भारतीय शेयर बाजार (Stock Market) में गुरुवार को कारोबार शुरू होते ही निवेशकों की चिंता बढ़ गई। Sensex और Nifty में तेज गिरावट देखने को मिली। सेंसेक्स एक समय करीब 850 अंक तक टूट गया, जबकि निफ्टी भी लगभग 300 अंक नीचे चला गया। बाजार में सबसे ज्यादा दबाव Auto और Metal Stocks पर दिखाई दिया।
बाजार की इस गिरावट ने निवेशकों की चिंता बढ़ा दी है। पिछले कुछ कारोबारी सत्रों से लगातार दबाव में चल रहे शेयर बाजार में गुरुवार को भी बिकवाली का सिलसिला जारी रहा।
Sensex-Nifty में बड़ी गिरावट
कारोबार के दौरान BSE Sensex करीब 850 अंक तक फिसलकर 72,000 के आसपास पहुंच गया। वहीं, NSE Nifty 50 में करीब 300 अंकों की गिरावट दर्ज की गई। बाजार के ज्यादातर प्रमुख शेयर लाल निशान में कारोबार करते नजर आए।
इस गिरावट का असर निवेशकों के पोर्टफोलियो पर भी साफ दिखाई दिया। खासकर ऑटो और मेटल कंपनियों के शेयरों में बिकवाली बढ़ने से बाजार पर दबाव और गहरा गया।
Auto और Metal Stocks पर सबसे ज्यादा दबाव
गुरुवार को Auto और Metal सेक्टर बाजार के कमजोर हिस्सों में रहे। निवेशकों ने कई प्रमुख कंपनियों के शेयरों में मुनाफावसूली और बिकवाली की।
ऑटो सेक्टर पर बढ़ती लागत और आर्थिक अनिश्चितता को लेकर चिंता बनी हुई है। वहीं Metal Stocks में वैश्विक मांग और कमोडिटी कीमतों को लेकर निवेशक सतर्क नजर आ रहे हैं।
FII Selling ने बढ़ाई बाजार की परेशानी
भारतीय बाजार में विदेशी निवेशकों की बिकवाली भी चिंता का बड़ा कारण बनी हुई है। Foreign Institutional Investors (FII) लगातार भारतीय शेयर बाजार से पैसा निकाल रहे हैं। इससे घरेलू बाजार में खरीदारी का संतुलन बिगड़ा है।
जानकारों के मुताबिक, जब विदेशी निवेशक बड़े पैमाने पर बिकवाली करते हैं तो इसका असर खासकर बड़े और प्रमुख शेयरों पर दिखाई देता है। यही वजह है कि Sensex और Nifty जैसे प्रमुख इंडेक्स पर भी दबाव बढ़ रहा है।
महंगा Crude Oil भी बढ़ा रहा टेंशन
अंतरराष्ट्रीय बाजार में Crude Oil की कीमतों में तेजी ने भी भारतीय बाजार की चिंता बढ़ा दी है। भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा कच्चे तेल के आयात से पूरा करता है। ऐसे में तेल महंगा होने पर देश के Import Bill और महंगाई पर असर पड़ सकता है।
निवेशकों को डर है कि लंबे समय तक महंगा crude रहने से कंपनियों की लागत बढ़ सकती है और इसका असर उनकी कमाई पर पड़ सकता है।
RBI Policy और Interest Rate पर भी नजर
बाजार की नजर Reserve Bank of India (RBI) की मौद्रिक नीति पर भी बनी हुई है। ब्याज दरों में बदलाव का सीधा असर बैंकिंग, ऑटो, रियल एस्टेट और दूसरे कर्ज आधारित कारोबारों पर पड़ता है।
ऐसे माहौल में निवेशक नए निवेश को लेकर थोड़ा सतर्क रुख अपना रहे हैं। बाजार में वैश्विक संकेतों के साथ-साथ घरेलू आर्थिक आंकड़ों का भी असर देखने को मिल रहा है।
IT Stocks ने दी थोड़ी राहत
बाजार में जहां कई सेक्टरों में गिरावट रही, वहीं IT Stocks में कुछ मजबूती देखने को मिली। आईटी कंपनियों के आगामी तिमाही नतीजों को लेकर निवेशकों की नजर बनी हुई है।
अब बाजार की दिशा काफी हद तक कंपनियों के Quarterly Results, crude oil की कीमत और विदेशी निवेशकों की गतिविधियों से तय होगी।
आगे कैसी रहेगी बाजार की चाल?
फिलहाल शेयर बाजार में volatility बनी हुई है। निवेशकों के लिए आने वाले दिनों में FII-DII activity, crude oil prices, RBI policy और corporate earnings अहम संकेत रहेंगे।
अगर विदेशी बिकवाली कम होती है और कंपनियों के तिमाही नतीजे उम्मीद से बेहतर रहते हैं, तो बाजार में recovery देखने को मिल सकती है। दूसरी तरफ, महंगा crude और लगातार FII selling बाजार पर दबाव बनाए रख सकती है।
ऐसे समय में निवेशकों के लिए जल्दबाजी में फैसला लेने के बजाय बाजार के अगले संकेतों पर नजर रखना ज्यादा जरूरी है।
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