नई दिल्ली:
भारत के 14वें उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने सोमवार को स्वास्थ्य कारणों का हवाला देते हुए अपने पद से इस्तीफा दे दिया। उनके अचानक उठाए गए इस कदम ने राजनीतिक हलकों में हलचल मचा दी है।
धनखड़ ने राष्ट्रपति कोविंद के कार्यकाल के दौरान 6 अगस्त 2022 को हुए उपराष्ट्रपति चुनाव में विपक्ष की उम्मीदवार मार्गरेट अल्वा को हराया था। उन्हें कुल 725 में से 528 वोट मिले थे, जबकि अल्वा को मात्र 182 वोट।

झुंझुनू से उपराष्ट्रपति भवन तक का सफर
18 मई 1951 को राजस्थान के झुंझुनू जिले में एक साधारण किसान परिवार में जन्मे जगदीप धनखड़ की शिक्षा एकदम साधारण पृष्ठभूमि में हुई।
- पहले गांव में पढ़ाई की
- फिर सैनिक स्कूल चित्तौड़गढ़ में दाखिला मिला
- उनका NDA में चयन भी हुआ, लेकिन उन्होंने वहाँ जाने की बजाय पढ़ाई जारी रखी
इसके बाद उन्होंने राजस्थान यूनिवर्सिटी से ग्रेजुएशन और LLB की पढ़ाई पूरी की। जयपुर में वकालत की शुरुआत की और जल्द ही राजनीति में सक्रिय हो गए।
राजनीतिक सफर और उपलब्धियाँ
- 1989 से 1991 तक वे झुंझुनू से लोकसभा सांसद रहे
- वी.पी. सिंह और चंद्रशेखर सरकार में केंद्रीय मंत्री भी बने
- 30 जुलाई 2019 को, राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने उन्हें पश्चिम बंगाल का 28वां राज्यपाल नियुक्त किया था
- पश्चिम बंगाल की राजनीति में उन्होंने ममता बनर्जी की सरकार से तीखे टकराव के कारण खूब सुर्खियां बटोरीं
स्वास्थ्य बना वजह या कोई और संकेत?
धनखड़ के इस्तीफे की आधिकारिक वजह भले ही स्वास्थ्य बताई गई हो, लेकिन राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा तेज है कि कहीं इसके पीछे कोई आंतरिक मतभेद या रणनीतिक बदलाव तो नहीं? आने वाले दिनों में इस पर और स्पष्टता आ सकती है।
क्या कहते हैं जानकार?
वरिष्ठ पत्रकारों और राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि धनखड़ का कार्यकाल अपेक्षाकृत शांत और गरिमामय रहा, लेकिन बंगाल से जुड़े उनके बयान हमेशा चर्चा में रहे।
निष्कर्ष:
जगदीप धनखड़ का इस्तीफा एक संवेदनशील समय पर आया है जब देश 2026 के आम चुनाव की तैयारियों में जुटा है। अब सबकी निगाहें इस पर होंगी कि उनकी जगह अगला उपराष्ट्रपति कौन बनता है, और क्या इससे सत्ता समीकरणों में कोई बड़ा बदलाव आता है।
