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रेवाड़ी में नीलगाय को बचाने के चक्कर में पेड़ से टकराई कार, दो युवकों की मौत; अग्निवीर बनने वाला था गजेंद्र

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हरियाणा के रेवाड़ी में छोटी दीपावली पर दर्दनाक सड़क हादसा हो गया। दिवाली की खरीदारी कर घर लौट रहे युवकों की कार अचानक सामने आई नीलगाय को बचाने के प्रयास में अनियंत्रित होकर पेड़ से टकरा गई। हादसे में दो युवकों की मौत हो गई, जबकि कार चालक घायल हो गया।

सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और घायलों को अस्पताल पहुंचाया। डॉक्टरों ने गजेंद्र और सुमित को मृत घोषित कर दिया। वहीं, घायल मोहित को गंभीर हालत में निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया है।

मृतकों की पहचान गांव मूंदी निवासी गजेंद्र और सुमित के रूप में हुई है। गजेंद्र की जनवरी में अग्निवीर के तौर पर जॉइनिंग होनी थी, जबकि सुमित 12वीं कक्षा का छात्र था। दोनों की मौत की खबर मिलते ही परिवारों में मातम छा गया।

दिवाली की खरीदारी के लिए निकले थे युवक

जानकारी के मुताबिक, गांव मूंदी के तीन युवक गजेंद्र, सुमित और मोहित शनिवार को बलेनो कार से दिवाली की खरीदारी करने निकले थे। इसी दौरान रास्ते में अचानक नीलगाय आ गई। उसे बचाने की कोशिश में कार चालक ने वाहन मोड़ा, लेकिन कार से नियंत्रण खो गया।

नीलगाय को बचाते समय पेड़ से टकराई कार

जांच अधिकारी संदीप के अनुसार, नीलगाय को बचाने के प्रयास में कार अनियंत्रित होकर सड़क किनारे पेड़ से जा टकराई। टक्कर इतनी जोरदार थी कि कार में सवार युवक घायल हो गए।

हादसे के बाद सभी घायलों को अस्पताल पहुंचाया गया। वहां डॉक्टरों ने गजेंद्र और सुमित को मृत घोषित कर दिया, जबकि मोहित का इलाज जारी है।

जनवरी में होनी थी गजेंद्र की अग्निवीर जॉइनिंग

हादसे में जान गंवाने वाले गजेंद्र की जनवरी में अग्निवीर के रूप में जॉइनिंग होनी थी। वहीं, सुमित 12वीं कक्षा में पढ़ता था। दोनों युवकों की असमय मौत से परिवारों पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है।

गांव में पसरा मातम, पोस्टमॉर्टम के बाद परिजनों को सौंपे शव

हादसे की सूचना मिलने पर खोल थाना पुलिस मौके पर पहुंची और जांच शुरू की। दोनों युवकों की मौत की खबर गांव मूंदी पहुंचते ही मातम छा गया। परिजन रोते-बिलखते अस्पताल पहुंचे और पुलिस से घटना की जानकारी ली।

पुलिस ने क्षतिग्रस्त कार को सड़क से हटवाया। पोस्टमॉर्टम के बाद दोनों युवकों के शव परिजनों को सौंप दिए गए हैं।

Muskan Negi

muskannegi1302@gmail.com

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भारत में हर साल 1.22 लाख करोड़ रुपए का खाना होता है बर्बाद, कोल्ड स्टोरेज की कमी और मौसम की मार से बढ़ रही महंगाई

भारत में हर साल करीब 1.22 लाख करोड़ रुपए का खाद्य उत्पादन लोगों की थाली तक पहुंचने से पहले ही बर्बाद हो जाता है। क्लाइमेट ट्रेंड्स की रिपोर्ट के मुताबिक, इसके पीछे दो प्रमुख वजहें हैं। पहली, फल-सब्जियों को सुरक्षित रखने के लिए कोल्ड स्टोरेज की कमी और दूसरी, मौसम में बदलाव के साथ बढ़ती गर्मी। रिपोर्ट के अनुसार, देश के कुल ताजे कृषि उत्पादन में से केवल 4% को ही कोल्ड स्टोरेज में रखने की सुविधा मिल पाती है। खाद्य पदार्थों की इस बर्बादी से बाजार में आपूर्ति प्रभावित होती है, जिसका सीधा असर आम लोगों की जेब और खाद्य महंगाई पर पड़ रहा है। देश में 30 से 40% फल और सब्जियां बाजार या ग्राहकों तक पहुंचने से पहले ही खराब हो जाती हैं। वहीं, उचित रखरखाव और परिवहन की कमी के कारण 5 से 6% अनाज भी रास्ते में बर्बाद हो जाता है। खाद्य महंगाई बढ़कर 8.20% होने का अनुमान रिपोर्ट में खाद्य पदार्थों की बर्बादी को महंगाई बढ़ने की एक अहम वजह बताया गया है। दिए गए अनुमानों के मुताबिक, अक्टूबर में खुदरा महंगाई दर सितंबर के 5.54% से बढ़कर 5.93% तक पहुंच सकती है। वहीं, खाद्य महंगाई सितंबर के 7.74% से बढ़कर अक्टूबर में 8.20% होने का अनुमान है। इसका सबसे ज्यादा असर आम परिवारों के रसोई बजट पर पड़ रहा है। कम बारिश के कारण सब्जियों और फसलों की आवक प्रभावित हुई है। वहीं, विदेशी बाजारों से आने वाला खाद्य तेल भी महंगा हुआ है। रिपोर्ट में बताया गया है कि 2026 की शुरुआत से प्याज के दाम करीब 108% तक बढ़ चुके हैं। दूध, मीट और अंडे की कीमतों में भी तेजी दर्ज की गई है। फसल सड़ने से बिगड़ रहा घर का बजट गर्मी और खराब मौसम के कारण फल-सब्जियां जल्दी खराब हो जाती हैं। रिपोर्ट में दिल्ली की आजादपुर मंडी के एक फल व्यापारी का उदाहरण दिया गया है। वर्ष 2024 में गर्मी के कारण आम सड़ने से उसे एक ही दिन में एक लाख रुपए से ज्यादा का नुकसान हुआ था। रिपोर्ट के अनुसार, देश की दो करोड़ हेक्टेयर से ज्यादा खेती की जमीन यानी करीब 14% कृषि क्षेत्र खराब मौसम से प्रभावित है, जबकि 45% हिस्से पर बाढ़ का खतरा बना रहता है। विशेषज्ञों का कहना है कि मौसम की मार का असर अब केवल खेतों तक सीमित नहीं है। इसका प्रभाव बाजार में खाद्य पदार्थों की उपलब्धता, बढ़ती कीमतों और आम आदमी के रसोई बजट पर भी पड़ रहा है। RBI बढ़ा सकता है ब्याज दरें खाने-पीने की चीजों की कीमतों में लगातार बढ़ोतरी से भारतीय रिजर्व बैंक की चिंता भी बढ़ी है। रिपोर्ट के मुताबिक, RBI ने वित्त वर्ष 2026-27 के लिए महंगाई का अनुमान बढ़ाकर 5.2% कर दिया है। आर्थिक विशेषज्ञों का मानना है कि महंगाई पर नियंत्रण के लिए रिजर्व बैंक दिसंबर में होने वाली मौद्रिक नीति बैठक में रेपो रेट 0.25% यानी 25 बेसिस पॉइंट बढ़ा सकता है। ऐसा होने पर होम लोन और कार लोन की EMI महंगी होने की आशंका है। फसल की बर्बादी किसान का नहीं, पूरे सिस्टम का नुकसान क्लाइमेट ट्रेंड्स की रिसर्च प्रमुख डॉ. पलक बालियान के मुताबिक, भारत में अनाज और फल-सब्जियों का खराब होना केवल खेती से जुड़ी समस्या नहीं है, बल्कि यह इंफ्रास्ट्रक्चर और सप्लाई चेन की कमजोरियों को भी दिखाता है। उनका कहना है कि करीब एक-तिहाई फल और सब्जियां ग्राहकों तक पहुंचने से पहले ही बर्बाद हो जाती हैं। गर्मी और बेमौसम बारिश जैसी परिस्थितियां इस नुकसान को और बढ़ा देती हैं। डेयरी किसानों को हर साल हजारों करोड़ का नुकसान बढ़ते तापमान का असर दूध उत्पादन पर भी पड़ रहा है। रिपोर्ट के अनुसार, गर्मी के कारण गायों और भैंसों की उत्पादन क्षमता प्रभावित होती है। इससे भारत में हर साल करीब 18 लाख टन दूध का उत्पादन कम हो जाता है और देश को लगभग 2,661 करोड़ रुपए का नुकसान उठाना पड़ता है। रिपोर्ट में दावा किया गया है कि देश के करीब 40% मवेशी खराब मौसम से सीधे प्रभावित हैं। इसका असर डेयरी किसानों की कमाई के साथ बाजार में दूध की उपलब्धता पर भी पड़ सकता है। क्लाइमेट चेंज से निपटने के लिए कोल्ड स्टोरेज जरूरी क्लाइमेट ट्रेंड्स ने सरकार को कोल्ड स्टोरेज और कोल्ड चेन नेटवर्क बढ़ाने का सुझाव दिया है, ताकि फल-सब्जियों को खराब होने से बचाया जा सके। इसके साथ ही मौसम की सटीक जानकारी देने वाले चेतावनी तंत्र विकसित करने, किसानों को सीधे बाजार से जोड़ने और मौसम की मार झेलने में सक्षम खेती को बढ़ावा देने की जरूरत बताई गई है। रिसर्च प्रमुख डॉ. पलक बालियान के अनुसार, केवल मौसम की जानकारी देना पर्याप्त नहीं है। अनाज और सब्जियों को सुरक्षित रखने के लिए स्टोरेज सुविधाओं, आधुनिक तकनीकों और बाजार तक सीधी पहुंच में निवेश करना जरूरी है। इससे मौसम के कारण होने वाले नुकसान का पूरा बोझ अकेले किसानों पर नहीं पड़ेगा।

रेवाड़ी में नीलगाय को बचाने के चक्कर में पेड़ से टकराई कार, दो युवकों की मौत; अग्निवीर बनने वाला था गजेंद्र

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‘तारक मेहता’ के अय्यर पहुंचे उज्जैन, पिता के साथ किए महाकाल दर्शन; बोले- विज्ञान से ऊपर भगवान की महत्ता

टीवी सीरियल ‘तारक मेहता का उल्टा चश्मा’ में अय्यर का किरदार निभाने वाले अभिनेता तनुज महाशब्दे शनिवार को उज्जैन पहुंचे। उन्होंने भगवान महाकालेश्वर के दर्शन किए और जलद्वार पर जलाभिषेक किया। इस दौरान उनके 80 वर्षीय पिता भी साथ मौजूद रहे। मंदिर समिति की ओर से उनका स्वागत किया गया। दर्शन के बाद तनुज ने मीडिया से बातचीत में कहा कि महाकाल के दर्शन से उन्हें उम्मीद से भी ज्यादा खुशी मिली। दर्शन का अनुभव इतना अच्छा रहा कि उसे शब्दों में बयां करना मुश्किल है। बोले- विज्ञान कितना भी आगे बढ़ जाए, भगवान सर्वोपरि तनुज महाशब्दे ने कहा कि विज्ञान चाहे कितनी भी तरक्की कर ले, भगवान की महत्ता हमेशा सबसे ऊपर रहेगी। धारावाहिक में वे एक साइंटिस्ट का किरदार निभाते हैं, लेकिन भगवान महाकाल से बढ़कर कोई नहीं है। उन्होंने कहा कि महाकाल सर्वोपरि हैं और उनका स्मरण करते हुए जीवन में आगे बढ़ना चाहिए। देश पर भी बाबा महाकाल की कृपा बनी हुई है। सिंहस्थ-2028 के लिए देशभर के श्रद्धालुओं को दिया न्योता सिंहस्थ-2028 की तैयारियों को लेकर तनुज ने कहा कि उज्जैन में निर्माण कार्य और आयोजन की तैयारियां चल रही हैं। उन्हें उम्मीद है कि सिंहस्थ का आयोजन अच्छा होगा। उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश सरकार और मुख्यमंत्री भी इस आयोजन में रुचि ले रहे हैं। तनुज ने देशभर के श्रद्धालुओं को उज्जैन आने और सिंहस्थ का लाभ लेने का न्योता दिया। बोले- माता-पिता की सेवा करें और उनका आशीर्वाद लें अपने प्रशंसकों और देशवासियों को संदेश देते हुए अभिनेता ने कहा कि सभी स्वस्थ रहें और अपने माता-पिता का ध्यान रखें। उनकी सेवा करें और उनका आशीर्वाद लेकर जीवन में आगे बढ़ें। उन्होंने लोगों से अवसर मिलने पर उज्जैन आकर बाबा महाकाल के दर्शन करने की अपील भी की।
Diwali 2026 Date: 8 या 9 नवंबर, कब मनाई जाएगी दिवाली? जानें लक्ष्मी पूजा का शुभ Muhurat और अमावस्या तिथि

Diwali 2026 Date: 8 या 9 नवंबर, कब मनाई जाएगी दिवाली? जानें लक्ष्मी पूजा का शुभ Muhurat और अमावस्या तिथि

दिवाली की तैयारियां शुरू हो चुकी हैं, लेकिन इस बार त्योहार की तारीख को लेकर कई लोगों के मन में सवाल है। कुछ लोग 8 नवंबर को दिवाली मनाने की बात कर रहे हैं, तो कुछ को लग रहा है कि यह पर्व 9 नवंबर को पड़ेगा। अगर आप भी इसी उलझन में हैं, तो जान लीजिए कि साल 2026 में दिवाली रविवार, 8 नवंबर को मनाई जाएगी। दिवाली कार्तिक महीने की अमावस्या तिथि को मनाई जाती है। इस दिन शाम को मां लक्ष्मी और भगवान गणेश की पूजा करने की परंपरा है। इस बार अमावस्या तिथि 8 नवंबर को शुरू होकर 9 नवंबर की दोपहर तक रहेगी। लेकिन प्रदोष काल में अमावस्या होने के कारण दिवाली का मुख्य पर्व 8 नवंबर को ही मनाया जाएगा। 8 या 9 नवंबर, कब है दिवाली 2026? हिंदू पंचांग के अनुसार, कार्तिक अमावस्या तिथि 8 नवंबर 2026 को सुबह 11 बजकर 27 मिनट पर शुरू होगी। इसका समापन 9 नवंबर को दोपहर 12 बजकर 31 मिनट पर होगा। दिवाली की पूजा के लिए प्रदोष काल का विशेष महत्व माना जाता है। इस बार 8 नवंबर की शाम को प्रदोष काल के दौरान अमावस्या तिथि रहेगी। इसी वजह से लक्ष्मी-गणेश पूजन और दीपावली का मुख्य उत्सव 8 नवंबर को मनाया जाएगा। Diwali 2026: लक्ष्मी पूजा का शुभ मुहूर्त दिवाली की शाम मां लक्ष्मी और भगवान गणेश की पूजा की जाती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दौरान पूजा करने से घर में सुख-समृद्धि और खुशहाली की कामना की जाती है। दिल्ली के लिए लक्ष्मी पूजा का शुभ मुहूर्त इस प्रकार है: ध्यान रखें कि पूजा का शुभ समय शहर के अनुसार बदल सकता है। इसलिए अपने क्षेत्र के पंचांग के अनुसार मुहूर्त की पुष्टि करना बेहतर रहेगा। दिवाली पर क्यों होती है मां लक्ष्मी और गणेश जी की पूजा? दिवाली पर मां लक्ष्मी को धन और समृद्धि की देवी तथा भगवान गणेश को बुद्धि और विघ्नहर्ता के रूप में पूजा जाता है। धार्मिक मान्यता है कि दोनों की एक साथ पूजा करने से घर में सुख, शांति और खुशहाली बनी रहती है। इसी दिन लोग अपने घरों की सफाई करते हैं, रंगोली बनाते हैं और दीपक जलाकर घर को रोशन करते हैं। व्यापारी वर्ग भी इस अवसर पर नए बही-खाते और कारोबार से जुड़ी पूजा करता है। दिवाली पर दीपक जलाने की क्या है परंपरा? पौराणिक मान्यता के अनुसार, भगवान श्रीराम 14 वर्ष का वनवास पूरा करके माता सीता और लक्ष्मण के साथ अयोध्या लौटे थे। उनके स्वागत में अयोध्यावासियों ने दीप जलाकर पूरे नगर को रोशन किया था। तभी से दिवाली पर दीप जलाने की परंपरा जुड़ी मानी जाती है। आज भी लोग इस दिन घर के मुख्य दरवाजे, आंगन और मंदिर में दीपक जलाते हैं। दीपों की रोशनी अंधकार पर प्रकाश और बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक मानी जाती है।
Trump-Putin-Xi Jinping Meeting: चीन में यूक्रेन पर फैसले को लेकर सतर्क जिनपिंग, 18-19 नवंबर की बैठक पर सस्पेंस

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रूस-यूक्रेन युद्ध को लेकर दुनिया की तीन बड़ी ताकतों के बीच संभावित बैठक चर्चा में है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प, रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग की मुलाकात 18-19 नवंबर को चीन के शेनझेन में होने वाले APEC शिखर सम्मेलन के दौरान हो सकती है। हालांकि, अभी इस बैठक को लेकर अंतिम फैसला नहीं हुआ है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, रूस इस बैठक के जरिए यूक्रेन युद्ध पर बातचीत को आगे बढ़ाना चाहता है। लेकिन चीन के सामने एक बड़ी कूटनीतिक चुनौती है। वह नहीं चाहता कि ऐसा संदेश जाए कि यूक्रेन की गैरमौजूदगी में दुनिया की बड़ी ताकतें उसके भविष्य और सीमाओं का फैसला कर रही हैं। चीन के सामने क्यों है कूटनीतिक चुनौती? अमेरिका और रूस के बीच संभावित बातचीत को लेकर चीन सावधानी बरत रहा है। विशेषज्ञों के मुताबिक, बीजिंग ऐसी बैठक की मेजबानी से मिलने वाली अंतरराष्ट्रीय पहचान तो चाहता है, लेकिन यूक्रेन युद्ध के विवाद में सीधे तौर पर उलझना नहीं चाहता। चीन के लिए यह भी अहम है कि बैठक को यूक्रेन के बंटवारे या उसकी जमीन के भविष्य पर तीन देशों के फैसले के तौर पर न देखा जाए। यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की भी पहले ऐसी किसी व्यवस्था पर चिंता जता चुके हैं, जिसमें यूक्रेन को ही बातचीत से बाहर रखा जाए। पुतिन यूक्रेन युद्ध पर करना चाहते हैं चर्चा रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की ओर से इस त्रिपक्षीय बैठक का प्रस्ताव सामने आया था। रिपोर्ट्स के अनुसार, मॉस्को चाहता है कि इस मुलाकात में यूक्रेन युद्ध को खत्म करने के संभावित रास्तों पर चर्चा हो। रूस की कोशिश है कि बातचीत में उसके हितों को जगह मिले। हालांकि, यूक्रेन की भागीदारी के बिना उसके भविष्य से जुड़े किसी समझौते को लेकर सवाल उठ सकते हैं। ट्रम्प की प्राथमिकता Nuclear Arms Control अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने भी चीन और रूस के नेताओं के साथ संभावित बैठक में दिलचस्पी दिखाई है। ट्रम्प के बयानों के मुताबिक, उनकी प्राथमिकता परमाणु हथियारों पर नियंत्रण और परमाणु निरस्त्रीकरण जैसे मुद्दों पर बातचीत करना है। वहीं, पुतिन यूक्रेन युद्ध को चर्चा का प्रमुख मुद्दा बनाना चाहते हैं। इस तरह तीनों नेताओं की प्राथमिकताएं अलग-अलग दिखाई दे रही हैं। यही वजह है कि बैठक का एजेंडा और उसका प्रारूप अभी स्पष्ट नहीं है। चीन ने बातचीत की पुष्टि की, लेकिन बैठक तय नहीं चीन के विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता माओ निंग ने कहा है कि चीन तीनों देशों के राष्ट्राध्यक्षों की संभावित बैठक को लेकर संबंधित पक्षों के संपर्क में है। हालांकि, उन्होंने बैठक की तारीख या अंतिम कार्यक्रम की पुष्टि नहीं की। क्रेमलिन की ओर से भी बैठक की तैयारियों पर बातचीत की जानकारी दी गई है। लेकिन अभी यह तय नहीं है कि तीनों नेता एक साथ बैठेंगे या नहीं और अगर बैठक होती है तो उसमें किन मुद्दों पर चर्चा होगी। 18-19 नवंबर पर दुनिया की नजर शेनझेन में 18 और 19 नवंबर को होने वाला APEC सम्मेलन इस संभावित मुलाकात के लिए अहम मौका हो सकता है। अगर ट्रम्प, पुतिन और जिनपिंग एक साथ बैठक करते हैं, तो यह अंतरराष्ट्रीय कूटनीति की बड़ी घटना होगी।

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