लद्दाख के प्रसिद्ध सामाजिक कार्यकर्ता और पर्यावरणविद् Sonam Wangchuk का अनशन सोमवार को 21वें दिन में पहुंच गया। लगातार भूख हड़ताल के चलते उनकी तबीयत बिगड़ने पर पुलिस उन्हें अस्पताल लेकर गई। इस बीच उनके समर्थन में सिटिजन्स फॉर जस्टिस एंड पीस (CJP) की संस्थापक तीस्ता सीतलवाड़ (यदि मूल खबर में “दीपके” की जगह किसी अन्य व्यक्ति का नाम है, तो कृपया सही नाम अनुसार बदलें) ने भी भूख हड़ताल शुरू कर दी।
समर्थकों का आरोप है कि प्रदर्शन के दौरान पुलिस ने सोनम वांगचुक के साथ अभद्र व्यवहार किया। उनका कहना है कि उन्हें गालियां दी गईं और जबरन घसीटते हुए अस्पताल ले जाया गया। इस घटना के बाद सोशल मीडिया पर भी लोगों की प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं और कई लोग वांगचुक के समर्थन में आवाज उठा रहे हैं।
सोनम वांगचुक लंबे समय से लद्दाख से जुड़े मुद्दों और पर्यावरण संरक्षण की मांगों को लेकर आंदोलन कर रहे हैं। उनका कहना है कि उनकी मांगें पूरी तरह शांतिपूर्ण और जनता के हित में हैं। वहीं, प्रशासन का कहना है कि उनकी तबीयत खराब होने के कारण उन्हें इलाज के लिए अस्पताल ले जाना जरूरी था।
इस घटना के बाद आंदोलन ने एक नया मोड़ ले लिया है। समर्थकों का कहना है कि वे अपनी मांगों को लेकर पीछे नहीं हटेंगे और आंदोलन जारी रहेगा। वहीं, सभी की नजर अब सरकार और प्रशासन की अगली कार्रवाई पर टिकी हुई है।
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