम नहीं था। इसे भाजपा और एनडीए की ओर से धर्मेंद्र प्रधान के प्रति भरोसे और सम्मान का सार्वजनिक संदेश भी माना जा रहा है। इस्तीफे के बाद भी पार्टी नेतृत्व और सहयोगी दलों का उनके साथ खड़ा दिखना राजनीतिक रूप से अहम माना जा रहा है।

इधर संसद में विपक्ष का जोरदार हंगामा

जहां संसद परिसर में सम्मान का माहौल था, वहीं सदन के भीतर तस्वीर बिल्कुल अलग नजर आई। लोकसभा और राज्यसभा की कार्यवाही शुरू होते ही विपक्षी सांसदों ने विभिन्न मुद्दों को लेकर सरकार के खिलाफ नारेबाजी शुरू कर दी।

विपक्ष लगातार अपनी मांगों पर चर्चा कराने की मांग करता रहा, जबकि सरकार अपने तय एजेंडे के अनुसार कार्यवाही आगे बढ़ाना चाहती थी। दोनों पक्षों के बीच सहमति नहीं बनने के कारण सदन में शोर-शराबा बढ़ता गया।

12 बजे तक स्थगित करनी पड़ी कार्यवाही

लगातार हंगामे के चलते लोकसभा और राज्यसभा की कार्यवाही सामान्य रूप से नहीं चल सकी। पीठासीन अधिकारियों ने व्यवस्था बनाए रखने की कोशिश की, लेकिन विपक्ष का विरोध जारी रहने पर दोनों सदनों की कार्यवाही दोपहर 12 बजे तक स्थगित कर दी गई।

इस वजह से कई महत्वपूर्ण विधायी और सरकारी कार्य भी तय समय पर नहीं हो सके।

शिक्षा मंत्रालय की कमान अब नए मंत्री के हाथों में

धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद केंद्र सरकार ने प्रह्लाद जोशी को देश का नया शिक्षा मंत्री बनाया है। अब नई शिक्षा नीति के क्रियान्वयन, उच्च शिक्षा सुधार और छात्रों से जुड़े कई महत्वपूर्ण फैसलों की जिम्मेदारी उनके कंधों पर होगी। शिक्षा जगत की नजर अब नए नेतृत्व के अगले कदमों पर टिकी है।

संसद का दिन क्यों रहा खास?

सोमवार का दिन संसद में दो अलग-अलग तस्वीरें लेकर आया। एक तरफ धर्मेंद्र प्रधान का सम्मान चर्चा का विषय बना, तो दूसरी तरफ विपक्ष के हंगामे ने संसदीय कार्यवाही को प्रभावित किया। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि आने वाले दिनों में संसद का सत्र और अधिक गर्म रहने की संभावना है।

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Yukta

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Punjab Paper Leak

Punjab Paper Leak Update: CJP के अभिजीत दीपके का बड़ा बयान, बोले- ‘अभी रणनीति तैयार कर रहे हैं’

Punjab Paper Leak मामले को लेकर राज्य में बहस तेज होती जा रही है। परीक्षा की निष्पक्षता और छात्रों के भविष्य से जुड़े इस मुद्दे पर लगातार सवाल उठ रहे हैं। इसी बीच CJP से जुड़े अभिजीत दीपके का बयान सामने आया है। उन्होंने कहा कि “हम अभी इसके लिए प्लानिंग कर रहे हैं।” उनके इस बयान के बाद यह चर्चा शुरू हो गई है कि आने वाले दिनों में इस मामले को लेकर कोई नई पहल या कार्रवाई देखने को मिल सकती है। Punjab Paper Leak मामले पर क्यों बढ़ा विवाद? कथित पेपर लीक की खबर सामने आने के बाद छात्रों और अभिभावकों में चिंता बढ़ गई है। उनका कहना है कि यदि परीक्षा प्रक्रिया में किसी तरह की गड़बड़ी हुई है तो इसकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। शिक्षा विशेषज्ञ भी मानते हैं कि ऐसी घटनाएं परीक्षा प्रणाली की विश्वसनीयता पर असर डालती हैं और मेहनत करने वाले छात्रों का मनोबल भी प्रभावित होता है। CJP के अभिजीत दीपके ने क्या कहा? मीडिया से बातचीत के दौरान अभिजीत दीपके ने कहा कि “हम अभी इसके लिए प्लानिंग कर रहे हैं।” हालांकि उन्होंने यह स्पष्ट नहीं किया कि यह योजना किस प्रकार की होगी और आगे क्या कदम उठाए जाएंगे। उन्होंने फिलहाल किसी संभावित कार्रवाई या कार्यक्रम की विस्तृत जानकारी साझा नहीं की। उनके इस बयान को लेकर अलग-अलग तरह की चर्चाएं हो रही हैं, लेकिन आधिकारिक तौर पर अभी किसी नई पहल की घोषणा नहीं की गई है। जांच और पारदर्शिता की उठ रही मांग पेपर लीक के आरोप सामने आने के बाद कई पक्षों ने मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है। छात्रों का कहना है कि यदि किसी तरह की अनियमितता हुई है तो उसकी सच्चाई सामने आनी चाहिए और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ नियमों के अनुसार कार्रवाई होनी चाहिए। विशेषज्ञों का मानना है कि समय पर जांच पूरी होने से परीक्षा व्यवस्था पर लोगों का भरोसा बना रहेगा और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए बेहतर व्यवस्था तैयार की जा सकेगी। अब किस पर टिकी हैं निगाहें? फिलहाल सभी की नजर पंजाब सरकार और संबंधित जांच एजेंसियों पर है। जांच की दिशा और आधिकारिक रिपोर्ट आने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि कथित पेपर लीक के आरोप कितने सही हैं और आगे क्या कार्रवाई की जाएगी। इस बीच छात्र लगातार यह उम्मीद लगाए बैठे हैं कि जल्द ही स्थिति साफ होगी और उनके भविष्य को लेकर किसी तरह की अनिश्चितता नहीं रहेगी। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
Monsoon Session

Monsoon Session 2026: Rajya Sabha में Rule 267 पर टकराव, विपक्ष ने तत्काल चर्चा की उठाई मांग

संसद के मानसून सत्र (Monsoon Session) का सोमवार का दिन काफी हंगामेदार रहा। राज्यसभा में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे ने Rule 267 के तहत चर्चा कराने की मांग करते हुए सरकार को घेरा। उन्होंने छात्रों से जुड़े हालिया घटनाक्रम और कथित पुलिस कार्रवाई को बेहद गंभीर बताते हुए इसे “रेयरेस्ट ऑफ रेयर केस” करार दिया। विपक्ष ने मांग की कि सदन की सामान्य कार्यवाही रोककर इस मुद्दे पर तुरंत चर्चा कराई जाए, लेकिन इस पर सहमति नहीं बन सकी और सदन में जोरदार हंगामा देखने को मिला। Rule 267 को लेकर क्यों गरमाई Rajya Sabha? संसद की कार्यवाही शुरू होते ही विपक्षी सांसदों ने Rule 267 के तहत नोटिस देकर छात्रों के विरोध प्रदर्शन, कथित पुलिस कार्रवाई और परीक्षा प्रणाली से जुड़े मामलों पर विशेष चर्चा की मांग की। विपक्ष का कहना था कि यह केवल राजनीतिक मुद्दा नहीं, बल्कि देश के युवाओं और शिक्षा व्यवस्था से जुड़ा गंभीर मामला है, इसलिए इसे प्राथमिकता के साथ उठाया जाना चाहिए। मल्लिकार्जुन खड़गे ने सदन में कहा कि ऐसे मामलों पर संसद में खुलकर चर्चा होनी चाहिए ताकि सरकार अपना पक्ष रख सके और विपक्ष अपनी चिंताओं को सामने ला सके। खड़गे ने सरकार पर साधा निशाना चर्चा की मांग करते हुए खड़गे ने कहा कि छात्रों के साथ जो घटनाएं सामने आई हैं, वे बेहद चिंताजनक हैं। उन्होंने इसे लोकतांत्रिक मूल्यों से जुड़ा मुद्दा बताते हुए कहा कि संसद ऐसे विषयों पर चर्चा से पीछे नहीं हट सकती। विपक्षी दलों का आरोप है कि छात्रों की आवाज को दबाने की कोशिश की गई, जबकि सरकार का कहना है कि कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए आवश्यक कदम उठाए गए। सरकार ने क्या कहा? सरकार की ओर से स्पष्ट किया गया कि वह किसी भी महत्वपूर्ण विषय पर चर्चा से पीछे नहीं हट रही है, लेकिन संसद की कार्यवाही तय नियमों और प्रक्रिया के अनुसार ही चलेगी। सरकार ने विपक्ष पर अनावश्यक हंगामा कर सदन का समय बर्बाद करने का आरोप भी लगाया। सत्ता पक्ष का कहना है कि यदि सभी दल निर्धारित प्रक्रिया का पालन करें तो हर महत्वपूर्ण मुद्दे पर चर्चा संभव है। हंगामे की वजह से प्रभावित हुई कार्यवाही विपक्ष के विरोध और नारेबाजी के चलते राज्यसभा की कार्यवाही कई बार बाधित हुई। कुछ समय तक सदन में शोर-शराबा जारी रहा, जिसके बाद कार्यवाही को स्थगित करना पड़ा। लोकसभा में भी विपक्ष ने विभिन्न मुद्दों को लेकर सरकार के खिलाफ विरोध दर्ज कराया। क्या है Rule 267? राज्यसभा का Rule 267 ऐसा प्रावधान है, जिसके तहत किसी अत्यंत महत्वपूर्ण और तात्कालिक जनहित के मुद्दे पर सदन की निर्धारित कार्यवाही रोककर तुरंत चर्चा कराई जा सकती है। हालांकि, इस नियम के तहत चर्चा की अनुमति देना पूरी तरह सभापति के अधिकार क्षेत्र में आता है। यदि सभापति को मामला पर्याप्त महत्वपूर्ण लगता है, तभी इस नियम के तहत चर्चा की अनुमति दी जाती है। आगे भी जारी रह सकता है टकराव मानसून सत्र के शुरुआती दिनों से ही कई मुद्दों पर सरकार और विपक्ष आमने-सामने हैं। माना जा रहा है कि छात्रों से जुड़े मामलों, शिक्षा व्यवस्था और अन्य राजनीतिक मुद्दों को लेकर आने वाले दिनों में भी संसद का माहौल गर्म रह सकता है। विपक्ष ने संकेत दिए हैं कि यदि उनकी मांगों पर विचार नहीं किया गया तो वह सदन के भीतर अपना विरोध जारी रखेगा। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
सुप्रीम कोर्ट

Protest Rights: सुप्रीम कोर्ट ने Police Action पर जताई चिंता, SOP बनाने के दिए निर्देश

देशभर में प्रदर्शन और पुलिस कार्रवाई को लेकर उठते सवालों के बीच सुप्रीम कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण टिप्पणी की है। अदालत ने साफ कहा कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन करना हर नागरिक का संवैधानिक अधिकार है, लेकिन कानून-व्यवस्था बनाए रखने के नाम पर पुलिस की बर्बरता को उचित नहीं ठहराया जा सकता। साथ ही, न्यायालय ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि प्रदर्शनकारी पुलिस पर हमला करते हैं या हिंसा का सहारा लेते हैं, तो वह भी उतना ही गंभीर मामला है। सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र और राज्य सरकारों को सुझाव दिया कि प्रदर्शन के दौरान पुलिस की कार्रवाई को लेकर एक Standard Operating Procedure (SOP) तैयार किया जाए, ताकि भविष्य में ऐसे मामलों में स्पष्ट दिशा-निर्देश उपलब्ध हों। लोकतंत्र में Protest की अहम भूमिका सुनवाई के दौरान अदालत ने कहा कि किसी भी लोकतांत्रिक व्यवस्था में लोगों को अपनी बात रखने और सरकार के फैसलों का शांतिपूर्ण विरोध करने का अधिकार है। यह अधिकार भारतीय संविधान से मिलता है और इसे कमजोर नहीं किया जा सकता। हालांकि, अदालत ने यह भी कहा कि प्रदर्शन पूरी तरह शांतिपूर्ण होना चाहिए और इससे आम जनता के अधिकारों या सार्वजनिक व्यवस्था पर अनावश्यक असर नहीं पड़ना चाहिए। Police Action पर सुप्रीम कोर्ट की सख्त टिप्पणी सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि कई मामलों में देखने को मिला है कि प्रदर्शन को नियंत्रित करने के दौरान जरूरत से ज्यादा बल प्रयोग किया जाता है। अदालत ने स्पष्ट किया कि पुलिस को केवल उतना ही बल इस्तेमाल करना चाहिए, जितना स्थिति को नियंत्रित करने के लिए आवश्यक हो। न्यायालय ने कहा कि कानून लागू कराने वाली एजेंसियों की जिम्मेदारी केवल व्यवस्था बनाए रखना नहीं, बल्कि नागरिकों के मौलिक अधिकारों की रक्षा करना भी है। इसलिए हर कार्रवाई संवैधानिक मूल्यों और मानवाधिकारों के अनुरूप होनी चाहिए। प्रदर्शनकारियों की हिंसा भी चिंता का विषय अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि जिम्मेदारी केवल पुलिस की नहीं है। यदि प्रदर्शन के दौरान पुलिसकर्मियों पर हमला किया जाता है, सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचाया जाता है या हिंसा भड़काई जाती है, तो ऐसे कृत्य भी लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ हैं। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि विरोध जताने का अधिकार सभी को है, लेकिन हिंसा किसी भी स्थिति में स्वीकार नहीं की जा सकती। SOP बनने से क्या होगा फायदा? अदालत का मानना है कि यदि प्रदर्शन के दौरान पुलिस की भूमिका, भीड़ नियंत्रण, बल प्रयोग की सीमा और जवाबदेही को लेकर स्पष्ट SOP बनाई जाती है, तो भविष्य में विवाद और टकराव की घटनाओं में कमी आ सकती है। इससे पुलिस को भी तय नियमों के तहत काम करने में सुविधा होगी और प्रदर्शनकारियों के अधिकारों की बेहतर सुरक्षा सुनिश्चित की जा सकेगी। नागरिक अधिकार और कानून-व्यवस्था के बीच संतुलन जरूरी सुप्रीम कोर्ट ने अपने अवलोकन में कहा कि लोकतंत्र की मजबूती तभी संभव है, जब नागरिकों के अधिकार और कानून-व्यवस्था दोनों का समान सम्मान किया जाए। अदालत की यह टिप्पणी आने वाले समय में प्रदर्शन और पुलिस कार्रवाई से जुड़े मामलों के लिए एक महत्वपूर्ण मार्गदर्शक साबित हो सकती है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि अदालत के सुझावों के अनुरूप स्पष्ट प्रोटोकॉल तैयार होता है, तो इससे प्रदर्शन के दौरान होने वाले विवादों में कमी आएगी और नागरिकों तथा पुलिस के बीच विश्वास भी मजबूत होगा। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
Monsoon

Monsoon Update: MP और Rajasthan में तेज बारिश का अलर्ट, Himachal में 135 सड़कें बंद

देश के कई हिस्सों में मानसून (Monsoon) ने एक बार फिर रफ्तार पकड़ ली है। मध्य प्रदेश (MP) और राजस्थान (Rajasthan) में सोमवार से भारी बारिश का नया दौर शुरू हो गया है। दूसरी ओर उत्तर प्रदेश (UP) में चार नदियां खतरे के निशान से ऊपर बह रही हैं, जिससे कई जिलों में बाढ़ का खतरा बढ़ गया है। वहीं हिमाचल प्रदेश में लगातार हो रही बारिश और भूस्खलन ने हालात मुश्किल बना दिए हैं। कई सड़कें बंद हैं और जनजीवन प्रभावित हुआ है। मौसम विभाग (IMD) ने अगले कुछ दिनों तक कई राज्यों में भारी से बहुत भारी बारिश की संभावना जताते हुए लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी है। MP और Rajasthan में फिर सक्रिय हुआ मानसून भारतीय मौसम विभाग के अनुसार, बंगाल की खाड़ी में बने कम दबाव के क्षेत्र और सक्रिय मानसून ट्रफ के कारण मध्य प्रदेश और राजस्थान में तेज बारिश की स्थिति बन गई है। भोपाल, इंदौर, जबलपुर, उज्जैन, कोटा, जयपुर, उदयपुर और आसपास के कई जिलों में गरज-चमक के साथ भारी बारिश की संभावना है। बारिश के चलते निचले इलाकों में जलभराव, छोटे नदी-नालों के उफान पर आने और यातायात प्रभावित होने की आशंका जताई गई है। प्रशासन ने संवेदनशील क्षेत्रों में निगरानी बढ़ा दी है। UP Flood Update: चार नदियां खतरे के निशान से ऊपर उत्तर प्रदेश में लगातार हो रही बारिश का असर अब नदियों के जलस्तर पर भी साफ दिखाई दे रहा है। राज्य की चार प्रमुख नदियां खतरे के निशान से ऊपर बह रही हैं, जिससे कई जिलों में बाढ़ जैसी स्थिति बनने लगी है। नदी किनारे बसे गांवों में प्रशासन ने सतर्कता बढ़ा दी है। राहत और बचाव दलों को अलर्ट पर रखा गया है, जबकि लोगों से सुरक्षित स्थानों पर रहने और नदी के आसपास न जाने की अपील की गई है। Himachal Pradesh में बारिश ने बढ़ाई मुश्किलें पहाड़ी राज्य हिमाचल प्रदेश में मानसून लगातार कहर बरपा रहा है। बीते 27 दिनों में बारिश, भूस्खलन और फ्लैश फ्लड जैसी घटनाओं में 15 लोगों की मौत हो चुकी है। लगातार बारिश के कारण 135 सड़कें बंद हैं, जिससे कई गांवों का संपर्क जिला मुख्यालय से कट गया है। लोक निर्माण विभाग और प्रशासन सड़कें खोलने के लिए युद्धस्तर पर काम कर रहे हैं, लेकिन लगातार हो रही बारिश राहत कार्यों में बाधा बन रही है। कई राज्यों के लिए जारी हुआ Rain Alert मौसम विभाग ने मध्य प्रदेश, राजस्थान, उत्तर प्रदेश और हिमाचल प्रदेश के अलावा उत्तराखंड, बिहार, झारखंड, छत्तीसगढ़, गुजरात, महाराष्ट्र और पूर्वोत्तर के कई राज्यों में भी भारी बारिश की चेतावनी जारी की है। कुछ इलाकों में तेज हवाएं, बिजली गिरने और अचानक जलभराव की भी संभावना जताई गई है। ऐसे में लोगों को मौसम विभाग की ताजा जानकारी पर नजर बनाए रखने की सलाह दी गई है। लोगों के लिए जरूरी सावधानियां आने वाले दिनों में कैसा रहेगा मौसम? मौसम विशेषज्ञों का अनुमान है कि अगले 3 से 5 दिनों तक उत्तर, मध्य और पश्चिम भारत के कई हिस्सों में बारिश का सिलसिला जारी रह सकता है। कुछ क्षेत्रों में भारी बारिश के कारण बाढ़, जलभराव और भूस्खलन जैसी समस्याएं भी सामने आ सकती हैं। ऐसे में यदि आप बारिश प्रभावित क्षेत्रों में रहते हैं या यात्रा की योजना बना रहे हैं, तो मौसम का ताजा अपडेट देखकर ही घर से निकलें। थोड़ी सी सावधानी आपको और आपके परिवार को सुरक्षित रख सकती है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
धर्मेंद्र प्रधान

Parliament Session धर्मेंद्र प्रधान का सम्मान, विपक्ष के हंगामे से Lok Sabha और Rajya Sabha की कार्यवाही प्रभावित

पूर्व केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद सोमवार का दिन संसद में कई अहम घटनाओं का गवाह बना। एक तरफ धर्मेंद्र प्रधान पहली बार संसद पहुंचे, जहां एनडीए (NDA) के सांसदों ने उनका गर्मजोशी से स्वागत करते हुए शॉल ओढ़ाई और मिथिला पाग पहनाकर सम्मानित किया। वहीं दूसरी ओर लोकसभा और राज्यसभा में विपक्ष के हंगामे के कारण सदन की कार्यवाही बार-बार बाधित हुई और दोनों सदनों को दोपहर 12 बजे तक स्थगित करना पड़ा। यह पूरा घटनाक्रम संसद के मौजूदा सत्र का सबसे चर्चित घटनाक्रम बन गया। संसद पहुंचते ही धर्मेंद्र प्रधान का हुआ भव्य स्वागत शिक्षा मंत्री पद छोड़ने के बाद धर्मेंद्र प्रधान पहली बार संसद पहुंचे। संसद परिसर में एनडीए के कई सांसद पहले से उनका इंतजार कर रहे थे। जैसे ही वह पहुंचे, सांसदों ने उन्हें शॉल ओढ़ाकर और पारंपरिक मिथिला पाग पहनाकर सम्मानित किया। इस दौरान सांसदों ने उनके शिक्षा मंत्री के रूप में किए गए कार्यों की सराहना की। कई नेताओं ने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) को लागू करने और शिक्षा क्षेत्र में सुधारों को आगे बढ़ाने में धर्मेंद्र प्रधान की भूमिका महत्वपूर्ण रही है। सम्मान के पीछे क्या है राजनीतिक संदेश? राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यह सम्मान केवल औपचारिक कार्यक्रम नहीं था। इसे भाजपा और एनडीए की ओर से धर्मेंद्र प्रधान के प्रति भरोसे और सम्मान का सार्वजनिक संदेश भी माना जा रहा है। इस्तीफे के बाद भी पार्टी नेतृत्व और सहयोगी दलों का उनके साथ खड़ा दिखना राजनीतिक रूप से अहम माना जा रहा है। इधर संसद में विपक्ष का जोरदार हंगामा जहां संसद परिसर में सम्मान का माहौल था, वहीं सदन के भीतर तस्वीर बिल्कुल अलग नजर आई। लोकसभा और राज्यसभा की कार्यवाही शुरू होते ही विपक्षी सांसदों ने विभिन्न मुद्दों को लेकर सरकार के खिलाफ नारेबाजी शुरू कर दी। विपक्ष लगातार अपनी मांगों पर चर्चा कराने की मांग करता रहा, जबकि सरकार अपने तय एजेंडे के अनुसार कार्यवाही आगे बढ़ाना चाहती थी। दोनों पक्षों के बीच सहमति नहीं बनने के कारण सदन में शोर-शराबा बढ़ता गया। 12 बजे तक स्थगित करनी पड़ी कार्यवाही लगातार हंगामे के चलते लोकसभा और राज्यसभा की कार्यवाही सामान्य रूप से नहीं चल सकी। पीठासीन अधिकारियों ने व्यवस्था बनाए रखने की कोशिश की, लेकिन विपक्ष का विरोध जारी रहने पर दोनों सदनों की कार्यवाही दोपहर 12 बजे तक स्थगित कर दी गई। इस वजह से कई महत्वपूर्ण विधायी और सरकारी कार्य भी तय समय पर नहीं हो सके। शिक्षा मंत्रालय की कमान अब नए मंत्री के हाथों में धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद केंद्र सरकार ने प्रह्लाद जोशी को देश का नया शिक्षा मंत्री बनाया है। अब नई शिक्षा नीति के क्रियान्वयन, उच्च शिक्षा सुधार और छात्रों से जुड़े कई महत्वपूर्ण फैसलों की जिम्मेदारी उनके कंधों पर होगी। शिक्षा जगत की नजर अब नए नेतृत्व के अगले कदमों पर टिकी है। संसद का दिन क्यों रहा खास? सोमवार का दिन संसद में दो अलग-अलग तस्वीरें लेकर आया। एक तरफ धर्मेंद्र प्रधान का सम्मान चर्चा का विषय बना, तो दूसरी तरफ विपक्ष के हंगामे ने संसदीय कार्यवाही को प्रभावित किया। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि आने वाले दिनों में संसद का सत्र और अधिक गर्म रहने की संभावना है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!

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