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Assam चुनाव: BJP की पहली लिस्ट जारी, CM हिमंता जालुकबारी से फिर मैदान में

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Assam विधानसभा चुनाव को लेकर सियासी हलचल तेज हो गई है। Bharatiya Janata Party (BJP) ने अपनी पहली उम्मीदवारों की सूची जारी कर दी है। इस लिस्ट में कई बड़े नाम शामिल हैं, जिनमें सबसे चर्चित नाम है मुख्यमंत्री Himanta Biswa Sarma का।

सीएम हिमंता बिस्वा सरमा एक बार फिर जालुकबारी सीट से चुनाव लड़ेंगे। खास बात यह है कि वह यहां से लगातार छठी बार मैदान में उतर रहे हैं, जो उनके मजबूत जनाधार को दिखाता है। जालुकबारी सीट लंबे समय से उनका गढ़ मानी जाती है।

वहीं, इस बार बीजेपी ने एक नया दांव भी चला है। हाल ही में कांग्रेस छोड़कर बीजेपी में शामिल हुए सांसद Ripun Bora Bordoloi (बोरदोलोई) को भी पार्टी ने टिकट दिया है। यह फैसला इस बात का संकेत है कि बीजेपी नए चेहरों को मौका देकर अपनी पकड़ और मजबूत करना चाहती है।

असम की राजनीति में इस लिस्ट के बाद मुकाबला और दिलचस्प हो गया है। अब सभी की नजरें दूसरी पार्टियों, खासकर Indian National Congress की रणनीति पर टिकी हैं।

चुनाव नजदीक आते ही राजनीतिक दल पूरी ताकत झोंक रहे हैं। जनता भी इस बार बदलाव और विकास के मुद्दों पर फैसला लेने के मूड में नजर आ रही है।

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Neha Pandey

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Bihar

Bihar Protest बंद के बीच सीवान में हिंसा, Indore Alert; Prayagraj में 1000 छात्रों का प्रदर्शन

Bihar बंद के दौरान शनिवार को कई राज्यों में विरोध-प्रदर्शन देखने को मिले। बिहार में कुछ जगहों पर प्रदर्शन हिंसक हो गया, जहां पथराव और फायरिंग की घटनाएं सामने आईं। सीवान में हालात संभालने पहुंचे पुलिस अधीक्षक (SP) भी घायल हो गए। वहीं मध्य प्रदेश के इंदौर में प्रशासन ने सुरक्षा के लिए ड्रोन से निगरानी की, जबकि प्रयागराज में तेज बारिश के बावजूद करीब 1,000 छात्र अपनी मांगों को लेकर सड़कों पर डटे रहे। पूरे दिन अलग-अलग राज्यों से प्रदर्शन और सुरक्षा व्यवस्था की तस्वीरें सामने आती रहीं। कई जिलों में बढ़ा तनाव पटना, सीवान और कई अन्य जिलों में देखने को मिला। प्रदर्शनकारियों ने कई स्थानों पर सड़क जाम कर सरकार के खिलाफ नारेबाजी की। कुछ इलाकों में हालात अचानक बिगड़ गए और पुलिस व प्रदर्शनकारियों के बीच झड़प शुरू हो गई। प्रशासन ने स्थिति को नियंत्रित करने के लिए अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया और संवेदनशील क्षेत्रों में सुरक्षा बढ़ा दी। सीवान में पथराव और फायरिंग, SP हुए घायल सीवान जिले में प्रदर्शन सबसे अधिक तनावपूर्ण रहा। प्रदर्शन के दौरान पथराव और फायरिंग की घटनाएं हुईं। कानून-व्यवस्था संभालने पहुंचे जिले के पुलिस अधीक्षक (SP) इस दौरान घायल हो गए। उन्हें तुरंत उपचार के लिए अस्पताल भेजा गया। घटना के बाद इलाके में पुलिस बल बढ़ा दिया गया और उपद्रवियों की पहचान कर कार्रवाई शुरू कर दी गई है। Indore में Drone Surveillance से रखी गई नजर बिहार बंद और देशभर में हो रहे प्रदर्शनों को देखते हुए इंदौर प्रशासन पूरी तरह सतर्क नजर आया। शहर के संवेदनशील इलाकों, प्रमुख बाजारों और चौराहों पर ड्रोन कैमरों से निगरानी की गई। पुलिस लगातार गश्त करती रही ताकि किसी भी अप्रिय घटना को समय रहते रोका जा सके। Prayagraj में बारिश भी नहीं रोक सकी छात्रों का प्रदर्शन उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में लगातार बारिश के बावजूद करीब 1,000 छात्र अपनी मांगों को लेकर सड़कों पर उतर आए। बारिश के बीच छात्रों ने शांतिपूर्ण तरीके से प्रदर्शन किया और प्रशासन तक अपनी आवाज पहुंचाने की कोशिश की। पुलिस भी मौके पर मौजूद रही ताकि यातायात और कानून-व्यवस्था प्रभावित न हो। कई राज्यों में प्रशासन हाई अलर्ट पर बिहार, मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश समेत कई राज्यों में प्रशासन ने सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी। संवेदनशील इलाकों में अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया, जबकि सोशल मीडिया पर भी नजर रखी गई ताकि किसी भी तरह की अफवाह फैलने से रोका जा सके। अधिकारियों ने लोगों से शांति बनाए रखने और कानून का पालन करने की अपील की है। देशभर में विरोध-प्रदर्शनों पर प्रशासन की नजर शनिवार को हुए इन प्रदर्शनों ने एक बार फिर यह दिखाया कि किसी भी आंदोलन के दौरान सुरक्षा व्यवस्था कितनी महत्वपूर्ण होती है। प्रशासन का कहना है कि हालात पर लगातार नजर रखी जा रही है और हिंसा फैलाने या सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने वालों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
Mohan Bhagwat

RSS Chief Mohan Bhagwat बोले- Youth को समझिए, सिर्फ आदेश देने से नहीं बनेगी बात

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के सरसंघचालक मोहन भागवत (Mohan Bhagwat) ने नई पीढ़ी, नेतृत्व और समाज की बदलती सोच को लेकर बड़ा संदेश दिया है। उन्होंने कहा कि आज के समय में युवाओं को सिर्फ आदेश देने से बात नहीं बनेगी। अगर समाज को मजबूत बनाना है तो नई पीढ़ी के साथ संवाद करना होगा, उनकी बात सुननी होगी और उन्हें समझना होगा। ‘युवाओं को समझना होगा, सिर्फ निर्देश देना काफी नहीं’ अपने संबोधन में मोहन भागवत ने कहा कि समय बदल रहा है और उसके साथ लोगों की सोच भी बदल रही है। ऐसे में पुरानी कार्यशैली से आगे बढ़ने के बजाय युवाओं के साथ भरोसे का रिश्ता बनाना जरूरी है। उन्होंने कहा कि नई पीढ़ी सवाल पूछती है, अपनी राय रखती है और उसे सम्मान के साथ सुना जाना चाहिए। यही किसी भी मजबूत समाज और संगठन की पहचान होती है। ‘शक्ति के बल पर सबके मालिक नहीं बन सकते’ उन्होंने शक्ति और अहंकार पर भी स्पष्ट टिप्पणी की। भागवत ने कहा, “यह नहीं हो सकता कि हम मनमानी करें और केवल शक्ति के बल पर सबके मालिक बन जाएं।” उनके अनुसार किसी भी व्यवस्था की सफलता दूसरों पर नियंत्रण स्थापित करने में नहीं, बल्कि सभी को साथ लेकर चलने में है। नेतृत्व का मतलब आदेश देना नहीं, लोगों को साथ लेकर चलना RSS प्रमुख ने कहा कि नेतृत्व का अर्थ केवल निर्देश देना नहीं होता। एक अच्छा नेतृत्व वही है जो लोगों की बात सुने, उन्हें साथ लेकर चले और हर वर्ग को आगे बढ़ने का अवसर दे। उन्होंने युवाओं को देश का भविष्य बताते हुए कहा कि उनके विचारों और ऊर्जा का सही उपयोग तभी होगा, जब उन्हें निर्णय प्रक्रिया में भी उचित स्थान मिलेगा। मतभेद हो सकते हैं, लेकिन संवाद नहीं रुकना चाहिए भागवत ने समाज में बढ़ती वैचारिक असहमतियों का जिक्र करते हुए कहा कि मतभेद होना स्वाभाविक है, लेकिन संवाद बंद नहीं होना चाहिए। जब बातचीत रुक जाती है, तब गलतफहमियां बढ़ती हैं और समाज में दूरी पैदा होती है। इसलिए हर पीढ़ी और हर वर्ग के बीच निरंतर संवाद बनाए रखना समय की सबसे बड़ी जरूरत है। समाज और परिवार की मजबूती का आधार है विश्वास उन्होंने यह भी कहा कि परिवार, समाज और संस्थाओं की मजबूती आपसी विश्वास, सहयोग और सम्मान से आती है। यदि नई पीढ़ी को केवल निर्देश दिए जाएंगे और उनकी बात नहीं सुनी जाएगी, तो उनके साथ जुड़ाव कमजोर पड़ सकता है। इसलिए संवाद और सहभागिता ही आगे बढ़ने का सबसे प्रभावी रास्ता है। क्यों अहम है मोहन भागवत का यह बयान? मोहन भागवत का यह बयान ऐसे समय आया है, जब देश में युवाओं की भूमिका, नेतृत्व की शैली और सामाजिक समरसता पर लगातार चर्चा हो रही है। उनका संदेश केवल युवाओं के लिए नहीं, बल्कि समाज के हर उस व्यक्ति के लिए है जो आने वाली पीढ़ी के साथ बेहतर संबंध और मजबूत भविष्य बनाना चाहता है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
Trump

Trump Viral Statement: डिनर के दौरान कही एक बात से मची हलचल, बाद में दी सफाई- ‘सिर्फ मजाक था’

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) एक बार फिर अपने बयान को लेकर सुर्खियों में हैं। एक निजी डिनर कार्यक्रम के दौरान उन्होंने ऐसी टिप्पणी कर दी, जिसे सुनकर वहां मौजूद कई लोग हैरान रह गए। कुछ क्षणों के लिए माहौल गंभीर हो गया और कार्यक्रम में मौजूद लोगों के बीच हलचल मच गई। हालांकि, जैसे ही ट्रंप को लगा कि उनकी बात को गंभीरता से लिया जा रहा है, उन्होंने तुरंत मुस्कुराते हुए कहा, “मैं तो मजाक कर रहा था।” इसके बाद माहौल सामान्य जरूर हुआ, लेकिन उनका यह बयान सोशल मीडिया और राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बन गया। डिनर में क्या हुआ? जानकारी के अनुसार, ट्रंप मेहमानों के साथ अनौपचारिक बातचीत कर रहे थे। इसी दौरान उन्होंने एक ऐसी बात कही, जिसे सुनकर कई लोग चौंक गए। कुछ लोगों ने इसे गंभीर टिप्पणी समझा, जबकि कुछ लोगों ने इसे ट्रंप की सामान्य शैली का हिस्सा माना। कार्यक्रम में मौजूद लोगों के चेहरे पर कुछ पल के लिए हैरानी साफ दिखाई दी। बाद में ट्रंप ने स्पष्ट किया कि उनका किसी को असहज करने का इरादा नहीं था और पूरी बात मजाक के तौर पर कही गई थी। सोशल मीडिया पर शुरू हुई बहस घटना के बाद ट्रंप के बयान से जुड़े वीडियो और क्लिप्स सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल होने लगे। कई यूजर्स ने इसे ट्रंप का अलग अंदाज बताया, जबकि कुछ लोगों ने कहा कि सार्वजनिक मंचों पर ऐसे बयान गलत संदेश दे सकते हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि ट्रंप की हर सार्वजनिक टिप्पणी पर लोगों की नजर रहती है। यही वजह है कि उनकी छोटी-सी बात भी कुछ ही मिनटों में बड़ी खबर बन जाती है। पहले भी कई बार बयानों को लेकर रहे हैं चर्चा में यह पहला मौका नहीं है जब डोनाल्ड ट्रंप अपने बयान की वजह से सुर्खियों में आए हों। अपने राजनीतिक जीवन के दौरान वह कई बार ऐसे बयान दे चुके हैं, जिन पर बाद में सफाई भी देनी पड़ी। उनके समर्थक इसे उनकी बेबाक शैली बताते हैं, जबकि आलोचक इसे विवाद पैदा करने वाला अंदाज मानते हैं। क्या पड़ सकता है असर? अमेरिका में राजनीतिक माहौल पहले से ही काफी संवेदनशील बना हुआ है। ऐसे समय में किसी भी बड़े नेता का बयान तेजी से चर्चा का विषय बन जाता है। ट्रंप की इस टिप्पणी के बाद भी अलग-अलग राजनीतिक प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। हालांकि, ट्रंप की ओर से इसे मजाक बताया जा चुका है, लेकिन इस बयान को लेकर बहस अभी भी जारी है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
Rahul Gandhi

Rahul Gandhi का सरकार पर हमला, बोले- Metro और Internet बंद, लेकिन Paper Leak नहीं रुक

देशभर में पेपर लीक को लेकर जारी विरोध-प्रदर्शन के बीच कांग्रेस सांसद राहुल गांधी (Rahul Gandhi) ने केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला है। मीडिया से बातचीत के दौरान उन्होंने कहा कि सरकार ने प्रदर्शन रोकने के लिए मेट्रो सेवाओं से लेकर इंटरनेट, सड़कें, बाजार और खाने-पीने की सुविधाओं तक पर पाबंदियां लगा दीं, लेकिन जिस मुद्दे पर छात्र सड़क पर उतरने को मजबूर हैं, यानी पेपर लीक, उसे रोकने में अब तक सफलता नहीं मिली। राहुल गांधी ने कहा कि देश का युवा केवल निष्पक्ष परीक्षा और पारदर्शी भर्ती प्रक्रिया चाहता है। उनके मुताबिक, अगर सरकार विरोध को नियंत्रित करने के बजाय परीक्षा व्यवस्था को मजबूत करने पर ध्यान देती, तो बार-बार सामने आने वाले पेपर लीक के मामलों पर प्रभावी रोक लगाई जा सकती थी। ‘युवाओं की आवाज दबाने से समस्या खत्म नहीं होगी’ मीडिया से बातचीत में राहुल गांधी ने कहा कि छात्रों की मांग किसी राजनीतिक लाभ के लिए नहीं, बल्कि अपने भविष्य की सुरक्षा के लिए है। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रदर्शन के दौरान आम लोगों को कई तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ा। मेट्रो सेवाएं प्रभावित हुईं, कई इलाकों में इंटरनेट बंद किया गया, रास्तों पर आवाजाही सीमित रही और बाजारों पर भी इसका असर देखने को मिला। उन्होंने कहा कि इन सभी कदमों के बावजूद सरकार उस मूल समस्या पर नियंत्रण नहीं कर सकी, जिसके खिलाफ छात्र आंदोलन कर रहे हैं। पेपर लीक पर सख्त कार्रवाई की मांग कांग्रेस नेता ने मांग की कि सभी पेपर लीक मामलों की निष्पक्ष जांच कराई जाए और इसमें शामिल लोगों के खिलाफ बिना किसी भेदभाव के सख्त कानूनी कार्रवाई हो। उनका कहना था कि केवल आश्वासन देने से छात्रों का भरोसा वापस नहीं आएगा। सरकार को ऐसी व्यवस्था बनानी होगी, जिससे भविष्य में किसी भी परीक्षा की गोपनीयता से समझौता न हो। देशभर में जारी है विरोध पेपर लीक के मुद्दे पर कई राज्यों में छात्र संगठनों और विभिन्न सामाजिक संगठनों का विरोध जारी है। विपक्ष लगातार सरकार से जवाब मांग रहा है, जबकि सरकार का कहना है कि मामले की जांच और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की जा रही है। हालांकि, इस पूरे विवाद ने एक बार फिर परीक्षा प्रणाली की पारदर्शिता और युवाओं के भविष्य को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर राजनीतिक गतिविधियां और तेज होने की संभावना है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
Tiranga Yatra

NEET Exam Controversy: पेपर लीक मामले पर Maharashtra में Tiranga Yatra

देशभर में NEET Paper Leak विवाद को लेकर छात्रों का आक्रोश थमने का नाम नहीं ले रहा है। मेडिकल प्रवेश परीक्षा की निष्पक्षता पर उठे सवालों के बीच अब यह मुद्दा राजनीतिक रूप भी ले चुका है। दिल्ली में चल रहे विरोध प्रदर्शनों के बीच महाराष्ट्र में भी आंदोलन तेज हो गया है। इसी कड़ी में शिवसेना (UBT) प्रमुख उद्धव ठाकरे और मनसे प्रमुख राज ठाकरे ने छात्रों के समर्थन में मुंबई में संयुक्त Tiranga Yatra निकालने का फैसला किया है। दोनों नेताओं का कहना है कि यह यात्रा किसी राजनीतिक दल के लिए नहीं, बल्कि देश के छात्रों के भविष्य और शिक्षा व्यवस्था में भरोसा कायम रखने के लिए निकाली जा रही है। छात्रों के समर्थन में पहली बार साथ आए उद्धव और राज ठाकरे महाराष्ट्र की राजनीति में लंबे समय बाद ऐसा मौका देखने को मिलेगा जब उद्धव ठाकरे और राज ठाकरे एक मंच पर नजर आएंगे। दोनों नेता 26 जुलाई को मुंबई के शिवाजी पार्क से सिद्धिविनायक मंदिर तक तिरंगा यात्रा का नेतृत्व करेंगे। आयोजकों के मुताबिक यात्रा में किसी भी पार्टी का झंडा नहीं होगा, केवल तिरंगा लेकर लोग शामिल होंगे। नेताओं का कहना है कि लाखों छात्रों ने कड़ी मेहनत के बाद परीक्षा दी, लेकिन कथित पेपर लीक की खबरों ने उनके विश्वास को झटका दिया है। ऐसे में छात्रों को न्याय दिलाना सरकार की जिम्मेदारी है। NEET Paper Leak को लेकर बढ़ा विरोध कथित पेपर लीक मामले के बाद कई राज्यों में छात्र लगातार प्रदर्शन कर रहे हैं। उनकी मांग है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच हो, दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए परीक्षा प्रणाली को और पारदर्शी बनाया जाए। मुंबई में भी बड़ी संख्या में छात्र और अभिभावक सड़कों पर उतरे। प्रदर्शन के दौरान छात्रों ने परीक्षा प्रणाली में सुधार और जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई की मांग उठाई। कई संगठनों ने भी इस आंदोलन को समर्थन दिया है। विपक्ष ने सरकार पर साधा निशाना विपक्षी दलों का आरोप है कि पेपर लीक जैसी घटनाओं ने देश की शिक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। कांग्रेस समेत कई विपक्षी नेताओं ने छात्रों के आंदोलन का समर्थन किया है। वहीं उद्धव ठाकरे ने कहा कि यह किसी राजनीतिक लाभ का आंदोलन नहीं, बल्कि युवाओं के भविष्य की लड़ाई है। दूसरी ओर भाजपा ने विपक्ष पर इस मुद्दे का राजनीतिक फायदा उठाने का आरोप लगाया है। सरकार का कहना है कि मामले की जांच जारी है और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की जा रही है। छात्रों के भविष्य को लेकर बढ़ी चिंता NEET जैसी राष्ट्रीय परीक्षा लाखों छात्रों के करियर का आधार होती है। ऐसे में पेपर लीक के आरोपों ने छात्रों और अभिभावकों की चिंता बढ़ा दी है। शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता और सुरक्षा को और मजबूत करना समय की जरूरत है, ताकि मेहनत करने वाले छात्रों का भरोसा कायम रह सके। मुंबई में होने वाली तिरंगा यात्रा को सिर्फ एक राजनीतिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि छात्रों के समर्थन में उठाई गई बड़ी आवाज के रूप में देखा जा रहा है। अब सभी की नजर सरकार की अगली कार्रवाई और जांच के नतीजों पर टिकी हुई है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!

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