लद्दाख के प्रसिद्ध शिक्षा सुधारक और पर्यावरण कार्यकर्ता सोनम वांगचुक (Sonam Wangchuk) का आंदोलन अब निर्णायक मोड़ पर पहुंचता दिख रहा है। उनकी भूख हड़ताल (Hunger Strike) का 21वां दिन पूरा होने के साथ ही स्वास्थ्य को लेकर चिंता बढ़ गई। तबीयत बिगड़ने पर पुलिस उन्हें मेडिकल जांच के लिए अस्पताल लेकर गई। इस दौरान पुलिस की कार्रवाई को लेकर भी विवाद खड़ा हो गया है।
घटना के बाद नागरिक अधिकार संगठन Citizens for Justice and Peace (CJP) की ओर से भी विरोध तेज हो गया। संगठन की ओर से समर्थन में भूख हड़ताल शुरू की गई और आरोप लगाया गया कि वांगचुक के साथ पुलिस ने सख्ती दिखाई। हालांकि प्रशासन का कहना है कि उन्हें केवल स्वास्थ्य कारणों से अस्पताल ले जाया गया।
आखिर क्यों चर्चा में हैं Sonam Wangchuk?
Sonam Wangchuk पिछले तीन सप्ताह से लद्दाख के भविष्य और वहां के लोगों के अधिकारों को लेकर शांतिपूर्ण अनशन कर रहे हैं। उनका कहना है कि हिमालयी क्षेत्र का पर्यावरण लगातार खतरे में है और इसे बचाने के लिए मजबूत कानूनी सुरक्षा जरूरी है।
उनकी मांगें केवल पर्यावरण तक सीमित नहीं हैं। वे चाहते हैं कि स्थानीय लोगों के अधिकार, रोजगार और सांस्कृतिक पहचान को भी संवैधानिक संरक्षण मिले।
क्या हैं वांगचुक की प्रमुख मांगें?
अनशन के दौरान सोनम वांगचुक लगातार चार प्रमुख मुद्दे उठा रहे हैं—
- लद्दाख को संविधान की Sixth Schedule (छठी अनुसूची) के तहत संरक्षण मिले।
- हिमालयी पर्यावरण और प्राकृतिक संसाधनों की रक्षा के लिए प्रभावी नीति बने।
- स्थानीय युवाओं के रोजगार और भूमि अधिकार सुरक्षित किए जाएं।
- लद्दाख के लोगों को निर्णय प्रक्रिया में अधिक प्रतिनिधित्व मिले।
उनका कहना है कि यदि समय रहते इन मुद्दों पर ध्यान नहीं दिया गया, तो आने वाले वर्षों में लद्दाख की पारिस्थितिकी और संस्कृति दोनों पर गंभीर असर पड़ सकता है।
21वें दिन बिगड़ी तबीयत, अस्पताल ले गई पुलिस
लगातार 21 दिनों तक भूख हड़ताल पर रहने के कारण सोनम वांगचुक की तबीयत कमजोर पड़ गई। मेडिकल टीम की सलाह के बाद पुलिस उन्हें अस्पताल लेकर गई, जहां उनका स्वास्थ्य परीक्षण किया गया।
प्रशासन का दावा है कि यह कदम केवल उनकी सुरक्षा और इलाज के लिए उठाया गया। वहीं आंदोलन से जुड़े लोगों का आरोप है कि अस्पताल ले जाने के दौरान पुलिस ने अनावश्यक बल प्रयोग किया। सोशल मीडिया पर इस घटना के कई वीडियो और तस्वीरें भी सामने आई हैं, जिनकी अलग-अलग तरह से व्याख्या की जा रही है। इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है।
CJP की ओर से भी शुरू हुआ विरोध
सोनम वांगचुक के समर्थन में Citizens for Justice and Peace (CJP) से जुड़े लोगों ने भी भूख हड़ताल शुरू की। संगठन का कहना है कि लोकतांत्रिक तरीके से अपनी बात रखने वाले लोगों के साथ सम्मानजनक व्यवहार होना चाहिए।
उन्होंने केंद्र सरकार से अपील की कि आंदोलन को केवल कानून-व्यवस्था के नजरिए से देखने के बजाय बातचीत के जरिए समाधान निकाला जाए।
सोशल मीडिया पर बढ़ा समर्थन
सोनम वांगचुक के अस्पताल पहुंचने की खबर के बाद सोशल मीडिया पर हजारों लोगों ने उनकी सलामती की कामना की। पर्यावरण कार्यकर्ताओं, छात्रों और कई सामाजिक संगठनों ने भी उनके आंदोलन का समर्थन किया।
लोगों का कहना है कि लद्दाख जैसे संवेदनशील क्षेत्र से जुड़े मुद्दों पर गंभीर और दीर्घकालिक नीति बनाने की जरूरत है।
प्रशासन का पक्ष
प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि वांगचुक को उनकी बिगड़ती स्वास्थ्य स्थिति को देखते हुए अस्पताल ले जाया गया। अधिकारियों के अनुसार उनका स्वास्थ्य लगातार निगरानी में है। वहीं, पुलिस पर लगाए गए दुर्व्यवहार के आरोपों को लेकर अभी तक कोई विस्तृत आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है।
हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!

