ज्योतिष पीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने संभावित गिरफ्तारी की आशंका जताते हुए हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की है। उनका कहना है कि प्रयागराज में तैनात आईपीएस अधिकारी अजय पाल शर्मा उनके खिलाफ साजिश रच रहे हैं और प्रशासनिक तंत्र उनके विरुद्ध सक्रिय है। इस घटनाक्रम ने धार्मिक और राजनीतिक हलकों में नई चर्चा छेड़ दी है।
क्या है पूरा मामला?
शंकराचार्य का आरोप है कि उन्हें झूठे मामलों में फंसाने की कोशिश की जा रही है। उनका कहना है कि हाल के दिनों में जिस तरह की प्रशासनिक गतिविधियां हुई हैं, उससे उन्हें अपनी गिरफ्तारी का अंदेशा है। उन्होंने अदालत से गुहार लगाई है कि बिना निष्पक्ष जांच के कोई कठोर कदम न उठाया जाए।
करीबी सूत्रों के मुताबिक, शंकराचार्य ने अपनी याचिका में कहा है कि उन्हें व्यक्तिगत और संस्थागत तौर पर निशाना बनाया जा रहा है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि “सारा सिस्टम” उनके खिलाफ खड़ा नजर आ रहा है।
हाईकोर्ट से क्या मांग?
याचिका में मुख्य रूप से तीन मांगें रखी गई हैं:
- संभावित गिरफ्तारी पर रोक (Stay) लगाई जाए।
- मामले की निष्पक्ष और स्वतंत्र जांच कराई जाए।
- पुलिस और प्रशासन को मनमानी कार्रवाई से रोका जाए।
कानूनी जानकारों का कहना है कि यदि अदालत को प्रथम दृष्टया मामला गंभीर लगा, तो अंतरिम राहत मिल सकती है। हालांकि अंतिम फैसला सुनवाई के बाद ही होगा।
क्यों बढ़ी चर्चा?
यह मामला केवल कानूनी विवाद तक सीमित नहीं है। एक प्रमुख धार्मिक पद पर आसीन व्यक्ति द्वारा खुले तौर पर गिरफ्तारी की आशंका जताना कई सवाल खड़े करता है। समर्थकों का कहना है कि यह धार्मिक आवाज को दबाने की कोशिश है, जबकि प्रशासन की ओर से अभी तक औपचारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
आगे क्या?
अब सभी की नजर हाईकोर्ट की सुनवाई पर टिकी है। अदालत प्रशासन से जवाब तलब कर सकती है और यह तय करेगी कि शंकराचार्य को तत्काल राहत मिलेगी या नहीं।
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