रायपुर। राजधानी रायपुर के फाफाडीह स्थित वॉलफोर्ट ओजोन में संचालित भारत ग्रुप के खिलाफ छत्तीसगढ़ के विभिन्न जिलों के लोगों ने सामूहिक शिकायत दर्ज कराई है। शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि कंपनी ने अगरबत्ती बनाने की मशीन, बायबैक गारंटी और घर बैठे रोजगार का झांसा देकर उनसे लाखों रुपये वसूले, लेकिन किए गए वादे पूरे नहीं किए।
पीड़ितों ने इस मामले की शिकायत जनदर्शन में कलेक्टर से की है। साथ ही कंपनी के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने की मांग को लेकर मंगलवार को रायपुर पुलिस कमिश्नरेट कार्यालय भी पहुंचे।
घर बैठे कमाई का दिया गया था दावा
शिकायतकर्ताओं के अनुसार, कंपनी ने विज्ञापनों के माध्यम से दावा किया था कि लोग घर बैठे हर महीने 18 हजार से 60 हजार रुपये तक कमा सकते हैं। कंपनी ने भरोसा दिलाया था कि उसकी मशीन प्रतिदिन 80 से 100 किलो अगरबत्ती तैयार करेगी और तैयार उत्पाद को तय कीमत पर स्वयं खरीद लेगी। मशीन की सर्विस और रखरखाव की जिम्मेदारी भी कंपनी ने लेने का आश्वासन दिया था।
मशीनों पर लाखों खर्च, उत्पादन नहीं मिलने का आरोप
पीड़ितों का कहना है कि उन्होंने अपनी बचत और कर्ज लेकर 1.10 लाख से 1.20 लाख रुपये तक की कीमत में मशीनें खरीदीं। आरोप है कि मशीनों का सही तरीके से इंस्टॉलेशन नहीं किया गया। कई मशीनें पूरी तरह बंद पड़ी हैं, जबकि जो मशीनें चल रही हैं, वे वादा किए गए उत्पादन के मुकाबले केवल 15 से 20 किलो तक ही अगरबत्ती बना पा रही हैं।
GST बिल नहीं देने का भी आरोप
शिकायतकर्ताओं ने आरोप लगाया है कि कंपनी ने मशीन बेचते समय वैध GST बिल जारी नहीं किया और केवल कच्चा चालान देकर लेन-देन किया। उन्होंने इस मामले में संभावित कर अनियमितताओं की जांच कराने की मांग भी की है।
कम वजन का कच्चा माल मिलने का दावा
पीड़ितों का आरोप है कि कंपनी ने दस्तावेजों में जितना कच्चा माल दर्शाया, वास्तविक आपूर्ति उससे कम की गई। उनका दावा है कि कई बोरियों में 2 से 3 किलो तक वजन कम मिला। शिकायतकर्ताओं का कहना है कि इसके समर्थन में उनके पास डिजिटल कांटे से की गई तौल के फोटो और अन्य साक्ष्य मौजूद हैं।
तैयार माल खरीदने से किया इनकार
शिकायत में यह भी कहा गया है कि कंपनी ने तैयार अगरबत्ती वापस खरीदने का वादा पूरा नहीं किया। आरोप है कि विभिन्न कारण बताकर तैयार माल लेने से इनकार कर दिया गया, जिससे बड़ी मात्रा में उत्पाद खराब हो गया और लोगों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा। रिजेक्शन के नाम पर मनमानी कटौती करने का आरोप भी लगाया गया है।
धमकी देने का भी आरोप
पीड़ितों का कहना है कि जब उन्होंने मशीनों की खराबी, कम वजन या भुगतान को लेकर सवाल उठाए, तो कंपनी के संचालकों और कर्मचारियों ने अनुबंध समाप्त करने और कानूनी कार्रवाई की धमकी दी। कुछ लोगों पर कथित रूप से माफीनामा लिखने का दबाव भी बनाया गया।
कलेक्टर से की ये मांग
शिकायतकर्ताओं ने जिला प्रशासन से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने, कंपनी के वित्तीय लेन-देन और नापतौल की जांच कराने, दोषपूर्ण मशीनें वापस लेने तथा पीड़ितों की जमा राशि ब्याज और मुआवजे सहित लौटाने की मांग की है। साथ ही कंपनी के जिम्मेदार लोगों के खिलाफ धोखाधड़ी और आपराधिक धमकी के मामले दर्ज करने की भी मांग की गई है।
फिलहाल, मामले में संबंधित अधिकारियों या कंपनी की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

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