IPL में हर साल किसी न किसी खिलाड़ी या कप्तान की खूब चर्चा होती है, लेकिन इस बार एक नाम लगातार सुर्खियों में होकर भी “कम शोर” में रह गया — वह हैं Rajat Patidar।
जहां विराट कोहली, बड़े सितारे और टीम की जीत की कहानियां छाई रहीं, वहीं पाटीदार ने चुपचाप अपनी कप्तानी से एक ऐसी टीम खड़ी कर दी जिसने RCB को ऐतिहासिक सफलता दिलाई।
कैसे बने रजत पाटीदार RCB के कप्तान?
रजत पाटीदार का IPL सफर आसान नहीं रहा।
- पहले वह टीम में एक साधारण खिलाड़ी थे
- चोट ने उनके करियर को कई बार रोका
- कई सीजन वह बाहर भी रहे
- लेकिन वापसी के बाद उन्होंने दमदार बल्लेबाज़ी से सबका ध्यान खींचा
इसी भरोसे के दम पर RCB ने उन्हें कप्तानी सौंपी — और यहीं से कहानी बदल गई।
कप्तान बनते ही बदल गई RCB की किस्मतकप्तान बनने के बाद पाटीदार ने टीम को एक नई दिशा दी:
- खिलाड़ियों को खुलकर खेलने की आज़ादी दी
- युवा खिलाड़ियों पर भरोसा जताया
- मैच में शांत और संतुलित रणनीति अपनाई
- बड़े नामों के दबाव से टीम को दूर रखा
नतीजा यह हुआ कि RCB ने लंबे इंतजार के बाद IPL खिताब अपने नाम किया।
जीत के बाद भी क्यों कम हो रही चर्चा?
RCB की जीत के बाद भी पाटीदार की चर्चा उतनी नहीं हो रही, जितनी होनी चाहिए थी। इसके पीछे कुछ कारण हैं:
- टीम में विराट कोहली जैसे बड़े स्टार मौजूद हैं
- मीडिया फोकस अक्सर बड़े नामों पर रहता है
- पाटीदार का स्वभाव बेहद शांत और लो-प्रोफाइल है
- वह खुद भी ज्यादा पब्लिसिटी से दूर रहते हैं
खास बात जो उन्हें अलग बनाती हैरजत पाटीदार की सबसे बड़ी ताकत उनकी सादगी है।
ना ज्यादा बयानबाजी
- ना कैमरे के लिए ड्रामा
- सिर्फ काम और रिजल्ट
यही वजह है कि वह “कम बोले लेकिन बड़ा असर छोड़ने वाले कप्तान” बनकर उभरे हैं।
