पेपर लीक और छात्रों के प्रदर्शन के दौरान हुए कथित लाठीचार्ज के विरोध में कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने गुरुवार शाम विपक्षी दलों के नेताओं के साथ अपने आवास से गांधी स्मृति तक पैदल मार्च निकाला। इस मार्च में शिवसेना (यूबीटी), एनसीपी (शरद पवार गुट), तृणमूल कांग्रेस (TMC), झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM), राष्ट्रीय जनता दल (RJD), वाम दल, समाजवादी पार्टी और इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग (IUML) के सांसद भी शामिल हुए।
मार्च से पहले राहुल गांधी के आवास पर विपक्षी सांसदों की बैठक हुई। इसके बाद सभी नेता गांधी स्मृति के लिए रवाना हुए। पुलिस ने सुरक्षा व्यवस्था के तहत कई स्थानों पर बैरिकेडिंग और बसें लगाकर रास्ता रोका। हालांकि, करीब 10 मिनट बाद प्रदर्शनकारियों को आगे बढ़ने की अनुमति दे दी गई।
मार्च के दौरान राहुल गांधी ने कहा कि पेपर लीक की घटनाओं के कारण जिन छात्रों ने अपनी जान गंवाई, उन्हें याद करने के लिए यह मार्च निकाला गया है। उन्होंने कहा कि जब छात्र सड़कों पर अपने भविष्य के लिए संघर्ष कर रहे हैं, तो विपक्ष का भी उनके साथ खड़ा होना जरूरी है।
राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि युवाओं से जुड़े गंभीर मुद्दों पर सरकार संवेदनशीलता नहीं दिखा रही है। उन्होंने कहा कि विपक्ष छात्रों की आवाज संसद से लेकर सड़क तक उठाता रहेगा।
गौरतलब है कि इससे पहले 21 जुलाई को राहुल गांधी, प्रियंका गांधी और कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे समेत कई नेताओं ने प्रधानमंत्री आवास तक मार्च किया था और वहां करीब दो घंटे तक धरना दिया था।
गांधी स्मृति का ऐतिहासिक महत्व
गांधी स्मृति, जिसे पहले बिड़ला हाउस के नाम से जाना जाता था, महात्मा गांधी के जीवन से जुड़ा ऐतिहासिक स्थल है। गांधी जी ने अपने जीवन के अंतिम 144 दिन यहीं बिताए थे। 30 जनवरी 1948 को इसी परिसर में प्रार्थना सभा के लिए जाते समय उनकी हत्या कर दी गई थी। आज भी यहां उनके अंतिम कदमों के निशान और वह स्थान सुरक्षित है, जहां उन्हें गोली मारी गई थी।
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