डोनाल्ड ट्रम्प ने दिसंबर 2025 में अपना नया वीज़ा प्रोग्राम “Trump Gold Card Visa” लॉन्च किया है। यह उन लोगों के लिए है जो अमेरिका में fast-track permanent residency चाहते हैं और जिनके पास निवेश करने की क्षमता है।
इस आर्टिकल में हम जानेंगे कि यह प्रोग्राम क्या है, लागत कितनी है, कैसे अप्लाई करें और इसके फायदे व नकारात्मक पहलू।
Trump Gold Card Visa क्या है?
- यह वीज़ा प्रोग्राम अमेरिका में permanent residency का मौका देता है।
- व्यक्तिगत उम्मीदवारों के लिए US$ 1 मिलियन का “financial gift” देना होगा।
- कंपनियों द्वारा कर्मचारियों के लिए स्पॉन्सर करने पर US$ 2 मिलियन देना होगा।
- एप्लीकेशन फीस US$ 15,000 है जो non-refundable है।
- मंजूरी मिलने के बाद वीज़ा EB-1 या EB-2 श्रेणी में जारी होता है।
खास बात: अब अमेरिका में residency पाने के लिए नौकरी या बिज़नेस इन्वेस्टमेंट की ज़रूरत नहीं है, सिर्फ निवेश करना ही काफी है।
आवेदन (Application) कैसे करें?
- Official portal पर जाएँ और relevant category चुनें (individual/corporate-sponsored)।
- Personal या corporate details भरें।
- Non-refundable US$ 15,000 प्रोसेसिंग फीस जमा करें।
- U.S. authorities द्वारा background check और vetting प्रक्रिया पूरी करें।
- Contribution (US$ 1 मिलियन या 2 मिलियन) जमा करने के बाद residency फाइनल होती है।
- वीज़ा interview और अन्य formalities पूरी करें।
Trump Gold Card Visa के फायदे
- Fast-track residency: पारंपरिक green card की तुलना में तेज़ प्रक्रिया।
- Family inclusion: spouse और 21 साल से छोटे बच्चों के लिए भी वीज़ा।
- Global mobility: अमेरिका में रहने और काम करने की सुविधा।
- No job creation requirement: EB-5 की तरह जॉब क्रिएशन की बाध्यता नहीं।
ध्यान देने योग्य बातें
- प्रोग्राम केवल wealthy individuals के लिए है। आम लोगों के लिए यह विकल्प बहुत महंगा है।
- critics का कहना है कि यह “immigration by money” की नीति को बढ़ावा देता है।
- Platinum Card के higher tier में US$ 5 मिलियन की राशि देकर 270 दिन अमेरिका में रहने का विकल्प मिलता है।
- अन्य वीज़ा से जुड़े खर्च (medical exams, taxes, fees) अलग से लागू होंगे।
भारतियों के लिए संभावनाएँ
- US$ 1 मिलियन ≈ ₹ 9 करोड़, यानी केवल ultra high-net-worth families के लिए feasible।
- Corporate sponsorship विकल्प के जरिए भारतीय कंपनियाँ अपने overseas employees को भेज सकती हैं।
- सामान्य skilled workers या students के लिए यह प्रोग्राम realistic नहीं है।
हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
