उत्तर प्रदेश में मदरसा शिक्षा को लेकर योगी आदित्यनाथ सरकार एक बड़ा बदलाव करने की तैयारी में है। सरकार UP Madrasa Education से जुड़े कानून में संशोधन का प्रस्ताव लाने जा रही है। अगर यह प्रस्ताव मंजूर होता है तो मदरसा बोर्ड के तहत चलने वाले संस्थानों में पढ़ाई 12वीं कक्षा तक ही होगी। इसके बाद Kamil और Fazil Degree देने की व्यवस्था खत्म हो सकती है।
सरकार के इस प्रस्ताव ने मदरसा शिक्षा से जुड़े छात्रों, शिक्षकों और संस्थानों के बीच चर्चा तेज कर दी है। खासतौर पर उन विद्यार्थियों के लिए यह बदलाव महत्वपूर्ण है, जो 12वीं के बाद मदरसा बोर्ड से कामिल या फाजिल की पढ़ाई करने की योजना बना रहे हैं।
12वीं तक सीमित होगी मदरसा बोर्ड की पढ़ाई
प्रस्तावित संशोधन के तहत मदरसा बोर्ड की जिम्मेदारी मुख्य रूप से स्कूली शिक्षा तक सीमित किए जाने की बात है। यानी मदरसों में शुरुआती कक्षाओं से लेकर हाईस्कूल और इंटरमीडिएट यानी 12वीं तक पढ़ाई जारी रह सकेगी।
लेकिन 12वीं के बाद मिलने वाली उच्च शिक्षा की डिग्री मदरसा बोर्ड के माध्यम से नहीं दी जाएगी। छात्रों को आगे की पढ़ाई के लिए विश्वविद्यालय या अन्य मान्यता प्राप्त उच्च शिक्षण संस्थानों में जाना होगा।
Kamil और Fazil Course पर क्या होगा असर?
इस प्रस्ताव का सबसे अहम हिस्सा Kamil और Fazil courses से जुड़ा है। मौजूदा व्यवस्था में इन पाठ्यक्रमों को उच्च शिक्षा के स्तर से जोड़ा जाता रहा है। नए प्रावधान लागू होने पर मदरसा बोर्ड इन स्तरों की डिग्री जारी नहीं कर सकेगा।
इसका मतलब साफ है कि 12वीं के बाद अगर कोई छात्र उच्च शिक्षा हासिल करना चाहता है तो उसे संबंधित यूनिवर्सिटी या मान्यता प्राप्त संस्थान का विकल्प चुनना होगा।
Supreme Court के फैसले के बाद क्यों आया बदलाव?
मदरसा शिक्षा में प्रस्तावित संशोधन को सुप्रीम कोर्ट के मदरसा कानून से जुड़े फैसले की पृष्ठभूमि में भी देखा जा रहा है। अदालत की सुनवाई के दौरान मदरसा बोर्ड की शक्तियों और उच्च शिक्षा की डिग्री से जुड़े अधिकारों पर महत्वपूर्ण सवाल सामने आए थे।
इसके बाद राज्य सरकार की ओर से कानून में बदलाव की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा रही है। प्रस्तावित संशोधन का उद्देश्य मदरसा बोर्ड की भूमिका को स्कूली शिक्षा तक सीमित करने और उच्च शिक्षा को विश्वविद्यालयी व्यवस्था से जोड़ने की दिशा में कदम माना जा रहा है।
छात्रों पर क्या पड़ेगा असर?
अगर यह संशोधन लागू हो जाता है तो मदरसा बोर्ड से 12वीं तक पढ़ाई करने वाले छात्रों के लिए आगे की राह बदल जाएगी। उन्हें कामिल या फाजिल की डिग्री के लिए मदरसा बोर्ड पर निर्भर रहने के बजाय संबंधित विश्वविद्यालय या उच्च शिक्षण संस्थान की व्यवस्था में जाना होगा।
वहीं, मौजूदा छात्रों और पहले से पढ़ाई कर रहे विद्यार्थियों को लेकर सरकार किस तरह की व्यवस्था लागू करेगी, यह अंतिम नियम सामने आने के बाद ही स्पष्ट होगा।
अभी प्रस्ताव है, अंतिम फैसला बाकी
यहां यह समझना जरूरी है कि फिलहाल इसे सरकार का प्रस्तावित संशोधन बताया जा रहा है। जब तक कैबिनेट से अंतिम मंजूरी और उसके बाद जरूरी कानूनी प्रक्रिया पूरी नहीं होती, तब तक इसे लागू नियम नहीं माना जा सकता।
अब सबकी नजर योगी कैबिनेट के फैसले पर है। यदि प्रस्ताव को मंजूरी मिलती है तो उत्तर प्रदेश में मदरसा शिक्षा का मौजूदा ढांचा बदल जाएगा और 12वीं के बाद की पढ़ाई पूरी तरह उच्च शिक्षा संस्थानों की व्यवस्था से जुड़ सकती है।
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