West Bengal की राजनीति में एक बार फिर सियासी भूचाल आता दिखाई दे रहा है। ममता बनर्जी की पार्टी तृणमूल कांग्रेस (TMC) के अंदर बढ़ती नाराज़गी अब खुलकर सामने आने लगी है। राजनीतिक गलियारों में चर्चा तेज है कि पार्टी के कई विधायक नेतृत्व से खुश नहीं हैं और अलग रणनीति बनाने में जुटे हुए हैं।
सूत्रों के मुताबिक करीब 50 विधायक एक नए समीकरण पर काम कर रहे हैं। दावा किया जा रहा है कि ये विधायक ऋतब्रत बनर्जी को Leader of Opposition (LoP) के चेहरे के तौर पर आगे बढ़ा सकते हैं। हालांकि अभी तक इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन बंगाल की राजनीति में इस खबर ने हलचल जरूर बढ़ा दी है।
होटल मीटिंग और अंदरखाने की राजनीति
बीते कुछ दिनों में कोलकाता के होटल और विधायक हॉस्टल में हुई कुछ बैठकों ने राजनीतिक अटकलों को और हवा दे दी। खबर है कि कई असंतुष्ट विधायक गुप्त रूप से मुलाकात कर रहे हैं और पार्टी के भविष्य को लेकर चर्चा कर रहे हैं।
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यह केवल नाराज़गी नहीं बल्कि संगठन के अंदर बढ़ती दूरी का संकेत हो सकता है। कुछ नेताओं का आरोप है कि पार्टी में फैसले अब सीमित लोगों तक सिमट गए हैं, जिससे कई पुराने चेहरे खुद को अलग-थलग महसूस कर रहे हैं।
क्यों चर्चा में हैं ऋतब्रत बनर्जी?
हाल ही में पार्टी विरोधी गतिविधियों के आरोप में ऋतब्रत बनर्जी को TMC से बाहर का रास्ता दिखाया गया था। इसके बाद से ही उनका नाम लगातार सुर्खियों में बना हुआ है। अब खबरें हैं कि असंतुष्ट विधायक उन्हें विपक्ष के बड़े चेहरे के रूप में सामने लाना चाहते हैं।
अगर ऐसा होता है तो यह केवल एक राजनीतिक नियुक्ति नहीं होगी, बल्कि ममता बनर्जी के नेतृत्व को सीधी चुनौती मानी जाएगी।
ममता बनर्जी ने क्या कहा?
इन सभी अटकलों के बीच ममता बनर्जी ने भाजपा पर उनकी पार्टी को तोड़ने की कोशिश करने का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि बाहरी ताकतें TMC को कमजोर करने की कोशिश कर रही हैं, लेकिन पार्टी एकजुट है और हर चुनौती का सामना करेगी।
TMC के कई वरिष्ठ नेताओं ने भी दावा किया है कि पार्टी में किसी तरह की टूट नहीं है और विपक्ष जानबूझकर भ्रम फैलाने की कोशिश कर रहा है।
फर्जी हस्ताक्षर विवाद ने बढ़ाई टेंशन
इसी बीच नेता प्रतिपक्ष के नाम को लेकर फर्जी हस्ताक्षर विवाद ने मामले को और संवेदनशील बना दिया है। कुछ विधायकों ने आरोप लगाया कि उनकी जानकारी के बिना दस्तावेजों में उनके हस्ताक्षर इस्तेमाल किए गए।
इस विवाद के बाद पार्टी के अंदर चल रही खींचतान अब सार्वजनिक चर्चा का हिस्सा बन गई है।
बंगाल की राजनीति में क्या होगा आगे?
राजनीतिक विशेषज्ञों का कहना है कि अगर असंतुष्ट विधायकों की संख्या इतनी बड़ी साबित होती है, तो यह TMC के लिए बड़ा झटका हो सकता है। इसका असर आने वाले चुनावों और पार्टी की रणनीति दोनों पर पड़ सकता है।
फिलहाल बंगाल की राजनीति में हर कोई अगले कदम का इंतजार कर रहा है। आने वाले दिनों में यह साफ हो जाएगा कि यह केवल नाराज़गी है या फिर पश्चिम बंगाल में कोई बड़ा राजनीतिक बदलाव होने वाला है।
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