नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को केंद्र सरकार से 18 साल से कम उम्र के बच्चों के सोशल मीडिया अकाउंट को लेकर वैधानिक नियम बनाने पर विचार करने को कहा। कोर्ट ने कहा कि सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स को नाबालिगों से जुड़े भारतीय कानूनों का पालन करना होगा।
मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना की तीन सदस्यीय बेंच जस्ट राइट्स फॉर चिल्ड्रन अलायंस (JRCA) की याचिका पर सुनवाई कर रही थी। याचिका में बच्चों की सोशल मीडिया और अन्य डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर सुरक्षा के लिए नियम बनाने की मांग की गई है।
नियम सिर्फ गाइडलाइन तक सीमित न रहें
सुनवाई के दौरान जस्टिस जॉयमाल्या बागची ने कहा कि बच्चों की सुरक्षा से जुड़ी शर्तों को केवल गाइडलाइन तक सीमित नहीं रखा जाना चाहिए। उन्होंने सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता से इंटरमीडियरी नियमों के तहत इसे वैधानिक रूप देने की संभावना पर विचार करने को कहा।
कोर्ट ने इस बात पर जोर दिया कि भारत में काम करने वाले सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स को भारतीय कानूनों के अनुरूप अपनी व्यवस्था तैयार करनी होगी।
माता-पिता की सहमति का विकल्प भी सामने आया
सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की धारा 79 का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि यह मुद्दा पहली नजर में डिजिटल पर्सनल डेटा प्रोटेक्शन एक्ट, 2023 के दायरे में भी आता है।
सुनवाई में यह सुझाव भी सामने आया कि नाबालिगों के सोशल मीडिया अकाउंट के लिए माता-पिता या कानूनी अभिभावक की सहमति को अनिवार्य किया जा सकता है। ऐसी स्थिति में प्लेटफॉर्म और बच्चे की बजाय माता-पिता के बीच अनुबंध की व्यवस्था पर विचार किया जा सकता है।
नाबालिगों के अनुबंध को लेकर दलील
JRCA की ओर से वरिष्ठ वकील एचएस फूलका ने दलील दी कि डेटा प्रोटेक्शन कानून के संबंधित प्रावधानों के लागू होने का इंतजार करने की जरूरत नहीं है। उन्होंने कहा कि मौजूदा भारतीय कानून के तहत नाबालिग स्वतंत्र रूप से कानूनी अनुबंध नहीं कर सकते और ऐसे अनुबंधों को लेकर पहले से कानूनी प्रावधान मौजूद हैं।
विदेशी कंपनियों पर भी लागू होंगे भारतीय कानून
सुनवाई के दौरान बेंच ने इस पहलू पर भी ध्यान दिलाया कि भारत में काम करने वाले कई डिजिटल इंटरमीडियरीज विदेशों में रजिस्टर्ड या रेगुलेटेड हैं। कोर्ट के अनुसार, भारत में सेवाएं देने के दौरान इन प्लेटफॉर्म्स को लागू भारतीय कानूनों का पालन करना होगा।
याचिका में ऑनलाइन खतरों का जिक्र
JRCA की याचिका में बच्चों को ऑनलाइन ग्रूमिंग, यौन शोषण, डिजिटल तस्करी और सेक्सटॉर्शन जैसे खतरों से बचाने के लिए सुरक्षा उपायों की मांग की गई है। इसके अलावा बच्चों की व्यवहार संबंधी प्रोफाइलिंग, निजी डेटा के गलत इस्तेमाल और साइबरबुलिंग जैसे जोखिमों का भी उल्लेख किया गया है।
सितंबर में सुप्रीम कोर्ट ने इसी मामले में केंद्र से जवाब मांगा था और कहा था कि नाबालिगों के सोशल मीडिया इस्तेमाल को लेकर सुरक्षा उपाय जरूरी हैं।

