लद्दाख के सामाजिक कार्यकर्ता और पर्यावरणविद् सोनम वांगचुक (Sonam Wangchuk) का आमरण अनशन अब बेहद नाजुक दौर में पहुंच गया है। 20 दिनों से लगातार भूख हड़ताल पर बैठे वांगचुक की सेहत को लेकर डॉक्टरों ने गंभीर चिंता जताई है। मेडिकल टीम का कहना है कि यदि अनशन जल्द खत्म नहीं किया गया तो शरीर के महत्वपूर्ण अंग प्रभावित हो सकते हैं और Organ Failure का खतरा बढ़ सकता है।
इसी बीच सोनम वांगचुक का एक भावुक बयान सामने आया है। उन्होंने कहा, “मैं 20 जुलाई तक जिंदा रहना चाहता हूं।” उनके इस बयान ने समर्थकों के साथ-साथ आम लोगों की चिंता भी बढ़ा दी है।
Health Update: डॉक्टरों ने क्यों जताई चिंता?
Sonam Wangchuk की नियमित जांच कर रहे डॉक्टरों के अनुसार, लंबे समय तक भोजन नहीं लेने से शरीर तेजी से कमजोर हो रहा है। लगातार उपवास की वजह से किडनी, लीवर और अन्य महत्वपूर्ण अंगों पर दबाव बढ़ सकता है। डॉक्टरों ने स्पष्ट कहा है कि यदि अनशन जारी रहा तो स्थिति गंभीर हो सकती है।
मेडिकल टीम ने उन्हें जल्द से जल्द अनशन समाप्त कर इलाज शुरू करने की सलाह दी है। हालांकि, वांगचुक अभी भी अपनी मांगों पर कायम हैं।
आखिर किस बात को लेकर कर रहे हैं Hunger Strike?
Sonam Wangchuk लंबे समय से लद्दाख के पर्यावरण संरक्षण, स्थानीय लोगों के अधिकार, प्राकृतिक संसाधनों की सुरक्षा और क्षेत्र के संतुलित विकास की मांग उठाते रहे हैं। उनका कहना है कि इन मुद्दों पर केंद्र सरकार को ठोस और समयबद्ध कदम उठाने चाहिए।
इन्हीं मांगों को लेकर उन्होंने आमरण अनशन शुरू किया, जो अब 20वें दिन में प्रवेश कर चुका है।
’20 जुलाई तक जिंदा रहना चाहता हूं’ बयान क्यों बना चर्चा का विषय?
अनशन के दौरान दिया गया वांगचुक का यह बयान सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। समर्थकों का कहना है कि यह सिर्फ एक भावनात्मक अपील नहीं, बल्कि सरकार तक अपनी बात पहुंचाने की उनकी दृढ़ इच्छा को भी दर्शाता है।
देशभर से लोग उनके बेहतर स्वास्थ्य की कामना कर रहे हैं और सरकार से बातचीत के जरिए समाधान निकालने की मांग कर रहे हैं।
देशभर से मिल रहा समर्थन
वांगचुक के आंदोलन को कई सामाजिक संगठनों, छात्रों, पर्यावरण प्रेमियों और नागरिक समूहों का समर्थन मिल रहा है। सोशल मीडिया पर भी उनके समर्थन में लगातार पोस्ट साझा की जा रही हैं। कई लोगों का मानना है कि बातचीत के जरिए इस गतिरोध का समाधान निकाला जाना चाहिए।
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